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सीएम सुक्खू के वादे को पूरा करने के लिए अच्छा है हिमाचल के लिए RDG बंद होना

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली रेवेन्यु डेफिसिट ग्रांट यानी आरडीजी (राजस्व अनुदान घाटा) को बंद किए जाने को एक नकारात्मक क़दम के तौर पर दिखाया जा रहा है। कुछ लोग, सोशल मीडिया इन्फ़्लुएंसर और यहां तक कि मुख्यमंत्री भी ये कह रहे हैं कि हिमाचल जंगलों और नदियों की रक्षा करता है, इसलिए उसे उसका जायज़ मुआवज़ा नहीं दिया जा रहा।

ये तर्क भ्रामक है। इन हिमाचल पहले भी कहता रहा है कि ग्रीन बोनस एक अलग और जायज़ मांग है। जंगलों, ज़मीन और नदियों की हिफ़ाज़त के लिए मुआवज़ा मिलना चाहिए और इस मुद्दे पर अलग से चर्चा होनी चाहिए। मगर इसे आरडीजी से तो बिल्कुल नहीं जोड़ा जाना चाहिए। ग्रीन बोनस को आरडीजी से जोड़ना, आरडीजी के असली मक़सद को नज़रअंदाज़ करने जैसा है।

यह स्पष्ट बात है कि आरडीजी कोई स्थायी अधिकार नहीं है। ये फ़ाइनैंस कमीशन की सिफ़ारिश पर दी जाने वाली एक ऐसी टेंपपरी एड या अस्थायी वित्तीय मदद है, जिसका मकसद ये है कि वक्त के साथ राज्य अपने रेवेन्यु डेफ़िसिट या वित्तीय घाटे को कम करें और फिर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें। यानी वो अपने खर्चे अपनी कमाई से पूरा कर सके।

हिमाचल प्रदेश के मामले में समस्या आरडीजी के बंद होने की नहीं है, बल्कि इस बात की है कि सरकारी पैसा कैसे खर्च किया जा रहा है। राज्य की अपनी कमाई के हर एक रुपये में से 60 पैसे से ज़्यादा पहले ही सरकारी सैलरी और पेंशन में चला जाता है। इस असंतुलन को ठीक करने के बजाय वर्तमान सरकार ने ओल्ड पेंशन स्कीम दोबारा लागू कर दी, जिससे लंबे समय का वित्तीय बोझ काफ़ी बढ़ गया। यानी आगे चलकर और ज्यादा रकम पेंशन पर खर्च होन वाली है।

अभी ही हिमाचल प्रदेश का रेवेन्यु डेफडिसिट और कर्ज चिंताजनक हालत में है। ऊफर से दिक्कत ये है कि हिमाचल प्रदेश की आर्थिक दशा क्या है, उसे सुधारने के लिए सरकार के पास क्या योजनाए हैं, इसकी साफ़ और पारदर्शी जानकारी अब भी सामने नहीं है। ऐसे में आरडीजी खत्म करने के लिए केंद्र पर भेदभाव का आरोप लागना प्रदेश की वित्तीय समस्याओं से ध्यान भटकाने जैसा है।

ये बात भी समझनी ज़रूरी है कि भारत सरकार ने हिमाचल प्रदेश को मदद देना पूरी तरह बंद नहीं किया है। वेल्फ़ेयर स्कीम, इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट और डिज़ास्टर रिलीफ़ वगैरह के ज़रिये मदद जारी रहेगी। इन चीज़ों से राज्य की आर्थिक क्षमता बढ़ती है। जबकि आरडीजी देने का मकसद होता है- रोज़मर्रा के खर्च चलाने में मदद करना।

मगर जब राज्य सरकार मेडिकल डिवाइस पार्क जैसे पैकेज, जिनके बनने से आगे चलकर हिमाचल में रोजगार और राजस्व दोनों बढ़ना है, उसकी रकम केंद्र को यह कहकर लौटा दे कि हम उद्योगों को सस्ती जमीन न देकर खुद यहां ये पार्क बनाएंगे और फिर प्रॉजेक्ट को खटाई में डाल देंगे तो मतलब है कि राज्य केंद्र की मदद नहीं चाहता।

इसके अलावा, वही राज्य अगर बार-बार होने अपना खर्च बढ़ाता जाए और साथ ही डेफ़िसिट ग्रांट्स पर निर्भर रहने की बात करे, तो उससे एक सवाल किया जाना चाहिए-  मसला पैसों की कमी का है या वित्तीय अनुशासन का?

