जंजैहली SDM विवाद: CM को जान से मारने की धमकी वाली पोस्ट

मंडी।। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृहक्षेत्र सराज में जंजैहली में एसडीएम ऑफिस की मांग को लेकर कई दिनों से चल रहे प्रदर्शन के बाद अब नई घटना सामने आई है। इस मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे सिराज संघर्ष समिति के सचिव हेत राम ने कथित तौर पर सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को जान से मारने की धमकी दी है।

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जानकारी साने आई है कि हेत राम ने फेसबुक पर 16 फरवरी शाम 8:59 बजे पोस्ट डाली, जिसमें अभद्र भाषा इस्मातेमाल की गई थी। इसके बाद रोड पंचायत के प्रधान टेक सिंह ने जंजैहली पुलिस थाना में शिकायत दी। पुलिस ने आईपीसी की धारा 506 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। हालांकि एसपी मंडी का कहना है कि मामले में गिरफ्तारी नहीं हुई है।

आरोपी ने कहा- छेड़छाड़ हुई फेसबुक से
इस बीच हेतराम ने इस पोस्ट के अगले दिन एक और पोस्ट डाली है, जिसमें फेसबुक अकाउंट से छेड़छाड़ करने का शक जताया है। उसने लिखा है कि जिसने भी यह हरकत की है, उसे जल्द ट्रेस कर लिया जाएगा। इसके बाद तीसरी पोस्ट में लिखा- ये सब करके जायज मांग को दबाने की कोशिश की जा रही है।

सिराज संघर्ष समिति के संयोजक जगदीश रेड्डी ने कहा है कि हेतराम ने इस मामले को किसी शरारती तत्व की साजिश बताया है। बता दें कि कई दिनों से चल रहे प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री के पुतले की शवयात्रा निकालकर उसे खड्ड के किनारे फूंका गया था।

हिमाचल में जातिवाद: शुतुरमुर्ग बने बैठे हैं तथाकथित अगड़ी जातियों के कुछ लोग

इन हिमाचल डेस्क।। जातिवाद हिमाचल प्रदेश में इतने चरम पर है कि तथाकथित अगड़ी जातियों के लोग यही मानने को तैयार नहीं है कि हिमाचल में जाति के आधार पर भेदभाव होता है। सोशल मीडिया पर युवा पीढ़ी के लोगों की संख्या ज्यादा है। जहां कुछ लोग बहुत समज-बूझ भरी बातें करते नजर आए, वहीं कुछ लोगों की टिप्पणियां बता रही थीं कि वे जातिवाद से किसने ग्रस्त हैं और उनके अंदर जातिगत दंभ कितना ज्यादा है। ये कह रहे थे कि जातिवाद हिमाचल में है ही नहीं। इसीलिए इस बड़ी को समस्या को सिरे से खारिज कर देने वाले ऐसे लोगों को जाहिल यानी Ignorant कहा जा सकता है। यानी ऐसे लोग, जो अज्ञानी हैं। ऐसे में यह लेख ऐसे ही लोगों के लिए समर्पित है।

हिमाचल के कई अंदरूनी इलाकों में जाकर देखें, जातिवाद कैसा है। यह इकलौती घटना नहीं है कि बच्चे स्कूलों में मिड-डे मील साथ नहीं कर रहे। पिछले साल तो कुछ लोगों ने अपने बच्चों को स्कूल से ही हटा दिया, ताकि वे किसी अन्य जाति के बच्चों के साथ खाना न खा पाएं।

इन हिमाचल के फेसबुक पेज पर कुछ लोग तर्क दे रहे हैं कि मीडिया हौव्वा बना रहा है औऱ हिमाचल में जातिवाद है ही नहीं। वे कहते हैं कि उनके सामने भेदभाव नहीं हुआ। मगर ऐसा दावा करने वाले सभी के सभी ठाकुर, राणा, कटोच और शर्मा जैसे क्यों हैं? और एक ने तो बड़े गर्व से कहा कि मैं राजपूत हूं, फिर भी मेरे दोस्त दलित हैं। यह टिप्पणी खुद में दंभ भरी है मानो मैं अगड़ी जाति से होकर तथाकथित पिछड़ी जाति के दोस्त बनाता हूं। यह स्वयं जातिवाद से ओत-प्रोत टिप्पणी है।

