पिछले तीन दिनों में बाहर से हिमाचल आए लगभग 23 हज़ार लोग

शिमला।। कोरोना लॉकडाउन के कारण अन्य राज्यों से हिमाचल न लौट पा रहे लोगों का आना शुरू हो गया है। जिन्हें जैसे-जैसे पास मिल रहा है, वे लौट रहे हैं। हालाँकि बहुत से लोगों की शिकायत है कि संबंधित पोर्टल में उनकी एप्लिकेशन रिक्वेस्ट अप्रूव्ड नहीं हो रही जबकि बाक़ी लोगों को पास मिल जा रहे हैं।

इस बीच ख़बर है कि पिछले तीन दिनों में 22,946 लोग हिमाचल में दाखिल हुए हैं। सीमांत क्षेत्रों से इन लोगों ने 6811 वाहनों के साथ प्रवेश किया। यह डेटा पुलिस मुख्यालय के आधार पर दिया गया है। सबसे ज़्यादा वाहन ऊना में आए, फिर काँगड़ा में और फिर सोलन में। बता दें कि इन ज़िलों की सीमाएँ अन्य राज्यों से लगती हैं।

ऊना में सबसे ज्यादा 2765 वाहनों में 12579 लोग, जबकि कांगड़ा में 2180 वाहनों में 6733 लोग और बद्दी में 948 वाहनों में 2852 लोग पहुंचे। सोलन से 205 वाहनों में 543 लोगों, शिमला में 115 वाहनों में 194 लोगों, सिरमौर में 94 वाहनों में 171 लोगों,  चंबा में 25 वाहनों में 72 लोगों और बिलासपुर में 64 वाहनों में 217 लोगों ने प्रवेश किया।

पुलिस मुख्यालय के प्रवक्ता डॉ. खुशहाल शर्मा ने पत्रकारों को बताया कि वाहनों और लोगों के प्रवेश के दौरान जानकारी दर्ज की जा रही है। साथ ही सभी को होम क्वारंटीन रहने की हिदायत और आरोग्य ऐप अपने मोबाइल फोन में अपलोड कर सही जानकारी देने को कहा जा रहा है। जो लोग होम क्वारंटीन तोड़ेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने सभी लोगों की स्क्रीनिंग करने का दावा किया है। स्क्रीनिंग लक्षणों के आधार पर की जा रही है यानी सभी के टेस्ट नहीं हो रहे। बुख़ार या सर्दी-जुकाम के लक्षण वालों को ही रोककर टेस्ट की प्रक्रिया की जा रही है जबकि बाक़ी लोगों में लक्षण न पाए जाने पर अंदर जाने दिया जा रहा है।

मेहतपुर बॉर्डर पर हिमाचल लौट रहे लोगों की भीड़ का आलम क्या था, आप ‘ट्रिब्यून’ के इस वीडियो में देख सकते हैं-

पिछले तीन दिनों में बाहर से हिमाचल आए लगभग 23 हज़ार लोग

 

बॉर्डर पर हिमाचल सरकार के इंतजामों से शांता कुमार नाखुश

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने लॉकडाउन के बीच बाहरी राज्यों से प्रदेश लौट रहे लोगों की जांच के लिए सही इंतजाम न होने पर असंतोष जताया है। इस बाबत उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से अपील की है कि वे इस पर फिर से विचार करें।

बीजेपी के संस्थापक सदस्य और कांगड़ा के पूर्व सांसद ने फ़ेसबुक पेज और ट्विटर पर लिखा है, “प्रदेश की सीमाओं पर बाहर से आने वालों के जमघट में इतने लोगों की जांच संभव नहीं है। उन्हें 14 दिन घर पर ही रहने को कहा जा रहा है लेकिन वे एकांत में रहने के लिए नहीं आए हैं।”

अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर शांता कुमार लिखते हैं, “नियमों का पालन संभव नहीं। पालमपुर की सड़कों पर अधिक भीड़ दिखाई दे रही है। बाहर से आने वालों का प्रवेश हर दिन इतना हो कि उनकी पूरी जांच हो सके और उन्हें नियम के अनुसार क्वारंटीन किया जा सके।”

