आई.सी.एस.ई स्कूलों की वार्षिक बैठक का आयोजन 16–17 को

धर्मशाला।। उत्तर भारत के आई.सी.एस.ई स्कूलों की ‘ वार्षिक आम बैठक ’ का आयोजन 16 व 17 सितंबर को किया जाएगा। इस बैठक का मुख्य प्रतिपाद्य विषय (थीम )‘ रेजिलिएशन एंड रीइन्वेंशन ’ रहेगा। जिसमें उत्तर भारत के आई.सी.एस.ई स्कूलों के लगभग 140 प्रिंसिपल भाग लेंगे तथा अपने विचारों को साझा करेंगे।

पहले दिन की बैठक के मुख्यातिथि के रूप में जिलाधीश कांगड़ा डॉक्टर निपुण जिंदल व काउंसिल सेक्रेटरी गेरी अरथून होंगे। जबकि दूसरे दिन श्री संजय कुंडू डीजीपी हिमाचल प्रदेश इस बैठक के मुख्यातिथि के रूप में शिरकत करेंगे।

साथ ही साथ कुल्लू वैली स्कूल के प्रिंसिपल श्री संजीव भारद्वाज, लुइस लोपासेस प्रेसिडेंट (एएसआईएसी) , श्रीमती निर्मल कौर रीजनल सेक्रेटरी (एएसआईएसी) व सेक्रेड हार्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल सिस्टर ग्रेसी एमडी विशेष रुप से उपस्थित रहेंगे। प्रस्तुत बैठक का आयोजन डी‘पोलो’ होटल धर्मशाला में किया जाएगा।

मुख्यमंत्री चोर, लुटेरे और डाकू; हम इनको 60 दिन में जेल में ठोकेंगे: मुकेश अग्निहोत्री

डेस्क।। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें चोर, लुटेरा और डाकू करार दिया है। अपने फेसबुक पेज पर डाले एक वीडियो में उन्होंने यह टिप्पणी की है।

एक पत्रकार को दिए साक्षात्कार के अंश साझा करते हुए मुकेश अग्निहोत्री ने लिखा है- “पूरे प्रदेश में लूट का शासन चल रहा है पर मुख्यमंत्री सिर्फ़ राम राज्य जैसी झूठी तस्वीर दिखाने में व्यस्त है। जनता के पैसे से अमृत महोत्सव की आड़ में BJP पार्टी की निजी राजनीतिक रैलियां की जा रही हैं।”

मुकेश अग्निहोत्री वीडियो में कहते हुए दिख रहे हैं, “मुख्यमंत्री एक ऐसी पिक्चर देने की कोशिश करते हैं जैसे कि वो बहुत शरीफ हैं। इस चेहरे के पीछे एक और चेहरा छिपा हुआ है। यह लुटेरों का, डाकुओं का, चोरों का है।”

मंत्रियों पर हमला करते हुए नेता प्रतिपक्ष कहते है, “किस ढंग से 2200 करोड़ रुपये की पानी की पाइप खरीद ली, छोटा सा प्रदेश है। अरे हम इनको ठोकेंगे जेल में। 60 दिन के बाद इनको हिसाब-किताब पता लगेगा, जिन लोगों ने आज अराजकता फैलाई हुई है, जिन्होंने लूट मचाई हुई है।”

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा, “ये समझते हैं कि सत्ता इनकी स्थायी हो गई है और सत्ता से इनको कोई उखाड़ नहीं सकता है।”

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जिंदगी की जंग हार गया रोहित, छोटे भाई ने बिलखते हुए दी मुखाग्नि

मृत्युंजय पुरी, कांगड़ा।। टाण्डा मेडिकल कॉलेज में पिछले छह दिनों से  भर्ती रोहित ने सुबह 4 बजकर 20 मिनट पर अंतिम सांस ली। रोहित की मौत की खबर जैसे  ही गांव रच्छयालु पहुंची, पूरे गांव मे शोक की लहर दौड़ गई।

