ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी के सदस्य बने रघुबीर सिंह बाली

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव रघुबीर सिंह बाली अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य बन गए हैं। कुछ माह पहले ही वह प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव बने थे। युवा राजनेता के तौर पर यह एक उपलब्धि मानी जा रही है कि वह बिना विधानसभा चुनाव लड़े संगठन में अहम जगह पहुंचे हैं।

यूथ कांग्रेस की नैशनल एग्जिक्यूटिव कमिटी के सदस्य रहते हुए राहुल गांधी की टीम का हिस्सा रह चुके आरएस बाली की एआईसीसी में एंट्री में भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल की ही भूमिका होने की चर्चा है।

क्या है एआईसीसी?
ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी कांग्रेस की केंद्रीय असेंबली है जो अहम फैसले लेती है। इसमें राज्य स्तर की प्रदेश कांग्रेस कमेटी से सदस्य चुने जाते हैं और अधिकदम एक हजार सदस्य हो सकते हैं। एआईसीसी ही कांग्रेस वर्किंग कमेटी और कांग्रेस के अध्यक्ष का चुनाव कर सकते हैं। कांग्रेस के अध्यक्ष ही एआईसीसी के प्रमुख होते हैं।

विक्रमादित्य को दी थी चुनौती
कांग्रेस संगठन में विभिन्न पदों पर रह चुके रघुबीर बाली ने यूथ कांग्रेस चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य को भी चुनौती दी थी। रघुबीर सिंह बाली ने पार्टी आलाकमान के सामने इन चुनावों में धांधली का आरोप लगाया था। इसके बाद पार्टी ने विक्रमादित्य पर तीन साल का प्रतिबंध भी लगाया था।

तीन साल तक यूथ कांग्रेस को नेतृत्व देने से पहले वह कांग्रेस से संबद्ध छात्र संगठन एनएसयूआई में भी रह चुके हैं।

मंडी में 5 महीने पहले लापता हुए वनरक्षक का कंकाल मिला

मंडी।। मंडी की बल्ह घाटी में पड़ने वाले टावा गांव से पिछले साल सितंबर के आखिर में लापता हुए फॉरेस्ट गार्ड तोता राम उर्फ मोहनलाल का कंकाल बरामद हुआ है। कमरूनाग मंदिर में एक जातर के दौरान दोस्तों के साथ गए वनरक्षक तोता राम लौटते वक्त लापता हो गए थे। कहा जा रहा था कि वह टोली से कहां अलग हो गए, पता नहीं चला।

बता दें कि पुलिस, स्थानीय लोगों और एसडीआरएफ समेत कई टीमों ने जंगल का चप्पा-चप्पा छानने का दावा किया था, मगर मोहनलाल का कंकाल वन विभाग की हट के पास ही बरामद हुआ है। गुरुवार को पुलिस ने को सूचना मिली थी कि वन विभाग की हट के पास कंकाल पड़ा हुआ है।

पुलिस ने शव को कब्जे में लिया और घटनास्थल का मुआयना किया। कंकाल को जानवारों ने नोच लिया है। एमबीएम न्यूज नेटवर्क के मुताबिक डीएसपी तरणजीत सिंह ने बताया कि यह शव लापता मोहनलाल का है और इसे परिजनों के हवाले कर दिया जाएगा, आगे की छानबीन जारी है।

Image: MBM News Network

क्या है मामला
घटना मंडी के बल्ह की है, जहां रहने वाले वनरक्षक मोहन लाल, जिनकी उम्र 57 साल थी, बड़ा देव कमरूनाग के लिए आयोजित जातर में शामिल होने गए थे। वापसी में वह कुछ दोस्तों के साथ आ रहे थे। कथित तौर पर कुछ दूरी बाद दोस्तों ने देखा कि वह उनके बीच नहीं हैं। इससे उन्होंने सोचा कि वे शॉर्ट कट से अपने घर चले गए होंगे। अगली सुबह उन्हें पता चला कि मोहन तो घर पहुंचे ही नहीं हैं। घटना सितंबर माह की है।

चप्पा-चप्पा छान लेने का दावा
इसके बाद पुलिस, एसडीआरएफ, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, देवता कमेटी और कई स्थानीय लोगों ने किसी हादसे या दुर्घटना या साजिश की आशंका से मोहन लाल को कमरूघाटी में ढूंढने की कोशिश की, मगर कामयाबी नहीं मिली। अक्तूबर के पहले हफ्ते तक तो मीडिया में भी खबरें आती रहीं कि जैसे कि मोहन लाल के मोबाइल की आखिरी लोकेशन घीडी टावर से मिली थी और बाद में फोन स्विच ऑफ है। यह भी पता लगाने की कोशिश की गई कि आखिरी बात उनकी बात किससे हुई। फिर इलेक्शन आ गए तो मीडया से यह मामला गायब हो गया। उस दौरान भी इन हिमाचल ने इस मुद्दे को उठाया था।

