पशुओं की तरह हू-हू करते हैं विपक्षी सांसद: शांता कुमार

कांगड़ा।। धर्मशाला में बीजेपी सांसद शांता कुमार ने कहा कि विपक्ष के सांसदों ने संसद का मजाक बनाकर रख दिया है। उन्होंने कहा, “विपक्ष के सांसद पशुओं की तरह हू-हू की आवाज निकालकर संसद की कार्यवाही नहीं चलने दे रहे।”

कांगड़ा लोकसभा सीट से सांसद शांता ने कहा कि विपक्ष के सांद हू-हू की आवाज निकालकर चर्चा की मांग करते हैं और जब सरकार चर्चा के लिए तैयार होती है, तब भी वे शोर मचाते रहते हैं। इन सांसदों को संसद में आकर शोर मचाने के लिए ही भत्ता मिल रहा है।

बीजेपी की ओर से विपक्ष के सांसदों के संसद में आचरण के विरोध में देशभर में रखे गए उपवास के दौरान धर्मशाला में शहीद स्मारक के सामने शांता भी उपवास पर बैठे थे। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सांसदों की इस हरकत पर उन्होंने संसद की कार्यवाही देखने आए बच्चों को गैलरी में बैठकर हंसते हुए देखा है।

शांता कुमार ने कहा, इन हरकतों से वह दुखी हैं और ऐसा आचरण देखकर आंखों में आंसू तक आ गए।

बहरहाल, शांता कुमार जिस ‘हू-हू’ की आवाज का जिक्र कर रहे थे, उसका वीडियो आप नीचे देख सकते हैं-

नूरपुर के विधायक ने कहा- अखबार पर होगा मानहानि का केस

शिमला।। नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया आज मीडिया के सामने आए और उन्होंने उस खबर को गलत और तथ्यों से परे करार दिया, जिसमें कहा गया था शवों को मुख्यमंत्री के इंतजार में अस्पताल में रोका गया था और रात को परिजनों को सौंपे गए शवों को वापस मंगवाया गया था।

राकेश पठानिया ने कहा कि अगर कोई यह साबित कर दे कि रात को एक भी शव सौंपा गया था और बाद में इन्हें घरों से मंगवाया गया था मैं अपने पद से इस्तीफा दे दूंगा। उन्होंने कहा कि अखबार के ऊपर मानहानि का दावा किया जाएगा और विधानसभा में भी प्रस्ताव लाया जाएगा। गौरतलब है कि एक अखबार ने दावा किया था कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के लिए शव रोके गए थे और कुछ को सौंप दिए जाने के बाद वापस भी मंगवाया गया था।

उन्होंने कहा कि पोस्टमॉर्टम के लिए दो डेड हाउस बनाए गए थे और सभी पोस्टमॉर्टम उसी दौरान हुए, जब परिजन अस्पताल परिसर में थे। उन्होंने कहा कि सारी प्रक्रिया पूरी होने तक 10 बज चुके थे और मुख्यमंत्री, सवा दस वहां पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री, विपक्ष के नेता और अन्य सभी नेता किसी कार्यक्रम के लिए नहीं, बल्कि अपनी मर्जी के से वहां पहुंचे थे।

पठानिया ने कहा कि सभी शव तभी परिजनों को दिए गए, जब उनके पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी हो गई। उन्होंने कहा कि अगर एक भी शव पहले दिया जाता तो बेचैन लोगों को गुस्सा भड़क सकता था। उन्होंने कहा कि मासूमों की मौत पर राजनीति करना सही नहीं है औऱ जो खबरें छपी हैं, वह दुख देने वाली हैं।

बता दें कि इस बीच एक शख्स का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह बिलखते हुए कह रहे हैं कि उनके दो बच्चों के शव दिए जाने से यह कहते हुए इनकार किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री आएंगे तब देंगे।

हालांकि इस वीडियो से यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उनसे ऐसी बात किसने कही थी और उन्हें यह पता था या नहीं कि रात को पोस्टमॉर्टम हुए हैं या नहीं। क्योंकि प्रशासन का कहना है कि रात को पोस्टमॉर्टम नहीं हुए और सुबह साढ़े 7 बजे यह काम शुरू हुआ (पढ़ें)।

