कुल्लू।। हिमाचल का कुल्लू दशहरा पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। जिस दिन रावण दहन के साथ पूरे देश में रामलीला का समापन होता है और दशहरा मना लिया जाता है, उसी दिन से हिमाचल के कुल्लू में दशहरा मेले की शुरुआत होती है। इस साल यह 30 सितंबर से 6 अक्टूबर तक चलेगा।
इस दौरान जिले और आसपास के इलाकों के कई गांवों के लोग और श्रद्धालु अपने देवी-देवताओं को पालकियों पर सुसज्जित करके लाएंगे।
Courtesy: kulludussehra.hp.gov.in
हिमाचल प्रदेश में कई सदियों पहले से ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में सात दिन तक दशहरा मनाए जाने का रिवाज है। इससे जुड़ी कुछ दंकथाएं भी हैं जो साल 1600 के सदी से जुड़ी हुई हैं। इन्हीं में से एक है राजा जगत सिंह की कहानी, जिन्हें कथित तौर पर कोढ़ हो गया था क्योंकि उन्होंने सुनी सुनाई बात के आधार पर एक ब्राह्मण से कुछ ऐसा मांग लिया था, जो उसके पास नहीं था।
राजा से किसी ने कहा था कि फ्लां ब्राह्मण के पास सुच्चे मोती हैं जो राजकोष में होने चाहिए। राजा ने ब्राह्मण से कहा कि उन्हें जमा करवाए। चूंकि उसके पास कोई मोती नहीं थे, इसलिए दबाव में आकर उसने सरपरिवार आत्मदाह कर लिया था।
रघुनाथ जी की रथयात्रा निकाली जाती है।
कहते हैं कि राजा को इसकी ग्लानि हुई थी और वह बीमार हो गए थे। कहते हैं कि उन्हें कुष्ठ रोग हो गया था। मन्नत मांगे जाने के बाद जब वह ठीक हुए तो उन्होंने आसपास की कई रियासतों के देवी-देवताओं को न्योता दिया था। इसके बाद हर साल इसे मनाने की शुरुआत हो गई थी।
नीचे देखें, कुल्लू दशहरे पर 60-70 के दशक में बनी एक डॉक्युमेंट्री:
शिमला।। पिछली कैबिनेट बैठक में वीरभद्र सरकार ने चाय के चुनिंदा बागान को ‘टी-टूरिज़म’ के नाम पर कुछ शर्तों के साथ बेचने की इजाजत दी थी। इसले लिए हिमाचल ले लैंड सीलिंग ऐक्ट के प्रावधानों में छूट दी गई थी। खबर आई थी कि सरकार के कुछ मंत्रियों ने कैबिनेट में इसका विरोध किया था, मगर अब एक मंत्री इस मामले में खुलकर अपनी सरकार के रुख के खिलाफ आ गए हैं। परिवहन मत्री जी.एस. बाली ने कहा है कि मैंने कैबिनेट में भी इस कदम का विरोध किया था और आगे भी करता रहूंगा।
परिवहन मंत्री ने कहा है, ‘टी-टूरिज्म के नाम पर गार्डन की जमीन को बेचने का प्रयास सरासर गलत बात है। चाय के बागान कांगड़ा की पहचान हैं और इन्हें खत्म नहीं होने दिया जाएगा। मैंने कैबिनेट में भी इसका विरोध किया था और आगे भी करूंगा।’
कांगड़ा से संबंध रखने वाले परिवहन मंत्री ने कहा, “1972 में बने लैंड सीलिंग ऐक्ट के तहत सरकार ने जमीन की अधिकतम सीमा तय की थी और इससे ज्यादा लैंड को सरकार ने अपने पास रख लिया था। इसके तहत राज्य के कई लोगों को अपनी जमीनें सरकार को देनी पड़ी थीं. मगर चाय और सेब की जमीनों को इस ऐक्ट से इस शर्त पर बाहर रखा था कि वे अपनी जमीनें नहीं बेच पाएंगे।”
परिवहन मंत्री ने कहा कि इन दोनों जमीनों को इस तर्क के आधार पर ऐक्ट से बाहर रखा गया था कि सेब और कांगड़ा टी हिमाचल की पहचान हैं। 45 सालों तक इन जमीनों को मालिकों ने बचाकर रखा और अब टी-टूरिज़म के नाम पर वे इसे बेचना चाहते हैं, जो कि गलत है।
गौरतलब है कि बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी कांग्रेस सरकार के इस फैसले की आलोचना कर चुके हैं।