गरीब परिवार से सम्बन्ध रखने बाला रोहित अपने परिवार का इकलौता सहारा था। मां का देहांत 2017 में सर्प दंश के कारण हो गया था। पिता बीमार हैं और छोटा भाई अर्पण 12वीं में पड़ता है। गांव मे माहौल बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने एएसपी बद्री, डीएसपी रामप्रसाद जसवाल और डीएसपी मदन धीमान की निगरानी में रोहित का अंतिम संस्कार करवाया।

ग्राम पंचायत रच्छियालू की प्रधान संजू कुमारी ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस निर्धन परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। ग्रामीणों ने रोहित को पीटने वाले युवक को भी कड़ी सजा देने की मांग की है। इस समय सचिन नाम अभियुक्त जेल में है।

क्या है मामला
7 सितम्बर को गगल बाजार में धर्मशाला मार्ग पर थाने से मात्र 50 मीटर की दूरी पर मारपीट की घटना हुई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि गगल पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। तबीयत बिगड़ने पर रोहित को टांडा मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया था।

इस बीच गांव रच्छियालू के ग्रामीणों में गगल पुलिस थाने का घेराव किया था और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इस पर पुलिस उच्च अधिकारियों ने गगल पुलिस थाना के 6 कर्मचारियों को लाइन हाजिर कर दिया था। मंगलवार को लोगों ने मुख्यमंत्री का काफिला रोककर न्याय की गुहार लगाई थी और सीएम ने जांच का आश्वासन दिया था। इस मामले की जांच डीएसपी राम प्रसाद जसवाल को सौंपी गई है।

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जब ट्वेन्टी टू बुलवाने की ज़िद हो तो फिर बाईस कौन बोले?

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राजेश वर्मा।। बेटे को आवाज देकर कहा कि डायरी में से देखकर मोबाइल नंबर लिखवाना। उसने शुरू किया “नाइन्टी फोर…” मैंने कहा हिंदी में बोलो। वो हंसते हुए बोला- पापा, हिंदी में नहीं आता, मुझे बस “तैंतीस” तक हिंदी में मालूम है, उसके आगे नहीं । प्रश्न खुद से ही था कि जिस भाषा को बोलने व सुनने में हम खुद को सहज महसूस करते हैं, उस भाषा में न तो विद्यालयों में पठन-पाठन किया जा रहा है, न ही घर-परिवार में उसके बारे में चर्चा होती है; फिर बच्चों को कैसे पता चलेगा कि 40 को अंग्रेज़ी में फॉर्टि तो हिंदी में चालीस कहते हैं।

आखिर हमारी हिंदी हमसे दूर क्यों हो गई या हमने इसको दूर क्यों कर दिया? बच्चा अभी चलना-फिरना भी नहीं सीखता और हम उसके मुंह में जबरन अंग्रेजी के शब्द डालने लग जाते हैं। हम इस बात से डर रहे हैं कि हमारे बच्चे गलती से कहीं हिंदी में बात न करने लगें, जिससे कि हमें शर्मिंदगी न झेलनी पड़े। हम तब प्रफुल्लित महसूस करते हैं जब हमारा बच्चा अंग्रेज़ी में गिनती जानता है। लेकिन हिंदी में उसे न एक का पता है, न दस का और न सौ का।

यह कोई प्रफुल्लित होने वाली चीज नहीं है, इससे तो हमारे अंदर के खोखलेपन का पता चलता है। जब तक हम स्वयं अपने देश की धरोहर, अपनी मातृभाषा का सम्मान नहीं करेंगे, तब तक हम इसे इसका खोया हुआ सम्मान दिला नहीं पाएंगे। अपनी भाषा से प्रेम भी राष्ट्रभक्ति है। वहीं, ठीक इसके उल्ट भी ऐसा ही है। किसी भी तरह की भाषा को सीखना, उसे बोलना कोई अपराध नहीं हैं परन्तु अपनी भाषा के प्रति हीन-भावना रखना देश के प्रति गद्दारी के समान हैं।