पढ़ें: लापता वनरक्षक को नहीं ढूंढ पा रही मंडी पुलिस

पुलिस की जांच से परिवार संतुष्ट नहीं
बता दें कि मोहन लाल का परिवार पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं था। नवंबर में मोहनलाल के बेटे घनश्याम का कहना था कि प्रशासन पिता को ढूंढने में नाकाम रहा है। उनका कहना था, “कमरूनाग से वापसी पर जो लोग मेरे पिता के साथ थे, अगर उनसे पुलिस सख्ती ये पूछताछ करेगी तो वे लोग कुछ बता सकते हैं। उनके साथ आए चार-पांच लोगों के व्यवहार से शक हो रहा है कि कहीं मेरे पिता के साथ कुछ अनहोनी तो नहीं हुई हो।”

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बहरहाल, अब मोहनलाल के शव का वन विभाग की हट के पास ही मिलना काफी सवाल खड़े करता है। अब कंकाल बरामद हुआ है और जंगली जानवरों ने बहुत नुकसान भी पहुंचाया है। ऐसे में यह मामला हत्या का है या जंगली जानवरों ने उन्हें शिकार बनाया, कहा नहीं जा सकता। वैसे भी जंगली जानवर शिकार करते हैं तो भूख शांत करने के लिए और वे शिकार को चट कर जाते हैं। मगर कंकाल के काफी हिस्से इस तरह से मिलना सवाल तो खड़े करता ही है।

(एमबीएम न्यूज नेटवर्क की इनपुट्स के साथ) 

ब्रह्मांड के रहस्यों से रूबरू करवाने वाला ब्रह्मांड में विलीन

आशीष नड्डा॥ जीवन में जरा बीमारी या किसी भी तरह की समस्या ग्रसित होकर जब आम लोग जिजीविषा के प्रति निरूत्साहित हो जाते हैं। वहीँ लम्बी और असाध्य बीमारी से जूझता हुआ वो शख्श एक महान वैज्ञानिक बनकर मानव सभ्यता की प्रगति में व्हील चेयर पर बैठकर गर्दन को एक तरफ झुकाये हुए नई दिशा देता रहा । जंहा अपनी असफलताओं के लिए हम लोग अपनी बीमारियों समस्याओं को जिम्मेदार ठहराते हैं वहीँ अपनी सफलता का राज बताते हुए वो शख्श एक बार कहता है

“उनकी बीमारी ने उन्हें वैज्ञानिक बनाने में सबसे बड़ी भूमिका अदा की है। बीमारी से पहले वे अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे लेकिन बीमारी के दौरान उन्हें लगने लगा कि वे लंबे समय तक जिंदा नहीं रहेंगे तो उन्होंने अपना सारा ध्याना रिसर्च पर लगा दिया, भौतिकी पर किए गए मेरे अध्ययन ने यह साबित कर दिखाया कि दुनिया में कोई भी विकलांग नहीं है।” ”

वो शख्श जिसने जिंदगी को अलग अंदाज में अपने काम के लिए समर्पित किया , विज्ञान से लेकर हर फील्ड से सबंधित लोग जिन्हे जानते रहे हैं वो महान वैज्ञानिक स्टीफन विलियम हाकिंग आज इस संसार को अलविदा कह गए।

” किसी इंटरव्यू में एक बार उन्होंने कहा था की ” मैं पिछले 49 सालों से अपनी मृत्यु का अनुमान लगा रहा हूँ , मुझे मौत से डर नहीं लगता , बल्कि मुझे चिंता यह है मरने से पहले मुझे बहुत सारे काम करने है ”

स्टीफन विलियम हाकिंग का जन्म इंग्लैंड के शिक्षा हब के रूप में विख्यात शहर : ऑक्सफ़ोर्ड में 8 फरवरी 1942 को माता इसाबेल और पिता फ्रेंक हाकिंग के घर पर हुआ था। संयोग की बात यह है आगे चलकर महान खगोल वैज्ञानिक बने स्टीफन हाकिंग और अपने जमाने के महान खगोलशास्त्री रहे गैलीलियो गलीली की जन्मतिथि एक ही थी।

स्टीफन बाद में जितने महान ब्रह्मांड विज्ञानी बने , उनका स्कूली जीवन शुरू में उतना उत्कृष्ट नहीं था | स्टीफन स्कूली समय में अपनी कक्षा में औसत से कम अंक पाने वाले छात्र थे, किन्तु उन्हें बोर्ड गेम खेलना अच्छा लगता था | उन्हें गणित में बहुत दिलचस्पी थी, यहाँ तक कि उन्होंने गणितीय समीकरणों को हल करने के लिए कुछ लोगों की मदद से पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के हिस्सों से अपना ही एक कंप्यूटर बना दिया था | उस दौर में गणित पढ़ने वालों के पास मास्टर बनने के अलावा कोई ख़ास नौकरी नहीं होती थी इसलिए उनके पिता फ्रेंक चाहते थे स्टीफन विज्ञान (मेडिकल ) पढ़े औरउनकी तरह ही एक डॉक्टर बने । स्टीफन ने पिता की बात मानी और गणित के साथ साथ फिजिक्स और केम्सिट्री पर भी बराबर ध्यान देना शुरू कर दिया।

