बजट की तारीफ कर रहा देश, नहीं लगा नया टैक्स: अनुराग ठाकुर

हमीरपुर।। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा है कि इस बार के बजट की पूरे देश ने प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि बजट में एक रुपये का भी नया टैक्स नहीं लगाया गया है।

उन्होंने कहा, मोदी सरकार में महंगाई पर अंकुश लगा। सात वर्षों में महंगाई दर चार प्रतिशत औसतन रही। कांग्रेस के समय में दालों की कीमतें 140 से 160 किलो थी, जो मोदी सरकार में 65 से 70 रुपये किलो हैं।

मंत्री ने कहा, “कांग्रेस देश को बांटने का काम करती है, लेकिन नरेंद्र मोदी एक ऐसे नेता हैं जो सबका साथ सबका विकास के मूल मंत्र पर सरकार चलाते हैं। सेना का बजट 20 प्रतिशत नए हथियार खरीदने के लिए मोदी सरकार ने बनाया है।”

कांग्रेस की सरकार होती तो वैक्सीन के लिए हाथ फैलाती: अनुराग ठाकुर

हमीरपुर।। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा है कि कोरोना महामारी में अगर कांग्रेस सरकार होती तो दुनिया के आगे हाथ फैलाती कि कोविड वैक्सीन दे दो। अनुराग ने कहा कि ये मोदी की सोच थी कि दुनिया के तीन चार देशों में कोविड वैक्सीन बनी तो भारत में दो वैक्सीन बनाने का काम मोदी सरकार के समय हुआ।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि इस बार के बजट की पूरे देश ने प्रशंसा की है। बजट में एक रुपये का भी नया टैक्स नहीं लगाया गया है। कोविड वैक्सीन के लिए 35 हजार करोड़ का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस देश को बांटने का काम करती है, लेकिन नरेंद्र मोदी एक ऐसे नेता हैं जो सबका साथ सबका विकास के मूल मंत्र पर सरकार चलाते हैं। सेना का बजट 20 प्रतिशत नए हथियार खरीदने के लिए मोदी सरकार ने बनाया है।

मंत्री ने यह भी कहा कि मोदी सरकार में महंगाई पर अंकुश लगा है। उन्होंने कहा कि सात वर्षों में महंगाई दर चार प्रतिशत औसतन रही। कांग्रेस के समय में दालों की कीमतें 140 से 160 किलो थी, जो मोदी सरकार में 65 से 70 रुपये किलो हैं।

राजनीतिक भविष्य तलाशने हिमाचल लौट रहे हैं आनंद शर्मा?

इन हिमाचल डेस्क।। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा का अचानक हिमाचल में सक्रिय होना चर्चा का विषय बन गया है, खासकर कांग्रेस नेतृत्व में। शिमला में जन्मे आनंद शर्मा भले ही ज़्यादातर समय केंद्र की राजनीति में सक्रिय रहे लेकिन हिमाचल कांग्रेस में भी उनका लगातार दखल रहा है। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि वह पहली बार पूरी तरह हिमाचल लौटने पर फोकस कर रहे हैं।

पिछले साल अगस्त में कांग्रेस के जिन 23 वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर राहुल गांधी को निशाने पर लिया था, उनमें आनंद शर्मा भी शामिल थे। राहुल गांधी से असहमति रखने वाले इन सभी नेताओं को अब किसी न किसी तरह से कांग्रेस आलाकमान या यूं कहें कि गांधी परिवार की बेरुखी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन अब ये सभी नेता फिर सक्रिय होते दिख रहे हैं।