अक्सर देखने में आता है कि पढ़ा-लिखा युवा वर्ग, जो बड़ी-बड़ी कंपनियों में नौकरियां कर रहा है, उसे आज के समय में न तो हिंदी का कोई भविष्य दिखता है, न ही हिंदी में अपना भविष्य दिखाई देता है, क्योंकि वह अपने आस-पास के दायरे में रहकर सोच रहा है। उस दायरे में, जो हमने उसे दिया है।

उसे एक सफल भविष्य चाहिए, जिसमें नौकरी, पैसा व नाम हो। उसके लिए हिंदी का होना जरूरी नहीं लगता। लेकिन जब वही युवा एक क्षितिज पर खड़ा होकर देश के भीतर झांकता है तो उसे अपने ही लोगों के बीच एक खाई नजर आती है। यह खाई इन पढ़े-लिखे युवाओं को ही अकेला खड़ा कर देती है क्योंकि देश में आज भी हिंदी भाषाई ज्यादा हैं। इन पढ़े-लिखे युवाओं में तकनीकी एकता भले ही हो, लेकिन मानवीय एकता के लिए हमें अपनी मातृभाषा की ही जरूरत है। भाषा ही वह इकाई है जो व्यक्ति को आपस में जोड़ती है, व्यक्ति आगे परिवार को जोड़ता है वही परिवार समाज को जोड़ता है और इस तरह समाज से गांव, नगर, शहर व देश बनता है।

हमारे देश की असली पहचान है विविधता, और यह हर चीज में है। धर्म-कर्म से लेकर प्रत्येक क्षेत्र तक फैली विविधता। इसी विविधता की पहचान है- देश के विभिन्न भागों में बोली जाने वाली भाषाओं की विविधता। हर भाषा का अपना वजूद है, पहचान है। इसी विविधता को आपस में एक सूत्र में जोड़ने वाली भाषा है- हिंदी। आप देश के किसी भी कोने से संबंधित हों, लेकिन आपको एक भारतीयता का पहचान करवाती है- हिंदी।

14 सितम्बर 1949 के दिन आजादी के बाद हिंदी को देश की राजभाषा से गौरवान्वित किया गया। सन् 1953 में हुए निर्णय के बाद प्रति वर्ष 14 सितम्बर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। संविधान के अनुच्छेद 343 में चाहे हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्राप्त हुआ व अनुच्छेद 351 के अनुसार बेशक हिंदी का प्रसार बढ़ाने की बात की गई लेकिन शायद यह सब कागजों तक सिमट कर रह गया।

हर साल हिंदी के उत्थान को हिंदी पखवाड़ा, हिंदी सप्ताह, हिंदी दिवस मनाया जाता है सरकारों द्वारा इस उपलक्ष्य को मनाने के लिए थोक में बजट भी उपलब्ध करवाया जाता है। सरकारी व निजी कार्यालयों से लेकर स्कूलों, कॉलेजों, में निबंध लेखन, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं, चित्र कला प्रतियोगिताएं, कवि सम्मेलन, संगोष्ठियां अर्थात तरह-तरह से हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए समारोह, पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित होते हैं लेकिन इन समारोह में भी बड़े-बड़े नामचीन हस्तियों को ही आमंत्रित किया जाता है भले ही हिंदी की बेहतरी के लिए उनका योगदान नगण्य हो।

क्या एक दिवस, एक सप्ताह, एक पखवाड़ा, या ज्यादा से ज्यादा एक महीने तक हिंदी पर दिखावटी हो हल्ला करके हम इसके अस्तित्व को बचा पाएंगे? शायद हरगिज नहीं। यह सब कुछ भी तब होता है जब सरकारी कार्यालयों में जबर्दस्ती कुछ दिन तक हिंदी की जय करने के आदेश थोपे जाते हैं और इनकी खानापूर्ति महज काग़ज़ काले करके पूरी हो जाती है। अन्य समारोहों में भी हिंदी भाषा के प्रति दरियादिली तब दिखाई देती है जब फंड के रूप में सरकारी प्रोत्साहन मिलता है, तभी शायद हिंदी प्रेम कुछ वक्त के लिए जागता है।

