रॉन्ग साइड पर आकर बाइक वाले को उड़ाकर फरार हुआ कार चालक

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, कुल्लू।। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला के मुख्यालय से करीब चार किलोमीटर दूर बाशिंग मोड़ पर एक टैक्सी ने मोटरसाइकल सवार को टक्कर मार दी।

सीसीटीवी कैमरे से मिली फुटेज में साफ दिखता है कि टैक्सी वाला गलत साइड से आ रहा था। मगर इस घटना के बाद उसने रुकना तक ठीक नहीं समझा और वहां से भाग गया।

इस हादसे में मोटरसाइकल सवार जख्मी हो गया है। उसकी टांग टूट गई है और कुल्लू के रीजनल हॉस्पिटल में उसका इलाज हो रहा है।

एसपी कुल्लू शालिनी अग्निहोत्री ने बताया है कि इस घटना में घायल व्यक्ति की पहचान हरियाणा के पलवल के रहने वाले विनोद कुमार पुत्र रंजीत के तौर पर हुई है।

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एसपी ने बताया है कि इस घटना को अंजाम देने वाले टैक्सी चालक के खिलाफ मामला दर्ज करके उसे पकड़ने की कोशिश शुरू कर दी गई है।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

मौसम विभाग का अनुमान, हिमाचल में दो दिन और होगी भारी बारिश

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में शनिवार को भारी बारिश हुई जबकि अन्य इलाकों में हल्की बारिश देखने को मिली। मौसम विभाग ने पूर्वानुमान लगाया है कि अगले दो दिन तक यानी रविवार और सोमवार को भी हिमाचल के कई हिस्सों में बारिश होने की संभावना है।

शनिवार को ऊना और सुंदरनगर में 49mm जबकि मनाली और बिलासपुर में 48mm बारिश दर्ज की गई। शिमला और सोलन में 32mm, भुंतर में 27mm, धर्मशाला में 21mm, कांगड़ा में 19 और काल्पा में 11mm बारिश दर्ज की गई।

traditional rain gauges

मौसम विभाग के निदेशक मनमोहन सिंह ने मीडिया को बताया है कि ये आंकड़े शनिवार को सुबह साढ़े बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक हैं।

शनिवार को मंडी जिले में भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की गई है। कुछ इलाकों में बारिश हल्की रहेगी जबकि कहीं-कहीं पर भारी बारिश हो सकती है।

आसान शब्दों मे जानें, आखिर ‘बादल फटना’ होता क्या है

लेख: संस्कृत विश्वविद्यालय क्यों खोलना चाहती है हिमाचल सरकार?

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(मूलत: 18 जनवरी, 2018 को प्रकाशित इस लेख को दोबारा प्रकाशित किया गया है)

आई.एस. ठाकुर।। बीजेपी पर हमेशा से संस्कृत और हिंदू संस्कृति के नाम पर तुष्टीकरण वाली राजनीति करने के आरोप लगते रहे हैं और देश में कहीं पर भी नई सरकार बनती है, वहां पर ऐसे विषयों को लेकर शिक्षा मंत्रियों का बयान देना नया नहीं है। इस कड़ी में हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज भी शामिल हो गए हैं।

सुरेश भारद्वाज ने नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की 65वीं बैठक में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हिमाचल में संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। सुरेश भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश सरकार संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने में हरसंभव प्रयास करेगी और शिक्षा को और अधिक बेहतर बनाने की ओर प्रयास किए जाएंगे।

यूनिवर्सिटी खोल देने से बढ़ावा नहीं मिल जाता
दरअसल कोई भी भाषा तभी व्यावहारिक होती है, जब उसमें रोज़गार मिलता हो। आज के दौर में जहां हिंदी भाषा ही अंग्रेजी के आगे कमजोर हो रही है और मल्टीनैशनल कंपनियों से लेकर सरकारी कामकाज तक अंग्रेजी में होने लगा है। इस दौर में हिंदी भाषा में पढ़े लोगों के लिए रोज़गार मिलना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो गया है। जब हिंदी में ही रोज़गार नहीं मिल रहा तो संस्कृत विश्वविद्यालय स्थापित करके क्या हो पाएगा? यहां से निकले छात्र कहां रोज़गार पाएंगे?

