सोलन: नाले में गिरी टूरिस्ट बस, 21 जख्मी

सोलन।। शिमला सोलन की सीमा में स्थित क्यारी का नाला नज़दीक साधुपल में टूरिस्ट बस गिरने से 21 लोग घायल हो गए है।

16 को उपचार के लिए जुन्गा अस्पताल भेजा गया है जबकि पांच को आईजीएमसी शिमला भेज गया है, जिनमें दो की हालत गंभीर है।

SHO देस राज गुलेरिया ने जानकारी दी है कि सभी टूरिस्ट दिल्ली के हैं।

जब हिमाचल में चायवाले ने मोदी को अचानक खिलाया था लड्डू

इन हिमाचल डेस्क।। मन की बात के 50वें एपिसोड में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश से जुड़े एक वाकये का ज़िक्र किया।

पीएम मोदी ने कहा, “एक बार हिमाचल की पहाड़ियों में चाय पीने के लिए रुका। चाय वाले ने शीशे के बर्तन से लड्डू निकालकर मीठा खिलाया। मैंने पूछा कोई खुशी की बात है क्या? चाय वाले ने कहा भारत ने बम फोड़ दिया है।”

प्रधानमंत्री ने कहा,”दरअसल चायवाला मित्र परमाणु परीक्षण का जिक्र कर रहा था। उसने यह सूचना रेडियो पर सुनी थी। रेडियो की खबर का उस पर प्रभाव था। कम्युनिकेशन की रीच की बराबरी रेडियो से नहीं की जा सकती।”

मोदी ने कहा, “50 ऐपिसोड का यह सफर हम सबने मिलकर पूरा किया है। आकाशवाणी ने भी इस पर सर्वे किया है। 70 प्रतिशत लोग नियमित मन की बात सुनते हैं। इससे समाज में सकारात्मकता आई है। लोगों ने अपना अनुभव भी शेयर किया है। मुझे खुशी हुई कि मन की बात के कारण रेडियो लोकप्रिय हो रहा है। लोग, टीवी और इंटरनेट के जरिए भी मन की बात से जुड़ रहे हैं।”

रोहड़ू में सीएम जयराम की जनसभा में जुटी भारी भीड़

शिमला।। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर रविवार को शिमला ज़िले के रोहडू पहुंचे। यहां उन्होंने सीमा कॉलेज के ऐडमिन ब्लॉक और समोली पुल का उद्घाटन किया। मगर जिस बात की सबसे ज़्यादा चर्चा हो रही है, वह है जनसभा में उमड़ी भारी भीड़।

रोहड़ू के रामलीला मैदान में सीएम को जनसभा को संबोधित करना था। यह मैदान लोगों से पूरी तरह भरा हुआ था। यह असाधारण बात इसलिए भी है क्योंकि स्थानीय पत्रकारों का कहना है कांग्रेस के गढ़ रोहड़ू में इससे पहले कभी भारतीय जनता पार्टी या उसके सीएम की जनसभा में इतनी भीड़ नहीं उमड़ी थी।

बता दें कि रोहड़ू में कांग्रेस का दबदबा रहा है और इस समय भी यहां से कांग्रेस के मोहन लाल विधायक हैं। 11 बार यहां से लोगों ने कांग्रेस के विधायक चुने हैं, 2 बार भाजपा और एक बार जनता पार्टी के। खास बात यह भी है कि वीरभद्र सिंह ने 1990 से लेकर 2007 तक लगातार पांच बार यहां से जीत हासिल की थी। इस समय भी यहां से कांग्रेस के मोहन लाल विधायक हैं। ऐसे में जिस तरह से लोग बड़ी संख्या में सीएम की जनसभा में पहुंचे, वह हिमाचल के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि वीरभद्र और जयराम की करीबियों को भी इस भीड़ के पीछे की वजह बताया जा रहा है मगर कारण और भी हैं।

