मुख्यमंत्री के पेज पर Live के नाम पर दिखाया रिकॉर्डेड वीडियो, वह भी ढंग से नहीं चला

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश को तरक्की की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के लिए उस वक्त अजीब स्थिति हो गई जब वह 7 बजे लाइव आने का ऐलान करने के बावजूद फेसबुक पर सही वक्त पर लाइव नहीं हो पाए।

पहले मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के फेसबुक पेज पर शाम 7 बजे का लाइव शेड्यूल किया था मगर उस पर लाइव होने के बजाय 7 बजकर 5 मिनट पर नया फेसबुक लाइव क्रिएट कर दिया।  इंटरनेट का आलम यह था कि आवाज कट-कट कर आ रही थी और विडियो भी हैंग हो रहा था। इसके तुरंत बाद ब्रॉडकास्ट रोक दिया गया और फिर उस लाइव वीडियो को डीलीट कर दिया गया। इसके बाद 7 बजकर 13 मिनट पर पेज पर फिस ले लाइव शुरू हुआ मगर यह 3 मिनट से कुछ ही सेकंड ऊपर टिका। देखें:

दरअसल एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह फेसबुक लाइव सीधा लाइव नहीं था, बल्कि प्री-रिकॉर्डेड मेसेज था जिसे एक सॉफ्टवेयर के जरिए लाइव किया गया था। गौरतलब है कि OBS और इसी तरह के अन्य सॉफ्टवेयर्स की मदद से प्रीरिकॉर्डेड लाइव किए जा सकते हैं। मगर इनमें वीडियो का डेफिनिशन हाई रहे तो वह रुक-रुककर चलता है। लोगों का कहना है कि पहले वाला डिलीट हुआ वीडियो और अभी वाला वीडियो एक जैसा ही है। शुरू के 10 सेकंड बाद वीडियो में एक जंप दिखता है, जिससे पता चलता है वीडियो एडिटेड है। आखिर में वीडियो का ब्लैक हो जाना भी यही इशारा करता है।

बहरहाल, बड़ा मुद्दा यह नहीं है कि वीडियो रेकॉर्डेड था या नहीं। इससे पता चलता है कि मुख्यमंत्री के दफ्तर में ही ऐसा इंटरनेट हो तो पूरे प्रदेश में इंटरनेट कनेक्टिविटी की क्या हालत होगी। गौरतलब है कि यह सरकार फ्री वाई-फाई देने के नाम पर निजी कंपनी जियो द्वारा दिए जाने वाले पब्लिक वाई-फाई पर तारीफ बटोर चुकी है।

इंटरनेट पर चर्चा है कि मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार गोकुल बुटेल ही उनके फेसबुक पेज को संभालते हैं। चूंकि वह सीएम के आईटी अडवाइजर हैं, ऐसे में वह भी फेसबुक लाइव के दौरान साथ होंगे। मगर हास्यास्पद स्थिति यह है कि 7 बजकर 10 मिनट तक मुख्यमंत्री लाइव नहीं हो पाए। गौरतलब है कि गोकुल बुटेल एयरोनॉटिकल इंजिनियर हैं और बावजूद उन्हें आईटी सलाहकार बनाया गया है। इंटरनेट पर इस बात को लेकर भी चर्चा हो रही है कि गलत फील्ड के व्यक्ति को गलत जगह तुष्टीकरण के तहत लाखों की सैलरी पर रखेंगे तो यही होगा।

इस वीडियो लाइव से गोकुल बुटेल एवं मुख्यमंत्री के आईटी पार्क के दावों की भी पोल खुलती है। अगर ऐसा स्लो इंटरनेट होगा तो कैसे बनेगा आईटी पार्क? कौन सी कंपनी होगी तो धीमे इंटरनेट पर काम करने आएगी? बहरहाल, सरकार को सबक लेने की जरूरत है।

इस वीडियो के जरिए मुख्यमंत्री ने अपने वॉट्सऐप नंबर की जानकारी दी। यह नंबर 9816661555 है। मुख्यमंत्री ने इसी की जानकारी देने के लिए फेसबुक लाइव को चुना। फेसबुक के जरिए संवाद करने वाले वह हिमाचल के दूसरे सत्ताधारी राजनेता हैं। उनसे पहले ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर जी.एस. बाली दो बार फेसबुक लाइव कर चुके हैं।

हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिह फेसबुक पर लाइव

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने फेसबुक के जरिए संवाद की पहल की है। वह अपने ऑफिशल फेसबुक पेज पर लाइव हैं। जानें, क्या कह रहे हैं वह:

नीचे देखें फेसबुक लाइव:

‘बेगम जान’ मूवी में विद्या बालन के साथ दिखेगी पालमपुर की बेटी पूनम राजपूत

इन हिमाचल डेस्क।। यह हैं पूनम राजपूत। कांगड़ा जिले के चढ़ियार में एक छोटे से गांव डोली में जन्मीं पूनम महेश भट्ट की अपकमिंग मूवी ‘बेगम जान’ में विद्या बालन के साथ नजर आएंगी। इस फिल्म का डायरेक्शन सुरजीत मुखर्जी कर रहे हैं। पूनम रविवार को कपिल शर्मा शो में फिल्म के प्रमोशन के लिए भी पहुंच रही हैं। यह फिल्म 14 अप्रैल को रिलीज होगी।

पूनम इस फिल्म में सबसे युवा लड़की रानी के कैरक्टर में नजर आएंगी। यह फिल्म विभाजन के दौरान महिलाओं के संघर्ष पर आधारित है। गौरतलब है कि पूनम पंजाबी फिल्म ‘जट दी वन’ में लीड रोल निभा चुकी हैं।

विद्या बालन के साथ पूनम
विद्या बालन के साथ पूनम

पूनम की शुरुआती पढ़ाई चढियार में ही हुई। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ से एमबीए करने के बाद मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा। पूनम के पिता नहीं हैं। संघर्ष करते हुए पूनम ने हार नहीं मानी और अपने सपनों को पूरा किया। पूनम की माता पवना देवी का कहती हैं कि पूनम बचन से फिल्मों में काम करना चाहती है। नीचे उनकी फेसबुक प्रोफाइल से मॉडलिंग की कुछ तस्वीरें। सबके आखिर में बेगम जान मूवी का ट्रेलर देखें:

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बेगम जान मूवी का ट्रेलर:

हिम्मत और प्रतिभा की धनी हिमाचल के सिरमौर की बेटी सुशीला ठाकुर

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, नाहन।। आज हम आपको एक ऐसी शख्सियत से मिलवाने जा रहे हैं जो पूरे समाज के लिए मिसाल हैं। यह हैं हरिपुरधार के गैहल से संबंध रखने वालीं सुशीला ठाकुर जो टीचर भी हैं और सफल ट्रांसपोर्टर भी।

सुशीला के पति सुरजन ठाकुर ने दस बसों से मीनू कोच का परिचालन किया था, मगर दुर्भाग्य से साल 2003 में एक कार दुर्घटना में उनका निधन हो गया। सुशीला ठाकुर ने न सिर्फ परिवार को संभावा बल्कि पति के कारोबार को भी बढ़ाया। आज मीनू कोच की बसों का बेड़ा 22 तक पहुंच गया है। मीनू कोच बस सेवा आज प्रदेश के कई हिस्सों में चल रही है।

सुशीला ठाकुर (Image: MBM News Network)
सुशीला ठाकुर (Image: MBM News Network)

सुशीला लगभग 40 स्टाफ की जिम्मेदारी संभालती हैं और वह भी अध्यापन कार्य के साथ। तीन बच्चों की परवरिश भी बखूबी कर रही हैं। एक बेटी बायोटेक की पढ़ाई कर रही दूसरी इंग्लिश ऑनर्स। बेटा प्लस टू में है। उनका पूरा परिवार शिमला सेटल है।

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एमबीएम न्यूज़ नेटवर्क से बातचीत करते हुए सुशील ने बताया कि पति के व्यवसाय को संभालना के चुनौती भरा काम था मर स्टाफ की मदद से इसमें कामयाबी मिली। सुशीला का कहना है कि उनकी बसों से यात्रियों को अच्छी सेवा मिले, इसकी हर संभव कोशिश की जाती है।

सुशीला मिसाल हैं कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संघर्ष करके आगे बढ़ा जा सकता है। जीवन में आने वाली कठिनाइयों और झटकों से उबरकर दृढ़ निश्चय से ही आगे बढ़ा जा सकता है। सुशीला तमाम महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं। उनसे सीखने को मिलता है कि महिलाएं किसी भी काम को बखूबी कर सकती हैं और कामयाबी के साथ कर सकती हैं।

