भोटा के इस मंदिर में लगा है महिलाओं को हिदायत देता बैनर

हमीरपुर।। भोटा के जंगलों में बाबा बालकनाथ का एक मंदिर है। माना जाता है कि कुछ समय तक बाबा बालकनाथ ने यहां रुककर ध्यान लगाया था। मगर इस मंदिर में जो खास बात यह है कि यहां पर एक बैनर लगाया गया है। इसमें लिखा गया है- ‘मंदिर में महिलाओं से निवेदन है कि बाबा जी की गुफा से दूरी बनाए रखें। इसमें ही आपकी और हमारी भलाई है।’

इसके अलावा इस बैनर में आगे लिखा गया है- प्राचीन परंपरा ही हमारा धर्म है, इस परंपरा को बनाए रखें। यह मंदिर झंडे का रिढ़ा में है और हाल ही में इसका जीर्णोद्धार हुआ है। (Image: Ankush Rajput)

गुफा में प्रवेश पर रोक क्यों?
पिछली दिनों पूरे देश में इस बात को लेकर बहस छिड़ी थी कि जिन मंदिरों में महिलाओं का प्रवेश वर्जित बताया जाता है, उनमें महिलाओं को जाकर पूजा करने का अधिकार होना चाहिए या नहीं। उस समय हिमाचल प्रदेश के बाबा बालकनाथ के दियोटसिद्ध स्थित मंदिर को लेकर भी चर्चा छिड़ी थी।

दरअसल यहां मंदिर में तो सभी प्रवेश कर सकते हैं मगर बाबा की गुफा के सामने एक खास चबूतरा सा बनाया गया है जिसपर चढ़कर बाबा की गुफा के लेवल पर पहुंचकर सामने से दर्शऩ किए जा सकते हैं। यह व्यवस्था महिलाओं के लिए की गई है जबकि पुरुष सीधे गुफा तक जा सकते हैं।

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आधिकारिक रूप से रोक नहीं
उस समय जब सोशल मीडिया में सवाल उठे तो स्पष्ट किया गया था कि मंदिर में गुफा तक जाने पर किसी भी तरह की आधिकारिक रोक नहीं है, बस परंपराओं का सम्मान करते हुए महिलाएं स्वयं वहां नहीं जाती हैं। हालांकि बाद में एक महिला लेक्चरर अपने बच्चों के साथ गुफा तक जाकर दर्शन करके आई थीं और यह खबर पूरे मीडिया में सुर्खियां भी बनी थी।

 

महिलाओं के गुफा पास न जाने की वजह
इस तरह की परंपरा बाबा के दियोटसिद्ध वाले मंदिर की गुफा को लेकर ही है, अन्य सभी मंदिरों में इस तरह की रोक नहीं है। वैसे भी हिमाचल प्रदेश में हर आंगन में बाबा की स्थापना की जाती है और हर शुभ कार्य में उनका पूजन होता है और महिलाएं भी पूजा करती हैं।

दियोटसिद्ध मंदिर में ऐसी व्यवस्था का कारण यह बताया जाता है कि बाबा ब्रह्मचारी थे और उनके रहते महिलाओं का गुफा तक आना निषिद्ध था। ऐसे में उनके अंतर्ध्यान होने के बाद भी इस परंपरा का निर्वहन किया जाता रहा है। अन्य मंदिरों पर यह नियम लागू नहीं होता।

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निजी आवास की सुरक्षा बढ़ी

शिमला।। चुनाव से ठीक पहले पिछली वीरभद्र सरकार पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुविधाएं बढ़ाने का प्रस्ताव लाने वाली थी। जब इसकी आलोचना हुई थी प्रस्ताव को वापस ले लिया गया था। अब सरकार बदल चुकी है और प्रदेश में बीजेपी की सरकार है। मगर इस सरकार ने एक महीने के अंदर ही पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की सुरक्षा के लिए उनके निजी आवास होली लॉज की सुरक्षा दोगुनी कर दी है।

अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों को यह सुविधा नहीं
पूर्व मुख्यमंत्रियों प्रेम कुमार धूमल और शांता कुमार के आवास पर भी एक हेड कॉन्स्टेबल और चार कॉन्स्टेबल तैनात है और अब तक वीरभद्र के आवास पर भी एक हेड कॉन्स्टेबल और चार कॉन्स्टेबल तैनात थे। मगर अब उनके आवास पर चार और जवान तैनात कर दिए गए हैं। अब वहां कुल दस जवान तैनात हैं यानी एक हेड कॉन्स्टेबल और नौ कॉन्स्टेबल।

क्या है लॉजिक
अभी तक सामने आई जानकारी के मुताबिक सुरक्षा में हुई बढ़ोतरी के पीछे उनके आवासीय क्षेत्र के बड़ा होने की बात की जा रही है। बताया जा रहा है कि पूर्व सीएम के आवास का परिसर बढ़ा है और वहां कई एंट्री और एग्जिट प्वाइंट होने के चलते यह कदम उठाया गया है।

अख़बारों ने दावा किया है कि पुलिस के एक आला अधिकारी के निर्देश पर ही पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा बढ़ाई गई है। इस मामले को लेकर चर्चा का छिड़ी हुई है मगर कोई भी अधिकारी आधिकारिक रूप से बोलने को तैयार नहीं है।

मंत्री महेंद्र सिंह की पत्नी का होटल अवैध निर्माण में फंसने पर जयराम सरकार ने बदल दिए नियम!

शिमला।। सबसे पहले शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी की तरफ से बयान आया था कि सरकार अवैध निर्माण करने वाले होटलों को राहत देगी क्योंकि उनके ‘थोड़े से निर्माण की वजह से पूरे होटल के बिज़नस को प्रभावित नहीं होने दिया जा सकता।’ फिर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि होटल वालों की चिंताओं का निवारण करने के लिए नियम बनाए जा रहे हैं क्योंकि सरकार का फर्ज है कि सभी वर्गों की सुध ले। मगर अब अवैध निर्माण करने वालों को राहत देने की पूरी कवायद के पीछे का असली खेल कुछ और ही नजर आ रहा है।

हिंदी अखबार ‘अमर उजाला’ ने दावा किया है कि सत्ताधारी दिग्गज नेता के रिश्तेदार और रसूखदारों के होटलों में भी अवैध निर्माण किया था और इसीलिए सरकार टीसीपी के नियम बदल रही है। अखबार लिखता है- “सत्ताधारी कद्दावर नेता के रिश्तेदार और रसूखदारों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार अब टीसीपी नियम बदलने जा रही है। सूबे में अवैध तौर पर बने होटलों को बिजली-पानी मुहैया कराने के लिए ऐसा किया जा रहा है। सरकार ने इसके लिए टीसीपी नियमों में संशोधन की मंजूरी दे दी है।” हालांकि यह रसूखदार नेता कौन है, उसका नाम नहीं लिखा गया है। मगर यह सार्वजनिक है कि मंत्री महेंद्र सिंह की पत्नी का होटल भी अवैध निर्माण करने वालों की लिस्ट में था और उनकी ओर से कहा गया था कि वे खुद इस अवैध निर्माण को तोड़ देंगे।

क्या है मामला
बता दें कि कसौली, धर्मशाला कुल्लू और मनाली समेत पूरे हिमाचल में करीब 300 होटलों ने अवैध निर्माण किए थे। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट और एनजीटी के आदेश पर एक तरह से सील कर दिया गया था और बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए गए थे। इनमें तीस से पैंतीस प्रतिशत तक का निर्माण अवैध था। कई होटलों के नक्शे तक अप्रूव नहीं थे। इनमें मौजूदा आईपीएच मिनिस्टर महेंद्र ठाकुर की पत्नी का होटल भी शामिल था, जिसे लेकर बाद में खबर आई थी कि अवैध निर्माण वाले हिस्से को खुद ही गिरा दिया गया है।

