महेंद्र सिंह का सीएम को सुझाव- समर्थ लोगों को पैसों में और गरीबों को मुफ्त मिले हेलिकॉप्टर सेवा

शिमला।। जलशक्ति मंत्री की घायल पोती को सीएम के हेलीकॉप्टर में आईजीएमसी एयरलिफ्ट किए जाने के बाद एयर ऐम्बुलेंस की उठती मांग पर मंत्री ने कहा है कि वह भी इस सेवा के हक में हैं। उन्होंने कहा है कि समर्थ लोगों से इसके लिए पैसा लेना चाहिए जबकि गरीबों के लिए यह सेवा मुफ़्त होनी चाहिए।

महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा, “ऐसा वाकया किसी के साथ भी हो सकता है। मेरी पोती के लिए हेलिकॉप्टर भेजा गया, जिसके लिए मैं सीएम जयराम ठाकुर का भी आभार जताता हूं। लेकिन, मैं हेलिकॉप्टर पर आया पूरा खर्च खुद वहन करूंगा। जीएडी सचिव के साथ इस बारे में बात की है।”

महेंद्र ठाकुर ने कहा कि सरकार ने पहले भी आपात परिस्थितियों में हेलिकॉप्टर के जरिए जरूरतमंद लोगों की मदद की है। जलशक्ति मंत्री ने कहा कि उन्होंने सीएम जयराम ठाकुर को सुझाव दिया है कि ऐसी घटनाओं में अलग-अलग कैटेगरी बनाई जाए, जिसमें सामर्थ्यवान व्यक्ति से समय और दूरी के हिसाब से खर्च वसूला जाए जबकि गरीब व्यक्ति को मुफ्त हेलिकॉप्टर सेवाएं दी जाएं।”

जलशक्ति मंत्री की पोती गिरकर जख्मी हुईं, सीएम ने भिजवाया हेलिकॉप्टर

देश में गांधी परिवार का एक अलग ही और विशेष महत्व है: राठौर

शिमला।। हिमाचल प्रदेसग कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने केंद्र की भाजपा सरकार पर गांधी परिवार के प्रति राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पहले इस परिवार से एसपीजी की सुरक्षा वापस ली गई और अब कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव प्रियंका वाड्रा गांधी के सरकारी आवास को खाली करने का निर्देश दिया है। राठौर ने कहा कि यह ‘भाजपा सरकार की निम्न मानसिकता को दर्शाता है।’

राठौर की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ‘देश में गांधी परिवार का एक अलग ही और विशेष महत्व है। इनके परिवार ने देश की एकता और अखंडता के लिए अपने परिवार की आहुति दी है।’

उन्होंने कहा कि ‘प्रियंका गांधी देश के पूर्व स्व. प्रधानमंत्री की बेटी हैं, इस नाते भी उनका यह अधिकार है कि सरकार उनकी पूरी सुरक्षा करे। इसी के तहत तत्कालीन सरकार ने उनको सरकारी आवास दिया है, ताकि उनकी सुरक्षा में कोई चूक न हो।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि केंद्र को अपने इस निर्णय को तुरंत रद्द करते हुए गांधी परिवार की पूरी सुरक्षा चुस्त-दुरुस्त करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में गांधीपरिवार के योगदान को देखते हुए सरकार का कर्तव्य है कि प्रियंका गांधी की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कमी न रहे।

हिमाचली घर लौटेगा तो होगा क्वॉरन्टीन, लेकिन पर्यटक मस्त नाचेगा वादियों में?

इन हिमाचल डेस्क।। भले ही अभी कोरोना की वैक्सीन नहीं बनी है मगर आपके पास कोविड-19 की नेगेटिव टेस्ट रिपोर्ट है तो आप किसी भी हाल में न तो खुद संक्रमित हो सकते हैं और न किसी को संक्रमित कर सकते हैं। आपको यकीन न हो मगर सरकारें तो यही कह रही है।

प्रदेश के बॉर्डर पर्यटकों के लिए खोल दिये गए हैं। बस होटल में पांच दिन की अडवांस्ड बुकिंग करवानी होगी और जेब में 72 घण्टों के अंदर जारी हुई कोरोना का टेस्ट नेगेटिव मिलने की रिपोर्ट होनी चाहिए। भले ही बन्दा उस लैब से निकलते हुए या फिर हिमाचल आने के रास्ते में संक्रमित हो गया हो मगर उसे क्वॉरन्टीन नहीं किया जाएगा। क्वॉरन्टीन होने का नियम सिर्फ़ उन हिमाचलियों पर लागू रहेगा जो अपने घर लौट रहे होंगे।