ऐसी टिप्पणियां क्यों सामने नहीं आतीं कि मैं दलित हूं और मेरे साथ जातिगत भेदभाव नहीं हुआ। इसलिए, क्योंकि एक तो लगभग सभी को जीवन में किसी न किसी स्तर पर भेदभाव का सामना करना पड़ा होगा। और अगर नहीं भी करना पड़ा होगा तो हमारे समाज की सोच के कारण बहुत से लोग खुलकर ऐसा नहीं कह सकते क्योंकि वे नहीं बता सकते कि वे पिछड़ी जाति से हैं। सोशल मीडिया पर नाम के आगे दंभ से राजपूत लगाया जा सकता है, मगर उनके साथ ऐसा नहीं है।

आरक्षण की आड़ लेते लोग
टिप्णपियों में लोग कुछ जातिवाद को आरक्षण से जोड़ते नजर आए। उनका कहना था कि आरक्षण की वजह से जातिवाद है। वे बच्चों के साथ हुए घटनाक्रम को जस्टिफाई कर रहे थे। यह बात हास्यास्पद है क्योंकि उनकी सोच के ठीक उलट आरक्षण इसीलिए है, क्योंकि समाज में जातिवाद है। और यह तब तक रहेगा ही, जब तक जाति के आधार पर पक्षपात और भेदभाव नहीं रुक जाता। यह बहस हो सकती है कि आरक्षण कैसे, किस आधार पर लागू होना चाहिए, हटना चाहिए या नहीं। मगर यह समझना जरूरी है कि इसके लिए जातिवाद ही तो जिम्मेदार है।

यदि आरक्षण को खत्म करना है तो पहले जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को खत्म कीजिए। क्या तथाकथित अगड़े अपनी शादियों में अपने गांव के लगभग सभी अगड़ों को बुलाते हैं, क्या वे अपनी ही गांव के दलितों को भी शादी में न्योता देंगे और अपने साथ घर के अंदर बिठाएंगे और खाना भी सबके साथ खिलाएंगे? अगर इसका जवाब न है तो समझ लीजिए कि आप लाख दिखावा कर लें, आपके समाज में जातिवाद है। सबसे बड़ी बात, यहां शादी करने के लिए अपनी ही जाति के लोग क्यों देखे जाते हैं? कितने लोग हैं जो अपने बच्चों के लिए अंतरजातीय जीवनसाथी ढूंढते हैं?

सोचिए, उन नन्हे-मुन्नों के मासूम दिल पर क्या गुजरती होगी, जब स्कूल में उनके साथी उनके साथ खाना खाने से इनकार कर देते होंगे। जब उन्हें कहीं बैठने से मना कर दिया जाता होगा, कहीं जाने पर टोक दिया जाता होगा। समाज में बचपन से होने वाला यह भेदभाव किसी के भी दिलो-दिमाग पर गहरा असर डाल सकता है। यह बुलीइंग यानी दादागिरी का रूप है। समाज में कदम-कदम पर होने वाला यही भेदभाव हमारे समाज के एक वर्ग के आत्मविश्वास को गिराता है।

ये बच्चे बचपन में अपने माता-पिता से पूछते हैं कि साथी उनके साथ खाना क्यों नहीं खाते। यह हताशा बच्चों में एक तरह की फ्रस्ट्रेशन पैदा कर देती है। बच्चों के आत्मविश्वास का गिराकर बिना कारण उनके अंदर झिझक और शर्म पैदा कर देती है। गिरे हुए आत्मबल के कारण उसे हर जगह दोहरा युद्ध करना पड़ता है। पहले खुद से और फिर सिस्टम या एग्जाम से। यह ऐसा अनुभव है जिसे फेसबुक पर ज्ञान दे रहा तथाकथित अगड़ी जाति का व्यक्ति कभी समझ नहीं सकता।

