FCI में शांता कुमार कमेटी की सिफारिशों को 10 दिन के भीतर लागू करे सरकार : सुप्रीम कोर्ट

FCI में व्यापत भ्रस्टाचार के ऊपर सुप्रीम कोर्ट ने आज कड़ा संज्ञान लिया है।  दैनिक समाचार पत्र टाइम्स आफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने एफसीआई (फू़ड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) में 370 मजदूरों को महीने में राष्ट्रपति की सैलरी से भी अधिक, यानी साढ़े 4 लाख रुपये पगार मिलने पर आश्चर्य जताया है। कोर्ट ने कहा है कि एफसीआई में ‘काफी गड़बड़ियां’ हैं। साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि इस गड़बड़ी को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर, जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस आर भानुमति की बेंच ने कहा, ‘एफसीआई के मजदूरों का इतिहास काफी हिंसक रहा है। अधिकारियों की हत्याएं हुई हैं। वहां कोई गिरोह काम कर रहा है और उनके लिए एफसीआई सोने के अंडे देने वाली मुर्गी बन गई है। एफसीआई को मजदूरों और यूनियनों ने बंधक बना लिया है और वहां निश्चित तौर पर बड़ी गड़बड़ है।’
यह बेंच बंबई हाई कोर्ट की नागपुर बेंच के आदेश के खिलाफ एफसीआई वर्कर्स यूनियन की अपील पर सुनवाई कर रही थी। हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने एक कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर केन्द्र के लिए कुछ निर्देश पारित किए थे। बीजेपी के वरिष्ठ नेता शांता कुमार की अध्यक्षता वाली कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है।
बता दें कि बंबई हाई कोर्ट ने टाइम्स ऑफ इंडिया में 15 नवंबर 2014 को छपी एक रिपोर्ट के आधार पर एफसीआई में जारी ‘लूट’ पर स्वत: संज्ञान लिया था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस वक्त हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार करते हुए कहा, ‘एफसीआई को सालाना 1800 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है, जबकि इसके विभागीय मजदूर अपने नाम पर दूसरों को काम पर लगाने में लगे हैं। यह कमिटी की रिपोर्ट से स्पष्ट है। यहां तक कि शांता कुमार की अध्यक्षता वाली कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 370 मजदूरों को हर महीने करीब साढ़े 4 लाख रुपये का वेतन मिल रहा है। उन्हें जितनी पेमेंट होनी चाहिए, यह उससे 1800 करोड़ रुपये अधिक है। एक मजदूर कैसे हर महीने 4.5 लाख रुपये की कमाई कर रहा है।’ बेंच ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि कैसे कि इन मजदूरों की पगार आज भारत के राष्ट्रपति की पगार से भी अधिक है।
एफसीआई के वकील ने बेंच से कहा कि विभागीय कर्मचारियों को महीने में करीब एक लाख रुपये कमाने के लिए कई तरह के प्रोत्साहन मिलते हैं। इस पर पीठ ने पूछा, ‘ये प्रोत्साहन योजनाएं क्या हैं? एफसीआई के लोगों पर अपने नाम पर दूसरों को काम पर रखने का आरोप है। यह एक तरह से काम को ठेके पर देना है।’
बेंच ने एफसीआई को चेतावनी दी कि अगर उच्च स्तरीय कमिटी की सिफारिशों पर ध्यान नहीं दिया गया तो उससे भी बड़े स्तर की कमिटी का गठन किया जाएगा।

बीजेपी के दिग्गज नेता गुलाब सिंह के बेटे सुमेंदर की करारी हार

मंडी।।

इस बार जिला परिषद चुनाव में सबकी नजरें जोगिंदर नगर की तरफ लगी हुई थीं, जहां पर एक दिग्गज नेता का बेटा अपना राजनीतिक भविष्य आज़मा रहा था। बात हो रही है बीजेपी के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री गुलाब सिंह ठाकुर के बेटे सुमेंदर ठाकुर की। सुमेंदर को जिला परिषद चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। जोगिंदर नगर में नेर-घरवासड़ा सीट पर बीजेपी समर्थित उम्मीदवार के तौर पर उतरे सुमेंदर ठाकुर को कांग्रेस समर्थित जीवन ठाकुर ने 98 वोटों से शिकस्त दी है।

गौरतलब है कि सुमेंदर ठाकुर व ठाकुर गुलाब सिंह ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी। बुजुर्ग हो चले गुलाब सिंह अपनी राजनीतिक विरासत अपने बेटे को सौंपना चाहते हैं, जिसके लिए यह एक तरह का टेस्ट था। मगर इस इम्तिहान में सोमेंदर फेल साबित हुए। इस बार जोगिंदर नगर में ज्यादातर पंचायतों में भी गुलाब सिंह समर्थित उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा है। मगर किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि उनके बेटे को भी हार का मुंह देखना पड़ेगा।

