एमबीएम न्यूज नेटवर्क, मंडी।। भूस्खलन के बाद त्रासदी झेल रहे कोटरोपी गांव पर एक बार फिर खतरा मंडरा रहा है। पहाड़ी पर एक बहुत बड़ी दरार नजर आई है। प्रशासन ने पहले ही सावधानी बरतते हुए पांच गांवों को खाली करवा दिया है। पानी का रिसाव भी तेज हो गया है जिससे मुश्किलें बढ़ गई हैं।
जिला प्रशासन ने कोटरोपी गांव के साथ लगते पांच अन्य गांवों में अलर्ट जारी करते हुए यहां के लोगों को दूसरे स्थानों पर शिफ्ट कर दिया है। प्रशासन ने सराजबागला, जगेहड़, बडवाहण, रोपा और सास्ती गांवों में अलर्ट जारी किया है। यह अलर्ट एहतियात के तौर पर जारी किया गया है क्योंकि पहाड़ी पर एक बहुत बड़ी दरार की जानकारी मिली है।
इस बड़ी दरार से पहाड़ी का एक बहुत बड़ा हिस्सा फिर से दरकने का खतरा बन गया है। यही नहीं पहाड़ी से जो मलबा गिरा है उस कारण यहां से बहने वाला नाला ब्लॉक हो गया है। इस कारण पानी छोटे-छोटे जलाशयों के रूप में रुक गया है और अब यह पानी रिसाव होकर पहले से गिरे हुए मलबे को आगे बहा कर ले जा रहा है।
मंडी के डीसी संदीप कदम ने बताया कि एहतियात के तौर पर पांच गांवों को खाली करवा दिया गया है और उनकी दूसरे स्थानों पर वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है। प्रभावितों के घरों पर नोटिस भी चिपका दिए गए हैं और उन्हें कम्बल और तिरपाल आदि देकर सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है।
मंडी जिले के पद्धर के पास कोटरोपी में बहुत बड़े भूस्खलन से भारी नुकसान हुआ है।
जिन पांच गांवों को प्रशासन ने खाली करवाया है उन गांवों के लोगों की जिंदगी में अचानक ही परेशानियों का अम्बार खड़ा हो गया है। जिंदगी भर की कमाई से बनाए आशियानों को छोड़कर जाना लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है। लोग जैसे-तैसे यहां पर दिन बीता रहे हैं और रात गुजारने के लिए प्रशासन के बताए ठिकाने पर जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि खतरे के साए में रहना उनके लिए दुश्वार होता जा रहा है और कभी बच्चों को रिश्तेदारों के घरों में भेजना पड़ रहा है तो कभी खतरे के साए में रखना पड़ रहा है। ग्रामीणों के जो पशु हैं उन्हें छोड़ना पड़ रहा है। इन्होंने प्रशासन और सरकार से इस समस्या के स्थायी समाधान की गुहार लगाई है।
पहाड़ी पर जिस दरार और मलबा खिसकने की संभावना को लेकर प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है, यदि दुर्भाग्यवश यह घटना घट जाती है तो फिर पहले से भी अधिक नुकसान होना स्वभाविक है। सभी यही उम्मीद और दुआ कर रहे हैं कि जैसे-तैसे यह प्राकृतिक आपदा थम जाए और जीवन सामान्य हो जाए।
(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)
नगरोटा बगवांं।। भले ही हिमाचल प्रदेश प्रभारी सुशील कुमार शिंदे ने गुरुवार को धर्मशाला मे कहा कि पार्टी एकजुट है और इसमें कोई मतभेद नहीं, मगर अगले ही दिन उन्हीं के सामने उनके बयान की धज्जियां उड़ा दी गईं। वैसे यह कोई अनोखी घटना नहीं थी क्योंकि राजनीति के जानकार मान ही रहे थे कि धर्मशाला के चंद किलोमीटर दूर शिंदे का परिवहन मंत्री जी.एस. बाली के चुनाव क्षेत्र में रैली करने का इरादा क्या है। इस कार्यक्रम में परिवहन मंत्री जी.एस. बाली और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने खुलकर अपनी बात कही, वह भी बिना नाम लिए। मगर यह समझना मुश्किल नहीं था कि उनका इशारा किसकी तरफ था।
‘राजा से रंक बनते देर नहीं लगती’
कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन में जी.एस. बाली ने कहा कि मेरे खिलाफ साजिश हुई मगर जुर्म रोकने के लिए मैं हमेशा खड़ा हो जाता हूं। उन्होंने कहा कि मैंने जो भी लड़ाई लड़ी है, उसमें हारा नहीं हूं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि जिनके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों के घर पर पत्थर नहीं फेंकते। राजा से रंक और रंक से राजा बनते देर नहीं लगती।
नगरोटा बगवां
‘निजी संबंधों को लेकर मुझपर हमले किए गए’
परिवहन मंत्री ने बीजेपी के नेताओं से संबंधों पर एतराज जताने वालों पर हमलावर होते हुए कहा कि मेरे निजी संबंध किसी के भी साथ हो सकते हैं लेकिन पार्टी के प्रति मेरी प्रतिपद्धता पर उंगली नहीं उठाई जा सकती। दरअसल एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने नाम लिए बिना कहा था कि कुछ लोग कांग्रेस में रहकर बीजेपी को फायदा पहुंचाने में लगे हैं, बीजेपी के ऐसे एजेंटों को जनता को घर बिठाना चाहिए। बाली ने कहा कि मुझपर आरोप लगते हैं कि मैं सिर्फ कांगड़ा और अपने चुनाव क्षेत्र पर फोकस करता हूं, मगर सच यह है कि मैंने पूरे प्रदेश में और यहां तक कि मुख्यमंत्री के यहां भी विकास कार्य करवाए हैं। इसके बाद उन्होंने अपने मंत्री रहते करवाए गए कार्यों का ब्योरा दिया। (परिवहन मंत्री का भाषण, समाचार फर्स्ट से साभार)
‘सुक्खू को लेकर सीएम पर साशा निशाना’ बाली ने मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुक्खू के प्रति लगातार दिए गए बयानों को लेकर भी आपत्ति जताई। शिंदे के सामने उन्होंने कहा- पार्टी में अध्यक्ष की कुर्सी की कद्र होनी चाहिए। क्या हम सही दिशा में जा रहे हैं? हम पार्टी अध्यक्ष के निर्देशों पर काम करेंगे।
कार्यकर्ता सम्मेलन में आए लोग
सुक्खू ने जमकर की बाली की तारीफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हम कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं। सरकार ने कई जनहित के काम किए हैं और संगठन उन्हें जनता तक पहुंचाएगा। उन्होंने बाली को भविष्य का नेता बताकर तारीफ की। उन्होंने बाकी क्रांतिकारी और युवा सोच वाला नेता करार दिया, जिनका प्रदेश और खासकर कांगड़ा की राजनीति में बड़ा स्थान है। उन्होंने कहा कि भविष्य की राजनीति में बाली की अहम भूमिका होगी। उन्होंने बाली से आगे बढ़ने को भी कहा।
वीरभद्र को पूर्व विधायक ने बताया काली भेड़
जसवां के पूर्व विधायक और प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष निखिल राजौर ने शिंदे औऱ अन्य नेताओं के सामने मुख्यमंत्री वीरभद्र को काली भेड़ कह दिया। उन्होंने कहा कि 2012 चुनाव में मुझे एक निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर वीरभद्र ने समर्थन देने की बात कही थी। इसका मतलब तो यही हुआ कि वीरभद्र खुद पार्टी में एक काली भेड़ हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पार्टी के कुछ नेताओं को काली भेड़ और काला कौआ कहके इशारा करते हैं और कहते हैं कि ये लोग संगठन में रहकर बाहरी लोगों को फायदा पहुंचाने में लगे रहते हैं।
