सड़कें खराब, खुद हेलीकॉप्टर में घूम रहे सीएम: विक्रमादित्य

शिमला।। हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे और शिमला रूरल से विधायक विक्रमादित्य ने खराब सड़कों को लेकर हिमाचल सरकार पर निशाना साधा है।

विक्रमादित्य ने कहा कि सड़कों की हालत खराब है मगर सीएम खुद हेलीकॉप्टर में घूम रहे हैं।

गौरतलब है कि पूर्व सीएम वीरभद्र पर भी ऐसे ही सवाल उठते थे। वीरभद्र जब सीएम थे तो सड़कों की देखभाल वाला लोक निर्माण विभाग उन्होंने अपने पास ही रखा था। विपक्ष तब कहता था कि सीएम खुद हेलीकॉप्टर से चलते हैं ऐसे में उन्हें सड़कों की परवाह नहीं।

अब जयराम ने भी यह विभाग अपने पास रखा है और ग्रामीण व छोटे कस्बों को जोड़ने वाली सड़कों की हालत कई जगह खराब है। अब पूर्व सीएम के बेटे वर्तमान सीएम पर उसी शैली में हमले कर रहे हैं, जैसे हमले बीजेपी उनके पिता पर करती थी।

अब नई पीढ़ी को काम करने दें बुज़ुर्ग नेता: जयराम ठाकुर

बिलासपुर।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि पार्टी के बुज़ुर्ग नेताओं को अब नई पीढ़ी को काम करने देना चाहिए।

बिलासपुर के घुमारवीं में एक जनसभा में सीएम ने यह बात कहीं। किसी का नाम लिए बिना मुख्यमंत्री ने कहा, “पार्टी के बुजुर्ग नेताओं को अब नई पीढ़ी को काम करने देना चाहिए और इस काम में उन्हें नई पीढ़ी की मदद करनी चाहिए।”

सीएम ने कहा कि इससे जहां बुजुर्गों के लिए नई पीढ़ी में सम्मान की भावना पैदा होगी, वहीं विकास को भी नए पंख लगेंगे।

जयराम ने संबोधन में कहा कि सभी को एकजुट होकर काम करना चाहिए ताकि प्रदेश और देश तरक्की की राह पर तेजी से बढ़े।

मंडी के धर्मपुर में अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहे लोग

मंडी।। वैसे तो प्रदेश भर के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी है, मगर मुख्यमंत्री के गृह जिले और एक मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में भी यही हाल हो तो समझा जा सकता है कि बाकी इलाकों की हालत क्या होगी।

सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री महेंद्र सिंह के विधानसभा क्षेत्र धर्मपुर में लोग स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी के कारण समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सयोह, मंडप और डरवाड़ केप्राइमरी हेल्थ सेंटरों (PHC) में डॉक्टर का पद खाली है। लोगों को नजदीक में जो स्वास्थ्य सुविधा मिलनी चाहिए, वह इस कारण मिल नहीं पा रही।

इसी तरह से संधोल सिविल अस्पताल में भी डॉक्टर का पद खाली है। फार्मसिस्ट, स्टाफ नर्स और लैब टेक्नीशन के पद भी खाले पड़े हुए हैं जिससे इलाके के लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

इस संबंध में हिमाचल किसान सभा ने भी बात उठाई थी और राज्य सरकार से मांग की थी कि स्वास्थ्य संस्थानों में खाली पड़े पदों को भरा जाए।

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा- ब्रॉड गेज नहीं होंगी दोनों नैरो गेज

शिमला।।  मंडी के सांसद रामस्वरूप शर्मा और कांगड़ा के सांसद शांता कुमार ने पिछले लोकसभा चुनाव से पहले पठानकोट-जोगिंदर नगर रेलमार्ग को नैरोगेज से ब्रॉडगेज करने और आगे बढ़ाने का वादा किया था। सांसद चुन लिए जाने के बाद भी इन्होंने कई बयान दिए और बजट में सर्वे का प्रावधान होने पर जश्न भी मनाया।

मगर अब जबकि अगले लोकसभा चुनाव के लिए कुछ ही महीनों का समय बचा है, हिमाचल आए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने दोनों सांसदों के वादों और दावों की हवा निकाल दी है। रेल मंत्री ने कहा है कि प्रदेश के दोनों रेल मार्गों का विस्तार नहीं होगा।