रियासत कालीन बिलासपुर की रुला देने वाली सत्य गाथा है ‘मोहणा’

आशीष नड्डा।। हिमाचल प्रदेश के बहुत से लोकगीत सत्य घटनाओं पर आधारित हैं। भारत की अच्छी बात यह है कि संवेदना को छूने वाले हर घटनाक्रम को लोकगीतों मे जगह देकर संजोया गया ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बारे में जान सकें। रियासतकालीन बिलासपुर की ऐसी ही एक कथा है “मोहणा।”

मोहणा केहलूर रियासत के किसी गाँव का एक भोला भाला लड़का था। उसका भाई तुलसी राजा के यहाँ नौकर था। तुलसी ने किसी का खून कर दिया। और मोहणा को इस बात के लिए राजी कर लिया कि परिवार की जिम्मेदारी उसके ऊपर है ।खेती बाड़ी भी वही देखता है इसलिए खून का इलज़ाम तुम अपने ऊपर ले लो। मैं राजा के यहाँ नौकर हूँ राजा से बात करके बाद में तुम्हे बचा लूंगा।

मोहणा भाई की बातों में आ गया और खून का इलज़ाम अपने सर ले लिया। मोहणा को राजा के सामने पेश किया गया। उस समय केहलूर यानी बिलासपुर रियासत का राज बिजई चन्द चन्देल के पास था। मोहन के भोलपन को भांपकर राजा को लगा की मोहणा किसी की जान नहीं ले सकता इसने कत्ल नहीं किया है। राजा के बार बार सचाई पूछने पर भी जब मोहणा ने जुबान नहीं खोली तब राजा ने उसे कुछ दिन का समय सोचने के लिए दिया।

निश्चित दिन मोहणा से जब पूछा गया तब भी मोहणा ने सच नहीँ बताया। अंत में बहादुरपुर के किले में गर्मियों के लिए गए राजा बिजाई चंद चंदेल ने वहीँ से 1922 में मोहणा को सरे आम साडू के मैदान में फान्सी देने का हुक्म दे दिया। फांसी से पिछली रात एक सिपाही के बार बार पूछने पर मोहणा ने रहस्य बताया। जो बाद में रियासत में फैला तब तक मोहणा फांसी पर लटक चुका था।

बिलासपुर के लोकगीतों में मोहणा को बहुत जगह मिली और लोकगीतों में मोहणा के बलिदान को गाया जाने लगा। इस वीडयो में मोहणा की इस कहानी को पहाड़ी पहाड़ी लोक गायक स्वर्गीय हेत राम तंवर जी ने अपनी आवाज दी है। अन्य गायकों ने भी इस गीत को गाया है। साथ ही इसपर नाटक भी होते हैं। हेत राम तंवर जी की आवाज सीधे दिल में उतरकर उदास कर देती है। नीचे सुनें:

मोहणा की कहानी पर नाटक भी होते हैं। यूट्यूब पर हमें कुछ अंश मिले, जिन्हें आप नीचे देख सकते हैं:

शिशु का शव मुंह मे लेकर घूमता रहा कुत्ता, रेत में दफनाते वक्त पड़ी नजर

सोलन।। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले मे आने वाेल खुंडीधार में एक आवारा कुत्ता एक नवजात शिशु को मुंह में लेकर घूम रहा था। जब यह कुत्ता शिशु को रेत के ढेर में दबाने की कोशिश करने लगा, तब एक महिला की नजर इसपर पड़ी। पुलिस को खबर की गई और शिशु को कुत्ते से छुड़ाया गया मगर वह मर चुका था।

जिस रेत के ढेर पर कुत्ता उस शिशु के शव को छिपा रहा था, पास ही एक महिला काम कर रही थी। उसे अगर पता न चला होता तो शायद मामला बाहर न आता। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शउरू कर दी है। पंजाब केसरी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक उपप्रधान विकास ठाकुर ने कहा कि शंका है कि शिवा विहार में कूड़ेदान में इस शिशु को जन्म के बाद शायद फेंक दिया होगा जिसे बाद में कुत्तों ने वहां से उठा लिया होगा।