क्या रहा कारण
जिस समय जयराम ठाकुर को हिमाचल का सीएम बनाए जाने की घोषणा हुई थी, उस समय सबसे ज़्यादा चर्चा इस बात की हुई थी कि मंडी ज़िले से पहली बार कोई मुख्यमंत्री बना है। मगर इस शोर में यह बात दब गई कि जयराम के सीएम बनने से दरअसल हिमाचल में चली आ रही ‘अपर हिमाचल’ बनाम ‘लोअर हिमाचल’ की राजनीति के अंत की तरफ भी यह बड़ा कदम है।

हिमाचल का नक्शा उठाएं तो मंडी ज़िला बीचोबीच स्थित है। मगर सिराज की बात करें तो यह हिमाचल के मध्य भाग में पड़ता है। राजनीतिक विश्लेषक यह चर्चा करते रहे कि बीजेपी ने एक बार फिर ‘लोअर हिमाचल’ से मुख्यमंत्री बनाया है। यानी कांगड़ा के शांता कुमार और हमीरपुर के प्रेम कुमार धूमल के बाद मंडी से जयराम ठाकुर। मगर यह बात कई मायनों में अलग रही।

अपर-लोअर को जोड़ने वाली कड़ी
मंडी को बेशक लोअर हिमाचल माना जाता है मगर इसके कई इलाके भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से तथाकथित अपर हिमाचल जैसे हैं। दरअसल सिराज भौगोलिक रूप से ऐसी जगह स्थित है, जहां का रहन-सहन, संस्कृति और बोल-चाल आदि मंडी के अन्य हिस्सों की तुलना में सो कॉल्ड अपर हिमाचल के ज़्यादा करीब है।

यही कारण है रोहड़ू और ‘अपर हिमाचल’ के अन्य इलाकों के लोग खुद को जयराम से कनेक्ट करते हैं और उनके प्रति सॉफ्ट कॉर्नर रखते हैं। चूंकि रोहड़ू का रहन-सहन, खान-पान और बोल-चाल की सिराज से बहुत मिलता है, ऐसे में इस कनेक्शन का नतीजा रविवार को हुई सीएम की जनसभा में देखने को मिला, यह पैर रखने की भी जगह नहीं थी।

क्या भेद खत्म कर पाएंगे जयराम
भले ही यह दुर्भाग्यपूर्ण है मगर हिमाचल की राजनीति में अपर बनाम लोअर हिमाचल का गैप साफ नजर आता रहा है और लोग इसी आधार पर नेताओं से सहानुभूति रखते हैं। उदाहरण के लिए वीरभद्र को अपर हिमाचल का नेता माना जाता रहा है जितनी स्वीकार्यता शिमला और किन्नौर आदि में उन्हें मिली है, बीजेपी के मुख्यमन्त्रियों को नहीं मिली।

ऐसे में जयराम का सीएम होना तथाकथित अपर और लोअर हिमाचल के राजनीतिक विभाजन को कमज़ोर करता है क्योंकि जहां मैदानी हिमाचल के लोग मानते हैं सीएम उनके यहां से है, वहीं पहाड़ी या अपर हिमाचल के लोग भी खुद को सीएम से कनेक्ट कर पाते हैं।

इस तरह से देखें तो जयराम के पास इस अपर और लोअर हिमाचल को राजनीति को खत्म करने का भी मौका है। उनके ऊपर दो भू राजनीतिक इलाकों के बीच संतुलन बनाए रखने की ज़िम्मेदारी है। अगर वह ऐसा करने में सफल रहते हैं तो यह बड़ी उपलब्धि होगी।

हिमाचल के गांवों में HRTC स्टाफ से हो रहा है जातिगत भेदभाव

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश में जाति आधारित भेदभाव का एक और मामला राष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब खबर यह है कि एचआरटीसी के एक कंडक्टर को 10 हजार रुपये बतौर जुर्माना देने पड़े। यह जुर्माना सरकार को नहीं, बल्कि उस गांव के लोगों को देना पड़ा, जहां के एक घर पर उसने रात बिताई थी।

दरअसल ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट बताती है कि हेम राज नाम के कंडक्टर को कुल्लू के एक गांव में रुकना पड़ा था। जब गांव वालों को पता चला कि वह अनुसूचित जाति से हैं तो उनपर दस हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया गया।