पीयूष गोयल ने धर्मशाला में आयोजित प्रेसवार्ता में यह बात कही। इस दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी मौजूद रहे। गोयल ने कहा कि दोनों नैरोगेज (शिमला-कालका और मंडी-पठानकोट) ट्रैक देश की ऐतिहासिक धरोहर हैं इसलिए इनका विस्तार कर इनसे कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।

बात दें कि साल 2015 की होली मंडी के सांसद ने जोगिंदर नगर रेलवे स्टेशन में समर्थकों संग मनाई थी। इस मौके पर उन्होंने कहा था- “कुछ लोग अफवाहें उड़ा कर बौखलाहट मिटा रहे हैं कि यह मात्र सर्वे है। अब यह रेललाइन लेह पहुंचकर दम लेगी।”

मगर अफसोस, रेल मंत्री ने चुनावों से ठीक पहले कह दिया कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला। इससे मंडी और कांगड़ा दोनों के सांसदों की मुश्किलें बढ़ गई हैं कि अब जनता को अपने पांच सालों की कौन सी उपलब्धि बताई जाए।

ये भी जोड़ दो
हालाँकि लेह के लिए रेल्वे विस्तार के लिए भारत सरकार ने भानुपल्लि बिलासपुर बरमाना रूट को ही आगे बढ़ाते हुए सर्वे लिस्ट में डाला था

वहीं हमीरपुर-ऊना ब्रॉडगेज के लिए भी रेल मंत्री गोयल ने कुछ नहीं कहा है, जिसका ज़िक्र हमीरपुर के सांसद अनुराग ठाकुर अक्सर करते हैं। कुलमिलाकर गोयल ने हिमाचल में किसी भी नए ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट की सम्भावना व्यक्त नहीं की हैं।

अपने स्कूलों को पैसे देने के नाम से बिदक रहे ‘स्कूल के मोती’

शिमला।। हिमाचल सरकार ने ‘अखंड शिक्षा ज्योति मेरे स्कूल से निकले मोती’ शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य है कि स्कूलों और कॉलेजों से निकलकर सफल हुए पूर्व छात्रों को सम्मानित किया जाए। इस तरह से सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के प्रति आकर्षण पैदा करने की भी कोशिश की जा रही है ताकि दिखाया जा सके कि यहां के छात्र आज कहां-कहां पहुंचे हुए हैं।

लेकिन स्कूल का नाम रोशन करने वाले लोगों को अगर गौरव पट्ट पर नाम लिखवाना हो तो सरकार ने इसके लिए नियम बदलते हुए पांच हजार रुपये लेने का नियम बनाया था। सरकार का लक्ष्य था कि इस तरह से मिलने वाले अनुदान से स्कूल आदि के रख-रखाव और विकास के काम हो सकते हैं।

लेकिन सम्मानित होना है तो 5 हजार रुपये देने होंगे

इस संबंध में स्कूलों के प्रिंसिपलों और शिक्षा उपनिदेशकों को निर्देश मिले हुए हैं। स्कूल के मोतियों से ली जाने वाली यह रकम सिर्फ स्कूल पर ही खर्च होगी। लेकिन प्रधानाचार्यों के लिए यह नियम परेशानी का सबब बन गया है क्योंकि जब स्कूल के पूर्व छात्रों को संपर्क किया जा रहा है तो पहले वह सम्मानित होने के नाम से उत्साहित तो हो रहे हैं, मगर जब उनसे कहा जा रहा है कि पांच हजार रुपये दिए जाने हैं तो उनका जोश ठंडा हो जा रहा है।

संपन्न लोग भी कतरा रहे 
बहुत से लोग पांच हजार रुपये से अधिक रुपये भी अपने स्कूल के लिए देने के लिए खुश हैं मगर कई वरिष्ठ प्रशासनिक, सैन्य और अन्य विभागों के अधिकारी या वरिष्ठ पदों से रिटायर हो चुके स्कूल के पूर्व छात्र जेब ढीली करने के कतरा रहे हैं। हो सकता है कि कुछ की आर्थिक तंगी भी इसका कारण हो मगर कुछ को लगता है कि आखिर वे क्यों पांच हजार रुपये दे दें।

मुख्यमंत्री का नाम भी उनके स्कूल के ‘गौरव पट्ट’ में दर्ज हुआ है

इस संबंध में ‘इन हिमाचल’ को फेसबुक से बहुत सारे अध्यापकों और प्रधानाचार्यों आदि के संदेश मिले हैं, जिनमें उन्होंने अपनी समस्या बताई है। उनका कहना है कि सरकार की इस योजना के कारण उन्हें फजीहत का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि स्कूल का कौन सा पूर्व छात्र ‘मोती’ है, उसे ढूंढकर उससे संपर्क करके सरकार की योजना के बारे में बताने का काम उन्हीं के जिम्मे है। ऐसे में उन्हें ही ‘मोतियों’ को पांच हजार रुपये के बारे में बताना पड़ रहा है जिससे सामने से कई बार टेढ़े जवाब भी मिल रहे हैं।