पिछले दिनों जब गुलाम नबी आजाद का कार्यकाल खत्म हुआ तो उम्मीद थी कि लंबे अनुभव को देखते हुए आनंद शर्मा को नया नेता प्रतिपक्ष बनाया जाएगा। लेकिन उनकी जगह राहुल गांधी के खास मल्लिकार्जुन खड़के को यह ज़िम्मेदारी दे दी गई। माना जा रहा है कि आनंद शर्मा पार्टी की ओर से इस तरह नजरअंदाज़ किए जाने से आहत हैं। लंबे समय से कांग्रेस को कवर करने वालीं वरिष्ठ पत्रकार पल्लवी घोष सूत्रों के हवाले से लिखती हैं कि ‘कांग्रेस के बाग़ी नेताओं ने तो आनंद शर्मा को नाराजगी जताते हुए इस्तीफा देने की सलाह दे दी थी, मगर ऐसा हुआ नहीं।’

आनंद शर्मा

जानकारों का कहना है कि आनंद शर्मा जानते हैं कि पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होना उनके लिए फायदे का सौदा नहीं होगा क्योंकि कभी भी उन्हें वहां पर वह रुतबा हासिल नहीं हो पाएगा, जो कांग्रेस के अंदर था। हाल ही में अन्य पार्टियों से बीजेपी में शामिल हुए नेता इसके उदाहरण हैं।

अब चूंकि उनके राज्यसभा कार्यकाल को खत्म होने में एक साल का ही समय बचा है, उन्हें लगता है कि पार्टी उनके साथ भी वही करेगी जो गुलाम नबी आजाद के साथ हुआ। यानी दोबारा राज्यसभा नहीं भेजेगी। इसलिए वह राजनीतिक विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे में उनकी कोशिश है कि हिमाचल आकर अपनी जन्मभूमि शिमला से चुनाव लड़ने की कोशिश करें। टिकट मिलना या न मिलना बाद की बात है, वह राजनीतिक जड़ें जमाने की कोशिश में अभी से जुट जाना चाहते हैं।

आनंद शर्मा ने इन दिनों शिमला में सामाजिक मेल-मिलाप बढ़ाना शुरू कर दिया है। इसी महीने की छह तारीख़ को आनंद शर्मा की मां प्रभारानी शर्मा का निधन हो गया था। वह पिछले कई सालों से शिमला में नहीं रहती थीं। आनंद शर्मा ने 28 फरवरी को शिमला के पीटरहॉफ में उनके लिए शोकसभा रखी है। सियासी जानकार निधन के इतने दिनों बाद किए जा रहे इस आयोजन के राजनीतिक मायने भी निकाल रहे हैं।

खास बात यह है कि 27 फरवरी को हिमाचल कांग्रेस चुनावी रणनीति को लेकर बैठक करेगी जिसमें कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता शिरकत करेंगे। यह आयोजन शिमला से कुछ ही दूरी पर कसौली में होगा। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि कई नेता कांग्रेस की बैठक के अगले दिन शिमला पहुंच सकते हैं। साथ ही, विधानसभा का बजट सत्र जारी होने के कारण सभी विधायक भी शिमला में मौजूद हैं। सूत्रों के मुताबिक़, सभी को बाकायदा फोन करके इस कार्यक्रम की सूचना भी दी गई है।

जम्मू में पक रही है खिचड़ी के मायने क्या?
इस बीच, आनंद शर्मा का जम्मू में गुलाम नबी आजाद और सात अन्य ‘बागी’ नेताओं के साथ दिखना भी चर्चा का विषय बन गया है। माना जा रहा है कि गांधी परिवार से मतभेदों के चलते ये नेता भविष्य की किसी योजना पर काम कर रहे हैं। दरअसल, राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद सहयोगी दलों ने गुलाम नबी आजाद को अपने यहां से राज्यसभा भेजने की पेशकश की थी मगर कांग्रेस ने इसे खारिज कर दिया।

ऐसी खबरें हैं कि गुलाम नबी आजाद और उनके करीबी वरिष्ठ नेता पार्टी के इस रवैये से नाराज हैं। और इसी के तहत सात ‘बागी’ नेता जम्मू में आज़ाद से मिलने पहुंचे हैं। इनमें आनंद शर्मा, भूपेंद्र हुड्डा, मनीष तिवारी, कपिल सिब्बल, विवेक तन्खा, राज बब्बर और अखिलेश प्रसाद सिंह शामिल हैं। लंबे समय से कांग्रेस पार्टी को कवर कर रहीं वरिष्ठ पत्रकार पल्लवी घोष ने इन नेताओं की तस्वीर ट्वीट की है और लिखा है- “कुछ तो है जम्मू में।”