देश का विकास तब होगा जब भाषा का विकास होगा भाषा का विकास तब होगा जब हम व्यक्तिगत रूप से इससे जुड़ेंगे व जोड़ेंगे। हमें यह इंतजार नहीं करना होगा कि आज 14 सितंबर है, हिंदी राष्ट्रीय दिवस या 10 जनवरी अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस है। हमें तो प्रत्येक दिन को हिंदी दिवस समझना चाहिए क्योंकि जब तक आप मन से किसी चीज से नहीं जुड़ते तब तक आप पर चाहे सैकड़ों दिवस थोप दिए जाएं या सैंकड़ों आदेश जबर्दस्ती लागू करवा दिए जाए, उस भाषा का विकास नहीं हो सकता।

आज बेशक चाहे युवा वर्ग हिंदी को लेकर हीन भावना का शिकार है लेकिन यह उसकी कमी नहीं, यह कमी है हमारे संस्कारों की जो हमने हिंदी की बजाय अन्य भाषा में जबरन उस पर थोपे, जिस कारण आज वह खुद को हिंदी में बोलने लिखने से भी शर्म महसूस करने लग गया।

वह भाषा, जिसे विदेशों से लोग सीखने के लिए देश में आते हैं परंतु यहां के नागरिक ही उससे मुख मोड़ रहे हैं। यह आत्मचिंतन का विषय है। हिंदी प्रत्येक भारतीय नागरिक के विकास की नींव हैं। नींव को छोड़कर हम कुछ देर तक जरूर हवाई महल खड़ा कर सकते हैं परन्तु दीर्घकाल तक नहीं। शहरों और गांवों का मतभेद संसाधनों के रूप में ही नहीं, भाषा के रूप में भी है और इस मतभेद को अपनी भाषा से ही दूर किया जा सकता है।

हिंदी ही वह भाषा है जो हमारी अमूल्य संस्कृति को सहेज कर रखे हुए है। विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है हमारी हिंदी भाषा। हम सभी को इसके विकास के लिए न तो किसी दिवस का मोहताज होना चाहिए न ही हमें किसी पुरस्कार या सम्मान की आस रखनी चाहिए कि हमें यह मिलेगा हम तब इसको बढ़ावा देंगे। यदि हम अपनी राष्ट्र भाषा को बढ़ावा देंगे तो यह बढ़ावा भाषा ही नहीं बल्कि देश के विकास को बढ़ावा देने वाली बात होगी। देश के विकास से बड़ा कोई और पुरस्कार नहीं हो सकता।

हमें प्रण लेना चाहिए कि हर दिन अपनी भाषा के नाम हो, हो सके तो हर जरूरी काम अपनी भाषा में हो। हमारे संस्कार ऐसे हों कि आने वाली पीढ़ी में कम से कम अपनी भाषा का मौलिक ज्ञान तो जरूर हो। इसका विकास ना किसी दिवस से संभव होगा न ही विभिन्न आयोजनों से। यह हमारी भाषा है हमें इसको सहेजने की जरूरत है। हमें इससे आत्मीयता से जुड़ने की आवश्यकता है।

(स्वतंत्र लेखक राजेश वर्मा लम्बे समय से हिमाचल से जुड़े विषयों पर लिख रहे हैं। उनसे vermarajeshhctu@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है)

किसी पद की लालसा में नहीं आया AAP में: राजन सुशांत

फतेहपुर।। पार्टी जो फैसला होगा उसी पर ही चलूंगा, मैं मुख्यमंत्री,विधायक या किसी पद की लालसा से पार्टी में नहीं आया हूं। ये शब्द आज भाजपा से बागी रहे पूर्व सांसद डाक्टर राजन सुशांत ने आम आदमी पार्टी ज्वाइन करने के उपरांत फतेहपुर मे एक कार्यक्रम के दौरान कहे।

इससे पहले कार्यक्रम मे पंहुचने पर डाक्टर राजन का कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए सुशांत ने कहा कि कांग्रेस में हम जा नहीं सकते क्योंकि विचारधारा नहीं मिलती है। बीजेपी के अन्दर भ्रष्टाचार देख लिया है, वहां मन नहीं करता है। आ जा के अपनी पुरानी पार्टी ही बचती है जहां मुझे मान सम्मान मिला है। आज अपने घर वापिस आया हूं।