यह इस तरह का पहला मामला नहीं है, इससे पहले एचआरटीसी के ही एक मुस्लिम कंडक्टर राज मोहम्मद ने एचआरटीसी से गुजारिश की थी मेरी बस का रूट बदल दो क्योंकि रात को जिस गांव में रुकना पड़ता है, वहां पर मुझे खाने को कुछ नहीं मिलता।

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रात को रुकना पड़ता है गांव में
हिमाचल में कई रूट ऐसे हैं जहां पर रात को बस गांव में ही रुकती है और सुबह वहां से मुख्य स्टेशन के लिए आती है। ऐसे में ड्राइवर और कंडक्टर को गांव में ही ठहरने का इंतज़ाम करना पड़ता है।

एचआरटीसी के ड्राइवर कंडक्टर शिकायत करते रहे हैं कि कुल्लू के आंतरिक इलाकों में उनके साथ धर्म और जाति आधारित भेदभाव होता है। उनका कहना है कि उन्हें न तो रहने के लिए कोई जगह मिलती है न ही खाना। कुछ जगहों पर उन्हें जुर्माने का डर दिखाया जाता है।

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आरएम ने डीसी को लिखी चिट्ठी

रिपोर्ट के मुताबिक एचआरटीसी के आरएम डी.के. नारंग को इस तरह की कई शिकायतें स्टाफ से मिली हैं और उन्होंने आखिरकार कुल्लू के डीसी को पूरे मामले को लेकर लिखा है कि अगर यह सिलसिला नहीं रुका तो मजबूरन सुदूर गांवों के लिए उन्हें बस सेवा रोकनी पड़ेगी।

नारंग का कहना है कि इस तरह की शिकायतें कमांद, Khanipand और Shangad गांवों से आ रही है। उनका कहना है कि एचआरटीसी के लिए जाति देखकर स्टाफ को भेजना संभव नहीं है।

लेटर में उन्होंने डीसी को लिखा है, “सुदूर गांवों की पंचायतों से स्टाफ के लिए इंतजाम करने के लिए कहिए वरना हमें इन इलाकों के लिए सेवाएं रोकनी पड़ सकती हैं।”

हिमाचल के कई देव-दरबारों में चमत्कारी रिश्वत है बकरा

अगला लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं शांता कुमार?

कांगड़ा।। कई मौकों पर चुनाव न लड़ने की इच्छा जता चुके और युवाओं को मौका देने का समर्थन कर चुके कांगड़ा से बीजेपी के सांसद शांता कुमार ने 2019 लोकसभा चुनावों के लिए लगता है कमर कस ली है।

मुल्थान में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अगला चुनाव लड़ने से संबंधित सवाल के जवाब में कहा कि पार्टी हाईकमाना की ओर से जो भी संदेश होगा, वह सर्वमान्य होगा।

इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खूब तारीफ की। उन्होंने ये भी कहा कि हिमाचल में बीजेपी चारों सीटें जीतेगी और फिर से केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी।

वीरभद्र बोले, चामुंडा माता की कृपा से सातवीं बार बनूंगा मुख्यमंत्री

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का कहना है कि वह मां चामुंडा और नंदीकेश्वर भगवान की कृपा और आशीर्वाद से छह बार हिमाचल के सीएम बने हैं और माता ने आशीर्वाद दिया तो सातवीं बार भी सीएम बनेंगे।

शनिवार को वीरभद्र ने सुबह चामुंडा देवी के आगे शीश नवाया और विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद वह नंदीकेश्वर धाम भी गए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने इस दौरान मंदिर परिसर का चक्कर काटा और यहां चल रहे निर्माण कार्यों पर नजर दौड़ाई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अनुराग के खिलाफ दर्ज एफआईआर गलती से हुई रद्द

नई दिल्ली।। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धर्मशाला में क्रिकेट स्टेडियम बाने के लिए जमीन पर कथित रूप से अवैध कब्जा करने से जुड़े मामले में बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर और अन्य के खिलाफ एफआईआर को रद करने का आदेश ‘गलती से’ दे दिया था।

