चंबा में मंदिर और मस्जिद में तोड़फोड़; क्या था इरादा?

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, चंबा।। हिमाचल प्रदेश के चंबा शहर के साथ लगती सरोल पंचायत में अज्ञात लोगों ने मस्जिद और मंदिर में तोड़फोड़ की है। घटना सोमवार देर रात की बताई जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज करके छानबीन शुरू कर दी है।

मंगलवार सुबह जब मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करने मस्जिद पहुंचे तो पाया कि माइक गायब है। अंदर जाने पर पवित्र कुरान का भी पता नहीं चला। लोगों ने आसपास तलाश करना शुरू किया तो कुछ ही दूर कुरान के फटे हुए पन्ने मिले और माइक भी तोड़ दिया गया था। वहीं शीतला पुल के पास शिव मंदिर में मूर्तियां बिखरी हुई थीं। शिवलिंग रावी नदी के किनारे मिला तो त्रिशूल सड़क पर पड़े थे।

एएसपी वीरेंद्र ठाकुर ने पुलिस टीम को साथ लेकर स्वयं मौके पर जाकर घटना का मुआयना किया और सुबूत जुटाए। एसपी वीरेंद्र तोमर ने कहा कि सरोल पंचायत में मस्जिद और मंदिर में तोड़फोड़ की घटना सामने आई है, जिसमें अज्ञात लोगों क‌े ‌खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों की तलाश की जा रही है और वे जल्द ही पुलिस की गिरफ्त में होंगे।

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(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

बुजुर्ग पुजारिन के निधन के बाद यहां प्रकट हुई थी माहुनाग की पिंडी

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंदर नगर में त्रैंबली ग्राम पंचायत में आने वाले गांव मझेड़ में माहुनाग देवता का करीब 100 साल पुराना मंदिर है। यह मंदिर पूरे इलाके के लोगों की आस्था का केंद्र है।

पहले इस जगह पर जंगल हुआ करता था और गांव की बुजुर्ग महिला मंगसरू देवी यहां आकर साधना किया करती थीं। लोग उनके पास आते और मंगसरू देवी उनकी समस्याओं का समाधान किया करतीं।

बुजुर्ग मंगसरू देवी के देहावसान के बाद लोगों ने देखा कि जहां पर पूजा करती थीं, वहां पर एक पिंडी है।

लोगों ने दूसरे मंदिरों के पुजारियों से बात की तो पचा चला कि नाग देवता यहां प्रकट हुए हैं। लोगों ने यहां पर देवता का मंदिर बनाया और तब से लेकर आज तक लोग यहां पर आते हैं।

मंदिर में इस प्राचीन पिंडी के साथ-साथ कुछ पुराने वाद्ययंत्र भी रखे गए हैं। इन्हें धार्मिक कार्यक्रमों और शादी-विवाह आदि में इस्तेमाल किया जाता है। यहां बड़ा सा ढोल, ढोलकी और नरसिंघा मौजूद है।

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मंदिर के मौजूदा पुजारी बोनूराम 70 साल के हैं। उनका कहना है कि यहां आने वालों की हर शुभ मनोकामना पूरी होती है।

(यह एमबीएम न्यूज नेवटर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है। कुछ तस्वीरें जोगिंदर नगर डॉट कॉम से साभार ली गई हैं।)

गुड़िया केस में अब पैसों वाले ऐंगल की जांच कर रही है सीबीआई

शिमला।। पूरे हिमाचल को हिलाकर रख देने वाले शिमला के कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस में अब सीबीआई अब पुलिस द्वारा मामले को तुरंत निपटाने के पीछे पैसे के ऐंगल की जांच पर फोकस कर रही है। अंग्रेज़ी अखबार द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक प्रमुख संदिग्धों के खिलाफ कोई भी ठोस सबूत न मिलने के बाद अब इस ऐंगल पर तफ़्तीश की जा रही है।

गौरतलब है कि पुलिस पर असल दोषियों को बचाने के आरोप लगने के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया था। अब सीबीआई पैसों के ऐंगल से पुलिस की भूमिका की भी जांच कर रही है क्योंकि अभी तक पकड़े गए चार आरोपियों (पांचवें की हिरासत में हत्या कर दी गई थी) के खिलाफ ठोस सबूत हाथ नहीं लगा है।

‘Did cops hush up rape case for crores?‘ शीर्षक वाली रिपोर्ट में लिखा गया है, “चूंकि यह साफ है कि पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश की, ऐसे में पैसे का पता लगाना महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इससे असल दोषियों तक पहुंचा जा सकता है। पुलिस द्वारा मजदूरों को केस में जोड़ने के बाद से ही 3 से 13 करोड़ के लेन-देन की अफवाहें चल रही हैं।”

