नैना देवी-आनंदपुर साहिब के बीच रोपवे के लिए MoU साइन

चंडीगढ़।। नैना देवी और आनंदपुर साहिब के बीच बनने वाले रोपवे के लिए हिमाचल प्रदेश और पंजाब के मुख्यमंत्रियों के बीच मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग साइन हो गया है। हिमाचल के सीएम जयराम ठाकुर और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने चंडीगढ़ में एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

यह रोपवे धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से लाभदायक होगा। गौरतलब है कि पंजाब के आनंदपुर साहिब और हिमाचल में नैना देवी मंदिर में पंजाब और देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। ऐसे में दोनों धर्मस्थलों को आपस में जोड़ने वाले इस रोपवे को काफी अहम माना जा रहा है।

गौरतलब है कि पहले भी इस रोपवे को बनाने की बातें होती रही हैं। साल 2014 में प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय इस प्रॉजेक्ट को रद कर दिया गया था।

पंजाब भवन में एमओयू पर हस्ताक्षर करने के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि यह धार्मिक पर्यटन के लिए बड़ा कदम होगा। वहीं पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हिमाचल के मुख्यमंत्री की इस कोशिश को सराहा और कहा कि दोनों सरकारों की कोशिश रंग लाई है। इस मौके पर नवजोत सिंह सिद्धू भी मौजूद थे।

देखें, दोनों स्थानों के बीच कितनी दूरी है

शादी के बाहर किसी और से अफेयर चलाना अब अपराध नहीं

नई दिल्ली।। सुप्रीम कोर्ट ने अडल्टरी को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया है। कोर्ट ने अडल्टरी (व्यभिचार) मामले में IPC की धारा 497 को असंवैधानिक करार दिया है। पांच जजों की बेंच में शामिल चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस आरएफ नरीमन, डीवाई चंद्रचूड़ ने आईपीसी के सेक्शन 497 को अपराध के दायरे से बाहर करने का आदेश दिया। बेंच में शामिल एकमात्र महिला जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने भी इसे असंवैधानिक करार दिया। ऐसे में जजों ने यह फैसला सर्वसम्मति से दिया है।

इस मामले पर फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि संविधान की खूबसूरती यही है कि उसमें ‘मैं, मेरा और तुम’ सभी शामिल हैं। CJI और जस्टिस खानविलकर ने अपने फैसले में कहा कि अडल्टरी तलाक का आधार हो सकता है लेकिन यह अपराध नहीं होगा। पीठ में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और इंदु मल्होत्रा भी शामिल हैं।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अडल्टरी कानून मनमानी भरा है और यह यह महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। उन्होंने कहा, “यह महिला की सेक्सुअल चॉइस को रोकता है और इसलिए असंवैधानिक है। महिला को शादी के बाद सेक्सुअल चॉइस से वंचित नहीं किया जा सकता है।”

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हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अडल्टरी अपराध तो नहीं होगा लेकिन अगर पत्नी अपने लाइफ पार्टनर के व्यभिचार के कारण खुदकुशी करती है तो सबूत पेश करने के बाद इसमें खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला चल सकता है।

इससे पहले 8 अगस्त को हुई सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा था कि अडल्टरी अपराध है और इससे परिवार और विवाह तबाह होता है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली संवैधानिक बेंच ने सुनवाई के बाद कहा था कि मामले में फैसला बाद में सुनाया जाएगा।

गौरतलब है कि आईपीसी की धारा-497 के प्रावधान के तहत पुरुषों को अपराधी माना जाता है जबकि महिला विक्टिम मानी गई है। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता का कहना था कि महिलाओं को अलग तरीके से नहीं देखा जा सकता क्योंकि आईपीसी की किसी भी धारा में जेंडर विषमताएं नहीं हैं।याचिका में कहा गया था कि आईपीसी की धारा-497 के तहत जो कानूनी प्रावधान हैं वह पुरुषों के साथ भेदभाव वाला है। आपको बता दें कि अडल्टरी के मामले में पुरुषों को दोषी पाए जाने पर सजा दिए जाने का प्रावधान है जबकि महिलाओं को नहीं।

याचिका में कहा गया था कि अगर कोई शादीशुदा पुरुष किसी और शादीशुदा महिला के साथ उसकी सहमति से संबंध बनाता है तो ऐसे संबंध बनाने वाले पुरुष के खिलाफ उक्त महिला का पति अडल्टरी का केस दर्ज करा सकता है लेकिन संबंध बनाने वाली महिला के खिलाफ मामला दर्ज करने का प्रावधान नहीं है जो भेदभाव वाला है और इस प्रावधान को गैर-संवैधानिक घोषित किया जाए।

दो विधायकों को बिना मतलब कैबिनेट मंत्रियों जैसा दर्जा क्यों?