संक्रमण होने के बाद लक्षण दिखने का औसत समय 5-6 दिन है यानी हिमाचल आने के तीसरे-चौथे दिन से संक्रमित पर्यटक छींक-छींककर संक्रमण फैलाने की स्थिति में आ सकता है और फिर भी मस्त घूम सकता है। जबकि हिमाचल वासी बाहर से घर लौटेगा तो टेस्ट की रिपोर्ट नेगेटिव आने तक क्वॉरन्टीन रहेगा और उसके बाद भी 14 दिन पूरे होने तक इधर-उधर नहीं घूम सकेगा।

'क्या पर्यटकों को महज नेगेटिव टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर हिमाचल आने देना और बिना क्वारन्टीन किए घूमने देना सही है? क्या…

Posted by In Himachal on Friday, July 3, 2020

सरकार ने हिमाचल लौट रहे लोगों के लिए भी एक शर्त रखी थी कि अगर आप तीन दिन के अंदर जारी कोविड 19 नेगेटिव रिपोर्ट लेकर आते हैं तो आपको अनिवार्य इंस्टिट्यूशनल क्वारन्टीन की बजाय होम क्वारन्टीन के लिए भेजा जाएगा। यानी क्वारन्टीन तो रहना ही होगा।

उस स्थिति में भी होम क्वारन्टीन इसलिए जरूरी किया गया था क्योंकि व्यक्ति उस रिपोर्ट के जारी होने के बाद से लेकर हिमाचल पहुंचने के बीच संक्रमित हो गया हो तो किसी और को संक्रमित न कर दे। मगर यही व्यवस्था टूरिस्ट्स के लिए क्यों नहीं? संक्रमित तो वह भी हो सकता है?

इस विषय पर आपकी राय क्या है, कॉमेंट करके बताए.

हिमाचली घर लौटेगा तो होगा क्वॉरन्टीन, लेकिन पर्यटक मस्त नाचेगा वादियों में?

हिमाचल प्रदेश ने पर्यटकों के लिए खोले दरवाज़े, ये हैं नियम

शिमला।। अनलॉक 2 के बाद हिमाचल सरकार ने पर्यटकों के लिए प्रदेश के दरवाजे खोल दिए हैं। हिमाचल सरकार ने इसके लिए विशेष दिशानिर्देश जारी किए हैं। अब पर्यटक होटल में पांच दिन की बुकिंग करवाकर आ सकेंगे लेकिन उनके पास कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट होनी चाहिए।

नियमों के मुताबिक, आईसीएमआर से अप्रूव्ड निजी लैब से 72 घंटे पहले कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट वाले पर्यटकों को ही हिमाचल में प्रवेश की इजाजत मिलेगी। उन्हें कर्फ्यू पास की भी जरूरत नहीं होगी। हालांकि, उन्हें प्रदेश की कोविड ई-पास वाली वेबसाइट पर पंजीकरण करवाना होगा।

लेकिन अहम सवाल ये है कि कोई हिमाचल टेस्ट करवाने के बाद और हिमाचल आते-आते भी तो संक्रमित हो सकता है? फिर उस रिपोर्ट के मायने क्या रहेंगे? जब बाहर से हिमाचल लौट रहे हिमाचलियों को अनिवार्य रूप से क्वॉरन्टीन किया जा रहा है और टेस्ट नेगेटिव आने से पहले उन्हें कहीं घूमने तक की इजाज़त नहीं होती, तो फिर पर्यटकों को किस आधार पर इधर-उधर घूमने की इजाज़त होगी?