किसी भी समस्या को दूर तभी किया जा सकता है, जब पहले माना जाए कि वाकई समस्या है। अगर यही कहते रहेंगे कि समस्या नहीं है, तो इसे दूर कैसे किया जा सकता है? यह हो सकता है कि हिमाचल में अन्य राज्यों की तरह भीषण हत्याकांड या दलितों के खिलाफ स्पष्ट भेदभाव नहीं होता हो, लेकिन यहां जातिवाद तो हर जगह है। खासकर उन इलाकों में, जहां विकास कम हुआ है। जहां देवताओं के प्रकोप का भय दिखाकर दलितों को दबाया जाता है। शुतुरमुर्ग बनने से कुछ नहीं होता, जो शिकारी देखकर रेत में अपना सिर दबा लेता है और सोचता है कि मुझे कुछ नहीं दिख रहा तो शिकारी को भी कुछ नहीं दिख रहा।

(आप भी जातिवाद को लेकर लेख inhimachal. in @ gmail.com या contact @ inhimachal. in पर भेज सकते हैं)

जातिवाद: मिड-डे मील के लिए रोल नंबर से बिठाया तो उठ गए कई बच्चे

कुल्लू।। प्रधानमंद्री नरेंद्र मोदी  का भाषण दिखाने के दौरान बच्चों को जाति के आधार पर अलग-अलग जगह बिठाने के आरोप में घिरे स्कूल को लेकर एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। चेष्टा हाई स्कूल में मिड-डे मील खिलाने के दौरान भी भेदभाव की शिकायतें आई थीं। मंगलवार को छात्रों को रोल नंबर के हिसाब से बिठाया गया। मगर कुछ बच्चे खड़े हो गए और स्कूल प्रबंधन सभी को साथ खाना नहीं खिला पाया। (कवर इमेज प्रतीकात्मक है)

पढ़ें- जातिवाद पर शुतुरमुर्ग बन बैठे हैं हिमाचल के कुछ लोग

इससे पता चलता है कि नन्हे-मुन्नों के मन में किस कदर जातिवाद का जहर भर चुका है जो वे अपने ही साथियों के साथ बैठकर खाना नहीं खा सकते। यह सोच उन्हें किसी औऱ से नहीं, बल्कि अपने समाज से विरासत में मिली है और अफसोस की बात यह है कि अभी भी ऐसी घटनाओं को कुछ लोग स्वीकारने के बजाय इन्हें झूठी और मनगढ़ंत करार दे रहे हैं। जबकि प्रदेश के अंदरूनी इलाकों में अभी भी जातिवाद मौजूद है।

इसके अलावा एक और वीडियो सामने आया है जिसमें इसी स्कूल के बच्चे ये कहते नजर आ रहे हैं कि जाति के आधार पर बच्चों को किचन में जाने नहीं दिया जाता। इसमें किसी शख्स द्वारा धमकी देने की भी बात कही जा रही है और एक अध्यापक के साथ भी भेदभाव होने का जिक्र किया जा रहा है। यह वीडियो कुछ लोगों ने शेयर किया है मगर संवेदनशील मामले में बच्चों को खतरा होने की आशंका के कारण हम उसे आपके साथ साझा नहीं कर रहे।

इस बीच विभिन्न संगठनों ने उपायुक्त को शिकायत दी है कि हाई स्कूल चेष्टा ही नहीं, कुल्लू के कई स्कूलों में जाति के आधार पर भेदभाव हो रहा है। उन्होंने ऐसा करने देने वाले शिक्षकों को हटाने की मांग की है। मंत्री गोविंद ठाकुर ने इस तरह के मामलों को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।