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इन हिमाचल डेस्क।। कांग्रेस सरकार के दौर में हुई मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) नियुक्तियों को अनावयश्यक खर्चा बताकर खुद इस तरह की नियुक्तियां न करने की बात कहकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस साल की शुरुआत में यह कहते हुए अपनी पीठ थपथपाई थी कि इससे सरकारी खजाने पर बोझ नहीं पड़ेगा।

मगर इसके कुछ ही दिनों बाद सरकार ने ऐसा विधेयक पटल पर रख दिया था, जो हिमाचल के इतिहास में नया था। प्रदेश की नाजुक आर्थिक स्थिति के बावजूद जयराम सरकार ने सचेतक और सह-सचेतक के पद को कैबिनेट दर्जा देने का विधेयक विधानसभा में रखा और इसपर चर्चा हुई। विपक्ष ने इस विधेयक पर आपत्ति जताई और कहा कि इसे लाए जाने की कोई जरूरत नहीं है। सीएलपी लीडर मुकेश अग्निहोत्री ने कहा की ये दोनों लाभ के पद हैं और विपक्ष इसके पक्ष में नहीं है।

क्या तर्क था सीएम का
इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा था कि कई प्रदेशों की विधानसभाओं में यह प्रावधान पहले से है। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी पिछली सरकार में 9 मुख्य संसदीय सचिव बनाए गए थे, जबकि हम इस बिल को पारित कर केवल दो पद सृजित करने जा रहे हैं और विपक्ष को इसकी आलोचना नहीं करनी चाहिए। खैर, सरकार के पास स्पष्ट बहुमत है तो उसे इस विधेयक को पारित करने में कोई दिक्कत नहीं हुई।

मंत्रियों को इसलिए मिलती हैं सुविधाएं
हिमाचल में ऐसे पदों पर कभी भी कैबिनेट रैंक न दिए जाने का इतिहास रहा है। कैबिनेट रैंक मिलने का मतलब है कि इन दो पदों पर सरकार वेतन, भत्तों और सुविधाओं के मामले में मंत्री के बराबर खर्च करेगी। बता दें कि कैबिनेट रैंक के वेतन, भत्ते और सुविधाएं आदि काम के लोड के आधार पर मिलती हैं।

जैसे कि मंत्रियों के पास स्टाफ ज्यादा होता है और उन्हें एक्स्ट्रा गाड़ी मिलती है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनका काम अपने विधानसभा क्षेत्र से बढ़कर पूरे प्रदेश तक फैल जाता है। उन्हें प्रदेश के दौरे करने पड़ते हैं, हर जिले के लोगों के काम करने होते हैं। इसलिए उनके मामले में सुविधाओं को जस्टिफाई किया जा सकता है। मगर चीफ विप या सचेतक और उपसचेतक को इसकी क्या ज़रूरत?

सचेतकों का काम क्या है?
चीफ व्हिप या सचेतक दरअसल राजनीतिक नियुक्ति है। इनका काम यह सुनिश्चित करना है कि जब सरकार या सत्ता पक्ष को जरूरत पड़े तो सभी विधायक संसद में मौजूद रहें और किसी प्रस्ताव या बिल आदि पर सरकार के पक्ष में वोट करें। ऐसे ही सचेतक विपक्षी दलों के भी होते हैं। मगर स्पष्ट है कि इनका काम तो विधानसभा सेशन तक ही सीमित रहता है जो साल में तीन सत्रों में कुछ ही दिनों के लिए होता है। बाकी समय सरकारी सचेतकों के लिए मंत्री जैसी सुविधा देने का क्या मतलब है? क्या यह पहले से ही कर्ज में डूबे प्रदेश के कंधों पर और बोझ डालना नहीं है?

वैसे जिस समय सरकार ने यह विधेयक पेश किया था, उसी समय मीडिया में खबर आई थी कि पिछली भाजपा सरकार में मंत्री रहे नरेंद्र बरागटा और रमेश ध्वाला को इन पदों से नवाजा जाएगा क्योंकि इन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई है। हुआ भी ऐसा ही। नरेंद्र बरागटा सचेतक बन गए हैं, जबकि उप मुख्य सचेतक बनने के लिए धवाला तैयार नहीं है।

खर्च बढ़ा या घटा
जयराम सरकार बेशक प्रदेश की खराब आर्थिक स्थिति के लिए पिछली कांग्रेस सरकार को कोसती नजर आती है परन्तु खुद अपने नेताओं की मात्र संतुष्टि के लिए सरकार ने नया प्रावधान निकाला है। इस तरह के फैसले से यह तो पुख्ता हो गया है की मुख्यमंत्री जयराम सीपीएस नियुक्त न करने को बेशक सरकारी खर्च कम करने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रहे है मगर असल मामला अलग ही है।

आपको याद होगा कि दिल्ली विधानसभा में 20 सीपीएस को ऑफिस आफ प्रॉफिट माना गया था और अदालत के फैसले के बाद इन्हें पद से हाथ धोना पड़ा था। इस तरह सरकार चाहकर भी सीपीएस नियुक्त नहीं कर सकती थी क्योंकि इससे उसपर भी सवाल खड़े हो सकते थे। ऐसे में नाराज चल रहे नेताओं को फायदा पहुंचाने के लिए सचेतकों को कैबिनेट का दर्जा दे दिया गया।

सवाल तो उठेंगे
कानून के हिसाब से तो अब ये सही हो गया मगर क्या नैतिक रूप से सही है? खासकर उस प्रदेश के लिए जो पहले से ही लगभग 50 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डूबा है? लेकिन सवाल यह बनता है कि अगर दूसरे प्रदेश की विधानसभाओं में सचेतक आदि को कैबिनेट रैंक देकर रेवड़ियां बांटी जा रही हो तो क्या उसे हिमाचल प्रदेश में भी लागू करना सही हो जाता है? क्या सरकार को खर्च कम करने के लिए इस तरह की कवायद से बचना नहीं चाहिए?