एचपीसीए की ओर से दर्ज मामले में प्रतिवादी के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के वकील ने सोमवार को जस्टिस एके सिकरी और एसए नजीर की बेंच से मांग की कि 2 नवंबर को दिया गया आदेश वापस लिया जाए।

क्या है मामला
2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर, उनके पिता और हिमाचल के पूर्व सीएम के खिलाफ दो एफआईआर खारिज करने का आदेश दिया था। इनमें से एक मामला धर्मशाला में क्रिकेट स्टेडियम बनाने के लिए जमीन लीज पर देने में कथित गड़बड़ियों से जुड़ी थी और दूसरी सरकारी जमीन पर कथित रूप से अवैध कब्जा करने को लेकर।

वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने अनुराग ठाकुर और अन्य की ओर से कोर्ट में पेश होकर कहा कि पिछले आदेश को वापस लेने की जरूरत नहीं है क्योंकि मुख्य एफआईआर तो कोर्ट ने पहले ही खारिज कर दी है। लेकिन वहीं वीरभद्र सिंह की ओर से पेश हुए वकीलों ने कहा कि दो नवंबर को लिया गया ऑर्डर वापस लिया जाना चाहिए क्योंकि अलग-अलग मामलों में दर्ज एफआईआर को गलती से एकसाथ खारिज कर दिया गया। वकीलों का कहना था कि दूसरा मामला उस जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर है जहां शिक्षा विभाग के स्टाफ क्वॉर्टर थे।

वीरभद्र सिंह के वकील ने कहा कि अदालत ने यह एफआईआर गलती से रद्द कर दी थी क्योंकि दूसरी एफआईआर पर हम भी पक्षकार हैं और हमारा पक्ष सुना ही नहीं गया। हालांकि अनुराग के वकील ने बेंच से कहा कि दो नवंबर के फैसले में कोर्ट ने तथ्यों के आधार पर फैसला देकर एफआईआर खारिज की है।

अनुराग के वकील का कहना था कि एफआईआऱ में कहा गया है कि स्टाफ क्वॉर्टर्स को गैरकानूनी ढंग से ढहाया गया मगर न सिर्फ एजुकेशन सेक्रेटरी ने ट्रांसफर ऑफ लैंड के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट दिया था बल्कि उस समय के शिक्षा मंत्री की ओऱ से भी मंजूरी मिली थी।

अनुराग के वकील पटवालिया ने जब अपनी ओर से दलीलें पेश कर दीं, वीरभद्र सिंह के वकील ने बेंच को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने तो हमारी दलीलें सुने बिना ही एफआईआर खारिज कर दी। वीरभद्र के वकील ने कहा कि इस मामले में पक्ष रखने के लिए उन्हें थोड़ा समय चाहिए और अभी वह दलीलें नहीं दे पाएंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
इसके बाद बेंच ने वीरभद्र के वकील से कहा, “अगर आप दलीलें नहीं दे सकते तो मत दीजिए। हम आदेश पारित कर देंगे। हम कह रहे हैं कि ये एक गलती थी।” इसके बाद बेंच ने आगे इस मामले को सुनने के लिए 29 नवंबर की तारीख तय की है।

इससे पहले वीरभद्र सिंह ने अपने वकील डीके ठाकुर के जरिए सुप्रीम कोर्ट में उस याचिका का विरोध किया था, जो 2013 में अनुराग ठाकुर और अन्य के खिलाफ धर्मशाला में क्रिकेट स्टेडियम बनाने को लेकर हुई थी।

अनुराग ठाकुर, प्रेम कुमार धूमल और एसपीचीए ने सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें वीरभद्र सरकार के दौरान दर्ज एफआईआर को खारिज करने से इनकार कर दिया गया था।

हमीरपुर से भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया था कि उनके खिलाफ राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित होकर ये मामले किए गए हैं, जबकि वीरभद्र इस आरोप से इनकार करते हैं।

