हदें पार, नीरज भारती ने शेयर किया अश्लील वीडियो

शिमला।। सोशल मीडिया पर गालियां देने, अभद्र टिप्पणियां करने, धमकाने और मर्यादाहीन पोस्ट्स शेयर करते रहे कांग्रेस के ज्वाली से विधायक और सीपीएस एजुकेशन रहे नीरज भारती ने हदें पार कर दी हैं। उन्होंने फेसबुक टाइमलाइन पर इक अनसेंसर्ड आश्लील क्लिप शेयर कर दी है। इसमें दिख रहे शख्स को हिमाचल का एक वरिष्ठ नेता बताया गया है।

 

वीडियो में टेक्स्ट है- प्रेम लीला में डूबे सुखराम शर्मा। वीडियो में शुरू में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे पण्डित सुखराम की तस्वीरें हैं और फिर नरेशन में कुछ आरोप लगाए जा रहे हैं। आगे इसमें एक महिला-पुरुष के अंतरंग दृश्य हैं।

 

इसे शेयर करते हुए भारती ने लिखा है- “क्या करें साला शरीर तो बूढ़ा हो जाता है पर अरमान जो जवान रहते हैं….. 😂 वियाग्रा का सही इस्तेमाल….. 😀”

इससे ठीक पिछली पोस्ट में उन्होंने सुख राम के बेटे और मंडी के विधायक अनिल शर्मा पर निशाना साधा है। यही नहीं, भारती ने इस खबर को छापने पर ‘इन हिमाचल’ के प्रति भी अपमानजनक भाषा इस्तेमाल की है।

In Himachal पर भारती की अपमानजनक पोस्ट

यह पहला मौका नहीं है जब भारती ने कुछ अमर्यादित किया है। अक्सर वह अभद्र पोस्ट्स डालते हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र और भारती के पिता कह चुके हैं- नीरज कुछ गलत नहीं कर रहा। मगर अब तो सब हदें पार हो चुकी हैं।

बीजेपी में शामिल होते ही ‘भ्रष्टाचारी’ नहीं रहे अनिल शर्मा?

शिमला।। कांग्रेस सरकार में मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे अनिल शर्मा ने बीजेपी जॉइन कर ली है। मंडी से विधायक अनिल शर्मा आज भले ही बीजेपी के दुलारे बन गए हैं, मगर दिसंबर 2016 में बीजेपी ने उनके ऊपर कई घोटाले करने का आरोप लगाया था और उन्हें ‘चोर’ कहा था। बीजेपी ने जो चार्जशीट राज्यपाल को सौंपी थी, उसे ‘अली बाबा और चालीस चोर’ नाम दिया गया था। इसमें बीजेपी ने मुख्यमंत्री, मंत्रियों, सीपीएस और अन्य नेताओं पर आरोप लगाए थे।

 

जानें, इस चार्जशीट में क्या आरोप लगाए थे बीजेपी ने अनिल शर्मा पर:

 

पहला आरोप: अनिल शर्मा ने विधानसभा चुनाव के दौरान हलफनामा देकर मंडी स्थित होटल पांच साल से बंद होटल और 1970 में लगाए सेब के बगीचे से करोड़ों रुपये की आमदनी दर्शाई है।

दूसरा आरोप: तीन मंजिल की मंजूरी होने के बावजूद मंत्री ने अपने होटल मैफेयर को छह मंजिल तक बना लिया। विजिलेंस द्वारा जांच के बावजूद जांच से बचने के लिए होटल का नाम बदलकर रिजेंट पाम रख दिया।

तीसरा आरोप: मंडी के राजमहल जमीन के सौदे में मंत्री के खाते से लाखों रुपये संजय कुमार को भेजे गए। बेनामी सौदा खूब राम के नाम से हुआ जिसका सूत्रधार संजय था।

चौथा आरोप: पशुपालन विभाग में दवाओं की खरीद के लिए जिन 30 फर्मों के साथ रेट कांट्रेक्ट किया गया उनमें से 15 को सरकार व विभाग ने ब्लैलिस्ट कर रखा है। भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्री ने इस संबंध में प्रदेश सरकार को कापी दी लेकिन अब भी सरकार महंगी दरों पर दवाएं खरीद रही है।