सनातक के लिए स्टीफन ने ऑक्सफ़ोर्ड कालेज में एडमिसन ले लिया। पढ़ाई में एक औसत छात्र हाकिंग को किताबों को पढ़कर नोट्स बनाने की आदत थी किताबों से नोट्स बनाने के दौरान हाकिंग किताबों की गलतिया भी निकालते और उन्हें पब्लिशर को भेजते थे। स्नातक के फाइनल ईयर में उन्होंने cosmology ( बर्ह्माण्ड विज्ञान से सबंधित सब्जेक्ट ) को अपना मुख्य विषय चुना। इसी दौरान उन्होंने तय किया की वो अब PHD भी करेंगे और प्रतिष्ठीत कैमब्रिज विश्विद्यालय में उन्हीने इसके लिए अप्प्लीय कर दिया। 1962 में उन्हें कैम्ब्रिज में एडमिशन मिल गया।

उनकी उम्र उस समय मात्र 21 वर्ष की थी। यह वर्ष कैम्ब्रिज में एडमिशन की ख़ुशी के साथ साथ उनके जीवन में एक और तूफ़ान लेकर भी आया ”

स्टीफन एक बार घर आये तो सीढ़ियों से गिर गए , और बेहोश हो गए। शुरू में यह नार्मल लगा , की कमजोरी की वजह से हुआ। परन्तु बाद में यह बार बार होने लगा। आखिर डॉक्टर उस वीभत्स नतीजे पर पहुंचे जिसने स्टीफन और उनके परिवार को हिलाकर रख दिया। ” डाक्टरों के अनुसार स्टीफन एक अनजान और कभी न ठीक होने वाली बीमारी से ग्रस्त हैं जिसका नाम है न्यूरॉन मोर्टार डीसीस । इस बीमारी में शारीर के सारे अंग धीरे धीरे काम करना बंद कर देते है परन्तु मस्तिष्क एकदम सही रहता है ।और अंत में श्वास नली भी बंद हो जाने से मरीज घुट घुट के मर जाता है।
डॉक्टरों ने यंहा तक कह दिया की हॉकिंग बस 2 साल के मेहमान है। लेकिन हाकिंग ने अपनी इच्छा शक्ति पर पूरी पकड़ बना ली और उन्होंने कहा की मैं 2 नहीं 20 नहीं पूरे 40 सालो तक जियूँगा। उस समय उन्हें हौसला देने के लिए उनकी हाँ में हाँ मिला दी गयी परन्तु 2012 में अपने 70 वे जन्मदिन पर भी जब कहा उन्होंने कहा “मैं और जीना चाहता हूँ” तो उनकी जिजीविषा से संसार फिर रूबरू हुआ।

हालाँकि धीरे-धीरे हाकिंग की शारीरिक क्षमता में गिरावट आना शुरू हो गयी| उन्होंने बैसाखी का इस्तेमाल शुरू कर दिया और नियमित रूप से व्याख्यान देना बंद कर दिया। उनके शरीर के अंग धीरे धीरे काम करना बंद हो गये और उनका शरीर एक जिन्दा लाश समान बन गया | लेकिन हाकिंग ने विकलांगता को अपने ऊपर हावी नहीं होने । उन्होंने अपने शोध कार्य और सामान्य जिंदगी को रूकने नहीं दिया।

जैसे जैसे उन्होंने लिखने की क्षमता खोई, उन्होंने प्रतिपूरक दृश्य तरीकों का विकास किया यहाँ तक कि वह समीकरणों को ज्योमेट्री के संदर्भ में देखने लगे। बीमारी बढ़ने पर उन्हें व्हील चेयर की जरूरत हुई , उन्हें वो भी दे दी गयी और उनकी ये चेयर तकनिकी रूप से काफी सुसज्जित थी। अंत में मस्तिषक को छोड़कर उनके अंगों ने काम करना बंद कर दिया फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी स्पेशल व्हील चेयर से अपने गाल की मांसपेशी के जरिए, अपने चश्मे पर लगे सेंसर को कम्प्यूटर से जोड़कर ही बातचीत करते थे

ब्रह्मांड के स्थापित बिग बैंग थ्योरी जैसे नियमों को हाकिंग ने चुनौती दी। उन्होंने ब्लैक होल का कांसेप्ट दुनिया को दिया, उन्होंने हॉकिंग रेडिएशन का विचार भी दुनिया को दिया । और उनकी लिखी गयी किताब “A BRIEF HISTORY OF TIME “ ने दुनिया भर के विज्ञान जगत में तहलका मचा दिया।
एक बार उनसे पूछा गया , हॉकिंग को अपनी कौन सी उपलब्धि पर सबसे ज्यादा गर्व है?
हॉकिंग जवाब देते हैं ”मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैंने ब्रह्माण्ड को समझने में अपनी भूमिका निभाई। इसके रहस्य लोगों के लिए खोले और इस पर किए गए शोध में अपना योगदान दे पाया। मुझे गर्व होता है जब लोगों की भीड़ मेरे काम को जानना चाहती है।”

स्टीफन हाकिंग विचारों से नास्तिक थे इस कारण उनकी दुनिया में किरकिरी भी बहुत हुयी परन्तु वो अपने विचारों पर अडिग थे , हॉकिंग का IQ 160 आंका गया है जो किसी जीनियस से भी कहीं ज्यादा था । 2007 में उन्होंने अंतरिक्ष की सैर भी की।