देश में संस्कृत की सीटें भर नहीं रहीं
हालात ये हैं कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में संस्कृत की सीटें बड़ी मुश्किल से भरती हैं, जहां पर बाकी कोर्सों में ऐडमिशन के लिए मारामारी रहती है। राजस्थान की संस्कृत यूनिवर्सिटी में कई सीटें खाली पड़ी रहती हैं। अन्य राज्यों की यूनिवर्सिटी के विभागों का यही हाल है। फिर हिमाचल प्रदेश सरकार के शिक्षा मंत्री किस आधार पर कह रहे हैं कि संस्कृत यूनिवर्सिटी खोलेंगे।

एचपीयू में पहले से है संस्कृत विभाग
बेहतर होगा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग है, उसे और मजबूत किया जाए, सीटें और कोर्स बढ़ाकर देखें और स्टाफ भी। वो भी तब, पहले देखें कि उन कोर्सों की उपयोगिता है या नहीं। ऐसा नहीं कि लोगों को यह दिखाने के लिए आप करोड़ों रुपये खर्च करके नई यूनिवर्सिटी खोल दें कि हम संस्कृत के लिए कुछ कर रहे हैं। नाहन मेडिकल कॉलेज और नेरचौक मेडिकल के डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे बच्चे सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं और कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे हैं, उस तरह किसी का ध्यान नहीं है।

पहले रोज़गार पैदा करें, फिर बढ़ावा दें
और अगर संस्कृत के लिए कुछ करना ही है तो पहले इसे अपनी सरकार में इस्तेमाल करना शुरू कीजिए, बोलचाल में इस्तेमाल कीजिए, सरकार में पद सृजित कीजिए, प्राइवेट सेक्टर में इसके इस्तेमाल को बढा़ने के तरीके सोचिए। इसे जन-जन तक पहुंचाने के लिए सोचिए। आज अगर कोई जर्मन या फ्रेंच सीखना चाहता है तो उसकी उपयोगिता है क्योंकि ये भाषाएं रोज़गार देती हैं। मगर संस्कृत पढ़कर कहां रोज़गार मिलता है? शास्त्री या अन्य कोर्स करने के लिए पहले से ही कई संस्थान मौजूद हैं। आपकी यूनिवर्सिटी क्या नया देगी?

शिक्षा का रोज़गारपरक होना जरूरी
शिक्षा का उद्देश्य भले ही ज्ञान से उत्थान करना हो मगर आज के दौर में बड़ी समस्या रोज़गार की है। संस्कृत को बचाना अगर मंत्री जी का मकसद है तो उन्हें पहले सोचना चाहिए कि संस्कृत विलुप्तप्राय क्यों हो रही है। इसलिए हो रही है क्योंकि इसका प्रैक्टिकल इस्तेमाल कहीं नहीं बचा है आज। क्या लोग आपस में संस्कृत में बात करते हैं? क्या वे लिखते हैं इस भाषा में? क्या इस भाषा में पत्र-पत्रिकाओं की भरमार है? क्या सरकारी काम-काज संस्कृत में होता है? किसी समय फारसी हिंदुस्तान में खूब चलती थी। आज कहां है फारसी? ऐसा ही हाल संस्कृत का है।

बेहतर होगा फंड को एचपीयू या अन्य पहले से मौजूद कॉलेजों छात्रों को ऐसी शिक्षा देने पर फोकस करेंगे तो लेटेस्ट और अपडेटेड हो और जो उन्हें स्वावलंबी बना सके। पहले से ही बेरोजगारी बढ़ी हुई है, ऐसे में आप इसे बढ़ाना चाहते हैं? खैर, यह देखना दुखद है कि प्रदेश की नई सरकार भी शोशेबाज़ी में पड़ गई है, व्यावहारिकता से उसे कोई मतलब नहीं।

(लेखक लंबे समय से इन हिमाचल के लिए लिख रहे हैं, उनसे kalamkasipahi @ gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है)

