सर्वे में ‘बेस्ट परफॉर्मिंग CM’ बने जयराम ठाकुर, मंत्रियों ने दी बधाई

शिमला।। हिमाचल प्रदेश सरकार में जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर और शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को एक सर्वे में ‘बेस्ट परफॉर्मिंग सीएम’ चुने जाने पर बधाई दी है।

समाचार एजेंसी आईएएनएस और पोलिंग एजेंसी सी-वोटर की ओर से आयोजित ‘स्टेट ऑफ दि नेशन 2020’ सर्वे में जयराम ‘बेस्ट परफॉर्मिंग चीफ मिनिस्टर’ और बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री में सर्वश्रेष्ठ चुना गया है।

समाचार एजेंसी आईएएनएस के हवाले से विभिन्न पोर्टलों ने छापा है कि इन मंत्रियों ने कहा कि इस सर्वे में भाग लेने वाले लोगों ने अपने राज्य के मुख्यमंत्रियों के काम को लेकर संतुष्टि को पैमाना मानते हुए वोटिंग की थी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में संतुष्टि की 73.96 थी जो कि अन्य बड़े राज्यों काफी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में संतुष्टि की नेट पर्सेंटेज 67.21%, असम में 67.17%,  असम में 58.73%, गुजरात में 58.53% और उत्तर प्रदेश में 57.81% थी।

मंत्रियों ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ‘मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में न सिर्फ तरक्की की राह पर आगे बझ़ रहा है बल्कि कोरोना महामारी से निपटने में भी प्रभावी रहा है।’ उन्होंने कहा कि इसके लिए एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान काफी कारगर रहा जिसके तहत फ्लू जैसे लक्षणों वाले लोगों की पहचान की गई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसकी तारीफ की थी।

लंदन से नहीं, इंदौर से चल रही है ‘दि वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’

लंदन से नहीं, इंदौर से चल रही है ‘दि वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’

इन हिमाचल डेस्क।। सांसद रामस्वरूप शर्मा और उससे पहले शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज को लंदन की एक संस्था से ‘साइलेंट वॉरियर’ नाम से ऑनलाइन  सर्टिफिकेट मिला है। नेताओं ने इसे एक बड़ी एचीवमेंट के तौर पर दिखाया है और इसकी ख़बरों को तो सांसद रामस्वरूप शर्मा ने अपने फ़ेसबुक पेज पर भी शेयर किया है। पूर्व डीजीपी सीताराम मरडी को भी ऐसा सर्टिफिकेट दिया गया था।

लोगों के बीच में चर्चा होने लगी कि आख़िर लंदन की कौन सी संस्था है और किस आधार पर सर्टिफिकेट दे रही है। पड़ताल करने पर पाया कि दि वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने और सांसदों और नेताओं व अधिकारियों को भी ऐसे सर्टिफिकेट दिए हैं। जब हमने इस संगठन के बारे में और जानकारी जुटानी चाही तो पत्रकार ओंकार खांडेकर की एक रिपोर्ट मिली। इसमें उन्होंने ‘दि वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ के बारे में कई बातों का पता लगाया है।

दरअसल, पिछले साल मध्य प्रदेश में बीजेपी के एक इवेंट को इस संस्था की ओर से ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’ का सर्टिफिकेट दिया गया था और बीजेपी ने भी इसे बड़े जोर-शोर से प्रचारित किया था। तब पत्रकार ओंकार खांडेकर ने इस संस्था को लेकर इन्वेस्टिगेशन किया था और इससे संस्थापक से भी बात की थी। हफिंगटन पोस्ट इंडिया पर छपी उनकी विस्तृत रिपोर्ट में इस संस्था के बारे में बहुत सी जानकारियां सामने आई थीं।

तब, पड़ताल में पाया गया था कि स्थापना के दो साल के अंदर ही वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने बीजेपी के नेताओं, इसके सहयोगियों और उनके द्वारा शुरू किए अभियानों को कई सारे सर्टिफिकेट दिए थे और फिर उन्हें नेताओं ने उपलब्धियों की तरह छापा था। मगर वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के इतिहास से लेकर वर्तमान तक की कहानी आपको चौंका सकती है।

