कांगड़ा।। कांगड़ा जिले के नगरोटा सूरियां में रसोई गैस का सिलिंडर फटने से दो लोगों की मौत हो गई है। अन्य घायलों का टांडा हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हादसे पर शोक जताया है और व्यस्तता के चलते सरकार के दो मंत्रियों को जिम्मा सौंपा है कि घायलों के इलाज की देख-रेख की जाए।
इसके तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री विपिन सिंह परमार ने गुरुवार को टांडा अस्पताल पहुंचकर घायलों का कुशलक्षेम जाना। उन्होंने दो लोगों की मृत्यु पर शोक जताते हुए कहा कि मृतक फौजी राम व कैंथू राम के परिजनों को सरकार की ओर से चार-चार लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।
परमार से पहले बुधवार रात तीन बजे शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी भी टांडा पहुंची थीं और उन्होंने अस्पताल में घायलों के इलाज के इंतज़ामों का जायजा लिया था।
आंशिक तौर पर घायल एक शख्स को छुट्टी दे दी गई है जबकि एक शख्स पठानकोट में इलाज करवा रहा है। 19 घायलों का इलाज टांडा में चल रहा है। प्रशासन का कहना है तुरंत राहत के तौर पर सभी घायलों को धनराशि मुहैय्या करवा दी गई है।
कांगड़ा।। जिले के पालमपुर के पास परौर में बच्ची से बलात्कार के सबी आरोपी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिए हैं। दो नाबालिग आरोपी पहले ही धर लिए गए थे जबकि तीन बालिक आरोपी फरार चल रहे। हिमाचल पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस की मदद से गोरखपुर से गिरफ्तार किया है।
घटना के दस दिन बाद पुलिस को कामयाबी मिली है मगर देर हो जाती तो वे नेपाल भाग गए होते। इस मामले में पुलिस इन तीन से पहले दो नाबालिग आरोपियों और उन्हें शरण देने वाले को गिरफ्तार कर चुकी है।
क्या है मामला
26 अप्रैल को एक छात्रा अपने दोस्त के साथ गढ़ माता मंदिर से लौट रही थी जब पांच आरोपियों ने उसके दोस्त को बंधक बना लिया था। इसके बाद उन्होंने छात्रा से गैंगरेप किया था।
कांगड़ा के एसपी संतोष पटियाल ने धर्मशाला में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि तीन आरोपियों को गिरफ्तार करके पालमपुर लाया जा रहा है जहां उनकी शिनाख्त करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि ये तीनों स्थानीय निवासी हैं और मेलों में अस्थायी दुकानें लगाया करते थे।
शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कसौली में जिस महिला अधिकारी को कथित तौर पर होटल मालिक ने गोली मारी थी, उस अधिकारी ने होटल परिसर में दाखिल होने से पहले वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं दी थी। यानी एक तरह से सरकार यह कहना चाह रही है कि दिवंगत महिला अधिकारी से चूक हुई थी। मगर सरकार के इस बयान पर इसलिए सवाल उठ रहे हैं क्योंकि वह सहायक नगर नियोजन अधिकारी रहीं शैल बाला को हिमाचल गौरव पुरस्कार देने का एलान कर चुकी है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जिस अधिकारी को एक तरफ आप बहादुरी के लिए सम्मानित करने की बात कर रहे हैं, उसी को सुप्रीम कोर्ट में लापरवाह कैसे बता रहे हैं।
सरकार ने कहा कि कसौली की असिस्टेंट टाउन ऐंड प्लैनिंग ऑफिसर शैल बाला शर्मा नायारणी गेस्ट हाउस में जब दाखिल हुई थीं, तब उन्होंने डिमोलिशन टीम के प्रमुख को जानकारी नहीं दी थी। रिपोर्ट में कहा गया है, “अवैध निर्माण ढहाने का काम शांति से चल रहा था मगर लंच ब्रेक के बाद कसौली की असिस्टेंट टाउन प्लैनर शैल भाला शर्मा, जो कि नायब तहसीलदार कसौली जगपाल सिंह की प्रमुखता वाली टीम नंबर वन की कोऑर्डिनेटर थीं, वन विभाग के रेंज ऑफिसर रविंदर पाल सिंह और एक मजदूर के साथ नारायणी गेस्ट हाउस के परिसर में बिना टीम प्रमुख को सूचित किए दाखिल हो गई थीं।”
इससे पहले शुक्रवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने माना था कि अवैध कब्जे ढहाए जाने के अभियान के दौरान पुलिस से कुछ चूक हुई थी। सोलन के एसपी मोहित चावला का तबादला भी कर दिया गया है। इस बीच ऐसी भी खबरें आई थीं कि जब शैल बाला को गोली मारी गई थी, तब उनसे साथ सिक्यॉरिटी नहीं थी। हालांकि पुलिस ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है क्योंकि उसका कहना है कि अभी शिमला के डिविज़नल कमिश्नल मामले की जांच कर रहे हैं।