जम्मू में मौजूद इन नेताओं ने कहा कि कांग्रेस पार्टी देश के पांच राज्यों में होने जा रहे चुनावों में पूरी शिद्दत से लड़ेगी और जीत हासिल करेगी। लेकिन जानकार पूछ रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर में तो चुनाव हो नहीं रहा, फिर वहां ये नेता क्यों जुटे हैं? क्या यह पांच राज्यों में होने वाले चुनाव से पहले आलाकमान पर दबाव बनाने की रणनीति है या नई पार्टी बनाने की कोशिश? पल्लवी घोष ने ट्वीट किया है, “राहुल गांधी के एक करीबी नेता ने मुझे बताया कि आठ लोगों के इस ग्रुप ने जानबूझकर ऐसा समय चुना है क्योंकि राहुल चुनावों के लिए मेहनत कर रहे हैं और ये लोग बीजेपी को मौका दे रहे हैं। ये काम माफ़ी लायक नहीं है।”

चिट्ठी लिखने वाले वरिष्ठ नेता लगातार नजरअंदाज किए जाने पर शायद समझ गए हैं कि अब पार्टी में कोई उनकी सुनने वाला नहीं। ये बात हाल के घटनाक्रम से भी साफ हो गई है। जैसे कि तमिलनाडु में होने वाले चुनावों के लिए डीएमके और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे पर चर्चा होनी है। लेकिन गुलाम नबी आज़ाद की जगह इस चर्चा के लिए कांग्रेस ने रणदीप सुरजेवाला को भेज दिया जो कि राहुल गांधी के खास हैं। जबकि आजाद को डीएमके के साथ काम करने का लंबा अनुभव था। अब सुरजेवाला को तरजीह दिए जाने से हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा भी नाराज हो गए हैं। क्योंकि कुमारी शैलजा और रणदीप सुरजेवाला के साथ उनकी लंबी प्रतिद्वंद्विता रही है। आनंद शर्मा को भी कांग्रेस ने नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाया।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस सब को देखते हुए आनंद शर्मा को अहसास है कि जब तक कांग्रेस में राहुल गांधी और उनकी चलेगी, उन नेताओं को मुश्किल आती रहेगी जिन्होंने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर आवाज उठाई थी। इसीलिए, अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर आलाकमान पर दबाव बनाने के साथ-साथ वह अपना राजनीतिक आधार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन आनंद शर्मा को चुनावों और जनता के सीधे संपर्क में आने का अनुभव कम है, इसलिए उनके लिए भविष्य की राह आसान नहीं रहेगी।

राज्यपाल से बदसलूकी, अग्निहोत्री समेत 5 कांग्रेस MLA निलंबित

शिमला।। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में आज अजीब मंजर देखने को मिला। बजट सत्र के पहले ही दिन न सिर्फ हंगामा हुआ बल्कि कांग्रेस के विधायकों ने राज्पाल का रास्ता रोक दिया। इस दौरान बीजेपी और कांग्रेस के विधायक गुत्थमगुत्था हो गए। सदन का सत्र सोमवार तक स्थगित कर दिया गया मगर बाद में फिर इसे बुलाकर नेता प्रतिपक्ष अग्निहोत्री समेत कांग्रेस के पांच विधायकों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया।

दरअसल, राज्यपाल के अभिभाषण पर नाराज़गी जताते हुए विपक्ष ने बीच में ही नारेबाज़ी शुरू कर दी। इसे देखते हुए राज्यपाल ने 15 मिनट में ही अभिभाषण खत्म कर दिया। यही नहीं, सदन से बाहर जाने के बाद विपक्ष ने विधानसभा गेट पर राज्यपाल का रास्ता रोक लिया। अभिभाषण की प्रति भी राज्यपाल पर फेंकी गई।

इसी दौरान दोनों दलों के सदस्य हुए आपस में गुत्थमगुत्था हो गए। धक्कामुक्की के दौरान मंत्री सुरेश भारद्वाज गिर गए। जानकारों का कहना है कि विधानसभा में पहली इस तरह का हंगामा देखने को मिला।

हिमाचल विधानसभा के बाहर हंगामा.