जेल में बंद डीडब्ल्यू नेगी से हिमाचल के डीजीपी की मुलाकात पर उठे सवाल

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में बीजेपी की सरकार आने के बाद पुलिस विभाग के मुखिया यानी डीजीपी बनाए गए सीताराम मरडी के बारे में ख़बर सामने आई है कि उन्होंने गुड़िया केस में हवालात में कैदी की मौद के मामले में बंद शिमला के पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी से मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात को प्रशासन ने गुप्त रखा लेकिन अब चर्चा चल रही है कि डीजीपी उनसे मिलने गए क्यों।

 

बता दें कि नेगी के खिलाफ हाल ही में सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। एक अन्य मामले में नेगी पर उनके करीबी रिश्तेदार ने आत्महत्या से पहले लिखे सुसाइड नोट में परेशान किए जाने का आरोप भी लगाया था। उन्हें वीरभद्र सिंह का करीबी माना जाता है और पिछली सरकार के दौरान तत्कालीन उन्हें आईपीएस की कैडर पोस्टिंग के नियमों को दरकिनार कर एसपी शिमला के पद तैनाती दी गई थी।

 

कब हुई मुलाकात
डीजीपी और पूर्व एसपी शिमला की इस मुलाकात के संबंध हिमाचल प्रदेश के अखबारों में भी खबरें आई हैं और लिखा गया है कि ‘इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मुलाकात के माध्यम से पुराना रिश्ता निभाया जा रहा है या कुछ और’ बात है। पंजाब केसरी के मुताबिक यह मुलाकात पंद्रह मिनट तक हुई। मामला 10 फरवरी का बताया जा रहा है।

 

नियम ताक पर?
अखबार लिखता है कि दस फरवरी को डीजीपी सीताराम मरडी पुलिस लाइन कैथू का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उन्होंने वहां चल रहे निर्मा का रुकवाया और डीडब्ल्यू नेगी से जेल सुपरिटेंडेंट के कमरे में अनौपचारिक मुलाकात की। हालांकि अखबार ने मरडी के हवाले से लिखा है कि वह पुलिस लाइन में निर्माण रुकवाने गए थे और जेल के अंदर नहीं गए थे। उन्होंने कहा है कि बाहर बने सुपरिटेंडेंट के कमरे में नेगी से मुलाकात की है। जेल सुपरिटेंडेंट ललित मोहन शर्मा ने भी इस मुलाकात की पुष्टि की है।

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डीजीपी सीताराम मरडी

ऐसे में इन बयानों को लेकर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि जेल में बंद कैदी को अस्पताल या कोर्ट ले जाने के ही जेल से बाहर लाया जा सकता है। और अगर किसी को मिलना हो तो कैदी को अपने रिश्तेदारों और परिचितों की सूची जेल को मुहैया करवानी होती है और तय समय पर मुलाकात घर में ही कैदी से मुलाकात हो सकती है। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात में नियमों का पालन नहीं किया गया।

CM ने हरी झंडी दिखाई और कुछ दूर जाकर खड़ी हो गईं इलेक्ट्रिक टैक्सियां

शिमला।। शनिवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इलेक्ट्रिक टैक्सियों हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, लेकिन इसके बाद ड्राइवरों ने इन टैक्सियों को कुछ ही दूर पुलिस मुख्यालय के पीछे खड़ा कर दिया। यह दूरी 200 मीटर से भी कम है। दरअसल ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि ड्राइवरों को इन टैक्सियों को चलाने का ढंग से प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया था।

 

इस संबंध में प्रदेश के मीडिया में जो खबरें आ रही हैं, वे चौंकाने वाली हैं। जागरण लिखता है कि हरी झंडी दिखाने के बाद कुछ ही दूरी पर 11 गाड़ियों को लाइन से खड़ा कर दिया। इसके बाद हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के चालकों ने एक के बाद एक अधिकारियों को फोन करने शुरू कर दिए कि अब वे कहां जाएं।

 