इस मामले में सीबीआई अब तक आरोपियों के ब्रैन मैपिंग से लेकर कई साइंटिफिक टेस्ट कर चुकी है लेकिन कोई भी ठोस बात निकलकर सामने नहीं आई है। इससे उन आरोपों को बल मिल रहा है कि एसआईटी ने असली गुनहगारों को बचाने के लिए निर्दोष लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपियों के सैंपल नहीं हुए थे मैच
इससे पहले पुलिस द्वारा आरोपियों के लिए गए सैंपल घटनास्थल और मृतका के शरीर से मिले सबूतों से मैच नहीं हुए थे। इनमें से एक आरोपी सूरज की 18 जुलाई को रात साढ़े 11 बजे के करीब बेरहमी से हत्या हो गई थी। अख़बार के मुताबिक इसके बाद डीएसपी मनोज जोशी तुरंत एसपी डीडब्ल्यूनेगी के पास गए और दोनों फिर आईजी ज़हूर एच जैदी से मिले, जो एसआईटी की अगुवाई कर रहे थे। अगली सुबह साढ़े बजे सूरज की हिरासत में हुई मौत को लेकर सुबह साढ़े 8 बजे जेल में ही बंद अन्य संदग्ध राजिंदर पर एफआईआर दर्ज की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई ने गिरफ्तार किए गए पुलिसवालों के खिलाफ काफी सबूत इकट्ठे कर लिए हैं और हिरासत में मौत के मामले में चार्जशीट लगभग तैयार है।

ज्वालामुखी में प्राकृतिक ईंधन ढूंढने में जुटी ONGC की टीम

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की ज्वालामुखी का मंदिर पूरी दुनिया में हिंदुओं के बीच प्रसिद्ध है, जहां पर अपने आप जलती ज्योति लोगों को हैरान कर देती है। मान्यता है कि मां ज्वाला जी सभी की मुरादें पूरी करती हैं और सुख समृद्धि देती हैं। मगर वह मुराद अब तक पूरी नहीं हो पाई कि जिस प्राकृतिक ईंधन से ये ज्योतियां अनवरत जलती हैं, वही प्राकृतिक ईंधन देश के ऊर्जा संकट को दूर करने और हिमाचल प्रदेश के विकास में रफ्तार देने में इस्तेमाल हो।

दरअसल पहले दो बार वैज्ञानिक यहां पर जांच कर चुके हैं कि ईंधन का स्रोत ढूंढा जाए। माना जाता है कि यहां प्राकृतिक गैस बड़ी मात्रा में मौजूद है, मगर वह कहां है, यह पता नहीं चल पा रहा। साल 1962 से लेकर आज तक यहां दो बार अड्डा जमाकर इस स्रोत को ढूंढने की कोशिश की गई थी, मगर कामयाबी नहीं मिल पाई। अब तीसरी बार कोशिश की जा रही है और ओएनजीसी ने डेरा जमाया है

मशीनों के ज़रिए पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि तेल या गैस के भंडार आखिरकार है कहां। दरअसल प्राकृतिक गैस अक्सर वहीं होती है, जहां पर खनिज तेल होता है। ऐसी कई थियरीज़ भी दी जा चुकी हैं कि जब एक अलग भूखंड (इंडियन प्लेट) आकर एशिया (यूरेज़ियन प्लेट ) से टकराया और हिमालय का निर्माण हुआ, उस दौरान वनस्पति आदि बड़ी संख्या में दब गई जो भारी दबाव के कारण कालांतर में खनिज ईंधन में तब्दील हो गई है। उसी को ढूंढने की कोशिश की जा रही है।

जानकार मानते हैं कि ऊर्जा स्रोत का सही पता तभी चल सकता है जब मंदिर से ही जांच शुरू की जाए या इसके आसपास से तलाश की जाए, मगर धार्मिक आस्था से मामला जुड़े होने के कारण इस दिशा में अब तक कोई भी कदम उठाने से बचा जाता रहा है। दरअसल ज्वालामुखी मंदिर बहुत प्राचीन समय से लोगों की आस्था का केंद्र है।

अगर ज्वालामुखी में कोई प्राकृतिक भंडार मिल जाता है तो भारत की निर्भरता खाड़ी देशों पर खत्म हो जाएगी और देश का ऊर्जा संकट तो कम होगा ही, वह निर्यात से अपनी इकॉनमी भी बूस्ट कर सकता है।

अगर बीजेपी और कांग्रेस ने 34-34 सीटें जीतीं तो क्या होगा?