उन्होंने कहा कि यह घटना इंसानियत को शर्मसार करने वाली है। ऐसी घटना को अंजाम देने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो उन्होंने कहा कि ऐसी घटना को अंजाम देने वाले लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि कोई इस तरह की घिनौनी घटना को कोई दोबारा अंजाम न दे सके।

जानकारी के मुताबिक सबसे पहले इस घटना की चश्मदीद ने बताया कि जब वह काम कर रहे थे तो उनकी नजर कुत्ते पर पड़ी जिसके मुहं में नवजात शिशु था तो इसकी सूचना अन्य साथियों को दी। उन्होंने कुत्ते का जब पीछा किया तो वह शव को रेत में दबा रहा था। तभी उन्होंने कुत्ते को वहां से भगाया और देखा की शिशु मरा हुआ था।

मंडी राजमहल भूमि सौदा: वीरभद्र सरकार में मंत्री अनिल शर्मा पर लगे आरोप

मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी के राजमहल भूमि सौदे में प्रदेश की कांग्रेस सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्रि अनिल शर्मा गंभीर आरोपों में घिर गए हैं। बीजेपी का कानून एवं विधिक प्रकोष्ठ अनिल को इस मामले में आऱोपी बनाने के लिए कोर्ट जाने की तैयारी है। आरोप है कि इस जमीन को खरीदने के लिए अनिल शर्मा के खातों से 1.22 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। गौरतलब है कि अनिल शर्मा के पिता पंडित सुखराम आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी रहे हैं।

नरेंद्र गुलेरिया ने आरोप लगाया कि राजमहल भूमि खरीद मामले में अनिल भी शामिल हैं। गौरतलब है कि 2008 में मंडी के राजमहल की जमीन को शिमला के एक स्कूल में बतौर चौकीदार नौकरी करने वाले खूब राम ने करोड़ों रुपये में खरीद लिया था। राजमहल की प्रापर्टी की पावर ऑफ अटार्नी देवेंद जम्वाल के पास थी। खूब राम को भूमि खरीदने के लिए पैसा संजय ने दिया था। संजय को पैसा अनिल से मिला था।

करोड़ों के सौदे में कम स्टांप पेपर लगाने के बाद मामला सुर्खियों में आया था। तत्कालीन उपायुक्त ओंकार शर्मा ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। बेनामी सौदे की बात सामने आने के बाद रजिस्ट्री रद कर दी गई थी। पुलिस ने खूब राम सहित सात लोगों को आरोपी बनाया। सौदे की गूंज इसलिए ज्यादा सुनाई दी थी क्योंकि जिस इमारत में राज देवता माधो राय का मंदिर है, आरोपियों ने उसे भी खरीद लिया था। अनिल होटल के साथ लगती भवानी पार्किग की जमीन खरीदना चाहते थे। वहां पाकिर्ंग के अलावा शापिंग काम्पलेक्स बनाने की योजना थी।‘

सरकार बनाम खूब राम मामले में अनिल को आरोपी बनाने के लिए बीजेपी का लीगल सेल आपराधिक प्रकिया संहिता की धारा 319 के तहत अदालत में अर्जी देगा। आरोप लगाया गया है कि अनिल ने 2008 में शहर में स्थित अपने होटल के साथ लगती होटल राजमहल की संपत्ति गैरकानूनी तरीके से खरीदने के लिए संजय कुमार को मोहरा बनाया था। भूमि खरीदने के लिए अनिल ने एसबीआइ के खाते से 50 लाख का चेक संजय को दिया था। इसके बाद 10 जनवरी 2008 को 25 लाख व 28 फरवरी को 10 लाख का चेक संजय ने नाम जारी किया। 28 फरवरी को अनिल ने पत्नी सुनीता शर्मा के कैनरा बैंक के खाते से 37.5 लाख रुपये का चेक संजय को दिया। 24 अप्रैल को 1.15 लाख व पांच मई को 17.37 लाख के अष्टाम पेपर खरीदे गए।

भूमि खरीद के लिए किसी तीसरे व्यक्ति के बैंक खाते में करीब 1.22 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर करना नियमों की अवहेलना है। परिवार से बाहर संपत्ति खरीदने के लिए इतनी बड़ी राशि किसी व्यक्ति को देना बेनामी संपत्ति कानून की धारा तीन के तहत आता है।