जब किसी राज्य से ये उम्मीद हो कि वो अपने रोज़मर्रा के खर्च खुद संभाल सकता है, तब आरडीजी को जारी रखना इसके मक़सद के ख़िलाफ़ है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बार-बार कह चुके हैं कि 2027 तक हिमाचल प्रदेश आत्मनिर्भर बन जाएगा। कुछ दिन पहले भी उन्होंने यही दावा मंच से किया था। फिर जब ये समय-सीमा क़रीब आ रही है, तो उम्मीद सीधी है कि रोज़मर्रा के खर्च धीरे-धीरे हिमाचल की अपनी कमाई से पूरे किए जाएंगे।

इस नज़र से देखें, तो आरडीजी का खत्म होना कोई सज़ा नहीं है। ये तो राज्य और उसके मुखिया के प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के दावे की एक परीक्षा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की उनके शब्दों में नीति रही है कि वो fiscal prudence या राजकोषीय विवेक अपनाएंगे।

इस मामले में उनका केंद्र को कोसना जनता से सहानुभूति नहीं ला पाएगा क्योंकि लोग देख रहे हैं कि पहले कैसे उन्होंने सीपीएस बनाए और अब असंख्य विधायकों और गैर विधायकों को कैबिनेट रैंक दिए हुए हैं। जनता यह भी देख रही है कि कैसे रिटायर्ड अधिकारी पुनर्नियुक्त किए जा रहे हैं। भविष्य के लिए ओपीएस का बोझ डाल गए हैं अलग।

अगर पहले वह इन सब गैर जरूरी नियुक्तियों और खर्चों को खत्म कर fiscal prudence दिखाएंगे, तब जरूर वह कह पाएंगे कि आरडीसी बंद होना हिमाचल के साथ अन्याय है। वरना उनका जंगलों और नदियों को बचाने के दावे करना भी बेमतलब है क्योंकि पूरे प्रदेश ने देखा है कि कैसे हरे पेड़ काटे गए। इसी तरह, कचरे के निपटारे की व्यवस्था न होने से सारी गंदगी नदियों में पहुंच रही है।

बहरहाल, जल्द ही वह प्रदेश का बजट पेश करेंगे। उसमें पता चलेगा कि 2027 तक प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने (अपनी कमाई से खर्च चलाने) का जो लक्ष्य उन्होंने रखा था, उसे पूरा कर पाएंगे या बीते सालों की तरह ही अपनी विफलताओं के लिए पिछली सरकार को कोसते रहेंगे। ठीक उसी तरह, जैसे केंद्र में बीजेपी सरकार पिछली कांग्रेस सरकारों को कोसती रहती है।

विनय कुमार होंगे हिमाचल प्रदेश कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष

शिमला।। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस को नया प्रदेशाध्यक्ष मिल गया है। विनय कुमार हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के नए अध्यक्ष होंगे।

विनय कुमार विधानसभा उपाध्यक्ष पद पर थे, जिससे उन्होंने शनिवार को इस्तीफा दे दिया। स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने उनके इस्तीफे को मंजूर कर लिया है।

चर्चा है कि कांग्रेस आलाकमान ने लंबे मंथन के बाद विनय कुमार के नाम पर हामी भरी है।

विनय कुमार शिमला संसदीय क्षेत्र के तहत जिला सिरमौर में आने वाली अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट श्री रेणुका जी से विधायक हैं।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने की पत्रकार संजीव शर्मा पर एफआईआर की आलोचना