बहरहाल, इस वीडियो को लेकर भी राजनीति शुरू हो गई है। इस वीडियो को पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा डेप्युटी एडवोकेट जनरल नियुक्त किए गए विनय शर्मा ने शेयर किया है और सरकार पर सवाल उठाए हैं। हालांकि उनकी पोस्ट को यह कहते हुए राजनीति से प्रेरित बताया जा रहा है कि वह कांग्रेस और वीरभद्र के पक्ष में और बीजेपी के विरोध में वीडियो और पोस्ट्स डालते रहे हैं। उन्होंने कोटरोपी हादसे को एक वीडियो में देवताओं का दंड बताया था यह कहते हुए कि गुड़िया केस में बीजेपी द्वारा हिमाचल को बदनाम किए जाने के दंड में देवताओं ने यह सजा दी है।

PWD का कारनामा- एक माह पहले पक्की की गई सड़क पर उगी घास

मंडी।। हिमाचल प्रदेश में सड़कों की दयनीय स्थिति किसी से छिपी नहीं है। समस्या यह है कि निर्माण कार्य इतना घटिया हो रहा है बहुत जी जगहों पर कि पक्की किए जाने के कुछ ही महीने के अंदर सड़कों की स्थिति कच्ची से भी बदतर हो जाती है। ऐसा ही मामला अब मंडी जिले से सामने आया है।

जिले के जोगिंदर नदर में खड़िहार ग्राम पंचायत के तहत छोह से डोल के बनी बीच की टायरिंग को एक महीना भी नहीं हुआ कि वह उखड़ने लगी है। यही नहीं, जहां उखड़ी नहीं है, वहां बीच पर घास उग आई है।

Image: Ranjeet Chauhan/FB

सड़क की यह दुर्दशा दिखाती है कि कितना घटिया काम किया गया है। यदि विभाग ने ठेकेदार के माध्यम से भी यह सड़क बनवाई है तो क्वॉलिटी चेक करने की पूरी की पूरी जिम्मेदारी PWD की ही बनती है।

लोगों में सड़क पक्की करने के नाम पर की गई लीपापोती को लेकर आक्रोश है। कई लोगों ने सड़क की खस्ता हालत की तस्वीरें फेसबुक पर शेयर की हैं।

सोशल मीडिया पर लोग अपनी परेशानी का इजहार तो कर ही रहे हैं, लोक निर्माण विभाग का यह कहकर भी मजाक उड़ा रहे हैं कि शायद उसने कोई पर्यावरण प्रेमी तकनीक इस्तेमाल करते हुए सड़क बनाई है जो एक महीने में पक्की सड़क के बीच घास उग आई।

बहरहाल, इस सड़क के किनारे ड्रेनेज के लिए न तो नालियां दिख रही हैं और न ही किसी तरह का स्लोप। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि तय मानकों का इस्तेमाल करते हुए सड़क क्यों नहीं बनाई गई। वरना आने वाले दिनों में जब बरसात होगी, तब तो सड़क का नामो-निशां ही मिट जाएगा।

नाइजीरिया में बंधक हिमाचली युवकों की रिहाई का रास्ता साफ

शिमला।। नाइजीरिया में बंधक बनाकर रखे गए हिमाचल प्रदेश के तीनों युवकों की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इसकी जानकारी दी है।

हिमाचल के ये तीनों युवक मर्चेंट नेवी में थे। समुद्री लुटेरों ने इन्हें बंदूकों के दम पर अगवा कर लिया था और नाइजीरिया में बंधक बनाकर रखा था। लुटेरे इन लड़कों के परिजनों से रिहा करने के बदले भारी भरकम फिरौती मांग रहे थे।

तीनों युवा कांगड़ा जिले के हैं। इनमें अजय कुमार पालमपुर से है, पंकज नगरोटा बगवां से और सुशील कुमार नगरोटा सूरिया से।

परिजन काफी दिनों से इन्हें छुड़ाने की मांग कर रहे थे और वे बदले में लुटेरों द्वारा मांगी गई रकम देने को भी तैयार थे। यह मामला विधानसभा में भी उठा था और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा था कि विदेश मंत्रालय लगातार नाइजीरिया के दूतावास के संपर्क में है।

‘फर्जी’ निकली अखबार की खबर, नहीं मंगवाए गए थे घर से शव

शिमला।। कल यानी 10 अप्रैल को नूरपुर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के लिए स्कूल बस हादसे के मृतकों के शव रोके जाने की खबर को स्थानीय प्रशासन ने फर्जी और निंदनीय करार दिया है। अखबार ने आज दावा किया था कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के लिए शवों को तीन घंटे तक रोका गया जबकि पोस्टमॉर्टम हो चुके थे। मगर अब जानकारी सामने आई है कि पोस्टमॉर्टम का काम साढ़े 10 बजे खत्म हुआ है।