शिमला।। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कोटखाई के चर्चित गुड़िया गैंगरेप ऐंड मर्डर केस में सीबीआई को दो हफ्ते में जांच पूरी करने के आदेश जारी किए हैं। सीबीआई ने इस मामले को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए हाई कोर्टसे चार हफ्तों का वक्त मांगा था मगर अदालत ने फटकार लगाते हुए इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने इस मामले में डीजीपी समेत नौ पुलिस अधिकारियों को भी प्रतिवादी बनाया है। इन्हें शुक्रवार को कोर्ट में भी तलब किया है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को भी होगी। सीबीआई ने अदालत से पहला आग्रह किया कि रिपोर्ट को सार्वजनिक न किया जाए। अदालत ने इसे मान लिया।
कोर्ट ने डीजीपी सोमेश गोयल समेत तत्कालीन एसआईटी प्रमुख आईजी जहूर जैदी, एसआईटी सदस्य एएसपी भजन देव नेगी, डीएसपी रतन सिंह नेगी, डीएसपी ठियोग मनोज जोशी, सब इंस्पेक्टर धर्मसेन नेगी, एएसआई राजीव कुमार, पुलिस स्टेशन कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंद्र सिंह और एएसआई दीप चंद को प्रतिवादी बनाने के आदेश जारी किए हैं।
इन प्रतिवादियों को शुक्रवार अदालत में हाजिर रहने के आदेश हुए हैं। अदालत ने कहा उक्त अधिकारी और एसआईटी सदस्यों को छह जुलाई से 23 जुलाई तक मामले की जांच से जुड़ी क्या क्या जानकारी मालूम है, उन्हें प्रतिवादी बनाए जाने से यह पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगा।
एमबीएम न्यूज नेटवर्क, कुल्लू।। कुल्लू में माशनूनाला के पास खाई में गिरी एचआरटीसी बस की दुर्घटना के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे टैक्सी चालक की मौत हो गई है। गंभीर रूप से से जख्मी टैक्सी चालक को पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती करवाया गया था, जहां उसने आखिरी सांस ली।
आरोपी टैक्सी चालक को क्षेत्रीय अस्पताल से मंगलवार को पीजीआई रैफर किया था और उसे पीजीआई चण्डीगढ़ में उपचार के लिए भर्ती कर दिया था। मगर जानकारी के अनुसार बुधवार को उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि 34 वर्षीय टैक्सी चालक इंद्र जीत सिंह को टांगों और शरीर के अन्य कई भागों में चोटें पहुंची थी।
क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के डॉक्टरों ने टैक्सी चालक की नाजुक हालत को देखते हुए पीजीआई रेफर किया था। इसके बाद ऐंबुलेंस के माध्यम से उसे पीजीआई पहुंचाया गया था। मंगलवार से उसका उपचार शुरू हुआ था।
गौरतलब है कि इस हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि ड्राइवर-कंडक्टर बस से उतरकर कहीं चले गए थे, ऐसे में अपनी टैक्सी निकालने के लिए आरोपी ने खुद बस को हटाने की कोशिश की थी। इसी दौरान बस खाई में लुढ़क गई थी।
(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और इसे सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित किया गया है)
मंडी।। आज के दौर में जहां सरकारी अधिकारियों पर काम में कोताही बरतने और खानापूर्ति करने के आरोप लगते हैं, वहीं कुछ अधिकारी ऐसे भी हैं जो मिसाल कायम कर रहे हैं। इन्हीं अधिकारियों में शामिल हैं मंडी के डीसी संदीप कदम और प्रदेश के अडिशनल चीफ सेक्रेटरी तरुण श्रीधर। बुधवार को कोटरोपी के लोग एक बड़े प्रशासनिक अधिकारी को अपने बीच पाकर थोड़े से हैरान थे। यहां के लोगों के लिए भले ही तरुण श्रीधर का चेहरा जाना-पहचाना न हो, मगर उनका नाम बहुत से लोगों की जुबान पर है।
मंडी जिले के कोटरोपी में हुए भूस्खलन की जांच के लिए जियोलॉजी विभाग की टीम ने दौरा किया। टीम का काम यह देखना है कि आखिर कैसे यहां भूस्खलन हो गया। इस टीम के साथ हिमाचल सरकार के अडिशनल चीफ सेक्रेटरी तरुण श्रीधर भी थे। तरुण श्रीधर का मौके पर आना बहुत से लोगों को हैरान कर गया कि आखिर क्यों प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अधिकारियों में एक खुद यहां आया। वह भी उस दौर में, जब आज के दौर में वरिष्ठ अधिकारी अपने जूनियर अधिकारियों को आदेश लगाकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