इस तरह से हिमाचल प्रदेश सरकार पर सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं क्योंकि एक तरफ तो वह दिवंगत अधिकारी शैल बाला को हिमाचल गौरव सम्मान देने की बात कर रही है, जबकि दूसरी तरफ बता रही है कि अधिकािरी अपनी मौत के लि एक तरह से खुद जिम्मेदार है। ऐसे में सरकार के विरोधाभासी रुख पर सवाल उठना शुरू हो गए हैं।
इन हिमाचल डेस्क।। कसौली में अवैध निर्माण तोड़े जाने के दौरान होटल मालिक की गोली से महिला अधिकारी की मौत ने पूरे हिमाचल को हिलाकर रख दिया है। इस हत्या से हर कोई विचलित है और रह-रहकर यही सवाल उठ रहा है कि अपना हिमाचल तो ऐसा न था, आखिर कैसे इस तरह के अपराध होने लग गए। इस घिनौने अपराध की जितनी भी निंदा की जाए, कम है। अवैध निर्माण को बचाने के लिए उस शख्स ने न सिर्फ एक बेकसूर महिला की जान ले ली, बल्कि अपना और अपने परिवार का भी जीवन तबाह कर दिया।
बेकसूर महिला ऑफिसर, जो सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करके अपना फर्ज अदा कर रही थी, उसकी मौत के लिए सिर्फ गोली चलाने वाला वह होटल मालिक ही जिम्मेदार नहीं, बल्कि हमारे राजनेता भी बराबर के जिम्मेदार हैं, हमारी सरकारें भी जिम्मेदार हैं। इसलिए, क्योंकि राजनेताओं की वोट हासिल करने के लिए तुष्टीकरण भरी राजनीति के कारण ही यह नौबत आई है।
सरकारें देती हैं अवैध काम को संरक्षण
आप आए दिन पढ़ते होंगे कि अवैध कब्जे नियमित किए जाएंगे, होटलों को तोड़ने से बचाने के लिए कानून में बदलाव किया जाएगा, अवैध निर्माण नियमित कर दिए जाएंगे। ये फैसले करता कौन है? हमारे राजनेता, हमारी सरकारें। और यही कारण है कि इस तरह के फैसलों के कारण आम लोगों को उकसावा मिलता है कि जमकर अवैध कब्जे करो, जमकर अवैध निर्माण करो, कल को ये राजनेता वोटों के चक्कर में इसे नियमित तो कर ही देंगे।
यही हिमाचल प्रदेश में होता आया है। वीरभद्र सरकार के दौरान जब सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों का मालिकाना हक कब्जाधारियों को दिया जाने लगा था तब ‘इन हिमाचल’ ने इसका विरोध किया था कि इस तरह से तो आप खुला संकेत दे रहे हैं कि जो अवैध कब्जा करेगा, उसकी मौज है और जो गैरकानूनी काम नहीं करता, वह बेवकूफ है (पढ़ें)। इसी तरह जयराम सरकार ने भी जब एनजीटी के आदेशों की काट निकालने के लिए अवैध निर्माण करने वाले होटलों को राहत देने के लिए कानून ही बदल डाला था, तब भी ‘इन हिमाचल’ ने इसका विरोध किया था (पढ़ें)।
लालच में आते हैं लोग
सरकारों और इन वोटों के लालची नेताओं के चक्कर में आम जनता के मन में जो लालच पैदा होता है, उसके लिए ये राजनेता और सरकारें ही तो जिम्मेदार हैं। वे सरकारी जमीनो पर अवैध कब्जे करने लग जाते हैं, उसपर घर बनाने लगाते हैं, नक्शे पास करवाए बिना इमारते खड़ी करने लगते हैं। उन्हें लगता है कि क्या होगा, सरकार छूट तो दे ही देगी इलेक्शन आते ही। इस चक्कर में अपना सारा पैसा वे फंसा देते हैं।
पहले कहां होते हैं शासन-प्रसासन?
जो काम सरकारों और प्रशासन को करना चाहिए, वह न्यायपालिका को करना पड़ता है। जब कोर्ट से इन अवैध निर्माणों या कब्जों को हटाने का आदेश आता है, तब तक लोग बहुत सारा पैसा, अपनी पूंजी लगा चुके होते हैं। सरकार और तंत्र ने उन्हें लालची बनाया होता है और अब उस लालच में वे रही सही पूंजी भी लगा बैठते हैं। ऐसे में कोर्ट के आदेश आते हैं तो सरकार और प्रशासन तुरंत कब्जों को गिराने चल पड़ते हैं। मगर वे तब कहां होते हैं जब कब्जे हो रहे होते हैं, अवैध निर्माण हो रहे होते हैं?
ताकतवर लोगों को आंच तक नहीं आती
कसौली की दुर्भाग्यपूर्ण घटना को सही ठकराने की कोशिश भी नहीं की जा सकती। हत्यारे को कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए। मगर साथ ही साथ उन लोगों को भी तो सजा होनी चाहिए जिसने उस होटल वाले को हत्यारा बनाया? हत्यारा बनाता है ये सिस्टम। हर कोई सरकार में बैठे उस मंत्री की तरह ताकतवर तो नहीं कि अपने होटल पर आंच आए तो कानून ही बदलवा दे (पढ़ें)। फिर वह क्या करेगा?