अब क्या कर रही है सरकार
अब हिमाचल प्रदेश सरकार नियमों में बदलाव कर रही है ताकि इन होटलों को दोबारा चलाया जा सके। तीन फरवरी को धर्मशाला में हुई कैबिनेट बैठक में जयराम सरकार ने नियमों में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूदी दे दी है। अवैध निर्माण वाला हिस्सा सील रहेगा, वहां बिजली-पानी नहीं होगा लेकिन बाकी एरिया में बिजली-पानी रहेगा। लेकिन सरकार का यह प्रस्ताव बहुत ही हास्यास्पद और अव्यावहारिक है क्योंकि कोई कैसे चेक करेगा कि एक इमारत में बिजली पानी जाए और अवैध हिस्से में न जाए। क्या सरकार हर अवैध होटल में जांच अधिकारी या गार्ड बिठाकर रखेगी।

वीरभद्र सरकार जैसी जयराम सरकार?
पिछली कांग्रेस सरकार जहां अवैध भूमि पर कब्जा करने वालों को राहत देने के लिए बेचैन थी, नई सरकार अवैध निर्माण करने वालों को फायदा पहुंचाने की तैयारी में हैं। सरकार नियम बदलेगी तो सिर्फ होटल वालों को फायदा नहीं होगा, उन लोगों को भी फायदा होगा जिनका नक्शा पास है लेकिन निर्माण के दौरान अतिक्रमण कर दिया था।

यानी ईमानदार लोगों को सजा और बेईमान और नियम तोड़ने वाले लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। साफ मेसेज दिया जा रहा है लोगों को कि आप भी सरकारी भूमि पर कब्जा करें, अवैध निर्माण करें, सरकार उसे आपके नाम कर देगी।

जब तीन घंटों के लिए लापता हो गए थे हिमाचल के मुख्यमंत्री

इन हिमाचल डेस्क।। क्या हो जब पूरे प्रदेश में राजनीतिक उठापटक मची हो और राज्य का मुखिया का कहीं पता ही चल रहा हो कि वह कहां है? यह साल 1980 की बात है। ये वह दौर था जब पूरे देश में और हिमाचल में भी दल-बदल चरम पर था। कथित तौर पर कांग्रेस के ठाकुर रामलाल ने धन-बल का लालच देकर कई विधायक अपनी पार्टी में कांग्रेस में ले लिए।

उस दौरान पाला बदलने वालों में कौल सिंह, गुलाब सिंह, सुजान सिंह पठानिया शामिल थे, जो उन दिनों जनता पार्टी में थे। इस कदम से सरकार अल्पमत में आ गई और राम लाल कांग्रेस की तरफ से सरकार बनाने की स्थिति में आ गए।

सरकार बची रहे, इसके लिए कई बिचौलिए और विधायक सेटिंग करने के लिए उस समय के मुख्यमंत्री के पास आने लगे. मुख्यमंत्री को कहा जाने लगा कि जनाब, सरकार बचानी है तो असंतुष्टों को कोई पद दे दो, ये पार्टी नहीं बदेंलेगे। मुख्यमंत्री पर दिल्ली से आलाकमान का भी प्रेशर था कि सरकार गिरनी चाहिए, कुछ भी करो।

सब इंतज़ार लगाए बैठे थे कि अब क्या होगा। सरकार गिरेगा या बचेगी। थोड़ी देर में शिमला में हड़कंप मच गया कि मुख्यमंत्री गायब हो गए हैं। यही नहीं, यह जानकारी भी फैल गई कि सीएम का इस्तीफा राज्यपाल के पास पहुंच चुका है।

अब सीएम को ढूंढा जाने लगा। न वह कार्यालय पर मिले न घर पर। तीन घंटे तक अफसरशाही परेशान। दिल्ली से कॉल पर कॉल आएं कि आखिर सीएम कहां चले गए।

बाद में पता चला कि मुख्यमंत्री इन दल-बदलुओं से आगे ब्लैकमेल होने के बजाय शिमला के सिनेमा हाउस में ‘जुगनू’ मूवी देखने चले गए थे। तीन घंटे बाद सीएम हॉल से बाहर आए। बाद में दिल्ली से आडवाणी जी का फोन आया। सबसे पहले पूछते हैं- फिल्म कैसी थी?