इन हिमाचल डेस्क।। मतदान होने के बाद जब तक रिजल्ट नहीं निकल जाता, तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कोई एक पार्टी को जिता रहा है तो कोई दूसरी को। इस बीच एक मजेदार सवाल यह निकलकर सामने आ रहा है कि उस स्थिति में क्या होगा, अगर बीजेपी और कांग्रेस बराबर सीटें जीतती हैं। यानी 68 में से 34 सीटों पर कांग्रेस को जीत मिलती है और 34 पर बीजेपी को, तो क्या होगा, सरकार किसकी बनेगी।

इस सवाल को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि इस तरह के हालात पैदा होने की संभावना लगभग शून्य है मगर फिर भी लोकतंत्र में कुछ भी हो सकता है। हिमाचल में सरकार बनाने के लिए आपके पास 35 विधायक होने चाहिए।

होता यह है कि नतीजे आने के बाद यह देखा जाता है कि कौन सी पार्टी या गठबंधन सबसे ज्यादा सीटें लाया है। उसी के आधार पर ज्यादा सदस्यों वाली पार्टी या गठबंधन को राज्यपाल सरकार बनाने का निमंत्रण देते हैं। इसके बाद असेंबली में उस पार्टी या सरकार बनाने वाले को बहुमत साबित करना होता है।

‘हंग असेंबली’ उस स्थिति को कहते हैं जब किसी भी पार्टी या गठबंधन के पास बहुमत लायक सीटें न हों। ऐसे ही हालात पिछली बार दिल्ली में हुए थे। ऐसी स्थिति में राज्यपाल किसी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं। अगर आमंत्रित किया गया दल/गठबंधन असेंबली में बहुमत साबित करने में कामयाब रहता है, तब तो ठीक, वरना फिर से चुनाव करवाए जाने की तैयारी शुरू हो जाती है। तब तक तुरंत ही राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता है (जम्मू कश्मीर में गवर्नर रूल)।

By Patrick Gillett – Own work, CC BY 3.0

ऐसा ही दिल्ली में हुआ था जब कोई भी पार्टी बहुमत लायक सीटें नहीं ला पाई थी और बाद में कांग्रेस ने भी आम आदमी पार्टी से समर्थन वापस ले लिया था। ऐसे में फिर से चुनाव करवाए गए। इसलिए निश्चिंत रहें, ऐसा नहीं होगा कि बराबर सीटें आने पर दोनों पार्टियों को ढाई-ढाई साल तक सरकार चलाने का मौका मिलेगा। न ही ऐसा होगा कि टॉस से फैसला होगा कि पहले ढाई साल कौन सरकार चलाएगा।

शिमला में शूट हुई शॉर्ट फिल्म ‘बुलबुल’ का ट्रेलर देखा आपने?

इन हिमाचल डेस्क।। दिव्या खोसला कुमार की शॉर्ट मूवी बुलबुल का ट्रेलर इस वक्त यूट्यूब के ट्रेडिंग वीडियोज़ में नज़र आ रहा है। इसमें ‘बुलबुल’ नाम की लड़की का किरदार निभा रही हैं खुद दिव्या खोसला कुमार। खास बात यह है कि इस फिल्म की ज्यादातर शूटिंग हिमाचल प्रदेश में हुई है और वह भी शिमला में। इसमें शिमला शहर के साथ-साथ यहां के रेलवे स्टेशन और बाहरी इलाकों की झलक भी देखने को मिलती है।

इस शॉर्ट मूवी का ट्रेलर को देखें तो रिज में एक पुलिसकर्मी बुलबुल का पीछा करता भी नजर आता है। इसमें कुछ कॉमिडी, कुछ सस्पेंस, दुख भरे सीन होने की भी उम्मीद है। बुलबुल को क्यूट सी लड़की के किरदार में दिखाया गया है जो एक लड़के को प्यार करती है और उसे हासिल करना चाहती है।

यह शॉर्ट फिल्म यूट्यूब पर ब्रॉडकास्ट होगी। देखें इसका ट्रेलर:

20 मिनट की इस फिल्म को टी-सिरीज़ ने प्रड्यूस किया है।

खाद की बोरियों से स्कूल बैग बनाकर पढ़ने जाती हैं ये बेटियां

एमबीएम न्यूज़ नेटवर्क, शिमला।। सुदूर इलाकों में मासूम बेटियां किस तरह के बेहद मुश्किल हालात में पढ़ाई करती हैं, इसका एक मामला सामने आया है। मामला सुन्दरनगर उपमंडल की निहारी तहसील के कथाची का है। यकीन करना मुश्किल है, मगर यहां बच्चों, खासकर नन्ही बेटियों में स्कूल जाने का कमाल का जुनून है। वे दो से तीन घंटे पैदल तो चलती ही हैं, बैग के लिए खाद के बोरे (बैग) से स्कूल के बस्ते बनाती हैं।

