बीजेपी MLA ने दी अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने की धमकी

कांगड़ा।। जयसिंहपुर से बीजेपी के विधायक रविंदर कुमार धीमान ने ब्यास नदी और इसकी सहायक खड्डों में हो रहे अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा है कि अगर इसे रोका नहीं गया तो वह अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना देने से भी नहीं हिचकेंगे।

धीमान का कहना है कि पिछले 10 महीनों से लगातार वह इस संबंध में आवाज उठा रहे हैं मगर प्रशासन अवैध खनन पर लगाम नहीं लगा पाया है। अंग्रेजी अखबार ‘द ट्रिब्यून’ के मुताबिक रविंदर सिंह धीमान यहां तक कह दिया है कि ‘माइनिंग डिपार्टमेंट जयसिंहपुर में माफिया को शह दे रहा है।’

ग़ौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में खनन की जिम्मेदारी उद्योग विभाग के तहत आती है और बिक्रम सिंह उद्योग मंत्री हैं। ऐसे में चर्चा है कि सीधे-सीधे उद्योग मंत्रालय को निशाना बनाया जा रहा है। गौरतलब है कि हाल ही में देहरा से निर्दलीय विधायक होशियार सिंह ने हिमाचल में सीमेंट की कीमतें ज्यादा होने के मुद्दे को उठाया था और सीधे उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह पर सवाल उठाए थे।

क्या कहते हैं रविंदर धीमान
रिपोर्ट के मुताबिक धीमान ने कहा कि वह भले ही सत्ताधारी पार्टी से हैं मगर इस मामले में वह अपने इलाके की जनता का समर्थन करेंगे और अगर सरकार अवैध खनन को रोकने में नाकामयाब रही तो वह जयसिंहपुर में अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठने से भी नहीं हिचकेंगे।

जयसिंहपुर के एमएलए ने कहा कि इससे न सिर्फ पर्यावरण को क्षति हो रही बल्कि राज्य को करोड़ों का नुकसान भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर अवैध खनन नहीं रोका गया तो जयसिंहपुर के लोग सड़कों पर उतर आएंगे।

मनाली के बाद शिमला के कुफरी में भी बर्फबारी

शिमला।। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कुफरी में बीती रात सीजन की पहली बर्फबारी हुई। फागू, नारकंडा और खड़ापत्थर में हिमपात हुआ।

इससे पहले पर्यटन नगरी मनाली में हल्का हिमपात हो चुका है। प्रदेश के अन्य हिस्सों में बारिश का दौर जारी है, जिससे तापमान में गिरावट आई है।

लाहौल स्पीति और किन्नौर में कुछ जगहों पर पारा दिन में भी शून्य से नीचे जाने लगा है। प्रदेश के औसत तापमान में चार डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई है।

दिवाली पर बद्दी में सबसे प्रदूषित, कांगड़ा में सबसे साफ रही हवा

शिमला।। हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से करवाई गई हवा की मॉनिटरिंग से पता चला है कि सोलन जिले में बद्दी हाउज़िंग बोर्ड वाला इलाका दिवाली पर सबसे ज्यादा प्रदूषित था जबकि कांगड़ा जिले का डमटाल सबसे साफ था।

हवा की शुद्धता को RSPM कॉन्सेन्ट्रेशन के आधार पर किया था। परवाणू, पावंटा साहिबा, काला अंब और मनाली के अलावा अन्य जगहों पर सल्फर डाइऑक्साइड के मानक मापे जाने की सीमा से नीचे रहे और नाइट्रोजन के ऑक्साइड्स का घनत्व भी सुरक्षित मानकों के पास रहा।

हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिवाली पर हवा की गुणवत्ता जांची ताकि पटाखे छोड़ने और 31 अक्तूबर से लेकर 7 नवंबर के बीच अन्य गतिविधियों का इस पर क्या प्रभाव पड़ता है। 

शिमला, परवाणू, धर्मशाला, डमटाल, पावंटा साहिब, काला अंब, ऊना, सुंदर नगर, बद्दी, नालागढ़ और मनाली में यह मॉनिटरिंग की गई थी।

केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार के निधन पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जताया शोक

शिमला।। केंद्रीय मंत्री के निधन पर हिमाचल में भी एक दिन का राजकीय शोक मनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने उनके आकस्मिक निधन को देश के लिए बड़ी क्षति करार दिया।