मगर इलाके के बुजुर्गों के लिए यह हैरानी की बात नहीं थी क्योंकि वे 24 साल बाद उस अधिकारी को अपने सामने देख रहे थे, जिसने डीसी रहते हुए इसी विधानसभा क्षेत्र में आई एक और आपदा के वक्त लोगों की मदद करने में दिन-रात मेहनत की थी।
मंडी के डीसी रहे तरुण श्रीधर को आज भी याद करते हैं लोग। वह जिले के सबसे लोकप्रिय अधिकारियों में से एक रहे हैं।
साल 1993 में द्रंग विधानसभा क्षेत्र में ही पड़ने वाली चौहार घाटी के स्वाड़ में बादल फटा था। आज हिमाचल के अडिशनल चीफ सेक्रेटरी तरुण श्रीधर उस वक्त मडी जिले के डीसी थे। स्वाड़ गांव में बादल फटने से 16 लोगों की जान गई थी। उस दौर में तरुण पद्धर तक गाड़ी में आए थे और उसके बाद चौहार घाटी के स्वाड़ गांव पहुंचकर पूरे दो दिनों तक सैनिकों की तरह राहत एवं बचाव कार्य किया था।
जब स्वाड़ खड्ड में आए हुए पानी को इधर-उधर डायवर्ट करने में स्थानीय लोगों को मुश्किल हो रही थी, तत्कालीन डीसी मंडी तरुण श्रीधर ने मददगारों के साथ मिलकर 50 से 70 फुट लंबे पेड़ों को अपने कंधों पर उठाया था। वह पीड़ितों को हिम्मत देते रहे और उन्हें आगे बढ़ने के लिए दिलासा देते रहे। आद भी चौहार घाटी के लोग मंडी के डीसी रहे श्रीधर को याद करते हैं।
चौहार घाटी
आज 24 साल बाद तरुण श्रीधर बड़े अधिकारी बन चुके हैं मगर उनका जज्बा और काम के प्रति निष्ठा कम नहीं हुई है। मौके पर खड़े बुजुर्ग लोगों और जानकारों के लिए उनका आना डेज़ा वू जैसा था। मानो वक्त बीता ही न हो, युवा आईएएस अधिकारी उनके दुख-दर्द को समझने की कोशिश कर रहा हो।
पिछले दिनों तरुण श्रीधर तब चर्चा में आए थे तब मंडी के मौजूदा डीसी संदीप कदम ने 20 किलोमीटर पैदल यात्रा की और जनता की समस्याएं सुनी और विभिन्न विभागों के कार्यों का मुआयना करके जरूरी निर्देश भी दिए। तब फेसबुक पर विनोद राणा नाम के शख्स ने पुराने दौर को याद करते हुए लिखा था कि इसी तरह लंबी दूरी तय करके दूर-दराज के इलाके में लोगों की समस्याएं सुनने वाले पहले प्रशासनिक अधिकारी तरुण श्रीधर थे(यहां क्लिक करके पढ़ें)।
बहरहाल, हिमाचल प्रदेश और भारत को श्रीधर और कदम जैसे योग्य और समर्पित प्रशासनिक अधिकारियों की जरूरत है। मंडी के मौजूदा डीसी संदीप कदम कोटरोपी भूस्खलन की साइट पर मौजूद रहे और राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी करते रहे। इसी तरह से उम्मीद है अन्य अधिकारियों को भी उनसे प्रेरणा मिलेगी और हम सभी को भी। ताकि हम सब अपना काम पूरी निष्ठा और समर्पण से करें।
बहरहाल, तरुण श्रीधर ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद बताया कि एक टीम आपदा में हुए नुकसान का जायदा ले रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ग्रामीणों के नुकसान की भरपाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि यहां पर 2 किलोमीटर का हिस्सा थोड़ा संदिग्ध है, इसलिए यहां वाहनों का आवागमन सुरक्षित बनाने के लिए तैयारी हो रही है, जिसमें कुछ वक्त लग सकता है।