सिनेमा हॉल से निकलने वाले और दल-बदलुओं की ब्लैकमेलिंग के आगे न झुकने वाले यह सीएम थे- शांता कुमार।

शांता कुमार

क्यों भई, बस शिक्षक ही सरकारी कर्मचारी हैं क्या?

राजेश वर्मा।। तबादला नीति सबके लिए बननी चाहिए। सभी को पता है कि शिक्षा विभाग ही नहीं, अन्य विभागों में नियुक्त कर्मचारी भी जिला, तहसील व घरों के नजदीक दशकों से डेरा जमाए बैठे हैं। क्या बिजली विभाग, क्या आईपीएच, क्या स्वास्थ्य संस्थान, क्या तहसील कार्यालय, क्या एसडीएम कार्यालय, क्या पुलिस विभाग, क्या राजस्व विभाग, क्या पंचायती राज, क्या कृषि विभाग, क्या बागवानी विभाग, क्या चुनाव विभाग। सभी विभागों में ऐसे कर्मचारी मिल जाएंगे जो तीन वर्षों से नहीं बल्कि दस-दस वर्षों से एक ही जगह और घरों के नजदीक दुबके हुए हैं। क्या उनके ऊपर कोई नीति लागू नहीं होती या होगी?

मीडिया के लोगों से भी आह्वान है कि तबादला नीति पर निष्पक्षता से अपना पक्ष रखें केवल शिक्षकों पर ही ऐसी न्यूजों को भुनाकर न तो आमजन का भला होगा न ही प्रदेश का। मैं किसी शिक्षक का बचाव नहीं कर रहा बस निवेदन है सभी कर्मचारियों पर यह नीति लागू हो और सभी के तथ्यों को ध्यान में रखा जाए।

आम नागरिक केवल शिक्षक से ही प्रताड़ित नहीं होता उसे किसी कार्यालय का कोई बाबू भी खज्जल करने से कोई कोर कसर नहीं छोड़ता। उसे राजस्व विभाग में कोई पटवारी भी तंग करने वाला मिल जाता है उसे आईपीएच विभाग के लोकल कर्मचारी से भी प्रताडि़त होना पड़ता है। उसे बिजली विभाग में दशकों से एक स्थान पर तैनात कर्मचारी भी प्रताड़ित करने से नहीं हिचकता।

इसी तरह कमोबेश सभी विभागों में ऐसे कर्मचारी मिल जाएंगे लेकिन उन सभी कर्मचारियों में सभी नहीं कुछेक ही ऐसे होते हैं जिनका स्थानांतरण जरूरी होता है लेकिन हम बात सिर्फ शिक्षक की ही करते हैं। आखिर क्यों? कर्मचारी तो कर्मचारी है, अच्छे बुरे हर विभाग में हैं, इसलिए नीतियां सभी के लिए एक समान बने।

याद रहे मीलों पैदल चलकर सिर्फ एक शिक्षक को ही चलना पड़ता है। अन्य विभागों के कार्यालय सड़क के किनारे ही सटे होते हैं इस बात को न भूलें। नीति सबके लिए बने फिर वह चाहे कोई भी हो क्योंकि शिक्षक भी इस प्रदेश का ही नागरिक है बाहरी नहीं। सलाम है माननीय शिक्षा मंत्री जी की सोच को जो उन्होंने खुद आगे बढ़कर कहा कि “मैं चाहता हूं कि तबादला मंत्री नहीं बल्कि शिक्षा मंत्री” के नाम से जाना जाऊं। जरूरत है सभी को यह सोच अपनाने की।

(स्वतंत्र लेखक और शिक्षक राजेश वर्मा बलद्वाड़ा, मंडी के रहने वाले हैं और उनसे 7018329898 पर संपर्क किया जा सकता है।)

अगर आपके पास भी तबादला नीति को लेकर सुझाव हैं तो हमारे फेसबुक पेज पर मेसेज करें या फिर ईमेल करें हमारी आईडी inhimachal.in @gmail. com पर।