उधर दैनिक जागरण अखबार के मुताबिक अनिल शर्मा ने कहा है, ‘मैंने राजमहल होटल के साथ लगती भूमि खरीदने के लिए संजय कुमार को 1.22 करोड़ की राशि दी थी। मेरे साथ धोखा हुआ है। नौ साल बीतने के बाद भी न मुझे न तो भूमि मिली और न ही पैसा। संजय कुमार व अन्य लोगों के विरुद्ध पैसा वापस लेने के लिए अदालत में केस कर रखा है। पैसा देने में कोई गलत काम नहीं किया बल्कि बैंक खातों से भुगतान हुआ है।’

प्राइमरी एजुकेशन: तीसरी और पांचवीं क्लास के बच्चों को ‘क ख ग’ तक का ज्ञान नहीं

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, मंडी।।  हिमाचल प्रदेश सरकार कहती है कि शिक्षा उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। सबसे ज्यादा बजट शिक्षा विभाग पर खर्च करने का दावा भी सरकार कई बार कर चुकी है मगर जमीनी हकीकत आपको हैरान कर देगी। मंडी जिले के 49 प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं, जहां बच्चों को क-ख-ग तक का ज्ञान नहीं है।

देश भर की तरह मंडी जिले में भी सर्वशिक्षा अभियान कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत जिला प्रशासन ने उड़ान कार्यक्रम की शुरूआत की है, जिसके तहत प्राथमिक स्कूलों के बच्चों में शिक्षा के स्तर को सुधारने पर जोर दिया जा रहा है। उड़ान कार्यक्रम के फीडबैक के लिए 20 शिक्षा खंडों में बेसलाइन और एंडलाइन सर्वे करवाया गया। इस सर्वे में खुलासा हुआ कि जिले के 49 प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं, जो रेड ज़ोन में हैं। यानी इन स्कूलों के बच्चों को न तो क-ख-ग का ज्ञान है और न ही शब्दों का। बच्चे जमा और घटाने में भी पूरी तरह से असमर्थ हैं।

हैरानी की बात तो यह है कि अधिकतर बच्चे ऐसे हैं, जो कक्षा तीसरी और पांचवी में पहुंच चुके हैं, लेकिन उन्हें भी क-ख-ग और शब्दों का ज्ञान नहीं है। इस बात की पुष्टि सर्वशिक्षा अभियान की जिला परियोजना अधिकारी हेमंत शर्मा ने की है। उन्होंने बताया कि 49 स्कूल ऐसे पाए गए हैं जो रेड ज़ोन में हैं और वहां पर बच्चे पढ़ाई के मामले में बेहद कमजोर हैं।

जिले के शिक्षा खंड सदर में सबसे ज्यादा 12 स्कूल रेडजोन में शामिल हैं। इसके अलावा शिक्षा खंड बल्ह में चार, चौंतड़ा में एक, द्रंग में चार, सुंदरनगर में चार, सराज में छह, करसोग में दो, चच्चोट में आठ, धर्मपुर में तीन और गोपालपुर शिक्षा खंड में पांच स्कूल एंडलाइन सर्वे के बाद रेडजोन में शामिल किए गए हैं।

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सर्वशिक्षा अभियान की जिला परियोजना अधिकारी हेमंत शर्मा के अनुसार रेडजोन में दर्शाई गई पाठशालाओं का निरीक्षण करने के निर्देश दे दिए गए हैं। इसके लिए खंड स्तर पर एक ऑब्जर्वेशन दल का गठन करने को भी कहा गया है। गठित दल से रेडजोन में शामिल स्कूलों का निरीक्षण करके रिपोर्ट रिकॉर्ड सहित मांगी गई है। एंडलाइन सर्वे से हुए खुलासे के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

जिले के अधिकतर स्कूल ऐसे हैं, जहां पर या तो अध्यापक है ही नहीं या फिर एक-दो अध्यापकों के सहारे स्कूल चल रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि सर्वाधिक बजट का प्रावधान करने के बाद भी प्रदेश में शिक्षा का स्तर गिरता क्यों जा रहा है। इस सवाल पर सरकार को चिंतन करने की आवश्यकता तो है, लेकिन लगता है सरकार के पास चिंतन करने का समय नहीं है। सरकार का फोकस नए स्कूल खोलने के ऐलानों पर ज्यादा लगता है, क्वॉलिटी ऑफ एजुकेशन पर नहीं।