इस हत्या के मामले में न सिर्फ उस होटल मालिक को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि दोबारा कोई इस तरह की हरकत करने के बारे में सोच न पाए। साथ ही शासन और प्रशासन की भी जिम्मेदारी मानते हुए उन राजनेताओं और आला अधिकारियों पर भी मुकदमा चलना चाहिए, जो अवैध को वैध बनाने के खेल में जनता को मुफ्तखोर और अपराधी बना रहे हैं। चंद वोटों के चक्कर में इन्होंने हिमाचल को बर्बाद कर दिया है। शिमला में जंगल के जंगल साफ हो गए। देवदार काटकर सरकारी भूमि पर सेब के बागीचे लगा दिए। और सरकारें कब्जाधारियों को राहत देने के लिए नए-नए नियम लाती रहीं। अब समय आ गया है जब यह सिलसिला बंद होना चाहिए।
कांगड़ा।। पालमपुर के पास परौर में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित गैंगरेप का मामला सामने आया है। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार लड़की अपने दोस्त के साथ गढ़ माता मंदिर गई थी। जंगल से होकर जाने वाले रास्ते में उन दोनों को देखकर वहां आए युवकों ने उन्हें टोका और फिर लड़के के साथ मारपीट करने के बाद लड़की के साथ इस वारदात को अंजाम दिया।
ऐसी जानकारी सामने आ रही है वारदात को अंजाम देने वाले लड़कों की संख्या चार से पांच है और वे आसपास के ही हो सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां से होकर अकेले आने वाले युवक-युवतियों और प्रेमी जोड़ों को पहले भी निशाना बनाए जाने की खबरें आती रहती हैं।
ताजा घटना के संबंध में पामलपुर की 15 वर्षीय नाबालिग की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। पीड़ित लड़का-लड़की दोनों ही हमलावरों को नहीं जानते हैं। इस संबंध में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
‘इन हिमाचल’ ने इस संबंध में एसपी कांगड़ा संतोष पटियाल से संपर्क करने की कोशिश की मगर वह फोन पर उपलब्ध नहीं हो सके। उधर ‘हिमाचल अभी अभी’ पोर्टल के मुताबिक डीएसपी पालमपुर विकास धीमान ने कहा है कि मामला दर्ज करके छानबीन शुरू कर दी गई है। बताया जा रहा है कि हमलावरों में से दो ने रेप किया है।
उधर सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस घिनौनी हरकत को जस्टिफाई करने की कोशिश करने में भी जुट गए हैं। वे इस तरह के वाहियात सवाल उठा रहे है कि लड़की आखिर जंगल में करने क्या गई थी। लेकिन बात यह है कि कोई कहीं भी कुछ भी कर रहा हो, क्या इससे दूसरों को रेप का अधिकार मिल जाता है?
ऊना।। कांग्रेस विधायक दल के नेता और हरोली से विधायक मुकेश अग्निहोत्री पर एक दिवंगत पुलिसकर्मी के परिजनों ने ओछी राजनीति करने का आरोप लगाया है।
दरअसल जयराम सरकार को घेरने के लिए मुकेश अग्निहोत्री ने आरोप लगाया था कि उनके इलाके में रहने वाले दो पुलिसकर्मियों की मौत तबादला कर दिए जाए की वजह से हुई है। मगर इनमें से एक पुलिसकर्मी की पत्नी और बेटे ने डीसी ऊना को ज्ञापन सौंपा है और मांग की है कि इस मामले में राजनीति करने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
पुलिस विभाग में काम करने वाले बुद्ध सिंह की पांच अप्रैल को ब्रेन हैमरेज के कारण मृत्यु हो गई थी। अग्निहोत्री ने दावा किया था तबादला होने के कारण बुद्ध सिंह मानसिक रूप से परेशान थे और तनाव में थे। मगर बुद्ध सिंह की पत्नी परमजीत ने कहा कि उनके पति की मौत ब्रेम हैमरेज से ही हुई है और उनहें प्रताड़ित नहीं किया गया।
दरअसल मुकेश अग्निहोत्री की अगुवाई में एडीसी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजा गया था। इसमें कहा था कि बदले की भावना से बीजेपी सरकार ने बीमार पुलिसकर्मियों के तबादले कर दिए जिनके उनकी मौत हो गई। कांग्रेस ने इन्हें राजनीतिक हत्या बताते हुए उच्चस्तरीय जांच करने और हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की थी।
मगर अब इनमें से एक दिवंगत पुलिसकर्मी बुद्ध सिंह की पत्नी परमजीत ने कहा कि यह बात झूठ है उनके पति का तबादला हुआ था। उन्होंने कहा कि 25 साल तक उनके पति ने पुलिस विभाग में सेवाएं दीं और पिछले दस साल से वह पुलिस लाइन झलेड़ा में ही तैनात थे।
वहीं बुद्ध सिंह के बेटे ने कहा कि उन्हें और उनके परिवार को इस बात से आघात पहुंचा है कि कैसे उनके पिता की मौत पर राजनीति की जा रही है। उन्होंने डीसी से मांग की है कि ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई करें।
