हिमाचल में वायरल हुआ सुखराम पर वरिष्ठ पत्रकार का लेख

इन हिमाचल डेस्क।। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे पंडित सुखराम और उनके परिवार के बीजेपी में शामिल होने के बाद उनके ऊपर लिखा एक आर्टिकल हिमाचल प्रदेश के सोशल मीडिया सर्कल में तेजी से शेयर हो रहा है। वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम का लिखा यह आर्टिकल ‘द वायर हिंदी’ पर छपा है। यह वही पोर्टल है, जिसने कुछ दिनों पहले अपनी एक स्टोरी में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे की संपत्ति बढ़ने को लेकर आर्टिकल छापा था। इस आर्टिकल ने सियासी भूचाल ला दिया था।

अजी अंजुम के इस लेख का शीर्षक है, “‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ के अश्वमेध में भ्रष्टाचारी सुखराम की आहुति.”

आगे इस आर्टिकल की भूमिका में लिखा गया है, “लोहा लोहे को काटता है ये तो सुना ही था. अब हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार के लिए बदनाम वीरभद्र सिंह को निपटाने के लिए महाभ्रष्ट सुखराम और उनके सुपुत्र भाजपा का साथ देंगे.”

अनिल शर्मा

इस आर्टिकल में उन्होंने बीजेपी के दोहरे मापदंड पर निशाना साधा है और बताया है कि पंडित सुखराम पर क्या-क्या आरोप लगे थे और वे कैसे साबित भी हुए थे। सवाल उठाया है कि ऐसे में भ्रष्टाचार विरोधी विकल्प के तौर पर खुद को पेश करती रही बीजेपी कैसे उन्हें शामिल कर सकती है। इस आर्टिकल में अनुराग ठाकुर की सोशल मीडिया पोस्ट का स्क्रीनशॉट भी लगाया गया है।

आर्टिकल में लिखा है- “चुनाव के बाद सूबे में भाजपा की ताजपोशी होगी तो कैबिनेट मंत्री का एक ताज उन्हीं सुखराम के बेटे के सिर भी सजेगा, जो भारतीय इतिहास में करोड़ों के नोट को बिस्तर के नीचे छिपाने और नकद को नारायण मानकर पूजाघर में भगवान का दर्जा देने के लिए कुख्यात रहे हैं. डिजिटल युग में गूगल पर दर्ज सुखराम की घूसगाथा हमेशा उन्हें जिंदा रखेगी. इतिहास में देश के बड़े -बड़े रिश्वतखोरों का जब भी नाम लिया जाएगा, सुखराम का नाम सम्मान के साथ लिया जाएगा.”

पूरे आर्टिकल को पढ़ने के लिए यहां पर क्लिक करें

…और आंसुओं में छलक पड़ी प्रेम कुमार धूमल की वेदना

हमीरपुर।। प्रेम कुमार धूमल अचानक भावुक हो गए और उनकी आंखों से अश्रुधार बह निकली। हमीरपुर में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते समय न तो वह जज़्बात पर क़ाबू रख पाए और न उनके समर्थक। बीजेपी के वरिष्ठ नेता हमीरपुर के विधायक हैं और इस बार वह यहां से नहीं बल्कि सुजानपुर से चुनाव लड़ेंगे। उन्हें बीजेपी ने सीएम कैंडिडेट भी घोषित नहीं किया है।

 

हमीरपुर की जनता से धूमल का नाता टूट रहा है। वह धन्यवाद दे रहे थे लोगों और कार्यकर्ताओं को। इस बीच लोगों की आंखें नम थीं तो कुछ रो भी रहे थे। अचानक वह भी जज़्बाती हो गए। गला भर आया और आंखें डबडबा गईं।

आखिरकार उन्होंने रुमाल निकालकर आंसू पोंछे क्योंकि वे गालों से ढुलकने ही वाले थे। यह देख वहां मौजूद समर्थक भी ख़ामोश हो गए और भावनाओं पर काबू पाने की कोशिश करते दिखे।