वहीं काग्रेस के ब्लॉक प्रमुख के तौर पर जिम्मेदारी संभालने वाले जीवन ठाकुर ने जीत हासिल की है। बेशक लोगों के बीच उनकी पहचान और लोकप्रियता उतनी नहीं थी, मगर फिर भी उनका इतने बड़े मार्जन से जीतना दिखाता है कि लोगों ने सुमेंदर ठाकुर व गुलाब सिंह को खारिज किया है। सोमेंदर की हार में एक बड़ा फैक्टर राकेश जमवाल भी है। गुलाब सिंह के करीबी रहे राकेश खुद यह चुनाव लड़ना चाहते थे, मगर आखिरी वक्त में उन्हें पीछे हटना पड़ा था। उनकी नाराजगी भी सुमेंदर को भारी पड़ी।

राजनीति के जानकार इसे जोगिंदर नगर में मझारनू युग के अंत के तौर पर देख रहे हैं। गौरतलब है कि मझारूने ठाकुर गुलाब सिंह के गांव का नाम है। दिलचस्प बात यह है कि उनके भतीजे सुरेंदर ठाकुर कांग्रेस नेता हैं और एक बार उन्हें हरा चुके हैं। चर्चा है कि अब लोग इस परिवार के अलावा कोई और नेतृत्व चाहते हैं।

धर्मशाला मैच को लेकर जी.एस. बाली का बीजेपी और अनुराग पर निशाना

शिमला।।

हिमाचल प्रदेश के परिवहन एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री व कांग्रेस के तेज-तर्रार नेता जी.एस. बाली ने धर्मशाला में क्रिकेट मैच तो लेकर बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल किया है कि जिस वक्त पाकिस्तान समर्थित आतंकी भारत को निशाना बना रहे हैं और पाकिस्तान चुप्पी साधे बैठा है, वैसे में पाकिस्तान के साथ व्यवसायिक क्रिकेट मैच करवाना कहां तक सही है।

उन्होंने लिखा है कि सोमवार को वह शाहपुर गए थे, जहां पर उन्होंने पठानकोट हमले में शहीद हुए जवान संजीवन कुमार को श्रद्धांजलि दी थी। इसी दौरान उन्होंने देखा कि लोगों में इस मैच को लेकर बेहद गुस्सा था। उनकी फेसबुक पोस्ट में दो लिखा है, वह नीचे दिया जा रहा है-

जनहित के मुद्दों के अलावा मैं कभी इधर-उधर के मुद्दों को हाथ तक नहीं लगाता, मगर मुझे लगता है कि एक अलग मगर अहम विषय पर बा…
Posted by G.S. Bali on Monday, January 4, 2016

‘जनहित के मुद्दों के अलावा मैं कभी इधर-उधर के मुद्दों को हाथ तक नहीं लगाता, मगर मुझे लगता है कि एक अलग मगर अहम विषय पर बात करना जरूरी है। यह विषय भी कहीं न कहीं हम सबकी भावनाओं से जुड़ा हुआ है। आज मैं पठानकोट में शहीद हुए प्रदेश के जवान संजीवन कुमार को श्रद्धांजलि देने उनके गांव शाहपुर गया था। इस दौरान एक बात सुनी, जो हर किसी की जुबान पर छाई हुई थी। लोगों में इस बात को लेकर बहुत गुस्सा था कि एक तरफ तो पाकिस्तान की शह पाए आतंकवादी लगातार हमले कर रहे हैं, मगर दूसरी तरफ धर्मशाला में ही पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने के लिए जमीन-आसमान एक किया जा रहा है।

श्रद्धांजलि देेते जी.एस. बाली (साभार: अमर उजाला)

मैं खेल को अन्य मसलों में अलग मानता हूं, मगर एक सवाल बेहद वाजिब है। वह यह कि जिस जगह पर पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच चल रहा होगा, उसके नजदीक ही रहने वाले उन परिवारों पर क्या गुजरेगी, जिनके अपने पाक समर्थित आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए हैं। कोई अपना गम और दिल में उठती टीस इस उम्मीद में भुला सकता है कि चलो, कुछ तो बेहतर होगा। मगर यह सद्भावना मैच नहीं, पूरी तरह से व्यावसायिक मैच है। वह भी उन हालात में, जब पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। कुछ मौकों पर तो वह खेल भावनाओं की दुहाई देता है, मगर अन्य मौकों पर इंसानियत को तार-तार कर देता है।

