चंबा।। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के चुराह में बालिका आश्रम में आधा दर्जन बच्चियों से कथित यौन शोषण के मामले में नई जानकारी सामने आई है। 8 से लेकर 14 साल की आधा दर्जन बच्चियों ने हाई कोर्ट के जज त्रिलोक सिंह चौहान और डीसी सुदेश मोख्टा के सामने कहा है कि रात को उन्हें खाने में नशीली चीज़ दी जाती थी, जिससे वे बेहोश हो जाती थीं। सुबह उठती थीं तो आंखों के आगे अंधेरा छा जाता था और ऐसा एहसास होता था कि कुछ गलत हुआ है। कुछ बच्चियों ने आरोप लगाया है कि उनसे छेड़छाड़ भी होती थी।
इस मामले में पुलिस आश्रम से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आश्रम के पूरे स्टाफ को बदलकर दो महिला होमगार्ड्स को नियुक्त किया गया है। सीसीटीवी कैमरों की हार्ड डिस्क जब्त कर ली गई है। खास बात यह है कि इसमें एक ही दिन की रिकॉर्डिंग है, बाकी दिन सीसीटीवी कैमरा खराब होने की बात कही जा रही है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
बच्चियों को मेडिकल भी करवाया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद पता चल सकेगा कि मामला क्या है। डीसी चंबा सुदेश मोख्टा ने कहा है कि पॉक्सो ऐक्ट के तहत मामला दर्ज करके छानबीन की जा रही है।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने देश की अर्थव्यवस्था की हालत खराब होने में मौजूदा सरकार और इसके वित्त मंत्री के योगदान पर खुलकर बात कही है। क्या वजह है कि बीजेपी के समर्थक और अन्य नेता भी यशवंत सिन्हा की बातों से समहत नजर आ रहे हैं? दरअसल सिन्हा ने अपनी बात तथ्यों और तर्कों के साथ रखी है, जिसे सभी को एक बार पढ़ना चाहिए।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में I need to speak up now (मुझे अब बोलना ही होगा) शीर्षक से लिखे संपादकीय में वित्त मंत्री अरुण जेटली को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने लिखा है, “मैं अपने राष्ट्रीय कर्त्तव्य के पालन करने में असफल होऊंगा अगर मैंने अब वित्त मंत्री द्वारा अर्थव्यवस्था की दुर्गति के बारे में नहीं बोला। मैं निश्चितं हूं कि मैं जो भी कहने जा रहा हूं वह बड़ी संख्या में भाजपा के लोगों की भावनाएं हैं, जो डर की वजह से बोल नहीं रहे। इस सरकार में अरुण जेटली सर्वोत्तम और सबसे माहिर समझे जाते हैं। यह 2014 लोकसभा चुनावों से पहले तय था कि वह नई सरकार में वित्त मंत्री होंगे। अमृतसर से लोकसभा चुनाव हारना भी उनकी राह का रोड़ा नहीं बना। याद होगा कि ऐसी ही परिस्थितियों में अटल बिहारी वाजपेयी ने 1998 में जसवंत सिंह और प्रमोद महाजन को मंत्री बनाने से इनकार कर दिया था, जबकि वे दोनों उनके बेहद करीबी थे।
जेटली की अपरिहार्यता उस समय लक्षित हुई जब प्रधानमंत्री ने उन्हें न सिर्फ वित्त मंत्रालय, बल्कि रक्षा और कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय भी सौंप दिया। एक बार में चार मंत्रालय, जिनमें से तीन उनके पास अभी भी हैं। मैंने वित्त मंत्रालय संभाला है और मैं जानता हूं कि अकेले उसी मंत्रालय में कितना काम होता है। इस मंत्रालय को अपने प्रमुख के पूरे ध्यान की आवश्यकता होती है। कठिन समय में यह 24×7 की नौकरी हो जाती है, यहां तक कि जेटली जैसा सुपरमैन भी काम के साथ न्याय नहीं कर सकता।
सिन्हा ने कहा है जेटली अपने पूर्व के वित्त मंत्रियों के मुकाबले बहुत भाग्यशाली रहे हैं। उन्होंने वित्त मंत्रालय की बागडोर उस समय हाथों में ली, जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल कीमत में कमी के कारण उनके पास लाखों-करोड़ों रुपये की धनराशि थी। लेकिन उन्होंने तेल से मिले लाभ को गंवा दिया। उन्होंने कहा कि विरासत में मिली समस्याएं, जैसे बैंकों के एनपीए और रुकी परियोजनाएं निश्चित ही उनके सामने थीं, लेकिन इससे सही ढंग से निपटना चाहिए था। विरासत में मिली समस्या को न सिर्फ बढ़ने दिया गया, बल्कि यह अब और खराब हो गई है। सिन्हा ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दो दशकों में पहली बार निजी निवेश इतना कम हुआ और औद्योगिक उत्पादन पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। कृषि की हालत खस्ता हाल है, विनिर्माण उद्योग मंदी के कगार पर है और अन्य सेवा क्षेत्र धीमी गति से आगे बढ़ रहा है, निर्यात पर बुरा असर पड़ा है, एक बाद एक सेक्टर संकट में है।
वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे सिन्हा ने कहा कि गिरती अर्थव्यवस्था में नोटबंदी ने आग में घी डालने का और बुरी तरह लागू किए गए जीएसटी से उद्योग को भारी नुकसान पहुंचा है और कई इस वजह से बर्बाद हो गए हैं। सिन्हा ने कहा, “इस वजह से लाखों लोगों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ी है और बाजार में मुश्किल से ही कोई नौकरी पैदा हो रही है। मौजूदा वित्त वर्ष की पिछली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर गिर कर 5.7 प्रतिशत हो गई, लेकिन पुरानी गणना के अनुसार यह वास्तव में केवल 3.7 प्रतिशत ही है।”
उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने जीडीपी दर गणना की पुरानी पद्धति वर्ष 2015 में नहीं बदली होती तो यह अभी वास्तव में 3.7 प्रतिशत या इससे कम रहती। उन्होंने सरकार पर आर्थिक वृद्धि दर कम होने को तकनीकी वजह बताने की आलोचना करते हुए भारतीय स्टेट बैंक के हवाले से कहा कि यह आर्थिक सुस्ती अस्थायी या तकनीकी नहीं है, यह फिलहाल बनी रहने वाली है। सिन्हा ने कहा कि आर्थिक गति कम होने की वजहों का अनुमान लगाना बहुत मुश्किल नहीं है और इससे निपटने के लिए उपाय उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि लेकिन इसके लिए कार्य पूरा करने के लिए समय देने, दिमाग का गंभीरता से उपयोग, मुद्दे को समझने और तब इससे निपटने के लिए योजना बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मैं इस बात से भी सहमत हूं कि भाजपा में बड़ी संख्या में लोग इस बात को कहना चाहते हैं, लेकिन वे डर की वजह से कुछ नहीं बोल रहें हैं।
सिन्हा ने कहा है, “जीएसटी के अंतर्गत एकत्रित 95000 करोड़ रुपये में इनपुट क्रेडिट डिमांड 65,000 करोड़ रुपये है। सरकार ने आयकर विभाग को बड़ी संख्या में दावा करने वाले को पकड़ने को कहा है।” उन्होंने कहा, “वित्तीय प्रवाह की समस्या कई कंपनियों, खासकर छोटे और मध्यम उद्योग (एसएमई) सेक्टर की समस्या है। लेकिन फिलहाल वित्त मंत्रालय का काम करने का यही तरीका है।”
सिन्हा ने अपने लेख में भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने आई चुनौतियों का जिक्र करते हुए लिखा है, “प्रधानमंत्री चिंतित हैं। प्रधानमंत्री द्वारा वित्त मंत्री और उनके अधिकारियों की बुलाई गई बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है। वित्त मंत्री ने ग्रोथ बढ़ाने के लिए एक पैकेज की घोषणा की है। हम सभी सांस रोके इस पैकेज का इंतजार कर रहे हैं। अभी तक तो यह आया नहीं। एक नई चीज यह है कि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहर समिति का पुर्नगठन किया गया है। पांच पांडवों की तरह, उन्हीं से नये महाभारत का युद्ध जीतने की उम्मीद है।” लेख के अंत में सिन्हा लिखते हैं, “प्रधानमंत्री दावा करते हैं कि उन्होंने बेहद करीब से गरीबी देखी है। उनके वित्त मंत्री दिन-रात लगकर इस दिशा में काम कर रहे है कि सभी भारतीय भी उतनी ही करीबी से गरीबी देख लें।”
इन हिमाचल डेस्क।। पिछली सरकार का कार्यकाल खत्म हुआ था तो चुनाव के दौरान कांग्रेस ने बीजेपी पर सत्ता में रहते हुए हिमाचल की जमीनों को बाहरी राज्यों के लोगों को बेचने का आरोप लगाया था और इसे एक बड़ा मुद्दा बनाया था। मगरचुनाव से ठीक पहले हिमाचल प्रदेश की वीरभद्र सरकार की कैबिनेट ने कांगड़ा ज़िले के चुनिंदा चाय बागानों के मालिकों के लिए लैंड यूज़ को बदलने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इससे चाय के इन बागानों की जमीन को बेचे जाने का रास्ता खुल गया है, जिस पर हिमाचल प्रदेश सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग्स ऐक्ट के तहत रोक लगी हुई है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की कैबिनेट ने इस बदलाव के लिए एक नई टर्म गढ़ी है और वह है ‘टी टूरिज़म।’
दरअसल सरकार ने कहा है कि लैंड यूज़ बदला गया है मगर सिर्फ टूरिज़म से जुड़े प्रॉजेक्टों के लिए। यानी ‘टी टूरिज़म’ के प्रचार के लिए ऐसा किया जा सकता है। मगर टी-टूरिज़म के नाम पर सरकार ने इतना बड़ा फैसला क्यों लिया और क्यों इतने दिनों से ऐसा करने में तुली हुई थी। कहीं ऐसा तो नहीं कि सरकार में शामिल कुछ लोगों को इस डील से ‘लाभ’ होना है या उनके करीबियों को लाभ पहुंचना है?
