पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार की पत्नी का कोरोना से निधन

कांगड़ा।। हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार की धर्मपत्नी सन्तोष शैलजा का निधन हो गया है।

पिछले दिनों शांता कुमार और उनकी पत्नी कोरोना से पॉजिटिव पाए गए थे और टांडा मेडकिल कॉलेज में उनका इलाज चल रहा था।

लेखिका और अध्यापिका संतोष शैलजा ने मंगलवार सुबह 5 बजे आखिरी सांस ली। वह 75 साल की थीं।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शोक जताया है।

निजी स्कूलों की फीस पर शिक्षा विभाग की चुप्पी का राज क्या है?

शिमला।। कोरोना काल में अभिभावक मांग कर रहे हैं कि अन्य राज्यों की तर्ज पर हिमाचल के प्राइवेट स्कूल भी पूरी फीस की जगह सिर्फ ट्यूशन फीस लें। ऐसा इसलिए, क्योंकि पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है और बच्चे स्कूल के अन्य संसाधनों को इस्तेमाल नहीं कर रहे और न ही किसी तरह की गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। मगर हिमाचल का शिक्षा विभाग अब तक इस बाबत कोई फैसला नहीं ले पाया है।

हैरानी की बात यह है कि कोरोना संकट को शुरू हुए 9 महीने हो गए मगर हिमाचल सरकार अब तक कोई फैसला नहीं कर पाई। आरोप लग रहे हैं कि शिक्षा मंत्री उसी तरह निजी स्कूल लॉबी के प्रेशर में आ गए हैं, जैसे परिवहन मंत्री रहते हुए उन्होंने निजी बस ऑपरेटर्स के दबाव में आकर किराया बढ़ाया था।

दरअसल, पिछले दिनों हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने फैसला लिया था कि निजी स्कूलों की फीस को लेकर जारी विवाद को पहले पीटीए की बैठक में सुलझाया जाएगा। और अगर इन बैठकों में अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन की आम सहमति नहीं बनती है तो मामले को उपायुक्तों के पास भेजा जाएगा।

लेकिन कैबिनेट के इस फैसले को लेकर अभी तक उपायुक्तों को लिखित आदेश जारी नहीं हुए हैं। इसके चलते इन मामलों को लेकर अभी तक कोई भी कार्यवाही शुरू नहीं हो पा रही है। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर की ओर से भी सिर्फ ट्यूशन फीस वसूली को लेकर मौखिक बयान दिया गया था। मगर इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।

‘नमस्कार जी, रखना ख्याल’, इन्ही शब्दों पर चलता है साक्षर हिमाचल का पंचायत चुनाव

आशीष नड्डा।। सुबह फोन की घण्टी बजी, एक मित्र की आवाज आई। गर्मजोशी से बोला, “भाई घर आओ, मैं जिला परिषद के लिए चुनाव लड़ रहा हूँ।” मैंने कहा, वो तो ठीक है पर जिला पार्षद, बीडीसी मेंबर के कार्य क्या हैं, क्यों चुने जाते हैं ये लोग, क्या अधिकार हैं इनके पास, तुम्हे पता है?

मुझे जबाब मिला- भाई जीतने के बाद समझ लेंगे सब, अभी आप बस हमारा ख्याल रखो और घर पहुंचो। इसी के साथ वो अपने चुनाव प्रचार के लिए निकलने का बोलकर बाय कह गया और मैं अपने लोकतंत्र को लेकर एक अजीब उलझन में पड़ गया जिसे मैंने कागज़ पर उतारना ही उचित समझा क्योंकि विचार अगर कागज़ पर उतर जाए तो मन को शांति मिल जाती है, ऐसा मेरा मानना है।

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर प्रचार जोरों पर है। एक-एक सीट के लिए भीषण संघर्ष जारी है। बीते दशक में पंचायत चुनाव की तरफ लोगों का अलग नजरिया विकसित हुआ है।  लाखों का बजट पंचायतों को आने लगा है, इसलिए हर कोई इस चुनाव में अपना भाग्य आजमाना चाहता है।

 

पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी सिर्फ लोगों के आपसी झगड़ों को सॉल्व करने की नहीं रह गयी है बल्कि यह भी जरूरी हो गया है की लाखों के बजट को कहाँ पर, किस विकास कार्य में लगाया जाए। मगर 90% चुनाव लड़ने वाले नहीं जानते कि वो क्यों लड़ रहे हैं। वे नहीं जानते कि जिस पोस्ट के लिए लड़ रहे है, उस पोस्ट के अधिकार क्या हैं, कर्तव्य क्या हैं।

यूँ तो हिमाचल प्रदेश के लोग अपने आप को बहुत आधुनिक बनते हैं, साक्षर समझते है परन्तु पंचायत चुनाव के समय उनकी परम्परागत सोच हमेशा आड़े आ ही  जाती है। जातिवाद का जादू पंचायत चुनावों में सर चढ़ कर बोलता है। हर कोई कैंडिडेट इसे भुनाने की जी जान कोशिश करता है और काफी हद तक इससे समीकरण भी प्रभावित होते हैं।

मैं यहाँ नाम नहीं लेना चाहूंगा परन्तु अनुसूचित या पिछड़े वर्गों की जो सीट रिजर्व हैं, वहां इन्ही जातियों के बीच भी कोहराम मचा है। वहां बहुत लोग इस तर्क पर अपना वोट निर्धारित करते हैं कि आरक्षित जातियों में भी कौन सी ऐसी जाति है जो ज्यादा उच्च है और हमें उसी में से एक को चुनना है। इस सोच के कारण कैंडिडेट की योग्यता, पहचान, शिक्षा स्तर, व्यवहार, सब पीछे चला जाता है।

इसी तरह का चुनाव करने वाले लोग सिर्फ जाति के नाम पर डमी कैंडिडेट चुनकर अगले पांच साल कहते है कि कोई कार्य पंचायत में नहीं हो रहा है। खैर, पूर्व भाजपा सरकार की मेहरबानी से महिलाओं को इन पंचायत चुनाव में 50 प्रतिशत आरक्षण मिला हुआ है जिसके कारण स्थिति और विकट हो गयी है।

आज जागरूक महिलाएं समान रूप से राजनीति और समाजसेवा में दखल रखती है। परन्तु हर जगह ऐसा नहीं है। कई पंचायतों में ढूंढ-ढूंढकर भी एक ऐसी महिला कैंडिडेट नहीं मिल रही, जिसके पास समाज को क्षेत्र को आगे ले जाने का विज़न हो। कई जगहों पर महिला आरक्षण लागू होने पर इलाके के कुछ खास लोग अपनी पत्नियों को खड़ा कर दे रहे हैं।

उनमें से कई की पत्नियां ऐसी हो सकती हैं जिन्होंने चूल्हे-चौके से बाहर की दुनिया देखी न हो, उनका राजनीति में कोई विज़न हो या न हो, वे अपने पति के दबे अरमानों को पूरा करने के लिए मोहरा बन कर मैदान में डटी हैं। ऐसी महिलाएं कई बार जीत भी जाती हैं पर उन्हें यह तक पता नहीं होता प्रतिनिधि के तौर पर उनका काम क्या है।

हम खुद बिना किसी सोच या विजन के क्राइटेरिया के अपने प्रतिनिधि चुनते हैं फिर बाद में वर्षों तक झल्लाते हैं कि इन्होंने कुछ नहीं किया। लाखों के बजट को एक सोच और नजरिये के साथ खर्च किया जाए तो पंचायत में विधायक निधि से खर्च की जरूरत किसी कार्य के लिए न पड़े।  कोई ऐसा प्रभावी सोच-सामर्थ्य वाला व्यक्ति अगर हो तो पंचायत में खेल के मैदान से लेकर लाइब्रेरी आदि जैसे सेंटर की स्थापना की जा सकती है।

पर जातिवाद, पार्टीबाजी में पड़े हुए हम लोग क्या इस से बाहर भी पंचायत चुनाव को देख पाएंगे या नहीं?  पार्टीबाजी का तो ये आलम है कि सांसद भी पंचायत चुनावों में जी जान से लगे हुए हैं।  एक छोटे से वार्ड के मेंबर को भी टिकट टाइप सपोर्ट देकर अपना आदमी बताया  जा रहा है।