परिवार को दुःख सहन करने की की प्रार्थना की गई है और रिज में लगे तिरंगे को आधा झुकाया गया है।

देर रात हुए केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार के निधन पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि अनंत कुमार के निधन से देश को बहुत बड़ी क्षति हुई है। उन्होंने कहा, “अनंत कुमार बचपन से ही संगठन के कार्य से जुड़े हुए थे उसके बाद राजनीति में कदम रखने पर देश के विकास कार्यो को करने में उनका अहम योगदान रहा है। छोटी उम्र में निधन होना सरकार और संगठन के साथ-साथ देश के लिए भी बहुत बड़ी क्षति है।”

पौंग डैम विस्थापित: जो न हिमाचल के रहे, न राजस्थान के

इन हिमाचल डेस्क।। साल 1966 में बने पौंग बांध के कारण 330 गांव पानी में डूब गए थे। वैसे तो यह बांध पंजाब के तलवाड़ा के पास बना है, मगर इसके कारण हिमाचल प्रदेश की गुलेर घाटी की बेहद उपजाऊ जमीन डूब गई थी। चूंकि इस बांध का लाभ राजस्थान को भी होना था इसलिए उसके ऊपर विस्थापित लोगों को जमीन देने की जिम्मेदारी थी। दरअसल ब्यास नदी पर बने इस बांध से 51 प्रतिशत पानी राजस्थान को जाता है।

शुरू में 20,362 विस्थापितों ने मुआवजे का दावा पेश किया मगर राजस्थान ने 16,300 विस्थापितों का दावा स्वीकार किया। राजस्थान सरकार की जिम्मेदारी थी कि इन लोगों को अपने यहां उपजाऊ जमीन दे। इस संबंध में हिमाचल प्रदेश के और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों के बीच 1970 में एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसके तहत हर परिवार 15.625 एकड़ जमीन दी जानी थी।

इनमें से 11,300 लोगों को तो जमीन मिल गई मगर लेकिन इनमें से 700 को अभी भी राजस्थान में जमीन पर कब्जा नहीं मिला है। वे विभिन्न अदालतों में केस लड़ रहे हैं क्योंकि स्थानीय लोगों ने उन्हें अलॉट की गई जमीनों पर कब्जा किया हुआ है। यही नहीं, 2501 लोग ऐसे हैं, जिन्हें अब तक जमीन मिली ही नहीं है। वे इंतजार कर रहे हैं कि राजस्थान सरकार ने उन्हें जो जमीन देने का वादा किया था, वह पूरा किया जाए।

राजस्थान सरकार ने जिस 16,300 को जमीन देने का वादा किया था, उनमें से 5,442 का दावा राजस्थान की सरकार ने खारिज कर दिया है। यही नहीं, जिन लोगों को राजस्थान सरकार जैसलमेर में जमीन दे रही थी, उनमें से 2501 की वित्तीय मदद करने से उसने इनकार कर दिया है।

ध्यान देने की बात यह है कि ऊपर की जो संख्या है, वह एक सदस्य के आधार पर है मगर सोचिए कि 1962 से लेकर अब तक उनका परिवार कितना बढ़ गया होगा।

दी जा रही है सूखी जमीन
दरअसल इन लोगों को राजस्थान सरकार की ओर से उपजाऊ जमीन मिलनी थी मगर उन्हें जैसलमेर के सूखे इलाकों में जमीन दी जा रही है। ऐसे में पौंग डैम विस्थापित इस जमीन को लेने के लिए तैयार नहीं है।

देहरा से निर्दलीय उम्मीदवार होशियार सिंह और हमीरपुर से भाजपा के सांसद अनुराग ठाकुर ने मांग उठाई थी कि राजस्थान सरकार अगर उपजाऊ जमीन नहीं दे पा रही तो वह वित्तीय मदद कर दे ताकि पौंग डैम विस्थापित कहीं और ढंग की जमीन खरीद लें।लेकिन अंग्रेजी अखबार ‘द ट्रिब्यून’ ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि राजस्थान सरकार ने सचिव स्तर की बातचीत में किसी तरह की वित्तीय मदद देने में असमर्थता जताई है।

किसके लिए छोड़ी अपनी जमीन?
सोचिए कि कल को अचानक कोई प्रॉजेक्ट मंजूर हो जाए और आपको कहा जाए कि इस जमीन को छोड़िए, इतने रुपये मुआवजा लीजिए और हिमाचल छोड़कर राजस्थान में शिफ्ट हो जाइए। तो क्या आप अपनी जन्मभूमि छोड़कर चले जाएंगे? आप भले न कहें मगर सरकार के आगे किसकी चलती है। आपको जाना तो पड़ेगा। मगर सोचिए, आपसे किया गया वादा पूरा न हो तो आप कहां जाएंगे?