शिमला।। गुड़िया रेप ऐंड मर्डर केस को सुलझाने का दावा करने वाली सीबीआई की जांच से हिमाचल प्रदेश के बहुत से लोग असंतुष्ट नजर आ रहे हैं और वे सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी शंकाएं जाहिर कर रहे हैं। इसी सिलसिले में एक बार फिर से हिरासत मे मारे गए संदिग्ध की पत्नी और दोस्तों के बयान की खबरों की कटिंग्स और लिंक शेयर किए जाने लगे हैं।
बहुत से लोग इस बात को हजम नहीं कर पा रहे कि कांगड़ा जिले के रहने वाले चरानी ने अकेले इस वारदात को अंजाम दिया था। भले ही सीबीआई कह रही हो कि जांच जारी है, मगर उसने इस केस को सुलझा लेने का दावा किया है। चूंकि संदिग्ध चरानी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और सीबीआई ने अब चार्जशीट दाखिल करने की बात कही है, फिर भी कुछ सवालों का जवाब न मिलना लोगों को परेशान कर रहा है।
साथ ही अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि हिरासत में हुई नेपाली संदिग्ध सूरज की मौत की वजह क्या है। लोगों को लगता है कि असली आरोपियों को बचाने के लिए पुलिस कर्मियों ने सूरज की हत्या कर दी थी ताकि वह सच न उगल दे। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पेज से कुछ तथाकथित रसूखदार संदिग्धों की तस्वीरें डालकर हटाए जाने की घटना के कारण भी शंकाएं पैदा हुईं। बाद में जिस तरह के पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह के बयान को लेकर खबरें आई थीं, उसने भी जनता के मन में शक पैदा करने का काम किया था और वे शंकाएं आज तक बरकरार हैं।
इस तरह की खबरों के कारण भी आज तक भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
जनता के बीच यह भ्रम की स्थिति इसलिए भी बनी हुई है, क्योंकि उस समय कई तरह की बातें सोशल मीडिया से लेकर अखबारों में छपी हुई थीं। और उसके बाद भले ही पुलिस के आला अधिकारी हिरासत में हुई मौत को लेकर सीबीआई की जांच के बाद जेल में हों, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सूरज की मौत कैसे हुई, किसकी पिटाई से हुई और पिटाई का कारण क्या था। सीबीआई ने इसे लेकर जो रहस्य बनाया हुआ है और जानकारियों को सार्वजनिक करने से बच रही है, उससे भी लोगों में गलतफहमियां पैदा हुई हैं।
पिछले साल कुछ अखबारों में मृतक सूरज की पत्नी के बयान छपे थे, जिसमें दावा किया गया था कि सूरज ने कहा था कि छह महीने में वह जेल से छूटकर आ जाएगा। कुछ अखबारों ने नेपालियों को पैसों के ऑफर आने तो कुछ ने धमकाए जाने के दावे भी किए थे।
इस पूरे मामले में अब फिर से कुछ पुरानी खबरों की कटिंग्स शेयर की जा रही हैं और जिस तरह से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे थे, उसी तरह से सीबीआई की जांच पर भी सवाल उठ रहे हैं। जैसे कि यह कटिंग-
दैनिक भास्कर की खबर की कटिंग एक बार फिर सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है।
इस खबर के आधार पर अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि वे कौन लोग थे, जो सूरज को लेकर चले गए थे और जिन्हें पहचानने का दावा सूरज की पत्नी ने किया था? वे ‘सर लोग’ कौन थे, जिन्होंने कथित तौर पर सूरज को नेपाल भेजने का वादा किया था?
अभी सीबीआई ने भले ही आधी जानकारी दी है, मगर उसे कुछ सवालों का जवाब देना होगा वरना जिस तरह का रहस्यवाद वह अपना रही है, उससे उसकी जांच पर भी सवाल उठना बंद नहीं होंगे। सोशल मीडिया पर लोग कई तरह के सवाल उठा रहे हैं, जैसे कि-
गुड़िया के शव से मिले साक्ष्य इस वारदात में कितने लोगों के शामिल होने की बात कहते हैं। क्या दांतों के निशान और अन्य साइंटिफिट एविडेंस एक से अधिक व्यक्ति के शामिल होने का इशारा करते हैं?
यदि हां तो एक ही आरोपी को पकड़ लिए जाने पर ही उसने केस को सुलझा देने का दावा कैसे कर दिया?
यदि नहीं तो जैसा कि मृतका के परिजन कहते हैं कि बेटी के लापता होने वाली रात उन्होंने पूरा इलाका तलाश लिया था, फिर दो दिन बाद उन्हें कैसे उस जगह शव मिला?
गुड़िया का शव लापता होने के दो दिन बाद मिला। दो दिन तक उसे कहां रखा गया?
क्या उसी जगह बलात्कार के बाद हत्या दी गई या बलात्कार कहीं और हुआ था और शव यहां फेंका गया था?
गुड़िया की जुराब घटनास्थल से गायब होने की खबरें आई थीं। हकीकत क्या है? यदि वारदात को वहीं अंजाम दिया गया था जहां शव मिला था तो जुराब कहां चली गई?
और यदि उसी जगह पर बलात्कार किया गया, जहां शव मिला तो कैसे पास की ही सड़क और कुछ ही दूर रहने वाले अन्य नेपालियों को पता नहीं चला, जबकि आरोपी अकेला ही था?
पुलिस हिरासत में सूरज की मौत कैसे हुई? क्या इसके पीछे साजिश थी या कुछ उगलवाने के लिए टॉरचर के दौरान उसकी मौत हो गई?