हालाँकि, शांता कुमार ने यह भी लिखा है कि हिमाचल प्रदेश कोरोना मुक्त बनाने की दिशा में हिमाचल सफलता के साथ आगे बढ़ा है। उन्होंने इसके लिए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, प्रदेश सरकार और जनता को बधाई दी है।

अब तक लॉकडाउन के बीच 23 हज़ार के लगभग हिमाचल प्रदेश में लौटने की ख़बर है। इस दौरान नाकों पर भीड़ भी देखी जा रही है।

मेहतपुर बॉर्डर पर हिमाचल लौट रहे लोगों की भीड़ का आलम क्या था, जानने के लिए नीचे दिए लिंक पर टैप करें

बॉर्डर पर हिमाचल सरकार के इंतजामों से शांता कुमार नाखुश

कुल्लू: पुलिस चौकी से महज 100 मीटर दूर काट दिए पेड़

कुल्लू।। हिमाचल प्रदेश के वन मंत्री के गृह जिले में अवैध कटान का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। कोरोना संकट के कारण लगाए गए लॉकडाउन के बीच भी पेड़ काटे जा रहे हैं।

वामतट को मनाली से जोड़ने वाले मुख्य पुल के पास वन काटुओं ने रातोंरात चार हरे पेड़ों पर आरी चला दी। जहां पर यह पेड़ काटे गए हैं, यह जगह राज्य मार्ग और पुलिस चौकी से मात्र 100 मीटर की दूरी पर है।

अवैध कटान की सूचना विभाग को मिली तो डीएफओ कुल्लू ऐश्वर्य राज, आरओ मनाली सहित मौके पर पहुंचे। डीएफओ ऐश्वर्य राज ने कहा कि जल्द ही आरोपी सलाखों के पीछे होंगे।

क्या ठीक वैसे, जैसे वन कटान के बाकी मामलों में दोषी सलाखों के पीछे हैं?

हिमाचल के सीएम ने दिया सुझाव, 3 मई के बाद बढ़ाया जाए लॉकडाउन

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रवक्ता की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, राज्य के मुख्यमंत्री ने कहा है कि कोरोना वायरस का फैलाव रोकने के लिए तीन मई के बाद भी लॉकडाउन बढ़ाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये कोविड 19 की स्थिति पर चर्चा की।

इस दौरान जयराम ठाकुर ने लॉकडाउन बढ़ाए जाने का समर्थन करने हुए कहा कि लोगों के आने-जाने पर पाबंदियां लगी रहनी चाहिए क्योंकि कोविड 19 के मामले अभी भी सामने आ रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि राज्यों को ग्रीन ज़ोन में आर्थिक गतिविधियां शुरू करने की इजाजत मिलनी चाहिए।

इस दौरान पीएण ने राज्य की ओर से एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान के तहत किए गए प्रयासों को सराहा जिसके तहत प्रदेश में जुकाम जैसे लक्षणों वाले लोगों की क्रीनिंग की जा रही है। सीएम ने पीएम मोदी को बताया कि 12 में से छह जिले ग्रीन जोन में हैं क्योंकि वहां कोरोना का एक भी मामला नहीं पाया गया है।

सीएम ने बताया कि अब तक प्रदेश में 20 मरीज ठीक हो चुके हैं जबकि 10 का इलाज चल रहा है। सीएम ने कहा कि प्रदेश में प्रति 10 लाख 700 के अनुपात में कोरोना के टेस्ट किए जा रहे हैं जो कि देश में सबसे ज़्यादा है। उन्होंने पीएम से राज्य के लिए पर्याप्त वेंटिलेटर मुहैया करवाने की भी मांग की।

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हाई कोर्ट ने खारिज की बाहर फँसे लोगों को लाने की माँग वाली याचिका

शिमला।। कोरोना लॉकडाउन के कारण राज्य के भीतर व बाहर अटके हुए प्रदेश वासियों को लाने के लिए विशेष प्रबंध किए जाने के आग्रह को लेकर दायर एक याचिका को प्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता आरोपों को दस्तावेज़ों में साबित नहीं कर पाए। याचिका में कहा गया था कि सरकार पिक एंड चूज़ की नीति पर काम कर रही है।