सुंदरनगर में हुए धमाकों पर सही निकली ‘इन हिमाचल’ की थ्योरी

मंडी।। 18 सितंबर यानी बीते मंगलवार को सुंदरनगर में सुनाई दिए धमाकों को लेकर ‘इन हिमाचल’ की ओर से पेश की गई थ्योरी सही साबित हुई है। इन धमाकों को लेकर कई तरह ही मनगढ़ंत बातें सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही थीं। यही नहीं, सुंदरनगर में समुदाय विशेष तक पर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। मगर ‘इन हिमाचल’ ने कहा था कि इस तरह की धमाकेदार आवाज़ सुपरसोनिक विमानों के कारण पैदा हुई ‘सोनिक बूम’ के कारण पैदा होती है।

‘इन हिमाचल’ ने प्रकाशित किया था कि भारतीय वायुसेना के पास कई सुपरसोनिक यानी ध्वनि की रफ्तार से भी तेजी से उड़ने वाले विमान हैं और उनके अभ्यास के कारण इस तरह की सोनिक बूम पैदा होना स्वाभाविक है। अब प्रशासन ने इसकी पुष्टि की है। यह स्पष्ट हुआ है कि पंजाब स्थित आदमपुर एयर फोर्स स्टेशन के सुपरसोनिक फाइटर जेट सुंदरनगर में आसमान से गुजरे थे और यह जोरदार आवाज उन्हीं की थी।

क्या है सोनिक बूम और सुपरसोनिक विमानों के कारण क्यों यह धमाकेदार आवाज सुनाई देती है, जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और एक मिनट से भी कम समय में आसान भाषा में समझें। इसमें हमने बताया था कि सुंदरनगर में सुनाई दी गई आवाजों के पीछे की वैज्ञानिक वजह क्या हो सकती है।

जानें, क्या है सुंदरनगर में हुए रहस्यम धमाके की वैज्ञानिक वजह

कोक स्टूडियो को मात देता है ये हिमाचली ‘फ़ोक स्टूडियो’

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इन हिमाचल डेस्क।। कुछ साल पहले पाकिस्तान से जब कोक स्टूडियो की शुरुआत हुई, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह फॉरमैट इतना लोकप्रिय होगा। इसकी तर्ज पर हिंदुस्तान में अनप्लग्ड गानों के कई शो शुरू हुए। कोक स्टूडियो के भी कई सीजन अब तक आ चुके हैं और उनमें पुराने गानों को नए रूप में सहजता के साथ स्टूडियो में गाते हुए बनाए गए वीडियो खासे लोकप्रिय हुए।

इसी तर्ज पर ‘द मॉडर्न फोक नोट’ ने पारंपरिक पहाड़ी लोकगीतों और कुछ अन्य गानों के साथ प्रयोग किया है। ‘The Modern Folk Note’ सिरीज के तहत एक स्टूडियो में सभी वाद्ययंत्रों में प्रवीण लोगों को बिठाया गया है। वे म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाते हैं और बीच में बैठा गायक अपनी आवाज का जादू बिखेरता है।

अभी तक इस तरह के तीन संस्करण सामने आ चुके हैं और ये मैशअप लोगों को पसंद भी आ रहे हैं। बहुत कम समय में इन वीडियो को अच्छे-खासे लोगों ने देखा है। हम इक प्रयोग को आपको सुनवाने की शुरुआत दूसरे संस्करण यानी The Modern Folk Note-2 से करना चाहेंगे। इसमें गायक हैं ए.सी. भारद्वाज और म्यूजिक दिया है प्रसिद्ध संगीतकार सुरेंदर नेगी और शशि भूषण नेगी ने। पूरी कंपोजिशन काफी खूबसूरत बनकर उभरी है। देखें और सुनें-

दूसरे संस्करण को मार्च 2018 में अपलोड किया गया था और अब तक 26 लाख से ज्यादा लोग इसे देख चुके हैं। अभी हाल में तीसरा संस्करण आया है जिसमें ए.सी. भारद्वाज के साथ चारू शर्मा भी हैं।

