क्यों अपने ही इलाके में अवैध वॉल्वो नहीं रोक पा रहे परिवहन मंत्री

शिमला।। ट्रांसपोर्ट माफिया में गैंगवॉर-
चिंता न करें, यह हेडलाइन काल्पनिक है मगर हालात देखकर लगता है कि वह दिन दूर नहीं जह ऐसी ही सुर्खियां नजर आएंगी। अवैध ढंग से टूरिस्ट परमिट वाली वॉल्वों बसों को फिक्स्‍ड रूट पर चलाने वाले ट्रांसपोर्टरों पर सरकार तो लगाम लगा नहीं पा रही। ऐसे में अब निजी ट्रांसपोर्टरों में ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने की होड़ शुरू हो गई है। इतनी अवैध बसें हिमाचल और दिल्ली के रूटों पर दौड़ने लगी हैैं कि अब कंपीटीशन के कारण उनका किराया कम होने लगा है। इस कारण अब हिमाचल के और बाहरी राज्यों के ऑपरेटरों के बीच जंग जैसे हालात पैदा हो गए हैं।

दिल्ली से मनाली आ रही HRTC वॉल्वो बस पर हरियाणा में फायरिंग

क्या है मामला
मनाली के निजी वॉल्वो ऑपरेटरों की कुछ बसें हाल ही में हरियाणा में रोक दी गई थीं। यात्रियों को बीच में ही उतारकर बसों को अज्ञात जगह ले जाया गया था। पता चला कि इन बसों को अन्य राज्यों के बस ऑपरेटरों ने रोक दिया था। किसलिए? दरअसल कुछ दिन पहले मनाली वॉल्वो एसोसिएशन वालों ने बाहरी राज्यों के ऑपरेटरों की बसों को मनाली में रोक दिया था। इसलिए कि वे 400-500 रुपये में सवारियों को मनाली से दिल्ली ले जा रहे थे जबकि मनाली के वॉल्वो ऑपरेटरों की बसें खाली थीं। यानी बदले की कार्रवाई की गई थी इनपर।

अब सोचिए, मनाली के ऑपरेटरों को यह चिंता होने लगी कि उनकी बसें खाली जा रही हैं क्योंकि बाहर के ऑपरेटर सस्ते में ले जा रहे हैं। मगर हमारी एचआरटीसी को यह चिंता कभी नहीं हुई कि सभी अवैध वॉल्वो बसें बेहद कम दाम में सवारियां ढो रही हैं और इससे हमें घाटा हो रहा है। उल्टा जब यह विवाद उठा तो परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर का बयान एक अखबार में छपा, “मामला ध्यान में आया है। एसोसिएशन की सरकार पूरी मदद करेगी। ऑपरेटरों के बीच पनपा विवाद भी सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।”

परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर

यह तो ऐसी बात हो गई कि मुंबई पुलिस दाऊद और छोटा राजन गैंग पर अंकुश न लगाए और दोनों गैंगों के बीच झगड़ा हो तो कहे- दाऊद और छोटा राजन के बीच सुलह करवाने की पूरी कोशिश की जाएगी। इस बीच खबर आई है कि दोनों पक्षों के बीच सुलह हो गई है और विवादों को निपटाने के लिए उनके बीच चंडीगढ़ में बैठक होगी। यानी अब अवैध कारोबारी बैठक में चर्चा करेंगे कि कैसे सरकारों को चूना लगाना है, बिना झगड़ा किए। जैसे फिल्मों में दिखता है कि भाई लोग कैसे इलाके बांट लिया करते हैं।