इस तरह से हमीरपुर से साथ छोड़कर धूमल अब सुजानपुर से चुनाव लड़ेंगे।

गुड़िया केस में गिरफ्तार चार आरोपी जमानत पर रिहा

शिमला।। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस में पुलिस ने जिन संदिग्धों को गिरफ्तार किया था, अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया है। गिरफ्तारी के 90 दिन बाद भी इस मामले में अभी तक चालान पेश नहीं हुआ है। यही बात जमानत का आधार बनी।
मामले की जांच कर रही सीबीआई ने इस मामले में एक संदिग्ध की हिरासत में मौत के मामले में आईजी समेत पुलिस एसआईटी के सदस्यों को आरोपी बनाया है, जो जेल मे हैं।
इससे पहले कोर्ट ने 13 अक्टूबर को एक आरोपी आशीष चौहान को जमानत पर रिहा कर दिया था। अब अन्य चार आरोपियों को जमानत पर पर रिहा किया है जिनके नाम दीपक, लोकजन, सुभाष और राजेंद्र उर्फ राजू हैं। पुलिस ने इन्हें 13 जुलाई को गिरफ्तार किया था।

टिकटों को लेकर बीजेपी में रोष, कहीं नारेबाजी तो कहीं इस्तीफे

शिमला।। भले ही बीजेपी की तरफ से आधिकारिक रूप से उम्मीदवारों के नाम की सूची जारी नहीं की है। मगर यह लगभग साफ हो गया है कि टिकट किसे-किसे मिलेंगे। इसी कारण विभिन्न जगहों पर जहां पार्टी के लोग जश्न मना रहे हैं, वहीं कुछ चाहवान और उनके समर्थक नाराजगी भी दिखा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के अखबारों पर नजर डालें तो प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी खबरें आ रही हैं, जिससे पता चलता है कि टिकट न मिलने से नाखुश समर्थक किस तरह से अपनी ही पार्टी के खिलाफ रोष प्रकट कर रहे हैं।

 

पालमपुर में इंदु गो बैक के नारे
पालमपुर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी नेता प्रवीण शर्मा का टिकट कटने की अटकलें चल रही हैं। इस बीच सुबह सवा दस बजे के करीब बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने शांता कुमार के घर पहुंचकर इंदु गो बैक के नारे लगाए। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि अगर प्रवीण शर्मा को पालमपुर से बीजेपी ने टिकट नहीं दिया तो मंडल के सभी पदाधिकारी अपने इस्तीफे सौंप देंगे।

 

धूमल को सीएम कैंडिडेट घोषित न करने पर इस्तीफा
पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के समर्थकों ने पार्टी हाईकमान से नाराजगी जाहिर करते हुए पार्टी पद से इस्तीफे दे दिए हैं। हमीरपुर भाजपा मंडल महामंत्री हरीश शर्मा ने मंडल भाजपा अध्यक्ष बलदेव धीमान को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने कहा कि धूमल ने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं और अब विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद पार्टी शीर्ष नेतृत्व उन्हें प्रदेश का नेतृत्व सौंपने में आनाकानी कर रहा है।

 

धर्मशाला में किशन कपूर समर्थकों का शक्ति प्रदर्शन
धर्मशाला में पूर्व मंत्री किशन कपूर समर्थकों ने बगावती सुर दिखा दिए हैं। रविवार देर शाम हुई नारेबाजी के बाद सोमवार को दाड़नू ग्राउंड में किशन कपूर के समर्थकों ने शक्ति प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने कपूर के समर्थन में नारेबाजी की और कहा कि संगठन किसी भी सूरत में पैराशूटी उम्मीदवार को स्वीकार नहीं करेगा। यही नहीं उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा हुआ तो संगठन पैराशूटी उम्मीदवार को जिता कर दिखाए।

 