हिमाचल प्रदेश ने पर्यटकों के लिए खोले दरवाज़े, ये हैं नियम

सरकार के नियम कहते हैं कि होटलों की अडवांस बुकिंग करवाने वाले सैलानियों को क्वॉरन्टीन नहीं किया जाएगा। प्रदेश के रेस्तरां और ढाबों में 60 फीसदी ही ऑक्युपेंसी रहेगी। हालांकि, पर्यटन विभाग आने वाले समय में हालात का आकलन करने के बाद इसमें बदलाव कर सकता है।

अब देखना यह होगा कि पर्यटन स्थलों के होटल संचालक और स्थानीय लोग इस फ़ैसले को किस तरह से लेते हैं।

डाडासीबा में महिलाओं ने किया पुलिसकर्मी पर हमला, वीडियो वायरल

देहरा।। हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा के डाडासीबा में महिलाओं ने पुलिस चौकी प्रभारी पर हमला कर दिया। ये महिलाएँ एक युवक की मौत के बाद पुलिस द्वारा कार्रवाई न करने का आरोप लगा रही थीं। इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हो गया है।

एक दिन पहले ही डाडासीबा पुलिस चौकी के तहत आने वाली टिप्परी ग्राम पंचायत के लुसियार गाँव में एक शख़्स का शव मिला था। 35 साल के इस युवक का शव स्लेट वाले मकान की छप पर मिला था।

लोगों का कहना था कि सुरजीत नाम के इस शख़्स की मौत संदिग्ध हालात में हुई है और पुलिस ढंग से कार्रवाई करके दोषियों को नहीं पकड़ रही।इसी बात को लेकर पुलिस चौकी प्रभारी पर हमला कर दिया गया।

पुलिस अधिकारी पर हमले के मामले में ंभी पुलिस अब कार्रवाई कर रही है।

नीरज भारती बोले- सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं

शिमला।। चीनी सैनिकों के साथ हिंसक संघर्ष में भारतीय जवानों के शहीद होने के बाद सरकार को लेकर टिप्पणी करने वाले पूर्व सीपीएस एवं ज्वाली से कांग्रेस के पूर्व विधायक नीरज भारती ने राजद्रोह मामले में जमानत मिलने के बाद कहा है- सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।

हालाँकि, अक्सर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहकर दिन में कई सारी पोस्ट्स डालने वाले नीरज भारती ने ज़मानत पर रिहाई मिलने के बाद बुधवार शाम छह बजे तक मात्र दो पोस्ट्स डाली हैं। इनमें ंपहली पोस्ट में उन्होंने सत्य के पराजित न होने की बात कही है और दूसरी पोस्ट में कहा है कि आगे की लड़ाई बीजेपी के ही अंदाज़ में लड़ी जाएगी। ख़ास बात यह है कि इन पोस्ट्स में उन्होंने अपशब्द भी इस्तेमाल नहीं किए हैं।

दूसरी पोस्ट थोड़ी लंबी है, जिसमें उन्होंने लिखा है, “पिछले 5 दिन से चल रही लड़ाई में आखिर जीत सच की हुई बेशक ये लड़ाई अभी और लंबी चलेगी लेकिन देश की न्यायिक व्यवस्था पर जो विश्वास और आस्था पहले थी वो अब और भी बढ़ गई है। भाजपा सरकार में बैठे नेता और उनके लोग बेशक जो मर्ज़ी इल्जाम लगाएं जितने मर्जी झूठे और गलत मामले दर्ज करें लेकिन जो सच है वो कभी छुप नहीं सकता। आज नहीं तो कल लेकिन एक दिन इन भाजपाइयों का घिनौना खेल और सच सबके सामने जरूर आएगा। अब ये लड़ाई तुम भाजपाइयों के तरीके से ही लड़ी जाएगी।

“ये वर्तमान है और यही वर्तमान एक दिन इतिहास के रूप में लौट कर जरूर आएगा और साथ ही साथ मैं इस लड़ाई में जी-जान से साथ खड़े लगभग पूरे हिमाचल के नौजवान साथियों और पार्टी के बहुत से वरिष्ठ नेताओं का, युवा कांग्रेस का, महिला कांग्रेस का, एनएसयूआई का, सेवा दल का, इंटक का, और मेरे निजी दायरे के सभी दोस्तों का तहे दिल से धन्यवाद करता हूं (सभी का नाम लिखना चाहता हूं लेकिन ऐसा ना हो कि किसी का नाम लिखे बिना रह जाए तो उनको नाराज़ नहीं करना चाहता, लेकिन अब ये बखूबी जानता हूं कि इस मुश्किल समय में कौन साथ था और कौन नहीं, और जो साथ था उनके लिए उनके मुश्किल समय में मैं हमेशा उनके साथ रहूंगा)।”