लंदन नहीं, इंदौर से चलते हैं ऑपरेशंस
इन्वेस्टिगेशन में पता चला था कि ये लंदन की नहीं, भारत की संस्था है और मध्य प्रदेश के इंदौर से इसके ऑपरेशंस चलते हैं। इसका पंजीकरण सिर्फ लंदन में जाकर करवाया गया था वो भी इसलिए, ताकि लोगों को लगे कि सर्टिफिकेट लंदन से मिल रहा है। इस संस्था के संस्थापक हैं 46 साल के संतोष शुक्ला जो पहले वकालत करते थे। उनका कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट में भी वकील रह चुके हैं। उन्होंने पत्रकार को बताया कि वो ये सब इसलिए कर रहे हैं ताकि राज्यसभा में जा सकें और फिर संयुक्त राष्ट्र पहुंच सकें।

संतोष का कहना है कि उनका काम लोगों को प्रेरित करता है। सर्टिफिकेट देने को लेकर उनका कहना था कि पहले के दौर में सम्मानित करने का जो काम शॉल आदि देकर किया जाता था अब सर्टिफिकेट के माध्यम से किया जा रहा है।

जब खुद ही बना दिया था सर्टिफिकेट
सवाल उठता है कि इलाहाबाद में जन्मे संतोष ने कैसे ये ‘इंटरनेशनल’ लगने वाला संगठन खड़ा दिया जो धड़ाधड़ सर्टिफिकेट बांटे जा रहा है? संतोष का कहना था कि 2017 में उनके सहयोगी संजय शुक्ला ने सैकड़ों ब्राह्मण बालकों के लिए जनेऊ संस्कार का आयोजन किया था। वह चाह रहे थे कि इसका रिकॉर्ड बनाएं।

संतोष ने बताया, “मैंने अगले कुछ दिनों में कई सारी रिकॉर्ड दर्ज करने वाली संस्थाओं को लिखा। जैसे कि गिनेस बुक, लिमका बुक, होल्ड बुक और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स। गिनेस ने तो जवाब ही नहीं दिया, बाकियों ने या तो बहुत फीस मांगी और उनकी विश्वसनीयता भी ज्यादा नहीं थी।”  संतोष ने जनेऊ संस्कार वाले कार्यक्रम से एक रात पहले एक ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ के काल्पनिक नाम से सर्टिफिकेट बनाया और अगले दिन आयोजकों को सौंप दिया।

इसके बाद अगले दो हफ्तों तक उन्होंने रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट देने वाली संस्थाओं के बारे में जानकारी जुटाई और लंदन में अपनी जान पहचान के एक शख्स को और भारतीय मूल के ब्रितानी सांसद वीरेंद्र शर्मा को ईमेल लिखकर मदद मांगी। संतोष ने बताया कि वह गिनेस की तरह लीगल संस्था बनाना चाहते थे। उन्होंने छह-सात सांसदों के समर्थन पत्र जुटाए और लंदन जाकर इस संस्था को पंजीकृत करवा दिया। उनका कहना था कि तीन दिन में यह काम हो गया।

लंदन से ही पंजीकरण क्यों?
लंदन से रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की कॉपी भी उनके पास है। जब पत्रकार ओंकार ने संतोष से पूछा कि आपने लंदन से ही पंजीकरण क्यों करवाया तो उनका जवाब था- अगर मैं आपको एक दिल्ली का सर्टिफिकेट दूं और दूसरा लंदन का तो आप कौन सा लेंगे?

लंदन के बाद वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स को भारत, अमरीका और ऑस्ट्रेलिया में पंजीकृत करवाया गया। हफ पोस्ट के अनुसार, इसकी विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए संतोष ने पिछले दो सालों में कुछ और कंपनियां बनाईं जिनमें संतोष के परिवार के सदस्य ही निदेशक हैं। भले ही इसे वैश्विक संस्थान के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है मगर इसके अधिकतर रिकॉर्ड होल्डर भारतीय मूल के हैं।

ऐसी कोई भी संस्था इस तरह के सर्टिफिकेट दे सकती है और इसमें ग़लत नहीं है। हो सकता है कि कल को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स वाक़ई प्रतिष्ठित नाम बने और पूरी दुनिया में यह गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से भी बड़ी हो। मगर अभी उसकी ओर से मात्र एप्रिसिएशन यानी प्रोत्साहन के लिए दिए जा रहे सर्टिफिकेटों को उपलब्धि के तौर पर दिखाना यह बताता है कि हमारे नेताओं के पास आत्मविश्वास की कमी है और उन्हें अपनी उपलब्धियाँ दिखाने के लिए किसी भी सर्टिफिकेट को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने से गुरेज़ नहीं है।

रही बात ऐसी बातों की ख़बरें छपने की, इस पर बात करना बेकार है। जब फ़्रंट पेज़ पर भ्रामक विज्ञापनों को ख़बरों की शक्ल में छापा जा सकता है तो ये फिर भी मामूली सी बात है।