बिलासपुर।। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 अक्टूबर को बिलासपुर में प्रस्ताविस एम्स का शिलान्यास करने आ रहे हैं। इस मौके पर आयोजित की जाने वाली महारैली के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा लोगों को जुटाने में लगे हैं। इस दौरान बिलासपुर के पंजगाई में लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ‘राजनीतिक ताकत उसी के पास टिकती है, जो वक्त के अनुसार राजनीति को समझकर उसे पहचानता है।’
नड्डा के इस बयान के क्या अर्थ निकाले जाएं, इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा है। यह कयास भी लगाए जा रहे हैं नड्डा का इशारा आखिर किसकी तरफ था। गौरतलब है कि जेपी नड्डा पीएम की रैली को लेकर कुछ दिनों से हिमाचल में ही टिके हुए हैं।
शिमला।। बिलासपुर में एम्स का शिलान्यास करने आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में बदलाव की खबर है। हिमाचल बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष ने जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री अब तीन अक्टूबर को एम्स के साथ-साथ दो और शिलान्यास करेंगे।
सत्ती ने कार्यक्रम में बदलाव की जानकारी देते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री ऊना के सलोह में बनने वाली ट्रिपल आईटी और कांगड़ा जिले के कंदरोड़ी में स्टील प्लांट का शिलान्यास भी करेंगे।
एमबीएम न्यूज नेटवर्क, हमीरपुर।। हिमाचल प्रदेश सरकार को करीब 12 करोड़ रुपये का चूना लगने की खबर है। खबर है कि शराब के पांच शराब ठेकेदारों ने यह काम किया है। इनके ऊपर आरोप है कि वे हिमाचल प्रदेश बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटिड (HPBCL) के गोदाम से करीब 12 करोड़ रुपये की शराब उठाकर निकल गए। इसे बेचकर उन्होंने अपनी जेब तो भर ली, मगर गोदाम से जारी सामान की पेमेंट नहीं हुई। इसका खुलासा सरकार द्वारा निर्धारित किए गए शराब कॉर्पोरेशन के खाते में पैसे जमा न होने से हुआ। अब पांचों ठेकेदारों को तलाशा जा रहा है।
कॉरपोरेशन ने इन पांचों आरोपी ठेकेदारों पर कोर्ट में केस लगा दिया है। करोड़ो की राशि का गोलमाल करने उपरांत ठेकेदार कहां चले गए, इसका कोई अता-पता नहीं है। पाठकों को बता दें कि इस बार प्रदेश में हिमाचल सरकार ने शराब के अपने गोदाम बनाए हुए हैं। हिमाचल प्रदेश बेवरेजेज कोर्पोरशन लिमिटिड ( HPBCL) के बैनर तले हर जिले में शराब के गोदाम हैं और हमीरपुर में ऐसा गोदाम बजूरी में है। शराब के ठेकेदार यहां से तभी माल उठा सकते हैं, जब वे सरकार के खाते में पैसे जमा करवाने का प्रमाण पत्र दिखाएं। मगर इस मामले में ऐसा कैसे हो गया कि पैसे आए बिना वे सामान ले गए, यह बड़ा सवाल है। इसका मतलब यही है कि उन्होंने फर्जी कागजात दिखाकर शराब हासिल की।
पुलिस अधीक्षक रमन कुमार मीणा ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि कंपनी की तरफ से मामला दर्ज हुआ है। उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार परचून लाइसेंस बिक्रेता को शराब तभी दी जाएगी यदि वह अग्रिम अदायगी करेगा। जब एचपीबीएल का वार्षिक लेखा परीक्षण किया गया तो पाया गया की 543.59 करोड़ की शराब परचून लाइसेंस धारक को दी गई । इसमे से 11,47,50,291 रुपये एचपीबीएल के खाता में नहीं आए है।
इन लाइसेंस धारक विक्रेता से नहीं आई रकम अशोक कुमार पुत्र कुलदीप सिंह गांव बांग बनियाल डा0 सुनहेत तहसील देहरा , अंकुश राणा पुत्र परवीन ठाकुर गांव भगोल डा0 पटलांदर तहसील सुजानपुर , अशोक कुमार पुत्र मान चंद गांव बही डा. भांबला तहसील सरकाघाट , रवि प्रकाश पुत्र थैनू राम गांव व डा0 डुड़ाणा तहसील नादौन, नरेंदर ठाकुर पुत्र संत राम गांव दलोली डा0 तलौरा तहसील घुमारबीं के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया है।