ये सवाल उठते हैं अंग्रेजी अख़बार ‘द ट्रिब्यून’ की उस रिपोर्ट के आधार पर, जिसमें दावा किया गया है- ‘चाय बागान बेचने के लिए लॉबीइंग चल रही है। इसके मुताबिक टी गार्डन बेचे जाने से स्मार्ट सिटी धर्मशाला का हरियाली भरा हिस्सा गायब हो सकता है। दो कैबिनेट मीटिंगों में इससे पहले धर्मशाला के एक बड़े टी-गार्डन को बेचे जाने के लिए नियम बदलने की कोशिश की गई थी, मगर कुछ मंत्रियों ने विरोध किया था। मगर अख़बार ने दावा किया था कि इसका विरोध करने वाले मंत्रियों को पड़ोसी राज्य (इशारा पंजाब की ओर) में सर्वोच्च पदों पर बैठे लोगों से कॉल आया कि जरा अपने रुख में नरमी लाइए।
धर्मशाला में चाय के दो बड़े बागान हैं और दोनों का मालिकाना हक एक ही परिवार के पास है। पिछले पांच सालों ने कुमाल पथरी मंदिर के पास टी गार्डन की जमीन पर सरकार ने एक होटल बनाने की इजाजत दी थी। होटल प्रभावशाली लोगों का है और पूरा होने को तैयार है। कुछ समय पहले इसी सरकार ने कांगड़ा के चाय बागान की बिक्री पर रोक लगा दी थी। यह फैसला तब लिया या था जब सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण की एजुकेशन सोसाइटीको टी गार्डन की जमीन मिलने को लेकर विवाद हो गया था। मगर अब सरकार बड़े बागान मालिकों को खुश करने के लिए नियमों में ढील दे रही है।
हिमाचल प्रदेश सीलिंग ऑफ लैंड होल्डिंग्स (अमेंडमेंट) ऐक्ट 1999 के तहत चाय के उथ्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली जमीन की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था और इसे किसी दूसरे काम में इस्तेमाल करने पर सरकार को इसका अधिग्रहण कर लेने का अधिकार मिल गया था। मगर कैबिनेट के फैसले से चाय बागान के मालिकों को लैंड सीलिंग ऐक्ट से इस शर्त पर छूट मिली है कि उन्हें कांगड़ा की चाय बागान की विरासत बरकरार रखनी है। मगर प्रश्न यह उठता है कि इस तरह की छूट सिर्फ चुनिंदा और बड़े रसूखदार चाय बागान के मालिकों को ही क्यों दी गई? छोटे बागान के मालिक भी तो जरूरत के समय, किसी बीमारी या आर्थिक संकट के चलते पैसों के लिए जमीन का हिस्सा बेचकर कुछ पैसे ला सकते हैं? उन्हें यह अधिकार क्यों नहीं? और रोक हटानी ही है तो पूरी रोक हटा दी जाए और सभी को चाय के बागीचे उखाड़कर वहां इमारतें बनाने का अधिकार दे दो और अपनी विरासत को नष्ट कर दो।
बता दें कि कानून कहता है कि किसी के पास भी 300 कनाल से ज्यादा का मालिकाना हक नहीं हो सकता, मगर कांगड़ा के चाय बागानों के मालिकों को यह छूट दी गई है कि वे सैकड़ों एकड़ अपने पास रख सकें। मगर यह छूट इस शर्त पर मिली है कि वे इसे बेचेंगे नहीं और इनकी देखभाल करेंगे। धर्मशाला और पालमपुर के सिर्फ दो राजनीतिक रूप से प्रभावशाली टी एस्टेट मालिकों के पास 1000 बीघा से ज्यादा ज़मीन है।
वैसे सरकारों की हालत का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि कांगड़ा जिलों मे कई धार्मिक संगठनों और बाबाओं सैकड़ो कनाल जमीन चाय बागानों की ली हुई है और उसके ऊपर पक्के ढांचे खड़े कर दिए हैं। यह सब खुलेआम हुआ मगर सरकार और प्रशासन मूकदर्शक बने रहे। आज तक किसी भी पार्टी के नेता की जुबान इसके खिलाफ नहीं खुली। इसी तरह से अब कैबिनेट ने जो तथाकथित शर्तों के तहत ‘टी टूरिज़म’ के नाम पर छूट दी है, उसकी भी धज्जियां यदि उड़ेंगी तो कोई कुछ नहीं बोलेगा। मगर जितनी बेचैन मौजूदा सरकार नियमों में परिवर्तन देने के लिए दिख रही थी, वह भी चुनाव से ठीक पहले, इसके लिए उसकी नीयत पर सवाल उठना लाजिमी है। साथ ही विपक्ष की खामोशी पर भी।