मंडी में बीजेपी कार्यकर्ताओं में नाराजगी
कांग्रेस नेता अनिल शर्मा के बीजेपी में शामिल होने के बाद मंडी बीजेपी मंडल के कार्यकर्ताओं ने बैठक करके हाईकमान को चेयाता था कि अगर इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो मंडल अनिल शर्मा की जीत या हार के लिए जिम्मेदार नहीं होगा। यही नहीं, कुछ का कहना था कि वे इस्तीफा दे देंगे।

ठियोग में डोला वीरभद्र का आत्मविश्वास, दोबारा अर्की से लड़ने के संकेत

शिमला।। इस बीच जहां कांग्रेस इस बात को लेकर माथापच्ची कर रही है कि कहां से किसे उतारा जाए, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह खुद अपनी सीट तय नहीं कर पाए हैं। पिछले ही दिनों ठियोग से लड़ने का ऐलान करने वाले मुख्यमंत्री ने एक बार फिर कहा है कि वह अर्की से चुनाव लड़ सकते हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि वीरभद्र सिंह अब ठियोग से लड़ने को लेकर आश्वस्त नहीं हैं? वह भी तब, जब वह खुद इसका ऐलान कर चुके थे और रविवार को विद्या स्टोक्स समेत कई कांग्रेस नेता उन्हें ठियोग से लड़ने का ‘न्योता’ भी दे चुके थे।

 

इंग्लिश अखबार द ट्रिब्यून से बात करते हुए वीरभद्र सिंह ने कहा, “मैं अर्की से लड़ने की भी सोच रहा हूं, जहां से हम लगातार दो टर्म्स से हारते आ रहे हैं। मैं जल्द ही अपनी सीट तय करूंगा। मगर मैं या तो अर्की से लड़ूंगा या फिर ठियोग से। दोनों से नहीं लड़ूंगा।”

 

कांग्रेस के बागी बने परेशानी
दरअसल वीरभद्र के अचानक ठियोग से चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद कांग्रेस के एक धड़े ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि इस तरह  का फैसला लेने से पहले पुराने कांग्रेसियों को विश्वास में लेना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा था कि संगठन हें भेड़-बकरियों की तरह नहीं हांक सकता। उन्होंने सोमवार को एक बैठक भी की। नाराज कांग्रेसियों ने तय किया है कि वे सीपीएम उम्मीदवार को समर्थन करेंगे।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह (File Pic)

ठियोग में कड़ी चुनौती
ठियोग में पिछली बार विद्या स्टोक्स को बीजेपी उम्मीदवार राकेश वर्मा ने कड़ी चुनौती दी थी। वह करीब 3500 वोटों के मार्जन से ही जीत पाई थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब वह खुद नहीं लड़ेंगी तो इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि उनका पारंपरिक वोट कांग्रेस के उम्मीदवार की तरफ ही शिफ्ट होगा।

विद्या स्टोक्स

दरअसल ‘मैड स्टोक्स’ का इलाके में अपना रुतबा है और उनके अपने वोट हैं। साथ ही वीरभद्र सिंह से उनकी राइवलरी भी जगजाहिर रही है। ऊपर से उन नाराज कांग्रेसियों का गुस्सा भी झेलना पड़ सकता है जो ऐलान कर चुके हैं कि वे पार्टी के साथ खड़े नहीं होंगे।

 

राकेश सिंघा का प्रभाव
इसके साथ ही यहां से चुनाव लड़ने जा रहे सीपीएम नेता राकेश सिंघा का शिमला और आसपास के इलाकों में अच्छी पहचान है। वह अच्छे खासे वोट भी बटोरते रहे हैं  और शिमला से विधायक भी रह चुके हैं। उनकी युवाओं में भी अच्छी पकड़ है। ऐसे में उनकी तरफ जो वोट आएंगे, वे कांग्रेस के पारंपरिक वोट ज्यादा होंगे।

राकेश सिंघा की युवा वर्ग में भी अच्छी-खासी लोकप्रियता है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इन तमाम फैक्टर्स को ध्यान में रखें तो स्टोक्स के अलावा किसी और के लिए कांग्रेस के लिए सीट निकालना यहां से आसान नहीं होगा। शायद यही वजह है कि वीरभद्र एक बार फिर अर्की का रुख करने की बात कर रहे हैं।