और यह रहा पहला संस्करण-

इन गानों को खूबसूरती से पेश करने में सुरेंद्र नेगी और शशि भूषण नेगी की जोड़ी की मेहनत है। सुरेंद्र नेगी हिमाचल की म्यूजिक इंडस्ट्री में प्रतिष्ठित नाम है और गायक इंद्रजीत के कई गानों की कामयाबी के पीछे उन्हीं का हाथ है। वहीं शशि भूषण उन्हीं की विरासत को बढ़ा रहे हैं।

मिस ट्रांसक्वीन 2018 में हिमाचल का प्रतिनिधित्व करेंगी सानिया सूद

इन हिमाचल डेस्क।। सात अक्तूबर से मुंबई में होने जा रही ‘मिस ट्रांसक्वीन इंडिया’ सौन्दर्य प्रतियोगिता में शिमला की सानिया सूद हिमाचल का प्रतिनिधित्व करने वाली हैं। इस कॉन्टेस्ट में 20 राज्यों की प्रतिभागी हिस्सा ले रही हैं। यह इस प्रतियोगिता का दूसरा संस्करण है। इससे पहले पिछले साल पहली बार इस ब्यूटी पेजंट का आयोजन किया गया था।

सानिया सूद शिमला के संजौली की रहने वाली हैं। यहीं पली-बढ़ीं और स्कूलिंग भी यहीं से हुई। उसके बाद कॉलेज के लिए बेंगलुरु आ गईं और पिछले आठ साल से यहीं पर हैं। पहले इन्होंने एक कंपनी में काम किया और आजकल फ्रींलासर के तौर पर ट्रांसलेटर का काम कर रही हैं।

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‘इन हिमाचल’ को सानिया ने बताया, “मैं चाहती हूं कि हर इंसान को बराबरी की नजर से देखा जाए। ट्रांजेंडर्स और ट्रांसविमिन को लेकर लोग बहुत ख्याल रखते हैं और मैं इन्हें बदलना चाहती हूं।”

आगे वह कहती हैं, ‘हिमाचल के लोग बहुत सीधे और दिल के साफ होते हैं। उनसे यही कहूंगी कि हर इंसान को उसके अंदर की खूबसूरती के लिए पसंद या नापसंद करना चाहिए। कोई बाहर से कैसा दिखता है, उसपर नहीं जाना चाहिए। एलजीबीटी बच्चों को उसी रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए जैसे वे हैं।

क्या है मिस ट्रांसक्वीन इंडिया
मिस ट्रांसक्वीन इंडिया एक ऐसी सैंदर्य प्रतियोगिता है जो पूरे भारत के ट्रांसजेंडर लोगों के लिए है। पहली प्रतियोगिता 2017 में हुई थी और कोलकाता की निताशा बिस्वास ने यह ताज जीता था। यह प्रॉजेक्टर वैसे तो 2016 में सामने आया था मगर स्पॉन्सर न मिलने के कारण जमीन पर नहीं उतर आया था। पिछले साल गुरुग्राम में इसका आयोजन हुआ था जिसमें 16 प्रतिभागी थे। इन्हें 10 राज्यों के 1500 ट्रांसजेंडर्स में से चुना गया था।

इस प्रतियोगिता के लिए सात अक्तूबर तक वोटिंग चल रही है और यहां क्लिक करके ऑनलाइन वोटिंग की जा सकती है। सानिया ने बताया कि ऊपर दिए गए लिंक पर रोज एक वोट डाला जा सकता है।

छात्रों ने मंत्री को दिखाया आईना, बोले- मिनिस्टर बने भी तो हमारी वजह से हैं

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री किशन कपूर का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह खीझकर छात्रों को डपटते नजर आ रहे हैं। लोग मंत्री के रवैये की आलोचना कर रहे हैं और उनके व्यवहार को गलत बता रहे हैं।

क्या कहा मंत्री ने
दरअसल वीडियो में छात्र (एबीवीपी के बताए जा रहे हैं) मांग कर रहे हैं कि सरकार को छात्र संघ के चुनाव बहाल करने चाहिए। इसके बाद किशन कपूर बोलते हैं कि मैंने आपकी बात सुन ली है, आप सौभाग्यशाली हैं कि मिनिस्टर आपकी बात सुन रहा है वरना कोई नहीं सुनता है।