हाकिंग कहते थे ” हमेशा सितारों की ओर देखो न कि अपने पैरों की ओर” बेशक आज हाकिंग हमारे बीच नहीं हैं लेकिन
स्टीफन विलियम हाकिंग विज्ञान जगत और मानव सभ्यता में योगदान देने वाला यह नाम एक सितारे की तरह हमेशा अंतरिक्ष में चमकता रहेगा

लेखक IIT दिल्ली से एनर्जी पोलसियी में पी एच डी हैं और वर्तमान में वर्ल्ड बैंक ग्रुप में कंसल्टैंट के पद पर कार्यरत हैं

2100 करोड़ के घोटाले के जांच अधिकारी के तबादले की तैयारी की खबर

नाहन।। ऐसी जानकारी सामने आई है कि सिरमौर में हुए 2100 करोड़ रुपये के टैक्स घोटाले के जांच अधिकारी जीडी ठाकुर के तबादले की कोशिश की जा रही है। न्यूज 18 ने लिखा है कि टेक्नोमैक कंपनी पर विभाग की कार्रवाई भाजपा के नेताओं को रास नहीं आ रही है। पोर्टल ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि ‘नाहन के दिग्गज भाजपा नेता राजीव बिंदल मामले की जांच करने वाले अधिकारी का तबादला करने में जुट गए हैं। जांच अधिकारी के तबादले के लिए विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल का डीओ नोट लगाया गया है।’

यह नोट सीएम ऑफिस से प्रधान सचिव को भेजा गया है। हालांकि न्यूज 18 ने यह भी लिखा है कि इस नोट को बिंदल ने खुद लिखा है या किसी और ने, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। जानकारी दी गई है कि घोटाले का खुलासा करने वाले जांच अधिकारी की जगह पुराने AETC को लगाने की तैयारी की जा रही है। दरअसल इस घोटाले में बड़े पैमाने पर अधिकारियों और बड़े नेताओं की मिलीभगत की आशंका है। ऐसे में जांच अधिकारी का तबादला करने की सिफारिश की जा रही है।

कौन हैं जीडी ठाकुर
जीडी ठाकुर ने सिरमौर के पांवटा साहिब क्षेत्र के जगतपुरा की इंडियन टेक्नोमैक कंपनी लिमिटेड पर 2200 करोड़ रुपये का जुर्माना किया था। सिरमौर में आबकारी व कराधान विभाग के सहायक आयुक्त के पद पर तैनात जीडी ठाकुर ने साल 2014 में विभाग की इकनॉमिक इंटेलिजेंस यूनिट (ईआईयू) में  तैनाती के दौरान कंपनी पर 2200 करोड़ रुपये का फाइन लगाया था।

जीडी ठाकुर (Courtesy: MBM NEWS NETWORK)

कुछ समय पहले ही उनकी तैनाती सिरमौर में सहायक आयुक्त के पद पर हुई है। बताया जाता है कि इस मामले ने ठाकुर के कारण ही रफ्तार पकड़ी है। रविवार रात ठाकुर के नेतृत्व में ही आपराधिक मामला दर्ज किया गया था और मामले की जांच शुरू से उन्होंने ही की थी।

जब यह मामला बड़ा बनकर उभरा है और इसे प्रवर्तन निदेशालय को सौंपने की मांग उठी है, उस समय इस अधिकारी के तबादले को लेकर कई सवाल उठ खड़े हुए हैं।

क्या किया है कंपनी ने?
टेक्नोमैक कंपनी पर दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि कंपनी को विभाग को 2175 करोड़ 51 लाख रुपये बतौर टैक्स देने थे। इसमें ब्याज की रकम नहीं जोड़ी गई है। इसके अलावा इस कंपनी पर इनकम टैक्स और बैंकों से लिए कर्ज  की देनदारी 3100 करोड़ रुपये की बताई जा रही है। यानी कुल रकम पांच हजार रुपये से ज्यादा बनती है।

करीब 15 पन्नों की लंबी शिकायत में कंपनी प्रबंधक समेत अन्य 3 लोगों को नामजद किया गया हैष एफआईआर में जिन लोगों को नामजद किया गया है, उसमें कंपनी के प्रबंध निदेशक राकेश कुमार शर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी की बेटे विनय शर्मा रंगनाथन श्रीवासन और अश्विनी कुमार शामिल हैं।

पिछली सरकार और विभाग पर भी सवाल
इस पूरे मामले में आबकारी व कराधान विभाग के शीर्ष अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में रही है क्योंकि चार साल से इस मामले में चुप्पी साधे रखी गई। मामला 2014 में सामने आया था। आशंका यह भी जताई जा रही है कि कहीं संदेह के घेरे में रहने वाले अधिकारी ही तो ठाकुर के तबादले की बुनियाद नहीं रख रहे।

एमबीएम न्यूज नेटवर्क ने आबकारी और कराधान विभाग के सहायक आयुक्त जीडी ठाकुर से तबादले को लेकर सीधा सवाल पूछा तो उन्होंने कोई भी जानकारी न होने की बात कही।