सीबीआई ने अभी चार्जशीट दाखिल नहीं की है मगर लोग अभी से सवाल उठा रहे हैं। क्योंकि शुरू में कुछ रसूखदार और पैसे वाले लोगों के बच्चों के शामिल होने की खबरें आई थीं और उनकी तस्वीरें भी मुख्यमंत्री के पेज से शेयर हुई थीं। उनके हटाए जाने के बाद लोगों के मन में यह भावना घर कर गई थी कि उन्हें बचाने के लिए पुलिस ने पहले नेपालियों को पकड़ा और फिर एक को जेल में मार डाला। लोग इसी अवधारणा के कारण सवाल उठा रहे हैं कि क्या उस अकेले चरानी से ही पुलिसवालों और राजनीतिक सिस्टम को प्रभावित कर दिया।
सवाल और भी हैं और इनका जवाब अगर सीबीआई नहीं देती है तो उसकी जांच के प्रति लोगों के मन में शक बना रहेगा। इस मामले में पूरे प्रदेश में अभी तक अटकलों और अफवाहों का सिलसिला जारी है। ऐसे में इन बातों को दूर करने के लिए सीबीआई को मेहनत करनी होगी और कड़ियां जोड़नी होंगी, दूध का दूध और पानी का पानी करना होगा।
शिमला।। जिस समय हिमाचल प्रदेश पुलिस कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस की जांच ही कर रही थी, उस समय शिमला के एक पत्रकार ने कुछ सवाल खड़े किए थे। इस पत्रकार ने जांच के नाम पर की जा रही औपचारिकता पर सवाल खड़े किए थे। बाद में जब हिमाचल प्रदेश पुलिस ने मामले को सुलझाने का दावा किया था, तब इसी पत्रकार ने पुलिस की थ्योरी कि धज्जियां उड़ा दी थीं। ये पत्रकार हैं- नरेंदर चौहान।
पुलिस के दावों पर सवाल खड़ी करती नरेंदर चौहान की एक फेसबुक पोस्ट वायरल हो गई थी और इन हिमाचल ने भी उसे शेयर किया था। इसी के बाद पूरे प्रदेश, खासकर शिमला में पुलिस की कार्रवाई के प्रति असंतोष पैदा हुआ था और बाद में हुए आंदोलन के बाद सरकार को मामला सीबीआई को सौंपना पड़ा था। लंबी जांच के बाद सीबीआई साइंटिफिक सबूत के आधार पर एक संदिग्ध को पकड़ने में सफल हुई है, जिसका डीएनए सैंपल गुड़िया के शव से मिले एविडेंस से मैच हो गया है।
खास बात ये है कि नरेंदर ने अपनी उस समय लिखी पोस्ट में जो पॉइंट उठाए थे, जिन बातों के आधार पर आईजी जहूर जैदी की थ्योरी पर सवाल उठाए थे, सीबीआई भी अब तक उन सवालों के जवाब नहीं दे सकी है। सीबीआई जांच पर नरेंदर का क्या कहना है, वह संतुष्ट हैं या नहीं, यह जानने के लिए आखिरी हिस्से पर जाएं। पहले पढ़ें, पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठाते हुए नरेंदर ने किया लिखा-
“जैदी साहब आपकी प्रेस कांफ्रेस के अनुसार गुडिया का बलात्कार पांच लोगों ने उसी जगह किया जहां उस मासूम का शव मिला था। अगर यह कहानी सही है ताे प्रदेशवासियों को यह भी बताऐं कि स्कूल से उस स्पाट की दूरी कितनी है जहां से गुडिया का शव बरामद हुआ था । गुडिया ने अगर गाडी में लिफ्ट ली तो गाडी से स्थान पर पंहुचने में कितना समय लगा होगा।
साहब आप भी अपनी सरकारी गाडी से वहां गए और आपकी कार के पीछे पीछे मैं भी अपनी कार से स्पाट तक पंहुचा । मुझे स्कूल के पास से स्पाट तक पंहुचने में दस मीनट लगे अगर शक है तो मैं दोबारा आपके साथ चलने को तैयार हूं। चार बजे भी अगर गुडिया ने गाडी में लिफ्ट ली तो ज्यादा से ज्यादा आरोपियों के साथ उस स्थान तक पहुचनें में आधा घंटा लगा होगा। चलिए मान लेते हैं पाचं बज गए होगें। तो श्रीमान जी पांच बजे आज कल कितना उजाला होता है यह भी ख्याल करिए। चलिए उजाला था या अंधेरा अगर यह भी मायने नहीं रखता तो जनाब जरा सपाट को फिर से एक बार देख लिजिए फोटो डाल रहा हूं।
सड़क से महज सौ या दो फीट की दूरी पर जहां आप खोज बीन कर रहे है यहां अपराधी इतने खुले व सड़क के करीबी स्थान पर गुडिया का बलात्कार करते? शायद आपने गौर नहीं किया होगा साहब स्पाट पर जब आप छानबीन कर रहे थे तो स्पाट के पास से ही नेपाली मजदूर की आवाज स्पष्ट सुनाई दे रही थी। मतलब स्पाट के नजदीक ही अस्थायी रिहाइश हैं। चलिए आप पुलिस विभाग के तेज तरार कुशाग्र बुद्वि वाले जांच अधिकारी है इस लिए मान लेता हूं कि गुडिया के साथ ज्यादती वहीं हुई और जिस दिन गुडिया लापता हुई उसी रात को उसकी मौत हो गई जैसा कि आपके अनुसार गुडिया की पोर्स्टमाटम रिपोर्ट बताती है। तो कृपा कर यह सपष्ट करने की जहमत उठा दिजीए कि गुडिया के शव को दो दिनों में जंगली जानवरों ने क्यों नहीं नोचा।