परिवहन मंत्री के इलाके में भी चल रहा खेल।
वैसे सरकार को तो चाहिए कि बाहरी-हिमाचली दोनों के अवैध धंधे को बंद करे क्योंकि इनके पास न तो फिक्स्ड रूट का परमिट है और न ये लोग सरकार को टैक्स देते हैं। परिवहन मंत्री के चुनावक्षेत्र मनाली से कई बाहरी-हिमाचली ऑपरेटरों की वॉल्वो बसें सरकार को बिना टैक्स दिए चल रही हैं मगर उनका विभाग इसपर कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा। चूंकि कई अवैध वॉल्वो ऑपरेटर मंत्री जी के ही चुनाव क्षेत्र से है ऐसे में लोगों के बीच चर्चा होने लगी है कि शायद इसी कारण वह इनके खिलाफ सख्ती नहीं बरत पा रहे।

अगर यह सिलसिला जारी रहा तो उनके परिवहन मंत्री के पद पर होने को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं क्योंकि यह नैतिक रूप से हितों के टकराव जैसी ही स्थिति है। उनकी जवाबदेही इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि एचआरटीसी को मुनाफे में लाना उन्हीं की जिम्मेदारी है। और यह काम अवैध वॉल्वो पर लगाम लगाए बिना तो संभव नहीं दिखता। ऐसा इसलिए क्योंकि नियम कायदों से चलने वाली सरकारी वॉल्वो कैसे इन अवैध वॉल्वो से मुकाबला कर सकती है?

29 अगस्त को मनाली-दिल्ली रूट की निजी बसों का किराया (रेडबस)

एक निजी ऑपरेटर 618 रुपये में वॉल्वो में मनाली से दिल्ली ले जा रहा है वहीं एचआरटीसी वॉल्वो इसी के लिए 1678 रुपये ले रही है।

29 अगस्त को मनाली-दिल्ली रूट पर सरकारी बस का किराया (HRTC)

ऊपर देखिए, सरकारी और निजी बसों के किराये में 1000 रुपये से ज्यादा का फर्क है। कोई मनाली में अवैध रूप से उपलब्ध चरस-गांजा पीकर आया हो, तभी वह 618 के बजाय 1678 रुपये वाली बस लेना चाहेगा। जनता को सुविधा से मतलब है। जब सबकुछ खुलेआम हो रहा हो, लंबे समय से हो रहा हो, इंटरनेट पर बुकिंग की जा सकती हो तो जनता कैसे सोचेगी कि कौन सा काम वैध है कौन सा अवैध। लोग तो सीधा सवाल करते हैं कि एक ओर जहां से प्राइवेट ऑपरेटर सस्ते से सस्ता टिकट बेच रहे हैं, वहीं एचआरटीसी वॉल्वो का किराया क्यों बढ़ाना पड़ रहा है?

एचआरटीसी की वॉल्वो बस

क्या करती हैं अवैध वॉल्वो
दरअसल ये अवैध बसें टूरिस्ट परमिट वाली हैं और ये ग्रुप बुकिंग ही करवा सकती हैं। यानी अगर आपके कॉलेज, स्कूल, कंपनी या परिवार के सदस्यों को एकसाथ कहीं घूमने जाना है तो इन बसों को बुक करवाया जा सकता है। मगर ये बसें किन्हीं दो स्थानों के बीच में तय समय ऐसे पर चल रही हैं, मानों इन्हें इसका रूट परमिट मिला हो। जबकि ये ऐसा नहीं कर सकतीं और ऐसा करना अवैध है। यानी ये बसें दिल्ली से धर्मशाला या मनाली के लिए किसी ग्रुप को तभी ला सकती हैं, जब वह ग्रुप इन्हें बुक करे। ऐसा नहीं कि ये रोज शाम आठ या नौ बजे चलें और सवारियों से टिकट लें।

अब इस तरह से ये बसें न सिर्फ कानून तोड़ रही हैं बल्कि एचआरटीसी और अन्य राज्यों के परिवहन निगमों को भी चूना लगा रही हैं, क्योंकि ये सरकारी लग्जरी बसों की तुलना में कम किराया वसूलती हैं। और लोगों को तो वैसे भी कम किराया सुविधाजनक होता है। मगर ये कम किराया इसलिए वसूलती हैं क्योंकि ये टैक्स की चोरी करती हैं। ये जिन-जिन राज्यों से होकर परमानेंट रूट चला रही हैं, उन्हें टैक्स नहीं देतीं। इसीलिए इनका किराया सस्ता होता है।