भारतीय जनता पार्टी और बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या शहीदों के परिवारों और देशवासियों की भावनाओं को कुचलते हुए यह व्यावसायिक क्रिकेट मैच करवाना जरूरी है? यह सवाल हर किसी के जहन में कौंध रहा है।’

लेख: धर्मशाला में पाकिस्तान के साथ मैच का विरोध होना चाहिए

आई.एस. ठाकुर।।
 
A Wednesday मूवी में नसीरुद्दीन शाह का डायलॉग है- हम भारतीयों की याद्दाश्त बहुत कमजोर है। हमें बहुत जल्दी चीज़ों की आदत हो जाती है। एकदम सटीक डायलॉग है। हम भारतीयों को याद नहीं रहता कि कब-कब कहां पर आतंकी हमला हुआ, कितने जवान शहीद हुए, कितने परिवार उजड़े। हमें आदत हो गई अक्सर ऐसी खबरें पढ़ने-सुनने की कि फ्लां जगह पर आतंकी हमला, इतने जवान शहीद। अगले दिन से फिर लग जाते हैं इधर-उधर के कामों में।
शहादत शब्द ऐसा है, जो गर्व का चोला ओढ़ाकर मौत की विभीषिका को छिपा देता है। लोग शहीद जवानों की तस्वीरों को लाइक करते हैं, शेयर करते हैं और कॉमेंट करते हैं कि शहादत पर गर्व है, RIP, अमर रहें, भारत माता की जय और फिर अगली ही पोस्ट में होठों की आकृतियां बनाकर तुरंत सेल्फी पोस्ट कर देते हैं। झूठी देशभक्ति और झूठी संवेदनाएं दिखाती हैं कि हम कितने मतलबी हो गए हैं।
जाहिर है, पिछले समय से लगातार हो रहे हमलों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा चला रहता है। लोग पूछते हैं कि कहां गया 56 इंच का सीना, तो कुछ लोग कहते हैं कि पाकिस्तान को उचित वक्त पर जवाब दिया जाएगा। कुछ लोग कहते हैं कि प्रधानमंत्री अच्छी पहल कर रहे हैं पाकिस्तान से करीबियां बढ़ाकर तो कोई आलोचना करता है कि यह क्या नौटंकी है। इन सब बातों का सच कहूं तो कोई मतलब नहीं है। राजनीति से प्रेरित बातें हैं और बेहद छिछली हैं। एक-दूसरे को नीचा दिखाने में जुटे रहने वाले लोग ऐसे मौकों पर भी कीचड़ उछालने में व्यस्त रहते हैं। अरे भैया, देश पर हमला हुआ है, एकजुटता दिखाइए। मगर नहीं, ऐसा मौका फिर कहां मिलेगा।
मैं उन लोगों में नहीं हूं जो पाकिस्तान को उड़ा देने की सोच रखता हूं। उनमें भी नहीं जो मानते हैं कि पाकिस्तान से कोई रिश्ता कोई बात नहीं होनी चाहिए। मैं हमेशा से चाहता हूं कि इस मुल्क के साथ अच्छे रिश्ते हों ताकि हम शांति से तरक्की की राह पर बढ़ें। पड़ोसी चिल्ल-पौं करता हो तो घर का माहौल ठीक नहीं रहता। वह भी तब, जब पड़ोसी के घर में पड़ी गंदगी की बदबू आपके घर तक आने लगे। पहले वहां से मक्खियां उड़कर आएंगी, फिर चूहे, कीड़े और न जाने-जाने क्या-क्या परजीवी आपके घर पर डेरा जमा लेंगे। जो गत आपके पड़ोसी की होगी, उससे बुरी आपकी होगी।