मंगलवार को जीन तीन लोगों को आप बडे फिल्मी अंदाज में सबसे पहले हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर उडन छू हुए उसकी वजह क्या थी। क्या नेपाली मजदूरों के लिए कोई भी स्थानीय व्यक्ति पुलिस के चंगुल में फंसना चाहेगा । यही नहीं अभी ऐसे कई सवाल है जिनका ज्वाब मिलना लाजमी है आपके लिए भी और हमारे लिए भी । मसलन गुडिया की गुम हुई जुराब कहां है। गुडिया के अंत्रवस्त्र के टुकडे किसने किए इत्यादी । साहब आप दोनों से मैने और मेरे साथियों ने स्पाट पर व विश्राम गृह में भी बात करने की कोशिश की थी लेकिन बाने बात करने का आशवासन देकर हमसे दूरी बनाते हुए गाडी आगे बढा दी ।कोई बात नहीं आप बहुत बडे व जिम्मेवार अधिकारी है। मुझे व मेरे पत्रकार साथियों को इस बात का कोई मलाल नहीं कि आपने हमसे बात नहीं की। हो सकता है आप छानबीन को गोपनीय रखने का प्रयास कर रहे हों। जनाब यह लोकतंत्र है यहां ज्वाब देयी तय है आपकी भी और मेरी भी।
हो सकता है मेरी इस पोस्ट के खिलाफ की कानून की कोई धारा मेरे गिरेबान तक पंहुचती हो तो जरूर पंहुचेलेकिन कलम का सिपाही हूं । जब तक गुडिया के हत्या की निष्पक्ष जांच या संतोष जनक परिणाम नहीं मिल जाते मैं सवाल उठाता रहूंगा। यही मेरा काम है । उम्मीद है कि गुडिया को इंसाफ दिलाने की इस जंग में आप हर पहलू को निष्पक्षता व बिना किसी प्रभाव व दबाव में काम करते हुए दूध का दूध पानी का पानी करेंगे। आपने सवालों के ज्वाबों के साथ आपकी आगामी जांच व उनके परिणामों के इंतजार में- नरेंद्र चौहान।”
Image: FB/Narender Chauhan
नरेंदर चौहान ने अब एक बार फिर से पोस्ट डाली है, इसमें वह सीबीआई की जांच से संतुष्ट नजर आते हैं। वह यह भी बताते हैं कि सीबीआई की जांच पर जो लोग सवाल उठा रहे हैं, वह सोशल मीडिया में फैली अफवाहों के आधार पर बनी अवधारणों से प्रभावित हैं। “सी बी आई पर हमारे संदेह की वजह क्या है?” शीर्षक वाली पोस्ट में वह लिखते हैं-
“मरहूम गुडिया की निर्मम हत्या के आठ महीने बाद सी बी आई ने डी एन ए जैसे पुख्ता सबूत का हवाला देते हुए एक युवक को गुडिया के असल गुनेहगार होने का खुलासा किया है। हालांकि सी बी आई साइंटिफिक एविडेंस व डीएनए जैसे मजबूत सबूतों के दम कर मामले के सुलझाने का दावा कर रही है लेकिन हमारा मन सी बी आई के दावे पर विशवास करने को तैयार नही हैं। इसकी वजह क्या है? हमारे जहन में अभी भी कई सवाल है जिनके जवाब सी बी आई ने भी नहीं दिए हैं। मसलन मरहूम गुडिया का शव जिस हालत में मिला वह अकेला शख्स कैसे कर सकता है? क्या गुडिया के साथ सामूहिक दुष्कर्म नहीं हुआ ? गुडिया की पोस्टमार्टम से संबंधित जो खबरें छपी उनमें कितनी सच्चाई थी?
हो सकता है कि सी बी आई इसमें एक या दो और गिरफ्तारियां करें तो शायद हमारे कई सवालों के जवाब मिल जाए ।लेकिन अब बात करते हैं हमारे जहन में उठ रहे उन अन्य सवालों की जो हमें सी बी आई की सफलता को स्वीकार करने से रोकते हैं। मसलन हम ऐसा क्यों यह मान रहे हैं कि इस अपराध को रसूखदार लोगों ने ही किया है कोई चिरानी ऐसा संगीन अपराध नहीं कर सकता ? इसमें कोई शक नही कि गुडिया हत्या कांड को जनांदोलन में परिवर्तित करने में मीडिया व सोशल मीडिया ने जबरदस्त काम किया । जिसकी वजह से ही मामला सी बी आई तक पंहुचा और पांच निर्दोष लोग इस मामले में सूली चढ़ने से बच गए। लेकिन इस अविशवसनीयता की वजह भी सोशल मीडिया व मीडिया ही बनी इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता । कुछ स्थानीय युवाओं के फोटो सोशल साइट पर वायरल होने से लेकर आई जी जहूर जैदी की निराधार प्रेस कांफ्रेंस व उसके बाद पैसों की लेन देन की खबरों ने इस मामले को हाई-प्रोफाइल बना दिया। रही सही कसर पुलिस कसटडी में पूछ ताछ के दौरान सूरज की हत्या ने पूरी कर दी।
हमें याद रखना होगा कि आई जी जहूर जैदी समित उनकी पूरी टीम के सलाखों के पीछे पंहुचने का कारण सूरज की कसटोडियल डेथ रही न की अपराधियों को बचाने या लेन देन का कोई मामला। वे आज भी जांच के दौरान बरती गई लापरवाही ,असफलता व जल्दबाजी का खामियाजा ही भूगत रहे हैं । लेकिन सोशल मीडिया व मीडिया ने इस मामले को जैसे पेश किया उससे हमारे मन मस्तिष्क में गुडिया के गुनाहगारों की छवि रसूखदार बिगडैल नशेडियों की बनती रही। जिसका नतीजा यह है कि आज हम यह मानने को तैयार नहीं है कि गुडिया का हत्यारा मामूली मजदूर भी हो सकता है।
यह सही है कि सी बी आई को अभी इस मामले में दूध का दूध पानी का पानी करना बाकी है लेकिन डी एन ए के आधार पर गुडिया के एक गुनेहगार तक पंहुचना भी बडी उपलब्धि है। अगर इस मामले में हिमाचल पुलिस द्वारा पकडे गए व छोडे गए लोग सही मायने में निर्दोष है तो कल्पना करिए इन पर हुए ज़ुल्मों के दौरान ये लोग व इनके परिजन पीडा व परेशानी के किस दौर से गुजरे होंगे। यह मेरी व्यक्तिगत सोच है । उम्मीद करें की जल्द ही सी बी आई मामले से जुडे हर उस सवाल के जवाब दे जो हम सभी के मन में अब भी सुलग रहे हैं।”