शिमला।। शिमला जिले के रोहड़ू इलाके में दोहरे हत्याकांड का मामला सामने आया है। एक सनकी युवक ने दो बुजुर्गों के सिर काटकर उनकी हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करके जांच शुरू कर दी है। मृतक बुज़ुर्गों की पहचान कोकिंद्र (84) और जोबनु राम (94) के रूप में हुई है।
खबर है कि नेपाली मूल का कोकिंद्र रोहड़ू के टिक्कर इलाके के कडंमचड़ी में परिवार सहित रहता था और उसका डेरा आरोपी के गांव में ही है। कोकिंद्र के परिवार में उसकी एक पोती है, जिससे आरोपी छेड़छाड़ कर रहा था। जब उसने आरोपी को ऐसा करने से रोका तो उसने भड़क कर दराट से वार करके कोकिंद्र की हत्या कर दी।
इसके बाद वह साथ लगते गांव श्रोंथा पहुंचा। यहां एक स्थानीय बुज़ुर्ग जोबनु राम से उसकी बहस हुई और उसने 94 वर्षीय जोबनु राम पर भी दराट से हमला कर उसे भी मौत के घाट उतार दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो गया, लेकिन मृतकों के परिजनों की सूचना के बाद रोहड़ू पुलिस ने आरोपी को देर रात गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।
एमबीएम न्यूज नेटवर्क, सोलन।। सोलन शहर से सटे इलाके ओच्छघाट में सनसनीखेज वारदात सामने आई है। बाजार में स्थित घर में ही युवती का गला रेतकर हत्या कर दी गई है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने आरोपी की शिनाख्त कर ली है।
वारदात के सामने आते ही समूचे इलाके में सनसनी फैल गई है। एसपी मोहित चावला खुद अपनी टीम के साथ मौके पर तफतीश में लग गए हैं। फिलहाल यही पता चला है कि किसी जान पहचान के शख्स के साथ कहासुनी होने पर ही इस वारदात को अंजाम दिया गया है। पुलिस अभी यह कहने की स्थिति में नहीं है कि पीडिता नाबालिग थी या नहीं, क्योंकि उम्र को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
पुलिस को इस सनसनीखेज वारदात की सूचना डेढ बजे के आसपास मिली थी। एसपी मोहित चावला ने एमबीएम न्यूज नेटवर्क को बताया कि प्रथम दृष्ट्या में गला रेतने से युवती की हत्या लग रही है। लेकिन फोरेंसिक जांच के साथ- साथ पोस्टमार्टम के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
एमबीएम न्यूज नेटवर्क, ऊना।। पिछले दिनों कांगड़ा से ऊना ट्रांसफर हुए हिमाचल प्रदेश पुलिस के अधिकारी संजीव गांधी ने नई पोस्टिंग पर भी नशे के कारोबारियों के होश उड़ा दिए हैं। एसपी गांधी ने 37 साल के नाइजीरियन युवक इमेका को 471.70 ग्राम हेरोइन और 0.56 ग्राम कोकीन के साथ पकड़ा है। अंतरराज्यीय गिरोह के इस सदस्य से सीरींज और नशा तोलने के लिए वेइंग मशीन भी मिली है।
बताया जा रहा है कि बरामद किए गए नशे के सामान की कीमत अंतररराष्ट्रीय बाजार में 30 लाख के आसपास हो सकती है। गिरफ्तार नाइजीरियन मूल का आरोपी दिल्ली में बैठकर अपना कारोबार चला रहा था। दरअसल 8 अगस्त के एक मामले के बाद गांधी की टीम चुप नहीं बैठी। इस मामले में मोगा के रहने वाले मनोज कुमार को 6 ग्राम हेरोइन के साथ पकडा गया था। इसके बाद ही पुलिस मनोज से यह पता लगाने में लगी रही कि नशे का सामान प्रदेश में कहां से पहुंच रहा है।
कड़ियों को जोड़ते हुए गांधी की टीम नाइजीरियन मूल के सप्लायर तक पहुंचने में कामयाब हो गई। पिछले 15 दिन में ऊना पुलिस ने एनडीपीएस के 9 मामलों में 12 नशा कारोबारियों को गिरफ्तार किया है। 15 अगस्त को भी मंडी के रहने वाले चरस तस्कर के कब्जे से 2 किलो खेप बरामद की थी। नशे की तस्करी करने वाले शातिर व चालाक होते है, लेकिन खाकी भी एक कदम आगे चलने में सफल हो रही है।