इन हालात में क्या किया जाए? क्या पाकिस्तान से बात की जाए? क्या पाकिस्तान को समझाया जाए? क्या उसके आगे गिड़गिड़ाया जाए? क्या उसके साथ युद्ध कर लिया जाए? इन सबका कोई फायदा नहीं है। पाकिस्तान को समझना होता तो समझ चुका होता। युद्ध भी हल नहीं है। नुकसान अपना भी होगा। कहावत भी है- मंगणा पिच्छे खिंदा नी फुकदे यानी खटमलों के चक्कर में खिंद (रजाई) नहीं जलाई जाती। तो क्या किया जाए?
पाकिस्तान अक्सर कहता है कि वह खुद आतंकवाद से जूझ रहा है, लिहाजा उसके ऊपर आरोप न लगाए जाएं। वह कहता है कि हमारे यहां हम किसी आतंकी को भारत नहीं भेजते, कुछ संगठन जो भारत विरोधी सोच रखते हैं, वे हमारे भी खिलाफ हैं और हम उनके खिलाफ कार्रवाई करते हैं। पाकिस्तानकी ये बातें पहली नजर बड़ी दर्द भरी लगती हैं। मगर जब भारत कहता है कि जनाब आपकी बात सही है, आप बस हमें अपने यहां जांच का मौका दे दो।
यह कहना होता है कि पाकिस्तान के सुर बदल जाते हैं। वह तुरंत आरोप लगाने लगता है। कहता है कि भारत हमारे बलूचिस्तान में अशांति फैला रहा है। फ्लां कर रहा है, ढिमाका कर रहा है। वह कश्मीर का राग आलापने लगता है और मुद्दा वहीं खत्म। पाकिस्तान के इरादों का यहीं से पता चल जाता है। अगर वह कुछ करने की इच्छा रखता तो सहयोग दिखाता। ऐसे में इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
यह कार्रवाई कैसे हो? पाकिस्तान को बॉयकॉट किया जाए। खेल को यूं तो राजनीति व कूटनीति से अलग रखा जाता है, मगर इसे अलग न रखा जाए। क्रिकेट क्या, कोई भी खेल पाकिस्तान के साथ न हो। अन्य सारी गतिविधियां तब तक होल्ड पर डाली जाएं, जब तक पाकिस्तान को इसका नुकसान न हो। जब पाकिस्तान के खिलाड़ी, लोग औऱ जनता खुद अपनी सरकार को कोसने लगें। वे खुद अपनी हुकूमत पर प्रेशर डालें। क्योंकि वे लोग ही अपने मुल्क तो सुधार पाएंगे, वरना ऊपर वाला भी पाकिस्तान को समझा पाने में नाकाम रहेगा।
शुरुआत होनी चाहिए धर्मशाला में होने जा रहे क्रिकेट मैच से। हिमाचल प्रदेश का धर्मशाला कोई असली वाली धर्मशाला नहीं है कि कोई भी उठकर चला आए। अपनी निजी हितों के लिए कुछ लोग देश की पूरी रणनीति को कमजोर कर रहे हैं। क्रिकेट मैच से पैसा बनाने के चक्कर के साथ-साथ हिमाचल की जनता को तुष्ट करके राजनीति करना चाहते हैं। ऐसे लोगों के इरादों को तुरंत समझा जाना चाहिए। हिमाचल प्रदेश के लोगों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि धर्मशाला में पाकिस्तान के साथ मैच न हो पाए। इसके लिए शांतिपूर्ण तरीके से सोशल मीडिया और प्रदेश में प्रदर्शन करना चाहिए, ताकि बीसीसीआई अपने कदम पीछे हटा ले।
जिन लोगों ने धर्मशाला को धर्मशाला बना रखा है, उन्हें सबक सिखाया जाना चाहिेए। बाकी अगर किसी को अब भी लगता हो कि खेल अलग रखना चाहिए और धर्मशाला में मैच हो, तो उसकी अपनी इच्छा। कृपया वह कॉमेंट करके बताए कि ऐसा क्यों होना चाहिए।