(आर्टिकल के साथ इस्तेमाल की गई तस्वीर प्रतीकात्मक है।)

Satire: मंडी के 50 गांवों को गड्ढों से जोड़ेगी हिमाचल सरकार, बजट जारी

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Disclaimer: यह पूरी तरह से काल्पनिक बात है और इसे सिर्फ मनोरंजन और व्यंग्य (Satire) के लिए हल्के-फुल्के अंदाज में लिखा गया है। इसे लिखने का मकसद किसी की छवि या भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है। उम्मीद है इसे इसी रूप में पढ़ा जाएगा।

खादू राम, मंडी।। हिमाचल प्रदेश सरकार प्रदेश के 50 गांवों को गड्ढों से जोड़ने जा रही है, वहीं पहले के कई सारे गड्ढों को नालों में अपग्रेड किया जाएगा। इस बात का ऐलान प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने मंडी में फ्लाणा शहर और ढिमकाणा गांव के बीच बने गड्ढों का उद्घाटन करते हुए कहा। उन्होंने कहा कि गड्ढों और नालों के निर्माण के लिए बजट भी जारी कर दिया गया है।

उद्घाटन समारोह में आई भीड़ उस वक्त हैरान रह गई, जब उसे गड्ढों के बजाय समतल और पक्की सड़क नजर आई। लोगों की चिंता को भांपते हुए मुख्यमंत्री ने चिर-परिचित अंदाज में मंच से कहा, ‘जनता को घबराने की जरूरत नहीं है। पीडब्ल्यूडी विभाग मेरे पास है और मैं पहले भी बता चुका हूं कि इसके सारे अफसर करप्ट हैं। इसलिए कुछ ही दिनों से ये सड़क उखड़ जाएगी और आपको गड्ढे नजर आने लगेंगे।’

मुख्यमंत्री से यह आश्वासन सुनकर लोगों की जान में जान आई, जो आजकल प्रदेश में पक्की सड़कों को देखकर घबरा जाते है। दरअसल प्रदेश में जहां जाओ, वहां पर सड़कों के बजाय गड्ढों का आलम नजर आने लगा है। बरसात में तो कई एनएच नालों में तब्दील हो जाते हैं। ऐसे में कहीं पर पक्की और ठीक सड़क देखना कौतूहल का विषय बन जाता है और एक नई बात हो जाती है।

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इस दौरान मौके पर मौजूद रहे पीडब्ल्यूडी के एक्सईन जोंढा राम ने कहा, ‘हम समझ रहे हैं कि लोगों को यहां पर पक्की सड़क देखकर हैरानी हो रही है। मगर मैं विश्वास दिलाता हूं कि न तो हमारे विभाग की तरफ से किसी इंजिनियर ने सड़क का मुआयना किया है और न ही निर्माण सामग्री की चेकिंग की है। ठेकेदार से हमने पहले ही पैसे ले लिए थे। इसलिए घटिया निर्माण सामग्री कुछ ही दिनों में उखड़ने लगेगी और बरसात आने पर लोग चिर-परिचित गड्ढों पर गाड़ियां चला रहे होंगे।’

मौके पर स्थानीय विधायक ने मीडिया को बताया, ‘देखिए, हमारी तो मांग थी कि यहां पर गड्ढों के बजाय नाला बनाया जाए। मगर फंड की कमी होने की वजह से हम सिर्फ गड्ढों की ही व्यवस्था कर पाए हैं। केंद्र की तरफ से भी मदद नहीं मिल रही है, फिर भी हमने अपने स्तर पर कई इलाकों में पिछले साढ़े 3 सालों में गड्ढों की कोई मेनटेनेंस न करके उन्हें नाले में तब्दील किया है।’

पढ़ें: Fake- हिमाचल की सड़कों पर मंगल मिशन-2 की टेस्टिंग करेगा इसरो

 