(हफ पोस्ट की विस्तृत रिपोर्ट आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं)

खुलकर फूल बरसा रहे सांसद को ‘साइलेंट वॉरियर’ का खिताब

शिमला।। अक्सर मीडिया में रहने वाले मंत्री और नेता जब कोरोना काल में छिप गए हैं, तब भी कुछ मंत्री और नेता खुलेआम सोशल डिस्टैंसिंग और अन्य नियमों की धज्जियाँ उड़ाते मीडिया में नज़र आ रहे हैं। ऐसे ही नेताओं में से एक हैं मंडी के सांसद रामस्वरूप शर्मा जो मंडी और कुल्लू के विभिन्न स्थानों पर कोरोना योद्धाओं को सम्मानित करने के नाम पर उनपर पुष्पवर्षा करते नज़र आए।

लंदन से नहीं, इंदौर से चल रही है ‘दि वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’

इसमें ड्यूटी में लगे डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों, सफ़ाई कर्मियों और अन्य लोगों को लाइन में खड़ा किया गया ताकि सांसद महोदय उनपर फूल बरसा सकें। इस दौरान सांसद के साथ आए लोगों और मीडियाकर्मियों ने सोशल डिस्टैंसिंग की धज्जियाँ उड़ा दीं। हर इवेंट के बाद सांसद महोदय ने मीडिया से बात भी की और ‘तथाकथित’ नेताओं और ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग को कोसा।

यानी वे इस दौरान मुखर रहे, खुलकर सामने आए और खुलकर बोले। लेकिन अब उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स नाम की ब्रितानी संस्था की ओर से ‘साइलेंट वॉरियर’ यानी मूक योद्धा का ख़िताब दिया गया है। यह संस्था ऐसे ही ख़िताब पूर्व डीजीपी सीताराम मरडी और शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज आदि कई लोगों को दे चुकी है।

अगर संस्था ने रामस्वरूप शर्मा को मुखर योद्धा और फियरलेस वॉरियर का टाइटल दिया होता तब तो बात होती। क्योंकि सांसद महोदय उम्रदराज़ हैं और दिल के मरीज़ भी हैं। वह कोरोना संक्रमण के प्रति संवेदनशील समझे जाने वाले आयु समूह में हैं। फिर भी वह घूमकर जिस तरह से कोरोना से निपटने के इंतज़ाम करने में लगे हैं और जगह-जगह प्रबंधन देख रहे हैं, वह वाक़ई बहादुरी का काम है। मगर उन्हें साइलेंट वॉरियर का टाइटल देना समझ से परे है।

बहरहाल, यह एक नेता या एक संस्था की बात नहीं है। कोरोना काल में असंख्य ऐसे संगठन उभर आए हैं जो सर्टिफिकेट बाँट रहे हैं। भले ही उनकी अपनी विश्वसनीयता सवालों के घेरे में हो। मगर दोष इन संगठनों का नहीं, इनके द्वारा दिए गए सर्टिफिकेटों को उपलब्धि के तौर पर बताने वाले नेताओं या अधिकारियों और इस बात आँख मूँदकर छाप देने वाले मीडिया संस्थानों का है।

सर्टिफिकेट देने वाले संगठनों का इरादा क्या है?
सवाल उठता है कि वर्ल्ड रिकॉर्ड वाली एक नवोदित पुस्तिका को हिमाचल में ऐसे अवॉर्ड या ख़िताब देने की ज़रूरत क्या आन पड़ी, यह तो चर्चा से ही परे है। क्योंकि देशभर में कई एनजीओ मीडियाकर्मियों और नेताओं को इस तरह के ख़िताब या सर्टिफिकेट बाँट रहे हैं और वे लोग अपनी फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल से लेकर अख़बारों तक को प्रेस रिलीज़ जारी करके इसे उपलब्धि के तौर पर दिखा रहे हैं।

इस दौरान यह नहीं देखा जा रहा कि अवॉर्ड या सर्टिफिकेट देने वाली संस्था या संगठन की अपनी क्रेडिबिलिटी क्या है और वह किस आधार पर पिक करके ऐसे ख़िताब दे रही है। दरअसल ये संस्थाएँ जानती हैं कि ख़ुद अपना प्रचार करेंगी, विज्ञापन देंगी तो लाखों खर्च होंगे। इसलिए नेताओं को ख़िताब दिए जाएं ताकि वे ख़ुद ख़बरें छपवाएं और हमारा प्रचार मुफ़्त में हो जाए।

ऐसी ही एक संस्था फ़र्ज़ी सर्वे का नाम लेकर बे सिर-पैर टाइटल नेताओं और अधिकारियों को देती रहती है। ऐसा नहीं है कि नेता या अधिकारी अच्छा काम नहीं करते। मगर सवाल ये है कि उन्हें अपने काम का सर्टिफिकेट ऐसी संस्थानों से लेने की ज़रूरत क्या है?