एमबीएम न्यूज नेटवर्क, चंबा।। हिमाचल प्रदेश चंबा जिला के चुराह उपमंडल स्थित चिल्ली बाल आश्रम में 6 छात्राओं के साथ कथित यौन शोषण का मामला सामने आया है। छात्राओं ने स्टाफ पर यह गंभीर आरोप लगाया है, जिसके आधार पर तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
इस मामले को लेकर हाई कोर्ट के जज भी चंबा पहुंच चुके हैं। पीड़ित छात्राओं के बयान बुधवार सुबह दर्ज कर लिए गए हैं। मामला सामने आने के बाद बच्चियों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है। इन बच्चियों के बयान दर्ज करने के बाद न्यायाधीश अन्य छात्राओं के बयान दर्ज करने के लिए चिल्ली आश्रम गए हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर
आरोप है कि आश्रम में यह सिलसिला काफी समय से चल रहा था। शनिवार को मामले की जानकारी जिला बाल संरक्षण यूनिट को मिली, जिसके बाद टीम ने पीड़ित छात्राओं को दूसरी जगह शिफ्ट किया। बताया जा रहा है कि एक छात्रा ने शनिवार को इसका खुलासा किया। इसके बाद सोमवार तक छह छात्राओं ने आपबीती बयां की।
शिमला।। हिमाचल प्रदेश के ऊर्जा और कृषि मंत्री सुजान सिंह पठानिया को तबीयत खराब होने की वजह से आईजीएमसी में दाखिल किया गया है। बताया जा रहा है कि वह ब्रेन स्ट्रोक से जूझ रहे हैं और उनका इलाज किया जा रहा है। पठानिया आज होने वाली बैठक के लिए शिमला में थे।
मंगलवार शाम को उनकी तबीयत उस समय खराब हुई जब वह अपने दफ्तर में थे। आईडीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के मुताबिक पठानिया को ब्रेन स्ट्रोक हुआ है।
शिमला।। म्यूजिक कंपनी SMS Nirsu ने अपनी फील्ड में योगदान देने वालों हिमाचल अचीवर्स-2017 के नाम से सम्मानित किया। सम्मान समारेाह से पहले कार्यक्रम में प्रदेश भर के गायक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समा बांधा। सबसे पहले सिरमौर की गायिका निधि वालिया ने ‘हो वे लालिये’, ‘सांवरिया बीन बजा डस लई’ की प्रस्तुति दी। इसके बाद कांगड़ा से आए गायक कलाकार कुमार साहिल की प्रस्तुतियों में ‘मैं तैनु समझा वां की’ एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी।
इसके बाद पुराने गीत ‘इक प्यार का नगमा है’,’क्या हुआ तेरा वादा’ की प्रस्तुतियों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया। इसके बाद प्रिंस गर्ग कामेडियन ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को खूब हंसाया। चंबा के गायक कलाकार पियूष राज ने ‘जुग जियो धारा रे गुजरो’ की मनमोहक प्रस्तुतियां दी।
कार्यक्रम में हिमवानी एक्सप्रेस मासिक पत्रिका का शुभारंभ मुख्यातिथि ने किया। इस मौके पर लाइफ टाइम अचीवर अवाॅर्ड से पूर्व सांसद बिमला कश्यप, सूद सभा की पूर्व उपप्रधान सुमन सूद, अच्छर सिंह परमार,सर्वजीत सिंह बॉबी, विनोद चन्ना,मोहन जांगल,चांद गौत्तम, सीडी शर्मा,बाबूराम विकास काे विभिन्न क्षेत्रों सहित अन्य को सम्मानित किया। बेस्ट अचीवर अवाॅर्ड अजय सकलानी, रंजीत सिंह, कपिल शर्मा, अचीवर अवार्ड कुशल वर्मा, विक्की जुनेजा, संतोष तोषी,तरुणा मिश्रा, हिमांशी तनवर, जॉन नेगी, सुनील चौहान, निधि वालिया, नेहा दीक्षित, विकी राकटा ,डिंपल ठाकुर, को सम्मानित किया।
इसके अलावा इंद्रजीत सिंह ,संतोष तोसी, वाॅलीवुड सौरभ अग्निहोत्री, किशन शर्मा , कुमार साहिल, संतोष तोशी, दीपक जनदेवा, राजीव शर्मा, पीयूष राज को ट्राफी देकर सम्मानित किया गया। गेस्ट परफॉरमेंस में पियूष राज, डी प्राईटस क्रीयू, सोशल मीडिया पर लोकप्रिय इंडिया गोट टेलेंट के विनर को सम्मानित किया गया। इस मौके पर लगभग 80 लोगों को सम्मानित किया गया।