जीडी ठाकुर पर प्रेशर?
न्यूज 18 ने लिखा है कि जांच अधिकारी रहे जीडी ठाकुर ने कई बातें जगजाहिर किए हैं। जैसे कि उन्होंने कहा है कि 2014 में मामले के सामने आने पर जांच के दौरान उन पर प्रेशर बनाया गया था। उनका तबादला हो जाने के बाद अधिकारियों ने इस मामले में रुचि नहीं दिखाई थी और मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की थी।

(एमबीएम न्यूज नेटवर्क की इनपुट्स के साथ)

राजीव गांधी की हत्या का सोनिया को पहुंचा लाभ: सुब्रमण्यन स्वामी

नई दिल्ली।। सुब्रमण्यम स्वामी लंबे समय से सोनिया गांधी के खिलाफ बयान देते रहे हैं और बीजेपी में शामिल होने से पहले जब वह जनता पार्टी में थे, तब उनकी वेबसाइट पर राजीव गांधी की मौत से लेकर सोनिया गांधी तक पर कई गंभीर सवाल उठाए गए थे। अब स्वामी ने एक बार फिर पुराना राग आलापा है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के पिता के हत्यारों को माफ करने वाले बयान पर बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने गांधी परिवार पर बेहद सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि संभव है कि राजीव गांधी की हत्या सुपारी देकर करवाई गई हो, इसकी जांच की जानी चाहिए। स्वामी ने मामले में सीधे तौर पर सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी पर निशाना साधा है।

सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने नलिनी को मृत्युदंड दिया था, इन्होंने (गांधी परिवार) राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी कि उसे आजीवन कारावास देना चाहिए। उनके (राहुल) के बयान से सारे परिवार पर संदेह आया है। राजीव गांधी की हत्या से सबसे ज्यादा फायदा सोनिया गांधी को हुआ था।’

स्वामी ने कहा, ‘ऐसे मौके पर जब सुप्रीम कोर्ट इसपर विचार कर रहा और भारत सरकार ने सख्त बयान दिया है, उस समय ऐसा बयान देना, इनका कोई समझौता है LTTE के साथ। हो सकता है राजीव गांधी की हत्या के लिए सुपारी दी हो। इस पर जांच होनी चाहिए।’ स्वामी ने कहा, ‘क्या राजीव गांधी उनकी प्रॉपर्टी हैं? वह देश के प्रधानमंत्री थे, इसीलिए उनकी हत्या हुई।’

पिता के हत्यारों से प्रियंका गांधी के मिलने पर भी स्वामी ने निशाना साधा और कहा, ‘जेल में सिर्फ रिश्तेदार कैदी से मिलने जा सकते हैं। यह कौन सी रिश्तेदार हैं? सोनिया गांधी ने नलिनी की लड़की की इंग्लैंड में पढ़ाई का सारा खर्च उठाया। ये सारी करूणा क्यों दिखाई?’ बता दें कि सिंगापुर में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह बयान दिया था कि उन्होंने और बहन प्रियंका गांधी ने अब अपने पिता के हत्यारों को माफ कर दिया है।

वरिष्ठ पत्रकार रोहित सावल बने मुख्यमंत्री जयराम के मीडिया सलाहकार

शिमला।। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के पद संभालने के कुछ दिन बाद मीडिया सलाहकार का पद सृजित करने की अधिसूचना जारी हुई थी मगर काफी दिनों से यह पद खाली चल रहा था। सोमवार शाम तक नई नोटिफिकेशन जारी हुई और इसके साथ ही सस्पेंस खत्म हो गया। दिल्ली में वरिष्ठ पत्रकार रोहित कुमार सावल अब मु्ख्यमंत्री जयराम ठाकुर के मीडिया सलाहकार होंगे।

कौन हैं रोहित सावल
रोहित कुमार सावल का जन्म मंडी ज़िले के मौवीसेरी गांव में हुआ। शुरुआती शिक्षा मौवीसेरी गांव के ही सरकारी स्कूस से प्राप्त की। 8वीं तक सरकारी स्कूल से शिक्षा ग्रहण करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए मंडी को चुना। स्कूली दिनों से ही गांव में लगने वाली शाखाओं में आना-जाना शुरू हुआ। समय के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लगाव और गहरा होता गया। आठवीं तक की पढ़ाई मौवीसेरी के सरकारी स्कूल से करने के बाद वल्लभ महाविद्यालय से कॉमर्स में स्नातक उत्तीर्ण की।

छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं
कॉलेज के दिनों में छात्र संघठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े। हिमाचल प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव की बहाली के लिए हुए विद्यार्थी परिषद के आंदोलन में रोहित सावल ने सक्रिय भूमिका निभाई।

मंडी महाविद्यालय में वामपंथियों के सियासी दुर्ग को ढहाने का रिकार्ड भी रोहित सावल के नाम दर्ज है। साल 2000 में रोहित सावल ने विद्यार्थी परिषद पैनल पर महासचिव का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। ये पहला मौका था जब मंडी महाविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने छात्रसंघ चुनाव में पैनल के किसी पद पर जीत दर्ज की थी।