महेंद्र सिंह ठाकुर को ‘क्षमतावान’ बताने वाले सर्वे पर उठे सवाल

मंत्रिमंडल विस्तार: हलचल बढ़ी, इन्हें मिल सकती हैं फॉर्च्यूनर*

*दरअसल पहले मंत्री पद मिलने के लिए मुहावरा इस्तेमाल होता था- लाल बत्ती मिलना। मगर वीआईपी कल्चर ख़त्म करने के लिए लाल बत्ती तो इस्तेमाल होती नहीं मगर स्टेटस सिंबल के लिए महँगी एसयूवी, इस्तेमाल होने लगी है। हिमाचल में मंत्रियों को जीएडी से फॉर्च्यूनर मिलती हैं (हालाँकि कुछ मंत्रियों ने अपने विभागों से भी अतिरिक्त गाड़ियाँ इशू करवाई हैं)। इसलिए शीर्षक में हमने फॉर्च्यूनर मिलने को मंत्री पद मिलने के मुहावरे के तौर पर इस्तेमाल किया है।

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से तीन मंत्री पद ख़ाली चल रहे हैं और अब सत्ताधारी बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष का पद भी ख़ाली हो गया है। इस बीच प्रदेश के राज्यपाल के साथ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की बैठक क्या हुई, एक बार फिर यह चर्चा ज़ोर पकड़ने लगी कि कहीं सीएम मंत्रिमंडल का विस्तार तो नहीं करने जा रहे।

सबसे पहला मंत्री पद तब ख़ाली हुआ था जब लोकसभा चुनाव से पहले अनिल शर्मा ने इस्तीफ़ा दे दिया था। वह ऊर्जा मंत्री थे मगर उनके बेटे आश्रय शर्मा ने कांग्रेस के टिकट से मंडी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। इस कारण अनिल शर्मा को मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। उसी दौरान किशन कपूर को बीजेपी ने काँगड़ा से लोकसभा का उम्मीदवार बनाया था और वह जीत भी गए थे। ऐसे में उनका मंत्री पद भी ख़ाली हो गया। तीसरा मंत्री पद स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार के हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष बनने पर ख़ाली हुआ था। विधानसभा अध्यक्ष का पद डॉक्टर राजीव बिंदल के बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष बनने के लिए इस्तीफ़ा देने से ख़ाली हुआ था।

सूत्रों का कहना है कि जब अमित शाह बीजेपी के अध्यक्ष थे और हिमाचल में दो मंत्री पद ख़ाली थे, तब उन्होंने जयराम को मंत्री चुनने की खुली छूट दी हुई थी। उनका सिर्फ़ यही कहना था कि शपथ समारोह से पहले बस एक बार सूचित कर दें कि किसे मंत्री बनाने जा रहे हैं और कब। मगर जयराम ठाकुर ने उस समय फ़ैसला नहीं लिया और यही ढील उन्हें अब महँगी पड़ सकती है। दरअसल अब प्रदेश की राजनीतिक स्थिति बहुत बदल गई है।

अब जेपी नड्डा बीजेपी के अध्यक्ष हैं और उनके आने के बाद ही बिंदल को प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया था। नड्डा चाहेंगे कि वह अपने क़रीबियों को मंत्री पद दिलाए। उधर धूमल गुट भी चाह रहा है कि उनमें से कोई मंत्री बने। इस ख़ेमे ने पहले भी बिंदल और बरागटा को मंत्री बनाने के लिए ज़ोर लगाया था। मगर जयराम चाहते है कि सरकार जब उन्हें चलानी है तो मंत्री उनकी पसंद के हों।

मंत्री पद के लिए ये नाम आगे
मंत्री पद के लिए एक नाम जो सबसे आगे चल रहा है, वो है राकेश पठानिया। विधानसभा से लेकर प्रेस कॉन्फ़्रेंस तक वह खुलकर सरकार का बचाव करते नज़र आए है। जब-जब विपक्ष ने सीएम को घेरने की कोशिश की है, पठानिया ने वह भूमिका निभाई है जो सरकार में पहले से बैठे मंत्री नहीं निभा पाए। उनकी आक्रामक शैली और जुनूनी रवैया चर्चा में रहता है। वह काँगड़ा ज़िले से हैं ऐसे में क्षेत्र के समीकरणों के ऐंगल से भी फ़िट बैठते हैं।