हिमाचल प्रदेश में हो सकता है मंत्रिमंडल में फेरबदल

शिमला।। जयराम सरकार के मंत्रिमंडल में जल्द ही परिवर्तन देखने को मिल सकता है। इसके तहत न सिर्फ कुछ मंत्रियों के प्रभार बदले जा सकते हैं बल्कि कम से कम एक मंत्री की छुट्टी भी हो सकती है। सरकार में होने जा रहे इस कथित फेरबदल की जानकारी रखने का दावा करने वाले बीजेपी संगठन के कुछ सूत्रों का कहना कि सरकार का एक साल पूरा होने वाला है, ऐसे में मंत्रियों के काम और जनता के बीच उनके प्रभाव के आधार पर यह फैसला लिया जाना है।

कांगड़ा में फेरबदल?
गौरतलब है कि कांगड़ा से इस समय चार मंत्री हैं मगर बावजूद इसके यहां से मंत्रियों के आपसी मतभेदों की खबरें तो आती ही रहती हैं, कुछ मंत्रियों की जनता के बीच छवि भी खराब हुई है। इससे सीधे-सीधे सरकार की इमेज पर भी असर पड़ रहा है। सरकार के लिए चिंता की बात यह है कि जिले से तीन मंत्री होने के बावजूद सरकार की नीतियां और योजनाएं जनता तक सही से पहुंच नहीं रही और लोगों में असंतोष की भावना पैदा हो रही है। जिले में निकाय स्तर पर हुई फेरबदल भी पार्टी के लिए असहज करने वाली रही है।

सूत्रों का कहना है कि इन सब बातों के कारण आबादी और विधानसभा सीटों के हिसाब से प्रदेश के सबसे बड़े जिले कांगड़ा से किसी एक मंत्री को बदला जा सकता है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि अगर कांगड़ा से एक मंत्री को हटाया जाता है तो उसकी जगह कांगड़ा से ही नया मंत्री बनाया जाएगा या कहीं और से। जाहिर है, सरकार नहीं चाहेगी कि पहले से असंतुष्ट दिख रहे कांगड़ा जिले से एक मंत्री कम करके लोगों को और नाराज किया जाए। ऐसे में नया मंत्री यहीं से बनेगा, मगर यह स्पष्ट नहीं है कि किसे यह मौका मिलेगा।

लोकसभा चुनाव का असर
सूत्रों का यह भी कहना है कि मंत्रिमडल में संभावित इस फेरबदल में लोकसभा चुनाव का भी असर पड़ेगा। करप्शन के आरोपों का समान कर रहे शिमला के सांसद वीरेंद्र कश्यप की जगह अगर बीजेपी आलाकमान हिमाचल कैबिनेट में मौजूद किसी मंत्री को लोकसभा चुनाव लड़ने को कहा जाता है तो उसकी जगह किसी और को मंत्री बनाया जाएगा।

चूंकि यह फैसला आलाकमान पर निर्भर करेगा, ऐसे में यहां खुद से कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इसी तरह के हालात कांगड़ा में भी बन सकते हैं। अगर किसी मंत्री को लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा जाएगा तो राज्य सरकार के लिए उसकी जगह नए मंत्री की नियुक्ति करने की राह आसान हो जाएगी।

इस बीच सूत्रों का यह भी कहना है कि मंत्रियों के प्रभार भी बदले जा सकते हैं। यह फैसला भी इस आधार पर लिया जाएगा कि उन्होंने अपने मौजूदा विभागों में क्या नया किया और उन्होंने अपने काम को कितनी गंभीरता से लिया। गौरतलब है कि कुछ मंत्रियों का फीडबैक ऐसा है कि न तो वे अपने महकमे में कुछ नया कर पा रहे हैं, न ही जनता के बीच उनकी पहुंच है। ऐसे में उन्हें वॉर्निंग दी जा सकती है या फिर महकमा बदला जा सकता है। ऐसा इसलिए भी किया जा रहा है ताकि ऐसे मंत्रियों की सुस्ती का खामियाजा पार्टी को लोकसभा चुनाव में न भुगतना पड़े।

