रंग लाए जयराम के प्रयास, हमीरपुर में 100 सीटों वाला मेडिकल कॉलेज मंजूर

शिमला।। प्रदेश में स्वास्थ्य के क्षेत्र का विस्तार करने के लिए मुख्यमंत्री की कोशिश रंग लाई है। मुख्यमंत्री के प्रस्ताव पर केंद्र की ओर से हमीरपुर में खुलने वाले राधाकृष्ण सरकारी मेडिकल कॉलेज को स्थापित करने की मंजूरी दे दी गई है।

IMC एक्ट 1956 के सेक्शन-10A के तहत इस मंजूरी दी गई है और जिसमें 2018-19 के लिए 100 सीटें होंगी।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का धन्यवाद अदा किया है।

केंद्र सरकार की ये अनुमति प्रारंभिक रूप से 1 साल के लिए दी गई है। इसके रिन्यूवल के लिए स्कीम के अनुसार दर्शाए गए सालाना लक्ष्यों की उपलब्धियों की वेरिफिकेशन के आधार पर की जाएगी।

अनुमति के रिन्यूवल की यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी, जब तक MCI के मानदंडों के अनुसार अस्पताल की सुविधाओं का ढांचा और विस्तार पूरा नहीं किया जाता। छात्रों के अगले बैच को केंद्र सरकार की अनुमति प्राप्त करने के बाद ही भर्ती कराया जाएगा।

गुड़िया केस: ‘नीलू चरानी बोला- 4 और लोग भी थे शामिल’

शिमला।। पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले कोटखाई के चर्चित गुड़िया रेप ऐंड मर्डर केस को लेकर नई जानकारी सामने आई है। एक न्यूज चैनल ने दावा किया है कि इस मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार संदिग्ध नीलू का कहना है कि उसके साथ इस अपराध में चार लोग और शामिल थे, मगर सीबीआई उसकी बात नहीं सुन रही है।

दरअसल ‘न्यूज 18′ ने ‘पुख्ता सूत्रों’  के हवाले से लिखा है कि कैथू जेल में बंद नीलू ने अपने साथ बंद कैदियों को कहा है कि इस मामले में चार लोग और शामिल थे और वह सभी को पहचानता भी है।

खबर में लिखा गया है, “नीलू का कहना है कि वह उनके नाम नहीं जानता, मगर पहचानता है।” यही नहीं, खबर के मुताबिक कैथू जेल में बैरक नंबर तीन में बंद नीलू ने यह भी कहा है कि सीबीआई वाले उसकी बात नहीं सुन रहे हैं।

दरअसल पिछले साल 4 जुलई को कोटखाई की एक छात्रा स्कूल से लौटते समय लापता हो गई थी औऱ दो दिन बाद उसका शव निर्वस्त्र मिला था। उस समय गैंगरेप और हत्या की आशंका जताई गई थी और पुलिस ने छह लोगों को पकड़ा था, जिनमें से एक की संदिग्ध हालात में थाने में ही मौत हो गई थी।

बाद मे सीबीआई को जाच सौंपी गई थी तो पुलिस जांच में शामिल रहे अधिकारियों पर पहले पकड़े गए संदिग्ध की हत्या का आरोप लगा और वे इस समय जेल में हैं। आगे की जांच के बाद सीबीआई नीलू नाम के चरानी को ही आरोपी बनाया है। चार्जशीट में भी सीबीआई ने इसी एक शख्स को आरोपी बनाया है।

गौरतलब है कि सीबीआई ने जब कहा था कि एक ही शख्स ने वारदात को अंजाम दिया है तो सोशल मीडिया पर लोगों ने संदेह जताया था कि इस वारदाता में आखिर कैसे एक ही शख्स शामिल हो सकता है। इसके साथ ही कई नेताओं, जिनमें कांगड़ा के सासंद शांता कुमार भी शामिल हैं, ने भी सीबीआई जांच पर अंसतोष जताया था और पूछा था कि क्या पुलिस के इतने सारे लोग एक चरानी को बचाने के चक्कर में जेल पहुंच गए।

बहरहाल, न्यूज 18 के इस दावे के बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हालांकि जेल में बंद आरोपी की साथ में बंद कैदियों से हुई बात में कितना दम है, इसका पता लगाना बहुत मुश्किल है।

जल संकट के पांच दिन बाद जागे IPH मिनिस्टर पहले कहां थे?