“जो प्रदेश की भाजपा सरकार के भारी दवाब के बावजूद मेरे पक्ष में साथ खड़े रहे, ये लड़ाई कोई मेरी अकेले की लड़ाई नहीं है ये इस देश के सौहार्द और खुशहाली की लड़ाई है जिस पर भाजपा की गंदी नजर पड़ गई है, ये लड़ाई इस देश के संविधान को बचाने की लड़ाई है ताकि इस देश में अपनी बात रखने का जो हक संविधान ने हमें दिया है उस संविधान की रक्षा की जा सके।”

“अगर आज इन भाजपाइयों ने इनके खिलाफ लिखने के लिए मुझ पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया है तो कल ये आप पर भी करवा सकते हैं अगर आप इन भाजपाइयों या इनकी सरकार की गलत नीतियों और काम करने के तरीके पर आवाज़ उठाएंगे, इसलिए हम सबको एक होकर इनके खिलाफ आवाज उठानी होगी….. जय हिन्द, जय हिमाचल, जय कांग्रेस…..”

नीरज भारती ने सेना पर ऐसा क्या लिखा था कि ‘राजद्रोह’ में हुई गिरफ़्तारी

 

राजद्रोह मामले में पूर्व सीपीएस नीरज भारती को मिली ज़मानत

शिमला।। भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद भारतीय जवानों की शहादत को लेकर टिप्पणी करने वाले ज्वाली के पूर्व विधायक को कोर्ट से जमानत मिल गई है। इससे पहले सुबह कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था।

नीरज भारती की गिरफ़्तारी शुक्रवार शाम को हुई थी। शनिवार को कोर्ट ने उन्हें पुलिस रिमांड पर भेजा था। रिमांड की अवधि पूरी होने पर मंगलवार को फिर उन्हें कोर्ट में पेश किया गया था। जिला कोर्ट में एडिशनल सीनियर जज सिदार्थ सरपाल की कोर्ट ने भारती को 14 दिन की न्यायिक हिरासत पर भेज था मगर ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई के लिए दो बजे का समय तय किया था।

दोपहर बाद दो बजे उनकी अर्ज़ी पर सुनवाई हुई जिसके बाद उन्हें ज़मानत दे दी गई।

क्या है मामला, जानने के लिए आगे दिए लिंक पर जाएं-

नीरज भारती ने सेना पर ऐसा क्या लिखा था कि ‘राजद्रोह’ में हुई गिरफ़्तारी

सुसाइड केस बंद करने की तैयारी से पुलिस पर सवाल, DW नेगी समेत 3 पर था आरोप

किन्नौर।। साल 2017 में ख़ुदकुशी करने वाले खयाडुप ज्ञाछो नाम के शख़्स की पत्नी की ओर से करवाए गए मामले को बंद करने की तैयारी का मामला सामने आया है। ज्ञाछो की पत्नी ने आरोप लगाया था कि उनके पति को आत्महत्या के लिए उकसाया गया है।

एक सुसाइड लेटर के आधार पर एनपीएस अधिकारी डीडब्ल्यू नेगी समेत अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिको को लेकर जांच भी हुई थी। मगर अमर उजाला ने खबर दी है कि ‘एसपी साक्षी वर्मा के कार्यकाल के दौरान इस हाइप्रोफाइल मामले को बंद करने की रिपोर्ट गुपचुप तरीके से कोर्ट को सौंप दी गई थी।’

इस रिपोर्ट पर अभी तक कोर्ट ने संज्ञान नहीं लिया है। लेकिन सवाल उठने लगे हैं कि जब शुरुआती जांच में डीडब्ल्यू नेगी, रारंग पुलिस चौकी के अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ काफी सबूत मिले थो फिर इस रिपोर्ट को कैसे फाइल कर दिया गया। शिमला के एसपी रहे डीडब्ल्यू नेगी गुड़िया केस में नेपाली मूल के युवक सूरज की लॉकअप में हत्या के मामले में भी अभियुक्त हैं।

क्या था सुसाइड लेटर में
ज्ञाछो ने आत्महत्या से पहले छोड़े सुसाइड नोट में डीडब्ल्यू नेगी के अलावा पूह थाने के एएसआई रमेश और हेड कॉन्स्टेबल हुकुम पर झूठे मामले में फंसाने और जेल भेजने की साजिश रचने जैसे आरोप लगाए थे। पुलिस ने पत्नी भजन देवी की तहरीर पर मौत के कई दिन बाद अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। मीडिया में खबरें आने के बाद एएसआई और हेड कॉन्स्टेबल का तबादला कर दिया गया था।