हिमाचल के सीएम ने दिया सुझाव, 3 मई के बाद बढ़ाया जाए लॉकडाउन

हाई कोर्ट के वकील विनय शर्मा ने याचिका में कहा था कि राज्य के दो सांसदों और किन्नौर के एसपी के बच्चों को लॉकडाउन के दौरान आने के लिए राज्य सरकार ने व्यवस्था की मगर प्रदेश के अन्य निवासियों के लिए राज्य सरकार अनुमति नहीं दे रही जो कि सरकार की पिक एंड चूज नीति को दर्शाती है।

याचिका में लगाए गए आरोपों पर वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता ने सरकार की ओर से दलील पेश की कि बाहर अटके हुए प्रदेशवासियों को लाने के लिए सरकार ने पहले ही कदम उठा लिए हैं। वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिये सुनवाई करते हुए चीफ़ जस्टिस लिंगप्पा नारायण स्वामी और जस्टिस ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने इस याचिका को ख़ारिज कर दिया।

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बॉर्डर पर लगी भीड़ पर पूर्व मंत्री जीएस बाली ने दिए सरकार को सुझाव

धर्मशाला।। बाहर फँसे चुनिंदा लोगों को संबंधित ज़िलों के डीसी द्वारा पास मिलने के बाद अचानक हिमाचल प्रदेश के बॉर्डर के नाकों पर भीड़ जुटने लगी है। सोमवार को भी ऊना में पूरे प्रशासनिक अमले को हालात पर क़ाबू पाने में मशक़्क़त करनी पड़ी। इस बीच राज्य के पूर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि राज्य सरकार को सही समय पर सही नीति बनाते हुए प्लैनिंग करनी चाहिए थी। उन्होंने बॉर्डर से भीड़ और अव्यवस्था के कारण कोरोना फैलने का ख़तरा कम करने के लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं।

अपने फ़ेसबुक पेज पर काँगड़ा से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने लिखा है, “देर-सवेर ही सही सरकार ने लोगों को घर आने देने और लाने की शुरुआत कर दी है। प्रदेश बॉर्डरों पर भारी भीड़ इस कारण लग गई है। जैसा की शुरू से हम सरकार को इस दिशा में कार्य करने को कह रहे थे, अगर वह चरणबद्ध तरीक़े से काम करती तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।”

आगे उन्होंने लिखा है, “फिर भी सरकार के देर सवेर फैसले का स्वागत है। कुछ सुझाव इस स्थिति से निबटने के सरकार को दिए हैं।”

क्या हैं सुझाव

  • बॉर्डर पर डेटा रिकॉर्ड और चेकिंग के लिए ज्यादा टीम भेजी जाएँ।
  • बॉर्डर ज़िलों से प्रदेश में एंट्री की मुख्य सड़कों को छोड़कर बाकी सब सड़के बंद कर दी जाएँ।
  • इसी तरह दो ज़िलों के बीच आवाजाही के लिए भी मुख्य दो-तीन सड़क खुली रहे बाकी बंद कर दी जाएँ। उदाहरण के लिए कांगड़ा के लिए दिल्ली चंडीगढ़ से आने वाले लोगों को मेहतपुर की जगह उनके जिला बॉर्डर पर चेक किया जाए। वैसे ही हमीरपुर में किया जाए। जो भी दो जिलों को जोड़ने की मुख्य सड़के हो वहीं टीम चेकिंग के लिए रहे। इससे मेहतपुर बार्डर की भीड़ कम होगी।
  • बिलासपुर बॉर्डर पर मंडी कुल्लू लाहौल स्पीति हमीरपुर वालों को एक साथ चेक न किया जाए। बिलासपुर वालों को छोड़कर बाकियों के लिए मध्य स्थानों पर जिला वाइज स्पॉट तय कर दिए जाएँ।
  • इसके साथ ही बसों में जो लोग आने हैं, उनके लिए पूरी पूरी बस के लिए अलग स्थान चिन्हित हो।
  • e-पास डेटा का चेकिंग डेटा से मिलान हो, बिना चेकिंग घर पहुँचने वालों पर सीधे FIR की जाए जाए।

आख़िर में उन्होंने लिखा है, “सरकार के साथ साथ जनता की भी जिम्मेदारी अब बनती है। जनता अधीर न हो, नियमों का पालन करे। मेडिकल टीमों और पुलिस का सहयोग करे। अनुशासन में रहे। घर पहुँचने पर सरकार द्वारा तय कवारन्टाईन अवधि का पालन करे।”