(लेखक आयरलैंड में रहते हैं और ‘इन हिमाचल’ के नियमित स्तंभकार हैं। उनसे kalamkasipahi@gmail.com से संपर्क किया जा सकता है।)

सिर्फ पंचायत चुनावों में ही क्यों दिखती है स्वयंभू समाजसेवकों की फ़ौज : आशीष नड्डा

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  • आशीष नड्डा 
पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों की अपील पढ़कर लगता है,  समाजसेवकों की एक नयी ब्रीड गावं गावं में पैदा हो गयी है।
समाज सेवा और गावं के लिए कुछ करने की बात चली तो मुझे अपने बचपन स्कूल समय का दौर याद आया। जब हमारे गावं के एक बुजुर्ग ( स्वर्गीय श्री जगदीश राम ) जिन्हे सब मनाली वाले चच्चा दादा आदि के नाम से जानते थे क्योंकि मनाली  उनका कार्य- क्षेत्र रहा वहां के मुख्या बाजार में जिनका घर बार है।
उन्होंने कुछ ऐसा किया जो मुझे आजतक याद है।  एक दिन वो गावं आये अपना  फावड़ा और खुदाई का सामान उठाया और गावं के एक  पैदल रास्ते को पक्का करने के लिए चल पड़े।
खड्ड ( नदी) से निकालकर पत्थर लाते और उन्हें रास्ते में लगाते दिसंबर की ठण्ड। दिन की खिली धूम और हम सब बच्चों को स्कूल की  7  दिन की छुट्टियां। चाचा को यह करते देख अगले दिन सारी बाल सेना ( हम सब बच्चे) उनके साथ हो लिए और  उनके  नेर्तित्व  करने लगे।  हम लोग खड्ड से अच्छे अच्छे छांट कर लाते कोई खुदाई करता कोई कुछ करता और वो हमारे लाए हुए पत्थरों को  तरीके से रास्ते में सेट करते।
लंच करने सब घर आते फिर दुबारा जाते। देखते ही देखते इस कार्य में पूरा गावं जुट गया और रविवार की छुट्टी के दिन कर्मचारी लोग भी  इस कार्य में जुट जाते।
किसी घर से सबके लिए स्वेच्छा से चाय आ जाती। हम बच्चों को भी छुट्टियों  में एक काम मिल गया। देखते ही देखते श्रम दान और उनकी जिमेवारी लेने के कारण रास्ता पक्का हो गया। इस तरह हम सब लोगों ने मिलकर गावं के कई रास्तों का निर्माण कर दिया।
गावं के महिलामण्डल के भवन जिसकी बरसों पहले नीवं पड़ी थी परन्तु कोई कार्य बजट और जिम्मेदारी लेने वाले के अभाव में नहीं हो पा रहा था।  उसके आसपास ईंटों का ढेर था,  नीवं पर झड़िया उग आई थी। जंगल बन गया था।   लोग उधर जाने से डरने लगे थे। एक दिन चाचा के नेर्तित्व  में बाल सेना ने बीड़ा उठाया घर से सामान लाकर सब झाड़ियों को काटकर , जगह को साफ़ किया ईंटों को करीने से सजाया। और कुछ सरकारी बजट एवं श्रमदान से महिला मंडल का निर्माण कर दिया जो आज गावं में तीन कमरों का दो मंजिला सामुदायिक भवन हैं।
15 वर्ष पहले तैयार किया गया महिला मंडल का भवन ( जिसका लेखक ने ज़िक्र किया है)
हमें ख़ुशी है उस दौर में हमारे लिए यह कार्य करना भी खेल कूद का हिस्सा थे। हैरानी है की जो पक्के रास्ते पंचायत ने बनवाए वो 3 वर्ष बाद उखड गए पर मनाली वाले चाचा के नेर्तित्व में हम लोगों के बनाये हुए रास्ते 15 साल बाद भी अडिग हैं।
आज समाज सेवकों को एक बाढ़ चुनाव में आई है,  जिनका मानना है जीत कर आने के बाद वो दुनिया बदल देंगे। परन्तु इतिहास गवाह है जीतने वाले से तो उम्मीद कम ही है खैर परन्तु हार के साथ बाकियों का समाजसेवा का भूत भी उत्तर जाता है।
समाज सेवा के लिए क्या पंचयात चुनाव जीत कर आना ही क्राइटेरिया है। इस से पहले चुनाव में लड़ने वाले लोगों की जीवन में क्या भूमिका रही इस क्षेत्र में वो भी देखना जरुरी है। विकास के नये आयाम स्थापित करने से लेकर। पंचायत को आदर्श बनाने के ढकोसलों से लेकर जनसेवा आदि इत्यादि कर देंगे टाइप शब्दों ने दिमाग खराब कर दिया है। ये शब्द  ऐसे लोगों द्वारा  भी प्रयोग किये जा रहे हैं जिन्होंने समाजसेवा के नाम पर कहीं ईंट तक नहीं उठायी हो। जो ग्राम पंचयात के मासिक कोरम में कभी नहीं पहुंचे हों। अब कहते हैं ये कर देंगे वो कर देंगे।
मनुवादी पीढ़ी से तो मुझे कोई आशा नहीं पर सोशल मीडिया पर विदेश नीति से लेकर , देश के हर घटनाक्रम पर एक्सपर्ट की तरह त्वरित टीपणी करने वाली युवा हिमाचली फ़ौज से मैं कम से कम यह आशा करता हूँ की उनका वोट जाती पाती क्षेत्रवाद भाई भतीजा वाद से हटकर होगा।  हालाँकि हिमाचल प्रदेश का पंचायत चुनाव इसी में काफी हद तक जकड़ा हुआ है।
आशीष नड्डा

लेखक आई आई टी दिल्ली में रिसर्च स्कॉलर हैं और प्रादेशिक मुद्दों पर लिखते रहते हैं इनसे aashishnadda@gmail.com पर संपर्क साधा जा सकता है। 

प्रदेश के पर्यटन स्थलों में चलेंगी बाइक टैक्सी : बेरोजगार युवकों को मिलंगे लाइसेंस