साढ़े 7 बजे शुरू हुए थे पोस्टमॉर्टम
इस संबंध में ‘इन हिमाचल’ को कुछ दस्तावेज मिले हैं, जो बताते हैं कि शवों के पोस्टमॉर्टम का काम 10 अप्रैल को सुबह साढ़े 7 बजे शुरू हुआ था और वह साढ़े 10 बजे तक चला। जबकि अखबार ने दावा किया था सुबह साढ़े सात बजे तक पोस्टमॉर्टम हो चुका था।

उस खबर का शीर्षक, जिसे गलत बताया जा रहा है।

नहीं मंगवाए गए शव
प्रशासन ने अखबार के उस दावे को भी झूठा बताया है, जिसमें कहा गया था कि रात को सौंपे गए शवों को भी वापस मंगवाया गया। पहले भी खबर को लेकर सवाल उठ रहे थे कि किनके शव मंगवाए गए हैं, उनका अखबार ने जिक्र क्यों नहीं किया है।

इस संबंध में कांगड़ा के उपायुक्त का कहना है , “सीएमओ द्वारा मुताबिक 10 तारीख को सुबह साढ़े सात बजे पोस्टमॉर्टम शुरू हुए थे और यह काम साढ़े 10 बजे तक पूरा कर लिया गया। ऐसा कहना गलत है कि नौ अप्रैल को ही परिजनों को शव सौंप दिए गए थे और फिर दोबारा मंगवाए गए। पोस्टमॉर्टम घटना वाले दिन नहीं किया जा सका था क्योंकि उस दिन हमारी प्राथमिकता थी घायलों का इलाज करना।”

सीनियर मेडिकल ऑफिस की रिपोर्ट।

डीसी कांगड़ा संदीप कुमार के मुताबिक, एसपी कांगड़ा की रिपोर्ट भी पुष्टि करती है कि शवों को सौंपे जाने में किसी तरह की देरी नहीं की गई है।

एसपी कांगड़ा की ओर से डीसी कांगड़ा को भेजी गई रिपोर्ट।

मुख्यमंत्री ने नहीं बांटी राहत राशि
अखबार ने दावा किया था कि स्थानीय विधायक और उनके लोगों ने परिजनों को यह कहकर रोका था कि सीएम राहत राशि देंगे। इस संबंध में उपायुक्त ने कहा है, “स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के शवों को संबंधित स्थानों तक ले जाने का इंतजाम करने में भी सावधानी बरती है। साथ ही मुख्यमंत्री या किसी भी अन्य ने सिविल अस्तपाल नूरपुर के परिसर में किसी तरह की राहत राशि नहीं बांटी।”

उपायुक्त कांगड़ा के लेटर का वह हिस्सा, जिसमें खबर को गलत बताया गया है।

उपायुक्त लिखा है, “इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में पूरा प्रशासन बेहद सावधानी, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ आगे आया। दैनिक भास्कर में 11 अप्रैल को छपी रिपोर्ट झूठी, निराधार, गैरजिम्मेदाराना औऱ निंदनीय है।”

बता दें कि ‘इन हिमाचल’ के पास बच्चों के पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट्स भी उपलब्ध हैं मगर उन्हें परिवारों की गोपनीयता और निजता का सम्मान करते हुए प्रकाशित नहीं किया जा रहा है। बहरहाल, सुबह तक अखबार की रिपोर्ट पर पत्रकार सवाल उठा रहे थे और अब शाम तक प्रशासन की तरफ से भी स्पष्टीकरण आ गया है।

सोशल मीडिया पर चर्चा है कि पत्रकारों को इस तरह की संवेदनशील घटना पर सनसनी बनाने के लिए कुछ भी प्रकाशित करने के बजाय उन मुद्दों पर सरकार और प्रशासन को घेरना चाहिए, जिन पर वाकई उनकी जवाबदेही बनती है।

पढ़ें- नूरपुर हादसा: अखबार के दावे पर पत्रकारों ने ही उठाए सवाल

नूरपुर हादसा: अखबार के दावे पर पत्रकारों ने ही उठाए सवाल

शिमला।। नूरपुर स्कूल बस हादसे को लेकर बुधवार के दैनिक भास्कर पर छपी रिपोर्ट को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। स्थानीय पत्रकार और मीडिया के अन्य दिग्गज इस रिपोर्ट में किए गए दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े रहे हैं। बता दें कि अखबार ने दावा किया था कि सीएम के इंतजार में परिजनों को तीन घंटे तक शव नहीं दिए गए। यही नहीं, ऐसा भी कहा गया कि रात को सौंपे गए शवों को भी वापस मंगवाया गया।