(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशिक की गई है)
शिमला।। एचआरटीसी में हाल ही में निकले परिचालक भर्ती के नतीजे पर सवाल उठाते हुए एक शख्स ने दावा किया है कि रिटन टेस्ट से गैरहाजिर रहे एक शख्स को परीक्षा में उत्तीर्ण बताया गया है। उसके इन आरोपों की पुष्टि नहीं पाई है। इस मामले को लेकर परिवहन मंत्री जीएस बाली का कहना है कि भर्ती में पूरी पारदर्शिता बरती गई है।
दरअसल मंडी के एक अभ्यर्थी का कहना है कि वह पीजी कॉलेज ऊना में एग्जाम देने गया था। जिस कमरे में वह एग्ज़ाम दे रहा था, वहां पर उनसे 10 नंबर पहले वाला रोलनंबर एग्जाम देने नहीं आया था, मगर एग्जाम में वह उत्तीर्ण है।
एक शख्स द्वारा किए गए इस दावे को लेकर परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा है कि रिजल्ट सही है और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई है। अमर उजाला के मुताबिक उनका कहना है कि इन आरोपों की छानबीन की जाएगी।
शिमला।। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, राजनीतिक पार्टियों के नेताओं की धुकधुकी बढ़ती जा रही है। सत्ता के लिए पांच साल से इंतज़ार कर रही बीजेपी और उसके कैडर में फिलहाल यही प्रश्न चल रहा है कि चुनाव से पहले सीएम कैंडिडेट घोषित होगा या नहीं। और अगर नहीं होता है तो चुनाव के बाद जीतने की स्थिति में बीजेपी की तरफ से सीएम कैंडिडेट कौन होगा।
यह सवाल और भी गहराता जा रहा है क्योंकि आचार सहिंता लगने और उसके बाद चुनाव होने में कुछ ही समय बचा है, लेकिन बीजेपी आलाकमान की चुप्पी से कुछ इशारा नहीं मिल पा रहा है। इस सिलसिले को तोड़ते हुए प्रधानमंत्री की रैली से पहले पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष नेता प्रेम कुमार धूमल ने एक इंटरव्यू में कहा है कि बीजेपी को मुख्यमंत्री पद का कैंडिडेट या प्रदेश में नेतृत्व का चेहरा साफ़ कर देना चाहिए।
अभी तक धूमल हर सवाल पर यही कहते थे कि पार्टी आलाकमान समय आने पर कैंडिडेट घोषित कर देगा। पर अब इस तरह से धूमल ने अपने अनुभव के आधार पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है कि अब समय नहीं बचा है, इसलिए पार्टी को सीएम कैंडिडेट घोषित कर देना चाहिए। धूमल का तर्क है कि पार्टी 1982 से लेकर 2012 तक ऐसा ही करती हुई आई है।
धूमल का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब प्रधानमंत्री मोदी की रैली जिला बिलासपुर में होने जा रही है और मुख्यमंत्री पद के सशक्त दावेदारों में चल रहे केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा 15 दिन से हिमाचल में ही खुद रैली की तैयारियों में जुटे हुए हैं। हालाँकि इससे पहले कई बार बड़े स्तर की रैलयां हुई हैं, मगर नड्डा इस तरह से इतने दिन हेल्थ मिनिस्ट्री का कार्य छोड़कर गृह प्रदेश में खुद नहीं डटे हैं।
धूमल के बयान को केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के उस बयान से अलग राय माना जा रहा है, जिसमें हाल ही में उन्होंने शिमला में कहा था कि प्रदेश में चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ा जाएगा। प्रदेश में कद्दावर नेता धूमल भी अन्य लोगों की तरह संशय में नजर आ रहे है। उन्होंने पांच साल में सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की कोशिश की है, इसलिए हो सकता है धूमल चाहते हों कि पार्टी उन्हें नेतृत्व का दायित्व सौंपे। और अघर पार्टी किसी और को सौंपना चाहती है, तो भी क्लियर करे ताकि इस आधार पर वह प्रदेश की राजनीति में अपनी भविष्य की भूमिका देखें।