एचपीयू से की पढ़ाई
कामयाबी मिलने पर हौसला बढ़ता जाता है। ऐसा ही रोहित सावल के साथ भी हो रहा था। वाणिज्य विषय में स्नातक उत्तीर्ण करने के बाद प्रबंधन (MBA) की पढ़ाई के लिए रोहित सावल ने हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में विख्यात हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। शुरुआती दिनों से ही राजनीतिक रूझान रखने की आदत ने रोहित सावल को यहां भी संगठन से जोड़े रखा। यहां उन्होंने ने एबीवीपी के हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ईकाइ के सचिव का दायित्व निभाया। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्रसंघ अध्यक्ष और महासचिव का चुनाव भी लड़ा।

पत्रकारिता में लंबा अनुभव
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से MBA करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता (बीजेएमसी) की पढ़ाई पूरी की। रोहित सावल ने देश के तत्कालीन सबसे बड़े रीजनल टीवी नेटवर्क ईटीवी से पत्रकारिता करियर की शुरूआत की. ईटीवी के मुख्यालय हैदराबाद में लगभग तीन साल तक काम किया।

ईटीवी हैदराबाद के मुख्यालय में रोहित सावल ने ईटीवी बिहार से बतौर एंकर नई पारी की शुरूआत की। 3 साल तक सफलतापूर्वक गुजारने के बाद रोहित सावल ने देश की राजधानी दिल्ली का रूख किया। 2007 में दिल्ली में नये चैनलों की श्रृंखला शुरू हो रही थी। रोहित सावल ने नये शुरू हुए न्यूज चैनल एमएचवन न्यूज़ में नयी पारी की शुरुआत की, और कड़ी मेहनत के बल पर चैनल को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन दिनों इस चैनल पर उनके द्वारा शुरू किया गया दैनिक कार्यक्रम ‘हिम का ताज’ हिमाचल में बेहद पसंद किया गया था. उस कार्यक्रम ने उक्त चैनल को हिमाचल में एक तरह से स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई थी।

वर्तमान में रोहित सावल ITV नेटवर्क के इंडिया न्यूज़ से जुड़े हैं। उनके पास 4 प्रदेशों (उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, हरियाणा और राजस्थान के चैनल में संपादक का दायित्व है।

रोहित सावल को क्षेत्रीय मीडिया में चैनल लॉंच कराने का लंबा अनुभव है। इंडिया न्यूज़ के हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड और बिहार चैनल को सफलतापूर्वक लॉंच कराने में उनकी महत्ती भूमिका रही है।

करीब 14 साल के पत्रकारिता के करियर में उन्होंने रिपोर्टिंग और एंकरिंग सहित कई विधाओं में नए आयाम छुए हैं।लोकसभा और कई राज्यों के कई विधानसभा चुनाव कवर करने का अनुभव राजनीतिक रूप से उनकी समझ को सुदृढ़ बनाता है।

नोटिफिकेशन:

 

जब मुख्यमंत्री जयराम ने लोगों के लिए ठुकरा दिया धर्मपत्नी का दिया सुझाव

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, मंडी।। जयराम ठाकुर को जब हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिली थी, कई चुनौतियां उनका स्वागत कर रही थीं। उन्हें इस पद पर बैठे दो महीने से ज्यादा का समय हो गया है और उन्होंने पहला बजट भी पेश कर दिया है। पहले वह विधायक और मंत्री की भूमिका में रह चुके हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के ऊपर पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी होती है। इस पद पर आने के बाद उनके निजी जीवन में क्या-क्या बदला है?

जयराम ठाकुर की जीवनसंगिनी डॉक्टर साधना ठाकुर ने बताया कि आज सीएम साहब के पास परिवार के लिए उतना समय नहीं है, जितना समय वह पहले देते थे। मगर परिवार को इसका कोई मलाल भी नहीं है। परिवार जानता है कि वह किसी एक विधानसभा क्षेत्र या एक विभाग की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

पहले की कह दी थी संघर्षपूर्ण जीवन की बात
डॉक्टर साधना बताती हैं कि जब उनकी शादी होने वाली थी, तभी जयराम ठाकुर ने कह दिया कि जीवन संघर्षपूर्ण होगा। डॉक्टर साधना ने उस समय सोचा कि जयराम ठाकुर आर्थिक संघर्ष की बात कर रहे हैं। लेकिन बाद में पता चला कि राजनीतिक राजनीतिक संघर्ष अन्य संघर्षों से कितना अलग है।

ऐसे निभाईं जिम्मेदारियां
डॉक्टर साधना ने घर और परिवार भी संभाला और पति को राजनीतिक जिम्मेदारियां निभाने के लिए समय दिया। वह बताती हैं कि जब जयराम विधायक, बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री रहे तो परिवार के लिए समय निकाल लिया करते थे, लेकिन जब से सीएम बने हैं, तब से समय निकालना थोड़ा मुश्किल हो गया है।

बच्चों को भी यह बात महसूस हो रही है लेकिन परिवार समझ गया है लेकिन प्रदेश को आगे ले जाने के यज्ञ में खुद के लिए मिलने वाले समय की आहुति देनी होगी। वह बताती हैं कि समय न मिलने की शिकायत तो है मगर समय शिकायत करने का नहीं बल्कि साथ देने का है।