चूंकि यह खबर सिर्फ दैनिक भास्कर में ही है, अन्य अखबारों में नहीं, ऐसे में ‘इन हिमाचल’ ने अन्य अखबारों के प्रतिनिधियों से बात की तो उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई घटना उनके संज्ञान में नहीं है। घटना को लेकर उनके पास जो जानकारियां हैं, वे अखबार में दी गई जानकारियों से मेल नहीं खातीं।

इस बीच सोशल मीडिया पर भी कुछ पत्रकारों ने इस रिपोर्ट के तकनीकी पहलुओं पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। जैसे कि अखबार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि पोस्टमॉर्टम का काम सुबह साढ़े सात बजे तक पूरा हो चुका था, जबकि पत्रकारों का कहना है कि रात को पोस्टमॉर्टम विशेष परिस्थितियों में ही किया जाता है ऐसे में यह काम सुबह शुरू हुआ था। यही नहीं, अखबार ने लिखा है कि रात को सौंपे गए शव वापस मंगवाए गए। इस दावे को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि ऐसा भला कौन करेगा।

सोशल मीडिया पर इस शीर्षक को सनसनीखेज बताया जा रहा है और कहा जा रहा है कि किन लोगों के शव वापस मंगवाए गए, उनका नाम लिखा जाना चाहिए था। ‘इन हिमाचल’ के पास जैसे कि प्रशासन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया आएगी, उसे यहां प्रकाशित किया जाएगा। पहले पढ़ें, पत्रकार क्या दावा कर रहे हैं सोशल मीडिया पर-

‘सुबह हुए पोस्टमॉर्टम’
वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश ठाकुर ने फेसबुक पर लिखा है, “हमने भी अपने जितने भी सोर्स थे सब से पूछ कर हादसे के कवरेज की है लेकिन सब ने यह बताया की सारे पोस्टमोरट्म सुबह हुए है।” वह लिखते हैं, “भास्कर के अनुसार पोस्टमॉर्टम सुबह 7.36 पर समाप्त हो चुके थे जबकि दूसरे सब अखबार और लोग कहते है कि यह कार्य सुबह साढ़े सात बजे के करीब शुरू हुआ है और 10 बजे तक बच्चों के शव सौंपे गए। चालक के शव का पोस्ट्मॉर्टेम 11 बजे होने की बात कही जा रही है।”

‘किनके शव वापस मंगवाए गए?’
उन्होंने शव वापस मंगवाए जाने की खबर पर लिखा है कि जिनके शव वापस मंगवाए गए हैं, उनका नाम लिखा जाना चाहिए था। प्रकाश ठाकुर लिखते हैं, “जब सारे बच्चों के शव नूरपुर अस्पताल मे थे तो कौन से शव परिजनों को सोंप दिए गए थे। रात को तो कोई पोस्टमॉर्टम हुआ नहीं तो फिर कैसे शव परिजनों के घर मे पहुँच गए। अगर शव वापस बुलाये गए तो उन के नाम लिखे जाने चाहिए थे …जो लिखे नहीं गए है …. अब राम ही जाने की इस खबर को क्यों और कैसे लिखा गया है।”

वहीं सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले एक अन्य यूज़र एम. कश्यप लिखते हैं, “कौन ऐसे माता पिता होंगे जो शव वापस दे देंगे? कौन सा पोस्टमार्टम रात को हुआ? सात बजे से शुरू हुए पोस्टमार्टम साढ़े दस बजे तक तो चले ही हैं। मुख्यमंत्री ने फूलों के साथ बच्चों को भेजा तो क्या गुनाह किया?”

अखबार के दावों के संबंध में ‘इन हिमाचल’ को जैसे ही प्रशासन की तरफ से आधिकारिक जानकारी मिलेगी, उसे यहां  प्रकाशित किया जाएगा। बहरहाल, इस दर्दनाक घटना को लेकर हो रही पत्रकारिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

नूरपुर में जयराम और नड्डा के आने तक रोके रखे शव: मीडिया रिपोर्ट

कांगड़ा।। नूरपुर बस हादसे में मारे गए बच्चों और अन्य लोगों का कल अंतिम संस्कार कर दिया गया। मगर एक अखबार ने दावा किया है कि सुबह साढ़े 7 बजे तक पोस्टमॉर्टम पूरे हो जाने पर भी तीन घंटों तक शवों को परिजनों को नहीं सौंपा गया। हालांकि इस रिपोर्ट के कुछ दावों पर सवाल उठना शुरू हो गए हैं।