छात्र का जवाब
मंत्री का इतना कहना था कि  पीछे से आवाज आती है- हमारी वजह से हैं। इससे मंत्री जी का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया और बोले- ज्यादा नी बजह, कां के रैणे वाळे हो? इसके बाद मंत्री ने कहा कि मैंने आपकी बातें सुन ली हैं, स्टाफ के मुद्दे पर तुरंत फोन किया है डायरेक्टर को। छात्र की आवाज आती है- सरकार के हाथ में है छात्र संघ चुनाव बहाल करवाना।

बाद में एक लड़की कुछ मांग रखने लगती है तो मंत्री जी कहते हैं- कुछ नहीं होगा, सुन ली मैंने बात। ज्यादा बोलोगे तो कुछ नहीं सुनूंगा। ये कोई तरीका थोड़े ही होता है। वीडियो देखें-

कुछ लोग यह कह रहे हैं मंत्री जी भूल गए हैं कि जब उन्हें टिकट नहीं मिला था कैसे रोने लगे थे अब उनका रवैया अलग ही हो गया है। लोग तरह-तरह की आलोचनात्मक टिप्पणियों के साथ वीडियो को शेयर कर रहे हैं।

इस पूरे मामले में छात्रों की तारीफ की जा रही है जिन्होंने पलटकर मंत्री को अहसास कराया कि मंत्री अगर कोई बनता है तो तोप नहीं हो जाता, उसे जनता ही चुनकर भेजती है। ऐसे में वह जनता की समस्याएं या मांगें सुनकर जनता पर अहसान नहीं कर रहा होता।

#Kiki चैलेंज के बदले हिमाचली लेकर आए #Naati चैलेंज

इन हिमाचस डेस्क।। पिछले दिनों कीकी चैंलेंज काफी वायरल हुआ था जिसमें लोग ड्रेक के गाने पर डांस कर रहे थे। इसमें उन्हें कार से उतरना होता था और मंद रफ्तार से चल रही कार के साथ-साथ नाचते हुए चलना था।

भारत में बहुत से लोगों ने इस चैलेंज को लिया और सोशल मीडिया पर अपने वीडियो डाले। इनमें सेलिब्रिटीज़ से लेकर आम आदमी शामिल थे।

मगर इस खतरनाक चैलेंज के खिलाफ कई राज्यों की पुलिस ने अडवाइजरी भी जारी की क्योंकि इससे हादसे होने की आशंका बनी रहती है।

बहरहाल, इस चैलेंज का क्रेज उतार पर है मगर एक नया वीडियो सामने आया है जिसमें हिमाचल के कुछ लड़के नाटी डाल रहे हैं। हालांकि वे ड्रेक के गाने ‘इन माइ फीलिंग्स’ पर ही डांस कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को काफी पसंद किया जा रहा है। देखें:

नोट: पाठकों से अनुरोध है कि वे इस तरह का कोई काम न करें जिससे उनकी और अन्य लोगों की जान खतरे में पड़े।

6 और मंत्रियों के लिए SUVs खरीदेगी कर्ज में डूबी हिमाचल सरकार?

शिमला।। लगभग 50 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी हिमाचल प्रदेश सरकार अपने मंत्रियों के लिए 34-34 लाख रुपये की छह एसयूवी खरीदने की योजना बना रही है। राज्यपाल की मर्सेडीज़ बेंज़ को 76 लाख के एग्ज़िक्यूटिव क्लास मॉडल में अपग्रेड करने की तैयारी है।

ऐसी जानकारी सामने आई है कि अभी मंत्रियों के लिए इस्तेमाल की जा रही 12 टोयोटा केमरी गाड़ियों को टोयोटा फॉर्च्यूनर गाड़ियों से क्रमबद्ध तरीके से बदलने की तैयारी की जा रही है।