बाबा राम रहीम और हनीप्रीत को लेकर कई बातें बन रही हैं मगर अब डेरे के करीबी ने ऐसी कहानी बताई है कि पढ़कर पैरों तले जमीन खिसक जाए। एक टीवी चैनल से बात करते हुए डेरा प्रमुख के पूर्व ड्राइवर खट्टा सिंह के बेटे गुरदास सिंह ने जो कहा, वह आपके होश उड़ा देगा।
‘हनीप्रीत की शादी के तुरंत बाद डेरा प्रमुख गुरमीत राम राहीम ने उसके साथ रेप किया था और उसी वक्त हनीप्रीत ने गुरमीत राम रहीम को बर्बाद करने की ठान ली थी और आज बर्बादी सबके सामने है।’ यह सनसनीखेज खुलासा एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान किया। खट्टा सिंह का परिवार साल 2007 से पहले तक डेरे के काफी करीब था। यहां बता दें कि किसी समय डेरा प्रमुख का खास रहा खट्टा सिंह नए सिरे से सीबीआई अदालत के सामने अपने बयान दर्ज करवाना चाहता था। उसकी अर्जी फिलहाल कोर्ट के पास विचाराधीन है।
हिमाचल में भी है एक डेरा
हनीप्रीत द्वारा डेरा मुखी को सोची-समझी साजिश के तहत बर्बाद करने के सवाल पर खट्टा सिंह के बेटे गुरदास सिंह ने कहा कि विश्वास गुप्ता के साथ हनीप्रीत की शादी 14 फरवरी 1999 को हुई थी और 15 फरवरी को बाबा विश्वास के घर (डेरे में था घर) आया था। दोनों ओर का परिवार विश्वास और हनीप्रीत के बेडरूम में बैठे थे। वहां डिनर भी रखा गया था। उस दौरान मैं (गुरदास सिंह) और मेरा कजन गेट पर थे। उसी वक्त उसने कजन को आशंका जाहिर कर दी थी कि आज हनीप्रीत के साथ रेप होगा। जब हनीप्रीत और विश्वास कमरे में अकेले रह गए, तो डेरा प्रमुख का रसोइया रतन खाना खाने के लिए बुलाने आया। रतन सार्दुलगढ़ के पास माखा का रहने वाला है। वह डेरा मुखी का राजदार भी है।
‘हनीप्रीत के दादा को धमकाया’
इसी दौरान डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम कोई 35-40 मिनट तक कमरे के अंदर रहा और जब वह और हनीप्रीत कमरे से बाहर आए, तो हनीप्रीत की हालत खराब दिखी। गुरदास सिंह के मुताबिक हनीप्रीत ने अगले दिन आपबीती अपने दादा को बताई। उन्होंने डेरे के प्रबंधक दादा सुखदेव दीवाना, दर्शन सिंह और धर्म सिंह के पास जाकर पोती के साथ हुई घटना की जानकारी देते हुए कहा कि वह इस बारे में बाहर जाकर बात करेगा। यह सुनते ही उन लोगों ने उसे पीटा और एक गनमैन ने हनीप्रीत के दादा की कनपटी पर पिस्तौल भी रख दी। वह डरा हुआ डेरे में हनीप्रीत के ससुराल पहुंचा और घटना की जानकारी दी।
इस घटना के बाद हनीप्रीत अपने घर (मायके) जाने लगी, तो बाबा को इस बारे में पता चल गया और उसने अपने दो गनमैन विश्वास के घर भेज दिए। गनमैन भी उसके साथ हनीप्रीत के मायके चल दिए। लेकिन फतेहाबाद से पहले पाली के ढाबे पर विश्वास कोल्ड ड्रिंक लेने के लिए उतरा, तो इस दौरान गनमैन ने गाड़ी में बैठी हनीप्रीत को धमकाया कि घर से डेरे में वापस नहीं आई, तो अंजाम बुरा होगा, अपने घर घंटा-दो घंटा लगा लो और वापस सिरसा चलना पड़ेगा।
वापस लौटने पर हनीप्रीत ने अपने दादा को सारी बात बताते हुए कहा कि अब कुछ नहीं हो सकता, बाबा के खिलाफ कुछ बोल नहीं सकते लेकिन, वह बाबा को बर्बाद करके रख देगी। गुरदास सिंह ने जोड़ा कि मेरे हिसाब से जो कुछ डेरा प्रमुख के साथ हो रहा है, ये सब हनीप्रीत ने ही किया है। उसने यह भी कहा कि पंचकूला हिंसा में बाबा का ही हाथ है और मेरे हिसाब से इसके लिए मेसेज हनीप्रीत ने दूसरे लोगों तक पहुंचाया हो।
2007 में गुरदास ने डेरे को छोड़ा
गुरदास सिंह ने कहा कि साल 2007 में मैंने डेरा छोड़ दिया था और उससे पहले तक बाबा सिंपल था और उसके बाद हनीप्रीत उसके करीब चली गई। साल 2009 तक उसने बाबा को अपने वश में कर लिया और इस वजह से बाबा का परिवार हनीप्रीत से नफरत करता था। कोई भी उसको अच्छा नहीं समझता था। हनीप्रीत 24 घंटे गुरमीत राम रहीम के साथ रहती थी और बेटियों और बेटे को जहां 10 मिनट ही मिलने दिया जाता था, वहीं हनीप्रीत 24 घंटे बाबा के साथ रहती थी।
