इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश की चार लोकसभा सीटों पर किसे उतारा जाए, इस बात को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों में मंथन जारी है। मगर अब खबर आई है कि बीजेपी हिमाचल की दो सीटों पर मौजूदा सांसदों के टिकट काटने जा रही है।
देर रात तक भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में इस बात पर चर्चा होती रही कि किस सीट पर किसे उतारा जाए। सूत्रों के मुताबिक बीत रात शिमला और मंडी पर चर्चा हुई। दोनों सीटों पर नाम लगभग तय हैं। खास बात यह है कि इन दोनों सीटों पर प्रत्याशी का नाम फाइनल करने में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की राय अहम होगी।
आज दो सीटों पर फैसला
आज बीजेपी हमीरपुर और कांगड़ा से प्रत्याशियों के नाम तय करेगी। हमीरपुर में टिकट के चयन में जहां पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की राय अहम होगी, वहीं कांगड़ा सीट पर प्रत्याशी तय करने में पूर्व सीएम शांता कुमार की राय अहम रहेगी।
सूत्रों का यह भी कहना है कि कांगड़ा सीट पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। यहां से अगर नए चेहरे को उतारा जा सकता है तो उसका नाम सबको चौंका सकता है।
अगर इन दो सीटों पर भी आज ही प्रत्याशी तय हो गए तो रात तक या फिर कल हिमाचल से बीजेपी उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की जा सकती है।
शिमला।। मंडी शहर में बुधवार को खेली गई होली की जहां पूरे देश में तारीफ हुई, आज शिमला के रिज में होली के दौरान हुड़दंग देखने को मिला। कुछ युवक होली खेलते हुए आपस में भिड़ गए।
वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने बीचबचाव की कोशिश की तो वो भी हिंसक व्यवहार की चपेट में आकर जख्मी हो गए।
दि नॉदर्न पोस्ट के पेज पर शेयर वीडियो में पुलिसकर्मी की नाक से खून बहता नजर आ रहा है-
रिज पर होली खेल रहे युवक आपस मे भिड़े, पुलिस आई बीच मे उन की भी कर दी पिटाई
धर्मशाला, अमित पुरी।। ट्रेकिंग पर गए छात्रों में एक के लापता होने के बाद अब तक त्रियुन्ड ट्रेक को खोला नहीं गया है। ऐसे में बाहर से आ रहे पर्यटक निराश हो रहे हैं। हालांकि स्थानीय गाइड उन्हें अन्य जगहों पर ले जा कर कैम्पिंग का अनुभव दिलवा रहे हैं।
इन हिमाचल ने बात की ऐसे ही कुछ पर्यटकों से। देखें-
मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में पिछले 16 सालों से अनूठे अंदाज में होली मनाई जाती है। इंदिरा मार्केट पर पूरा शहर जमा होता है और मिलकर होली खेली जाती है और जमकर डांस किया जाता है। लड़के-लड़कियां, बच्चे बूढ़े सब मिलकर मस्ती करते हैं।
हम पेश कर रहे हैं कुछ वीडियो। लड़कियां भी बेफिक्र होकर होली खेल सकती हैं। न किसी तरह का हुड़दंग न कोई ऐसी-वैसी हरकत। इस मामले में सबको सबक लेना चाहिए। देखें वीडियो:
हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर में होली के जश्न का दिल खुश कर देने वाला वीडियो।
चम्बा।। देश में घर-घर बिजली और गैस पहुंचाए जाने के दावों के बीच एक ऐसे परिवार की कहानी जो आज भी मानो काला पानी की सजा काट रहा है। मामला चंबा के डलहौजी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली डांड पंचायत के गाव डूग्शु का है जहां के कयूम खान के घर ना तो आज तक बिजली है और ना ही आज तक गैस उपलब्ध हो पाई है।