पिछले चुनावों में पार्टी की हार के लिए भी धूमल ने गलत टिकट आबंटन को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा है कि पिछले चुनावों में ऐसे लोगों को टिकट दिए गए थे, जो जीतने की क्षमता नहीं रखते थे। यह इशारा सीधे-सीधे शांता समर्थकों की तरफ था क्योंकि कांगड़ा में पार्टी की दुर्गति के चलते भाजपा सत्ता से बाहर हो गयी थी और धूमल के समर्थक माने जाने वाले नेताओं ने बागी होकर हर सीट से ठीकठाक वोट लेकर चुनावी गणित को प्रभावित किया था।
सीएम का चेहरा घोषित करने की धूमल की राय पर पार्टी आलाकमान का फैसला क्या होता है, यह देखने वाली बात होगी। हालांकि मोदी लहर पर बीजेपी हाल ही में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश चुनाव में बिना सीएम दिए क्लीन स्वीप कर चुकी है। मगर हिमाचल में वह धूमल को दरकिनार करते हुए नया फेस देती है या अपने ही अजेंडे पर चलती है, यह सवाल भविष्य के गर्भ में हैं। मगर प्रदेश के इस वरिष्ठ नेता ने अपने अनुभव के आधार पर अपनी राय सामने रख दी है।
शिमला।। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के छोटे बेटे अरुण ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेस में जिस कथित स्टिंग का हवाला देकर मौजूदा सरकार और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर सेब के पौधों के आवंटन में गड़बड़ी का आरोप लगाया था, वह पूरा का पूरा मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जानकारी सामने आई है कि अरुण ने जिस कथित ‘स्टिंग’ का हवाला दिया था, कथित रूप से उसे अंजाम देने वाले पत्रकार पर एफआईआर हो गई है। इसके बाद अरुण जहां इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वही हिमाचल सरकार के डेप्युटी एडवोकेट जनरल विनय शर्मा ने इस मामले में शामिल पत्रकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
जानें, क्या है मामला आरोप लगे हैं कि विदेश से आए हुए सेब के पौधे लोगों को न देकर मुख्यमंत्री के बागीचे में लगा दिए गए और लोगों के नाम की फर्जी एंट्री की गई। इस संबंध में अरुण ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।
अब अरुण ने किया सरकार पर प्रहार पत्रकार पर एफआईआर दर्ज होने की खबर को लेकर अरुण ने अपनी फेसबुक पोस्ट पर लिखा है, “इससे ज़्यादा रोचक और इससे ज़्यादा शर्मनाक क्या होगा ? सरकार इस बात की जाँच की ग़रीब बागवानों का हक़ किसने मारा ताकि उन अधिकारियों को सज़ा मिले, आज एक FIR शक के बिनाह पर कि फ़लाँ आदमी ने ये स्टिंग मुख्यमंत्री के बाग़ीचे में किया कर दी। मैं माननीय मुख्यमंत्री को चुनौती देता हूँ, मेने पत्रकार वार्ता में आपका पर्दाफ़ाश किया की आपने ग़रीबों का हक़ कितनी बेशर्मी से मारा। अगर दम है तो मेरे ख़िलाफ़ FIR करें। शक के बिनाह पर किसी पर अपनी सरकार की धौंस दिखा कर आपके पाप नहीं धुलेंगे। दम है तो मेरे ख़िलाफ़ करें FIR !!!”
उन्होंने आगे लिखा है, “प्रदेश की पुलिस की भी हद देखिए, Trespassing का पर्चा एक महीने बाद कर रही है। लगता है हिमाचल पुलिस जेल के अंदर ज़्यादा ख़ुश रहती है !!! इस फ़र्ज़ी FIR करने वालों को भी जवाब देना पड़ेगा, ग़रीब का हक़ मारने वालों पर कारवाई करोगे या ग़रीबों को हक़ दिलाने वालों पर। इससे कहते हैं – अंधेर नगरी चौपट राजा सबका खाएगा रामपुर हो या क़ाज़ा.”