हनीप्रीत के गुरमीत राम रहीम के करीबी बन जाने पर उसने कहा कि उस समय तो विश्वास भी हनीप्रीत के साथ आता था और हनीप्रीत बाबा के पास चली जाती थी। सभी लोगों को सच्चाई पता थी, लेकिन कोई डर के कारण मुंह नहीं खोलता था। हनीप्रीत के बाबा के पास होने पर लोग कोर्ड वर्ड में चर्चा करते थे कि अंदर मैच चल रहा है और जिस दिन हनीप्रीत नहीं होती थी, तो कोड वर्ड था कि आज मैच कैंसल है, पिच गीली है।
बाबा के चक्कर में हुए बवाल से हिमाचल की बस सेवाएं बंद रही थीं
हनीप्रीत के रहते बाबा का अन्य लड़कियों के प्रति व्यवहार कैसा था, इस बारे में गुरदास सिंह ने कहा कि हनीप्रीत के जीवन में आने के बाद बाबा दूसरी लड़कियों को पूछता भी नहीं था। वह पूरी तरह हनीप्रीत के वश में था और जो लोग यह कह रहे हैं कि हनीप्रीत भी बाबा तक दूसरी लड़कियों को सप्लाई करती थी, यह गलत है।
डेरे में रहते हुए वहां के हालात और साध्वियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर गुरदास सिंह ने कहा कि साध्वियों द्वारा लगाए गए आरोपों में 100 फीसदी सच्चाई है। गुरमीत राम रहीम को 23 सितंबर 1990 को शाह सतनाम जी ने गद्दी दी थी। उस समय तीन वचन दिए कि डेरे में महिला साध्वी नहीं रखी जानी चाहिए। अपना परिवार गुरसर मोड़िया में ही रखना होगा और डेरे में कोई ट्रस्ट नहीं बनेगा। लेकिन बाबा ने ये तीनों काम किए और डेरा बर्बाद हो गया।
‘बाबा देखता था ब्लू फिल्में’
हनीप्रीत के आने से पहले डेरा प्रमुख के साध्वियों के साथ व्यवहार पर गुरदास सिंह ने खुलासा किया कि डेरे में किसी को टीवी देखने की इजाजत नहीं थी। लेकिन, बाबा ने अपनी गुफा में टीवी रखा हुआ था। वह डेरे पर फिल्में बनाने वाले शर्मा जी से ब्लू फिल्म मंगवाकर देखता था और इससे उसके दिमाग में सेक्स छा जाता था।
डेरा समर्थरों को लगता है कि बाबा को फंसाया गया है
फिर उसने डेरे में लड़कियों का स्कूल-कॉलेज बनाया और जो पुराना डेरा है वहीं स्कूल बना और गुफा से स्कूल के हॉस्टल के लिए रास्ता निकलता था। वह इसी रास्ते से हॉस्टल में जाता था। वहां एक बड़ा अंधेरा कमरा था जिसमें कई किस्म की लाइट्स लगी हुई थीं, मानों किसी ब्रह्मांड (दूसरी दुनिया) में आ गए हों।
गुरमीत राम रहीम को जो लड़की पसंद आ जाती थी, वह उसके बैकग्राउंड के बारे में पता कर लेता था कि लड़की के किसी के साथ संबंध तो नहीं हैं। हॉस्टल की वॉर्डन उसे सब कुछ बता देती थीं। बाबा पसंद आई लड़की को इसी कमरे में 25 मिनट तक सिमरन करने को कहता था और कहता था कि तू ब्रह्मांड में चली जाएगी। इस कमरे में एक माइक्रोफोन लगा होता था और उसका स्पीकर गुफा में था। बाबा सारी बातें वहीं सुनता था और जब लड़की पिता जी-पिता जी पुकारती थी, तो बाबा गुफा से उठकर हॉलनुमा अंधेरे कमरे का दरवाजा खोलता था तो तेज रोशनी होती थी और उसके बीच से बाबा कमरे में दाखिल होता था, इससे लगता था जैसे भगवान प्रकट हो गए हों।
गुरदास सिंह के मुताबिक इसके बाद वह लड़की को उसके अतीत के बारे में बताते हुए राम रहीम कहता था कि वह ज्ञानी है, सब कुछ जानता है। अब तुझे पाक-साफ करना है, माफी देनी है। वह लड़की को झांसे में लेते हुए कहता था कि गुरमीत तो गुफा में रह गया है और हम दोनों ब्रह्मांड में आ गए हैं और फिर वह लड़की के साथ सेक्स करता था। लड़की को विश्वास हो जाता था कि अपने अतीत से जुड़ी जो बात उसने किसी को नहीं बताई, वह सब बाबा को पता है। लड़कियां उसे इसलिए भी भगवान समझती थीं, क्योंकि लड़कियों के माता-पिता भी राम रहीम के अंधभक्त थे।