दरअसल बताया जा रहा है कि इन टैक्सियों का तो सिस्टम ही अलग है। ऐसे में ड्राइवरों को न कोई प्रशिक्षण दिया गया है कि आखिर ये टैक्सियां चलेंगी कैसे और इन्हें पार्क गियर में करना है या फिर न्यूट्रल। मुख्यमंत्री और लोगों को दिखाने के लिए एचआरटीसी के अधिकारियों ने इलेक्ट्रिक टैक्सियों को बिना चालकों को प्रशिक्षण के शुरू कर दिया है जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं।

 

अखबार के मुताबिक, शिमला में पुलिस मुख्यालय से पीछे पार्क की गई इलेक्ट्रिक टैक्सी के चालकों ने बताया कि उन्हें सचिवालय से रवाना तो कर दिया लेकिन पता ही नहीं है कि जाना कहां है। एक चालक ने खड़ी गाड़ी का गेयर बदलने की नॉब को न्यूट्रल कर दिया और कहा कि यह गाड़ी न्यूट्रल पार्क होती है। दूसरे चालक ने उसे दोबारा गियर में बदल दिया और कहा कि अभी गाड़ी चल पड़ेगी। चालक ने बताया कि उसे टैक्सी थमा दी है लेकिन प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। टिकट काटने को लेकर भी कुछ पता नहीं है। न ही टिकट काटने की मशीन का प्रशिक्षण दिया गया है।

 

हालांकि विभाग के अधिकारियों का दावा है कि टैक्सी दिनभर चली और चालकों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। ऐसे में सवाल उठाए जा रहे हैं कि बिना तैयारी के शो ऑफ़ की क्या ज़रूरत थी?

क्या मुख्यमंत्री जयराम को नहीं पता सीट बेल्ट के फायदे? करेंगे रिव्यू

शिमला।। शिमला में पुलिस ने चौपहिया वाहनों की आगे की दोनों सीटों पर बैठने वालों के लिए सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस अभियान के तहत शिमला पुलिस ने शहर में विभिन्न जगहों पर चेकिंग की और सीट बेल्ट न पहनने पर 108 गाड़ियों के चालान किए।

 

हालांकि ऐसी भी खबरें हैं कि पुलिसकर्मियों ने मंत्रियों और नेताओं पर ऐसी कार्रवाई नहीं की। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सुबह जब सचिवालय पहुंचे, उनकी पायलट गाड़ी में ड्राइवर और आगे बैठे सुरक्षा अधिकारी ने भी बेल्ट नहीं लगाई हुई थी। ऐसा ही शिमला के विधाय और शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज की गाड़ी में भी देखने को मिला। मगर चौंकाने वाली बात है इस मामले पर आया मुख्यमंत्री का बयान, जिन्होंने कहा कि इस फैसले को रिव्यू किया जाएगा।

 

क्या कहते हैं मुख्यमंत्री
अमर उजाला में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का एक बयान छपा है, जिसमें उन्होंने कहा है, “बहुत जल्दी में यह फैसला हुआ है। मुझे तो खुद भी अखबार से पता चला है। हम अधकारियों से बात करें, इसके फायदे-नुकसान क्या हैं, इस पर चर्चा करेंगे। इसे रिव्यू करने के बाद सरकार स्थिति स्पष्ट कर पाएगी।”

 

क्या है नियम, क्यों है जरूरी
सेंट्रल मोटर वीइकल्स रूल के नियम (125) 1 के तहत हर कार कंपनी को कहा जाता है कि चौपहिया वाहनों में ड्राइवर औऱ साथ वाली फ्रंट सीट में सीट बेल्ट जरूर लगाकर दें। साथ ही पीछे की सीट, जो फ्रंट की तरफ हो, उसमें भी बेल्ट होनी चाहिए।

 