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क्या है सीएम साहब का शेड्यूल
डॉक्टर साधना ने बताया कि मुख्यमंत्री सुबह 9 बजे से दिन की शुरुआत करते हैं और देर रात एक बजे फ्री होते हैं। डॉक्टर साधना ने कहा कि मैंने सीएम साहब को सुझाव दिया था कि लोगों से मिलने के लिए टाइम टेबल बना लें, लेकिन  मुख्यमंत्री ने यह कहकर इनकार कर दिया कि लोगों के कारण ही वह आज इस मुकाम पर हैं।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क का आर्टिकल है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित किया गया है)

वीरभद्र और अग्निहोत्री ने जयराम सरकार पर किए कई वार

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, श्री रेणुका जी।। सिरमौर जिले के श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र के माईना में रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान वीरभद्र सिंह ने कहा कि अगर बीजेपी सरकार ने कांग्रेस सरकार के दौरान खोले गए संस्थानों को बंद करने की कोशिश की तो पार्टी विरोध प्रदर्शन से नहीं चूकेगी।

वीरभद्र सिंह ने बीजेपी सरकार पर प्रदेश को नीलाम करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बाहरी राज्यों के लोगों की जमीन बेचने की मंशा रखती है सरकार। तबादलों को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरने की कोशिश की।

अग्निहोत्री भी हुए हमलावर
कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने कहा- जयराम सरकार जिस तरीके से चल रही है, उससे नजर आ रहा है कि यह जल्द जयराम जी की हो जाएगी।

उन्होंने भी कहा कि 118 में किसी तरह का बदलाव बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि मरे हुए कर्मचारियों तक के तबादले हो रहे हैं और लगता है कि जयराम सरकार कर्ज लेने का नया रिकॉर्ड बनाएगी।

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वीरभद्र सिंह का यह सम्मान यहां के कांग्रेस के विधायक विनय कुमार द्वारा आयोजित किया गया था।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को आईजीएमसी से मिली छुट्टी

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को आईजीएमसी से छुट्टी मिल गई है। जानकारी के मुताबिक कल रूटीन टेस्ट करवाने शिमला में आईजीएमसी पहुंचे वीरभद्र को डॉक्टरों ने एहतियातन भर्ती कर लिया था। आज कुछ टेस्ट्स की रिपोर्ट आने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई है।

हालांकि मीडिया के कुछ हिस्सों में ऐसी भी जानकारी है कि उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और सांस लेने में तकलीफ हो रही थी।

पूर्व मुख्यमंत्री से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी मुलाकात की थी। इसके अलावा अन्य कई नेता भी उनके स्वास्थ्य का हाल जानने आईजीएमसी के स्पेशल वॉर्ड पहुंचे थे।

क्या ऐंटी ‘हेल गन’ या ‘हेल कैनन’ बच्चों के काले टीके जैसी है?

इन हिमाचल डेस्क।।  ‘हेल’ यानी ओलों से राहत देने के लिए ऐंटी हेल गन या हेल कैनन की खरीद पर बागवानों को सब्सिडी देने का एलान किया गया है। दरअसल हिमाचल प्रदेश की ऐपल बेल्ट में अचानक होने वाली ओलावृष्टि फसल को तबाह कर देती है। सेब के कई बार फूल झड़ जाते हैं तो कई बार फल ही तबाह हो जाते हैं। ऐसे में विदेशों में अंगूरों के बागानों की तर्ज पर हिमाचल में भी किसानों ने देखादेखी में ऐंटी हेल कैनन इस्तेमाल करना शुरू किया।

कुछ बागवानों ने अपने स्तर पर मशीनें लगवाईं तो हिमाचल में बीजेपी की पिछली सरकार में जब नरेंद्र बरागटा बागवानी मंत्री थे, उन्होंने भी कुछ मशीनें लगवाईं। बाद में कई लोगों ने ऐसी मशीनें लगवाईं। कुछ समय तक तो बागवानों को लगा कि इनका बड़ा फायदा होता है, मगर पिछले साल ये ऐंटी हेल गनें फेल हो गईं और शिमला में बागीचों वालों के यहां भारी तबाही मची, खूब ओले गिरे और वो भी गोल्फ बॉल से भी बड़े आकार के।

क्या है हेल गन?
हेल गन एक ऐसी मशीन है, जिसके निर्माता दावा करते हैं कि ये ऐसी जोरदार शॉकवेव पैदा करीत है कि ऊपर वायुमंडल में ओले नहीं बन पाते हैं। ऊपर की तरफ खुलने वाली ये तोपें जोरदार खड़ाका करती हैं। जरा नीचे वीडियो देखें:

इसकी प्रक्रिया ये है कि घनघोर बादल छा जाएं और लगे कि बस बरसने वाले हैं, सिस्टम को ऑन कर दिया जाता है। एक से दस सेकंड के अंतराल पर ये इस तरह से खड़ाके करती रहती है।