डेप्युटी एडवोकेट जनरल के सवाल
वहीं कथित रूप से इस स्टिंग को करने को लेकर जिस पत्रकार पर एफआईआऱ हुई है, उसे लेकर विनय शर्मा ने लिखा है, “हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी का डॉक्टर बताकर गेट फांद कर बगीचे में घुसे पत्रकार पर FIR दर्ज। D कंपनी का एजेंट बने इस पत्रकार ने गुड़िया मामले में भी 3 करोड़ की झूठी रिपोर्टिंग की थी जिसकी बजह से लोगों का गुस्सा भड़का ओर ठियोग थाने पर पत्थराव हुआ था। मैंने ओर पंजाब केसरी ने इस पत्रकार के झूठ का पर्दाफाश किया था। कल माननीय मुख्यमंत्री पर झूठे आरोपों की वीडियो और ऑडियो इस पत्रकार से बनबा कर D कंपनी के छोटे सपूत ने प्रेस कांफ्रेंस की थी। तब प्रदेश के प्रबुद्ध पत्रकारों ने इस पत्रकार की हरकत का अफसोस जताते हुए तीखे सवाल झड़े थे।अब साफ हो गया है कि गुड़िया मामले को किन लोगों के इशारे पर इस पत्रकार ने उछाला था।
विनय आगे लिखते हैं, “पत्रकारिता की आड़ में विपक्ष का एजेंट बने इस पत्रकार ने पत्रकारिता की सारी मर्यादाओं को तोड़ते हुए जिस तरह से एक गांव के भोले भाले माली को धमका कर जो कथित स्टिंग किया उसकी पोल भी खुल गयी और गुड़िया मामले की भी। क्या यह वहां भी कोई फ़र्ज़ी इंस्पेक्टर बनकर तो नहीं गुड़िया मामले की तहकीकात करता रहा? क्योंकि इस पत्रकार की सारी रिपोर्टिंग एक पार्टी को फायदा पहुंचाकर सरकार को बदनाम करने के लिए थी। माँ भीमाकाली ने इंसांफ कर दिया और विपक्ष की घिनोनी साजिश का भी पर्दाफाश हो गया।अब यह बात साफ हो गयी है कि इसका बॉस कोन था और इसका मकसद क्या था। देवभूमि को कलंकित करने वालों से देवता खुद ही निपट लेते हैं।’
मगर अरुण ने एक और ऑडियो पोस्ट किया है और दावा किया है इस बातचीत में शामिल महिला को भी प्लांट नहीं मिले हैं।
कुल मिलाकर मामला पेचीदा होता जा रहा है। हालांकि जनहित में पत्रकार स्टिंग कर सकते हैं मगर उसमें कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है। आने वाले कुछ दिनों में यह राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। फिलहाल अरुण धूमल और डीएजी विनय शर्मा के बीच आरोप चल रहे हैं। यह बताया जाना जरूरी है कि दोनों की राइवलरी का पुराना इतिहास रहा है।
शिमला।। बीते कुछ दिन शिमला जिले की राजनीति के लिए काफी हलचल भरे रहे। पहले से ही लग रहा था कि शिमला ग्रामीण सीट को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अपने बेटे के लिए छोड़ सकते हैं। उस दिशा में वीरभद्र एक कदम और बढ़ गए। ब्लॉक कमिटी ने प्रस्ताव पास करते हुए शिमला ग्रामीण सीट से विक्रमादित्य के लिए संगठन से टिकट की बात की। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने भी अपने बेटे की जमकर तारीफ करते तय कर दिया कि विक्रमादित्य शिमला रूरल सीट से ही दावेदार हैं। वैसे भी विक्रमादित्य की शिमला ग्रामीण में बढ़ रही सक्रियता भी इस ओर इशारे कर रही थी। मगर अब तो सब साफ हो गया है।
इसके साथ ही जो नया सवाल प्रदेश की राजनीति में उमड़कर आया, वह कि मुख्यमंत्री अगर शिमला ग्रामीण को छोड़ देंगे तो किस सीट का रुख करेंगे। इसमें अर्की का नाम भी आता रहा है। मगर ध्यान देने की बात है कि लोकसभा के लिए मंडी से कई बार सांसद चुने जा चुके वीरभद्र सिंह ने विधानसभा चुनाव में कभी भी जिला शिमला के बाहर की किसी सीट से चुनाव नहीं लड़ा। फिर वह रामपुर हो, जुब्बल-कोटखाई या फिर रोहड़ू या फिर शिमला ग्रामीण।