अध्यापक पर छात्राओं को अश्लील वीडियो दिखाने का आरोप

चंबा।। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में किहार इलाके के एक प्राइमरी स्कूल में अध्यापक पर बच्चियों को अश्लील वीडियो दिखाने का आरोप लगाया है। शिक्षा विभाग ने शुरुआती जांच के बाद मामले को पुलिस के हवाले कर दिया है और अब वह आगे की जांच कर रही है।

शिकायत के मुताबिक 17 दिसंबर की यह घटना है। शिक्षक पर आरोप है कि डेप्युटेशन पर एक स्कूल में जाने के उसने कथित तौर पर छात्राओं से साथ आपत्तिजनक व्यवहार शुरू कर दिया।

यहां तक कहा जा रहा है कि टीचर ने छात्राओं को अश्लील वीडियो दिखाए और छेड़छाड़ की। बाद में जब अभिभावकों को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने इसके खिलाफ केंद्रीय मुख्य शिक्षक से शिकायत की।

इसके बाद मामला खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी के पाच पहुंचा और फिर विभाग ने छात्राओं के बयान लिए। इसके बाद पुलिस को घटना की सूचना दी गई। अब पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।

इस संबंध में अध्यापक का पक्ष सामने नहीं आया है।

HRTC ड्राइवर को उत्तराखंड के पुलिसवाले ने दी मां-बहन की गालियां

इन हिमाचल डेस्क।। देहरादून में उत्तराखंड पुलिस के जवान ने हिमाचल पथ परिवहन निगम के बस के ड्राइवर के साथ गाली-गलौच की और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी। इसका एक वीडियो सामने आया है जिसमें पुलिसवाला ऐसा व्यवहार कर रहा है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

वीडियो से यह तो पता चलता है कि नाके पर बस रोकने को लेकर किसी तरह विवाद हुआ है मगर जिस तरह से पुलिसकर्मी ने गालियां दी, लाठी लेकर हमला करने की कोशिश की और झूठा मुकदमा बनाने की धमकी दी, उससे पता चलता है कि वह पहले भी कितने लोगों के साथ ऐसा करता रहा होगा। बस ड्राइवर कहता रहा कि गालियां मत निकाल।

वरिष्ठ अधिकारी ने भी नहीं रोका
हैरानी की बात यह है कि साथ खड़े एसआई ने उसे रोकने की कोशिश नहीं की। एक मौके पर वह भी उल्टा बस ड्राइवर को धमकाता नजर आया। बस पर सवार लोग ड्राइवर का साथ देते नजर आए मगर वर्दी की धौंस दिखाने पर तुला पुलिसकर्मी गालियां बकता रहा। जबकि नाराज ड्राइवर कहता रहा कि मां-बहन की गालियां न दे। (नीचे लगे वीडियो में पुलिस वाले की गालियां हैं, कृपया अपनी जिम्मेदारी पर नीचे स्क्रॉल करें)

वीडियो के दूसरे हिस्से में बदजुबान पुलिसकर्मी झूठा मुकदमा बनाने की धमकी देता हुआ दिख रहा है। उस समय उसका चेहरा करीब से नजर आता है जिससे ऐसा संकेत मिलता है कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वह हिंसक होकर भविष्य में किसी की जान को भी खतरे में डाल सकता है।

पुलिसकर्मी के चेहरे और व्यवहार से लग रहा है कि उसे डॉक्टरी मदद की जरूरत है।

पहले भी जिस तरह से वह लाठी लेकर उछल रहा था, इससे आशंका पैदा होती है कि अगर उसके हाथ में बंदूक होती तो कोई गारंटी नहीं कि वह सनक में वह उसका इस्तेमाल करने से नहीं चूकता। सड़कों पर ऐसे खतरनाक और जंगली व्यवहार करने वाले लोगों को उतारना उत्तराखंड पुलिस के लिए ठीक नहीं है।

हिमाचल सरकार उठाए मामला
बहरहाल, हिमाचल प्रदेश सरकार को पता लगाना चाहिए कि किस बस के ड्राइवर के साथ यह बदसलूकी हुई और उसे अपने स्तर पर उत्तराखंड सरकार के सामने यह मुद्दा उठाना चाहिए ताकि ऐसे बददिमाज पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाए और एक संदेश जाए। वरना वर्दी की गर्मी में ऐसे लोग पूरे समाज को गंदा करते रहेंगे।