शिमला।। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पानी की कमी को लेकर जब हालात बेकाबू थे, उस समय आईपीएच मिनिस्टर महेंद्र सिंह ठाकुर का कोई मूवमेंट या मीडिया में कोई बयान तक देखने को नहीं मिला। मगर जब हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सख्ती बरती, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने खुद कमान संभालकर पानी की स्थिति बेहतर करने का प्लान बनाया, उसके बाद महेंद्र सिंह ठाकुर सार्वजनिक रूप से नजर आए हैं। उस समय, जब शिमला में पानी की स्थिति ठीक तो नहीं, मगर पहले से थोड़ी बेहतर होना शुरू हो गई है।

शिमला नगर निगम जब पानी का संकट सुलझाने में नाकाम रही थी तो सबकी निगाहें हिमाचल सरकार के आईपीएच विभाग की तरफ टिकी हुई थीं, मगर जानकारी मिली है कि वह पांच दिन तक शिमला में ही नहीं थे, वह कल यानी मंगलवार को राजधानी पहुंचे।

उम्मीद थी कि मंत्री पद संभालने के बाद ही टैंकों की सफाई सही से न होने को लेकर अधिकारियों को सस्पेंड कर देने वाले ‘तेज़-तर्रार’ आईपीएच मिनिस्टर यहां भी कमान संभालेंगे। मगर हालात बद से बदतर होते चले गए। आलम यह था कि हाई कोर्ट को जल संकट का संज्ञान लेना पड़ा और मुख्यमंत्री तक को खुद वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठकर प्लान बनाना पड़ा।

शिमला को तीन जोन में बांटकर बारी-बारी से पानी की आपूर्ति शुरू की गई है। मगर मंगलवार को कुछ इलाकों में पानी की स्थिति ठीक नहीं हुई तो लोगों ने सचिवालय के पास आकर नारेबाजी की। मंगलवार को ही आईपीएच मिनिस्टर कुसुंपटी, न्यू शिमला के सेक्टर चार, डीएवी स्कूल से लेकर बीसीएस तक पैदल घूमकर लोगों से पूछते रहे कि पानी है या नहीं।

खास बात यह है कि इन इलाकों में पानी की आपूर्ति कर दी गई थी और मंत्री की यह कवायद अपनी छवि बनाने की कोशिश ज्यादा प्रतीत हो रही थी। इसीलिए आज मंत्री गुम्मा चले गए हैं, जहां से शिमला के लिए पानी सप्लाई होता है।

अब, जब सारी योजना बन चुकी है, मंत्री ने कल सामने आते हुए कहा- ऐसे लोगों के कनेक्शन काटने के लिए कहा गया है जिन्हें स्टोरेज टैंक से पहले ही पाइपलाइन से पानी के कनेक्शन दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग खुद भी रोज नहा रहे हैं और कुत्तों को भी नहला रहे हैं जबकि आम जनता पानी को तरस रही है।

बहरहाल, शिमला में अभी भी कई इलाकों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। मगर मंत्री जी ने उन इलाकों का दौरा नहीं किया, जहां पानी नहीं पहुंचा था। सवाल ये भी उठ रहे हैं कि जब जल संकट चरम पर था, तब वह शिमला में क्यों नहीं थे और अब, जबकि पूरी योजनाएं बन चुकी हैं, तब आकर दौरा करने और अधिकारियों को निर्देश देने का क्या मतलब है।