रोहड़ू और रामपुर तहसील उसी रियासत का हिस्सा रहे हैं, जहां कभी वीरभद्र सिंह के पूर्वजों का राज चला करता था। मगर दोनों सीटें रिजर्व हुईं तो वीरभद्र सिंह शिमला ग्रामीण से लड़ने आए थे। रही बात जुब्बल-कोटखाई की, यहां से उनका अनुभव कड़वा रहा था।
तो फिर अगला चुनाव वह कहां से लड़ेंगे? इस सवाल के जवाब का इशारा मिला शिमला से ही। वीरभद्र सिंह ने शिमला जिले के ठियोग-कुमारसैन में शिलान्यासों और उद्घाटनों की झड़ी लगा दी। इस मौके पर जिस चीज़ ने हैरान किया, वह यह कि ठियोग कुमारसैन से विधायक और वीरभद्र सरकार में मंत्री विद्या स्टोक्स ने मुख्य कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। स्टोक्स नारकंडा में कुछ देर के लिए मुख्यमंत्री के साथ नजर आई थीं, मगर कुमारसैन में रैली और मुख्य कार्यक्रम से नदारद थीं। इस रैली में विक्रमादित्य भी थे। वीरभद्र ने अपने बेटे की यहां जमकर तारीफ की। ध्यान देने की बात यह है कि ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष और उनकी टीम भी इस रैली में नहीं थी। विद्या स्टोक्स और वीरभद्र के पुराने मतभेद किसी से छिपे नहीं हैं, मगर मुश्किल समय में दोनों नेता साथ खड़े रहे हैं। ऐसे में उनका सीएम के इस दौरे में न होना हैरान करने वाला रहा।
सूत्रों की मानें तो वीरभद्र सिंह ने शिमला ग्रामीण को बेटे के लिए छोड़कर ठियोग कुमारसैन से लड़ने का विचार बहुत पहले से ही सोचकर रखा था। क्योंकि माना जा रहा था कि उम्र के इस पड़ाव पर विद्यो स्टोक्स चुनाव नहीं लड़ेंगी। मगर जैसे ही वीरभद्र की रणनीति की भनक स्टोक्स को साल भर पहले लगी थी, उन्होंने कह दिया था कि मैं चुनाव लड़ूंगी। हालांकि स्टोक्स के करीबियों का कहना है कि मैडम स्टोक्स इस सीट से अपने किसी ख़ास सिपहसालार को मौका देना चाहती हैं। और अगर वह ऐसा नहीं कर पाती हैं तो कुछ चुनावी मैदान में कूदेंगी। मगर ऐसा करना उनकी उम्र के लिहाज़ से आसान भी नज़र नहीं आता। पिछली सीट पर बहुत कम अंतर से जीत पाई थीं।
स्टोक्स का अपनी विधानसभा में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से इस तरह दूरी बनाना कई अटकलों और सवालों को जन्म दे रहा है। इसका यह भी मतलब निकल रहा है कि बेटे के लिए शिमला ग्रामीण छोड़ने की सार्वजानिक घोषणा के बाद वीरभद्र ने यह तय कर लिया है कि व ठियोग कुमारसैन से ही लड़ेंगे और इससे मैडम स्टोक्स नाराज मानी जा रही हैं।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह
वीरभद्र सिंह के करीबी और तथाकथित ‘ऊपरी हिमाचल’ से ही सबंधित कांग्रेस के एक युवा नेता ने ‘इन हिमाचल’ को बताया कि वीरभद्र सिंह इस मामले में पूरी तैयारी कर चुके है। और अगर पार्टी के अंदर के अंदर के उनके विरोधियों ने उनपर दबाब बनाया कि परिवार से एक ही व्यक्ति को टिकट मिलेगा, तब भी वीरभद्र सिंह ने रणनीति तैयार रखी है। इस रणनीति के तहत वह शिमला ग्रामीण और ठियोग कुमारसैन, दोनों सीटों से पर्चा भरेंगे। दोनों सीटें जीत जाने की स्थिति में ठियोग कुमारसैन सीट को विक्रमादित्य के लिए छोड़ेंगे।