हेम्प की खेती को लेकर विक्रमादित्य और अग्निहोत्री में मतभेद

शिमला।। बिना नशे वाली भांग की औद्योगिक किस्म ‘हेम्प’ की खेती को लेकर छिड़ी बहस को लेकर सरकार की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया आने के बाद अब विपक्षी दल कांग्रेस में मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं। जहां शिमला ग्रामीण से कांग्रेस के विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह ने भांग की खेती को मान्यता देने का समर्थन किया है, वहीं कांग्रेस विधायक दल के नेता और नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने इसका विरोध किया है।

इस तरह से एक ही पार्टी के दो प्रमुख नेताओं के विचार इस मुद्दे पर अलग होना चर्चा का विषय बन गया है। इसे पार्टी के अंदर संवाद की कमी के तौर पर भी देखा जा रहा है। गौरतलब है कि विक्रमादित्य सिंह ने अपने ऑफिशल फेसबुक पेज पर पोस्ट डालकर भारतीय जनता पार्टी और संघ से जुड़े नेताओं से सवाल पूछा है।

क्या है विक्रमादित्य की राय
विक्रमादित्य लिखा है, “जब हमने विधानसभा में इस माँग को उठाया था तो कुछ भाजपा और संघी नेताओ ने हमारा मज़ाक़ उड़ाया था। आज मुख्यमंत्री ने ख़ुद प्रदेश में भांग की खेती को लीगल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है तो इस पर संघी क्या कहेंगे हम भी जनना चाहेंगे?”

विक्रमादित्य सिंह

सवाल भाजपा से, जवाब मिला कांग्रेस से
हालांकि मजेदार बात यह है कि सवाल विक्रमादित्य ने भाजपा और संघ के नेताओं से पूछा था मगर जवाब उन्हीं की पार्टी के नेता मुकेश अग्निहोत्री की ओर से आया है। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री में इस विषय पर आपत्ति जताते हुए कहा है- सरकार होश में रहे।

क्या है अग्निहोत्री की राय
ऊना में मुकेश अग्निहोत्री ने प्रदेश में हेम्प की खेती को लेकर कहा, “कुछेक क्षेत्रों को फायदा पहुंचाने के लिए पूरे प्रदेश को नशे की दलदल में नहीं धकेला जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार को भांग की खेती के कानूनी पहलू की बजाय सामाजिक पहलू के बारे में सोचना चाहिए।”

जबकि इस विषय पर विक्रमादित्य ने फेसबुक पर लिखा है, “हमने सदन में भांग की खेती को औषधीय रूप से कैन्सर व अन्य रोगों के इलाज के रूप से उसकी खेती को कानूनी मंज़ूरी देने की बात कही थी, जिसे अन्य प्रदेशों और कई देशों मैं भी अपनाया जा रहा है। यह रोज़गार के लिए एक बड़ा साधन साबित होगा।”

विक्रमादित्य-अग्निहोत्री को विषय का ज्ञान नहीं?
हालांकि, चर्चा इस बात की भी है कि भले ही विक्रमादित्य ने भांग की खेती का समर्थन किया है और अग्निहोत्री ने विरोध मगर दोनों की ही बातें बताती हैं कि उन्हें पता ही नहीं है कि सरकार किस बारे में विचार कर रही है। विक्रमादित्य मेडिकल मैरवाना की बात कर रहे हैं जो नशे वाली किस्म होती है। सरकार जिस हेम्प की खेती के बारे में विचार कर रही है, उसे मेडिकल मैरवाना के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

इसी तरह अग्निहोत्री शायद नहीं जानते कि हेम्प को नशे के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि उसमें नशीले रयासन की मात्रा न के बराबर होती है।

इंडस्ट्रियल हेम्प नीचे दिए गए लिंक पर पढ़ें।

हिमाचल को मालामाल कर सकती हैं इंडस्ट्रियल भांग की खेती

बरागटा के खिलाफ जांच बंद, बिंदल पर चल रहा केस वापस होगा

शिमला।। मुख्य सचेतक नरेंद्र बरागटा पर चल एंटी हेल गन मामले की जांच बंद कर दी गई है। इसके साथ ही सरकार के अभियोजन विभाग ने विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर राजीब बिंदल और 25 अन्य के खिलाफ चल रहे भर्ती मामले को वापस लेने की इजाजत दे दी है।