IPS भी नहीं रोक सकते रेप; सहमति से होते हैं ज्यादातर मामले: डीजीपी

मंडी।। हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक एसआर मरडी ने कहा है कि आईपीएस भी दुष्कर्म नहीं रोक सकते। मंडी में पत्रकारों से बात करते हुए हिमाचल प्रदेश पुलिस के मुखिया ने यह भी कहा कि ज्यादातर मामले आपसी सहमति से होते हैं और बाद में दुष्कर्म के मामले बना दिए जाते हैं।

डीजीपी सीताराम मरडी ने कहा कि एक एजेंसी के सर्वे के मुताबिक हिमाचल पुलिस अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के मामले में अव्वल है। इसके बाद महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस तरह के अपराधों में कमी आई है।

ख़बर है कि इस दौरान उन्होंने कहा, “आईपीएस या अन्य पुलिस जवान दुष्कर्म नहीं रोक सकते। अधिकतर मामले आपसी सहमति के कारण होते होते हैं जो बाद में दुष्कर्म के मामले बना दिए जाते हैं।” उन्होंने कहा कि समाज को सुधार की भी जरूरत है।

जल संकट पर शिमला नगर निगम के हाथ खड़े, अब सरकार ने बनाई ये योजना

शिमला।। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला पिछले एक दशक के सबसे भयंकर जल संकट से जूझ रही है। शिमला नगर निगम समय रहते इंतज़ाम करने में नाकाम रही है जिसके कारण ऐसे हालात पैदा हो गए हैं कि कई जगहों पर लोगों को पांचवें दिन पानी मिल रहा है तो कहीं पर होटलों को बुकिंग के पैसे लौटाने पड़ रहे हैं। अब तो सोशल मीडिया पर ऐसी अपील भी जारी की जाने लगी है कि कृपया शिमला न आएं।

नगर निगम के बैकफुट में आने के बाद अब हिमाचल प्रदेश सरकार को हरकत में आना पड़ा है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि शिमला में पानी की सप्लाई के व्यवस्था कर ली गई है और जल्द संकट को दूर कर दिया जाएघा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि शिमला के लिए तीन सिचाई कूहलों का पानी सप्लाई किया जाएगा और इन कूहलों का पानी न मिलने से जिनकी फसलों को नुकसान होगा, उन्हें मुआवज़ा दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि गिरी नदी में पानी का एक सोर्स तय कर लिया गया है और वहां से भी शहर में पानी की सप्लाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के मुताबिक उन्होंने न सिर्फ शिमला, बल्कि पानी के संकट से जूझ रहे अन्य जिलों के भी अपडेट्स लिए हैं। मुख्यमंत्री की ओर से आईपीएच मंत्री को भी निर्देश दिए गए हैं वह तुरंत जल संकट को दूर करने के लिए वृहद योजना बनाएं ताकि इस तरह के हालात पैदा ही न हों।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (File Photo)
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (File Photo)

इस बीच अश्वनी खड्ड के सैंपल को पुणे भेजा गया है और पास होते ही इसके पानी को भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। दरअसल कुछ साल पहले अश्वनी खड्ड के पानी में सीवरेज मिल जाने के कारण शिमला में पीलिया फैल गया था और कथित तौर पर दो दर्जन लोगों की मौत भी हुई थी।

ड्यूटी कोड का उल्लंघन कर रहा एक जवान, पुलिस महकमा खामोश

शिमला।। हिमाचल प्रदेश पुलिस में तैनात मनोज ठाकुर की एक कविता कुछ समय पहले सोसल मीडिया वायरल हुई थी। यह कविता लिखी किसी और ने थी और यूट्यूब पर पहले से मौजूद थी, मगर यह हिट इसलिए हुई थी क्योंकि उस कविता को जवानों से भरी बस में एक वर्दीधारी जवान पढ़कर सुना रहा था। इसके वायरल होने के बाद से मनोज ठाकुर सेलिब्रिटी बन गए और अक्सर वह सोशल मीडिया पर कविताएं सुनाने लगे।