इस सब के बावजूद मुझे थोड़ी सी धुंधली उम्मीद है- कहीं न कहीं ऐसे चेहरे निकल कर आएंगे, जो अपने सामर्थ्य सोच और विज़न से अपनी पंचायतों को मॉडल रूप देंगे। अब वो कितने आएंगे, यह देखना है खैर।

लेखक प्रादेशिक मुद्दों पर लिखते रहते हैं इनसे aashishnadda@gmail.com पर संपर्क साधा जा सकता है

(यह लेख पहली बार इन हिमाचल पर Dec 18, 2015 को प्रकाशित हुआ था। पांच साल बाद आज फिर चुनावी माहौल में इसे पुनर्प्रकाशित किया गया है।)

भाजपा सदस्य बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल को हिमाचल सरकार ने धर्मशाला में दी 52 कनाल जमीन

शिमला।। अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल को हिमाचल सरकार ने धर्मशाला में 52 कनाल जमीन दी है। यह जमीन अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन अकादमी खोलने के लिए दी गई है। हालाँकि, इस पूरे मामले में बरती गई तेजी पर सवाल उठने लगे हैं।

साइना 2012 ओलिंपिक में कांस्य पदक विजेता रही थीं। उन्होंने 2015 वर्ल्ड चैम्पियनशिप में रजत और 2017 में कांस्य जीता था। साइना ने 29 जनवरी को दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ली थी। उस समय बैडमिंटन खिलाड़ी ने कहा था कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में खेलों को बढ़ावा दिया, मैं उनसे प्रेरित हूं।’ साइना के साथ उनकी बहन चंद्रांशु ने भी भाजपा की सदस्यता ली थी।

राज्य सरकार का कहना रहा है कि खेलों को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के कदम जरूरी हैं। मगर आरोप लग रहा है कि हैदराबाद में रहने वालीं साइना को एक महीने से भी कम समय में जमीन आवंटित करना राजनीति से प्रेरित है वरना इस तरह के कई आवेदन हिमाचल सरकार के पास लम्बित हैं।

गौरतलब है कि एक महीना पहले ही साइना ने पति के साथ शिमला में हिमाचल के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय से मुलाकात कर अकैडमी खोलने की इच्छा जताई थी। दत्तात्रेय भी हैदराबाद से हैं और बीजेपी के दिग्गज नेता रहे हैं।

अब कुछ दिन पहले खेल मंत्री राकेश पठानिया ने कहा था कि साइना की ओर से आवेदन मिला है। उसके एक हफ्ते के अंदर मंत्री ने जमीन आवंटित कर दिए जाने की बात कह दी। जमीन भी 52 कनाल है जो काफी अधिक बताई जा रही है। सवाल उठ रहे हैं कि इस अकादमी में क्या होगा, क्या प्लान है और प्रदेश को कैसे लाभ पहुंचेगा, मंत्री ने इसकी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

पूरी टाइमलाइन देखें:

29 अगस्त, 2020: खेल दिवस पर हैदराबाद से संबंध रखने वाले हिमाचल के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, सीएम जयराम ठाकुर और खेल मंत्री राकेश पठानिया ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से की बात, बैडमिंटन अकैडमी खोलने के लिए साइना से मांगा सहयोग।

15 नवंबर,2020: हैदराबाद में रहने वालीं साइना नेहवाल ने पति अर्जुन पुरस्कार विजेता पारुपल्ली कश्यप के साथ राजभवन में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय से मुलाकात की। दोनों ने प्रदेश में एक बैडमिंटन अकादमी खोलने की इच्छा जाहिर की।

17 दिसंबर, 2020: युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री राकेश पठानिया ने कहा- बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल की तरफ से अकादमी स्थापित करने के लिए लिखित प्रस्ताव प्राप्त हुआ

24 दिसंबर, 2020: राकेश पठानिया ने कहा कि इंटरनेशनल बैडमिंटन अकादमी के लिए बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल को सकोह के पास 52 कनाल भूमि कॉमन पूल से निकाल कर आवंटित कर दी गई है।

हिमाचल: कोरोना का टेस्ट करवाए बिना ही एक की रिपोर्ट पॉजिटिव, दूसरे की नेगेटिव

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी के वार्ड नं. 4 में एक 23 वर्षीय युवक ने आरोप लगाया है जांच किए बिना ही उसे कोरोना पॉजिटिव घोषित कर दिया गया। युवक को कोरोना पॉजिटिव होने के सूचना मोबाइल में मिली।