शिमला।। सीबीआई ने कोटकाई रेप ऐंड मर्डर केस को सुलझाने का दावा किया है। पकड़े गए आरोपी को न्यायिक हिरासत पर भेजा जा चुका है यानी उससे पूछताछ फिलहाल पूरी हो चुकी है।
सीबीआई की प्रेस रिलीज में अब तक पकड़े गए एक ही आरोपी और पुलिस हिरासत में नेपाली संदिग्ध की मौत को लेकर पुलिसकर्मियों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर का ज्यादा जिक्र है। सीबीआई ने उन सवालों का जवाब नहीं दिया है कि इस अपराध में क्या कोई और भी शामिल था या नहीं।
सीबीआई ने लिखा है- “हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के बैजनाथ में रहने वाले आरोपी को सीबीआई ने 12 अप्रैल को हिरासत में लिया था और 12 दिनों तक यह पुलिस हिरासत में रहा। जांच के बाद आज उसे कोर्ट में पेश किया गया जहां से उसे 7 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।”
आगे लिखा गया है, “विक्टिम कथित तौर पर चार जुलाई 2017 को साढ़े चार बजे स्कूल से निकली थी और वह घर नहीं पहुंची थी। दो दिन बाद हलाइला के जंगल में उसका शव मिला था। सीबीआई ने जांच की और सुराग देने वालों के लिए दस लाख रुपये का भी इनाम रखा था।”
आगे इस संबंध में एफआईआर का उल्लेख किया गया है। फिर हाल ही में हुई आरोपी कि गिरफ्तारी को लेकर कहा है, “टीम ने गहन जांच की और करीब एक हजार लोगों से पूछताछ की। सीबीआई ने 250 के करीब ब्लड सैंपल भी लिए। डीएनए प्रोफाइलिंग जैसी आधुनिक तकनीक इस्तेमाल की गई।”
“जांच हिमाचल, कश्मीर और उत्तराखंड में भी हुई। ऐसा कहा जा रहा था कि गिरफ्तार किए गए आरोपी के पास फोन नहीं था और परिवार के संपर्क में भी वह नहीं था। फिर भी सीबीआई ने उन लोगों पर नजर रखी, जिन्हें वह सार्वजनिक फोनों से या दूसरों के फोनों से कॉल करता था। आखिरकार इसे शिमला के हाटकोटी के पास एक गांव से पकड़ा गया।”
आखिर में सीबीआई ने लिखा है- मामले की जांच अभी जारी है।
इसके साथ ही कुछ सवाल अभी तक बरकरार हैं। जैसे कि क्या यही शख्स मुख्यारोपी है? इसके साथ और कौन था? क्या किसी और की भी तलाश की जा रही है? अगर इन सवालों के जवाब सीबीआई नहीं दे रही तो मामला हल कैसे हो गया? जल्दी में हल करने का दावा करने का अर्थ क्या है?
नीचे सीबीआई की प्रेस विज्ञप्ति देखें-
CBI SOLVES A SENSITIVE CASE OF RAPE AND MURDER OF A MINOR GIRL OF HIMACHAL PRADESH
Press Release
New Delhi, 25.04.2018
The Central Bureau of Investigation has solved a sensitive case relating to rape & murder of a minor girl, resident of Shirgul, Tehsil Theog, Police Station Kotkhai, District Shimla (Himachal Pradesh) and arrested the accused, resident of Tehsil Baijnath, District Kangra (Himachal Pradesh). He was arrested on 13th April, 2018 and was remanded 12 days Police Custody by the Competent Court at Shimla. After thorough interrogation, he was produced today before the Designated Court and was remanded to Judicial Custody till 7th May, 2018.
CBI had registered two cases on 22.07.2017 on the orders dated 19.07.2017 of Hon’ble High Court of Himachal Pradesh, in CWPIL No.88 of 2017 and taken over the investigation of FIR No. 97 of 2017 dated 06.07.2017, under Sections 302, 376 of IPC & Section 4 of POCSO Act registered earlier at Police Station, Kotkhai, District Shimla (Himachal Pradesh) relating to rape & murder of a minor girl and another FIR No. 101 of 2017 dated 19.07.2017 U/s 302 of IPC earlier registered at Police Station, Kotkhai, District Shimla relating to custodial death of one of the accused arrested by Local Police in connection with investigation of said FIR No. 97 of 2017. The Himachal Pradesh Police had earlier arrested six accused in this case. Out of these one had died under alleged mysterious circumstances in police custody for which separate FIR No. 101/2017 was registered by local police.
After taking over the investigation, CBI had arrested nine Police officials of Himachal Pradesh including then Inspector General of Police, Southern Range; then SP, Shimla; then DSP (SDOP), Theog; a Sub-Inspector & then SHO, Kotkhai; an ASI; three Head Constables and one Constable, all working in Himachal Pradesh on 29.08.2017 in a case relating to custodial death of one of the then accused Suraj Singh. All the said arrested accused are presently in Judicial Custody.