वह कई कार्यक्रमों में शिरकत भी करने लगे हैं। मगर जिस तरह का कॉन्टेंट उनके द्वारा पढ़ी जाने वाली कविताओं में होता है, वह सरकारी कर्मचारी, खासकर पुलिस महकमे के कर्मचारी के लिए उचित नहीं है। देशभक्ति, सरकारी फैसलों के प्रति विरोध अपनी जगह सही है मगर सरकारी ड्यूटी और वह भी पुलिस महकमे में, एक जिम्मेदारी भरा काम है और उसकी अपनी मर्यादाएं होती हैं।

भारत सरकार की नीतियों के विरुद्ध टिप्पणी
देशभक्ति वाली कविताओं को सुनाने वाले मनोज ठाकुर अक्सर ऐसी बातें कहने लगे हैं, जो उनके अधिकार क्षेत्र मे नहीं हैं। उदाहरण के लिए भारत सरकार लगातार प्रयासरत है कि पाकिस्तान के साथ उसके रिश्ते सुधरें। दो देशों के आपसी मामलों पर राजनेता टिप्पणी कर सकते है मगर एक सरकारी कर्मचारी ऐसी टिप्पणी नहीं कर सकता कि वह पड़ोसी मुल्क को नष्ट कर देने की बात करे। इस तरह की कई कविताओं के बाद मनोज ने अब केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के फैसले पर ही टिप्पणी कर दी है, जो कि उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

दरअसल कश्मीर में लगातार जारी हिंसा का दौर समाप्त करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फैसला लिया था कि रमजान के महीने में सेना अपनी तरफ से कोई ऑपरेशन नहीं चलाएगी। यह फैसला इसलिए लिया गया था ताकि पाकिस्तान के उकसावे पर जो कश्मीरी गलत राह पर बढ़े हैं, वे इसे एक अच्छी पहल मानते हुए खुद भी शांति की राह पर आएं। यह एक अहम नीतिगत फैसला है और इसमें गृह मंत्रालय के ही तहत आने वाले पुलिसकर्मी सार्वजनिक मंच पर चुनौती नहीं दे सकते।

क्या मनोज ठाकुर को पुलिस विभाग ने अधिकृत किया है?
सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध हो चुके मनोज ठाकुर ने केंद्र सरकार के फैसले पर भी सार्वजनिक रूप से सवाल उठा दिए हैं और 20 मिनट का फेसबुक लाइव किया है। उनके इस वीडियो ने मीडिया में भी जगह पाई है।

वर्दी में 20 मिनट तक फेसबुक लाइव
मनोज ठाकुर पुलिस की वर्दी पहनकर वीडियो पोस्ट कर सकते हैं जबकि यह वैध नहीं है। वह ड्यूटी के दौरान ही वर्दी पहन सकते हैं और अगर वह वर्दी पहनकर 20-20 मिनट फेसबुक लाइव कर रहे हैं या वीडियो डाल रहे हैं तो यह तो नियमों का और बड़ा उल्लंघन है। क्या वह हिमाचल प्रदेश पुलिस की तरफ से अधिकृत हैं? क्या फेसबुक पर वर्दी में वह जो कविताएं डालते हैं या बयान देते हैं, क्या उसे हिमाचल पुलिस का आधिकारिक बयान माना जाए? अगर नहीं तो मीडिया में तो यही समझा जा रहा है।

पुलिस महकमे में इस संबंध में रोष देखा जा रहा है और मनोज की देखादेखी में कई पुलिसकर्मी ऑन ड्यूटी वर्दी में फोटो, वीडियो और फेसबुक लाइव करने लगे हैं। पुलिस का अनुशासन भंग होता जा रहा है। देखें, ऑन ड्यूटी (संभवत:) वर्दी में एक और जवान के साथ डाला गया वीडियो, जिसमें राजनीतिक टिप्पणियां की गई हैं।