नई दिल्ली।। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने शिमला पुलिस द्वारा पत्रकार संजीव शर्मा के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर की कड़ी निंदा की है। यह मामला उस फेसबुक पोस्ट को लेकर है, जो संजीव शर्मा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा की थी। क्लब ने इसे स्वतंत्र पत्रकारिता को डराने और चुप कराने की कोशिश बताया है।

यह मामला हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में 29 जुलाई को मॉल रोड के पास एक बुजुर्ग व्यक्ति के सड़क पर गिरने की घटना से जुड़ा है। उस समय पुलिस पर घायल की मदद न करने के आरोप लगे थे। पत्रकार संजीव शर्मा ने उसी से संबंधित पोस्ट अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की थी।

हालांकि शिमला पुलिस ने इस पर कड़ा ऐतराज़ जताया और दावा किया कि घायल व्यक्ति की मदद के लिए तुरंत कार्रवाई की गई थी। पुलिस ने इसे भ्रामक सूचना बताते हुए कहा कि इससे एसपी और पुलिस की छवि खराब करने की कोशिश की गई। इसके बाद पत्रकार संजीव शर्मा और ‘संवाद भारत’ नामक पोर्टल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।

प्रेस क्लब ने अपने बयान में कहा, “यह मामला पत्रकार की उस पोस्ट से जुड़ा है, जो केवल जनता की एक वास्तविक चिंता को सामने लाता है। यह चिंता वैध है और उस पर जवाबदेही होनी चाहिए, न कि पत्रकार को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़े।”

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का बयान

प्रेस क्लब के अध्यक्ष गौतम लाहिरी ने कहा, “देशभर में ऐसे मामले बढ़ते जा रहे हैं जहां पत्रकारों को सवाल उठाने के लिए डराया जा रहा है। यह प्रेस की स्वतंत्रता के लिए बेहद चिंताजनक है।”

बयान में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मामले में हस्तक्षेप कर एफआईआर वापस लेने की मांग की गई है। साथ ही पुलिस को प्रेस की कार्यप्रणाली और अभिव्यक्ति की आज़ादी के महत्व को समझने की सलाह दी गई है।

प्रेस क्लब ने दोहराया कि पत्रकार समुदाय किसी भी तरह की डराने-धमकाने की रणनीति के खिलाफ एकजुट है और लोकतंत्र, पारदर्शिता और जनता के जानने के अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

हिमाचल में इस महीने भी सामान्य से ज़्यादा हो सकती है बारिश

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में अगस्त महीने में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है। हालांकि इस महीने लाहौल-स्पीति, किन्नौर और चंबा ज़िलों के ऊंचाई वाले कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है।

जुलाई में हिमाचल में कुल 250.3 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 255.9 मिमी मानी जाती है। इस दौरान मंडी ज़िले में सबसे अधिक 574.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सबसे कम बारिश लाहौल-स्पीति में हुई- सिर्फ 32.2 मिमी।

बारिश के औसत से तुलना करें तो शिमला ज़िला सबसे आगे रहा, जहां सामान्य 210.2 मिमी की तुलना में 357.9 मिमी बारिश हुई। यह सामान्य से 70 फीसदी अधिक है।

इसके अलावा, मंडी और कुल्लू ज़िलों में भी सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। मंडी में 386.5 मिमी के मुकाबले 574.7 मिमी (49% ज्यादा) और कुल्लू में 184 मिमी के मुकाबले 230.2 मिमी (25% ज्यादा) वर्षा हुई।

निमिषा प्रिया: भारतीय नागरिक को यमन में मिली मौत की सजा रद्द

नई दिल्ली।। यमन में हत्या के एक मामले में मौत की सज़ा का सामना कर रहीं भारतीय नागरिक निमिषा प्रिया को बड़ी राहत मिली है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, केरल के ग्रैंड मुफ्ती कंतापुरम एपी अबूबकर मुसलियार के कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि यमन की राजधानी सना में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में निमिषा प्रिया की पूर्व में अस्थायी रूप से निलंबित मौत की सज़ा को अब पूरी तरह रद्द करने का निर्णय लिया गया है।

https://x.com/ani/status/1949907615456117019

बयान के मुताबिक, “निमिषा प्रिया की मौत की सज़ा, जिसे पहले निलंबित किया गया था, अब रद्द कर दी गई है। सना में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया।”

कौन हैं निमिषा प्रिया?