जब सदन को स्थगित किया गया तो उसके बाद मुख्यमंत्री ने सुरक्षाकर्मियों और मंत्रियों के साथ बैठक की। इसके बाद फिर से सदन बुलाया गया। हिमाचल के इतिहास में ऐसा भी पहली बार हुआ कि सदन के स्थगित होने के बाद समय से पहले सदन बुलाया गया हो।

विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए बताया कि स्थगित होने के बाद 346 नियम के तहत दोबारा से सदन बुलाया गया है। लेकिन इसमें विपक्ष की तरफ से कोई भी नहीं पहुँचा। इस बीच विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार सहित संसदीय कार्यमंत्री सुरेश भारद्वाज और मुख्यमंत्री ने राज्यपाल के साथ हुए व्यवहार का आलोचना की। उन्होंने आज के दिन को शर्मनाक करार दिया।

इस बीच मांग उठी की ऐसे हंगामा करने वाले सदस्यों के ख़िलाफ़ कार्यवाही की जाए। कहा गया कि विपक्ष ने राज्यपाल पर हमला किया है। ऐसे में नियम 319 के तहत विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री, हर्षबर्धन चौहान, सतपाल रायज़दा, सुंदर सिंह और विनय सिंह को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया।

बीजेपी सरकार का घोटाला दबाकर नैतिकता का ढोंग करते रहे शांता कुमार?

आई.एस. ठाकुर।। यह चौंकाने वाली बात है कि जिन शांता कुमार को हम हिमाचल ही क्या, पूरे भारत का सबसे बेबाक और ईमानदार नेता मानते आए थे, वास्तव में वह नैतिकता का लबादा ओढ़कर बैठे रहे। यह बात जानकर बहुत ही दुख हुआ कि शांता कुमार ने देश और अपने आदर्शों से ज्यादा तरजीह अपनी पार्टी को दी और सरकार में हुए भ्रष्टाचार पर कुंडली जमाकर बैठे रहे। यह सब उस समय हुआ, जब 2003 में देश में बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार थी।

शांता कुमार ने हाल ही में आत्मकथा जारी की है। उसमें उन्होंने बताया है कि साल 2003 में ग्रामीण विकास मंत्री रहे वेंकैया नायडू के मंत्रालय में 300 करोड़ का घोटाला हुआ था। अपनी पिछली किताब में भी वैसे तो शांता कुमार इसका जिक्र कर चुके हैं लेकिन उन्होंने पहली बार वेंकैया नायडू का नाम लिखा है और ये भी विस्तार से लिखा है कि क्यों उन्होंने इस बारे में खुलकर कुछ नहीं किया।

शांता कुमार लिखते हैं कि जब उन्होंने घोटाले को दबाने से इनकार किया तो बड़े नेताओं के दबाव में उनसे ग्रामीण विकास मंत्री पद छीन लिया गया था। शांता बताते हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, आरएसएस, संसदीय कार्य मंत्री रहे प्रमोद महाजन सहित किसी भी नेता ने उनका साथ नहीं दिया था।

शांता लिखते हैं कि उन्होंने उस वक्त पार्टी छोड़कर लोकसभा में प्रमाणों सहित घोटाले का खुलासा करने का मन बना लिया था, लेकिन पत्नी संतोष शैलजा ने ऐसा करने से रोक लिया। पत्नी ने समझाया कि मैंने पूरा जीवन जिस पार्टी के लिए लंबा संघर्ष किया, उसे इतनी बड़ी हानि होगी कि मैं स्वयं उसके लिए खुद को कभी क्षमा नहीं कर सकूंगा।