13 साल के संघर्ष के बाद दिल्ली में लावारिस मरे हिमाचल के रविंदर

इन हिमाचल डेस्क।। दिल्ली के कनॉट प्लेस के पास कस्तूबरा गांधी मार्ग पर हिंदुस्तान टाइम्स हाउस के बाहर एक टेंट में रहने वाले रविंदर सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे। न्यूज़ लॉन्ड्री के मुताबिक वह हिंदुस्तान टाइम्स अखबार के प्रिंटिंग डिविजन में काम करते थे मगर 2004 में उन्हें और 361 अन्य लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया था। तभी से वह संघर्ष कर रहे थे और चाहते थे कि उन्हें उनका हक मिले। इसी उम्मीद में उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की गगनचुंबी इमारत के बाहर सबवे पर डेरा डाल दिया था।

 

पीले रंग के तंबू के नीचे रहने वाले रविंदर सिंह जिन्हें लोग अक्सर ठाकुर साहब कहते थे, यहीं पिछले कई सालों से डटे हुए थे। पेड़ों के नीचे सोया करते थे। वे कहते थे कि एक दिन जरूर मुझे मेरा हक मिलेगा। मगर उनका सपना पूरा नहीं हो पाया। गुरुवार सुबह एक हॉकर ने देखा कि वह मृत पड़े हैं। यहां के लोग कहते हैं कि उनके बिना यह जगह सूनी लगेगी।

 

विडंबना यह है कि उनका शव लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल की मॉर्चुअरी में पड़ा हुआ है। पुलिस का कहना है कि उनके परिजनों का पता नहीं चल रहा। पोस्टमॉर्टम अड्रेस वेरिफाई करने के बाद ही होगा। 62 साल के रविंदर सिंह हिमाचल प्रदेश के बताए जाते हैं मगर पिछले कई सालों से वह परिवार से नहीं मिले।

Pic Credit: News Laundry

वह इस दुनिया में नहीं हैं मगर उनके संघर्ष वाले पोस्टर अब भी लगे हुए हैं। उनके साथ निकाले गए कर्मचारियों ने पुलिस से गुजारिश की है अगर कोई परिजन नहीं मिलता है तो शव उनके हवाले कर दिया जाए। वे कहते हैं कि रविंदर के पिता रंगील सिंह थे और वह भी एचटी में सिक्यॉरिटी गार्ड थे।

 

अगर आपमें से किसी को रविंदर सिंह (62 वर्ष), सुपुत्र श्री रंगील सिंह का पता चलता है जो दिल्ली में एचटी में कार्यरत थे तो जरूर जानकारी देने के लिए आगे आएं।

कौल, बाली और सुधीर के लिए बीजेपी ने बनाई ये रणनीति

नई दिल्ली।। हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने लगभग सभी सीटों के लिए टिकट तय कर लिए हैं। अब चर्चा उन जगहों पर हो रही है, जहां से मौजूदा कांग्रेस सरकार के दिग्गजों को टक्कर देनी है। बीजेपी चाहती है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ही नहीं, बल्कि उनके कैबिनेट मंत्रियों के खिलाफ भी तगड़े और विनिंग कैंडिडेट दिए जाएं। इसके लिए ऐसे नामों पर चर्चा चल रही है, जो जीतने का माद्दा रखते हों।

जानकारी मिली है कि बीजेपी ने उन सभी सीटों पर भी नाम तय कर लिए हैं, जहां पर टिकट की दावेदारी जताने वाले बहुत थे। अब वह मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, कौल सिंह ठाकुर, जीएस बाली और सुधीर शर्मा जैसे दिग्गजों को हराने के लिए माथापच्ची कर रही है और इसीलिए लिस्ट जारी करने में देरी हो रही है।

कौल को कड़ी टक्कर देने की तैयारी?