ये तस्वीरें प्राथमिक पाठशाला कथाची में पढ़ रही नन्हीं बेटियों की हैं। इनमें दिख रहा है कि कि खाद के बैग को सिलकर स्कूल का बस्ता बनाया गया है। इस मामले में नन्हीं बेटियों के स्कूल जाने के जज्बे को तो सलाम किया जाना चाहिए, लेकिन सरकार की कई योजनाओं पर करारा तमाचा भी है। कथाची स्कूल की नन्ही छात्राएं सबसे अहम सवाल यह उठता है कि सरकार की वो योजनाएं कहां हैं, जिनमें गरीब बच्चों को पाठन सामग्री व अन्य सुविधाएं देने के वायदे किए जाते हैं।

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एक जानकारी यह भी सामने आई है कि निहारी से कथाची तक सडक़ का निर्माण प्रस्तावित था। लेकिन मामूली अड़चन ने इसे रोक रखा है। बहरहाल यह तय है कि इस दुर्गम इलाके में सरकारी सहूलियतें नदारद हैं। जिंदगी बेहद जटिल है। यह भी तय है कि खाद के कट्टों से बने स्कूल बस्तों की तस्वीरें भी दुर्लभ ही होंगी। पहाड़ी प्रदेश में शायद ही इस बात की कल्पना की जाती होगी कि आज भी नन्हीं बेटियां इस तरह के जज्बे को लेकर स्कूल पहुंचती हैं।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

मानसिक रूप से कमजोर बच्ची से दुराचार के आरोप में दादा और चाचा अरेस्ट

एमबीएम न्यूज़ नेटवर्क, मंडी।।  मानसिक रूप से अस्वस्थ नाबालिग बच्ची से दुराचार के मामले में नई जानकारी सामने आई है। अब परिवार में ही दादा और चाचा लगने वाले दो लोगों पर गंभीर आरोप लगे हैं। संदिग्धों को गिरफ़्तार कर लिया गया है।

 

जानकारी के मुताबिक दोनों आरोपी आपस में पिता-पुत्र हैं। बूढ़ा आरोपी पीड़िता के दादा का भाई है। दूसरा आरोपी इसी बुजुर्ग का बेटा है। पुलिस को पीड़िता की मां से शिकायत मिली थी कि बेटी को अचानक पेट में दर्द उठा था। इसके बाद पता चला था कि कथित तौर पर इन दोनों ने बच्ची के साथ दुराचार किया था।

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पुलिस ने आईपीसी की धारा 376 (2) और 34 के साथ-साथ पोक्सो ऐक्ट के तहत मंडी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया है।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और इसे सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित किया गया है)

इस परिवार की लाचारी की वजह कहीं जागरूकता का अभाव तो नहीं?

कांगड़ा।। अक्सर समाज में वंचित और पीड़ित लोगों की कहानी सामने लाने वाले समजसेवी संजय शर्मा ने अब एक और परिवार का दर्द सामने रखा है, जिसे मदद की ज़रूरत है। मगर सवाल यह भी उठता है कि क्या हमारे राज्य में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि ऐसी स्थिति में फंसे व्यक्ति की मदद की का सके और मुफ्त इलाज हो? कहीं यह मामला जागरूकता के अभाव का तो नहीं है? बहरहाल, पूरा मामला समझें

7 नवम्बर को पोस्ट की गई एक तस्वीर के साथ संजय शर्मा लिखते हैं-

“दोस्तो यह महेन्द्र सिंह ऊम्र लगभग 40 साल पता गांव व डाकघर भीरडी तहसील चढीयार, विधान सभा हल्का बैजनाथ जिला कांगडा हिमाचल प्रदेश, कोई छोटी मोटी नोकरी कर के बडी मुश्किल से अपना व अपने परिवार का पेट पाल रहे थे। परिवार मे ईनके दौ बच्चे व पत्नी व एक बुढी मां हे महेन्द्र सिंह की टांग को किसी बीमारी के चलते काटना पडा, पर अफसोस लगभग एक साल बीत जाने के बाद भी महेन्दर का जख्म भर नंही पाया है। भरेगा भी कैसे टांग कटने के बाद यह एक बार भी हस्पताल नंही जा पाया है।  टांग का जख्म धीरे धीरे नासुर बनता जा रहा हे बिना ईलाज व दवाई के, जब ईनकी पत्नी से वात हुई तो वताया कि मनरेगा मे काम करके बमुश्किल बच्चों व माता जी को खाना नसीब होता है ईनकी दवाई के लिए बहुत पैसे कि जरुरत है, ईतना पैसा हम कंहा से कर सकते हैं।