अभिनेत्री का दावा- धर्मशाला में जहां भी जा रही थी, पुरुष छेड़ रहे थे

धर्मशाला।। करिश्मा शर्मा नाम की मॉडल और अभिनेत्री ने एक वीडियो अपलोड करके आरोप लगाया है कि चार दिन की धर्मशाला यात्रा को उन्हें दो दिन में ही खत्म करने लौटना पड़ा क्योंकि जहां भी वह जा रही थी, पुरुषों के समूह उनका पीछा कर रहे थे, छेड़ रहे थे और घूर रहे थे। उनका यह भी दावा है कि इन लोगों के पास एक विचित्र उपकरण भी था।

अब इस मामले में कांगड़ा पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और धर्मशाला, मैक्लोडगंज, नड्डी, धर्मकोट, भागसूनाग के होटलों में वेरीफाई किया जा रहा है कि वह कहां पर ठहरी हुई थी। पुलिस को ठीक लगा तो वह जांच के लिए अभिनेत्री को धर्मशाला भी बुला सकती है।

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करिश्मा ‘रागिनी एमएमएस रिटर्न्स’ वेब सिरीज में भी काम कर चुकी हैं।

एसपी कांगड़ा संतोष पटियाल ने मीडिया को बताया है कि सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जाएगी ताकि पता चले कि किसने अभइनेत्री से छेड़छाड़ की है।

ब्लैक बिकीनी में करिश्मा
‘तेरा घाटा’ गाने से चर्चित हुईं करिश्मा इंस्टाग्राम पर डाली जाने वाली तस्वीरों के लिए सुर्खियां बटोरती रहती हैं।

पुलिस का कहना है कि करिश्मा लिखित शिकायत भी कर सकती हैं मगर पुलिस फिर भी छानबीन कर रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। करिश्मा ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया था, जिसमें उन्होंने अपना अनुभव बयान किया है।

”मैं काम से ब्रेक लेना चाहती थी। मैंने धर्मशाला जाने का फैसला लिया। एक दिन मैं अपने एक दोस्त के साथ एक खूबसूरत मंदिर में गई और हमने वहां पर कुछ तस्वीरें भी खींचीं, लेकिन जैसे ही मैं पीछे मुड़ी तो देखा कि लगभग 15 आदमी हमारे पीछे खड़े हैं। वे मुझे अजीब तरीके से घूर रहे थे। सही बताऊं तो वे मेरे स्तनों को देख रहे थे।

ब्लैक बिकीनी में करिश्मा
पुलिस का कहना है कि करिश्मा लिखित शिकायत दे सकती हैं।

मैंने एक पुलिसवाले को बताया भी, पर पुलिसवाले का जवाब बहुत अजीब लगा। परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई। इस घटना को भूल कर स्ट्रीट शॉपिंग के लिए गई। मुझे और मेरे दोस्त को लगा कि कुछ लोग हमारा पीछा कर रहे हैं। मैं बहुत डर गई और एक दुकान के भीतर घुस गई। एक बार तो मुझे ऐसा भी लगने लगा कि कहीं ये लोग मेरा अपहरण न कर लें।”

 

118 के कथित दुरुपयोग मामले में बढ़ सकती हैं गुलाब सिंह ठाकुर की मुश्किलें

शिमला।। साल 2010 में 250 से ज्यादा लोगों को धारा 118 के तहत हिमाचल प्रदेश में जमीन खरीदने की इजाजत दी गई थी। आरोप है कि इस इजाजत को देने के बदले उस समय अवैध ढंग से कई आवेदकों से वसूली की गई और फिर उन्हें जमीन खरीदने की इजाजत दी गई। अब इस मामले में मीडिया में उस समय के ताकतवर मंत्री गुलाब सिंह ठाकुर का नाम सामने आया है। बता दें कि उस समय राज्य में बीजेपी की सरकार थी, मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल थे और उनके समधी व अनुराग ठाकुर के ससुर गुलाब सिंह ठाकुर के पास राजस्व विभाग था।

स्टेट विजिलेंस को साल 2010 में एक शिकायत मिली थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि बाहरी लोगों को धारा-118 के तहत मंजूरी देने के लिए घूसखोरी का खेल चला हुआ है। ऐसे में जांच एजेंसी ने जांच शुरू की और उसके पास कथित तौर पर कुछ लोगों की बातचीत भी रिकॉर्ड है। ऐसा कहा जा रहा है कि यह मामला परवाणु और पंचकूला के करीब आधा दर्जन से अधिक कारोबारियों से संबंधित है।

इस मामले को लेकर राजस्व विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव और इस समय हिमाचल के चुनाव आयुक्त पार्थ सारथी मित्रा से पूछताछ की गई। ऐसी खबरें आई थीं कि पार्थ सारथी मित्रा ने अपने ऊपर लगाए जा रहे से इनकार किया और कहा कि हिमाचल प्रदेश टेनेंसी ऐंड लैंड रिफॉर्म्स रूल्स स्पष्ट करते हैं कि 118 के तहत अनुमति सिर्फ सरकार दे सकती है। खबरों में आशंका जताई जा रही थी कि एक मंत्री का नाम आने पर विजिलेंस के लिए यह जांच गले की फांस बन सकती है क्योंकि उस समय सरकार भारतीय जनता पार्टी की ही थी।