‘2 लाख किलोमीटर की लिमिट पूरी’
इस संबंध में अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट (जीएडी) के एक अधिकारी के हवाले से लिखा है कि 23-23 लाख की 12 केमरी कारों को पिछली कांग्रेस सरकार ने  खरीदा था जो अब खटारा हो चुकी हैं। इस अधिकारी ने बताया है, “छह मंत्रियों ने जीएडी को लिखा है कि उन्हें एसयूवी दी जाए क्योंकि वे लग्जरी कारों के मुकाबले पहाड़ी सड़कों के लिए ठीक रहती हैं।”

मंत्रियों का कहना है कि उनकी केमरी कार सरकार द्वारा तय 2 लाख किलोमीटर के नामक को पूरा कर चुकी है और वे कच्चे रास्तों के लिए भी ठीक नहीं हैं। अख़बार के मुताबिक उनका कहना है कि वे कच्ची सड़कों से जुड़े गांवों में जाते हैं तो केमरी कारें कम ग्राउंड क्लियरेंस होने के कारण नीचे लग जाती हैं।

कौन हैं ये छह मंत्री
जिन मंत्रियों ने सरकार को इस संबंध में लिखा है, एचटी के मुताबिक वे हैं- जनजातीय मामलों के मंत्री राम लाल मार्कंडा, सामाजिक न्याय मंत्री डॉक्टर राजीव सैजल, शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज, शही विकास मंत्री सरवीन चौधरी, ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र कंवर और स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार।

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अभी कैबिनेट के सामने आएगा मामला

अखबार ने लाहौल स्पीति का प्रतिनिधित्व करने वाले मार्कंडा के हवाले से लिखा है, ‘मेरे चुनावक्षेत्र के रास्ते मुश्किल हैं और लग्जरी कार उनके लिए ठीक नहीं। मैंने सरकार से कहा है कि मेरी गाड़ी को फॉर्च्यूनर से बदला जाए।’

एक अन्य अधिकारी के हवाले से एचटी ने लिखा है कि सैजल की कार पिछले दिनों कसौली दौरे के दौरान खराब हो गई थी, इसी के बाद कारों को बदलने का फैसला किया गया है।

तीन मंत्रियों को पिछली महीने मिली नई एसयूवी
इस समय मुख्यमंत्री के पास फॉर्च्यूनर है। अख़बार के अनुसार इसके अलावा परिवन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर, ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा और खाद्य मंत्री किशन कपूर को पिछले महीने ही सरकार ने एसयूवी दी थी। बता दें कि गोविंद ठाकुर ने तो जुलाई में कहा था कि जब तक परिवहन निगम का मुनाफा 100 करोड़ नहीं हो जाता, तब तक वह नई गाड़ी नहीं लेंगे। वहीं ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा को तो इस गाड़ी के अलावा बिजली बोर्ड से भी एक एंडेवर गाड़ी मिली है (खबर पढ़ें)।

वादा है वादों का क्या… (26 जुलाई को जागरण में छपी खबर)

इस समय सिंचाई और जनस्वास्थ्य मंत्री महेंद्र सिंह, उद्योग मंत्री विक्रम सिंह ठाकुर पिछली वीरभद्र सरकार के समय खरीदी गई फॉर्च्यूनर गाड़ियों की ही सवारी कर रहे हैं।

बता दें कि कांग्रेस सरकार के दौरान 12 केमरी कारें, मंत्रियों के लिए दो एसयूवी और वीरभद्र के काफिले के दो टोयोटा फॉर्चयूनर गाड़ियां थीं।

राज्यपाल की गाड़ी अपग्रेड होगी
राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्रधान सचिव अरुण शर्मा के हवाले से एचटी ने लिखा है कि उनकी गाड़ी 2013 में खरीदी गई थी और यह भी 2 लाख किलोमीटर चल चुकी है ऐसे में बदली जानी है। इस गाड़ी को 76 लाख रुपये की एग्जिक्यूटिव क्लास गाड़ी से रिप्लेस किए जाने का प्रस्ताव है।