ये परिवार इतना गरीब है कि 2 टाइम का खाना जिस दिन नसीब हो जाए, वो दिन इनके लिए त्यौहार जैसा है। यह भी हैरानी की बात है कि परिवार आईआरडीपी में आता है, उसके बाद भी इनकी कोई मदद नहीं मिली। समस्या ये है कि कयूम खान और उनकी पत्नी दोनों ही ठीक से बोल नहीं सकते। वे तुतलाते हुए बोल पाते हैं, उच्चारण साफ नहीं आता।
इनके दो बच्चे हैं। एक लडकी आमना बेगम, जो छठी कक्षा में पढ़ती है और एक लड़का मोहम्मद परवेज तीसरी कक्षा में है। दोनों ही बच्चे दीये की रौशनी में पढ़ाई करते हैं।
क्यों नहीं पहुंची बिजली
आईआरडीपी में आने के 11 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी परिवार की कोई सुनाई नहीं हुई। कयूम खान का दावा है कि जब भी वो बिजली विभाग गए, उनसे 5000 रुपये जमा करवाने को कहा गया।
अब जिस घर में दो टाइम का खाना मिलना नसीब न हो, जो व्यक्ति मनरेगा में काम करके अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा हो, वो कहां से 5000 की राशि जमा करवाएगा। कयूम का कहना है कि गैस के लिए कई बार फरियाद लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
आपको बता दें कि कयूम के घर की हालत इतनी दयनीय है कि कब गिर जाए, कहा नहीं जा सकता। लेकिन परिवार गरीबी की मार झेलने के कारण जैसे तैसे अपना जीवन बसर कर रहा है।
क्या कहता है प्रशासन
एसडीएम सलूणी विजय धीमान ने कहा कि मामले की जानकारी आपके माध्यम से मिली है, इस मामले पर जल्द से जल्द कार्यवाही की जाएगी और गरीब परिवार को हर सम्भव मदद पहुंचाई जाएगी।
इन हिमाचल डेस्क।। आपमें से बहुत लोगों को शायद पता नहीं होगा कि ‘ढोलरू’ क्या है। चैत्र महीने की शुरुआत होते ही कुछ लोगों की टोली घर-घर घूमती है और लोकगीत सुनाती है। ढोलक की थाप पर गाए जाने वाले गाने को कहते है ढोलरू और इस घुमंतू टोली को कहते हैं ‘ढोलरू वाले।’
दरअसल पुराने समय से कुछ इलाकों में मान्यता चली आ रही है कि चैत्र महीना आने पर उसका नाम तब तक नहीं लेना है, जब तक “ढोलरू वाले’ आकर उन्हें इस महीने का नाम न सुना दें। संक्रांति को ढोलरू वाले ढोलक बजाकर चैत्र का नाम गायन के माध्यम से सुनाते हैं। यह प्रक्रिया एक हफ्ते तक चलती है और वे गांव-गांव जाकर ढोलरू सुनाते हैं।
कभी दो लोग होते हैं तो कभी 4 से 5 लोगों की टोली ढोलरू सुनाती है। पहले तो चैत्र का नाम सुनाया जाता है और फिर लोग गुजारिश करें तो अन्य लोक गीत भी गाए जाते हैं, जिनमें रुल्ह-कुल्ह, धोबण और कंढी शामिल हैं। रुल्ह-कुल्ह चंबा की रानी की कहानी है और धोबण एक धोबिन की। इसी तरह कंढी में बहन की कहानी है। आखिर में लोग इन ढोलरू वालों को अनाज, कपड़े और पैसे वगैरह देकर विदा करते हैं।
अब आप सोच रहे होंगे कि ढोलरू में गाया क्या जाता है। हमने जितने भी गाने इस आर्टिकल में लगाए हैं, उन्हें अलग-अलग व्यक्तियों ने अलग-अलग शैली में गाया है, मगर सबका कॉन्टेंट एक ही है और अर्थ भी एक ही है। जाने-माने साहित्यकार अनूप सेठी जी ने अपने ब्लॉग में ढोलरू के बारे में लिखा है- ‘ढोलरू के प्रचलित बोल भी विनम्रता और कृतज्ञता से भरे हैं। दुनिया बनाने वाले का नाम पहले लो, दुनिया दिखाने वाले माता पिता का नाम पहले लो, दीन दुनिया का ज्ञान देने वाले गुरु का नाम पहले लो और उसके बाद बाकी नाम लो। नए वर्ष के महीनों की बही तो उसके बाद खुलेगी।’
नीचे दिए गए विडियो को देखें, जिसमें पहले दुनिया बनाने वाले के नाम, फिर माता-पिता के नाम और फिर गुरु का नाम पहले लेने की बात कही गई है। ध्यान से सुनें:
सेठी आगे लिखते हैं, ‘हमारे कृषि-प्रधान समाज में तकरीबन हर जगह त्योहार इसी तरह मनाए जाते हैं जिनमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है और मनुष्य के साथ उसका तालमेल बिठाया जाता है। लगता है कि त्योहार मनाने के ये तरीके किसी शास्त्र ने नहीं रचे। ये लोक जीवन की सहज अभिव्यक्तियां हैं जो सदियों में ढली हैं।’
अनूप सेठी का पूरा लेख यहां क्लिक करके पढ़ा जा सकता है। उन्होंने अपनी फेसबुक टाइमलाइन पर एक वीडियो भी शेयर किया है। इसमें भी वही गाया गया है, जो ऊपर वाले लोगों ने गाया है, मगर अलग अंदाज में। नीचे वीडियो देखें:
चम्बा में जम्मू से आए ढोलरू
चम्बा की बात करें तो यहां शुभ माने जाने वाले चैत्र माह का नाम लोगों को सुनाने के लिए जम्मू राज्य के बन्नी इलाके से हर साल लोग चंबा जिला मुख्यालय पहुंचते हैं। ढोलरू नाम से प्रसिद्ध यह लोग इन दिनों भी चंबा में डेरा डाले हुए हैं। अपने पूर्वजों की परम्परा को निभाते हुए ये लोग गीत गाकर लोगों को चैत्र माह का नाम सुनाते हैं। गीत सुनने की एवज में जहां लोग इन ढोलरुओं को कपड़े देते हैं वहीं अनाज, मिठाईयां व पैसे भी देते हैं। इस माह के दौरान घर-घर इनकी टोलियां देखी जा सकती हैं तथा ढोलकी की धुनों पर गीत गाकर यह लोगों का मनोरंजन करते हैं।
जम्मू राज्य के बन्नी इलाके से चंबा पहुंचे ढोलरुओं के अनुसार साल भर उन्हें इस महीने का इंतजार रहता है तथा वे इस माह चंबा आकर लोगों को चैत्र माह का नाम सुनाते हैं ताकि उनके जीवन में सुख शांति रहे। उनके अनुसार वे अपने पूर्वजों की परम्परा को निभा रहे हैं तथा गीत गाने की एवज में लोग उन्हें कपड़े, अनाज, मिठाईयां तथा पैसे इत्यादि देते हैं जिससे वह साल भर अपना गुजारा करते हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि वे बचपन से ही इस परंपरा को देखते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि चैत्र मास में यह ढोलरू घर घर जाकर चैत्र महीने का नाम सुनाते हैं जिसे सुनकर लोगों का पूरा साल सुख और समृद्धि से बीतता है। उन्होंने बताया कि वह इन लोगों से चैत्र महीने का नाम सुनते हैं और उसके बदले में नहीं कपड़े अनाज और पैसे देते हैं।
Image: fb/ Rohit Sharma
क्या है मान्यता
आखिर क्यों लोग एक वर्ग विशेष के लोगों के मुख से चैत्र माह का नाम सुनते हैं? इसके पीछे भी अनेकों कहानियाँ सुनने को मिलती है। पंडितों का कहना है कि इसी माह में भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी, इसी माह भगवान ने मानव जाति की रचना की थी।
मान्यता है कि एक विशेष वर्ग के लोग भगवान शंकर की शरण में जाकर उनकी स्तुति करने लगे। भक्ति से प्रश्न होकर भगवान ने उन्हें मंगल मुखी होने का वरदान दिया। भगवान ने कहा कि पृथ्वी लोक में जो कोई मानव आपके मुख से चैत्र माह का गुणगान सुनेगा, उसका सारा साल शुभ बीतेगा। मान्यता है कि इसी कारण इस वर्ग के लोग घर-घर जाकर आज भी चैत्र माह का नाम सुनाते हैं।
नोट- अब ये सर्वे बन्द हो चुका है, अब डाले गए वोट गिने नहीं जानेंगे। शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक के वोटों के नतीजे देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
इन हिमाचल डेस्क।। लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान चरम पर पहुंच गया है। हिमाचल में आखिरी सातवें चरण के तहत 19 मई को वोटिंग होगी। अभी तक न तो बीजेपी ने साफ किया है कि चार लोकसभा सीटों पर उसके उम्मीदवार कौन होंगे और न ही कांग्रेस ने अपने कैंडिडेट तय किए हैं। जैसे-जैसे वक्त बीतता जा रहा है, पहले घोषणा होने से प्रचार अभियान में उम्मीदवारों को मिलने वाला फायदा कम होता जाएगा।