अब इस मामले पर पंजाब केसरी ने रिपोर्ट छापी है जिसमें लिखा है कि 2007 से 2012 तक बीजेपी की सरकार की इस मामले में मुश्किलें बढ़ गई हैं। अखबार ने लिखा है कि ‘धारा-118 की मंजूरी दिलवाने की एवज में कथित तौर पर अवैध वसूली करने के मामले में उस वक्त के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भले ही इस मामले की जद से बाहर हैं परन्तु उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी और रिश्तेदार तत्कालीन राजस्व मंत्री गुलाब सिंह ठाकुर इस मामले में उलझते हुए दिख रहे हैं।’

क्या है यह केस
पंजाब केसरी के मुताबिक कसौली में हिमाचल से बाहर के एक व्यवसायी को होटल बनाने के लिए धारा 118 के तहत जमीन खरीदने की मंजूरी देने के लिए कुछ अनाधिकारिक नोट जारी हुए थे जो उस समय के राजस्व मंत्री ने जारी किए थे। अखबार सूत्रों से हवाले से लिखता है, “तत्कालीन मंत्री ने करीब 4 से 5 अनऑफिशल नोट जारी किए थे। ऐसे में जांच एजेंसी अन-ऑफिशल नोट जारी किए जाने की मंशा का भी पता लगाने में जुट गई है।”

‘अनऑफिशल लेटर जारी किए गए’
अखबार सूत्रों के हवाले से लिखता है, “इस विवादित मामले में धारा-118 के तहत अनुमति बतौर राजस्व मंत्री गुलाब सिंह ठाकुर द्वारा दी गई है। सूत्रों की मानें तो इस खास केस के लिए तब राजस्व मंत्री रहे गुलाब सिंह ठाकुर ने कई अनऑफिशल लेटर भी जारी किए हैं। ये सब लेटर इस फाइल में लगे हुए हैं।”

“बताया गया है कि कसौली में रिजोर्ट के लिए वर्ष 2005-06 में भी भूमि प्रदान करने के लिए आवेदन किया गया था लेकिन उसे सरकार ने खारिज कर दिया। इसके बाद वर्ष 2009-10 में धूमल सरकार के दौरान फिर से मंजूरी मांगी गई और इस विशेष केस में तत्कालीन राजस्व मंत्री ने गहरी दिलचस्पी दिखाते हुए इसकी फाइल मंगवाने के लिए कई बार अनऑफिशल नोट जारी किए।”

‘धूमल ने गुलाब को दिया था अधिकार’
वैसे तो धारा 118 के तहत जमीन खरीदने के लिए किए जाने वाले आवेदनों को मुख्यमंत्री से मंजूरी मिलती है मगर अखबार का कहना है कि इसके लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने उस समय के राजस्व मंत्री और अपने समधी ठाकुर गुलाब सिंह को अधिकृत किया था।

अखबार लिखता है, “हालांकि धारा-118 के केस राजस्व मंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री तक जाते हैं, वही इसकी स्वीकृति देते हैं लेकिन तब धूमल ने एक आदेश पारित कर ऐसी अनुमतियां जारी करने के लिए राजस्व मंत्री को अधिकृत कर रखा था।”

इस मामले को लेकर अभी तक पूर्व राजस्व मंत्री गुलाब सिंह ठाकुर का पक्ष सामने नहीं आया पाया है। अखबार के मुताबिक उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो वह उपलब्ध नहीं हो पाए। जैसे ही पूर्व राजस्व एवं लोक निर्माण मंत्री का पक्ष सार्वजनिक होगा, ‘इन हिमाचल’ भी उसे प्रकाशित करेगा।

हिमाचल की लोकसभा सीटों पर बीजेपी इन्हें दे सकती है टिकट

इन हिमाचल डेस्क।। लोकसभा चुनावों की सुगबुगाहट ने प्रदेश को गर्मी के आगमन से पहले गर्म कर दिया है। बीजेपी के कोर ग्रुप में भी अब आने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर मंथन चल पड़ा है। हिमाचल में भाजपा मजबूत स्थिति में है फिर भी कोई भी पार्टी किसी भी चुनाव में रिस्क नहीं लेना चाहती।

वैसे तो हिमाचल प्रदेश में अब भी लोगों का झुकाव भारतीय जनता पार्टी की तरफ ज्यादा नजर आता है मगर यह बात सच है कि अपने सांसदों के काम से लोग संतुष्ट नहीं हैं। खासकर भारतीय जनता पार्टी के पक्के समर्थक भी अपने सांसदों की आलोचना करते नजर आ जाते हैं। उनका कहना है कि जिस तरह के दावे और वादे चुनावों से पहले और फिर सरकार बनने के पहले साल सांसदों ने किए थे, वे उनके आधे भी पूरे नहीं कर पाए हैं।

सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिए गए गांवों की हालत खस्ता है और ट्रेन लाने या नैरो गेज़ को ब्रॉड गेज़ करने के वादे भी अधूरे हैं। हाल के दिनों में राज्यों के विधानसभा चुनावों में बीजेपी और अमित शाह की रणनीति यह रही है कि सरकार को रिपीट करवाना है तो उन लोगों के टिकट काटकर नए लोगों को टिकट दो, जो जनता की नजर में कमजोर साबित हुए हैं। ऐसे में हिमाचल प्रदेश में भी यही नीति लागू हुई तो टिकट बदले जा सकते हैं।