ज्ञाछो की पत्नी ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान भी दिए थे। पुलिस ने सुसाइड नोट हैंड राइटिंग मिलान के लिए केंद्र की एक एजेंसी के पास भेजा। जांच में इसकी तस्दीक होने की भी खबर है कि ज्ञाछो की नेगी और अन्य पुलिस कर्मियों के बीच लगातार फोन पर लंबी बातें हो रही थीं।

विधानसभा चुनाव के बाद साक्षी वर्मा को किन्नौर का एसपी बनाया गया था। अमर उजाला के मुताबिक, इसी दौरान इस बहुचर्चित मामले को बंद करने की रिपोर्ट दाखिल की गई। अखबार के मुताबिक, एसपी किन्नौर एसआर राणा ने रिपोर्ट दाखिल करने की पुष्टि की है लेकिन उनका कहना है कि उनके प्रभार संभालने से पहले ही कोर्ट में यह रिपोर्ट दाखिल कर दी गई थी।

आईपीएस साक्षी वर्मा

कौन हैं साक्षी वर्मा
2014 बैच की हिमाचल कैडर की आईपीएस साक्षी वर्मा की शुरुआती पढ़ाई चंडीगढ़ में हुई थी। पंजाब के राजपुरा से ताल्लुक़ रखने वालीं साश्री एएसपी प्रोबेशनर मंडी, एएसपी शिमला, एसपी किन्नौर, एसपी बिलासपुर रह चुकी हैं। अभी वह कमांडेंट फर्स्ट इंडियन रिजर्व बटालियन हैं। उनके पति कार्तिकेयन गोकुलचद्नन भी आईपीएस ऑफ़िसर हैं। पहले वह केरल कैडर में थे लेकिन उनकी बैचमेट रहीं पत्नी साक्षी हिमाचल कै़डर में थीं तो उन्होंने भी पांच साल की सेवाओं के बाद हिमाचल कैडर चुना। कार्तिकेयन अभी ऊना के एसपी हैं।

हाल ही में ऊना पुलिस अंब में एक डॉक्टर पर ड्यूटी के दौरान कोताही बरतने का आरोप लगाने वाले शख़्स पर कार्रवाई करने के आरोप को लेकर चर्चा में रही थी। आरोप है कि पहले जांच अधिकारी, जिसने युवक को निर्दोष पाया था, उसे बदलकर एसपी कार्यालय की ओर से जो नया जाँच अधिकारी लगाया गया, उसने सबूतों को नज़रअंदाज़ कर युवक पर कार्रवाई कर दी। क्या है मामला, आगे पढ़ें।

महँगा पड़ा डॉक्टर की शिकायत करना, पत्रकार पर कार्रवाई, पुलिस पर उठे सवाल

बंबर ठाकुर समेत पाँच पर युवक को आत्महत्या के लिए उकसाने का केस

मंडी।। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में पधर के पास सुनसान इलाके में गाड़ी लगाकर आत्महत्या के मामले में नया मोड़ आया है। पुलिस ने बिलासपुर सदर से कांग्रेस के पूर्व विधायक बंबर ठाकुर समेत पांच लोगों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। बिलासपुर के युवक अंशुल ने मरने से पहले किए फेसबुक लाइव में इन लोगों से जान को खतरा बताया था और कहा था ये लोग उसका पीछा करते हैं और चाहते हैं कि मुझे मार दें या मैं खुद अपनी जान दे दूं।

इस युवक ने कहा था कि छह माह से उसे प्रताड़ित किया जा रहा है। उसका आरोप था कि कुछ लोग उझे जहर देकर मारना चाहते हैं। युवक ने यह भी कहा था कि ‘अभिनेता सुशांत राजपूत की तरह मुझे भी मरने के लिए मजबूर किया जा रहा है।’  फेसबुक पर डाले गए इस वीडियो के आधार पर पुलिस ने पूर्व विधायक बंबर ठाकुर समेत पांच पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों के तहत मुकदमा दर्ज किया है। एसपी मंडी गुरदेव शर्मा ने पुष्टि करते हुए बताया कि आईपीसी की धारा 306 समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है। 306 धारा गैर जमानती है और अभी मामले की जांच जारी है।