और इस तरह शांता कुमार की नैतिकता देश के प्रति खत्म हो गई थी। उनकी वफादारी पार्टी के प्रति पैदा हो गई थी। भले ही देश का 300 करोड़ रुपया गबन कर लिया जाए, गबन करने वाला नेता सुरक्षित रहे, उसे बचाने वाले नेता फिर सत्ता में आ जाएं और भले इससे बड़ा घोटाला कर लें, लेकिन शांता कुमार की अंतरात्मा ने पार्टी के प्रति वफादारी निभाना ही उचित समझा।

आत्मकथा में वह लिखते हैं, “आखिरकार अटल जी ने मुझसे इस्तीफा ले लिया, लेकिन मैंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। कभी सार्वजनिक रूप से इस बारे में बात नहीं की थी। संघ पर से भी विश्वास हिल गया था। संघ ने भी सहायता नहीं की।”

हैरानी की बात है कि शांता किन सिद्धांतों से समझौता न करने की बात कर रहे हैं? क्या 300 करोड़ के घोटाले की बात छिपाना सिद्धांतों से समझौता करना नहीं था? शायद उस समय उन्हें भी राजनीति में प्रासंगिक बने रहने का मोह हो गया था। वरना सिद्धांतों से समझौता न करने का मतलब होता- देश और जनहित में उस घोटाले को सामने लाना।

वैसे तो कोई आदमी परफेक्ट नहीं होता, मैं भी नहीं हूं और शांता कुमार भी नहीं हैं। लेकिन आए दिन वह दूसरों को आदर्शों का सबक पढ़ाते रहे हैं। वह बताते रहे हैं कि कैसे भ्रष्टाचार इस देश को खोखला कर रहे है। वह यह कहने की हिम्मत रखते हैं कि उनकी पार्टी की सरकार के दौरान भी भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ। वह व्यापमं घोटाले को लेकर उठते सवालों को लेकर भी चिट्ठी लिख देते हैं। लेकिन खुद कुछ साल पहले उन्होंने जो किया था, वह बेहद दुखद और शर्मनाक था। बाकियों के लिए नहीं, लेकिन शांता कुमार जैसे व्यक्तित्व के लिए तो था ही।

पिछले कुछ सालों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के दौरान जो कुछ फैसले लिए गए, जिस तरह से अलग-अलग राज्यों में विधायकों की खरीद-फरोख्त, दल-बदल से सरकारें बनीं, उस पर शांता कुमार ने कभी उस पर कुछ नहीं कहा। मार्गदर्शक होकर भी उन्होंने एक मार्गदर्शक की तरह एक भी हिदायत अपनी पार्टी और उसकी सरकार को नहीं दी। उल्टा हर मोर्चे पर उसका बचाव किया और तारीफें कीं। यह बताता है कि शांता कुमार की वफादारी देश और देशवासियों से ज्यादा पार्टी के लिए रही।

मगर हम जैसे लोगों का आपसे सवाल करने का हक बनता है। इतना कुछ हासिल कर लिया आपने, जीवन भर आपने दूसरों को प्रेरित ही किया, फिर आज भी क्यों खुलकर कुछ कहने से इतना डर? आपकी निष्ठा पार्टी के प्रति है या देश के प्रति? सिर्फ आत्मकथा में सच लिख देने से आपका अपराध कम नहीं हो जाता। आपने गलत किया है और इसका मलाल आपको हो न हो, उस जनता को जरूर रहेगा जो आपकी ईमानदारी, बेबाकी, हिम्मत और सत्यवादिता की मिसाल दिया करती थी। आपने हमें निराश किया है।

ये लेखक के निजी विचार हैं

(लेखक लंबे से समय हिमाचल और देश-दुनिया के विषयों पर लिख रहे हैं, उनसे kalamkasipahi@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है)

संदर्भ: शांता कुमार ने आत्मकथा में लिखा है-

शांता लिखते हैं कि वर्ष 2003 में ग्रामीण विकास मंत्री वेंकैया नायडू को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उनका ग्रामीण विकास मंत्रालय मुझे दिया गया। कुछ दिन बाद तमिलनाडु के दो सांसद मिलने आए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में आंध्र प्रदेश को 90 करोड़ स्वीकार किए गए थे, लेकिन मंत्रालय से जब पत्र जारी हुआ तो 90 करोड़ का 190 करोड़ कर दिया गया।