पार्टी चाहती है कि इन नेताओं को उनके घर पर ही घेर दिया जाए, ताकि वे अपने आसपास की सीटों पर प्रभाव न जमा पाएं और अपनी जीत सुनिश्चित करने के चक्कर में ही व्यस्त रहें। पार्टी का मानना है कि वीरभद्र तो अपनी और बेटे की सीट में व्यस्त रहेंगे, ऐसे में उनके खतरा कम है। मगर अन्य नेताओं को घेरना जरूरी है, ताकि वे अपनी सीट बचाने में ही उलझे रहें।

सुधीर के खिलाफ उतारा जा सकता है नया कैंडिडेट

इस रणनीति के तहत बीजेपी उन लोगों के टिकट काट सकती है, जिन्हें इन दिग्गज नेताओं से पिछली बार हार का सामना करना पड़ा है। इसके संकेत मिलना भी शुरू हो गए हैं और पार्टी से टिकट की चाहत रखने वाले कुछ पुराने नेताओं के समर्थक ने नाराजगी जाहिर करना शुरू कर दिया है।

संकेत मिल रहे हैं कि ठियोग, द्रंग, नरगोटा बगवां और धर्मशाला से बीजेपी नए चेहरों को मौका दे सकती है और इनमें कुछ संगठन में शामिल रहे लोग भी हो सकते हैं। अनिल शर्मा के शामिल होने से बीजेपी को राहत मिली है और वह मंडी सीट पक्की मान रही है। माना जा रहा है कि पार्टी आज ही अपनी लिस्ट जारी कर सकती है।

जानें, आखिर ये ‘आया राम-गया राम’ है क्या

शिमला।। हाल ही में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में गए कांग्रेस नेता अनिल शर्मा ने कहा कि वह अपने पिता सुखराम के अपमान से नाराज थे। दरअसल पंडित सुखराम को पिछले दिनों एक भाषण के दौरान वीरभद्र सिंह ने इशारों ही इशारों में ‘आया राम, गया राम’ कह दिया था। अनिल शर्मा और सुखराम परिवार के बीजेपी में शामिल होने पर प्रतिक्रिया देते हुए दोबारा वीरभद्र ने यही बात कही और कहा- पंडित सुखराम का परिवार आया राम, गया राम है। पहले भी उन्होंने कांग्रेस छोड़कर अपनी अलग पार्टी बनाई थी मगर फिर कांग्रेस में आ गए।

इतना तो आप समझ गए होंगे कि यह बात राजनीति में पार्टी, पाला या खेमा बदलने के लिए कही जाती है। मगर इसमें ‘राम’ का संबंध सुख राम से नहीं, बल्कि हरियाणा के एक नेता से बताया जाता है। उस नेता पर, जिसने 24 घंटों के अंदर तीन बार पार्टियां बदल ली थीं। कथित तौर पर उन्हीं के नाम पर यह बात चल पड़ी है।

दरअसल 1967 में गया लाल हरियाणा के हसनपुर से विधायक थे। पहले वह कांग्रेस छोड़कर युनाइटेड फ्रंट में गए थे। फिर वह कांग्रेस में लौट आए और फिर दोबारा युनाइटेड फ्रंट में चले गए। यह पूरा घटनाक्रम चौबीस घंटों में हुआ। उस समय कांग्रेस के नेता बीरेंदर सिंह ने कथित तौर पर कहा था कि ‘आया राम पर गया राम है।’ इसके बाद दलबदलू लोगों के लिए इस मुहावरे को इस्तेमाल किया जाने लगा।

हालांकि गया लाल के बेटे उदय भान ने एक अखबार से बात करते हुए कहा था कि उनके पिता ने पार्टी नहीं बदली थी, हालांकि हालात को बदलने हुए समर्थन अलग-अलग जगह जरूर दिया था। उनका कहना है कि उमा शंकर दीक्षित ने पहली बार संसद में यह मुहावरा इस्तेमाल किया था, मगर किसी ने इसे मेरे पिता से जोड़ दिया।