पढ़ें- नूरपुर हादसा: अखबार के दावे पर पत्रकारों ने ही उठाए सवाल

दैनिक भास्कर अखबार ने लिखा है कि बच्चों को श्रद्धांजलि देने के लिए मंच बनाया गया था, साथ ही पंडाल लगाकर माइक और लाउड स्पीकर की भी व्यवस्था की गई थी।

स्थानीय विधायक पर आरोप
अखबार ने लिखा है कि ‘बूंदाबांदी शुरू हो चुकी थी और परिजन चाहते थे कि बच्चों के शव तुरंत सौंप दिए जाएं मगर स्थानीय विधायक राकेश पठानिया और उनके लोगों ने यह कहकर रोका गया कि मुख्यमंत्री जयराम आएंगे और खुद राहत राशि के चेक देंगे।’

अखबार ने दावा किया है कि नूरपुर आने के लिए केंद्रीय मंत्री नड्डा पौने नौ बजे गग्गल एयरपोर्ट उतरे और वहां पर वह मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का इंतजार करते रहे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर आठ बजे मंडी के सर्किट हाउस से निकले लेकिन वहां उन्हें लोगों और फरियादियों ने घेर लिया। उन्होंने पौन नौ बजे मंडी से उड़ान भरी।

नूरपुर में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा समेत अन्य नेताओं ने करीब साढ़े दस बजे गाड़ियों में रखे गए बच्चों के शवों पर जाकर फूल आदि अर्पित करके श्रद्धांजलि देना शुरू किया। अखबार लिखता है कि परिजनों को इससे कुछ ही देर पहले शव दिए गए थे और गाड़ियों को भी रोका गया था।

अगर इस खबर में सच्चाई है तो यह प्रशासन और स्थानीय विधायक समेत उन तमाम लोगों के रवैये पर सवाल खड़ी करती है, जिन्होंने सिर्फ इसलिए शव रोके कि श्रद्धांजलि देने के लिए मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री लेट हो गए।

सोशल मीडिया पर इस खबर को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि लेट हो जाने पर लोगों के घर जाकर भी शोक प्रकट कर किया जा सकता था। भला ऐसी श्रद्धांजलि का क्या फायदा जो औपचारिकता के अलावा कुछ न हो।

नूरपुर: किनारे से टूटी हुई है सड़क, 6 माह पहले गिरा था ट्रक

कांगड़ा।। नूरपुर में जिस जगह पर हादसा हुआ है, जानकारी सामने आई है कि वहां पर छह महीने एक ट्रक भी गिरा था। बताया जा रहा है कि स्कूल बस खाई में गिरने के बाद उसी जगह पहुंच गई, जहां पर ट्रक का मलबा गिरा हुआ था।

चेली गांव के पास इस जगह की जो तस्वीर सामने आई है, उसमें साफ देखा जा सकता है कि सड़क के किनारे का हिस्सा टूटा हुआ है। साथ ही यहां पर पैरापिट तक नहीं हैं।

जैसा कि घटना में जख्मी हुए बच्चे रणवीर ने दावा किया कि बाइक को पास देते समय बस सड़क से बाहर गिरी (यहां क्लिक करके पढ़ें), उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर सड़क चौड़ी होती और बाकायदा पैरापिट लगे होते तो शायद यह हादसा न होता।

बच्चे के दावे पर यकीन करें तो यह बेशक दुर्योग था कि बाइक को अचानक इसी जगह पर पास देना पड़ा, जिसके कारण ड्राइवर ने अचानक स्टीरिंग मोड़ा और जगह कम होने के कारण टायर सड़क से बाहर चले गए और बस खाई में गिर गई।

भले ही सड़क वाला हिस्सा सुरक्षित है लेकिन सवाल उठता है कि सड़क को नुकसान पहुंचा था और एक ट्रक यहां से गिर चुका था, तब लोक निर्माण विभाग ने क्यों इस सड़क की मरम्मत नहीं की? क्यों यहां पैरापिट नहीं थे? अब बेशक विभाग कह रहा है कि इस बात की जांच होगी कि पैरापिट क्यों नहीं बने, मगर सवाल उठता है कि हर बार हादसा होने के बाद ही क्यों इस तरह की बातें होती हैं?