इससे पता चलता है कि कई तरह के विवादों में फंसी हिमाचल पुलिस के अंदर अनुशासन की हालत कैसी है। जवान केंद्र सरकार के फैसलों के खिलाफ ऑन ड्यूटी वर्दी में बयान दे रहे हैं, राजनीतिक टिप्पणियां कर रहे हैं, वर्दी और ड्यूटी को अपने प्रमोशन में इस्तेमाल कर रहे हैं और आला अधिकारी खामोश हैं। गौरतलब है कि पुलिस के आला अधिकारी हाल ही में इस बात को लेकर आलोचना का सामना कर चुके हैं कि वे अपने स्तर पर खुद अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करते। उदाहऱण के लिए हाल ही में कसौली जैसी बड़ी घटना होने पर पुलिस महानिदेशक ने खुद कार्रवाई नहीं की थी, बल्कि सरकार को इस संबंध में कदम उठाने पड़े थे।

संभवत: किसी दिन जब कोई सोशल मीडिया पर डाला गया गैरजिम्मेदाराना बयान वाला ऐसा ही वीडियो अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की किरकिरी करवाएगा, तब महकमा होश में आएगा।

पानी के लिए तरसा शिमला; मेयर चीन में, डेप्युटी मेयर फेल

शिमला।। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला की हालत दिन ब दिन खराब होती जा रही है। पानी की कमी इतनी हो गई है कि लोग सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो गए हैं। वहीं पानी की किल्लत दूर करने जैसे मुद्दे को अपने अजेंडे में सबसे ऊपर बताकर निगम के चुनाव लड़ने वाली भारतीय जनता पार्टी खामोश है। मेयर कुसुम सदरेट को जिस वक्त इन हालात को दूर करने के लिए शिमला में होना चाहिए था, उस समय वह चीन में हैं।

सारे अखबारों में खबरें छपी हैं कि वह चीन गई हैं, मगर क्यों गई हैं, इसकी कोई जानकारी नहीं है। मगर एक संभावना यह बनती है कि वह चीन के ज़ेगज़ू में 27 मई से शुरू ‘इंटरनैशनल मेयर्स फोरम ऑन टूरिज़म’ में हिस्सा लेने गई हैं। सवाल यह है कि डेप्युटी मेयर के हवाले से भी कोई खबर क्यों नहीं आ रही? क्या मेयर की गैर मौजूदगी में सारी जिम्मेदारी डेप्युटी मेयर की नहीं बनती है? डेप्युटी मेयर का काम ही होता है मेयर की अनुपस्थिति में मेयर की भूमिका निभाना।

हालात बेहद खराब
जैसे ही गर्मियां तपती हैं, पड़ोसी राज्यों के लोग हिमाचल प्रदेश का रुख करते हैं। चंडीगढ़ और पंजाब-हरियाणा के करीबी इलाकों के लोग शिमला का रुख करते हैं। यानी शिमला के लिए यह गर्मियों में टूरिज़म का पीक सीज़न है क्योंकि लोग यहां राहत लेने के लिए आते हैं। मगर पानी की किल्लत ऐसी हो गई है कि स्थानीय निवासियों ही नहीं, पर्यटकों को भी दिक्कत महसूस हो रही है क्योंकि होटलों के पास भी पानी की कमी हो गई है।

गंदा पानी, भारी-भरकम रेट
पानी की कमी के कारण लूट की स्थिति पैदा हो गई है। भारी मांग के कारण पानी के टैंकर सप्लाई करने वाले 4000 लीटर का टैंकर 2500 रुपये के बजाय 5000 रुपये में दे रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि पानी कम होने के कारण कई होटलों को बुकिंग कैंसल करनी पड़ी हैं। यही नहीं, शहर के आसपास के नालों से यह पानी भरा जा रहा है। आशंका है कि अगर किसी के मुंह में ये पानी चला गया तो कहीं भयंकर बीमारियों का दौर भी शुरू न हो जाए।

कहीं हफ्ते में एक दिन पानी
कुछ जगहों पर हालत अपेक्षाकृत सही है मगर कुछ इलाके ऐसे भी हैं जहां पांचवें या सातवें दिन पानी पहुंचा है। आंकड़े ऐसे हैं कि शहर में हर रोज 22 से 23 एमएलडी पानी की आपूर्ति हो रही है। इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि शहर में कैसे हालात हैं।