सुशांत ने कहा कि मैंने पार्टी पर कोई शर्म नहीं थोपी है। हमने कहा कि हम‌ समर्पित कार्यकर्ता की तरह काम करेंगे और पार्टी जो भी फैसला करेगी, उसके साथ चलूंगा।

कांग्रेस बताए कि उसने 70 साल में महिलाओं के लिए क्या किया: इंदु गोस्वामी

शिमला।। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवकता अल्का लांबा जो मात्र एक माह पूर्व हिमाचल की प्रभारी नियुक्त हुई है। वो जमीनी हकीकत से अवगत नहीं हैं वे न सिखाएं भाजपा को महिला कल्याण एवं उत्थान। राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी ने अल्का लांबा पर पलटवार करते हुए कहा कि वो हिमाचल एक प्रभारी के नाते आई हैं । पर मुझे उन्हें एक नसीहत देनी है कि वे हिमाचल के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लें। राजनैतिक लाभ लेने के लिए टिप्पणी करने से पहले वह प्रदेश में महिलाओं के लिए चल रही जन कल्याणकारी योजनाओं का विस्तृत अध्ययन करें।

माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पदचिन्हों पर चलते हुए प्रदेश की जयराम सरकार ने आधी आबादी यानि महिलाओं को सबल बनाने के लिए असाधारण कार्य किया है। प्रदेश की सरकार ने पिछले पांच वर्षों में न सिर्फ घरेलु स्तर पर अपितु शिक्षाए कायर्क्षेत्र में भी महिलाओं के जीवन को आसान बनाने का कायर् किया है। प्रदेश सरकार ने नारी शक्ति का सम्मान करते हुए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को चलाया जिनका मुख्य रूप आज प्रदेश की जनता भली भांति अवगत है।

अस्थायी तौर पर पैराशूट द्धारा उतारे गये कांग्रेस के तथाकथित पदाधिकारी अपने अनर्गन बयान जारी करने से पूर्व एक बार प्रदेश की जनता से जमीनी हकीकत जान लें। प्रदेश की जयराम सरकार ने इस बात को भली भांति समझा कि महिलाओं का सशक्तिकरण किये बगैर किसी भी परिवार अथवा समाज का सशक्तिकरण संभव नहीं। इन पांच वर्षों के दौरान प्रदेश की जयराम सरकार ने गृहिणी से लेकर सरकारी अथवा निजि क्षेत्र में कायर्रत हमारी महिला शक्ति के उत्थान के लिए अभूतपूर्व कार्य किया है।

इंदु ने कहा जिस महिला को हिमाचल के मुख्यमंत्री का नाम व कान्फ्रेंस में अपने साथ बैठी महिला नेत्रियों का नाम तक नहीं पता था। वो सीएम जयराम ठाकुर को बार बार जयराम नरेश बोलती रही। उन से कांग्रेस को उम्मीद है कि वे  भडकाऊ टिप्पणीयां करके हिमाचल में चुनाव में मुख्य भूमिका निभाएंगी। कल उन्होंने  अपनी कान्फ्रेंस के दौरान कहा कि हिमाचल की जनता ने भाजपा को जीरो नंबर दिए हैंए मैं कहना चाहुगीं कि वो भाजपा को नहीं कांग्रेस को दिए हैं। क्योंकि प्रदेश सरकार ने महिलाओं को साठ साल की उम्र में  सामाजिक सुरक्षा पेंशनए किराए में 50% छूट व महिला सशक्तीकरण योजनाएं शुरू की है। जबकि कंग्रेस ने 70 साल से महिलाओं का सिफर् शोषण किया है।