अपराधी बेखौफ, शिमला में दोहरा हत्याकांड; शव खाई में फेंके, ढाई लाख लूटे

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था का एक और उदाहरण सामने आया है। आटे की सप्लाई देकर पेमेंट लेकर टैंपो में लौट रहे दो व्यक्तियों की हत्या कर दी गई और शव खाई में फेंक दिए गए। घटना शिमला की है। मैहली-शोघी बाईपास पर रात करीब एक बजे इस वारदात को अंजाम दिया गया। इस मामले में सिरमौर में दो लोगों की गिरफ्तारी होने की खबर आई है।

मृतक जीजा-साला नाहन से थे और करसोग में आटा सप्लाई करके लौट रहे ते। शुक्रवार सुबह एक शव सड़क से 60 फुट और दूसरा 150 फुट नीचे खाई में गिरा था। टेंपो को भी खाई में धकेलने की कोशिश की गई थी। अभी जांच की जा रही है कि हत्या लूट के इरादे से की गई या वजह कुछ और थी। मैहली में सीसीटीवी से पता चला कि रात 12 बजे के करीब वहां से टेंपो गुजरा था, जिसपर जीजा-साला सवार थे।

पुलिस ने मामला दर्ज करके छानबीन शुरू कर दी। सीसीटी कैमरे में यह देखा जा रहा था कि और कौन सी गाड़ियां वहां से गुजरीं। हिस्ट्रीशीटर्स के रिकॉर्ड भी खंगाले गए। इस बीच सिरमौर से दो लोगों की गिरफ्तारी की खबर है, जिनका इस मामले में हाथ हो सकता है।

दहशत
राजधानी के पास इस तरह की वारदात से लोगों में दहशत है। अगर इस तरह से अपराध होने लग जाएं तो हिमाचल के लिए यह ठीक संकेत नहीं होगा। गुड़िया केस जैसे मामलों में ही जब पुलिस और सीबीआई कुछ हासिल नहीं कर पाई है, उससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो गए हैं। नई सरकार ने पुलिस के अधिकारी तो बदल दिए लेकिन जरूर पुलिस की शैली बदलने की है और उसे सुविधाएं, उपकरण और ट्रेनिंग देने की है। पुलिस को इस लायक बनाने की जरूरत है कि वह पेचीदा से पेचीदा मामला सुलझा सके। साथ ही सड़कों पर विभिन्न जगहों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाने चाहिए ताकि यह पता चल सके कि कहां से कौन गुजरा। सभी जगहों पर कैमरे नहीं लगाए जा सकते मगर कुछ किलोमीटर की दूरी पर ऐसा किया जा सकता है।

नेपालियों को पीटने वाले कर्मचारियों पर वन मंत्री ने की कार्रवाई

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में बाहर से आने वाले मजदूर वर्ग और खासकर नेपाली समुदाय आसानी से लोगों के निशाने पर रहता है। जहां बाकी माफिया के खिलाफ लोगों और अधिकारियों की जुबान नहीं खुलती, नेपाली और कमजोर तबके के लोगों को आसानी से निशाना बना लिया जाता है।

ऐसा ही देखने को मिला था एक वायरल वीडियो में, डिसमें रामपुर वन विभाग के दो-तीन कर्मचारी दो नेपाली मजदूरों की पिटाई कर रहे थे। कथित तौर पर ये मजदूर सतलुज नदी किनारे से अवैध रूप रेत निकाल रहे थे। इस पर संज्ञान लेते हुए वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने मामले में शामिल कर्मचारियों को तुरंत बदलने और अरण्यपाल से मामले की जांच करवाने का आदेश दिया है।

वन मंत्री ने कहा है कि इस तरह की घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, “प्रदेश सरकार सभी नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। सरकारी कर्मचारियों को कानून को अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। इस मामले को लेकर जिला पुलिस अधीक्षक से भी बात की गई है। उन्हें नेपाली मजदूरों के बयान लेकर मामला दर्ज करने को भी कहा गया है।”

गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि विभाग को ऐसे मामलों से निपटने के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों। उन्होंने वन विभाग को इसमें संलिप्त कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अरण्यपाल द्वारा जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी संलिप्त बताया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

खेल के नाम पर WWE वाला ड्रामा करवाएगी हिमाचल सरकार?