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स्कूटी पर सवार हो हिमाचल लौटीं बाहर फंसी तीन युवतियां

ऊना, एमबीएम न्यूज़।। कोरोना लॉकडाउन के कारण बाहर फँसी हिमाचल प्रदेश की तीन युवतियाँ स्कूटी पर सवार होकर अपने घर पहुँच गईं। ये तीनों युवतियाँ काँगड़ा के शाहपुर की हैं जो लॉकडाउन के कारण चंडीगढ़ से घर नहीं लौट पा रही थीं। मगर अब कर्फ़्यू पास हासिल करके वे अपने घर लौट आई हैं।

सोमवार शाम को जब यह तीनों युवतियां भरवाईं स्थित चेकपोस्ट पर पहुंची तो लोग काफी हैरान हुए और युवतियों के जज़्बे की तारीफ़ भी करने लगे। मुस्कान, गुंजन और श्रुति नाम की ये युवतियाँ अब सकुशल अपने घर पहुँच चुकी हैं।

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गुंजन ने बताया कि वह चंडीगढ़ में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करती हैं और पत्राचार से पढ़ाई भी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण वह और उनकी दोस्त चंडीगढ़ में फँस गए थे मगर अब काँगड़ा डीसी से इजाज़त मिलने के बाद घर जा रहे हैं।

(यह ख़बर सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

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चंबा में काटे देवदार, 48 स्लीपर बरामद, तने जलाने की कोशिश

चंबा।। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पेड़ों के अवैध कटान की खबरें आ रही हैं। पेड़ काटने वाले लोग वॉकडाउन के बीच भी सक्रिय हैं। वन विभाग की टीम ने छतरी वन बीट से 48 स्लीपर बरामद किए हैं। यहां पर पेड़ काटने के बाद तनों को जलाने की भी कोशिश की गई है।

अभी तक पता नहीं चल पाया है कि यह काम किसने किया है। वन विभाग ने तीसा पुलिस स्टेशन में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। वन विभाग की टीमों ने अन्य जगहों पर भी पेड़ों का मुआयना किया है।

हाल ही में एक वीडियो वायरस हुआ था जिसमें बताया गया था कि यहां पेड़ों का कटान हुआ है। जांच के लिए जब विभाग की टीम यहां पहुंची तो पाया गया कि जो पेड़ विभाग ने खुद काटे थे, उन्हें ही अवैध कटान समझकर वीडियो को सोशल मीडिया पर डाल दिया गया था।

जब विभाग की टीम ने हडूण के जंगल में जाकर जांच की तो देवदार के पेड़ कटे मिले और 48 स्लीपर भी बारमद हुए। वन मंडलाधिकारी निशांत मंढोत्रा ने देवदार के पेड़ कटने की पुष्टि की है।

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बाहर फँसे लोगों को मिलने लगे पास मगर घोषणा क्यों नहीं कर रही सरकार?

शिमला।। हिमाचल प्रदेश से बाहर फँसे लोगों को संबंधितों ज़िलों के प्रशासन की ओर से ई-पास मिलना शुरू होने की ख़बर है। इसके तहत काफ़ी लोग बाहर की ओर लौटना शुरू हो गए हैं मगर अभी भी यह बात बड़े लोगों तक नहीं पहुँची है क्योंकि सरकार की ओर से इसकी कोई घोषणा नहीं की गई है। सिर्फ़ काँगड़ा के डीसी की ओर से ही इस बारे में आधिकारिक जानकारी दी गई है।

हैरानी की बात यह है कि रोज़ शाम को बुलेटिन जारी करने वाले हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी इस संबंध में कुछ नहीं कहा जबकि पूरे प्रदेश की निगाहें उनपर टिकी हुई हैं। ऐसे में सवाल खड़े हो गए हैं कि सरकार करना क्या चाह रही है। क्यों खुलकर इसका एलान नहीं किया जा रहा? जब काँगड़ा के डीसी अपने यहाँ के लोगों के लिए पास जारी करने की बात कह सकते हैं तो पूरे राज्य के लिए ऐसा करने की बात सीएम या सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारी द्वारा करने से क्यों बचा जा रहा है? जबकि यह तो जनता के लिए उठाया जाने वाला अच्छा कदम है।