इन आरोपों के बाद अनिल शर्मा ने मानहानि का केस करने की बात कही थी और यह भी कहा था कि अगर एक भी आरोप साबित होता है तो वह राजनीति छोड़ देंगे। मगर अब उन्होंने आरोप लगाने वाली पार्टी चुन ली है। इस आरोपपत्र को बीजेपी ने तथ्यों पर आधारित बताया था और कहा था कि सत्ता में आने पर जांच होगी और दोषी सलाखों के पीछे होंगे।

ऐसे में चर्चा जारी है कि क्या इन दिनों ‘हिसाब मांगे हिमाचल’ अभियान चला रही बीजेपी ने अनिल शर्मा से भी हिसाब मांगा है या बीजेपी में आने के बाद सब पवित्र हो जाता है?

ठियोग सर्किट हाउस में हुई पार्टी पर उठे गंभीर सवाल

शिमला।। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शुक्रवार को ठियोग से चुनाव लड़ने का ऐलान किया और उसी शाम यहां के सर्किट हाउस में जो हुआ, उसका वीडियो वायरल हो गया है। इस वीडियो में कुछ लोग शराब पीकर नाचते-गाते नजर आ रहे हैं। इनमें कांग्रेस के पदाधिकारियों से लेकर पुलिस अधिकारी और अन्य सरकारी अधिकारी भी बताए जा रहे हैं। आरोप है कि सर्किट हाउस में वीरभद्र सिंह को जिताने की योजना बनाई जा रही थी मगर अब मामले खुलने पर लीपापोती की कोशिश हो रही है। (वीडियो आखिर में है)

जैसे ही यह वीडियो ‘इन हिमाचल’ के पास आया, माकपा नेता राकेश सिंघा से संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि इस वीडियो को राकेश गोलू ने बनाया है और इस वीडियो को ध्यान से देखें तो पता चलता है कि कौन-कौन से लोग मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि जैसे ही मुझे इस बात की जानकारी मिली की सर्किट हाउस में ऐसा आयोजन हो रहा है तो सबसे पहले एसडीएम को कॉल की, मगर इसमें कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने डीसी को भी सूचित किया मगर अब तक कोई ऐक्शन नहीं हुआ है।

राकेश सिंघा ने कहा कि इस मामले में चुनाव आयोग को स्वत: संज्ञान लेना चाहिए, मगर अब ऐसा लग रहा है कि लीपापोती की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि अब यह कहा जा रहा है कि रॉटरी क्लब की मीटिंग थी, मगर ऐसा नहीं था। उन्होंने कहा, “इसमें डीएसपी ठियोग थे, इलाके के इंपॉर्टेंट लोग थे और कांग्रेस के ब्लॉक प्रेजिडेंट ब्रह्म नंद शर्मा भी थे। अगर वीडियो को स्टडी किया जाएगा तो पता चल जाएगा कि कौन-कौन थे।”

ठियोग कांग्रेस के ब्लॉक प्रेजिडेंट ब्रह्मनंद शर्मा

सिंघा ने कहा कि वह प्रेस कॉन्फ्रेंस करना चाहते थे मगर उन्हें सर्किट हाउस में घुसने नहीं दिया गया, मगर शाम को इसके वीडियो देखकर वह शॉक्ड रह गए। ऐसे में उन्होंने इसका वीडियो डीसी को भेजा है।

सिंघा ने कहा कि भारत में चुनाव आयोग स्वायत्ता और निष्पक्ष संस्थान है, ऐसे में उन्हें न्याय की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अगर न्याय नहीं मिलता है तो आगे भी लड़ाई जारी रहेगी।

कांग्रेस की इलेक्शन कमेटी की कमान सुखविंदर सुक्खू को

नई दिल्ली।। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए इलेक्शन कमेटी, को-ऑर्डिनेशऩ कमेटी, कैंपेन कमेटी, पब्लिसिटी कमेटी, मेनिफेस्टो कमेटी और डिसिप्लिनरी कमेटी का ऐलान कर दिया है। इलेक्शन कमेटी के चेयरमैन सुक्खू होंगे और वीरभद्र मेंबर। इस कमेटी में कुल 15 सदस्य होंगे।