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश में नई सरकार आते ही यह कहा जा रहा है पिछली सरकार ने खेल और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए कुछ नहीं किया। और अब हिमाचल सरकार का खेल विभाग हिमाचल प्रदेश में WWE की तर्ज पर रेसलिंग करवाने की तैयारी में है। इसके लिए युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री गोविंद ठाकुर ने चंडीगढ़ में रेसलर दलीप राणा उर्फ ग्रेट खली से मुलाकात की। खली ने चैंपियनशिप करवाने के लिए सहमति दे दी है।

 

खेल मंत्री ने कहा कि उन्होंने इस बारे में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी फोन पर बातचीत की है। प्रदेश सरकार विधानसभा के बजट सत्र के बाद 20 से 30 अप्रैल के बीच मुकाबले करवाएगी। अब दो जगह मंडी के पड्डल मैदान व शिमला मुकाबले करवाए जाएंगे। सरकार शिमला के आसपास ऐसी जगह तलाश रही है, जहां लाखों दर्शक आ सकें। मगर सवाल उठता है कि खेल विभाग आखिरकार किस तरह की रेसलिंग करवाएगा? क्या वह भी WWE की तरह नौटंकी होगी?

 

WWE खेल नहीं है
पूरी दुनिया का बच्चा-बच्चा जानता है कि WWE कोई खेल नहीं बल्कि एक एंटरटेनमेंट कंपनी है, जो प्रोफेशनल रेसलिंग करवाती है। प्रोफेशनल रेसलिंग दरसअल ऐथलेटिक्स और नाटकीय प्रदर्शन का मिश्रण है। यानी यह सही है कि हम टीवी पर जो रेसलिंग देखते हैं, उसमें वे प्रतियोगी भाव से खेल रहे होते हैं, मगर स्टंट आदि नाटकीय होते हैं। जीत-हार आदि भी संदिग्ध रहता है। यानी आप घूंसा मारने का दिखावा करके छुआएंगे भर तो सामने वाला खुद ही उछलकर गिर जाएगा।

खली भारत में पहले भी ऐसी फाइट में हिस्सा ले चुके हैं, जिसमें नकली हल्की-फुल्की कुर्सियों से मारपीट करने का दिखावा करने का आरोप लगा था। देखें वीडियो:

अब अगर इसी तरह का आयोजन हिमाचल प्रदेश में होने जा रहा है और सरकार अपने खर्च पर आयोजन करने जा रही है, बाहर से रेसलर भी बुलाने जा रही है तो प्रश्न उठता है कि इससे किस खेल को बढ़ावा मिला? जो खर्च इस आयोजन पर आएगा, वह क्या सिर्फ माहौल बनाने की कोशिश भर नहीं होगी? क्या हिमाचल के आम पहलवानों को भी इस आयोजन में खेलने का मौका मिलेगा और क्या कुश्ती सामान्य कुश्ती होगी या फिर ऐसे ही फर्जी स्टेज बनाकर WWE स्टाइल वाली नकली कुश्ती?

कला और खेल में फर्क है
साफ है कि सरकार इस रकम को हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने में लगाती तो अच्छा होता। इसमें कोई शक नहीं कि दलीप उर्फ खली ने हिमाचल का नाम रोशन किया है और उनका सम्मान किया जाना चाहिए। मगर वह WWE नाम की कंपनी के लिए काम करने वाले कलाकार हैं। उन्होंने कहा है कि इस वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले आयोजन की आधी कीमत पर इस आयोजन को करेंगे। मगर सरकार यह दावा करे कि हम हिमाचल प्रदेश में खेलों के लिए यह आयोजन कर रहे हैं तो हास्यास्पद है। अगर कला मंत्रालय इसका आयोजन करता तो बेहतर होता, क्योंकि यह खेल कम, कलाकारी ज्यादा है।