उक्त नेता ने बताया कि फिलहाल तो वीरभद्र सिंह बेशक विक्रमादित्य की पैरवी शिमला ग्रामीण से कर रहे है, मगर लंबी राजनीतिक पारी के लिए वह इस सीट को बेटे के लिए सेफ नहीं मानते। इसलिए ठियोर कुमारसैन को अपने नाम करने की रणनीति के तहत वह अगले (संभवत: 2022 के) चुनाव में विक्रमादित्य को शिमला ग्रामीण से ठियोग कुमारसैन शिफ्ट करने की प्लानिंग कर चुके हैं।
हालांकि वीरभद्र सिंह के अर्की से हटने का कारण बीजेपी की वह रणनीति भी बताई जा रही है, जिसके तहत केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को बीजेपी अर्की सीट से चुनाव उनके खिलाफ लड़वाने की फिराक में है। ऐसे में वीरभद्र सिंह इस वक़्त परिवार के लिए कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। संयोगों पर भरोसा रखने वाले मुख्यमंत्री अपने राजनीतिक जीवन के इतिहास को जारी रखते हुए शिमला जिला से बाहर कहीं भी चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं है। हालांकि अगर वह किन्नौर सीट से लड़ते हैं, तब भी उनकी जीत लगभग निश्चित ही है। मगर वीरभद्र सिंह की पूरी रणनीति इस समय कांग्रेस के लिए सीटों की गिनती बढ़ाने पर नहीं बल्कि बेटे विक्रमादित्य सिंह के लिए ऐसी राजनीतिक नींव रखने की है, जो उनके राजनीतिक करियर को लंबा बनाए।
ऊपरी शिमला में दशकों पहले से एक नारा चलता रहा है कि सत्यानंद स्टोक्स हिमाचल में सेब लेकर आए और विद्या स्टोक्स हिमाचल प्रदेश की राजनीति में वीरभद्र को लेकर आईं। अब वीरभद्र अगर ठियोग कुमारसैन से लड़ते हैं तो यह नारा ठियोग कुमारसैन के लोगों की जुबान पर फिर चढ़ सकता है। मगर हो सकता है कि इस बार वीरभद्र को लाने में मैडम स्टोक्स की मर्जी न हो।
हमीरपुर।। अक्सर मौजूदा वीरभद्र सरकार पर आरोप लगाने के लिए पहचाने जाने वाले ठाकुर अरुण सिंह ने दो पन्नों की एक लिस्ट अपने फेसबुक पेज पर डाली है, जिसमें कथित रूप से उन लोगों के नाम हैं जिन्हें सेब के पौधे सिर्फ कागजों में मिले हैं। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के छोटे बेटे और बीजेपी पदाधिकारी अरुण ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके विदेशों से मंगवाए गए सेब के पौधों के आवंटन में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। गुरुवार को उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर लिस्ट डाली है, जिसमें 50 लोगों के नाम हैं।
फेसबुक पर इस लिस्ट को शेयर करते हुए अरुण ने लिखा है- “यह रामपुर के लोगों की सूची है, जिन्हें विदेश से मंगाए गए सेब के पौधे केवल काग़ज़ों में मिले। इनके पौधे कोई और ही खा गया। इससे शर्मनाक क्या होगा ?”
अरुण ने बुधवार को कहा था- ‘केंद्र की मिशन फॉर इंटिग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हार्टिकल्चर (एमआईडीएच) योजना में बागवानी विभाग ने 25 हजार सेब और चार हजार से अधिक नाशपाति के पौधे विदेशों से आयात किए। जनवरी में 250 रुपये प्रति पौधा एक बागवान को अधिकतम 50 पौधे बेचे गए। मगर विभाग ने जिन किसानों को पौधे बेचने की लिस्ट जारी की है, उनमें अधिकांश को पौधे मिले ही नहीं हैं।’