वैसे हिमाचल में पार्टियां बदलने वाले बहुत से नेता हैं जो कई खेमे बदलते रहे हैं। ऐसे लोगों के नाम के आधार पर आपको कोई जुमला बनाना हो तो किसका नाम चुनेंगे? 🙂 कॉमेंट करके जरूर बताएं।

अनिल शर्मा के आने से मंडी बीजेपी मंडल नाराज, कहा- पुनर्विचार करे हाईकमान

मंडी।। हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक उठापटक शुरू हो गई है। जैसे ही मंडी से कांग्रेस के विधायक और मंत्री रहे अनिल शर्मा ने बीजेपी का दामन थामा, कुछ ही देर बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं की नाराजगी की खबर भी आ गई। जेल रोड में बीजेपी कार्यालय में मंडल की बैठक का आयोजन हुआ। रविवार को हुई इस बैठक में कहा गया कि अगर अनिल शर्मा को बीजेपी का उम्मीदवार बनाया जाता है तो प्रत्याशी की जीत या हार के लिए मंडल जिम्मेदार नहीं होगा। यही नहीं, सामूहिक इस्तीफे की बात भी कही गई।

 

बीजेपी मंडल पदाधिकारियों ने हाईकमान से कहा है कि इस फैसले पर फिर से विचार करे। मंडी मंडल अध्यक्ष दीपक गुलेरिया की अध्यक्षता में यह बैछक हुई। इसमें बीजेपी के पूर्व प्रत्याशी डीडी ठाकुर भी मौजूद रहे। विभिन्न मोर्चों के पदादिकारी भी इस दौरान मौजूद रहे।

अनिल शर्मा

गुलेरिया ने कहा कि अनिल शर्मा के बीजेपी में आने से कार्यकर्ताो मे नाराज़गी है। इस बीच अनिल शर्मा ने भी सोमवार को ब्लॉक कांग्रेस में शामिल अपने समर्थकों की बैठक बुलाई है। इसमें वह उन समर्थकों की लिस्ट बनाएंगे, जो उनकी ही तरह बीजेपी में शामिल होंगे।

वीरभद्र के ठियोग से लड़ने के ऐलान से नाखुश कांग्रेसियों ने बुलाई बैठक

शिमला।। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के ठियोग से चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद कांग्रेस के अंसतुष्ट खेमे ने सोमवार को एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में ये लोग आगे की रणनीति बनाएंगे। जो नेता इस बैठक में शामिल होने जा रहे हैं, उनमें स्टोक्स खेमे के भी हैं। दरअसल विद्या स्टोक्स ने इस बार चुनाव न लड़ने की बात कही है और वीरभद्र ने अपनी सीट शिमला रूरल बेटे के लिए छोड़ दी है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने ऐलान किया है कि वह ठियोग से लड़ेंगे।

 

अंतुष्टों का नेतृत्व राजेंद्र वर्मा कर रहे हैं जो 2003 और 2008 में कांग्रेस के टिकट पर इलेक्शन लड़ चुके हैं। उन्होंने रविवार को मीडिया से बात करते हुए कहा था- हमें भेड़-बकरियों की तरह नहीं हांकना चाहिए। अच्छा होता कि कोई भी फैसला लेने से पहले पुराने कांग्रेसियों से बात करके उन्हें भी विश्वास में लिा जाता।

 

राजेंद्र वर्मा ने बताा है कि सोमवार को होने जा रही बैठक में रमेश हेटा, जयप्रकाश वर्मा और जोगेंद्र ठाकुर भी मौजूद रहेंगे। गौरतलब है कि ये नेता रविवार को विद्या स्टोक्स के नेतृत्व में ओकओवर जाकर वीरभद्र को चुनाव लड़ने का न्योता देने गए नेताओं में शामिल नहीं थे। वैसे यह भी रोचक बात है कि वीरभद्र ने लड़ने का ऐलान पहले कर दिया था, न्योता उन्हें बाद में दिया गया।