हिमाचल प्रदेश के साथ विडंबना यह रही है कि यहां लगाए गए बिजली के प्रॉजेक्टों से लाभ तो पड़ोसी प्रदेश भी उठा रहे हैं, मगर विस्थापन और जमीनें आदि डूबने का ज्यादा नुकसान हिमाचल के लोगों को उठना पड़ता है। एक बार प्रॉजेक्ट बन जाता है तो विस्थापितों को पूछता कोई नहीं। यही हाल कई बांधों से विस्थापित हुए लोगों का है। लोकसभा चुनाव आ रहे हैं तो सांसद इसका मुद्दा उठाएंगे, विधानसभा चुनाव आने पर विधायक मुद्दा उठाते हैं। फिर विस्थापितों को हर कोई भूल जाता है। ऐसी ही स्थिति पौंग डैम के उन विस्थापितों की है, जो न हिमाचल के रहे और न राजस्थान के।

 

कालका-शिमला रेल को मिला शीशे की छत वाला खूबसूरत डब्बा

शिमला।। कालका-शिमला पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रही है। खूबसूरत नजारों वाली वादियों से होकर गुजरने वाली इस ट्रेन की ओर अब और ज्यादा संख्या में पर्यटक आकर्षित होंगे क्योंकि इसके लिए खास तरह के विस्टडोम कोच तैयार किया गया है।

यह डब्बा न सिर्फ बाहर से देखने में खूबसूरत है बल्कि अंदर से भी शानदार है। साथ ही इसमें छत पर शीशे लगे हैं ताकि पर्यटक प्रकृति के नजारों का दीदार कर सकें।

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट करके जानकारी दी है कि इस डब्बे के साथ ट्रायल हो चुका है। उन्होंने इसकी तस्वीरें भी पोस्ट की हैं।

देखें, कैसा है Vistadome Coach-

बाहर से इसमें पर्पल रंग किया गया है

बाकी डब्बों से अलग नजर आता है यह डब्बा

पर्यटक आराम से दाएं-बाएं से ही नहीं, ऊपर से भी बाहर देख पाएंगे।

शिमला का पत्थर मेला: नर बलि से पत्थरों की लड़ाई तक का सफर

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से 30 किलोमीटर दूर हलोग में होने वाला पत्थर मेला इस बार भी चर्चा में रहा। इन हिमाचल पर शेर किए गए वीडियो पर कई लोगों ने कॉमेंट किए। कुछ लोगों ने इसे परंपरा बताया तो कुछ लोगों ने कहा कि यह खूनी खेल है और बंद होना चाहिए।

दरअसल दीपावली से दूसरे दिन मनाए जाने वाले इस मेले में दो समूह आपस में पत्थरबाजी करते हैं। यह सिलसिला तब तक चलता है, जब तक कि कोई लहूलुहान न हो जाए। यह परंपरा कई सालों से चली आ रही है और आज भी लोग इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

क्या है कहानी
इस मेले को लेकर कहा जाता है कि पहले यहां पर नरबलि दी जाती थी। फिर एक बार यहां रानी सती हो गई तो नर बलि को बंद करके पशु बलि शुरू हुई। कई दशक पहले पशु बलि भी कथित तौर पर बंद हो गई और पत्थरों का मेला शुरू हुआ।

कौन लेता है पथराव में भाग
राजपरिवार के नरसिंह के पूजन के साथ होती है। हर कोई पथराव नहीं कर सकता। परंपरा यह है कि एक तरफ तुनड़ू, जठौती और कटेड़ू परिवार की टोली होती है और दूसरी ओर से जमोगी खानदान की टोली के सदस्य होते है। बाकी लोग पत्थर नहीं फेंक सकते, वे बस देख सकते हैं। तो चौराज गांव में बने सती माता के चबूतरे की एक ओर से जमोगी पथराव करते हैं तो दूसरी तरफ से कटेड़ू।