In the instant case, it was alleged that the victim had left Government Senior Secondary School, Mahashu on 04.07.2017 at about 4.30 p.m. She did not reach home and her dead body was recovered on 06.07.2017 from the forest area of Hailalla, Kotkhai, District Shimla.
CBI instituted an elaborate investigation and also announced a reward of Rs.10 lakh to anyone from general public for providing credible information resulting in arrest of real culprits.
After taking over the case, CBI formed separate teams including SP, ASP, DSP, Inspectors & other supporting staff who were continuously camped in the region and worked day & night for the last nine months to finally crack the case.
The team started by thoroughly combing the various areas including forests where the body of victim was found and questioned over one thousand people in this sparsely populated region. The CBI team collected around 250 blood samples and its CFSL experts conducted various scientific tests including DNA profiling by using advance techniques of ‘percentage match’ and ‘lineage match’. After thorough examining of these scientific tests, the DNA profiles extracted from samples seized from scene of crime were matched with the DNA samples.
The area of investigation included Himachal Pradesh, Kashmir and Uttarakhand etc. It was also alleged that the arrested accused did not carry any mobile phone and was not in touch with his family but CBI kept watch on certain people whom he could call from public phones or phones of the other people. Subsequently, the suspect was tracked and apprehended from a Village near Hatkoti, District Shimla.
The Director CBI, Sh. Alok Kumar Verma has been monitoring the progress of the case from day one. He expressed satisfaction at the work done by the investigative team and forensic experts of CFSL, CBI, for solving a sensitive and difficult case.
शिमला।। पिछले साल कोटखाई में हुई नाबालिग लड़की की बलात्कार के बाद हत्या के मामले सीबीआई ने सोमवार को क्राइम सीन रीक्रिएट किया। बानकुफर में जिस समय क्राइम सीन को रीक्रिएट किया जा रहा था, उस समय सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे। गुड़िया मामला पिछले लगभग नौ महीनों से चर्चा में है क्योंकि इसमें कई नाटकीय बदलाव आ चुके हैं।
बता दें कि अपराधों की जांच में क्राइम सीन रीक्रिएशन यानी अपराध के समय क्या हुआ था, वैसा ही घटनाक्रम दोहराना बहुत महत्व रखता है। इससे जांच एजेंसियों को पता चलता है कि आरोपी ने किस तरह से वारदात को अंजाम दिया। (कवर इमेज प्रतीकात्मक है)
तीन जगह ले जाया गया संदिग्ध
पुलिस पौ फटने से पहले सुबह साढ़े चार बजे ही सीबीआई संदिग्ध को शिमला से कोटखाई ले आई थी। संदिग्ध की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी गई थी। उसे तीन अलग-अलग जगह ले जाया गया। पहली जगह- जहां गुड़िया (काल्पनिक नाम) का शव मिला था, दूसरी जगह- एक मंदिर और तीसरी जगह- सेब के बाग के बास बना एक डेरा।
क्राइम सीन रीक्रिएट किया गया FILE PIC (Courtesy: IE)
कुछ ने पहचाना युवक को
सीबीआई ने युवक का चेहरा काले रंग के नकाब से ढका हुआ था ताकि उसकी पहचान जाहिर न हो सके। मगर स्थानीय लोग कह रहे थे कि वे इस लड़के को जानते हैं और यह इलाके में लकड़ी काटा करता था और मूलत: मंडी जिले से है। कुछ का यहां तक कहना था कि वह शराब खरीदा करता था तो और कई बात तो इसके पैसे भी नहीं देता था।
हालांकि इस शक्स के बारे में और भी जानकारियां उपलब्ध हैं, मगर चूंकि सीबीआई किसी कारण से उसकी पहचान अभी उजागर नहीं कर रही है, इसलिए उसके बारे में अधिक बातें सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं।
फरेंसिक एक्सपर्ट भी थे साथ
सीबीआई की टीम अपने साथ फरेंसिक एक्सपर्ट लेकर आई थी। उन्होंने घटनास्थल का दौरा किया। वे उस जगह गए, जहां छह जुलाई को गुड़िया का शव मिला था। वह चार जुलाई को स्कूल से घर जाते वक्त लापता हो गई थी। सीबीआई को इस मामले की जांच 23 जुलाई को मिली थी, जबकि इससे पहले पुलिस ही मामले की जांच कर रही थी।
बड़ी संख्या में मौजूद थे पुलिसकर्मी
सीबीआई टीम का स्वागत
सीबीआई आरोपी को अलग-अलग जगह ले गई। यह सिलसिला करीब चार घंटों तक चला और इसके बाद उसे वापस शिमला ले जाया गया। घटना स्थल पर करीब 150 पुलिसकर्मी तैनात थे। जहां जांच चल रही थी, उसके आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे।
कुछ लोगों ने तो सीबीआई की टीम का गर्मजोशी से स्वागत किया। ये लोग अपने साथ हार भी लेकर आए थे। उन्हें उम्मीद थी कि सीबीआई जल्द ही मामले को सुलझा लेगी।
और भी हो सकते हैं गिरफ्तार
अब तक सीबीआई ने इस मामले में एक ही गिरफ्तारी की है। अभी तक और लोगों की गिरफ्तारियां होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता। अब सीबीआई को 25 तारीख को हाई कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट फाइल करनी है।