खैर, फिलहाल आगे जानें, लोकसभा चुनावों को लेकर क्या हैं राजनीतिक चर्चा, अटकलें और कयास।

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1. कांगड़ा लोकसभा सीट
कांगड़ा सीट भाजपा हिमाचल में पिछली बार सबसे बड़े मार्जन से जीती थी। दिग्गज नेता शांता कुमार ने हालाँकि चुनावी राजनीति से संन्यास की घोषणा 2008 में ही कर दी थी, लेकिन उन्होंने 2014 का चुनाव भी लड़ा। समर्थकों को उम्मीद थी कि वाजपेयी मंत्रिमंडल में शामिल रहे शांता कुमार मोदी कैबिनेट में भी होंगे, लेकिन 75 के फॉर्मूले से उनकी उम्मीदों को धक्का लगा।

ऐसे में अगला चुनाव वह शायद ही लड़ेंगे मगर फिर भी राजनीति में बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। स्पष्ट तौर पर शांता कुमार ने कुछ नहीं कहा है कि वह चुनाव लड़ेंगे या नहीं। शांता कुमार लोकसभा में हिमाचल के सबसे निष्क्रिय सांसद रहे हैं और उन्होंने सबसे कम सवाल पूछे हैं। ऐसे में अगर यह माना जाए कि उनका टिकट कट रहा है तो उनके बाद किसी को उम्मीदवार बनाते समय पार्टी यह देखेगी कि आखिर कौन नेता होगा जो कांगड़ा से लेकर चम्बा तक पार्टी काडर के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी दमदार दावेदारी रखेगा। चर्चा है कि इस साल की शुरुआत में शांता और जयराम के बीच ब्रेकफस्ट को लेकर एकांत में इसी बात पर चर्चा  भी हुई थी।

शांता कुमार ने कभी बैजनाथ के पूर्व विधायक दूलो राम को अपने बाद लोकसभा चुनाव लड़वाने का आश्वासन दिया था। माना जा रहा है कि इसीलिए दूलो राम ने ने पिछले चुनाव में घरवापसी भी की थी। दूलो राम कांगड़ा से टिकट की दौड़ में इसलिए भी सबसे आगे बताए जा रहे हैं क्योंकि गद्दी समुदाय की अच्छी खासी आबादी कांगड़ा-चंबा में है और दूलो राम इसी समुदाय से आते हैं।

दूलो राम के बाद इस दौड़ में जातीय समीकरणों और महिला कोटे को देखते हुए शाहपुर की विधायक सरवीण चौधरी का नाम भी चर्चा में हैं। प्रदेश की चारों सीटों में से अगर एक महिला को टिकट देने का रूल आलाकमान बनाता है, जैसा कि विधानसभा में देखा गया था, तो वर्तमान सरकार में मंत्री सरवीण चौधरी जातिगत समीकरणों को देखते हुए भी मजबूत दावेदार बताई जा रहीं हैं।

इन दोनों नामों के अलावा प्रधानमंत्री मोदी के कैंडिडेट के रूप में प्रचारित किए जा चुके पूर्व राज्यसभा सांसद कृपाल परमार का नाम भी लिस्ट में है। कृपाल परमार बेशक विधानसभा चुनाव हार गए हों, लेकिन संसद के उनके अनुभव को देखते हुए उन पर भी विचार किया जा सकता है।

2. हमीरपुर लोकसभा सीट
कांगड़ा बाद तथाकथित निचले हिमाचल की बात करें तो हमीरपुर सीट भाजपा का अभेद्य दुर्ग रही है। मेजर जनरल विक्रम सिंह के बाद कांग्रेस का कोई भी कैंडिडेट यहां भाजपा के विजयरथ के आगे नहीं टिक पाया है। अनुराग ठाकुर 3 बार से हमीरपुर सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। लेकिन खबरों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की हार के बाद कांग्रेस को इस सीट पर उम्मीदें दिख रही हैं और बीजेपी भी थोड़े डर में है।

चर्चा तो यह तक है कि लगातार जीतते रहने के क्रम को जारी रखने के लिए अनुराग ठाकुर एक चुनाव स्किप कर दें। कुछ अखबारों में तो अनुराग ठाकुर की जगह प्रेम कुमार धूमल के चुनाव लड़ने की ख़बरें भी छपी थीं। लेकिन उनकी उम्र के हिसाब से यह संभव नहीं दिखता। चर्चा ऐसी भी है कि अनुराग ठाकुर राज्य की राजनीति की तरफ रुख करना चाहते हैं और हिमाचल में संगठन को समय देना चाहते है। हालांकि अनुराग पूरी ताकत से चुनाव की तैयारी में जुटे हैं इसलिए कहा नहीं जा सकता कि ऐसी चर्चाओं में कितना दम है।