नीचे लिस्ट देखें, कौन किस कमेटी में है। अगर आप मोबाइल इस्तेमाल कर रहे हैं और उसमें नाम साफ नहीं दिख रहे तो पेज के आखिर में जाकर पीडीएफ डाउनलोड करें

 

 

Press Release on Himachal Pradesh 13-10-2017 (1)

 

 

In Himachal की खबर पर मुहर, ठियोग से लड़ेंगे वीरभद्र

शिमला।। मुख्यमंत्री वीरभद्र पिछली बार शिमला रूरल सीट से विधायक चुने गए थे, मगर इस बार उन्होंने वह सीट अपने बेटे विक्रमादित्य के लिए छोड़ दी है। जहां पिछले दिनों विक्रमादित्य कह रहे थे कि एक परिवार से एक ही शख्स को टिकट मिलना चाहिए, उसके उलट मुख्यमंत्री वीरभद्र ने अपने लिए नई सीट चुन ली है और वह है- ठियोग। ठियोग से कांग्रेस की वरिष्ठ मंत्री विद्या स्टोक्स विधायक हैं, मगर इस बार वह निजी कारणों से चुनाव नहीं लड़ रही हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री ने सिर्फ यह कहा है कि वह ठियोग से चुनाव लड़ेंगे, बल्कि यह जानकारी भी सामने आ गई है कि वह नामांकन कब दाखिल करेंगे।

 

जिस वक्त ये कयास लगाए जा रहे थे कि बेटे के लिए शिमला रूरल छोड़कर खुद वीरभद्र कहां लड़ेंगे, उस दौरान अर्की से लेकर चंबा तक के कयास लगाए जा रहे थे। मगर ‘इन हिमाचल’ 28 सितंबर को राजनीतिक विश्लेषण पेश करते हुए कहा था कि वीरभद्र की नजरें ठियोग सीट पर हैं (यहां क्लिक करके पढ़ें)। और इस पर मुहर लगी है और उन्होंने यहीं चुनाव लड़ने की बात कही है। वह 20 अक्तूबर को सुबह 11 बजे नामांकन पत्र दाखिल करेंगे।

 

मगर कहां गया ‘अनुशासन’?
इस बीच ठियोग में कांग्रेस के एक वर्ग में दबे स्वर में कानाफूसी चल रही है। अभी प्रदेश में कहीं पर भी उम्मीदवारों के नाम की घोषणा नहीं हुई है और कांग्रेस ने इस बार एक समयसीमा के तहत टिकट के चाहवानों को आवेदन करने के लिए कहा था। ठियोग से भी 25000 रुपये जमा करवाते हुए कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने टिकट के लिए आवेदन किया था, मगर उनके नाम पर चर्चा हुए बगैर ही मुख्यमंत्री ने ऐलान कर दिया कि वह खुद यहां से चुनाव लड़ेंगे और फ्लां दिन नामांकन भरेंगे। ऐसे में टिकटार्थियों में हल्का असंतोष देखा जा रहा है। एक टिकटार्थी ने कहा कि हम पार्टी के साथ ही चलेंगे और पार्टी के उम्मीदवार को ही जिताएंगे, मगर नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।

 

कार्यकर्ताओं में नाराज़गी
मुख्यमंत्री के इस कदम का संगठन में गलत संदेश जाने की आशंका जताई जा रही है। उदाहरण के लिए हर सीट में अगर हर कोई बिना पार्टी की तरफ से टिकटों का आधिकारिक ऐलान हुए खुद को ही कैंडिडेट घोषित कर दे तो असहज स्थिति हो जाएगी। कांग्रेस के अंदर वीरभद्र का विरोधी धड़ा नाराजगी जताता रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री, जो एक तरफ खुद बेटे के टिकट लिए पैरवी के लिए अपनी सीट छोड़कर किसी अन्य सीट से लड़ने का ऐलान कर चुके हैं, उनके लिए आने वाले समय में पार्टी के अंदर सवाल खड़े हो सकते हैं।