राकेश पठानिया

उन्हें ऊर्जा मंत्रालय दिया जा सकता है और साथ ही अर्बन डिवेलपमेंट भी। दरअसल यह भी माना जा रहा है कि प्रदेश के कुछ मंत्रियों के महकमे बदले जा सकते है और कुछ से मंत्री पद वापस लेने का फ़ैसला भी हो सकता है। यह निर्णय आलाकमान परफ़ॉर्मेंस के आधार पर लेगा। शहरी विकास मंत्रालय ऐसे ही मंत्रालयों में से एक है जिसकी रेटिंग कम मानी जा रही है। ऐसे में दो परिस्थितियाँ पैदा हो रही हैं- सरवीण को हटाया जा सकता है या फिर उनका महकमा बदला जा सकता है।

अगर सरवीण को मंत्री पद से हटाया जाता है तो सरकार को कैबिनेट में एक महिला मंत्री बनानी होगी। ऐसे में भोरंज की विधायक कमलेश को मंत्री पद दिया जा सकता है। ऐसा करने से हमीरपुर और बिलासपुर क्षेत्र को प्रतिनिधित्व भी मिल जाएगा और महिला का कोटा भी पूरा हो जाएगा। दरअसल हमीरपुर के विधायक नरेंद्र ठाकुर को मंत्री बनाया जा सकता था मगर धूमल ख़ेमे को इसपर घोर आपत्ति है।

सरवीण चौधरी

अब दूसरी बात- अगर सरवीण को हटाया नहीं जाता है तो क्या होगा। ऐसी स्थिति में उनका महकमा बदलना तय है। सूत्रों का कहना है कि उन्हें राजीव सहजल की जगह सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय दिया जा सकता है और सहजल को स्वास्थ्य मंत्री बनाया जा सकता है। वह ख़ुद डॉक्टर (BAMS) भी हैं। अभी स्वास्थ्य मंत्रालय सीएम के पास है।

इसके अलावा विधानसभा के डेप्युटी स्पीकर हंसराज को भी मंत्री बनाया जा सकता है। हालाँकि, उनका रवैया सरकार को परेशानी खड़ी करने वाला रहा है। वह मंच से कई बार ऐसी बातें कह चुके हैं जो पद के अनुरूप नहीं थी। इनमें चुनावों के दौरान पुलिसकर्मियों को धमकाने और डीसी से वाहन को ओवरटेक करने के लेकर विवाद करना शामिल है।

हंसराज

इसके अलावा सिरमौर ज़िले से सुखराम चौधरी को भी मंत्री बनाने की चर्चा है।

वहीं बिंदल के इस्तीफ़े के बाद ख़ाली हुए प्रदेशाध्यक्ष पद पर भी नियुक्ति होनी है। नाम तो कई हैं मगर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चलेगी इसमें नड्डा की ही। हालाँकि, और ऊपर से आदेश आया तो ऐसा चेहरा देखने को मिल सकता है जो सबको चौंका सकता है।

तेज़-तर्रार IPS ऑफ़िसर आसिफ़ जलाल होंगे विजिलेंस के आईजी

शिमला।। संजय कुंडू के डीजीपी बनने के बाद पुलिस महकमे में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सरकार ने पाँच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों और एक एसपीएस अधिकारी का तबादला किया है। एक अधिकारी को अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा जाएगा।

2002 बैच के आईपीएस ऑफ़िसर आसिफ़ जलाल अब स्टेट विजिलेंस ऐंड ऐंटी करप्शन ब्यूरो में आईजी होंगे। आईजीपी एपीटी हिमांशु मिश्रा अब जलाल की जगह आईझीपी साउथ रेंज होंगे। आसिफ़ काफ़ी अनुभवी और तेज़-तर्रार अधिकारी हैं जो सीबीआई के डेप्युटेशन पर भी रह चुके हैं। वह पिछली वीरभद्र सरकार के दौरान डेप्युटेशन से वापस लौटे थे।