तीन वर्ष से आंध्रप्रदेश को प्रति वर्ष 100 करोड़ अधिक जा रहा है। लोकसभा में भी यह प्रश्न लगने नहीं दिया गया। शांता ने लिखा है कि उन्होंने आरोपों के आधार पर जब जांच की आरोप सही निकले। जांच में पाया गया कि योजना आयोग की फाइल में स्वीकृत राशि 90 करोड़ थी। मंत्रालय से जब धन भेजा गया तो 190 करोड़ भेजा गया। अधिकारियों से जब पूछा तो उनके पास कोई जवाब नहीं था।

शांता ने लिखा है कि उन्होंने 300 करोड़ के घोटाले की फाइल संसदीय कार्य मंत्री प्रमोद महाजन को भी दिखाई। उन्होंने मुझे बताया कि इस विभाग के उस समय जो मंत्री थे, वह अब पार्टी के अध्यक्ष हैं। इसलिए चिंता छोड़ो और यह सब भूल जाओ। फिर मैंने फाइल प्रधानमंत्री को भी दिखाई। अटल जी हैरान होकर कहने लगे यह क्या हो रहा है। फिर चुप हो गए। लालकृष्ण आडवाणी, योजना आयोग के अध्यक्ष केसी पंत को भी यह बात बताई। किसी के पास कोई उत्तर नहीं था।

शांता ने किताब में लिखा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष वेंकैया नायडू मुझसे नाराज थे, क्योंकि मैंने उनके प्रदेश को हर साल मिलने वाला 100 करोड़ रोक दिया था। मेरे खिलाफ अपनी ही पार्टी के हिमाचल और देश से कुछ नेता एकजुट हो गए। मुझ पर अनुशासनहीनता के आरोप लगाकर अटल जी पर मेरा इस्तीफा देने का दबाव बनाया गया।

 

चुनाव करीब आते ही दिग्गज कांग्रेस नेताओं पर विजिलेंस जांच की तैयारी

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही विजिलेंस ने विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच शुरू करने की तैयारी कर दी है। स्टेट विजिलेंस ऐंड ऐंटी करप्शन ब्यूरो ने राज्य सरकार से पूर्व स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर, पूर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली, प्रेम कुमार धूमल को हराने वाले वर्तमान विधायक और कांग्रेस सरकार में आपदा प्रबंधन बोर्ड के अध्यक्ष रहे राजेंद्र राणा के खिलाफ जांच करने की इजाज़त मांगी है। इसके अलावा राज्य वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ख्वाजा खलीलुल्लाह का नाम भी उन लोगों में शामिल है, जिनकी विजिलेंस जांच करना चाहती है।

दरअसल, भारतीय जनता पार्टी ने 2017 विधानसभा चुनाव से पहले 75 पन्नों की एक चार्जशीट लाकर कांग्रेस के मंत्रियों और पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। विजिलेंस उसी के आधार पर जांच कर रही है। अमर उजाला की खबर के अनुसार, विजिलेंस ने सरकार से बीजेपी चार्जशीट की क्रम संख्या 3,4,24 और 27 के विषयों की जांच की इजाज़त मांगी है।

खास बात यह है कि इस चार्जशीट में बीजेपी ने कांग्रेस के 40 नेताओं और अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। इनमें मंडी के विधायक अनिल शर्मा का भी नाम था जो बाद में बीजेपी में शामिल हो गए थे और जयराम सरकार में मंत्री भी बने थे। अब, बेटे के  कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने के कारण अनिल शर्मा को मंत्री पद छोड़ना पड़ा है मगर उनके विजिलेंस ने उनके खिलाफ जांच शुरू नहीं की है।