इस युवक के पिता ने बताया कि उनका बेटा ज्वालाजी अस्पताल में 10 दिसम्बर को टेस्ट के लिए नाम दर्ज करवाने गया था, फिर वहां उससे कहा गया कि जब मोबाइल में मेसेज आए तो अस्पताल टेस्ट के लिए आना, लेकिन उनका बेटा किसी कार्य के कारण बाहर चला गया और टेस्ट नहीं करवा पाया। अब 14 दिसम्बर को उनके बेटे की रिपोर्ट पॉजिटिव बताई जा रही है और उन्हें तंग किया जा रहा है।

पूर्व पार्षद सूक्ष्म सूद ने बताया कि उन्होंने 10 लोगों के टेस्ट के लिए लिस्ट 10 दिसम्बर को ज्वालाजी अस्पताल को सौंपी थी, लेकिन टेस्ट 11 दिसम्बर को हुए। 3 लोग टेस्ट में शामिल नहीं हो पाए और जो लोग टेस्ट में शामिल नहीं हुए उनमें से एक की रिपोर्ट पॉजिटिव और एक की रिपोर्ट नेगेटिव बताई गई।

उधर, इस मामले में ज्वालामुखी खंड चिकित्सा अधिकारी डा. प्रवीण कुमार ने मीडिया को बताया कि दोनों पक्षों का पता करने और हर तरफ जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है कि गलती कब और किससे हुई है।

यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।

सीएम रिलीफ फंड: ठेकेदारों, बीजेपी नेताओं को 1 करोड़ की बंदरबांट

शिमला।। गरीब, जरूरतमंद और किसी तरह की आपदा की मार झेलने वाले लोगों की मदद के लिए बनाए गए मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष से भारी भरकम रकम का मिसयूज किए जाने की खबर है। आरटीआई से मिली जानकारी से पता चला है कि कांगड़ा की सुलह विधानसभा क्षेत्र में लगभग एक करोड़ रुपये की रकम ऐसे लोगों को दे दी गई, जो इस तरह की मदद के पात्र ही नहीं थे।

स्थानीय आरटीआई कार्यकर्ता पारितोष गुप्ता ने बताया है कि पिछले डेढ़ साल में सीएम रिलीफ फंड से एक करोड़ रुपये की राशि बांटी गई और वो भी ऐसे लोगों को इसके लायक नहीं थे। आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर दावा किया गया है कि यह पैसा पंचायत प्रधानों, कारोबारियों, रिटायर्ड कर्मचारियों, पूर्व फौजियों, दुकानदारों, पत्रकारों और यहां तक कि बीजेपी के पदाधिकारियों तक को दे दी गई।

पालमपुर जिला बीजेपी अध्यक्ष हरि दत्त शर्मा, जो पेशे से ठेकेदार हैं, उन्हें भी 20 हजार रुपये दिए गए हैं। प्राइवेट स्कूल चलाने वाले व्यक्ति को 15000 रुपये दिए गए हैं। इस संबंध में द द्रिब्यून ने भी एक विस्तृत रिपोर्ट छापी है। उसमें कहा गया है कि सीएम रिलीफ फंड से ऐसे लोगों को भी मदद दी गई जो कारोबारी हैं और आयकर देते हैं।

नियमों का भी जमकर उल्लंघन हुआ है। अमूमन होता यह है कि ये रकम लाभार्थी के बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर की जाती है मगर यहां एसडीएम पालमपुर और एसडीएम धीरा के दफ्तरों से इन लोगों के नाम सीधे चेक जारी करके पैसे दिए गए। ये हाल तब हैं, जब आस पड़ोस से विधानसभा क्षेत्रों में बहुत कम लोगों को इस तरह का लाभ मिला है।

गौरतलब है कि सीएम रिलीफ फंड के पैसे की बंदरबांट पिछली सरकार के दौरान भी हुई थी और ज्यादातर पैसा वीरभद्र सिंह और मुकेश अग्निहोत्री के चुनाव क्षेत्रों के लोगों को दे दिया गया था। इससे सीएम रिलीफ फंड खाली हो गया था और नए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने लोगों से अपील की थी कि वे अपनी इच्छा से दान देकर इस फंड को भरें ताकि जरूरतमंद लोगों को मदद मिल सके।