 
हिमाचल प्रदेश घूमने आने वाले पर्यटकों को सुविधा और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लिए  परिवहन मंत्रालय ने एक अहम फैसला लिया है। प्रदेश की वादियों में आने वाले पर्यटक अब ‘बाइक टैक्सी’ सुविधा इस्तेमाल कर सकेंगे।
परिवहन मंत्री जी एस बाली ने इस बाबत कहा की कई बार भीड़-भाड़ वाली जगहों पर घूमने में पर्यटकों को दिक्कत होती है, क्योंकि वहां बड़ी गाड़ियां नहीं जा पातीं। ऐसे में वे ‘टू-वीलर टैक्सी’ की मदद से उन जगहों पर बेफिक्र होकर घूम सकते हैं। अकेले घूमने आने वाले पर्यटकों को भी इससे लाभ मिलेगा, क्योंकि उन्हें टैक्सी या कैब का खर्च नहीं उठाना होगा।
 
 
थाईलैंड में बाइक टैक्सी पर सवार महिला
परिवहन मंत्री के अनुसार इस फैसले से न सिर्फ स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि पर्यटन स्थलों पर पड़ रहा ट्रैफिक का भार भी कम होगा। पायलट प्रॉजेक्ट के तहत शुरू में शिमला, मनाली, धर्मशाला और डलहौजी में यह सर्विस शुरू की जाएगी। बाकायदा ट्रेनिंग के बाद ‘बाइक टैक्सी’ का लाइसेंस देने की भी योजना है। बाइक टैक्सी के लिए इन सिटी में बाकायदा अलग से टैक्सी स्टैंड चिन्हित होंगे।  
 
गौरतलब है की विदेशों के साथ साथ भारत में भी गोवा , कोच्चि ,बेंगलोर आदि स्थानों पर यह सुविधा मौजूद है।  

सामने जल रहे थे कार्यकर्ता : मंच से नेता करते रहे नारेबाजी

इन हिमाचल डेस्क।

शिमला में प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी का पुतला जलाए जाने के दौरान भड़की आग में दो पुरुष  कांग्रेस कार्यकर्ता एवं 3 महिलायें झुलस गई हैं।  प्राप्त जानकारी के अनुसार कांग्रेस कार्यकर्ता मनोज अधिकारी के हाथ बुरी तरह आग की चपेट में आ गए थे उन्हें जल्दी से आई  जी एम सी भेजा गया।  हैरानी की बात यह है की आग की लपटों में कांग्रेसी कार्यकर्ता झुलसते रहे और इधर उधर भागकर  आग बुझाने की कोशिश करते रहे उसी दौरान कांग्रेस के तीन युवा तुर्क नेता प्रदेश अध्य्क्ष सुखविंदर सिंह सुक्खु , सी पी एस राजेश धर्माणी एवं रोहित ठाकुर यह सब नजारा देखते हुए भी नारेबाजी करते रहे और एक कदम भी लोगों को बचाने के लिए आगे नहीं बढे।  माना जा रहा है की उनके इस तरह के रवैया के कारण पार्टी कार्यकर्ता काफी रोष में हैं।
आग की चपेट में कांग्रेस कार्यकर्त्ता
यहाँ तक जब सुक्खु मीडिया से मुखातिब होने लगे तब किसी कार्यकर्ता ने कह दिया मीडिया से बाद में बात कर लें पहले आई जी एम सी फोन कर लिया जाए तो बेहतर होगा। जिलाधीश शिमला दिनेश मल्होत्रा ने कहा की उन्हें प्रदर्शन की अनुमति के बारे में मालूम नहीं है श्याद एस डी एम से परमिशन ली गयी हो।  वहीँ पुलिस आयुक्त भजन नेगी का कहना है की पुतला जलाना गैरकानूनी है और इस बारे में मामला दर्ज किया जाएगा।

क्या कौशल विकास निगम के लिए विक्रमादित्य सिंह से अच्छा विकल्प नहीं मिला?