बहरहाल, बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही शिमला, हमीरपुर, मंडी और कांगड़ा से अपने संभावित उम्मीदवारों के नाम तय करने पर मंथन करने में जुटी हैं। कई नाम आगे आए हैं तो कई नाम पीछे भी हट रहे हैं कि कहीं आलाकमान उन्हें चुनाव लड़ने का फरमान न सुना दे और उनके राजनीतिक भविष्य पर ही सवाल खड़ा हो जाए।
इस सब चर्चा के बीच हिमाचल की जनता क्या चाहती है? कांग्रेस में कौन का कैंडिडेट ऐसा हो सकता है जो जीतने में सक्षम है। इसी तरह बीजेपी में कौन सा उम्मीदवार होगा जो जीतने में सफल रह सकता है। ऐसे ही कुछ सवालों पर हम आपसे पूछने जा रहे हैं कुछ सवाल। दो मिनट निकालिए और जवाब दीजिए-
शिमला।। हिमाचल प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन ने हिमाचल प्रदेश एडमिनिस्ट्रेशन सर्विसेज एग्जाम 2017 का परिणाम घोषित कर दिया है। खास बात यह है कि शीर्ष की चारों टॉपर लड़कियां ही हैं।
बिलासपुर।। हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सर्विस-2017 (एचएएस) के परीक्षा परिणाम घोषित हो गए हैं। बिलासपुर की अपराजिता चंदेल ने सोमवार को पूरे प्रदेश में टॉप किया है। इस एग्जाम की सेकंड टॉपर शाहपुर की स्वाति डोगरा हैं।
अपराजिता बिलासपुर के गांव भंजवाणी डाकघर औहर की स्थायी निवासी है। अपराजिता के पिता राकेश चंदेल क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में चीफ फार्मासिस्ट के पद पर तैनात हैं जबकि माता मीना चंदेल हमीरपुर अस्पताल में वार्ड सिस्टर के पद पर कार्यरत हैं।
अपराजिता वर्तमान में केंद्रीय सचिवालय में रक्षा मंत्रालय में सेक्शन ऑफिसर के पद पर कार्यरत है। अपराजिता इससे पहले आईएएस (मेन) परीक्षा भी उत्तीर्ण कर चुकी हैं जिसके बाद उन्हें यह नियुक्ति मिली थी।
अपराजिता ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता सहित अपने मामा चंडीगढ़ प्रशासन के अधिशासी अभियंता राकेश चौहान व दूसरे मामा एम.डी. डा. नरेश चौहान, अपने दादा माधो राम चंदेल व डी.ए.वी. बिलासपुर के पूर्व प्रधानाचार्य के.पार्थिपन को दिया है, जिन्होंने बाल्यकाल से ही उसका उत्साहवर्धन किया।
अमित पुरी, कांगड़ा।। बेटियां किसी से कम नहीं और वे समाज के हर क्षेत्र में नाम कमा रही हैं। कामयाबी की इबारत लिखने वाली महिलाओं की सूची में एक और नाम जुड़ गया है- स्वाति डोगरा। फर्स्ट टॉपर बिलासपुर की अपराजिता हैं।
हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा 2017 का परिणाम घोषित हो गया है। इसमें जिला कांगड़ा शाहपुर की रहने वाली स्वाति डोगरा ने दूसरा स्थान हासिल किया है।
स्वाति ने अपनी इस सफलता पर खुशी जाहिर की है और कहा कि मेहनत का फल मिला है तो खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि उनकी सफलता में उनकी माता और उनके भाई का अहम योगदान है।
4 प्रयास में उन्हें सफलता प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र इसलिए चुना गया क्योंकि इसके माध्यम से लोगों की सेवा भी की जा सकती है। उन्होंने कहा कि जो भी कार्य मिलेगा, उसे ईमानदारी से निभाने का प्रयास करूंगी।
युवाओं को लेकर उन्होंने कहा कि जो भी लक्ष्य है उसे पाने के लिए मेहनत करें और संयम बरतते हुए हासिल करें।