पैसों का बाध्यकारी नियम क्यों?
इस बीच सरकार के इस कदम की भी आलोचना हो रही है कि उसने क्यों इस तरह का बाध्यकारी नियम बनाया, जिससे लोग हतोत्साहित हो रहे हैं। या तो इस रकम को कम रखा जाना चाहिए था फिर ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए थी कि लोग अपनी मर्जी से अनुदान दे सकें। क्योंकि सिर्फ आर्थिक रूप से संपन्न हुए लोग ही स्कूल के मोती हों, जरूरी नहीं। हो सकता है कोई व्यक्ति आर्थिक रूप से संपन्न न हो मगर उसने इलाके, समाज और प्रदेश या देश के लिए कुछ ऐसा किया हो जो सबके लिए मिसाल हो। तो क्या गौरव पट्ट पर उसका नाम डालना हो, उसे सम्मानित करना हो तो पहले उससे पांच हजार रुपये मांगे जाएंगे?

यही वजह है कि यह योजना इससे पहले कि रफ्तार पकड़ती, फेल होने की ओर बढ़ती नजर आ रही है। ऐसा ही जारी रहा तो इस योजना के तहत होने वाले आयोजन अन्य सरकारी आयोजनों की तरह औपचारिक आयोजन बनकर रह जाएंगे। इससे तो सरकारी स्कूलों का भला होने से रहा।

हिमाचल की नाबालिग लड़की से दिल्ली में बाप-बेटे ने किया गैंगरेप

दिल्ली।। हिमाचल प्रदेश की एक नाबालिग लड़की से पहले हिमाचल प्रदेश में बंधक बनाकर रेप किया गया और फिर आरोपी ने लड़की को अपने किसी जानकार को सौंप दिया। जानकार ने लड़की को 1500 रुपये देकर उसे मंडी से दिल्ली आने वाली बस में बैठा दिया।

दिल्ली में बस से उतरने के बाद लड़की ऑटो में बैठ गई। ऑटो ड्राइवर लड़की को गोकलपुरी स्थित अपने घर ले गया। वहां बाप-बेटे ने लड़की को बंधक बनाकर कई दिनों तक उसके साथ गैंगरेप किया। आरोपियों ने लड़की को बेचने की भी कोशिश की।
इससे पहले कि वे अपने मंसूबों में कामयाब हो पाते आरोपियों ने लड़की का मोबाइल ऑन कर दिया।

मोबाइल ऑन होते ही हिमाचल पुलिस लोकेशन ट्रेस करते हुए गोकलपुरी पहुंच गई। गोकलपुरी पुलिस की मदद से पुलिस ने बाप-बेटे को अरेस्ट कर उनके चंगुल से लड़की को सकुशल बरामद कर लिया। आरोपियों की पहचान जोगेंद्र सिंह और उनके बेटे विकास उर्फ छोटू के रूप में हुई।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ में पीड़ित लड़की ने बताया कि उसका घर हिमाचल प्रदेश में है। 13 नवंबर को वह घर से बाजार के लिए निकली थी। बाजार से सामान खरीदने के बाद वह घर जाने के लिए बस स्टैंड पर पहुंची। बस स्टैंड पर दुकान चलाने वाला हरी सिंह उर्फ काकू नामक शख्स उसे बहला-फुसलाकर अपने कमरे पर ले गया।

कमरे पर पहुंचते ही उसने किशोरी के साथ रेप किया। उसने पीड़ित को दो दिन तक अपने कमरे पर बंधक बनाकर रखा। इस दौरान उसने कई बार उसे अपनी हवस का शिकार बनाया। रेप करने के बाद आरोपी ने लड़की को जान से मारने की धमकी दी और उसकी शादी धर्मपुर में अपने किसी युवक से करवाने की बात कही।

हरी सिंह ने उसे अपने जानकार युवक भानु के साथ धर्मपुर भेज दिया। 16 नवंबर को भानु नाबालिग को लेकर मंडी पहुंच गया। यहां पर उसने लड़की को 1500 रुपये देकर दिल्ली की बस में बैठा दिया। उधर, जब लड़की घर नहीं पहुंची तो परिजनों ने अपहरण की शिकायत दर्ज कराई।