सतधार कहलूर: हिमाचल की इस रियासत में थे सबसे ज्यादा किले

आशीष नड्डा।। सतधार कहलूर वर्तमान बिलासपुर का पुराना नाम सतधार शब्द निकल कर आया था केहलूर रियासत में पड़ने वाली सात धारों यानी पहाड़ियों के नाम से। टियुन , सीयून , कोट -धार , नैना देवी, बहादुरपुर धार, छिन्जयार और बंदला धार इस रियासत की धारें (पहाड़ियां) थी जो अब भी इसी जिले में हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा किलों वाली रियासत केहलूर ही थी। मुख्या मुख्य तौर पर लगभग हर धार यानी पहाड़ी पर केहलूर रियासत में किले थे। हर किला अलग अलग समय पर बनाया गया और निर्माण की अलग दिलचस्प कहानी है।

कोटकहलूर किला
राजा वीर चन्द चंदेल ने सतलुज घाटी में आकर सन् 697ई. में नए राज्य की स्थापना की। कहलू-गुज्जर नामक जनश्रुतियों के अनुसार राजा वीरचंद ने सन् 697-730 ई. में माता नयनादेवी का मंदिर व कोट कहलूर के किले का निर्माण करवाया। कोट कहलूर किले में अब एक पुलिस थाना है।

तियून किला
इसका निर्माण कहलूर रियासत के 11वें राजा काहन चंद ने सन् 1085 ई. में किया। इस किले के नाम से ही पहाड़ी तियून धार के नाम से प्रसिद्ध हुई।

सरयून किला
कहलूर रियासत के 16वें राजा पृथ्वी चंद ने सन् 1162-1197 ई० में मोहम्मद गौरी के आक्रामण की आंशका के डर से इस किले को बनाया था। टियुन सरयून किले एक दूसरे के आमने सामने हैं और इनकी तलहटी में सीरखड्ड से लेकर शुक्र खड्ड के बीच का उपजेउ डेल्टा है।

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झजयार किला
यह किला बरठीं से छह किलोमीटर की दूरी पर झजयार धार की चोटी पर बना है। राजा महाचंद के शासन काल में कांगड़ा के महाराजा संसार चन्द कटोच ने केहलूर रियासत के सतलुज के उतरी इलाके घुमारवीं तहसील को जीत लिया। अपनी जीत के प्रतीक के रूप में संसार चन्द कटोच ने इसका निर्माण करवाया था।

बहादुरपुर किला
यह किला बिलासपुर का ताजमहल की तरह है राजा विक्रम चंद ने सन् 1555-1593 ई. ने अपनी बाघल ( अर्की) वाली रानी को प्रसन्न करने के लिए बहादुरपुर किले का निर्माण करवाया। यह किला शिमला बिलासपुर हाईवे पर नम्होल से 10 किलोमीटर ऊपर चीड़ देवदार के जंगलों में स्थित है यह बिलासपुर का सबसे ऊंचा और ठंडा स्थान है . राजा गर्मियां इसी किले में गुजारते थे। वर्ष 1922 में मोहना को फांसी का आदेश इसी किले से दिया गया था।

बस्सेह का किला
यह घुमारवीं के बस्सेह क्षेत्र में स्थित है। इसका निर्माण राजा रत्न चंद ने करवाया था। समय की थपेड़े खाता यह किला अब टूट कर क्षतिग्रस्त हो चुका है।

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कोट ऑफ आर्म्स, कहलूर

बच्छरेटू किला
यह कोटधार में है। इसका निर्माण कहलूर के 23वें राजा रत्नचंद ने वर्ष 1355-1406 ई. में करवाया था। किले में 15 विभिन्न आकर कमरे हैं। इसके अंदर तालाब व एक देवी मंदिर के साथ एक पीपल का वृक्ष भी है।

फतेहपुर किला
यह किला फतेहपुर की चोटी पर बना है। यह किला इस दिशा की ओर से संभावित आक्रामणों को रोकने के लिए बनाया गया था। किले की दिवारों में गोलियों के निशान हैं। प्राकृतिक आपदा के समय लोग यहां शरण लेते थे।

यह भी पढ़ें: सतलुज की गहराइयों मे समा गया था सतधार कहलूर का वैभव

(लेखक मूल रूप से ज़िला बिलासपुर के रहने वाले हैं और IIT दिल्ली में रिन्यूएबल एनर्जी, पॉलिसी ऐंड प्लैनिंग में रिसर्च कर रहे हैं। लेखक प्रदेश के मुद्दों पर लिखते रहते हैं। उनसे aashishnadda@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है)