मगर कयास लगाए जा रहे हैं कि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती का कार्यकाल खत्म होने के बाद अनुराग उनकी जगह ले सकते हैं और कुछ समय तक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह सकते हैं। हालांकि प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर सत्ती का कार्यकाल खत्म हो चुका है मगर चर्चा है कि उन्हें लोकसभा चुनाव तक एक्सटेंशन मिला है। चर्चा ऐसी भी है कि हमीरपुर से सत्ती को हमीरपुर से चुनाव लड़वाया जा सकता है। वैसे भी इस सीट पर ऊना से भाजपा का कोई उम्मीदवार नहीं रहा है।

सतपाल सिंह सत्ती हाल में ही विधानसभा चुनाव हारे हैं लेकिन भाजपा में हर धड़े में उनकी स्वीकार्यता उनकी संभावित दावेदारी को मजबूत बनाती है। एक और बात जो दिल्ली से निकल कर आई है कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह मानते है जिस तरह की मोदी लहर 2014 में थी, वो इस बार संभव नहीं है। इसलिए किसी भी सीट पर रिस्क न लेने के लिए अगर किसी मौजूदा सांसद का टिकट काटना ही पड़ा तो उनकी जगह राज्यसभा से आए मंत्रियों को लोकसभा चुनाव में उतारा जा सकता है।

यह ट्रायल उन्ही राज्यों में किए जाने की चर्चा है, जहां से दोबारा राज्यसभा सीट खाली होने पर अपनी ही पार्टी के कैंडिडेट से भरी जा सके। हिमाचल प्रदेश की बात की जाए तो अभी केंद्रीय स्वस्थ्य मंत्री जेपी नड्डा दूसरे कार्यकाल के लिए राज्यसभा में जा रहे हैं। परन्तु अगर सर्वे की रिपोर्ट अनुराग ठाकुर के फेवर में नहीं आती है तो जेपी नड्डा को हमीरपुर लोकसभा से चुनाव लड़ना पड़ सकता है। जीतने की स्थिति में फिर खाली होने वाली राज्यसभा सीट से अनुराग ठाकुर को ऊपरी सदन में भेजने का प्लान भी पार्टी बना सकती है।

3. मंडी लोकसभा सीट
मध्य हिमाचल और प्रदेश की सबसे बड़ी लोकसभा सीट मंडी में भाजपा सबसे मजबूत स्थिति में नज़र आती है। इस लोकसभा सीट के अंदर आने वाली विधानसभा सीटों की बात करें तो मात्र कुल्लू में विपक्ष का एक विधायक है। इस सीट से वर्तमान सांसद रामस्वरूप शर्मा को टिकट के लिए कहीं से भी कोई चुनौती मिलती नहीं दिख रही है।

यह बात सही है कि रामस्वरूप शर्मा ने जोगिंदर नगर-पठानकोट रेलवे लाइन के ब्रॉड गेज़ होने का कथित एलान होने की खुशी में रेलवे स्टेशन पर होली मिलन समारोह मनाया था मगर इस रेल ट्रैक पर एक मीटर काम नहीं हुआ, सर्वे भी हुए या नहीं, स्पष्ट नहीं है। इसी तरह उनके द्वारा किए गए तमाम वादे अभी जमीन पर नहीं उतर पाए हैं। कुछ अधूरे प्रॉजेक्ट हैं तो कुछ पेपर पर मंजूर हुए हैं। ऐसे में काम के तौर पर दिखाने के लिए उनके पास बहुत कम है और लोगों के में नाराजगी भी है।

मगर नागपुर से डायरेक्ट रिश्ते और प्रधानमंत्री मोदी के प्रभारी रहते संगठन महामंत्री का दायित्व देख चुके रामस्वरूप पुनः उम्मीदवार के रूप में रिपीट करेंगे, ऐसा तय माना जा रहा है। मगर सर्वे रिपोर्ट खराब आई तो पार्टी क्या फैसला लेगी, इस बारे में पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। हालाँकि जब पूर्व सांसद महेश्वर सिंह पार्टी में वापस आए थे तो चर्चा थी कि किसी भी तरह की एंटीइंकंबेंसी को रोकने के लिए महेश्वर सिंह को लोकसभा चुनाव लड़वाया जा सकता था। परन्तु विधानसभा चुनावों में हार के बाद यह चर्चा वहीँ ढेर होकर रह गई है।

वैसे अगर पार्टी को यहां से टिकट बदलना हो तो उसे ऐसा करने में कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि पिछली बार रामस्वरूप शर्मा को भी टिकट अचानक ही मिला था। अजय जम्वाल आदि समेत पार्टी के पास संगठन में कई लोग हैं जिन्हें वह उम्मीदवार बना सकती है। बीजेपी जानती है लोकसभा में वोट पार्टी के नाम पर ज्यादा पड़ते हैं और इस लिहाज से वह फिलहाल तो कांग्रेस पर भारी है ही।

