गुड़िया केस: अभियुक्त आशीष चौहान बोला- पुलिस ने बिजली के झटके लगाए

क्राइम सीन रीक्रिएट किया गया FILE PIC (Courtesy: IE)

चंडीगढ़।। शिमला के कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस मामले में बुधवार को अभियोजन पक्ष के छह गवाहों ने सीबीआई के स्पेशल कोर्ट के सामने बयान दर्ज करवाए। इनमें गुजरात की फरेंसिक साइंस लैब की असिस्टेंट डायरेक्टर डॉक्टर एचवी आचार्य भी थीं। उन्होंने अदालत को बताया कि इस मामले में उन्होंने आशीष चौहान, राजिंदर सिंह, लोकजन, दीपक और सुभाष सिंह की सहमति के बाद उनका बीईओएस और नार्को टेस्ट किया था। वहीं इनका पॉलिग्राफ टेस्ट एचआर शाह ने किया था।

डॉक्टर एचवी आचार्य और एचआर शाह ने तीनों टेस्ट्स के आधार पर एक समग्र फरेंसिक साइकोलॉजिकटल रिपोर्ट की। रिपोर्ट के नतीजों के बारे डॉक्टर आचार्य ने कहा, “पोलिग्राफ, नार्को और बीईओएस में इन पांचों की रेप और हत्या में कोई भूमिका होने के संकेत नहीं मिले। रेप और मर्डर का इरादा क्या था, यह भी पता नहीं चल पाया। इसके अलावा पुलिस हिरासत में सूरज की हत्या में राजिंदर की भूमिका का भी कुछ पता नही चला।”

6 जुलाई 2017 को यहीं मिला था गुड़िया का शव

अभियोजन पक्ष द्वारा गवाह बनाए गए आशीष चौहान ने अदालत को बताया कि नौ जुलाई, 2017 को पुलिसवालों ने उसे घर से उठाया और बानकुफर रेस्ट हाउस ले जाकर पूछताछ की। इसके बाद वो छैला पुलिस चौकी ले गए जहां 10 जुलाई तक रखा। आशीष ने बताया, “11 जुलाई को उन्होंने मुझे टॉर्चर करना शुरू कर दिया। मुझे डंडों से पीटा गया औऱ बिजली के झटके दिए गए।”

13 जुलाई आधीरात को पुलिसकर्मियों ने उसके हस्ताक्षर लिए और बताया कि एफआईआऱ दर्ज हो चुकी है। 15 जुलाई तो ठियोग कोर्ट से पुलिस रिमांड लेकर आशीष को कोटखाई पुलिस स्टेशन में रखा गया।

चौहान उन छह लोगों में शामिल है जिन्हें गुड़िया रेप और मर्डर मामले में शुरुआती जांच करने वाली पुलिस ने शक के आधार पर गिरफ्तार किया था। मगर इस मामले में सूरज नाम के संदिग्ध की पुलिस हिरासत में मौत होने के बाद जब मामला सीबीआई को मिला तो इन सभी को सूरज की मौत के मामले में सरकारी गवाह बना दिया गया।

गुड़िया को इंसाफ दिलाने के लिए पूरे प्रदेश में प्रदर्शन हुए थे।

डॉक्टर एचवी आचार्य और आशीष चौहान के अलावा डीडीयू जोनल अस्पलाल शिमला में रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर अश्वनी सूद, पुलिस मुख्यालय में सीनियर असिस्टेंट प्रीतम चंद और अमर सिंह वर्मा व कॉन्स्टेबल अजय कुमार के भी बयान हुए।

वहीं सीबीआई कोर्ट ने हिरासत में मौत मामले में एसआई राजिंदर सिंह, हेड कॉन्स्टेबल रफी मोहम्मद और कॉन्टेबल रणजीत की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

SHARE