प्रदेश सरकार ने सीएम कन्यादान की राशि 31 से 51 हज़ार कीए शगुन योजना शुरू की 31000 रूपये ;बीपीएलद्धए गृहणी सुविधा उज्जवला योजना हर साल 3 निशुल्क सिलेंडरए मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना में 35  का अनुदान राशि का प्रदान की जा रही है।  बेटी है अनमोल के अंतगर्त 21000 रूपये की एफ डीए स्थानीय निकाय चुनाव में 50% आरक्षणए कामगार कल्याण बोर्ड , बेटी के जन्म पर 51000 रूपये की एफ डी व पढ़ाई के लिए भी अनुदान दिया जाता है।

इसलिए मैं कांग्रेस पार्टी से मेरा प्रश्न है कि वे कांग्रेस सरकार के समय महिलाओं के उत्थान के लिए चलाई गई कोई पांच योजनाएं गिनवाएं। आज प्रदेश सरकार के प्रोत्साहन से महिलाएं इतनी सशक्त हैं कि वे अपने मत का प्रयोग करके महिला विरोधी कांग्रेस को बाहर चुनाव में उनका असली चेहरा दिखाएगेंए और रिवाज बदल कर भाजपा को दोबारा प्रदेश की बागडोर सौंपेगी।

जवाली के विधायक ने की आरएस बाली की रोजगार यात्रा को रोकने की कोशिश: नीरज भारती

मृत्युंजय पुरी, जवाली।।  कांग्रेस नेता रघुवीर सिंह बाली की रोजगार संघर्ष यात्रा के ज्वाली पहुंचने पर पुलिस प्रशासन ने काफिले को जवाली बाजार से पहले ही रोक दिया, जिसपर पूर्व सीपीएस नीरज भारती ने आरोप लगाया कि ये विधायक की साजिश है। उन्होंने कहा कि विधायक ने पुलिस प्रशासन का सहारा लेकर RS बाली के इस विशाल काफिले को रोकने का प्रयास किया है लेकिन ज्वाली के नौजवानो ने उनकी साजिश को नाकाम कर दिया।

भारती ने कहा कि काफिले मे आई हजारों महिलाओ को बेशक़ रोक दिया गया लेकिन रोजगार संघर्ष यात्रा के जोश को वो नहीं रोक पाएंगे। भारती ने कहा कि अब बदलाव का समय है और अब विधायक के आखिरी दिन आ गये हैं। वे अपने जाने की तैयारी कर लें क्योकि अब प्रदेश की जनता ने मन बना लिया है।

वहीं AICC के सचिव आर एस बाली ने कहा कि लाख साजिश कर ले कोई भी लेकिन अब इस बेरोजगार संघर्ष यात्रा को कोई रोक नहीं पाएगा। हजारों की संख्या मे रैली में आई माताएं बहनें अब सरकार से सवाल पूछ रही हैं कि कहां है रोजगार, बढ़ रही है महंगाई की मार।

पेशियों के लिए हेलिकॉप्टर से दिल्ली जाने वाले फिजूलखर्ची की बात कर रहे: बलदेव तोमर

शिमला।। खाद्य आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष बलदेव तोमर ने कहा कि जिस पार्टी के मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से दिल्ली पेशी भुगतने के लिए जाते थे, वो फिजूलखर्ची को लेकर बीजेपी सरकार को ज्ञान न दे। विक्रमादित्य सिंह और मुकेश अग्निहोत्री पर पलटवार करते हुए बलदेव तोमर ने कहा कि कांग्रेस के नेता हर समय लोन को लेकर बात करते हैं, लेकिन वो यह नहीं बताते कि 2017 में जब कांग्रेस सरकार की विदाई हुई तो हिमाचल प्रदेश पर 47 हज़ार करोड़ से ज्यादा का कर्जा छोड़ गए। वीरभद्र सरकार ने 2012 से लेकर 2017 तक रिकॉर्ड 28 हज़ार करोड़ से ज्यादा कर्ज लिया। जबकि उस समय तो कोविड जैसी वैश्विक महामारी भी नहीं थी।