दरअसल सीट बेल्ट लगाना जरूरी है क्योंकि सामने से होने वाली टक्कर (हेड ऑन कलिज़न) की स्थिति में सीट बेल्ट हमें उछलकर सामने गाड़ी की विंडशील्ड आदि से टकराने से रोकती है। बहुत बार देखा जाता है कि छोटी मोटी टक्कर में भी लोग बुरी तरह जख्मी हो जाते हैं क्योंकि जड़ता (Intertia) के कारण वे अपनी ही गाड़ी के सामने के हिस्सों से टकरा जाते हैं या फिर उछलकर बाहर गिर जाते हैं। सीट बेल्ट लगाने पर ऐसी स्थिति में बचाव होता है। नीचे वाले वीडियो को देखें, ड्राइवर वाली सीट पर रखी डमी और पीछे की एक डमी को सीट बेल्ट लगाई गई है।


वैसे तो सीट बेल्ट सभी सीटों पर पहनी जानी चाहिए, ऐसे में अगर फ्रंट सीटों पर इसे जरूरी कर रही है तो रिव्यू करने की क्या ज़रूरत है? उल्टा मुख्यमंत्री को तो पुलिस की इस पहल की स्वागत करके लोगों से अपील करनी चाहिए थी, उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए था कि वे सीट बेल्ट पहनें। भारत में सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं। 2016 में हादसों में डेढ़ लाख लोगों की मौत हुई थी। सीट बेल्ट लगाने से इन हादसों में नुकसान कम किया जा सकता है।

अरुण धूमल सोशल मीडिया पर फिर सक्रिय, शांता पर साधा निशाना?

शिमला।। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के छोटे बेटे अरुण धूमल  विधानसभा चुनाव से पहले अक्सर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते थे मगर चुनावों के नतीजे आने के बाद से सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता कम हो गई थी। इन चुनावों में उनके पिता प्रेम कुमार धूमल सीएम कैंडिडेट होते हुए भी सुजानपुर से चुनाव हार गए थे।

 

मगर वीरभद्र सिंह पर लगे आय से अधिक संपत्ति मामले में वकामुल्ला चंद्रशेखर की ईडी द्वारा गिरफ्तारी के बाद वह सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने न सिर्फ इसका श्रेय लिया बल्कि एक अन्य घटनाक्रम में नाम लेते हुए इशारों ही इशारों में पार्टी के वरिष्ठ नेता शांता कुमार द्वारा सरकार पर असंतोष जताने पर भी प्रहार किया है। वकामुल्ला पर प्रतिक्रिया देने से पहले उन्होंने दो ही पोस्टें डाली थीं- 22 जनवरी को वसंत पंचमी की और 14 जनवरी को एक पोस्ट क्रिकेट पर। दिसंबर में भी एक पोस्ट धर्मशाला स्टेडियम से संबंधित वीडियो की की थी।

क्या लिखा है अरुण ने
अरुण ने आज एक के बाद एक कुछ पोस्ट डाले हैं, जिनसे समझा जा सकता है कि इशारा किस तरफ है। गौरतलब है कि पीएनबी स्कैम को लेकर शांता कुमार सरकार के नाकाम रहने पर असंतोष जताया था। पढ़ें, क्या लिखते हैं अरुण-

गौरतलब है कि पिछले दिनों शांता कुमार ने ही उस दौरान कार्यकर्ताओं को अनुशासन की शिक्षा दी थी, जिस समय वे प्रेम कुमार धूमल के चुनाव हारने के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री पद देने के लिए पीटर हॉफ के बाहर केंद्र से आए नेताओं के सामने नारेबाजी कर रहे थे। ऐसे में एक के बाद एक डाले गए पोस्ट इशारा यही करते हैं।

कुछ टिप्पणियां पर्सनल भी मालूम होती हैं।

2016 में भी अरुण धूमल ने शांता कुमार पर निशाना साधते हुए कुछ अपरिपक्व टिप्पणियां की थीं और इशारों ही इशारों में विक्रम (शांता के पुत्र) और कायाकल्प (शांता कुमार के ट्रस्ट) का ज़िक्र किया था।