जैसे ही दो समूहों के बीच पथराव होने के बाद कोई व्यक्ति चोटिल होता है, उसके ख़ून का तिलक सती माता के मंदिर में लगाया जाता है और मेला बंद कर दिया जाता है। इसके बाद घायल व्यक्तियों का इलाज अस्पताल में करवाया जाता है। इस मेले में धामी रियासत के भूतपूर्व राजपरिवार के सदस्य हिस्सा लेते हैं। इस परिवार से जुड़े लोगों और स्थानीय लोगों का कहना है कि पत्थर लगने से किसी की जान नहीं गई है।

‘शाप’ के डर से दिवाली पर सहमे रहते हैं इस गांव के लोग

हमीरपुर।। हिमाचल प्रदेश में अनोखी मान्यताएं हैं। अंधविश्वास कहें या कुछ और, हमीरपुर जिले के एक गांव सम्मू में करीब 100 सालों से लोग दिवाली नहीं मान रहे। गांव के लोगों का मानना है कि कुछ तो ऐसा अपशकुन गांव से जुड़ गया है कि दिवाली मनाना खतरे से खाली नहीं है। उनका मानना है कि अगर कोई ऐसा करता है तो आपदा आती है या फिर किसी अकाल मृत्यु हो जाती है।

हमीरपुर से 25 किलोमीटर दूर गांव सम्मू में लोग दीपक तो जलाते हैं, मगर पटाखे नहीं चलाते और न ही कोई विशेष व्यंजन बनाते हैं। लोगों में डर इतना है कि वे कुछ ज्यादा ही सचेत रहते हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने इस कथित शाप से मुक्ति पानी की कोशिश की थी, मगर कोशिशें नाकाम रहीं।

हर किसी मान्यता के साथ कोई न कोई कहानी होती है। इस गांव के साथ भी है। कहते हैं कि एक गर्भवती महिला दिवाली मनाने मायके जा रही थी। गांव से कुछ ही दूर जाने पर उसे खबर मिली की उसके पति का देहांत हो गया है। उसका पति सैनिक था। लोग पति के शव को ला रहे थे। कहते हैं कि वह पति के साथ ही सती हो गई थी और जाते-जाते शाप दे गई थी कि गांव को लोग कभी दिवाली नहीं मना पाएंगे।

इसके बाद से लोग सती की मूर्ति की पूजा करते हैं और दिवाली मनाते हैं। लोगों का कहना है कि जब कोई दिवाली मनाने की कोशिश करता है, उसके साथ बुरा होता है। कई बार हवन करवाए गए, मगर फायदा नहीं हुआ। तीन साल पहले भी यज्ञ का आयोजन किया गया, मगर किसी ने दिवाली धूमधाम से नहीं मनाई। दरअसल गांव में दिवाली आते ही किसी न किसी की मौत हो जाती है। कहते हैं कि लोग घरों से बाहर निकलना भी ठीक नहीं समझते।

यह हो सकती है वजह
हालांकि ध्यान देने वाली बात यह भी है कि पहले के लोग महिलाओं को जबरन सती किया करते थे। यानी जबरन चिताओं में जला दिया करते थे। हो सकता है मरने से पहले महिला ने कहा हो कि मुझे जला रहे हो, तुम दिवाली नहीं मना पाओगे। अगली दिवाली के आसपास संयोग से कुछ बुरी घटना घटी हो तो अपने अंदर के पाप से डरे लोगों को लगा होगा कि यह उस महिला का ही शाप है। उसके बाद से डर पीढ़ियों से चला आ रहा है। और वैसे भी जीवन-मरण तो संसार में चला रहता है। इस डर को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।

आईजीएमसी रैगिंग मामले में चार छात्र सस्पेंड, हॉस्टल से भी निकाले

शिमला।। शिमला आईजीएमसी में एमबीबीएस फर्स्ट इयर के छात्रों की रैगिंग लेने के मामले में सेकंड इयर के चार छात्र निलंबित कर दिए गए हैं। इन छात्रों को हॉस्टल से भी निकाल दिया गया है।

कॉलेज प्रशासन ने एक ऑडियो क्लिप के आधार पर यह कार्रवाई की है। इसमें कथित तौर पर छात्रों की रैगिंग के समय हुई बातचीत रिकॉर्ड हुई थी।