4. शिमला लोकसभा सीट
ऊपरी हिमाचल की शिमला सीट भी दो बार से भाजपा के खाते में हैं परन्तु परन्तु इस बार चर्चा है की एंटीइंकंबेंसी को ध्यान में रखते हुए किसी नए चहरे को वर्तमान सांसद वीरेंद्र कश्यप की जगह मौक़ा दिया जाए। वीरेंदर कश्यप के ऊपर चुनावी समय में अवैध लेनदेन के मामले में आरोप तय हो गए हैं। वहीँ भाजपा की आंधी के बीच अपनी गृहसीट सोलन से अपने भाई को भी न जितवा पाने के कारण उनका जाना लगभग तय माना जा रहा है।

शिमला सीट रिजर्व है, बावजूद इसके विकल्पों की जितनी कमी कांग्रेस के पास है, भाजपा के पास उतने ही ज्यादा संभावित उम्मीदवार हैं। जिस नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है,वह है कसौली से विधायक और वर्तमान सरकार में मंत्री राजीव सहजल।

किस्मत के धनी सहजल चंद मतों के फासले से ही पिछ्ले चुनाव जीतते आए हैं। युवा सहजल आगामी चुनाव के लिए आलाकमान की पहली पसंद बताए जा रहे हैं। वहीँ सत्ता में बैठा भाजपा का धड़ा भी सहजल को प्रदेश राजनीति से बाहर देखना चाहता है ताकि खाली होने वाले मंत्रिपद पर अपने सिपहसलारों में से किसी एक को बिठा पाए।

सहजल के बाद सबसे मजबूत नाम जो उभरता है वो सिरमौर के पच्छाद के विधायक सुरेश कश्यप का। दिग्गज नेता गंगूराम मुसाफिर को दो बार पटखनी देते आये कश्यप डाउन टु अर्थ छवि के बताए जाते हैं। चूँकि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह सोलन के अर्की से विधायक हैं तो जिले में चुनावों में इसका असर हो सकता है। इस तोड़ को पूरा करने के लिए भाजपा कम से कम सिरमौर में किलेबंदी मजबूत रखना चाहती है।

इन्हीं कारणों से सुरेश कश्यप आलाकमान की नजरों में पोटेंशियल केंडिडेट बताए जा रहे हैं। इसी सीट पर महिला कोटे की अगर बात आती है तो वीरभद्र सिंह की कर्मभूमि रहे रोहड़ू से विधानसभा चुनावों में हार के बावजूद अच्छा प्रदर्शन करने वाली युवा नेत्री शशि बाला का नाम भी चर्चा में बताया जा रहा है।

खैर, ये सब चुनावी अटकलें हैं। एक दो महीनों में असल तस्वीर साफ हो जाएगी कि पार्टी का क्या फैसला रहता है।

हिमाचल की चारों लोकसभा सीटों पर कांग्रेस में इन नामों पर हो सकती है चर्चा

शिमला में लिफ्ट लेकर ब्लैकमेल करने वाली महिला गिरफ्तार

शिमला।। शिमला पुलिस ने एक महिला को लिफ्ट लेकर लोगों को ब्लैकमेल करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।  इस महिला की गिरफ्तारी सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हुई है। यह एक ब्यूटी पार्लर में काम करती थी और आशंका जताई जा रही है कि इसने इस तरह से कई लोगों को शिकार बनाया है।

कैसे सामने आया मामला
इसी महीने की सात तारीख को ढली पुलिस स्टेशन में एक शख्स ने एफआईआर दर्ज करवाई थी। पीड़ित का कहना था कि ढली टनल के पास एक महिला ने उससे लिफ्ट मांगी तो उसने इंसानियत के नाते लिफ्ट दे दी। जब ढली चौक पर महिला को उतरने को कहा तो कथित तौर पर उसने उतरने से इनकार कर दिया औऱ कहा कि आईजीएमसी की ओर चले वरना मैं छेड़छाड़ करने का आरोप लगा दूंगी।

पीड़ित का कहना है कि घबराकर वह आईजीएमसी चला गया और इस दौरान महिला ने उससे पैसों की मांग की। उसने कहा कि मेरे पास पैसे नहीं हैं तो महिला ने उससे एटीएम मांगा और पिन देने को कहा। उसने आईजीएमसी के पास कार रुकवाई और एटीएम से पैसा लेने गई मगर वह पैसे नहीं निकाल पाई और फिर वहां से भाग गई।

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यहीं हो गई गलती
एटीएम में पैसे निकालने गई महिला की तस्वीर वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एक संदिग्ध महिला की तस्वीर ली और शिकायकर्ता से शिनाख्त करवाई। पहचान होने पर महिला को गिरफ्तार कर लिया। वह एक ब्यूटीपार्लर में काम कर रही थी और उसकी उम्र करीब 40 साल है।

अब यह सामने आया है कि एक पुलिसकर्मी को भी इस महिला ने ब्लैकमेल करने की कोशिश की थी। लिफ्ट लेने के बाद उसने ऐसा ही करने की कोशिश की थी मगर उसे पता चला कि चालक पुलिस में है तो वह ट्रैफिक जाम का फायदा उठाकर भाग गई।

डीएसपी सिटी दिनेश शर्मा ने कहा है कि महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है और जांच की जा रही है कि उसने इस तरह से और कितने लोगों को ब्लैकमेल किया है। उन्होंने कहा कि बारीकी से मामले की जांच की जा रही है।