घर मे जब दर्द के कारण महेन्दर चिल्लाता हें तो मां सहित सारा परिवार सहम जाता हे, केसे एक मां और एक पत्नी व बच्चे महेन्दर को तिल तिल मरता देख रहे हैं, पुरी परिवार अपने लिए मौत मांग रहा है, पर क्या दोस्तो मौत कभी मांगने से मिलती है,,,,,,,,,,, महेन्दर का ईलाज हो सकता है अगर आप सभी,,,,,,,,,,,,?”

इसके बाद उन्होंने एक खाता भी दिया है, जिसपर मदद की जा सकती है (नोट: अपने स्तर पर वेरिफाई करके ही आर्थिक मदद करें)

Mr mohinder singh s/o sher singh
Joint holder mrs pooja devi (wife)
A/c 8882000100006430 PNB Baijnath
IFSC code PUNB0888200
Phone no-7807505863

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हिमाचल का हर मतदाता वोट डालने से पहले इसे जरूर पढ़े

9 तारीख को जब भी आप वोट डालें, इत्मिनान से सोचें कि आप क्या करने जा रहे हैं। सत्ता और विपक्ष में रहे लोगों के कामों, बयानों, स्वभाव और आचरण को याद करें। सोचें कि उन्हें सत्ता मिलती है तो क्या वे ऐसा कुछ कर सकते हैं जो दूसरा नहीं कर सकता है। यह भी देखें कि आप जिसे विधायक चुनने जा रहे हैं, वह आपका प्रतिनिधि बनने के लायक है या नहीं। खुद से पूछें, क्या वह इतना शिक्षित या समझदार है कि बदलते वक्त को और आपकी जरूरतों या उम्मीदों की समझ रखता है; क्या वह आपकी बात दमदार तरीके से विधानसभा में उठा सकता है। कहीं ऐसा तो नहीं कि वह मुस्कुराता ही रहे और कुछ करे ही न। सिर्फ मीठी जुबान से काम नहीं चलता। मामला रिश्तेदारी निभाने का नहीं है, जिम्मेदारी निभाने का है।

मंत्री पद ही सबकुछ नहीं होता
हमेशा ऐसी स्थिति की कल्पना करें कि उस स्थिति में आपका विधायक क्या करेगा, जब उसकी पार्टी सरकार न बना सके। अगर आपको लगता है कि उस स्थिति में वह विधायक निधि का सही इस्तेमाल कर सकता है तो उसी को चुनें। यह सोचकर अवधारणा न बनाएं कि यार, सरकार तो दूसरी पार्टी की आ रही है, इसे कैसे वोट दें। हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर वोट दें। जब हर कोई ऐसा करके सिर्फ अच्छे प्रत्याशी चुनेगा तो स्वाभाविक तौर वह उसी पार्टी की सरकार बनेगी, जिसके ज्यादा प्रत्याशी अच्छे होंगे।

जिताएं ही नहीं, हराएं भी
बदलाव के लिए एक कीमत चुकानी पड़ती है। इसलिए अगर आपको इस चुनाव में उन लोगों को भी हराना पड़े, जिनका नाम बड़ा है मगर काम कुछ नहीं किया, तो उनकी जगह योग्य नए चेहरे को वोट देकर विधानसभा भेजें। सत्ता को जागीर समझ बैठे लोगों को बाहर का रास्ता दिखाना भी जरूरी है।

हिमाचल ही दिखा सकता है देश को रास्ता
ये काम मुश्किल जरूर लगते हैं। मगर हिमाचल जैसे शिक्षित राज्य के जिम्मेदार लोगों से यह उम्मीद न की जाए तो किससे की जाए? इसलिए, एकजुट रहें और जाति, क्षेत्र या अन्य आधार न बंटें। इत्मिनान से सोचें और पैसा बहाने वाले, अकड़ दिखाने वाले, बातें बनाने वाले, डराने और सताने वाले लोगों के बजाय एक आदर्श प्रत्याशी को विधानसभा भेजें। जो आपकी आवाज भी उठा सके और आपका नेतृत्व भी कर सके।

निवेदक,
टीम इन हिमाचल