ED ने अटैच की मुख्यमंत्री वीरभद्र के बेटे विक्रमादित्य की संपत्ति

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह की दो कंपनियों की संपत्ति जब्त करने की खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के मनी लॉन्ड्रिंग केस में की गई है। इस मामले में मुख्यमंत्री आरोपी हैं। ईडी ने शुक्रवार देर शाम यह कार्रवाई की है।

 

जिन कंपनियों की संपत्ति जब्त की गई है, उनका नाम मैसर्ज तारिणी इंटरनैशनल और तारिणी इन्फ्रा दमनगंगा प्रॉजेक्ट है और यह 5.6 करोड़ रुपये की संपत्तियां हैं। इससे पहले दिल्ली के फार्म हाउस को भी ईडी ने जब्त किया था। चुनावी माहौल में हुई इस कार्रवाई को लेकर ईडी के अधिकारियों का कहना है कि केस पुराना है और इसमें पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है।

 

क्या है मामला
ईडी को कथित तौर पर जांच के दौरान जानकारी मिली थी कि वकामुल्ला चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री को 5 करोड़ 9 लाख रुपये दिए थे। यह रकम मुख्यमंत्री के पारिवारिक सदस्यों में बांटी गई थी। यह रकम कथित तौर पर तीन खातों के जरिए सीएम की फैमिली के पास पहुंची थी। बेटे और बेटी के नाम पर 60 लाख रुपये की एफडी खोली गई थी और शेयर खरीदे गए थे।

 

 

इस बार हवा-हवाई घोषणापत्र नहीं बना सकेंगी पार्टियां

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में होने जा रहे चुनावों के मद्देनजर आचार संहिता लागू हो गई है। इस बार चुनाव आयोग ने काफी स्पष्टता से बातें रखी हैं कि राजनेताओं और राजनीतिक पार्टियों का आचरण कैसा होना चाहिए। इन्हीं में से एक है घोषणापत्र। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश स्पष्ट करते हैं कि पार्टियां हवा-हवाई घोषणा पत्र नहीं बना सकतीं।

 

इस बार चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता में राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणापत्रों को भी रखा है। राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्रों में जो वादे करेंगे, उन्हें बताना होगा कि उइन वादों को कैसे पूरा किया जाएगा। यह भी बताना होगा कि इन्हें पूरा करने के लिए फाइनैंस का इंतज़ाम यानी वित्तीय व्यवस्था कैसे की जाएगी।

 

आमतौर पर देखा जाता रहा है कि पार्टियां अपने घोषणा पत्रों में बड़े-बड़े वादे कर देती हैं और बाद में वे पूरे नहीं होते। ऐसे में अगर कोई पार्टी किसी बड़े प्रॉजेक्ट या योजना का वादा करेगी तो उसे बताना होगा कि वह कैसे व्यावहारिक होगी और फंड कहां से आएगा।

 

हिमाचल में वोटिंग 9 नवंबर को होगी और वोटों की गिनती 18 दिसंबर होगी। विस्तृत जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।

CM, मंत्री या सत्ताधारियों की इन हरकतों पर नजर रखें

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को लेकर जो आदर्श आचार संहिता लागू हुई है, उससे कई तरह के काम नहीं किया जा सकेंगे। ऐसी व्यवस्था इसलिए की जाती है, ताकि सत्ता में रहे लोग सरकारी पैसे और मशीनरी को चुनाव प्रचार में इस्तेमाल न कर लें। अगर कोई इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता है तो चुनाव आयोग के पास उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का अधिकार है।

 

ध्यान से पढ़ें, ताकि आप किसी को ऐसा करते हुए देखें तो चुनाव आयोग को सूचना दे सकें:

      • बिना अनुमति के लाउड स्पीकर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता
      • सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले नहीं होंगे
      • किसी तरह का उद्घाटन और शिलान्यास नहीं होगा
      • फाइनैंशल या ऐसी अन्य अनाउंसमेंट्स पर भी रोक
      • मंत्री और मुख्यमंत्री कोई ऐलान नहीं कर सकते
      • मंत्रिमंडल की बैठक नहीं हो सकती
      • सत्ताधारी पार्टी अपनी सरकार की उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार सरकारी खर्च से नहीं कर सकती
      • उपलब्धियों का बखान करने वाले होर्डिंग, पोस्ट या अन्य प्रचार सामग्री हटाई जाएगी
      • सरकारी क्वॉर्टर गेस्ट हाउस या रेस्ट हाउस वहां रह रहे सत्ताधारियों को खाली करने होंगे
      • मुख्यमंत्री या मंत्री चुनावी दौरों के लिए सरकारी गाड़ी इस्तेमाल नहीं कर सकते
      • वे निजी कामों के लिए भी ऐसा नहीं कर सकते, सरकारी गाड़ी से ऑफिस और घर के बीच आ-जा सकते हैं
    • पढ़ें: इस बार हवा-हवाई घोषणापत्र नहीं बना सकेंगी पार्टियां

अगर आप ऐसा कुछ होते हुए देखते हैं, अगर मुख्यमंत्री या किसी मंत्री को नियमों को तोड़ते देखते हैं तो चुनाव आयोग को वेबसाइट के जरिए या फोन करके सूचना दे सकते हैं। इसके लिए आप ऐप्लिकेशन के जरिए मोबाइल फोन से भी शिकायत कर सकते हैं।

 

चुनाव आयोग का ऐप डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

हिमाचल में 9 नवंबर को होगी वोटिंग, 18 दिसंबर को नतीजे

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में चुनाव का शेड्यूल जारी हो गया है। वोटिंग 9 नवंबर को होगी और वोटों की गिनती 18 दिसंबर होगी। चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव का पूरा शेड्यूल जारी किया है। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश में आचार संहिता लागू हो गई है।

यह है शेड्यूल
16 अक्तूबर से 23 अक्तूबर तक नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकते हैं। 24 अक्तूबर तक नामांकन पत्रों की जांच होगी। नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख 26 अक्तूबर होगी। उम्मीदवार चुनाव प्रचार पर 28 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे। 9 नवंबर को वोटिंग के बाद 18 दिसंबर को वोटों की गिनती के बाद नतीजे आएंगे।

चुनाव आयोग ने कहा कि वोटिंग और नतीजों के बीच इतना फर्क इसलिए रखा गया है क्योंकि गुजरात में भी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में हिमाचल के नतीजे कहीं गुजरात चुनाव पर असर न डालें, इसलिए डेट बाद की रखी गई है। चुनाव आयोग ने कहा है कि जल्द ही गुजरात विधानसभा चुनाव के शेड्यूल को भी जारी कर दिया जाएगा।

 

उम्मीद जताई जा रही थी कि हिमाचल के साथ-साथ गुजरात चुनाव का भी शेड्यूल जारी होगा, मगर चुनाव आयोग ने ऐसा नहीं किया। इसके पीछे आयोग ने कानूनी वजह बताई।

 

वीवीपैट का इस्तेमाल
हिमाचल की सभी 68 विधानसभा सीटों के सभी बूथों पर वीवीपैट का इस्तेमाल होगा। हिमाचल ऐसा पहला राज्य होगा, जहां पर सभी बूथों पर वीवीपैट की व्यवस्था होगी। इससे आप देख सकेंगे कि आपने किसे वोट दिया है। चुनाव आयोग ने कहा कि काउंटिंग हॉल की वीडियोग्राफी भी होगी।

 

देखें लाइव वीडियो:

अगर आप लाइव स्ट्रीमिंग को अपने फोन पर नहीं देख पा रहे तो यहां क्लिक करें

गुड़िया केस की हालत भी कहीं आरुषि केस जैसे न हो जाए

शिमला।। आरुषि तलवार हत्याकांड को अगर देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री कहा जाए तो गलत नहीं होगा। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरुषि और हेमराज हत्याकांड में तलवार दंपती को बरी कर दिया। यानी पूरा मामला फिर वहीं पहुंच गया, जहां से यह चल था। नौ साल बाद नतीजा सिफर।