एसपी संजीव गांधी का कहना है कि ताजा मामले में भी पुलिस जड तक पहुंचने की कोशिश में लगी है। सनद रहें कि हेरोइन की बरामदगी महज 2 से 5 ग्राम के बीच ही होती है, लेकिन इस मामले में आधा किलो के करीब बरामदगी हुई है जो प्रदेश में अपनी तरह का एक रिकार्ड भी हो सकता है।
इन हिमाचल डेस्क।। भोटा में एचआरटीसी बस हादसे की खबर कौन फैला रहा है? इस सवाल का जवाब है- वेबकूफ। जी हां, इंटरनेट यानी ‘वेब’ पर बेवकूफी करने वालों को ‘वेबकूफ’ कहना सही होगा। आए दिन कोई न कोई किसी की पोस्ट शेयर कर देता है जिसमें धर्मशाला-शिमला बस के भोटा में हादसे की चपेट में आने का दावा किया गया होता है। कहा गया होता है कि इसमें 22 लोगों की मौत हो गई। मगर यह खबर और तस्वीरें न सिर्फ झूठी हैं बल्कि कानूनी कार्रवाई को भी न्योता देती हैं।
दरअसल 21 मई को इसी साल शिमला से धर्मशाला जा रही एचआरटीसी की एक बस हादसे की चपेट में आ गई। तीखे मोड़ पर बस पलट गई। इसमें करीब 20 सवारियां बैठी थीं जिन्हें चोट आई है। तीन घायलों को भोटा में फर्स्ट एड देने के बाद हमीरपुर हॉस्पिटल रेफर किया गया था। इस हादसे में किसी की मौत नहीं हुई थी। विस्तृत खबर आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं। मगर शरारती तत्वों ने इक खबर के साथ छेड़छाड़ की, किन्हीं अन्य हादसों की तस्वीरें जोड़ीं और मृतकों की संख्या 22 बताकर अपने पेज पर शेयर करना शुरू कर दिया। उदाहरण नीचे देखें, फिर आपको बताते हैं कि ऐसा क्यों किया जाता है।
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क्यों ऐसी खबरें फैलाते हैं लोग? बहुत से स्मार्ट लोगों को पता है कि सोशल मीडिया यूज़ कर रही जनता में ‘वेबकूफ़ों’ की संख्या ज्यादा है। उन्हें पता है कि लोगों को जानकारी के नाम पर डराने, उन्हें खुश करने वाली, उन्हें हैरान करने वाली या फिर इमोशनल रूप से अपील करने वाली कोई पोस्ट डालेंगे तो वे शेयर करेंगे। इसीलिए वे सनसनी फैलाते हैं। अपने मंसूबे में वे कामयाब रहते हैं। उनकी पोस्ट वायरल हो जाती है और उनके पेज के लाइक बढ़ने लगते हैं। फिर आराम से वे मजे लेते हैं। उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि इससे क्या नुकसान हो रहा है। अफवाह फैलाने वाले लोग उन लोगों की वजह से कामयाब होते हैं जो लापरवाह होते हैं और अपनी समझ का इस्तेमाल नहीं करते।
जनता को क्या करना चाहिए? सबसे पहले तो यह बात गांठ बांध लें कि सोशल मीडिया में झूठ की भरमार रहती है। सिर्फ स्थापित समाचार पत्रों, समाचार चैनलों, प्रतिष्ठित वेबसाइटों और विश्वसनीय न्यूज एजेंसियों की खबरों पर ही भरोसा करें। ऐसा नहीं कि ‘लहरिया खबरिया’ या ‘घातक खबर’ जैसे पेजों पर डाली पोस्ट को सच मान लिया जाए। साथ ही शक करने की आदत डालें। अगर लगे कि खबर नकली हो सकती है, तो तुरंत उस क्षेत्र की प्रतिष्ठित वेबसाइट जाकर क्रॉस चेस करें कि वाकई ऐसा हुआ है या नहीं।
ऑनलाइन पोर्टल पढ़ने की आदत डालें जब आप घंटों फेसबुक पर वक्त बिता सकते हैं तो क्या 5 मिनट आपको न्यूज पोर्टलों पर जाकर खबर पढ़ने में नहीं लग सकते? अगर आप खुद को जानकारियों से अपडेट रखेंगे तो कोई आपको ‘वेबकूफ’ नहीं बना पाएगा। साथ ही अगर आपको लगता है कि आपके किसी दोस्त ने गलत जानकारी वॉट्सऐप या फेसबुक पर शेयर की है तो उसे टोकें और समझाएं। न कि आंख मूंदे उसे आगे बढ़ा दें।