निमिषा प्रिया एक भारतीय नर्स हैं, जो केरल की रहने वाली हैं। वे कुछ साल पहले काम के सिलसिले में यमन गई थीं। वहां उन पर एक स्थानीय नागरिक की हत्या का आरोप लगा और 2017 में उन्हें गिरफ्तार किया गया। मामले की सुनवाई के बाद यमनी अदालत ने उन्हें मौत की सज़ा सुनाई थी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, निमिषा प्रिया ने खुद को और अपनी बेटी को प्रताड़ना से बचाने के लिए यमन के नागरिक की हत्या कर दी थी। इस मामले ने भारत में भी काफी ध्यान खींचा और मानवाधिकार संगठनों के साथ-साथ कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनकी रिहाई की मांग की।

क्यों अहम है यह फैसला?

निमिषा की मां और अन्य परिजन लंबे समय से उनकी रिहाई के लिए संघर्ष कर रहे थे। इस बीच, केरल से धार्मिक और सामाजिक प्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी यमन गया था, जिसने वहां की सरकार और अधिकारियों से बातचीत की।

अब ग्रैंड मुफ्ती के कार्यालय से आए इस बयान को उनके परिवार और समर्थकों के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें कब रिहा किया जाएगा या क्या किसी प्रकार की मुआवज़ा राशि (blood money) समझौते का हिस्सा रही है।

भारत सरकार की ओर से भी इस मामले में लगातार राजनयिक प्रयास किए गए हैं। ताज़ा घटनाक्रम के बाद उम्मीद की जा रही है कि निमिषा प्रिया को जल्द ही रिहा कर भारत वापस लाया जा सकेगा।

संजीव गांधी के बचाव में उतरी शिमला पुलिस ने हिमाचल दस्तक से क्या कहा?

शिमला।। शिमला पुलिस के फेसबुक हैंडल ने हिमाचल दस्तक की एक खबर पर कॉमेंट किया है, जो चर्चा में है। हिमाचल दस्तक ने खबर छापी थी कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के एसपी संजीव गांधी को बड़ी राहत दी है। खबर में लिखा है- “अदालत ने एक आपराधिक अपील के मामले में हलफनामे की गलती पर उनके माफीनामे को स्वीकार करते हुए उन्हें जारी कारण बताओ नोटिस रद्द कर दिया।”

दरअसल, गांधी ने NDPS एक्ट की धारा का हवाला देकर सज़ा के निलंबन का विरोध किया था, जिसे कोर्ट ने प्रथम दृष्टया भ्रामक पाया था। हालांकि, गांधी ने इस संबंध में जो माफीनामा दिया था, उसके आधार पर कोर्ट ने आगे कोई कार्रवाई नहीं की।

इस पर शिमला पुलिस ने दस्तक की खबर कॉमेंट किया है। शिमला पुलिस यानी एसपी के अधीन काम करने वाली पुलिस। इंग्लिश में किए गए इस कॉमेंट का हिंदी अनुवाद स्क्रीनॉशट के नीचे है-

शिमला पुलिस के कॉमेंट का स्क्रीनशॉट
शिमला पुलिस के कॉमेंट का स्क्रीनशॉट

“हिमाचल दस्तक, शुक्रिया, ड्रग ट्रैफिकर समाज के दुश्मन हैं, यह मामला एक ड्रग तस्कर से जुड़ा है जिसे निचली अदालत ने दोषी ठहराया था। एसपी शिमला ने उसकी ज़मानत का विरोध करते हुए एक कानूनी धारा का उल्लेख गलती से कर दिया, लेकिन यह एक ईमानदार कोशिश थी। बहरहाल, हमें यह स्वीकार करना होगा कि नशा और ड्रग माफिया समाज के दुश्मन हैं और इनके खिलाफ़ पूरी ताकत से लड़ना ज़रूरी है।”