कॉलेज प्रशासन ने अपने स्तर पर कार्रवाई करने के बाद ऑडियो क्लिप समेत मामला पुलिस को सौंप दिया है। छात्रों के सस्पेंशन की खबर उनके पैरंट्स को भी लेटर के ज़रिए दे दी गई है।

आईजीएमसी शिमला में प्रथम वर्ष के छात्रों ने आरोप लाया था कि फ्रेशर पार्टी से एक दिन पहले हुई रिहर्सल के दौरान उनकी रैगिंग की गई थी। इसके बाद छात्रों ने ऐंटी रैगिंग हेल्पलाइन में अपनी शिकायत दर्ज करवाई थी।

जानें, अनुराग ठाकुर और प्रेम कुमार धूमल को कैसे मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत

शिमला।। सुप्रीम कोर्ट ने धर्मशाला में क्रिकेट स्टेडियम बनाने के लिए जमीन देने के मामले में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर बीजेपी के सांसद अनुराग ठाकुर, उनके पिता और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल व अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर शुक्रवार को रद्द कर दी है। चूंकि हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस मामले में अभियोग वापस लेने का फैसला किया था, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दर्ज एफ़आईआर को रद्द कर दिया।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश सरकार के वकील ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि कैबिनेट ने ‘राजनीति से प्रेरित मामलों को वापस लेने का फैसला किया है।’ गौरतलब है कि अनुराग, प्रेम कुमार धूमल और अन्य के खिलाफ यह मामला कांग्रेस सरकार के दौरान दर्ज हुआ था। इस बार सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने ‘राजनीति से प्रेरित’ मामलों को बंद करने का फैसला किया था, जिसमें यह मामला भी शामिल था।

क्या हुआ था सुप्रीम कोर्ट में
दरअसल HPCA और अनुराग ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर धर्मशाला की निचली अदालत में दायर चार्जशीट और मुकदमे को रद्द करने की मांग की थी. इस संबंध में हिमाचल सरकार के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कैबिनेट ने सभी पॉलिटिकल मोटिवेटेड केस वापस लेने का फैसला किया है। इस पर कोर्ट ने हिमाचल सरकार से पूछा था कि क्या अनुराग ठाकुर का केस भी इस दायर में आता है। कोर्ट ने ये भी पूछा था कि अगर इस दायरे में है तो कैसे इस केस को वापस लिया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार से इस पर रुख साफ करने को कहा था। हिमाचल सरकार के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि वो सरकार से निर्देश लेकर आएंगे। इसके बाद हिमाचल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 16 अप्रैल को इस संबंध में आदेश पेश कर दिया था कि सरकार ने उक्त केस में अभियोग वापस लेने का फैसला किया है।

‘सरकार के खिलाफ लड़े’ सरकार के वकील
दरअसल इस पूरे मामले में हिमाचल प्रदेश सरकार के वकील ही अनुराग ठाकुर को बचाने के लिए सरकार के खिलाफ लड़े थे। यह ऐसे कि चूंकि मामला कांग्रेस के शासन के दौरान सरकार की ओर से अनुराग के खिलाफ लड़ा जा रहा था, बाद में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद सरकार नरम हो गई। उच्चतम न्यायालय में राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता ने राज्य सरकार को एक पत्र लिखकर उसके ही ख़िलाफ़ हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन सहित चुनिन्दा मामलों में पेश होने की अनुमति मांगी थी।

इसके बाद हिमाचल प्रदेश की भाजपा सरकार ने सांसद अनुराग ठाकुर और एचपीसीए का बचाव करने के लिए अपने विधि अधिकारी को ‘विशेष मामले’ के रूप में अपने ही महाधिवक्ता के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में पेश होने की अनुमति दे दी थी। बाद में जब सरकार ने अभियोजन वापस ले लिया तो सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में दर्ज एफआईआर भी रद्द कर दी।

इस मामले में अनुराग ठाकुर और प्रेम कुमार धूमल पर कांग्रेस सरकार के दौरान क्या आरोप लगे थे, यह जानने के लिए नीचे दिए गए 2016 के वे आर्टिकल पढ़ें जिनमें विजिलेंस और अन्य एजेंसियों की चार्जशीट में कही गई बातों का जिक्र है।

जानें, एचपीसीए मामले को लेकर अनुराग ठाकुर पर क्या हैं आरोप

जानें, विजिलेंस की चार्जशीट के मुताबिक प्रेम कुमार धूमल ने कैसे पहुंचाया HPCA को फायदा