कोरोना काल के दौरान भी लोगों ने खुलकर इस फंड के लिए दान दिया है। मगर सुलह में जिस तरह से नियमों को ताक पर रखकर पैसे बांटे गए हैं, उससे पूरी सरकार की पर सवाल खड़े हो गए हैं। सुलह से विपिन परमार बीजेपी के विधायक हैं जो पहले स्वास्थ्य मंत्री थे और अब विधानसभा अध्यक्ष हैं। इस संबंध में उनका पक्ष सार्वजनिक नहीं हो पाया है।

कुछ खास इलाकों पर सीएम रिलीफ फंड को ज्यादा खर्च कर गई वीरभद्र सरकार

 

कांगड़ा और ऊना में किसान सम्मान निधि को लेकर करोड़ों का घोटाला

शिमला।। ईमानदारी और कम भ्रष्टाचार को लेकर तारीफ बटोरने वाले हिमाचल में करप्शन के बड़े मामले सामने आए हैं। पता चल रहा है कि कई जिलों में पीएम किसान सम्मान निधि के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया और कर्मचारियों ने गलत ढंग से किसानों के लिए आए पैसे हड़प लिए। अब तक कांगड़ा और ऊना में ही लगभग चार करोड़ रुपये हड़पने की बात सामने आई है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत योग्य किसानों को हर साल छह हजार रुपये दिए जाते हैं। यह रकम दो-दो हजार रुपये की तीन किश्तों में दिए जाते हैं। मगर यह पाया गया है कि सरकारी कर्मचारियों ने ऐसे लोगों को पैसे दे दिए, जो इस योजना से मिलने वाले आर्थिक लाभ के हकदार ही नहीं थे।

सबसे पहले कांगड़ा में इस तरह के फर्जीवाड़े की बात सामने आई जहां सरकार से मोटी तनख्वाह लेने वाले कर्मचारियों ने गड़बड़ करके किसान सम्मान निधि का पैसा खा लिया। जिले में हड़पी गई कुल रकम 2.52 करोड़ रुपये है और इसकी रिकवरी के लिए 2300 से ज्यादा लोगों की लिस्ट बनाई गई है। इस लिस्ट में कुछ कर्मचारी सेवा में हैं तो कुछ रिटायर हो चुके हैं। अब ये रकम इन्हीं से भरवाने की योजना है।

इसी तरह, अब ऊना जिले में भी 1.30 करोड़ रुपये हड़प लिए गए। 1256 लोगों की सूची यहां बनी है जिनमें 57 सेवारत और रिटायर्ड कर्मचारी शामिल हैं। इन लोगों ने उन लोगों को किसान सम्मान निधि की रकम इशू करवाई जो इसके हकदार नहीं थे। अब इन्हीं से रिकवरी भी करवाई जानी है।

आशंका जताई जा रही है कि बाकी जिलों में भी इस तरह का खेल हो सकता है।

पीपीई किट ‘घोटाले’ की जांच पूरी होने से पहले ही कर दी बंद

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के विजिलेंस विभाग ने कथित पीपीई किट घोटाले की जांच को बंद कर दिया है। इस जांच को डेढ़ महीना पहले ही बंद कर दिया था और इसकी वजह क्या रही, इस बारे में भी साफ तौर पर कुछ नहीं बताया जा रहा।

पांच महीने तक इसकी जांच जारी रही लेकिन अब विजिलेंस ने फाइल को बंद कर दिया है। यह मामला बिलासपुर में कोरोना काल में खरीदी गई पीपीई किट के बदले रेनकोट सप्लाई करने से जुड़ा है जो मीडिया में लंबे समय तक ‘पीपीई किट घोटाले’ के तौर पर चर्चा में रहा।

Bilaspur Raincoat in place of PPE kits

डॉक्टरों ने इन किट्स को असुरक्षित बताते हुए पहनने से इनकार कर दिया था। पहले स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले की जांच की थी फिर विजिलेंस को यह काम सौंपा गया था।