कांगड़ा के डीसी द्वारा दी गई जानकारी-

दरअसल दो-तीन दिन पहले से ही वॉट्सऐप और सोशल मीडिया पर हिमाचल भवन दिल्ली के डेप्युटी रेज़िडेंट कमिश्नर विवेक महाजन के नाम से एक संदेश वायरल होने लगा था जिसमें कहा गया था कि अगर आप घर लौटना चाहते हैं और आपके पास अपनी गाड़ी है या गाड़ी का इंतज़ाम कर सकते हैं तो ई-पास के लिए आवेदन करें। इसके लिए उन्होंने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा पास के लिए बनाए गए पोर्टल और काँगड़ा प्रशासन के पोर्टल का लिंक दिया था। इसमें लिखा गया था कि आपका बॉर्डर पर टेस्ट होगा और फिर घर पर 14 दिनों के लिए क्वॉरन्टीन भी रहना होगा।

‘इन हिमाचल’ ने इस संबंध में विवेक महाजन से संपर्क किया था तो उन्होंने इसकी पुष्टि की थी और कहा था कि अगर कोई लौटना चाहता है तो वो इस माध्यम से ईपास बना सकता है और सरकार ने यह फ़ैसला किया है। जनहित को देखते हुए हमने इस ख़बर को प्रकाशित करना उचित नहीं समझा क्योंकि रोज़ जब प्रदेश के मुख्यमंत्री हर छोटी बड़ी बात का एलान कर रहे हैं तो वे ही इस बात की घोषणा करें ताकि किसी एक अधिकारी की गलती की वजह से ग़लत संदेश न जाए।

मगर ‘जहां हैं, वहीं रहिए’ की अपील करने वाले सीएम ने इस बात की घोषणा नहीं की कि वह बाहर फँसे हिमाचलियों को प्रदेश में आने की अनुमति दे रहे हैं और अर्जेंट केस (मृत्यु या अन्य इमर्जेंसी आदि) के अलावा भी लोग आ सकते हैं। लेकिन, आज काँगड़ा के डीसी राकेश प्रजापति ने बताया है कि पास हासिल करके काँगड़ा के लोग जो बाहर फँसे हैं, वापस हिमाचल लौट सकते हैं।

काँगड़ा के अलावा अन्य ज़िलों के लोग भी ऐसा कर सकते हैं या नहीं, इस संबंध में कोई भी आधिकारिक सूचना सार्वजनिक नहीं हुई है। यह ज़रूर है कि बाक़ी ज़िलों के लोग भी जिला प्रशासन से इस तरह पास हासिल कर रहे हैं और अपने घरों की ओर रवाना हो रहे हैं। कुल मिलाकर पूरे मामले में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

मामला संवेदनशील है, ऐसे में इस तरह के अहम फ़ैसले सर्वोच्च पदों पर बैठे लोगों की ओर से आएं तो ही उनकी विश्वसनीयता होती है। मगर कोरोना के पूरे मामले में राज्य सरकार ने जिस तरह से कई-कई फ़ैसले लिए, उन्हें पलटा और कुछ फ़ैसलों का ख़ुद एलान न करके निचले अधिकारियों या अन्य माध्यमों से प्रचारित किया, उससे सरकार पर भरोसे का संकट पैदा हो गया है।

वन मंत्री के ज़िले में फिर कटे पेड़, फिर हुआ वनरक्षकों पर हमला

कुल्लू।। वनमंत्री के गृह जिले में पेड़ों का अवैध कटान थमने का नाम नहीं ले रहा है। लग घाटी में वन रक्षकों पर हमले और जब्त स्लीपर जलाने के कुछ ही घंटों बाद ज़िले के वन मंडल सराज की त्रिलोकपुर बीट में कायल और रई के छह पेड़ काटे गए।

जब विभाग की टीम यहां पहुंची तो उसपर पथराव किया गया। पेड़ काटने वाले भागने में सफल हुए मगर पुलिस की मदद से लकड़ी जब्त कर ली गई। बंजार के डीएफओ प्रवीण कुमार ने कहना है कि पेड़ काटने वालों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जाएगा।

डीएसपी बंजार का कहना है कि चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उधर लगघाटी में काटे गए पेड़ों को लेकर वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने एसपी कुल्लू और वन विभाग के अधिकारियों से साथ बैठक करके कारर्वाई करने के आदेश दिए हैं।

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