बहरहाल, वकामुल्ला पर अरुण धूमल ने जो लिखा है, इससे यही प्रतीत होता है कि इस मामले में सारी एजेंसियां उन्हीं से पूछकर कार्रवाई कर रही हैं। बता दें कि हाल ही में राज्य में आई बीजेपी सरकार ने उनके भाई अनुराग ठाकुर से जुड़े एचपीसीए के मामले वापस लेने का फैसला किया है।

2012 के अंत में सत्ता में आते ही वीरभद्र सरकार ने एचपीसीए के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो में कई मामले दर्ज किए। पिछली कांग्रेस सरकार के पूरे कार्यकाल में इन तमाम मामलों पर जांच चलती रही, जबकि भाजपा नेता इन्हें राजनीतिक मामले ही बताते रहे।

PNB स्कैम को लेकर मोदी सरकार से नाराज हुए शांता कुमार

शिमला।। हर मुद्दे पर बेबाकी से राय रखने वाले हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांगड़ा से भारतीय जनता पार्टी के सांसद शांता कुमार ने पीएनबी स्कैम को लेकर अपनी ही सरकार के प्रति नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है कि “मोहम्मद गौरी, गजनी और अंग्रेजों ने भारत को लूटा था, लेकिन अब अपने ही लोग लूट रहे हैं। फर्क इतना है कि तरीका बदल गया है। अब लूटने वाले भी अपने हैं और लुटने देने वाली सरकार भी अपनी है। इससे बड़ा कोई दुर्भाग्य नहीं हो सकता।”

 

शांता ने  कहा है कि आजादी के 70 साल बाद भी देश लूटा जा रहा है। करोड़ों-अरबों रुपया कुछ बड़े उद्योगपतियों को उधार देकर लुटाया जा रहा है। उधार लेने में नियमों को ताक पर रखा गया। बैंकों ने पैसा वापस न आने पर राशि को उधार की मद में डाल दिया। लेकिन ऐसे रसूखदारों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

 

उन्होंने कहा, “लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कांग्रेस के समय यह एनपीए राशि 52 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इसे कम करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन छह लाख करोड़ रुपये का तो कहीं कोई हिसाब नहीं है। नतीजतन यह धन हमेशा के लिए डूब गया। अब 52 लाख करोड़ रुपयों में से कितना धन वापस आएगा और कितना डूब जाएगा, इस पर कुछ कहा नहीं जा सकता।”

 

‘खजाने लूटकर भाग रहे अमीर’
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि गरीब किसान उधार लेता है। उसकी फसल बर्बाद होती है और वह उधार चुका नहीं पाता। उस पर सख्त कार्रवाई होती है। सिर्फ गरीब किसानों तक सीमित कार्रवाई का ही नतीजा है कि तीन लाख से अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं। दूसरी तरफ अमीर करोड़ों-अरबों रुपये लेकर भाग जाते हैं। विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे लोग खुलेआम देश के खजाने को लूटकर भाग रहे हैं।

 

अपना बयान उन्होंने फेसबुक पेज पर भी शेयर किया है:

वीरभद्र ऐंड फैमिली की मुश्किलें बढ़ीं, वकामुल्ला गिरफ्तार

नई दिल्ली।। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और अन्य के ख़िलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति मामले में शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय ने वकामुल्ला चंद्रशेखर नाम के कारोबारी को गिरफ्तार किया है। बता दें कि यह वही शख्स है जिसने अपने निजी खातों से वीरभद्र परिवार को 5.9 करोड़ रुपये दिए थे।

 

ईडी के अधिकारियों ने बताया कि तारीनी ग्रुप ऑफ कंपनीज के निदेशक/प्रमोटर वकामुल्ला चंद्रशेखर को केंद्रीय जांच एजैंसी ने मनी लॉन्ड्रिग एक्ट के तहत बीती रात को गिरफ्तार किया था, जिसे आज विशेष अदालत में पेश किया गया। एजैंसी ने पहले कहा था कि चंद्रशेखर ने वीरभद्र व उनके परिवार को अपने 3 निजी खातों से 5.9 करोड़ रुपए उपलब्ध करवाए थे।