सड़क सुधारीकरण के लिए भी होने लगा भूमिपूजन, लगने लगीं पट्टियां

कांगड़ा।। हिमाचल में चुनाव से पहले यह मुद्दा खूब छाया था कि आनन-फानन में शिलान्यास किए जा रहे हैं और यहां तक कि छोटे-मोटे भूमिपूजन तक की पट्टियां लगाकर उनमें मुख्यमंत्री और विधायकों का नाम लिखा जा रहा है। बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाते हुए दिखावे की राजनीति करार दिया था। मगर अब सोशल मीडिया पर लोग बीजेपी पर खुद यही काम करने के लिए सवाल उठा रहे है।

दरअसल हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भवारना में भाडल देवी-कथियाड़ा सड़क के सुधारीकरण या अपग्रेडेशन के लिए भूमिपूजन किया। अमूमन भूमिपूजन या शिलान्यास नए निर्माणों के लिए पारंपरिक तौर पर किया जाता रहा है। मगर जो सड़क पहले से मौजूद हो, जिसके स्तर को ठीक किया जाना, उसके लिए भूमिपूजन करने पर सवाल उठ रहे हैं।

 

बता दें कि मुख्यमंत्री ने सड़क सुधारीकरण का भूमिपजन सुलह विधानसभा क्षेत्र में किया है, जिसके पास की जयसिंहपुर सीट पिछली सरकार के दौरान भी अंधाधुंध भूमिपूजनों के लिए चर्चा में रही थी। चुनाव से ठीक पहले सीएम वीरभद्र ने न जाने कितने ही भूमिपूजन एकसाथ कर दिए थे। इस संबंध में जयसिंहपुर के विधायक ने ‘इन हिमाचल’ को मेसेज भेजकर कहा था कि इन सभी परियोजनाओं के लिए बजट मंजूर हो चुका है।

यह बात अलग है कि कांग्रेस के तत्कालीन विधायक यादविंदर गोमा फिर भी चुनाव हार गए।

अभी सुलह से विपिन परमार चुने गए हैं जो मौजूदा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री हैं। उनकी सीट के अलावा नगरोटा बगवां में भी ऐसा ही सड़क सुधारीकरण का भूमिपूजन हुआ। यानी कांगड़ा में मुख्यमंत्रियों द्वारा छोटे-मोटे काम के लिए भी भूमिपूजन की पट्टी लगाने का सिलसिला जारी है।

ईमानदारी की बातों पर एक्सपोज़ हुई जयराम सरकार: सुक्खू

शिमला।। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू कहा है कि भ्रष्टाचार को लेकर ज़ीरो टॉलरंस की बातें करने वाली बीजेपी सरकार ईमानदारी की दिखावा कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के सांसद वीरेंद्र कश्यप पर भ्रष्टाचार के आरोप तय हो गए हैं और विधायक जेआर कटवाल पर एफआईआर हो चुकी है, फिर भी मुख्यमंत्री ईमानदार सरकार का दंभ भर रहे हैं।

नादौन से विधायक सुक्खू ने कहा कि बीजेपी के एक सांसद पहले भी लोकसभा में सवाल पूछने के बदले पैसे मांगने को लेकर कुर्सी गंवा चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री की कथनी और करनी में अंतर बताते हुए कहा कि अफसरशाही में भी दागी अधिकारियों को रेवड़ियां बांटी गई हैं, जिससे सरकार का असली चेहरा एक्सपोज़ हो गई है।

सूक्खू ने कहा कि कांग्रेस देखेगी कि 100 दिनों के अंदर जनहित के कितने काम करती हैं और अच्छा रोडमैप रखती है या नहीं। ऐसा हुआ तो हम इसकी सराहना करेंगे और ऐसा नहीं हुआ हर मोर्चे पर सरकार की पोल खोलकर रख दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी तो इस सरकार ने तबादलों के अलावा कुछ किया ही नहीं है।