इस पूरे मामले को लेकर डीएसपी विजिलेंस संजय ने अमर उजाला को जानकारी दी है कि फ़ाइल को डेढ़ महीने पहले बंद कर दिया गया है। ख़बर के मुताबिक, संजय ने बताया है कि  कुछ अधिकारियों के बयान दर्ज हो गए थे और कुछ के बयान दर्ज  होने बाकी थे।

हिमाचल में ईको टूरिज्म साइट ढूंढने को वन विभाग ने 70 लाख पर रखी कन्सलटेंट कंपनी

शिमला।। हिमाचल में ईकाे टूरिज्म साइट ढूंढ़ने के लिए वन विभाग ने 70 लाख रुपए में एक कंपनी को कंसल्टेंट नियुक्त कर लिया है। एक खबर के मुताबिक, विभाग ने इस कंसल्टेंट को इकाे टूरिज्म साइटाें की तलाश करने के लिए पांच महीने का समय दिया है। इसे प्रदेश के सभी ऐसे क्षेत्राें का पता लगाना है जिन्हें वन विभाग इकाे टूरिज्म के लिए विकसित कर सके। साइटाें का चयन हाे जाने के बाद वन विभाग इसका मास्टर प्लान तैयार करेगा। भास्कर की खबर के अनुसार, इस कम्पनी का नाम अर्नेस्ट एंड यंग है।

बताया गया है कि डेवलपमेंट याेजना तैयार हाे जाने के बाद विभाग इसकी फाॅरेस्ट क्लियरेंस का केस बना कर इसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार काे भेजागा। इन में से कुछ साइटाें काे वन विभाग अपने स्तर पर डेवलप करेगा। कुछ साइटाें काे पर्यटन विभाग के साथ मिल कर डेवलप किया जाएगा और कुछ साइटाें काे ‘नई मंजिल नई राहाें’ के तहत विकसित किया जाएगा।

सरकार खुद ढूंढ चुकी थी 150 जगहें
विभाग की याेजना कई साइटाें की ऑक्शन कर इसे निजी लाेगाें काे देने की भी है ताकि लाेग आगे आ कर खुद का राेजगार भी प्राप्त कर सकते हैं। विभाग पहले भी इकाे टूरिज्म काे प्रमाेट करने के लिए 150 साइटें चयनित कर चुका हैं। अब विभाग उन 150 साइटाें की सूची भी कंसल्टेंट काे साैंप कर वहा पर ईकाें टूरिज्म की संभावनाओं काे पता लगाएगा।

विभाग की याेजना इकाे टूरिज्म साइटाें पर पर्यटकाें काे नेचर के करीब लाना है। यहां पर ट्रेकिंग रूट के अलावा कई साहसिक गतिविधियों काे शुरू करवाया जाएगा जिससे पर्यटकाें का मनोरंजन हाे सके। दैनिक भास्कर के मुताबिक, वन विभाग की प्रधान मुख्य अरण्यपाल सविता ने बताया कि इकाे टूरिज्म साइटाें का चयन करने के लिए कंसल्टेंट का चयन कर लिया गया है। इस काम के लिए उसे पांच महीने का समय दिया गया है। साइटाें का चयन हाेने के बाद उसे 70 लाख रुपए की पेमेंट की जाएगी।

इस बीच सवाल उठ रहे हैं कि इस काम के लिए कम्पनी का चुनाव कैसे किया गया, प्रक्रिया क्या रही।

कांग्रेस के दुष्प्रचार से निपटने के लिए प्रभावी तंत्र बनाए भाजपा आईटी सेल: सीएम

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि कांग्रेस के झूठे प्रचार से निपटने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है। सीएम ने कहा कि इसके लिए भाजपा आईटी सेल को आगे आकर कांग्रेस के झूठ को बेनकाब करना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में लोगों को जागरूक करने एवं सरकारी नीतियों का प्रचार-प्रसार करने पर भी आईटी सेल को ध्यान देने की आवश्यकता है।

ये बातें उन्होंने देर शाम भाजपा आईटी सेल के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए आयोजित वर्चुअल बैठक को संबोधित करते हुए कहीं। इससे पहले सीएम भाजपा कार्यकर्ताओं से भी कांग्रेस के ‘दुष्प्रचार’ का जवाब देने की अपील कर चुके हैं।

कांग्रेस को मुंहतोड़ जवाब दें भाजपा के कार्यकर्ता: सीएम