जब चुनाव को डेढ़ साल बचा है, ऐसे में विजिलेंस का सक्रिय होना चर्चा का विषय बन गया है। कौल सिंह ठाकुर और जीएस बाली पिछला चुनाव हार गए थे मगर कांग्रेस में उन्हें दूसरी पंक्ति का नेता माना जाता है और वे सीएम की कुर्सी पर दावेदारी जताते रहे हैं। प्रेम कुमार धूमल को हराने के कारण राजेंद्र राणा का भी कद काफी बढ़ गया है। चूंकि वीरभद्र सिंह का चुनाव लड़ना असंभव दिखता है, ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी चाहती है कि कांग्रेस की सेकंड लाइन ऑफ लीडरशिप को टारगेट किया जाए।

बीजेपी ने अपनी चार्जशीट में कौल सिंह ठाकुर पर आशा वर्कर, टेस्ट लैब, आउटसोर्सिंग और निजी लैबों के मामले में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। वहीं जीएस बाली पर बस और टायर खरीदने, बस अड्डे बनाने और खाने की चीज़ों की खरीद में अनियमितताओं का आरोप लगाया था। राजेंद्र राणा पर अवैध खनन और कटान जबकि ख्वाजा खलीलुल्लाह पर शिमला के मिडल बाजार में दुकानों पर कब्जे का आरोप लगाया गया था।

कांग्रेस के ये नेता अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताते रहे हैं। कौल सिंह ठाकुर ने कहा, “हम तो खुद पूछ रहे थे कि आपकी चार्जशीट का क्या हुआ। ये बोलते हैं, करते कुछ नहीं।” वहीं जीएस बाली ने कहा कि वह जांच के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार में दम है तो जांच करे। वहीं राजेंद्र राणा चुनौती देते हुए कहा है कि सारी एजेंसियां लगा दो और आरोपों को साबित करके दिखाओ।

 

 

सीएम कार्यालय से बड़ा कोई दफ्तर नहीं, वहां के आदेशों पर भी काम न होना चिंता की बात: अनुराग ठाकुर

धर्मशाला।। “प्रदेश में मुख्यमंत्री कार्यालय से बड़ा कोई कार्यालय नहीं है और मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का ही पालन न होना चिंता का विषय है।”

यह कथन है केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर का। उन्होंने दिशा की बैठक में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं की समीक्षा के दौरान शुरुआत में ही सीएचसी हरिपुर के भवन को लेकर उठे सवाल पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी की ओर से जवाब न दिए जाने पर अनुराग ने तेवर तल्ख करते हुए हिदायत दे डाली। साथ ही अधिकारी को दो घंटे के भीतर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश भी दिया।

इसी दौरान नगरोटा बगवां के विधायक अरुण मेहरा के पठियार व सेराथाना पीएचसी के एक-एक कमरे में मौजूदा समय में चले होने और इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र लिखे जाने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने परभी संज्ञान लिया।

इसके अलावा नगरोटा बगवां व बड़ोह अस्पताल के मामले में भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग उठाई गई। इस पर अनुराग ने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री कार्यालय से बड़ा कोई कार्यालय नहीं है और मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का ही पालन न होना चिंता का विषय है।

‘नाटी’ वाली शराब की बिक्री पर रोक, आर्टिस्ट ने भी उठाई थी आपत्ति

शिमला।। सिरमौर में ‘नाटी संतरा नंबर वन’ नाम से बेची जा रही देसी शराब पर आपत्तियां आने के बाद इसकी बिक्री को रोक दिया गया है। सिरमौर के एक्साइज़ ऐंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट ने शराब में इस्तेमाल किए जा रहे नाटी के दृश्य को हटाने का भी आदेश जारी किया है।

बता दें कि इस शराब को लेकर लोगों ने आपत्ति उठाई थी कि हिमाचल के पारंपरिक लोकनृत्य नाटी को इस तरह से शराब की बोतल पर लगाना ठीक नहीं है। लेकिन अब यह भी पता चला है कि शराब बनाने वाली कंपनी ने अपने लेबल में नाटी की जो पेंटिंग इस्तेमाल की थी, उसके लिए आर्टिस्ट से इजाजत नहीं ली थी।