बलदेव तोमर ने मुकेश अग्निहोत्री, विक्रमादित्य और कांग्रेसी नेताओं से पूछा कि वो बताएं कि सामान्य परिस्थितियों में भी इतना ज्यादा लोन लेने के बाद भी कांग्रेस सरकार आम लोगों के लिए तो एक भी योजना नहीं चला सकी। फिर कांग्रेस ने पैसे कहां खर्च किए। कांग्रेस सरकार के समय न तो आम जनता के निशुल्क इलाज के लिए हिमकेयर योजना थी और न ही सहारा। कांग्रेस सरकार में निशुल्क गैस कनेक्शन देने के लिए न तो गृहिणी सुविधा योजना और न ही युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वावलंबन योजना।

खाद्य आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष बलदेव तोमर ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय केवल 4 लाख 13 हज़ार लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जाती थी और केवल 450 करोड़ ही खर्च होते थे। आज जयराम सरकार में 7 लाख 20 हज़ार 500 लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही है और हर साल 1300 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्या आम लोगों की सामाजिक सुरक्षा पर पैसे खर्च करना फिजूल खर्ची है।

बलदेव तोमर ने कहा कि वर्तमान बीजेपी में सरकार हिमकेयर, सहारा, गृहिणी सुविधा योजना, शगुन और स्वावलंबन जैसी योजनाओं पर 700 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर चुकी है और लाखों लोगों तक इसका लाभ पहुंचा है।

बलदेव ने कहा कि कांग्रेस बताए वो इतना भारी कर्ज लेने के बाद भी न तो आम लोगों के लिए कोई योजना चला सकी न ही कर्मचारियों के मुद्दे सुलझा सकी। तो फिर पैसा आखिर गया कहां? वर्तमान जयराम सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनर्स को नया वेतनमान दिया। कांग्रेस सरकार के समय चले आ रहे कर्मचारियों के वेतन विसंगतियों के मामलों को हल किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में यदि हिम्मत है तो वो आंकड़ों के साथ बात करे कि उन्होंने अपनी सरकार के समय क्या काम किए।

वीरभद्र विकास मॉडल यदि सफल तो रोजगार यात्रा क्यों निकालनी पड़ रही: नैहरिया

धर्मशाला।। धर्मशाला से बीजेपी विधायक विशाल नैहरिया ने कांग्रेस नेता रघुवीर सिंह बाली की रोजगार यात्रा को लेकर सवाल किए हैं। उन्होंने रोजगार यात्रा को बाली परिवार का पुराना राजनीतिक शिगूफा करार देते हुए कहा कि जब-जब चुनाव आते हैं तो बाली परिवार ऐसी यात्रा निकालने लगता है। और तो और, दिवंगत पूर्व मंत्री जीएस बाली ने तो 2015 में अपनी ही सरकार के खिलाफ ऐसी यात्रा निकालने की तैयारी कर दी थी। उस समय वीरभद्र सिंह ने कहा था कि यात्राएं करने से यदि रोजगार मिलता तो मैं प्रदेश का पांच बार भ्रमण कर लेता।

नैहरिया ने कहा कि 2012 में भी पूर्व मंत्री जीएस बाली ने ऐसी ही रोजगार यात्रा निकाली थी। लेकिन 2012 से 2017 तक वह खुद मंत्री रहे तो उन्होंने कितने लोगों को रोजगार दिलाया? उल्टा हालत यह थी कि 2015 में वह खुद मंत्री होने के बावजूद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ ही रोजगार यात्रा निकालने की तैयारी में थे। उन वीरभद्र सिंह के खिलाफ, जिनके तथाकथित विकास मॉडल का जिक्र आज कांग्रेस पूरे हिमाचल में कर रही है।

विधायक विशाल नैहरिया ने कहा कि पूरा हिमाचल जानता है कि न तो जीएस बाली की रोजगार यात्रा से युवाओं को लाभ हुआ और न ही आरएस बाली की यात्रा से होगा। हां, हिमाचल की जनता ये जरूर जानना चाहती है कि जीएस बाली जब सरकार में मंत्री थे तो कैसे उनके विभागों में होने वाली भर्तियों में सिर्फ एक क्षेत्र के युवा भर्ती होते थे।