इसे आप इस तरह समझ सकते हैं कि हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की कोई बस दिल्ली तक जाती है तो उसमें प्रति सवारी टिकट के हिसाब से राज्यों को टैक्स देना होता है। आपने टिकट देखा भी होगा, उसमें लिखा होता है- पंजाब टैक्स, हरियाणा टैक्स, दिल्ली टैक्स। ये आपके टिकट पर लगने वाला वह टैक्स होता है, जो एचआरटीसी को इन राज्यों को देना होता है। अब इस कारण वैध सरकारी वॉल्वो बसों और अवैध प्राइवेट वॉल्वो बसों के किराए में भारी अंतर आ जाता है। अब अगर आप ग्राहक हैं तो आप तो चाहेंगे कि एक जैसी सुविधा वाली यात्रा कम किराए पर हो। तो आप स्वाभाविक तौर पर अवैध प्राइवेट बसों से जाएंगे और अपने आप सरकारी बस घाटे में चली जाएगी।

नियमों से चलने वाली सरकारी बसों को होता है नुकसान

क्या किया जाना चाहिए
अगर आपको मनाली से दिल्ली जाना हो और वह भी वॉल्वो बस में तो आप महंगा टिकट लेना चाहेंगे या सस्ता? जाहिर है, यह सवाल ही बेवकूफाना है क्योंकि हर कोई चाहेगा कि वह कम से कम पैसा खर्च करके अच्छी बस से आराम से सफर करे। मगर शायद यह बात हिमाचल सरकार की समझ में नहीं आ रही है या शायद सरकार में बैठे कुछ लोग समझना नहीं चाह रहे। इसीलिए वे एक तरफ तो सरकारी वॉल्वो बसों का किराया बढ़ाते चले जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अवैध ढंग से चल रही निजी वॉल्वो बसों पर लगाम भी नहीं कस रहे। बहाना- मामला टूरिजम का है, ये बसें रोक दी जाएंगी तो टूरिस्ट्स को दिक्कत होगी।

मगर यह तर्क हास्यास्पद है क्योंकि जब आपको पता है कि टूरिस्ट बड़ी संख्या में इन बसों को इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप अवैध बसों को बंद करके अपनी और बसें उतार सकते हैं। इससे आपके टिकट भी सस्ते होंगे और राजस्व भी बढ़ेगा। दूसरा विकल्प यह है कि आप अवैध ढंग से चल रही बसों को ही रेग्युलराइज़ करने के लिए कोई नीति बनाएं। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और दिल्ली- चारों राज्य तय करें कि कैसे इन अवैध बसों से टैक्स वसूला जाए और इन्हें फिक्स्ड रूट्स की परमिट दी जाए। इससे भी आपको ही फायदा होगा। कुछ न मिलने से बेहतर है कि कुछ तो राजस्व टैक्स के रूप में मिले आपको।

लेकिन नहीं, शायद इससे कुछ लोगों के हित प्रभावित हो जाते हैं जिनकी अपनी बसें या करीबियों की बसें इसी तरह से अवैध ढंग से बिना टैक्स दिए सड़कों पर दौड़ रही हैं और सरकारी बसों को चूना लग रहा है। कुल्लू-मनाली से बड़ी मात्रा में चरस-गांजा और नशीले पदार्थ की तस्करी होती है। इस रूट पर जब इतनी बड़ी बसों को ही पकड़ा नहीं जा रहा तो आप भूल जाइए कि कुछ ग्राम चरस-गांजा या चिट्टा पकड़ लिया जाएगा। इसी तरह बीड़, पालमपुर, कांगड़ा, धर्मशाला और शिमला से भी असंख्य वॉल्वो चल रही हैं जो हिमाचल सरकार और एचआरटीसी दोनों को चूना लगा रही हैं मगर किसी को फिक्र नहीं है।

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