17 नवंबर की सुबह लड़की मंडी से आने वाली बस से दिल्ली में उतर गई। नाबालिग लड़की एक ऑटो में बैठ गई। ऑटो वाले ने लड़की से पूछा कि कहां जाना है तो लड़की बोली कि उसका यहां कोई घर नहीं है। ऑटो ड्राइवर विकास ने लड़की से कहा कि वह उसके घर चले। घर पर उसकी पत्नी और बच्चे भी हैं।

ड्राइवर लड़की को गंगा विहार स्थित अपने घर पर ले आया। वह अपने पिता जोगेंद्र सिंह के साथ किराए के मकान में रहता है। आरोप है कि दोनों बाप-बेटे ने लड़की को बंधक बनाकर कई दिनों तक गैंग रेप किया। इस दौरान, आरोपियों ने लड़की का मोबाइल छीनकर उसे स्विच ऑफ कर दिया।

बाप-बेटे लड़की को बेचने की कोशिश में लगे हुए थे। दो दिन पहले गलती से आरोपियों ने लड़की का मोबाइल ऑन कर दिया। ऑन होते ही हिमाचल पुलिस को लड़की की लोकेशन मिल गई। दिल्ली पुलिस की मदद से हिमाचल पुलिस ने आरोपियों के कमरे पर दबिश देकर लड़की को सकुशल बरामद कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

इस मामले में रेप और पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस संबंध में जब डीसीपी नॉर्थ ईस्ट अतुल कुमार ठाकुर ने बात की गई तो उन्होंने पूरे मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों आरोपियों के साथ-साथ पीड़ित लड़की को हिमाचल पुलिस अपने साथ लेकर गई है।

सऊदी अरब में फंसे 13 हिमाचली, सीएम ने की विदेश मंत्री से बात

शिमला।। सऊदी अरब में फंसे 13 हिमाचलियों को छुड़ाने के लिए हिमाचल और भारत सरकार ने कोशिशें तेज कर दी हैं। इस मामले पर हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से बात की है।

हिमाचल के सीएम ने फोन करके केंद्रीय मंत्री को घटना की जानकारी दी और बताया कि किस तरह से हिमाचल से संबंध रखने वाले 13 लोग सऊदी अरब में फंसे हैं।

विदेश मंत्री ने कहा है कि तुरंत ही इस मामले में अधिकारियों को निर्देश दे दिए जाएंगे ताकि सऊदी अरब में फंसे भारतीय नागरिकों की वतन वापसी सुनिश्चित की जा सके।

 

सामने आया विधायक राकेश पठानिया और महिला कॉन्स्टेबल की बहस का वीडियो

शिमला।। हिमाचल प्रदेश की राजधानी में कई सड़कें सील्ड हैं यानी वहां विशेष वाहनों को ही चलने की इजाजत होती है। ऐसे ही सील्ड रोड पर बिना परमिट की कार को रोकने वाली एक महिला कॉन्स्टेबल के खिलाफ महकमे ने जांच के आदेश दिए हैं और जांच जारी रहने तक ट्रैफिक पुलिस ऑफिस में ड्यूटी देने के लिए कहा गया है।

दरअसल महिला कॉन्स्टेबल के खिलाफ यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि जिस कार को उसने रोका था, उसमें नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया बैठे हुए थे। अब कॉन्स्टेबल के खिलाफ राकेश पठानिया ने बदतमीजी आरोप लगाया है। विधायक का कहना है कि महिला कॉन्स्टेबल ने बदतमीजी की और उसने वर्दी पर नेम प्लेट भी नहीं लगाई थी।

क्या है कॉन्स्टेबल का जवाब
अपने ऊपर लगे आरोपों के जवाब में महिला कॉन्स्टेबल का कहना था कि जब वह ड्यूटी कर रही थीं, तभी कालीबाड़ी की ओऱ से ऑल्टो कार आई जिसमें न सील्ड रोड पर चलने का परमिट था न ही एमएलए का स्टिकर लगा था, इसलिए गाड़ी रोकी। कॉन्स्टेबल के अनुसार गाड़ी रोकने पर विधायक उतरे और भड़क गए। विधायक के नेमप्लेट न पहने होने के आरोपों के जवाब में कॉन्स्टेबल ने कहा कि नेमप्लेट वर्दी में लगी थी मगर जैकेट के नीचे वह छिप गई थी।