इस बीच यह जानकारी सामने आई है कि जीएडी ने हाल ही में इस पूरे मामले को कैबिनेट के सामने पेश किया था मगर पिछले हफ्ते हुई मीटिंग में इसपर चर्चा नहीं हुई। माना जा रहा है कि अगली कैबिनेट बैठक में इस पर चर्चा होगी।

प्रदेश डूबा है कर्ज में, ऊर्जा मंत्री ने सरकारी पैसे से खरीदी नई SUV

नाऊ जाग: जब सुनाया जाता है ‘देवताओं और दुरात्माओं के युद्ध’ का रिजल्ट

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इन हिमाचल डेस्क।। मंडी-मनाली हाइवे पर कुल्लू की ओर जाते समय पनारसा नाम की जगह आती है। यहां से लगभग चार-पांच किलोमीटर दूर है नाऊ पंचायत। यहां पर अंबिका माता के मंदिर में सैकड़ों सालों से हर साल ‘जाग’ का आयोजन किया जाता है। अंबिका माता के जन्मदिवस के मौके पर यह कार्यक्रम होता है।

क्या है जाग
‘जाग’ मंडी और कुल्लू जिला में मनाए जाने वाला एक अलग तरह का धार्मिक आयोजन है जो इन दो जिलों की संस्कृति से सैंकड़ो सालों से जुड़ा है। दरसल हिंदी पंचाग के हिसाब से भादो महीने को इन इलाकों में काला महीना माना जाता है। भादो (भाद्रपद) यानी अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अगस्त और सितंबर के महीने के दौरान का समय। इस महीने को हिमाचल और पंजाब के कुछ इलाकों में भी काले महीने के नाम से जाना जाता है।

इस महीने धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी-देवताओं के मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और ऐसा माना जाता है की देवी-देवता महीना भर डैणों (दुरात्माओं) और दैत्यों के साथ युद्ध करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जाग वाले दिन भी रात भर देवी देवताओ और दुरात्माओं के बीच युद्ध चलता रहता है और इस दिन कुछ विशेष मंदिरो में जाग का आयोजन किया जाता है।

जाग की तिथि मंदिर के पुरोहित और वहाँ की परंपरा के अनुसार निकाली जाती है लेकिन अमूमन यह तारीख काले महीने के अंतिम हफ्ते में भी होती है। जाग वाले दिन देवताओं और बुरी शक्तियों के बीच हुए युद्ध का समापन माना जाता है और देवी-देवता के गुर (विशेष पुरोहित) के माध्यम से विभिन्न जगह हुए युद्धों का नतीजा बताया जाता है कि कौन सी जगह देवता जीते और कहाँ दुरात्माएं जातीं।

मान्यताओं के अनुसार इन जीत और हार का लोगों की फसलों, पशुओं और उनके जीवन पर आने वाले साल क्या प्रभाव रह सकता है इसपर गुर द्वारा भविष्यवाणी की जाती है। मान्यता यह है कि देवता जीते तो इंसानों के लिए आने वाला वर्ष खराब रहेगा और डैण जीते तो फसलों के लिए। ऐसा इसलिए क्योंकि माना जाता है कि इस युद्ध में दुरात्माएं जहां इंसानों और पशुओं को दांव पर लगाते हैं जबकि देवता फसलों आदि को। ऐसे में जिसकी हार होगी, मान्यताओं के अनुसार उसके द्वारा दांव पर लगाई गई चीज़ पर खतरा पैदा हो जाएगा।

मंडी स्थित ‘पोल स्टार प्रोडक्शन’ के निर्देशक मुकेश ठाकुर ने अपनी टीम के साथ पहली बार इस तरीके से ‘नाऊ जाग’ को फिल्माया है और दिखाने की कोशिश की है कि कैसे सैंकड़ो सालों से स्थानीय लोग इस परंपरा को निभा रहे हैं। इसे अंधविश्वास भी इसे कहा जाता सकता है मगर इसके सांस्कृतिक पहलू पर डॉक्युमेंट्री देखें:

आप यह डॉक्यूमेंट्री पोल स्टार हिमाचल के फेसबुक पेज या YouTube चैनल पर भी देख सकते हैं।