जब मंडी में वनरक्षक होशियार सिंह को मृत पाया गया था तब मामले की जाँच आसिफ़ जलाल को सौंपी गई थी। इसके लिए वह मंडी पहुँचे ही थे और इससे पहले कि जाँच आगे बढ़ाते, वीरभद्र सरकार ने मामला सीआईडी को सौंप दिया था। बाद में हाई कोर्ट के आदेश पर मामला सीबीआई के पास पहुँचा था और उसने हाथ खड़े कर दिए थे

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लोगों का मानना है कि अगर मामला तत्कालीन डीआईजी आसिफ़ जलाल के पास होता तो अब तक दूध का दूध और पानी का पानी हो चुका होता।

बहरहाल, राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार सरकार ने एडीजीपी कानून एवं व्यवस्था एसबी नेगी को एडीजी ऐंड कमांडैंट जनरल होमगार्ड, सिविल डिफैंस ऐंड फायर सर्विसिज लगाया है। इसके साथ ही एडीजीपी आर्म्ड पुलिस ऐंड ट्रेनिंग एन. वेणुगोपाल को एडीजीपी लॉ ऐंड आर्डर का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।

इसके अलावा एसपी पीटीसी डरोह डॉ. रमेश चंद्र छाजटा को कमांडैंट फोर्थ आईआरबी जंगलबैरी जिला हमीरपुर व एसपी एसडीआरएफ जुन्गा वीरेंद्र सिंह ठाकुर को एसपी पीटीसी डरोह जिला कांगड़ा लगाया गया है।

आंखों में आंसू ला देगा ‘शहीद वनरक्षक होशियार सिंह का पत्र’

मोदी जी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर बनेगा देश: अनुराग ठाकुर

नई दिल्ली।। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट अफेयर्स राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कोरोना आपदा को एक अवसर की तरह देखा है और हमें आत्मनिर्भर भारत का विजन दिया है। उन्होंने कहा कि इससे हममें यह विश्वास जगा है कि हम इस लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सीआईआई के कार्यक्रम के संदर्भ में यह बात कही।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “यह घड़ी हमारे लिए एक अवसर की तरह है कि हम किस तरह बदली परिस्थियों में भारत को एक बड़े निर्यातक देश के तौर पर विश्व पटल पर स्थापित कर सकें। पूरी दुनिया इस समय हमें एक भरोसेमंद साथी के रूप में देख रही है क्योंकि इस महामारी के समय में भी हमने अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ साथ विश्व समुदाय की भी मदद की है।”

अनुराग ने कहा, “हमें इसे एक बड़े बदलाव के रूप में देखते हुए इंडस्ट्री को इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहिए। ग्लोबल उद्योग संगठनों को देश की इंडस्ट्री और बाजार को ज्यादा से ज्यादा ग्लोबल बनाने में मदद करनी है। हमें आर्थिक महाशक्ति बनने के लिए देश में ऐसे प्रोडक्ट बनाने होंगे जो मेड इन इंडिया होने के साथ मेड फॉर वर्ल्ड हों।”

उन्होंने कहा, “मोदी सरकार आज ऐसे पॉलिसी रिफॉर्म भी कर रही है जिनकी देश ने उम्मीद भी छोड़ दी थी। लोगों ने मान लिया था कि ये नहीं हो सकता मगर अब ऐसी चीजें हो रही हैं। एग्रीकल्चर सेक्टर में आजादी के बाद जो नियम बने उनमें किसानों को बिचौलियों के हाथों में छोड़ दिया गया। किसानों के साथ हो रहे अन्याय को दूर करने की इच्छाशक्ति प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार ने दिखाई। कानून में बदलाव के साथ अब किसानों को अधिकार मिलेंगे। वे जहां चाहें, जिसे चाहें और जब चाहें अपनी फसल बेच सकते हैं। हमारे देश और देशवासियों में असीम क्षमता है और आने वाले समय में अपनी इच्छाशक्ति और विश्वास से तय किए गए लक्ष्यों को हासिल करने में जरूर सफल होंगे।”

अब अन्य राज्यों से हिमाचलियों को नहीं लाएगी राज्य सरकार

शिमला।। कोरोना संकट के कारण लगाए गए लॉकडाउन को खोलने की शुरुआत के साथ ही हिमाचल सरकार ने फ़ैसला लिया है कि प्रदेश के जो लोग अन्य राज्यों से घर लौटना चाहते हैं, अब उन्हें ख़ुद आना होगा। हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर ने कहा है कि अनलॉक 1.0 शुरू होने के साथ अब सरकार लोगों को नहीं लाएगी, वे परिवहन साधनों के माध्यम से लौट सकते हैं।