सीवर मिला पानी हुआ सप्लाई
शिमला के कनलोग में नगर निगम ने सीवरेज मिला दूषित पानी जनता को सप्लाई कर दिया था। ये हालात तब हैं जब शिमला में सीवरेज वाले पानी को पीने से फैले पीलिया से दर्जनों लोगों की मौत हुए ज्यादा समय नहीं बीता है।

मेयर पर उठे सवाल
भारत के नेताओं की आदत रहती है कि सीखने के नाम पर होने वाले टूरों में वे शिरकत तो करते हैं मगर वे क्या सीखते हैं, क्या नहीं, किसी को नहीं पता। चीन में मेयर कुसुम सदरेट क्या करने गई हैं, किस कार्यक्रम में हिस्सा लेने गई हैं, इस संबंध में सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। मगर वह 27 से 30 मई तक चीन में आयोजित हो रही टूरिज़म पर मेयर फोरम में हिस्सा लेने गई हैं तो यह कोई ऐसा महत्वपूर्ण कार्यक्रम नहीं था जिसे टाला नहीं जा सकता हो।

और टूरिस्टों का ख्याल ही रखना है तो कम से कम पहले शहर में पानी की व्यवस्था तो होनी चाहिए। कुसुम सदरेट के अचानक चले जाने से पहले से ही जल संकट गहरा रहा था, मगर उन्होंने हालात को सुधारने के बजाय  चीन जाना उचित समझा। कांग्रेस ही नहीं, भाजपा के सांसदों में भी इस बात को लेकर गुस्सा है और वे अपनी नाराज़गी जाहिर भी कर चुके हैं। मगर मेयर अगर चली भी गईं, तो डेप्युटी मेयर राकेश शर्मा क्या कर रहे हैं जो कि इस समय मेयर की गैरमौजूदगी में सर्वेसर्वा हैं। उनकी नाकामी भी दिखाती है कि नगर निगम समय रहते सही इंतज़ाम करने में नाकाम रही है और अभी भी उसे समझ नहीं आ रहा कि क्या किया जाए।

एक साल में क्या किया?
ऐसा नहीं है कि ये हालात बीजेपी सरकार आने के बाद ही बने हैं। पिछले साल जून के आखिर में नए मेयर और डेप्युटी मेयर ने शहर की पानी की समस्या को दूर करने के लिए गुम्मा पेयजल परियोजना का दौरा किया था। वहां अंग्रेजों के दौर के ने टैंक नजर आए जो 19-20-1921 में बने थे। यहां ज्यादातर पंप खराब थे। 16 में से 3 पंप ही काम कर रहे थे। फिल्टर सिस्टम सालों से नहीं बदला गया था।

साफ है कि इससे पहले के पार्षदों और मेयर आदि इस दिशा में कुछ नहीं कर पाए थे। मगर बीजेपी की मेयर, डेप्युटी मेयर बने तो अब 11 महीने हो चुके हैं। क्या एक साल में पानी की किल्लत दूर करने के लिए जरूरी इंतज़ाम नहीं किए जा सकते?

शायद सब चुनावी बातें, सब चुनावी मुद्दे हैं। जनता को क्या समस्या होती है, क्या नहीं, उन्हें क्या पता। उनके घरों में सप्लाई ठीक रहती है। न भी आए तो वे सत्ता में हैं, टैंकर मंगवा सकते हैं। मगर आम जनता को तो जैसे-तैसे गुजारा करना पड़ेगा।

जयराम के मंत्री लगाएंगे ‘जनमंच’, मौके पर सुलझाएंगे समस्याएं

शिमला।। केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीएस सरकार के कार्यकाल के चार साल पूरे होने के मौके पर हिमाचल प्रदेश में जयराम सरकार ने एक नई योजना लॉन्च की है। इस योजना का नाम ‘जनमंच’ रखा गया है।