महिला कॉन्स्टेबल का यह भी कहना था कि एजी चौक से सीटीओ तक प्रदेश हाई कोर्ट ने परमिट वाली गाड़ियों के आने-जाने पर भी रोक लगा रही है, ऐसे में विधायक की भी गाड़ी यहां तक नहीं आ सकती। ऊपर से विधायक जिस गाड़ी में थे, उसके पास परमिट भी नहीं था। इसके बाद विधायक ने शिकायत की थी कि महिला कॉन्स्टेबल ने कथित तौर पर अपना नाम नहीं बताया और कहा कि मेरा नाम एसपी ऑफिस जाकर पता कर लेना।

अब 13 सेकंड का वीडियो सामने आया है जिसमें विधायक और महिला कॉन्स्टेबल में बहस हो रही है। देखें-

इस वीडियो में दोनों के चेहरे नजर नहीं आ रहे हैं और संभवत: कॉन्स्टेबल ने ही इस वीडियो को रिकॉर्ड किया है। इसमें कुछ इस तरह की बात होती सुनाई दे रही है-

महिला कॉन्स्टेबल- कर लिया है नोट

विधायक- चल जरा, चालान करके दिखा

महिला कॉन्स्टेबल- वो मैंने कर लिया है, आप नहीं बताएंगे कि कब करूंगी, कैसे करूंगी, हां.. अपणी जगह होंगे जो भी है..

पीछे से विधायक ‘मैं बताता हूं…’ बोलते सुनाई दे रहे हैं और आवाज़ अस्पष्ट हो जाती है।

इस वीडियो से पहले और बाद में क्या बात हुई, यह स्पष्ट नहीं है। मगर वीडियो से यह भी स्पष्ट होता है कैसे जनता का चुना नुमाइंदा यह कह रहा है कि ‘चालान करके दिखा।’ सवाल उठ रहा है कि क्या जनता के चुने नुमाइंदे तोप हो जाते हैं कि पुलिस उन्हें किसी तरह का नियम तोड़ने पर रोक नहीं सकती?

अगर इस तरह का व्यवहार जनप्रतिनिधि करेंगे तो ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों से आम जनता कैसा व्यवहार करेगी? अब मांग उठ रही है कि जांच न सिर्फ महिला पुलिस कॉन्स्टेबल के खिलाफ, बल्कि विधायक के खिलाफ भी होनी चाहिए कि उन्होंने सील्ड रोड में एंट्री कैसे की, ऊपर से ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिस कॉन्स्टेबल से कैसे बात की और क्यों धमकाया।

हिमाचल के राज्यपाल के लिए आई ‘एक करोड़’ की कार

शिमला।। अक्सर सादगी की बात करने वाले हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अपने लिए बेहद महंगी कार खरीदी है। राजभवन के लिए हिमाचल सरकार के पैसे से ली गई इस कार की कीमत लगभग एक करोड़ रुपये है।

चूंकि राजभवन के लिए इस तरह की व्यवस्थाओं का जिम्मा हिमाचल सरकार को करना होता है, ऐसे में यह रकम हिमाचल के खजाने से चुकाई गई है।

वैसे तो मर्सेडीज़ की इस कार की कीमत 86 लाख है मगर बताया जा रहा है कि ऑन रॉड इसकी कीमत लगभग 1 करोड़ रुपये पड़ जाएगी। इस तरह से ये हिमाचल सरकार की ओर से खरीदी गई अब तक की सबसे महंगी कार है।

गौरतलब है कि प्रदेश मन्त्रिमण्डल ने राज्यपाल के लिए कार खरीदने की स्वीकृति दी थी। इसके बाद राजभवन ने अपनी पसंद की कार खरीद ली।

वैसे तो राज्यपाल कम खर्च में कृषि, गरीबी, किसानों और आम लोगों की समस्याओं के लिए बड़ी संवेदनशीलता दिखाते हैं मगर सोशल मीडिया में उनके लिए इतनी महंगी कार खरीदने की आलोचना हो रही है।

सिरमौर में खड्ड में गिरी बस, अब तक नौ की मौत, कई जख्मी

सिरमौर।। रेणुका से नाहन आ रही निजी बस हादसे की शिकार हो गई है जिसमें अब तक नौ लोगों की मौत हो गई है और लगभग दो दर्जन लोग जख्मी हो गए हैं।

यह बस सिरमौर के जलाल पुल के पास खड्ड में गिर गई। मीनू कोच नाम की इस बस पर 40 के करीब यात्री सवार थे।

हादसे के कारणों की जांच चल रही है।

सोलन: नाले में गिरी टूरिस्ट बस, 21 जख्मी