सभी पार्टियों के नेता बाबा के साथ मंच साझा कर चुके हैं
फरार हनीप्रीत के छिपे होने से जुड़े सवाल पर गुरदास सिंह ने अनुमान लगाते हुए कहा कि वह श्रीगंगानगर, संगरूर, पटियाला और लुधियाना में कहीं हो सकती है, क्योंकि यह डेरे के कट्टर समर्थक हैं, जो आज भी मानने को तैयार नहीं है कि बाबा ने साध्वियों के साथ रेप किया है। उसने अनुमान लगाया कि हनीप्रीत डेरे की राजनीतिक विंग अथवा डेरा प्रबंधन के 45 सदस्यों में से किसी के यहां छिपी हो सकती है।
आई.एस. ठाकुर।। आज फेसबुक पर आया तो देखा कि हिमाचल प्रदेश में बीजेपी में खुशी ही लहर है। होनी भी चाहिए, आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल आकर उस एम्स का शिलान्यास करने जा रहे हैं, जिसके लिए करीब 3 साल पहले ऐलान हुआ था 2 साल पहले बजट मंजूर हो गया था। आखिर लटकते-लटकाते चुनाव से ठीक पहले इसका शिलान्यास हो ही जाएगी। वैसे मैं सोचता हूं कि अगर 2015 में जब बजट का ऐलान हुआ था और उसके कुछ महीनों मे ंही काम शुरू हो गया होता तो आज ज्यादा नहीं, कम से कमीन जमीन पर खुदाई होकर प्लेन करने का काम तो शुरू हो ही चुका होता। मगर क्या करें, जाने कहां पर मामला लटक गया। केंद्र बोलता कि राज्य ने जमीन नहीं दी है, राज्य बोलता रहा हमने दे दी है।
एम्स को लेकर वीरभद्र केंद्र को लपेटते रहे, केंद्र की तरफ से सिर्फ नड्डा बयान देते रहे मगर एक तीसरी शख्सियत भी थी जो बीच-बीच में तड़का डाल रही थी और बोल रही थी, अरे कहां उलझे हुए हो, एम्स लाने में मेरा योगदान है। वह कोई और नहीं बल्कि हमीरपुर से बीजेपी के सांसद अनुराग ठाकुर हैं। अब अगर उनके चुनाव क्षेत्र में एम्स बन रहा है और उन्हें कोई पूछ ही नहीं रहा, ये तो बड़ी नाइंसाफी है। मीडिया भी जाकर नड्डा जी के मुंह के आगे माइक लगा रहा है कि कब बनेगा, क्या होगा। अनुराग जी के पास तो कोई जा ही नहीं रहा। अनुराग जी को कभी संसद में भाषण के दौरान यह बोलना पड़ता है कि मैंने एम्स के लिए प्रयास किए और तब किए जब हर्षवर्धन स्वास्थ्य मत्री थे, नड्डा नहीं। मगर कोई ध्यान नहीं देता। (इस साल मार्च में दिया भाषण सुनें)
फिर अनुराग जी को फेसबुक पर कई बार लाइव या वीडियो के माध्यम से या पोस्टों के माध्यम से जताना पड़ता है कि भाई, इसमें मेरा योगदान है। फिर भी जब कोई नहीं पूछता तो वह नड्डा और सीएम को चिट्ठी भेजते हैं कि कहां फंसा है मामला (पढ़ें)। मगर एक दो दिन हवा बनती है और सब फुस्स। एक बार तो उन्होंने कहा था- ‘एम्स को बिलासपुर लाने में नड्डा का कोई योगदान नहीं है और न ही इसे यहां से ले जाने में होगा।'(पढ़ें) जब नड्डा ने कहा कि अभी शिलान्यास का कोई कार्यक्रम तय नहीं है तो मामला फिर शांत हो गया। मगर रविवार सुबह ही नड्डा वीडियो डालते हैं कि 3 अक्टूबर को प्रधानमंत्री एम्स का शिलान्यास करेंगे।
यह तो बेचारे अनुराग जी के साथ नाइंसाफी है। यह ऐलान तो उन्हें ही करने देना चाहिए था भाई। पहले वीडियो डालने का हक उनका बनता था, क्योंकि वह कई मंचों से कह चुके हैं कि एम्स मेरे प्रयासों की देन है। खैर, अनुराग जी ने देर से ही सही, वीडियो डाला और उसमें हर बार की तरह यह याद दिलाना नहीं भूले कि ‘आपके आशीर्वाद और मेरे प्रयासों’ से एम्स आया है।
मगर सवाल उठता है कि आखिर अनुराग को बार-बार क्यों बोलना पड़ रहा है कि यह काम मेरे प्रयासों से हुआ है? कभी मोदी जी ने, वीरभद्र जी ने, कौल सिंह ने और यहां तक कि नड्डा जी ने भी नहीं कहा कि एम्स मेरे प्रयासों से हिमाचल आया है। फिर अनुराग जी को क्यों कहना पड़ रहा है?