क्या होता है इन खड़ाकों से?
मशीन के निचले हिस्से में एसिटाइलीन और ऑक्सिजन के मिश्रण को जलाया जाता है। इससे जो धमाका पैदा होता है, वह तोप, जो कि बाजे की तरह ऊपर की तरफ चौड़ी होती चली जाती है, से कई गुणा शक्तिशाली होकर आसमान की तरफ निकलता है। इससे एक झटका यानी ध्वनि की शॉक वेव पैदा होती है। यह झन्नाटा ध्वनि की गति से ऊपर जाता है और माना जाता है कि ऊपर बादलों में हलचल पैदा कर देता है। इन गनों को बनाने वाले दावे करते हैं कि इससे ओले बनने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है यानी ओले नहीं बनते हैं।

क्या है वैज्ञानिक आधार?
यह हैरानी की बात है कि अब तक वैज्ञानिक रूप से कहीं भी साबित नहीं हुआ है कि ये कैनन प्रभावशाली हैं और वाकई ये ओले नहीं बनने देती। विभिन्न शोध इसे पैसे और समय की बर्बादी करार दे चुके हैं। सिर्फ कंपनी के विज्ञापनों या फिर समाचारों में कुछ किसानों की बात के आधार पर इसकी कामयाबी की खबरें आती हैं। वैज्ञानिक रूप से इनकी उपयोगिता साबित नहीं हुई है।

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बेकार मानते हैं साइंटिस्ट
साइंटिस्ट कहते हैं कि अगर इस तरह की तोप वाले धमाके से ही अगर ओले बनने की प्रक्रिया रुकती होती तो बादलों में जो गड़गड़ाहद पैदा होती है, वह तो इस तोप से कहीं ज्यादा शक्तिशाली होती है। फिर तो उस नैचरल गड़गड़ाहट से ही ओले बनने की प्रक्रिया रुक जानी चाहिए थी। फिर गरजने वाले बादलों के बावजूद ओले कैसे गिर जाते हैं?

कहां से आया कॉन्सेप्ट
यूरोप से ये कॉन्सेप्ट आया। सबसे पहले तूफान आने पर लोग चर्चों के घंटों को जोर से बजाया करते थे। फिर वे रॉकेट और तोपें दागने लगे। फिर थोड़ी और साउंड पैदा करने वाली तोपें लगाई जाने लगीं। पहले ये तोपें कैसी होती थीं, आप नीचे देख सकते हैं।

फिर भी लोकप्रिय क्यों हो रही हैं?
यह ध्यान देना होगा कि पूरी दुनिया में मौसम का पैटर्न बदल रहा है। आप देखते होंगे कि ओले हमेशा नहीं गिरते। आप पहाड़ों में रहते हों या मैदानी इलाकों में। ओले कभी-कभी ही गिरते हैं। तो होता यह है कि बागवान बादल छाते ही इन तोपों को दागना शुरू कर देते हैं। अगर ओले नहीं गिरते हैं तो वे खुश होते हैं कि कामयाब हो गई तोप। कम गिरते हैं तो सोचते हैं कि चलो, कुछ कम कर दिए तोप ने। और अगर बहुत ही गिर गए, तो सोचेंगे कि बेचारी तोप कब तक सहारा देगी, एक आध बार तो ऐसा होगा ही।

यही कारण है कि आप ऐंटी हेल गन लगाने वाले बागवान से बात करेंगे तो वह इसकी तारीफ ही करेगा। बहरहाल, जब अचानक करोड़ों में आमदानी हो रही हो, पैसा कहीं तो खर्च करना है। इसलिए कंपनियां अपने उत्पाद बेचने के लिए तरह-तरह के प्रचार करती हैं। और बागवान भी ज्यादा आय और नुकसान कम करने के चक्कर में सोचते हैं कि मशीनें लगवाने में क्या बुराई है। ऐसे में क्या ये गन्स ठीक वैसी ही व्यवस्था नहीं है जैसे बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए काला टीका लगा दिया जाता है?

मगर प्रश्न उठता है कि आखिर सरकार किस स्टडी और किस रिसर्च के आधार पर हेल गन में सब्सिडी दे रही है? उसने पास कौन से आंकड़े (बागवानों की राय या अनुभव और खबरों के इतर) हैं, जिनको स्टडी करके उसने पाया कि पहले यहां ओले ज्यादा गिरते थे, मगर हेल गन लगाने से कम गिरने लगे। और ये आंकड़े कितने सालों के हैं? और अगर ये गन वाकई कारगर है, तो सरकार के पास इस बात के क्या आंकड़े हैं कि हिमाचल में कम होती जा रही बर्फबारी या बारिश के लिए भी ये जिम्मेदार नहीं हैं?

सरकार जरूर दे सब्सिडी और बागवानों की सहायता करे, मगर पूरे रिसर्च के साथ ताकि कंपनियां अपना उत्पाद बेचने के चक्कर में बागवानों और सरकार को चूना न लगाए। क्योंकि इन मशीनों में एक-एक की कीमत लाखों-करोड़ों में है।

रिसर्च पढ़ें

अगर आपने ये गन लगाई है या आपके आसपास लगी है, अनुभव के आधार पर कॉमेंट करके बताएं, ये कारगर हैं या नहीं।