खास बात यह है कि इस कार्यक्रम के लॉन्च अवसर पर सभी मंत्री मौजूद रहे मगर वहां सम्मान के नाम पर टोपी, शॉल आदि पहनाने की व्यवस्था नहीं थी। बाद में मुख्यमंत्री ने कहा- जह जनता की समस्याओं के लिए जनमंच लगेंगे, वहां पर भी फिलूजखर्ची नहीं होगी और इस तरह से बुके देने, टोपी पहनाने जैसा काम नहीं होगा।

मुख्यमंत्री ने इस योजना के संबंध में यह भी कहा कि अक्सर देखने को मिलता है कि कार्यक्रमों में नेता या मंत्री लंबा भाषण देते हैं, मगर जनमंच कार्यक्रम होगा वहां अधिकतम 15-20 मिनट का भाषण होगा ताकि किसी को समस्या न हो।

क्या है जनमंच
पांच महीने पूरी कर चुकी जयराम सरकार ने ‘जनमंच’ के तहत हर जिले में ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करने की योजना तैयार की है, जिसमें मंत्री भी मौजूद रहेंगे और सभी विभागों के अधिकारी भी। इसके बाद मौके पर जनता की समस्याओं का निपटारा करने की कोशिश की जाएगी।

जनमंच योजना का पोस्टर (FB/Jairam Thakur)

शिमला में पीटर हॉफ में आयोजित कार्यक्रम में इस योजना को लॉन्च किया गया। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य सरकार का जनता से सीधा संवाद स्थापित करना और लोगों की समस्याओं को उनके जिलों में ही निपटाना है ताकि उन्हें राजधानी में कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।

इस मौके पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि मंत्रिमंडल के साथ कई दौर की चर्चा के बाद यह समाधान निकला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई तरह की यह पहल लोगों के लिए उपयोगी साबित होगी। उन्होंने इसे लेकर सुझाव भी मंगवाए और सहयोग की भी अपेक्षा की।

मुख्यमंत्री जयराम के सख्त तेवर, ‘डीजीपी को लगाई फटकार’

शिमला।। कसौली कांड पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए उस समय सोलन के एसपी रहे मोहित चावला समेत पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। ऐसी भी जानकारी सामने आई है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज हुई कैबिनेट बैठक में डीजीपी सीताराम मरडी को इस बात लेकर फटकार लगाई है कि इस प्रकरण को लेकर उन्होंने तुरंत खु़द कार्रवाई क्यों नहीं की।

गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में तत्कालीन एसपी मोहित चावला, डीएसपी परवाणू, तत्कालीन नायब तहसीलदार और धर्मपुर व कसौली के तत्कालीन एसएचओ को निलंबित करने का फैसला लिया गया। साथ ही पांच पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर करने से साथ ही उनके ऊपर विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

क्या है मामला
1 मई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कसौली में अवैध निर्माण गिराने गई टीसीपी की एक महिला अधिकारी और एक बेलीदार को गोली मार दी थी। महिला अधिकारी की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि बेलीदार ने बाद में उपचार के दौरान पीजीआई चंडीगढ़ में दम तोड़ा था।

अब क्या कदम उठाया गया
दो दिन तक फरार रहने के बाद हिमाचल पुलिस ने गोली चलाने वाले होटल मालिक को वृंदावन से गिरफ्तार किया था। जिस समय यह घटनाक्र हुआ था, उस समय मुख्यमंत्री और उनके कार्यालय के तमाम वरिष्ठ अधिकारी पूर्वनियोजित कार्यक्रम के तहत दिल्ली गए हुए थे।

दिल्ली से शिमला आते ही प्रारंभिक सूचनाओं और अधिकारियों के फीडबैक के आधार पर मुख्यमंत्री ने एसपी और अन्य पुलिस अधिकारियों को हटा दिया था और डिविज़नल कमिश्नर शिमला को जांच के आदेश दिए थे। डिविज़नल कमिश्नर ने यह रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें पाया गया था किन अधिकारियों की इसमें चूक रही है।