विशाल नैहरिया ने कहा कि रोजगार यात्रा के नाम पर जो भारी-भरकम जो खर्च किया जा रहा है, उससे कितने ही युवाओं को स्वरोजगार के लिए धन दिया जा सकता था। उन्होंने कहा कि यात्रा निकालने से नहीं बल्कि नीति बनाने से युवाओं को रोजगार मिलेगा और नीति बनाने का काम जयराम ठाकुर की सरकार ने किया है।

विशाल नैहरिया ने कहा कि वर्तमान जयराम सरकार में स्वावलंबन योजना का हज़ारों युवा लाभ उठा रहे हैं। प्रदेश के युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने की दृष्टि से स्वावलंबन योजना को शुरू किया गया था। योजना के तहत कुल 721 करोड़ रूपये का निवेश हुआ। 200 करोड़ रूपये की अनुदान राशि प्रदान की गई। इसमें कुल 4 हजार 377 इकाइयां क्रियान्वित हो चुकी हैं। 11,674 लोगों को रोजगार मिल चुका।

विशाल नैहरिया ने कांग्रेस और रघुवीर सिंह बाली से पूछा कि कांग्रेस बताए कि क्या कांग्रेस शासनकाल में भी किसी योजना की शुरुआत हुई, जिससे युवा स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकें। नैहरिया ने कहा कि जयराम सरकार रिपीट होने जा रही है और आगे भी युवाओं को सरकारी एवं निजी क्षेत्र में रोजगार देने व उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने का अभियान तेजी से चलता रहेगा।

धर्मशाला के विधायक ने कहा कि कांग्रेस जिस वीरभद्र सिंह विकास मॉडल का ढिंढोरा सारे प्रदेश में पीट रही है, उसकी हकीकत यह थी कि चुनाव से पहले तो बेरोजगारी भत्ता देने की बात कही थी मगर सत्ता में आते ही देने से इनकार कर दिया था। यही कारण है कि हिमाचल की जनता कांग्रेस की ओर से दी जा रही गारंटियों पर भी यकीन नहीं कर रही।

राजन सुशांत की वापसी का फतेहपुर के AAP नेता ने किया कड़ा विरोध

फतेहपुर।। आम आदमी पार्टी में राजन सुशांत की एंट्री के बाद आज एक बार फिर फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र हॉट सीट बन गई है। फतेहपुर से आप नेता चेतन चम्बियाल ने आज पत्रकार वार्ता कर साफ कर दिया कि अगर पार्टी राजान सुशांत को टिकट देती है तो वे पार्टी से किनारा कर लेंगे।

चेतन चम्बियाल ने डॉक्टर राजन सुशांत पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे बताएं कि जब पार्टी ने उन्हें पहले प्रदेश की जिम्मेदारी दी थी तो वे क्यों भाग गये? वे कई पार्टियों में रहे और सभी पार्टियों ने उन्हें अपना नेता माना था लेकिन उन सभी दोखा देकर वह आप में शामिल हो गए। ऐसा ही चलता रहा तो पार्टी पूरे प्रदेश मे खत्म हो जाएघी।

चम्बियाल ने कहा कि डॉक्टर राजन सुशांत को पार्टी में लेने से पहले फतेहपुर के स्थानीय कार्यकर्ताओं व नेताओं से पूछा जाना चाहिए था मगर ऐसा नहीं हुआ। चेतन ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह वही नेता हैं जिन्होंने कुछ समय पहले केजरीवाल व भगवंत मान को खालिस्तान समर्थक कहा था और आए दिन आप के बड़े नेताओं को चेतावनियां देते फिरते थे। आज वही राजन सुशांत अपनी डूबती हुई नैया बचाने के लिए आम आदमी पार्टी का दामन थाम रहे हैं।

चेतन ने कहा कि इसपर हाईकमान को पुनः विचार करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाए कि फतेहपुर की जनता परेशान है कि डॉक्टर राजन सुशांत अपना राजनितिक भविष्य बचाने के लिए लगातार पाला बदल रहे हैं। अब आशंका यह है कि विधानसभा चुनावों से पहले फिर आम आदमी पार्टी छोड़ किसी नई पार्टी का दामन न थाम लें।