स्केची स्टोरी के नाम से पॉप्युलर इंस्टाग्राम हैंडल चलाने वाले आर्टिस्ट अभय शर्मा ने इस लेबल को लेकर लिखा है कि पहले उन्हें लगा कि यह मजाक है, मगर बात में उन्हें जानकर हैरानी हुई कि वाकई ऐसा किया गया है। उन्होंने लिखा है कि पहले तो उनके आर्टवर्क को बिना इजाजत इस्तेमाल किया गया और वह भी शराब के ऊपर। इसे उन्होंने शर्मनाक करार दिया है। उनकी मूल आर्ट नीचे देखी जा सकती है-

बताया जा रहा है कि विभाग ने नया लेबल आने तक शराब के उत्पादन पर रोक लगा दी गई है। अभी यह फैसला लिया जाना है कि इस शराब का जो स्टॉक लेबल के साथ बन चुका है, उसका क्या किया जाएगा। हाल ही में सिरमौर जिले में नाटी संतरा नंबर वन शराब की बिक्री शुरू हुई है।

ड्रग्स की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं हिमाचल और पंजाब: दत्तात्रेय

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश और पंजाब नशे की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने सोमवार को राजभवन में यह बात कही।

वह हिमाचल प्रदेश पुलिस और राज्य आबकारी विभाग के कानून प्रवर्तन अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए दो दिवसीय पारस्परिक क्षमता निर्माण पहल कार्यक्रम का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ कर रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त राष्ट्र के ड्रग और क्राइम के दक्षिण एशिया कार्यालय नई दिल्ली की ओर से किया जा रहा है।

राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल और पड़ोसी राज्य नशीली दवाओं की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा तेजी से नशीली दवाओं की गिरफ्त में आ रहे हैं।

राज्यपाल ने कहा कि इस समस्या से लड़ने के लिए कड़े कानून बनाए गए हैं और सरकारें अपने स्तर पर प्रयास कर रही हैं लेकिन स्वयंसेवी संस्थाओं और आम लोगों की भागीदारी से इस सामाजिक बुराई के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने की जरूरत है।

मंडी में 27 फरवरी को शिवधाम का शिलान्यास करेंगे सीएम

मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर 27 फरवरी को मंडी में प्रस्तावित शिवधाम का शिलान्यास करेंगे। दरअसल, कांगणीधार में हिमाचल प्रदेश के पहले शिवधाम में एक साथ 12 ज्योतिर्लिंगों के प्रतिरूप बनाने की योजना है। सरकार को उम्मीद है कि इससे मंडी में धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

शिवधाम के निर्माण का एलान सीएम जयराम ठाकुर ने वर्ष 2019 के वार्षिक बजट में किया था। 27 फरवरी को शिवधाम की आधारशिला रखने के अलावा सीएम मंडी शहर के यू-ब्लॉक में बनने वाली बहुमंजिला पार्किंग और शहर के साथ बनने वाली अनाज मंडी का भी शिलान्यास करेंगे। सीएम ने मंडी दौरे के दौरान यह जानकारी दी।

शिवधाम के निर्माण के लिए बजट का प्रावधान भी कर  दिया गया था मगर फॉरेस्ट क्लीयरेंस बड़ी बाधा थी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से प्रदेश को जो राहत मिली है, उसमें शिवधाम भी शामिल है। इसके लिए 9.5 हेक्टेयर भूमि को वन विभाग ने पर्यटन विभाग के नाम कर दिया है।

सरकार का कहना है कि शिवधाम को पर्यटन की दृष्टि से बनाया जाएगा, जिससे मनाली की तरफ जाने वाले पर्यटकों को मंडी में कुछ समय के लिए रोका जा सके और शिवधाम के दर्शन करवाए जा सकें। ऐसी योजना है कि शिवधाम में पर्यटकों के रहने और खाने का भी इंतजाम किया जाएगा।