इस तरह के गैरजिम्मेदाराना व्यवहार से आप उन लोगों को परेशान करते हैं जिनसे फेक न्यूज जुड़ी होती है। 2 महीने पुरानी खबर को गलत ढंग से पढ़कर वह शख्स परेशान हो सकता है जिसका अपना उसी बस से जा रहा है, जिसकी आज आपने फेक न्यूज शेयर की। हम यह मान रहे हैं कि अगर आप फेसबुक यूज कर रहे हैं तो यह तो तय है कि आप साक्षर हैं यानी पढ़-लिख सकते हैं। इसलिए पढ़ने-लिखने की योग्यता का फायदा उठाएं, सच्ची खबरें पढ़ें, न कि झूठी खबरें फैलाएं। वरना ऐसा न हो कि अफवाह फैलाने के जुर्म में आप मुश्किल में फंस जाएं।
इन हिमाचल डेस्क।। सोशल मीडिया का दौर है, ऐसे में एक घटना को लेकर 100 कहानियां सामने आ जाती हैं। कुछ सच्ची होती हैं तो कुछ झूठी। कुछ में सच और झूठ का घालमेल होता है। कोटरोपी में आए भूस्खलन को लेकर कई तरह की खबरें आई हैं। जैसे कि कुछ लोगों का दावा था कि हर 20 साल में यहां बड़ा भूस्खलन होता है तो कुछ का कहना था कि इस हादसे की भविष्यवाणी पहले ही हो गई थी। मगर इस हादसे को लेकर एक पोर्टल ने ऐसी कहानी छापी जो हटकर थी। उसका शीर्षक था- क्या किसी खगोलीय घटना की वजह से कोटरोपी में हुआ भूस्खलन? क्या है सच, जानने के आखिर तक पढ़ें, जानकारी रोचक और ज्ञानवर्धक है।
खगोलीय मतलब मतलब ऐस्ट्रोनॉमिकल। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 12 अगस्त को उल्कापात (उल्काएं गिरना) की घटना होनी थी। दुनिया के कई हिस्सों में उस रात उल्काएं गिरने के नजारों को लोगों ने कैद किया। चूंकि इस घटना को लेकर वैज्ञानिकों से पहले से ही बताया था, ऐसे में कुछ लोगों द्वारा आशंका जताई जाने लगी कि कहीं 12 अगस्त को कोटरोपी में कोई उल्कापिंड तो नहीं गिर गया था जिससे भूस्खलन हो गया। पोर्टल ने अपनी खबर में लिखा था कि लोगों ने भूस्खलन से पहले एक धमाके की आवाज भी सुनी थी। कहीं वह धमाका उल्कापिंड गिरने की वजह से तो नहीं हुआ था। और तो और कुछ लोगों ने कहा कि जहां पर भूस्खलन हुआ है, वहां पर बने गड्ढे पर काले निशान भी हैं जो उल्कापिंड के हो सकते हैं।
गड्ढे के बीच में बने काले निशान को उल्कापिंड के गिरने की वजह से हुआ निशान बताया जा रहा है। ऐसा उल्कापिंड जो वायुमंडल में पूरी तरह जल नहीं पाया।
कितना दम है इस थ्योरी में? ऊपर वाली थ्योरी पहली नजर में तो काफी दमदार लगती है। लगता है कि हो सकता है कि जब पूरी दुनिया में उल्कापिंड गिरने थे, वैसे में एक बड़ा उल्कापिंड यहां गिर गया हो और उसकी वजह से पहाड़ी ढह गई हो। मगर इस थ्योरी पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल लगता है। ‘इन हिमाचल’ ने इस संबंध में विभिन्न भौतिक शास्त्रियों से बात की और सच का पता लगाने की कोशिश की।
12 अगस्त को चरम पर था परसीएड उल्कापात
सबसे पहले तो बात कर लेते हैं कि 12 अगस्त को कौन सी खगोलीय घटना होने वाली थी। दरअसल 12 अगस्त को दुनिया के विभिन्न हिस्सों में देखी गई उल्कापिंड गिरने की घटना ‘परसीएड उल्कापात’ या ‘Perseid meteor shower’ के नाम से पहचानी जाती है। धरती पर यह घटना तब होती है जब सूरज का चक्कर काटते वक्त पृथ्वी उस ‘स्विफ्ट-टटल’ नाम के धूमकेतु के पीछे रह गई धूल और अन्य पिंडों वाले क्षेत्र से होकर गुजरती है।
स्विफ्ट टटल नाम का यह धूमकेतु हर 133 साल में सूरज का चक्कर पूरा करता है। हर साल अगस्त महीने में पृथ्वी इस इलाके से होकर गुजरती है। परसीएड के उल्कापिंड दरअसल स्विफ्ट-टटल धूमकेतु के टुकड़े हैं। जब पृथ्वी इन टुकड़ों वाले इलाकों से होकर गुजरती है तो कुछ टुकड़े पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की वजह से खिंचे चले आते हैं। मगर चूंकि ये छोटे टुकड़े हैं, इसलिए वायुमंडल में प्रवेश करते ही घर्षण की वजह से हवा में ही जल जाते हैं। रात के आसमान में ये लंबी धारी सी छोड़ते हुए जलते हैं। धरती पर इनकी राख ही पहुंच पाती है।