 

कहां से पैसे लाया था वकामुल्ला?
जब फंड के स्रोत बारे जांच की गई तो सामने आया है कि उक्त राशि आवास प्रविष्टी आप्रेशन में लिप्त कंपनियों के माध्यम से हुई थी। इस महीने के शुरूआती दिनों में ही दिल्ली की विशेष अदालत ने इस मामले में वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह और 3 अन्य आरोपियों को तलब किया था।

वीरभद्र पर क्या है आरोप
ई.डी. ने वीरभद्र सिंह पर आरोप लगाया है कि जब वह पूर्व केंद्रीय मंत्री थे तो उन्होंने अपनी पत्नी व अन्य लोगों के साथ मिलकर 7 करोड़ की अपराध आय को कृषि आय के रूप में पेश किया तथा इसे एल.आई.सी. पोलिसी की खरीद में निवेश किया। अदालत ने इस मामले में वीरभद्र व उनकी पत्नी सहित यूनिवर्सल एप्पल एसोसिएट के मालिक चुन्नी लाल चौहान को तलब किया। ई.डी. ने इस मामले में एल.आई.सी. एजैंट आनंद चौहान को भी नामित किया था।

सीबीआई भी कर रही है जांच
मामले के सिलसिले में सी.बी.आई. द्वारा दायर किए गए अलग मामले में वीरभद्र, उनकी पत्नी, आनंद चौहान पर अन्य आरोपो सहित आरोपपत्र लगाए थे। सी.बी.आई. द्वारा दर्ज मामले में चुन्नी लाल चौहान, डाक टिकट विक्रेता जोगिंदर सिंह घट्टा, वकामुल्ला चंद्रशेखर और सहआरोपी लॉन कुमार, प्रेम राज और राम प्रकाश भाटिया भी आरोपी बनाए गए हैं। सी.बी.आई. ने दावा किया था कि वीरभद्र सिंह ने लगभग 10 करोड़ की संपत्ति जुटाई थी जो केंद्रीय मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उनकी कुल आय से अधिक आय थी।

हमीरपुर में छात्रा से कॉलेज में बलात्कार के आरोप में टीचर गिरफ्तार

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, हमीरपुर।। हमीरपुर में कॉलेज के अंदर छात्रों द्वारा एक शख्स की पिटाई का जो वीडियो सामने आया था, उसमें चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। स्पष्ट हुआ है कि पिट रहा शख्स छात्रा से रेप करने का आरोपी है। मेडिकल में पुष्टि हुई है और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

 

यह है जानकारी
पुलिस के मुताबिक कॉलेज लेक्चरर ने छात्रा के साथ संस्थान के कमरे में ही रेप किया था। साथ ही किसी को न बताने का दबाव डाला था। लेकिन इसी बीच पीडि़ता ने घटना का जिक्र अभिभावकों व दोस्तों से कर लिया। बीती शाम प्राध्यापक की कैंपस में ही जमकर धुनाई की गई। यहां तक की नाबालिग छात्राओं ने भी जमकर गुस्सा जाहिर किया।

दोपहर बाद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके बाद खुद पुलिस अधिकारियों को भी कॉलेज का रुख करना पड़ा।

बहरहाल इस मामले में पुलिस ने पीडि़ता का बयान दर्ज कर लिया है। शुरूआती छानबीन में पुलिस को पता चला है कि प्राध्यापक द्वारा छात्रा से लंबे अरसे से नागवार हरकतें की जा रही थी, लेकिन शिष्या मर्यादा के चलते टीचर के नापाक इरादों को शुरू में भांप नहीं पाई। इसी का लाभ उठाकर शिक्षक ने छात्रा को हवस का शिकार बना लिया।

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एसपी रमन कुमार मीणा का कहना है कि पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। उनका कहना है कि छानबीन जारी है।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की ख़बर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)