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  • आई.एस. ठाकुर।।
ये विक्रमादित्य सिंह है कौन? इसकी क्या उपलब्धि है? कोई कलाकार है या कोई साइंटिस्ट? कोई लेखक है या कोई हुनरमंद मजदूर? कोई अधिकारी है या बिजनसमैन? इस युवक ने ऐसा क्या किया है जिससे लोग प्रेरित हो सकें? इसने कहीं पर काम किया है जो यह जान सके कि कैसे किसी के लिए कुछ किया जा सकता है?
अगर इन सब सवालों का जवाब कुछ है तो कृपया कॉमेंट में बताएं। मगर मुझे तो इनका जवाब नहीं मिला। मेरे लिए विक्रमादित्य सिंह दरअसल हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के बेटे से बढ़कर कुछ नहीं है। जो लोग कहेंगे कि वह हिमाचल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष हैं, तो मैं उन्हें यही कहूंगा कि वह इस पद पर इसीलिए हैं क्योंकि वह वीरभद्र सिंह के बेटे हैं। इसके अलावा उन जनाब ने कोई तीर नहीं मारा जो इस पद के काबिल हैं वह। यही बात मैं अनुराग ठाकुर के लिए कहता रहा हूं, जो अपने पिता के नाम और काम की बदौलत राजनीति और क्रिकेट में आगे बढ़े थे।
पिता वीरभद्र को मिठाई खिलाते विक्रमादित्य (Outlook.com)
खैर, मैं तीखे शब्दों में यह लेख लिखने को मजबूर हूं, क्योंकि मैंने कुछ दिन पहले एक खबर पढ़ी। खबर में लिखा है- हिमाचल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह कौशल विकास निगम के निदेशक होंगे। निदेशक या डायरेक्टर; यानी वह इस निगम की कार्यकारी जिम्मेदारी संभालेंगे। मगर मैं यह सोचकर हैरान हूं कि एक ऐसा शख्स, जिसकी अपनी कुशलता और योग्यता का किसी को पता नहीं, वह इस पद पर क्या करेगा? क्या प्रदेश में लायक लोगों की कमी हो गई है?
मुझे विक्रमादित्य से कोई रंजिश या शिकवा नहीं है। मेरी शिकायत मौजूदा सिस्टम और राजनीति के स्तर से है। यह पदों के चेयरमैन, डायरेक्टर बनाने की परंपरा बंद होनी चाहिए। हर सरकार हारे अपनी पार्टी के हारे हुए चहेतों या अपने चमचों को इन पदों पर बिठा देती हैं। इन लोगों को मोटी तनख्वाह दी जाती है, जो कि जनता की गाढ़ी कमाई से जाती है। ये लोग करते कुछ नहीं, बस गाड़ियों में घूमते हैं, पार्टी का काम करते हैं और मौज काटते रहते हैं।
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बेहतर होता अगर कौशल विकास निगम के निदेशक के पद पर किसी ऐसे शख्स को बिठाया जाता, जो अपनी फील्ड में सफल हो। जो कम से कम 10 साल का तो अनुभव रखता ही हो किसी फील्ड में। जो इस फील्ड से जुड़ी बातों की समझ रखता हो। जिसकी कोई अच्छी क्वॉलिफिकेशन ही नहीं, अच्छी पहचान और इज्जत भी हो। और फिर उस शख्स को खुला हाथ दिया जाना चाहिए, ताकि वह कुछ क्रिएटिव कर सके। क्या कोई अच्छी राजनीति शुरू नहीं कर सकता?

पढ़ें: य दिख रहा है दो नावों पर सवार अनुराग ठाकुर का डूबना

वरना बनाते रहो निगमों पर निगम, अपने बेटों और चहेतों को सेट करते रहो। आज तक यही होता आया है और आगे भी होगा। प्रदेश की जनता राजा की जय, टीका जी की जय, धूमल जी की जय, ठाकुर साहब जिंदाबाद करती रहेगी। पढ़ा-लिखा तबका यही सोचकर अलग रहेगा कि छोड़ो, हमें क्या। और घटिया, नाकाबिल और वाहियात लोग प्रदेश और देश का बंटाधार करते रहेंगे।

(लेखक आयरलैंड में रहते हैं और ‘इन हिमाचल’ के नियमित स्तंभकार हैं। उनसे kalamkasipahi@gmail.com से संपर्क किया जा सकता है।)

‘राम के स्वरूप’ या खुद ‘राम’, कौन संभालेगा बीजेपी की कमान?