सीएम ने कहा कि पूरे देश में अब परिवहन सेवाएँ शुरू हो गई हैं, ऐसे में लोग अपनी सुविधा के हिसाब से कहीं भी ख़ुद आ जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान सार्वजनिक परिवहन पर रोक थी, ऐसे में फँसे हुए लोगों को उनके घर तक लौटाने के लिए सरकार ने हर संभव कोशिश की। मगर अब ऐसी स्थिति नहीं है।

सीएम ने कहा कि बाहर से आने वालों को हिमाचल की सीमा में पहुंचने पर पहले ही तरह की ज़रूरी दिशा निर्देशों का पालन करना होगा।

हिमाचल में महंगा हुआ एलपीजी सिलिंडर, जानें नए दाम

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में एलपीजी सिलिंडर के दाम बढ़ गए है। अब रसोई गैस सिलिंडर 43 रुपये महंगा हो गया है। अब जून में घरेलू गैस सिलिंडर 634.50 रुपये में मिलेंगे। इसके ऑलवेज होम डिलीवरी के 52.50 रुपये अलग से चुकाने पड़ेंगे।

इस तरह से देखें तो एक गैस सिलिंडर लेने के लिए आपको कुल 687 रुपये चुकाने पड़ेंगे।

घरेलू गैस के अलावा कमर्शल सिलिंडर भी 110 रुपये महंगा हो गया है। जून में आपको इसके लिए 1172.50 रुपये चुकाने होंगे। इसमें 59 रुपये के डिलीवरी चार्ज भी शामिल हैं।

गैस सिलिंडरों की ये बढ़ी हुई कीमतें एक जून से पूरे प्रदेश में लागू हो गई हैं। अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक घरेलू उपभोक्ताओं को 12 सिलिंडर सब्सिडी कोटे के तहत मिलेंगे।

सब्सिडी छोड़ चुके उपभोक्ताओं को सिलिंडरों की बाजार कीमत चुकानी होगी। शेष उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार सब्सिडी की राशि बैंक खाते में डालेगी। रसोई गैस के लिए केंद्र सरकार से मिलने वाली सब्सिडी की राशि भी अभी तय नहीं है। माना जा रहा है कि दो से तीन दिनों में इसकी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

अप्रैल और मई में गैस सिलिंडर के दाम कम होने से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली थी। अब जून में अनलॉक वन शुरू होने के साथ ही गैस सिलिंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई है।

हिमाचल: सोमवार से चलेंगी बसें मगर कंडक्टर नहीं बजा पाएंगे सीटी

इन हिमाचल डेस्क।। कोरोना संकट के कारण दुनिया बदल गई है और इसके साथ ही बसों से सफ़र करने का तरीक़ा भी बदला है। हिमाचल प्रदेश में सोमवार से बसें चलना शुरू हो जाएगी। ये बसें एक ज़िले से दूसरे ज़िले में भी जाएंगी। मगर अब बसों में 60 प्रतिशत से अधिक यात्री नहीं बैठ पाएँगे। साथ ही, एक फेरा लगाने के बाद बसों को सैनिटाइज भी किया जाएगा।

बसों के अंदर से लेकर बस अड्डों तक सोशल डिस्टैंसिंग का ध्यान रखा जाएगा। जिन सीटों पर लोगों को बैठने की इजाज़त नहीं होगी, उनपर क्रॉस लगा होगा। बस की एक, दो  और तीन नंबर सीटों पर भी लोग नहीं बैठ पाएँगे। ये सीट बच्चों की और बातूनी चाचा-ताऊ लोगों की फेरविट रहती हैं।

यात्रियों के चेहरों पर मास्क भी होंगे। यह आपकी ज़िम्मेदारी होगी कि अगर किसी सहयात्री ने मास्क नहीं पहना है तो उसे प्रेरित करें। दिल्ली या अन्य राज्यों में आपने देखा होगा कि लोगों को कंडक्टरों के पास जाकर टिकट लेने पड़ते हैं और वो अपनी सीट पर ही बैठे रहते हैं। हिमाचल प्रदेश में कंडक्टर यात्रियों के पास जाकर टिकट काटा करते थे मगर अब आपको कंडक्टर की सीट के पास जाकर ख़ुद ही टिकट लेना होगा, वो आपके पास नहीं आएँगे।