डीजीपी मरडी को ‘फटकार’
‘इन हिमाचल’ को सूत्रों से जानकारी मिली है कि मंत्रिमंडल ने डीजीपी सीताराम मरडी को पहले तलब किया और फिर फटकार लगाई गई। इस बीच नाराज़ दिख रहे मुख्यमंत्री का कहना था कि जब इतनी बड़ी घटना हो गई थी तब डीजीपी ने पुलिस विभाग का प्रमुख होने के नाते खुद कार्रवाई क्यों नहीं की। इस मामले में बाद में खुद मुख्यमंत्री को दिल्ली से आकर कार्रवाई करनी पड़ी थी। बाद में डीजीपी बैठक से भेज दिया गया।

बदले जा सकते हैं डीजीपी
जानकारी मिली है कि मुख्यमंत्री जयराम पुलिस महकमे को चुस्त-दुरुस्त करने की ठान चुके हैं और जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकते है। मीडिया के एक हिस्से में ऐसी भी चर्चा है कि मंत्रिमंडल ने डीजीपी को बदलने पर भी चर्चा की। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी संजय कुंडू अभी केंद्र के डेप्युटेशन से वापस नहीं आए हैं, ऐसे में इस विषय पर कोई निर्णय नहीं हो सका।

 

माता-पिता ने कहा, हमारी बेटी को है बाल झड़ने की समस्या: मीडिया रिपोर्ट्स

मंडी।। सुंदरनगर के एक प्राइमरी स्कूल में तीसरी क्लास में पढ़ने वाली बच्ची के सिर के बाल कथित तौर पर अध्यापिका द्वारा उखाड़े जाने के मामले में अब नई जानकारी सामने आई है। हिंदी अखबार ‘जागरण’ के मुताबिक ये बाल अध्यापिका ने नहीं नोचे थे बल्कि बच्ची को बाल झड़ने की समस्या है और यह बात मेडिकल रिपोर्ट में सामने आई है।

यही नहीं, खबर के मुताबिक बच्ची के माता-पिता ने लिखित पत्र में कहा है कि उनकी बेटी को बाल झड़ने की समस्या है और उन्होंने गांव के कुछ लोगों के बहकावे में आकर अध्यापिका के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी।

क्या है मामला
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि गणित का सवाल हल न कर पाने पर अध्यापिका ने बच्ची को बालों से पकड़कर घुमाया था और इस दौरान उसके बाल उखड़ गए। इसकी एक तस्वीर भी शेयर की जा रही थी। इसके बाद विभाग ने जांच शुरू की थी और ऐसी खबरें आई थीं कि अध्यापिका का तबादला भी कर दिया है।

मगर अब जागरण की खबर कहती है कि मेडिकल रिपोर्ट में पता चला है कि बच्ची को बाल झड़ने की बीमारी है। फिर भी पुलिस इस मामले में अभी स्किन स्पेशलिस्ट की राय लेगी।

अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, “सोमवार को जांच के लिए स्कूल पहुंचे एलिमेंटरी शिक्षा मंडी के उपनिदेशक केडी शर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी मीरा शर्मा, पीटीएफ सुंदरनगर के अध्यक्ष राम सिंह और पुलिस थाना बीएसएल कॉलोनी के जांच अधिकारी दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए।”

“जांच टीम के समक्ष छात्रा के माता-पिता ने लिखित तौर पर इस बात को कबूला की उनकी बेटी को बाल झड़ने की शिकायत है। छात्रा के परिजनों ने पुलिस को भी लिखित पत्र में इस बात को कबूल किया है कि बाल झड़ने की बीमारी है तथा गांव के कुछ लोगों की बहकावे में आकर पुलिस थाना में शिक्षिका के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवाई है।”

गौरतलब है कि इससे पहले ऐसी भी खबरें आई थीं जिनमें बच्ची के परिजन दावा कर रहे थे कि उनके ऊपर समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है।