बंबर ठाकुर

उल्लेखनीय है कि अंशुल की मौत की उच्च स्तरीय जांच और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर बिलासपुर में धरना-प्रदर्शन भी हुए थे। मंडी के पधर में आत्महत्या के लिए उकसाने और वीडियो वायरल करने के मामले में मृतक अंशुल के पिता आगे आए हैं। उनके बेटे ने फेसबुक लाइव में जिन लोगों के नाम लिए हैं, उनमें से तीन लोगों के साथ उनके पारिवारिक संबंध हैं। कहा कि हमारा बेटा किसी बड़ी साजिश का शिकार हुआ है। इसके तहत उसने फेसबुक लाइव में इन तीन लोगों के नाम लिए हैं।

मृतक के पिता ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व विधायक बंबर ठाकुर, दीपक शर्मा और अंशुल पवार के साथ उनके घरेलू संबंध हैं। पिछले छह महीनों में पूर्व विधायक एक बार भी उनके घर नहीं आए हैं। वह अंशुल से अपने बच्चों की तरह प्यार करते थे। बावजूद इसके अंशुल ने बंबर ठाकुर का नाम फेसबुक लाइव में लिया, यह बात समझ से परे है। उन्होंने कहा कि वीडियो में इनके अलावा दो और नाम अंशुल ने लिए हैं। जिन्हें हम नहीं जानते हैं। अंशुल के पिता ने मांग की है कि पुलिस इस मामले की तह तक पहुंचे और अंशुल के फोन की छह माह की कॉल डिटेल खंगाले, ताकि सारा सच सामने आ सके।

बच्ची का शव ले जाने के लिए चार घंटों तक अस्पताल में गुहार लगाते रहे परिजन

बिलासपुर।। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के सरकारी अस्पताल से एक गरीब परिवार की बेबसी की कहानी सामने आई है। साढ़े तीन साल की एक बच्ची की मौत के बाद उसका शव ले जाने के लिए परिजनों को घंटों तक एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा।

परिजनों ने पत्रकारों को बताया कि उन्हें अस्पताल प्रशासन की तरफ से कोई सहयोग नहीं मिला। बाद में उपायुक्त बिलासपुर ने मामले की जानकारी मिलने पर गाड़ी भिजवाकर उन्हें घर भेजने का इंतजाम किया।

जिला मंडी के बलद्वाड़ा की महिला ज्योति बाला अपनी साढ़े तीन साल की बेटी को इलाज के लिए जिला अस्पताल बिलासपुर लाई थीं। बेटी की हालत ठीक न होने के कारण उसे वहां भर्ती कर लिया गया था। यहां शनिवार रात को करीब 3 बजे बेटी की मौत हो गई। इससे पहले बच्ची का इलाज पीजीआई में हुआ था।

इस दौरान बच्ची की नानी भी अस्पताल में उनके साथ मौजूद थी। बच्ची की नानी सरला ने बताया कि शनिवार साढ़े तीन बजे से वह गुड़िया के शव के साथ अस्पताल में मौजूद सुरक्षा कर्मी और ड्यूटी पर तैनात स्टाफ से सहायता की गुहार लगाती रही कि उन्हें अस्पताल की तरफ से घर जाने के लिए किसी वाहन की व्यवस्था कर दी जाए।

उनका कहना है कि सभी ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि अस्पताल में इस प्रकार की कोई सुविधा नहीं है। पीड़ित परिवार को निजी वाहन को किराये पर ले जाने की सलाह दी गई। बच्ची की मां और नानी ने बताया कि वे आर्थिक रूप से इतने समृद्ध नहीं है। अस्पताल प्रशासन से मदद न मिलने से उन्हें 4 घंटे तक एंबुलेंस के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

‘अमर उजाला’ की एक खबर के अनुसार, इस बारे में एमएस राजेश आहलुवालिया का कहना है कि उन्हें किसी ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। फिर भी वे अपने स्तर पर मामले की जांच करेंगे। वहीं डीसी बिलासपुर राजेश्वर गोयल ने कहा कि जानकारी मिलने पर पीड़ित परिवार को वाहन मुहैया करवा दिया गया था। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रबंधन से इस बारे में पूछा जाएगा और अगर कोई दोषी हुआ तो कार्रवाई की जाएगी।

जलशक्ति मंत्री की पोती गिरकर जख्मी हुईं, सीएम ने भिजवाया हेलिकॉप्टर