कंडक्टर नहीं बजा पाएँगे सीटी
सोमवार से बसों में ट्रैवल करते हुए एक और चीज जो आप अलग पाएँगे, वो है कंडक्टर की सीटी। अक्सर कंडक्टर विसल बजाकर ड्राइवर से कम्यूनिकेट करते हैं। अगर किसी स्टॉप पर बस रोकनी है तो विसल बजाई जाती है, बस चलाने का इशारा करना है, तब भी विसल बजाई जाती है। दूसरे वाहन को पास देने से लेकर पार्किंग में पीछे हटने तक में कंडक्टर सीटी के ज़रिये ही ड्राइवर को संकेत देते हैं। मगर अब ऐसा नहीं होगा।

एक तो इसलिए कि सभी के लिए चेहरे पर मास्क पहनना अनिवार्य है तो कंडक्टर के लिए भी यही नियम लागू होगा। मास्क पहनकर विसल बजाई नहीं जा सकती और विसल बजाने के लिए मास्क उतारना भी ख़तरे से ख़ाली नहीं हो सकता। मगर विसल न बजाने का मास्क ही एक कारण नहीं है। इसके भी बड़ा कारण यह है कि विसल बजाने में फूंक मारनी पड़ती है जिससे सांस के साथ अंदर से रेस्परेटॉरी ड्रॉपलेट्स यानी महीन बंदूें निकलती हैं। कंडक्टर अगर कैरियर होगा तो ये बूंदें भी सवारियों या अन्य सतहों को संक्रमित कर सकती हैं। इसलिए अब बोलकर ही ड्राइवर-कंडक्टर को आपस संवाद करना होगा।

वैसे यात्रियों को बता दें कि अब आगे से आप भी ध्यान रखें कि बहुत सारे काम ऐसे होते हैं जो लापरवाही में संक्रमण फैला सकते हैं। उदाहरण के लिए परिवार में भी आप किसी का जन्मदिन मनाएं तो केक काटने से पहले मोमबत्तियों बुझाने के लिए फूंक न मारें। ये तो पहले से ही बहुत अनहाइजीनिक तरीक़ा है और कोरोना संकट के बाद और ख़तरनाक हो गया है। इसी तरह ग़ुब्बारे फुलाने से भी बचें।

आप कॉमेंट करके बता सकते हैं कि ऐसी ही और किन बातों का ख़्याल रखना चाहिए।

हिमाचल: सोमवार से चलेंगी बसें मगर कंडक्टर नहीं बजा पाएंगे सीटी

 

 

हिमाचल में यात्रा करने के लिए सोमवार से ये नियम होंगे लागू

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जानकारी दी है कि सरकार ने कर्फ्यू में सुबह 6 से शाम 8 बजे तक छूट देने का फैसला किया है। उन्होंने प्रदेश के सभी उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के साथ कोरोना कोविड संकट पर आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौराैन यह बात कही।

हिमाचल प्रदेश के अंदर लोग बिना किसी पास के आ जा सकेंगे मगर राज्य के अंदर आने या बाहर जाने के लिए पास ज़रूरी होगा।  सीएम ने बताया कि प्रदेश के अंतर जिला बसें सोमवार से शुरू हो जाएंगी यानी एक जिले से दूसरे के लिए बसें चलना शउरू हो जाएँगी। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट को ध्यान में रखते हुए यात्री और अन्य सबी लोग ध्यान रखें कि बसों के अंदर और बाहर व बस अड्डों में सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करें।

सीएम ने कहा कि इस बात के लिए जिला पुलिस और प्रशासन को पर्याप्त इंतजाम करने होंगे। यात्रियों को तो अपनी जिम्मेदारी निभानी ही होगी, बसों के चालक-परिचालकों को भी सुरक्षा नियमों का खास ध्यान रखना होगा। बसों में 60 प्रतिशत से अधिक यात्री नहीं हो सकेंगे और वे चिपककर नहीं बैठ सकेंगे।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर

सीएम ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को कहा कि कोरोना से कैसे बचना है, इस बारे में लोगों को व्यापक जागरूकता अभियान के ज़रिये बताया जाना चाहिए। इसके लिए बसों और अन्य जगहों पर होर्डिंग लगाए जाए और अनाउंसमेंट की जाए।

सीएम ने जानकारी दी कि 25 अप्रैल से अब तक देश के विभिन्न हिस्सों से 1 लाख 60 हजार से अधिक हिमाचलवासी राज्य लौट चुके हैं। इनमें लगभग 91,000 को होम क्वारंटीन जबकि 7000 से अधिक को संस्थागत क्वारंटीन में रखा गया है। बाकी क्वॉरन्टीन अवधि पूरी कर चुके हैं।

हिमाचल: सोमवार से चलेंगी बसें मगर कंडक्टर नहीं बजा पाएंगे सीटी