बरागटा पर क्या था आरोप
हाल ही में सरकार द्वारा विधानसभा में मुख्य सचेतक बनाए गए नरेंद्र बरागटा के खिलाफ एंटी हेलगन मामले में जांच बंद हो गई है। खबर है कि विजिलेंस का कहना है कि इस मामले में उसे कुछ नहीं मिला है। एंटी हेल गनों की खरीद उस समय की गई थी जब भारतीय जनता पार्टी की पहले की सरकार में बरागटा बागवानी मंत्री थे।

कांग्रेस सरकार के दौरान सवाल उठे थे कि बेहद महंगी एंटी हेल गनों को किस आधार पर खरीदा गया और इन्हें खरीदने से पहले किस रिपोर्ट को आधार बनाया गया था कि ये ओले गिरने से रोकने में कारगर हैं। इसी आधार पर यह जांच शुरू की गई थी। मगर ‘अमर उजाला’ की रिपोर्ट के मुताबिक अब सबूत न मिलने के आधार पर जांच को बंद किया गया है।

एक साल में बदल गया मामला
हालांकि, एक साल पहले जून 2017 में मीडिया में खबरें आई थीं कि विजिलेंस ने जांच में पाया है कि इन गनों की खरीद में शर्तों का पालन नहीं किया गया। ‘दिव्य हिमाचल’ की रिपोर्ट में विजिलेंस की जांच के हवाले से कहा गया था, “बागबानी विभाग ने खरीद की शर्तों के विपरीत कंपनी को पूरी पेमेंट कर दी। इनके लिए लगाया गया राडार भी कुछ ही समय में खराब हो गया। इस मामले में विजिलेंस बागबानी विभाग के एक आलाधिकारी और फर्म के खिलाफ मामला दर्ज कर चुकी है।”

दरअसल भाजपा सरकार के वक्त साल 2011 में तीन एंटी हेलगनें खरीदी गई थीं। ये गनें खड़ा पत्थर के खटासू, देउरीघाट, ब्रूईंघाट में लगाई गई थीं। बागबानी विभाग ने एक निजी कंपनी के साथ इन गनों की खरीद को लेकर 2.35 करोड़ का सौदा किया था। इसके लिए एक राडार भी लगाया गया था।

विजिलेंस जांच के हवाले से अखबार ने प्रकाशित किया था, “एंटी हेलगनों की खरीद के लिए तय शर्तों का कंपनी ने पालन नहीं किया और बागबानी विभाग ने भी इनका पालन नहीं करवाया। कंपनी को इन गनों की एवज में किस्तों में पेमेंट होनी थी। यानी इन गनों की सही तरीके पर ही पूरी पेमेंट की जानी थी, लेकिन बताया जा रहा है कि बागबानी विभाग ने इन गनों के लिए पूरी पेमेंट कर दी, जबकि ये गन सही तरीके से काम नहीं कर पाईं।”

बिंदल पर क्या है केस
विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर राजीव बिंदल समेत अन्य 25 के खिलाफ भर्ती में गड़बड़ी के आरोप को मामला चल रहा था। दरअसल 1999 में डॉक्टर बिंदल जब सोलन नगर परिषद के अध्यक्ष थे, कांग्रेस का आरोप है कि उस दौरान उन्होंने नियमों के खिलाफ भर्ती की थी।

कांग्रेस सरकार ने साल 2006 में मामला दर्ज किया था और फिर अगली बार फिर वह सत्ता में आई तो साल 2013 में उसने अभियोजन चलाने की मंजूरी दी थी। इन आरोपों को डॉक्टर बिंदल राजनीति से प्रेरित बताते रहे हैं।

क्या ऐंटी ‘हेल गन’ या ‘हेल कैनन’ बच्चों के काले टीके जैसी है?