 

पुलिस ने दी थी यह थ्योरी
आज से नौ साल पहले 15-16 मई, 2008 की रात को नोएडा के जलवायु विहार के डॉक्टर राजेश तलवार और नुपुर तलवार की बेटी आरुषि की हत्या हो गई। पुलिस ने जांच की तो शक हेमराज पर गया। उस नौकर पर जो गायब था। मगर उसका शव छत से मिला तो मामला उलझ गया। डीजीपी बृजलाल ने हत्याकांड को सुलझाने का दावा करते हुए कहा कि डॉक्टर तलवार और उनकी एक फैमिली फ्रेंड में संबंध थे और इसकी जानकारी आरुषि को थी। इस दौरान वह नौकर हेमराज से प्रगाढ़ संबंध में आ गई और यह बात तलवार को रास नहीं आई। उसने पहले हेमराज की हत्या की और फिर आरुषि की।

 

सीबीआई के पास पहुंचा मामला
पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठे तो मायावती सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को दे दी। सीबीआई ने मामले की जांच के दौरान घरेलू नौकरों पर शक जाहिर की। सीबीआई ने कहा कि वारदात को खुखरी जैसे हथियार से अंजाम दिया गया। फिर तलवार के नौकर कृष्णा से पूछताछ हुई और एक महीने बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। फिर सीबीआई ने एक के बाद एक कुछ और नौकर गिरफ्तार किए। इनके साइंटिफिक टेस्ट के बाद सीबीआई ने दावा किया हत्याकांड में नौकरों का हाथ है, न कि तलवार दंपति का। सीबीआई सिर्फ साइंटिफिक सबूतों की बात करती रही मगर उसे अन्य सबूत नहीं मिले। हथियार भी बरामद नहीं हुआ। ऐसे में नौकरों को जमानत मिल गई।

 

नौकरों के बाद तलवार दंपती पर शक
सीबीआई ने बाद में रुख बदला औऱ कहा कि परिस्थितिजन्य सबूत ऐसा इशारा करते हैं मगर अन्य सबूत उनके खिलाफ नहीं जुड़ते। ऐसे में सीबीआई ने स्पेशल कोर्ट के सामने क्लोजर रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि मामले को बंद कर दिया जाए। मगर कोर्ट ने कहा कि जो तथ्य आपने पेश किए हैं, वे काफी  हैं। तलवार दंपति को समन जारी हुआ। अदालत ने तलवार दंपती को आरुषि और हेमराज की हत्या में उम्रकैद की सजा सुनाई। तलवार दंपती ने हाई कोर्ट में चुनौती दी और फिर हाई कोर्ट ने बुधवार को दोनों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि परिस्थितियों और रिकॉर्ड में दर्ज साक्ष्यों के मुताबिक तलवार दंपती को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

गुड़िया केस में सीबीआई हवा में मार रही तीर
सीबीआई ने आरुषि केस में जिन साइंटिफिक सबूतों (नार्को आदि) के आधार पर सबसे पहले नौकरों पर शक जताया था, उनके आधार पर सजा नहीं हो सकती। वे जांच को आगे बढ़ाने में मददगार साबित हो सकते हैं मगर सजा दिलाने में मान्य नहीं होते। उनकी मदद जांच को सही दिशा दिलाने के लिए ली जाती है। ऐसे में गुड़िया केस में भी सीबीआई हाई कोर्ट में बार-बार यही कर रही है कि उसकी जांच साइंटिफिक सबूतों पर आधारित है। मगर जैसा कि आरुषि केस में इन साइंटिफिक सबूतों की मदद से सीबीआई  नौकरों के खिलाफ कुछ नहीं ढूंढ पाई थी, आशंका है कि कहीं वैसा ही गुड़िया केस में भी न हो।

 

वैसे भी सीबीआई के पास ऐसे कई केस है, जिनकी जांच कई सालों से चल रही है और नतीजा निकल नहीं रहा। न तो सीबीआई क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर रही है न सबूत पेश कर रही है न मामले को हल करने का दावा कर रही है।