इससे संकेत मिलते हैं कि अनुराग अपरिपक्व राजनेता हैं। उनके अंदर मेच्योरिटी की भारी कमी है। सिर्फ एम्स वाले मुद्दे को लेकर नहीं, बल्कि पिछले दिनों दिए गए उनके कई बयान उनकी अपरिपक्वता को दिखाते हैं। जैसे कि एम्स को लेकर अपनी ही सरकार के वरिष्ठ मंत्री को घेरना, टोपी को लेकर विवाद होने पर लाल टोपी पहनकर आ जाना, राहुल गांधी के भाषण पर यह कहना कि मैंने 13 साल की उम्र में धूमल टाइटल छोड़ दिया था… यह नासमझी नहीं तो और क्या है। शायद आप भूल गए होंगे कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान एक टीवी कार्यक्रम के दौरान हमीरपुर में उन्होंने वीरभद्र की तुलना बंदर के एक खिलौने से कर दी थी। उसका भी उन्हें राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ा था।
शायद अनुराग क्रेडिट इसलिए भी लेना चाहते हैं क्योंकि उनके पास सांसद के तौर पर गिनाने के लिए कुछ खास नहीं है। अनुराग की उपलब्धियों की बात करें तो एकमात्र उपलब्धि धर्मशाला में क्रिकेट स्टेडियम बनाना है, मगर वह सांसद के तौर पर नहीं बल्कि क्रिकेट प्रशासक के तौर पर है। बाकी वह रेलवे ट्रैक को लेकर भी मांग करते रहे हैं और उसका श्रेय भी लेते हैं। हालांकि यह बड़ी पुरानी मांग है, फिर भी जितना काम हुआ है, उसका सांसद को श्रेय मिलना भी चाहिए। पिछले दिनों मैंने In Himachal पर ही पढ़ा था कि अनुराग ठाकुर हिमाचल से सबसे ज्यादा ऐक्टिव सांसद हैं। यानी न सिर्फ उनकी हाजिरी, बल्कि उनके द्वारा पूछे गए सवाल और प्रस्ताव हिमाचल के अन्य सांसदों से ज्यादा हैं।
इसका मतलब यह हुआ कि वह ऐक्टिव हैं, जुझारू हैं मगर साथ ही साथ उन्हें समझना चाहिए कि सिर्फ इससे काम नहीं चलेगा। राजनीति में परिपक्वता बहुत जरूरी है। समझ बहुत जरूरी है। विरोधियों पर वार करना जरूरी है राजनीति में। इसके बिना काम नहीं चलता। फिर वे विरोधी पार्टी के अंदर के हों या दूसरी पार्टी के। मगर वे वार गुपचुप होने चाहिए और ऐसे होने चाहिए कि किसी को पता न चले। और पता भी चले तो आपका कद बढ़े। मगर यूं हताशा में बचकाना व्यवहार करके बार-बार एम्स का जिक्र आने पर यह जताने की कोशिश करना कि यह मेरी वजह से हुआ, समझदारी नहीं है। जब मैं इस बात को नोटिस कर सकता हूं कि आप हताशा में बार-बार क्रेडिट लेने की कोशिश कर रहे हैं तो आम जनता भी कर सकती है। इससे आप लाचार साबित होते जा रहे हैं।
अनुराग को समझना चाहिए कि उनका क्रेडिट उनसे कोई नहीं छीन सकता। आप सांसद हैं, आपके रहते यह एम्स बिलासपुर में आया तो इसका श्रेय आपको मिलेगा और शिलान्यास पट्टिका पर आपका भी नाम होगा। कोई आपके योगदान को झुठला नहीं सकता। मगर यूं बार-बार हर मंच से इसे गाना अच्छा नहीं लगता। फिर भी अगर वह बचपना नहीं छोड़ते हैं तो मैं प्रधानमंत्री जी से गुजारिश करूंगा कि बाल मन की हठ का मान रखने के लिए उस दिन मंच से कह ही दें- हां, यह एम्स अनुराग ठाकुर जी और सिर्फ और सिर्फ अनुराग ठाकुर जी के प्रयासों से ही आया है और कोई अन्य व्यक्ति इसका श्रेय लेने की कोशिश न करे।
(लेखक मूलत: हिमाचल प्रदेश के हैं और पिछले कुछ वर्षों से आयरलैंड में रह रहे हैं। उनसे kalamkasipahi @ gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)
DISCLAIMER: ये लेखक के निजी विचार हैं, उनके लिए वह स्वयं जिम्मेदार हैं
शिमला।। हिमाचल प्रदेश की शिव्या पठानिया एक बार फिर छोटे पर्दे पर नजर आई हैं। वह धारावाहिक ‘दिल ढूंढता है’ में लीड रोल निभा रही हैं है। पूर्व मिस शिमला रहीं शिव्या ने धारावाहिक ‘हमसफर’ में मुस्लिम लड़की का किरदार निभाया था और ‘एक रिश्ता साझेदारी का’ में एक राजस्थानी लड़की का रोल प्ले किया था।
नए सीरियल ‘दिल ढूंढता है’ में शिव्या रावी के किरदार में हैं। अभी तक उन्होंने जितने भी धारावाहिक किए हैं, उनमें वह मुख्य भूमिका में ही रही हैं। पिछले दिनों शिव्या को बेस्ट राइजिंग ऐक्ट्रेस’ अवॉर्ड भी मिला था।
शिव्या शिमला के खलीणी की रहने वाली हैं। शिव्या साल 2013 में मिस शिमला रह चुकी हैं। उन्होंने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई हेनोल्ट पब्लिक स्कूल शिमला से की है। उसके बाद उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से बीटेक की डिग्री हासिल की और यहीं से ऑडिशन के बाद साल 2014 में मुंबई पहुंचीं। बिलासपुर में भी शिव्या का घर है। उनका ननिहाल रोहड़ू में है।
शिमला।। हिमाचल प्रदेश के कलाकारों को मंच देने और प्रदेश की लोक कला के संरक्षण में योगदान देने के लिए पहचाने जाने वाली म्यूजिक कंपनी SMS Nirsu ने अपने 6 साल पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर ‘हिमाचल अचीवर्स अवॉर्ड 2017’ कार्यक्रम का आयोजन शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में किया जा रहा है।
25 सितंबर यानी सोमवार को सुबह 11 बजे कार्यक्रम की शुरुआत होगी। रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर प्रेम सिंह ड्रैक मुख्यातिथि होंगे। इसके लिए SMS Nirsu ने सभी को आमंत्रित किया है। कार्यक्रम की अधिक जानकारी यहां पर क्लिक करके ली जा सकती है।