परसीएड्स की 2010 की तस्वीर (WIkipedia)
इन्हें परसीएड्स इसलिए कहा जाता है क्योंकि देखने में ये पर्सियस (Perseus) जिसे हिंदी में परशु या फरसा करते हैं, के वार की तरह लगता है। पृथ्वी इस इलाके से 17 जुलाई से लेकर 24 अगस्त के बीच गुजर रही है इस साल। मगर वैज्ञानिकों के मुताबिक 12 अगस्त वह दिन था जब वह इस इलाके के बीचोबीच थी, जहां पर उल्कापिंड ज्यादा थे।
तो क्या हिमाचल में भी गिर सकते थे परसीएड्स? गिरने की बात बाद में, पहले बात कर लेते हैं कि ये परसीएड्स कहां से दिख सकते हैं। परसीएड्स उत्तरी गोलार्ध यानी नॉर्दर्न हेमिस्फियर से साफ दिखते हैं। चूंकि भारत भी इसमें शामिल है, इसलिए यहां से भी इन्हें देखा जा सकता है। मगर धूमकेतू की पूंछ के धूल और पिंडों से भरे जिस इलाके से होकर पृथ्वी गुजरती है, वहां पर ज्यादा बड़े उल्कापिंड नहीं हैं। अगर इतने बड़े उल्कापिंड होते तो वर्षों से इस धूमकेतु को स्टडी कर रहे वैज्ञानिक और खगोलशास्त्री पहले ही चेता देते।
इस धूमकेतु के अधिकतर पिंड पृथ्वी के वायमुंडल में प्रवेश करने बाद धरती से 80 किलोमीटर ऊपर ही जल जाते हैं। ऐसे में यह संभावना न के बराबर है कि यहां पर कोई उल्कापिंड गिरा हो। अगर वह गिरा भी होता अधजला होता चमक छोड़ रहा होता। चूंकि इसका साइज बड़ा होता तो इसके जलने की लपट की रोशनी ऐसी होती कि पूरे इलाके में दिन की तरह उजाला हो गया होता। जैसे कि वीडियो मे देखें
फिर लोगों को धमाका किस चीज़ का सुनाई दिया? उल्कापिंड वाली थ्योरी देने वाले पोर्टल ने लिखा कि लोगों को पहले धमाका सुनाई दिया था। प्रत्यक्षदर्शियों का भई कहना था कि उनको ऐसा लगा जैसे बम गिरा हो। दरअसल जब धरती का कोई बड़ा हिस्सा गिरता है, उसमें चट्टानें, जमीन का बड़ा हिस्सा, मिट्टी, लताएं, बूटे, मलबा… न जाने क्या-क्या होता है। जब यह अलग होता है तो इससे बहने से बहुत जोरदार गर्जन पैदा होती है और दूर तक शॉकवेव (लहर सी) भी जाती है। और हां, लैंडस्लाइड होने के लिए बारिश का होना जरूरी नहीं है। यह लंबे समय से चल रहे भूगर्भीय तनाव और प्रेशर की वजह से भी आता है। दोनों बातों के लिए हिमाचल के किन्नौर का ही उदाहरण देखें:
भूस्खलन वाली जगह जलने जैसे निशान किस चीज के हैं? जिन निशानों को जलने के निशान बताया जा रहा है, वह दरअसल मिट्टी का रंग है। गहराई में विभिन्न खनिज पदार्थों और चट्टानों की वजह से रंग अलग हो जाता है। इसी तरह से कुछ निशान सड़क के बहे हुए हिस्से के भी हैं जो काले नजर आ रहे हैं। इसलिए यह सामान्य बात है।
क्या है निष्कर्ष? कुल मिलाकर बात यह है कि स्पष्ट हो चुका है कि कोटरोपी में जहां पर भूस्खलन हुआ, वहां पहले भी भूस्खलन आता रहा है। पिछले कुछ दिनों से गांव के पीछे जमीन पर दरारें भी आ गई थीं। कुछ लोग मकान खाली करके जा भी चुके थे और कई बार पहले भी छोटे भूस्खलन होने पर ग्रामीण जंगल मे रात काट चुके हैं। यह कुदरत की चेतावनी थी जिसे पहले समझ जाना चाहिए था। यह स्वाभाविक रूप से आया भूस्खलन है, इसमें खगोलीय घटना जिम्मेदार नहीं है। यह सही है कि वैज्ञानिक हर उल्कापिंड पर नजर नहीं रख सकते, मगर वैज्ञानिक आधार पर किया गया विश्लेषण बताता है कि कोटरोपी का भूस्खलन किसी खगोलपिंड के गिरने से नहीं हुआ।
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