यह बात सही है कि हादसे बताकर नहीं होते और कहीं भी हो सकते हैं और कभी भी हो सकते हैं। मगर हमें यह मानना होगा कि लापरवाही के कारण हादसों के बढ़ने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। इस मामले में क्या हुआ, क्यों हादसा हुआ, यह तो न्यायिक जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। मगर अभी कहीं न कहीं पीडब्ल्यूडी की भी गलती नजर आ रही है। सड़कें खराब होने पर हादसे होने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं।

नूरपुर हादसा: इस बहादुर बच्चे ने सड़क तक चढ़कर बताई हादसे की बात

कांगड़।। कांगड़ा ज़िले के नूरपुर में सोमवार को हुए स्कूल बस हादसे में मरने वालों की संख्या 28 हो गई है। इनमें 24 बच्चे हैं, एक बस का ड्राइवर, दो अध्यापक और एक महिला। इस हादसे को लेकर जो जानकारियां सामने आई रही हैं, वे बता रही हैं कि हादसा हुआ कैसे।

इस घटना में बस में सवार रहे रणवीर नाम के छात्र ने मीडिया को जो बताया है, उससे पता चलता है कि समाज कितना संवेदनहीन हो चुका है। बच्चे का कहना है कि बस एक बाइक को पास देते समय गिरी। अगर ऐसा था उस बाइक वाले ने किसी को सूचना नहीं दी कि बस गिर गई है। ये तो वह बच्चा खाई से ऊपर चढ़कर सड़क पर आया और फिर उसने वहां से गुजर रहे एक अन्य बाइक सवार को बताया कि उनकी बस खाई में गिर गई है।

पढ़ें: वीडियो देख आप भी कहेंगे, स्कूल बसों में सीट बेल्ट जरूर हो

अगर रणवीर इस हादसे के बारे में न बताता तो शायद इतनी जल्दी किसी को पता नहीं चलता क्योंकि उस जगह से भला कौन 400 मीटर गहरी खाई में झांकता। रणवीर ने बताया कि एक बाइक को पास देने के लिए बस चालक ने स्टीरिंग दूसरी तरफ मोड़ा और वह नीचे पलटी खाती हुई गिर गई।

उसने बताया कि बस के गिरते ही वह नीचे गिर गया। फिर वह 50 फुट खड़ी पहाड़ी चढ़कर सड़क तक पहुंचा। वहां एक बाइक सवार रोककर उसने बताया कि क्या हुआ। बाइक सवार इस बच्चे को वहां से कुछ किलोमीटर दूर एक दुकान पर ले गया और वहां से अन्य लोगों और प्रशासन को घटना की जानकारी दी गई।

अगर रणवीर का दावा सही है तो ऐसा नहीं हो सकता कि पास लेते हुए बस गिर जाए और बाइक सवार को पता ही न चले। अगर वह इस हादसे की जानकारी तुरंत देता तो कई मासूमों को समय पर इलाज मिलता और कई जानें बचाई जा सकती हैं।

हालांकि सच क्या है, यह जांच के बाद ही सामने आएगा। सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं।

नूरपुर में खाई में गिरी नन्हे-मुन्नों से भरी बस, 28 की मौत

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नूरपुर में सोमवार को एक स्कूल बस खाई में गिर गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 28 लोगों की मौत की खबर है, जिनमें 24 बच्चे हैं। सभी बच्चों की उम्र 10 साल से कम है और वे नर्सरी से पांचवी तक के छात्र थे। मरने वालों में ड्राइवर और दो अध्यापक भी शामिल हैं।

निजी स्कूल की यह बस उस समय हादसे की शिकार हुई, जब बच्चों को स्कूल के बाद घर छोड़ा जा रहा था। नूरपुर के मलकवाल में ठेहड़ के पास यह हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि बस में 35 लोग सवार थे। बस करीब 150 मीटर गहरी खाई में गिर गई, जिस कारण नुकसान ज्यादा हुआ है।

राहत और बचाव कार्य के लिए स्थानीय लोगों और प्रशासन ने मदद की। बाद में एनडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया। बस में सवार अन्य बच्चे भी जख्मी हैं। घायल बच्चों को सिविल हॉस्पिटल नूरपुर और पठानकोट के निजी अस्पताल में भेजा गया है।

हादसा कैसे हुआ, इसके कारणों पता नहीं चल पाया है। माना जा रहा है कि चालक ने बस पर से नियंत्रण खो दिया और बस सीधे खाई में जा गिरी। हालांकि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं और मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे का ऐलान भी कर दिया है।