इन हिमाचल डेस्क 
बढ़ती सर्दी और राजनितिक गर्मी के मिले जुले मौसम में हिमाचली नेताओं की दिल्ली टूरिंग शबाब पर है।  एक पार्टी प्रेजिडेंट हाउस जाती है तो मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी बेचारगी प्रस्तुत करते हैं।  न्यायलयों में चल रहे मामलों का राजनीति के अखाड़ों में हो रहा यह मल्ल युद्ध अपने आप में भारतीय न्याय वयस्था पर प्रश्नचिन्न लगाता है।  खैर मुद्दे की बात यह है की की बी जे पी नेताओं की जो टोली दिल्ली गयी थी उसमे सांसदों के अलावा पार्टी अध्य्क्ष पद के सभी संभावित चेहरे शामिल थे।  रणधीर शर्मा , राजीव बिंदल , जय राम ठाकुर और पंडित रामस्वरूप हालाँकि कांगड़ा से विपिन परमार क्यों नहीं आये इस पर संशय हो रहा है।  अटकलें लगायी जा रहीं है की  एंटी धूमल खेमा विपिन परमार को भी भरोसेमंद नहीं समझता है।
धूमल खेमे की जहाँ पूरी कोशिश है की रणधीर शर्मा के सर ये  ताज सजे वहीँ।  एंटी धूमल खेमा जय राम ठाकुर में अपने समीकरण देख रहा है।  केंद्र में बैठे एक नेता के हनुमान कहलाने वाले जयराम ठाकुर को कांगड़ा के बुजुर्ग नेता का भी पूरा समर्थन हासिल है।  जय राम ठाकुर पहले भी प्रदेश बी जे पी के अध्य्क्ष रह चुके हैं और जिला मंडी से आते हैं।  कांगड़ा के बाद मंडी  10 सीट के साथ प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा पोलिटिकल प्रभाव वाला जिला है।  रणधीर शर्मा के साथ दिक्कत यह है की वर्तमान प्रेजिडेंट सत्ती भी इसी लोकसभा क्षेत्र से हैं , विपक्ष के नेता प्रेम कुमार धूमल इसी लोकसभा से हैं युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अद्यक्ष  अनुराग ठाकुर केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा सब हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सबंधित हैं एक ही क्षेत्र से सब कुछ होना पार्टी की नजर में आ रहा है साथ ही   बिना नड्डा के  बिलासपुर से रणधीर पर सहमति बनना मुश्किल  है।
जय राम ठाकुर पर एंटी धूमल खेमा डबल दाँव खेलने की तैयारी में है ज़ाहिर है जय राम लगातार पांचवा चुनाव जीत कर विधानसभा में आये है।  और बेदाग़ छवि के आदमी रहे हैं। जय राम ठाकुर अगर प्रदेश अद्यक्ष बन जाते है तो 2017 में नड्डा के प्रदेश की राजनीति में न आ पाने की स्थिति में जय राम ठाकुर धूमल के सामने यंग फेस के रूप  में मुख्यमंत्री के लिए टक्कर ददे सकते हैं , ऐसा इस खेमे का मानना है। प्रदेश के मध्य मंडी से सबंधित होने के कारण जय राम पुरे हिमाचल की राजनीति में प्रभाव बना सकते हैं।  इसलिए  बी जे पी का एक खेमा पूरी कोशिश में है की सिर्फ नड्डा ही नहीं 2017 में बुजुर्ग होते धूमल के सामने जय राम ठाकुर को भी एक विक्लप  बनाकर पेश किया जाए।
अब यह समीकरण नहीं बैठा तो मंडी के सदाबहार सांसद पंडित रामस्वरूप तो हर जगह फिट होने वाले व्यक्ति हैं ही जिनके अध्य्क्ष बनने पर कम से कम 2017 तक कोई उठापटक नहीं होगी धड़ों में आपसी मारामारी नहीं आएगी।  इसलिए इस गुट की चली तो या जय राम या उनके स्वरुप इनमे से एक का अध्य्क्ष बनाये जाने का फरमान कुछ दिनों में आ जायेगा।  बाकी बिंदल साब से सब डरते हैं कोई नहीं चाहेगा बिंदल अद्यक्ष बनें।

हिमाचल की बेटी के मॉडल से प्रभावित हुए डॉ. हर्षवर्धन, कहा- पेटेंट किया जा सकता है

शिमला।।

इन हिमाचल में छपे एक आर्टिकल में बताया गया था कि किस तरह से दिल्ली में हुए पहले इंडिया इंटरनैशनल साइंस फेस्टिवल में प्रदेश के बच्चों ने शानदार मॉडल बनाए थे। इन्हीं में से एक था काईस स्कूल में पढ़ रही बच्ची विदुषी शर्मा का चूल्हा। इस चूल्हे के मॉडल को देखकर केंद्रीय साइंस ऐंड टेक्नॉलजी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके।

साभार: Jagran

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि यह चूल्हा ग्रामीण भारत के लिए एक वरदान साबित हो सकता है। उन्होंने अध्यापक पंकज वर्मा को दिल्ली स्थित सेंटर फॉर रूरल डिवेलपमेंट ऐंड टेक्नॉलजी के प्रमुख प्रफेसर डॉक्टर वीरेंद्र कुमार और विजय के साथ इस मॉडल पर काम करने की सलाह दी। विदुषी के मॉडल को देखकर  डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा कि इसे तो पेटेंट करवाया जा सकता है।

चूल्हे के मॉडल के साथ विदुषी

इस खास चूल्हे में सबसे पहले नीचे वह हिस्सा है, जहां लकड़ी जलाई जाएगी। पूरी तरह से इंसूलेट किए इस चूल्हे के अंदर तांबे के पाइप हैं, जिनसे पानी गरम हो सकता है। उसके ऊपर कुछ चीज़ों का मिश्रण है, जो प्रदूषण कम करता है। उसके ऊपर वह हिस्सा है, जहां आप खाना बना सकते हैं।

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