आगे एसएसपी संजीव गांधी की तारीफ करते हुए हैशटैग्स का इस्तेमाल करते हुए शिमला पुलिस ने लिखा है, “#SanjeevGandhiSP इस मुहिम को अच्छे तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं। #ShimlaPolice की #MissionClean और #Bharosa जैसी पहलें ड्रग तस्करों के खिलाफ़ मजबूत संदेश दे रही हैं।”

दिलचस्प बात यह है कि शिमला पुलिस अपने एसपी को संबोधित करते हुए उनका मनोबल बढ़ाते हुए आगे कहती है, “एसपी शिमला, परवाह न करें। ड्रग तस्करों के खिलाफ़ लड़ाई में कई चुनौतियां आ रही हैं, लेकिन हम पाप के खिलाफ़ लड़ेंगे और जीतेंगे। ड्रग तस्करों के खिलाफ़ लड़ना हमारा कर्तव्य है। “पाप से लड़ेंगे, जीतेंगे जरूर।”

आखिर में लिखा है- “धन्यवाद दस्तक, शायद शिमला की जनता इस खतरे को सबसे बेहतर तरीके से समझती है।”

एसएसपी संजीव गांधी पिछले दिनों विवादों में रहे थे। एचपीपीसीएल के अधिकारी रहे विमल नेगी की मौत मामले में उनकी रिपोर्ट पर पूर्व डीजीपी ने सवाल उठाए थे, जिसके बाद गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डीजीपी, सीएस समेत कई अधिकारियों और नेताओं पर आरोप लगाए थे। सरकार ने उन्हें, डीजीपी और एसीएस ओंकार शर्मा को कथित तौर पर छुट्टी पर भेज दिया था। गांधी सीबीआई जांच के खिलाफ हाई कोर्ट भी गए थे। निजी हैसियत से उन्होंने अपनी जांच को सही बताते हुए एक याचिका भी हाई कोर्ट में दायर की थी।

हिमाचल पुलिस में अंतर्कलह: एसएसपी संजीव गांधी ने डीजीपी अतुल वर्मा पर लगाए आरोप

हिमाचल पुलिस में अंतर्कलह: एसएसपी संजीव गांधी ने डीजीपी अतुल वर्मा पर लगाए आरोप

शिमला।। विमल नेगी मौत मामले की जांच को लेकर पुलिस विभाग में चल रही कलह अब और खुलकर सामने आ गई है। हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के चीफ इंजीनियर रहे विमल नेगी की मौत की जांच सीबीआई को सौंपी जाए या नहीं, इस पर हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान डीजीपी ने एक हलफनामा दिया था। उसमें उन्होंने एसआईटी और शिमला के एसएसपी संजीव गांधी पर सवाल उठाए थे।

अब संजीव गांधी ने शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मैंने 25 साल तक ईमानदारी से तपस्या की तरह पुलिस विभाग में नौकरी की है। उन्होंने कहा कि अगर कोई उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाता है तो वो पद छोड़ना पसंद करेंगे। उन्होंने कहा कि एसआईटी इस मामले को दोबारा अदालत में लेकर जाएगी ताकि विमल नेगी को न्याय मिल सके।

डीजीपी पर गंभीर आरोप
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजीव गांधी ने डीजीपी पर कई गंभीर आरोप लगाए। गांधी ने कहा कि शिमला पुलिस ने सीआईडी के एक मामले में जांच की थी, लेकिन इसका एक गुप्त पत्र को चुराकर पुलिस महानिदेशक के निजी स्टाफ ने लीक करवाया था। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि डीजीपी का स्टाफ ड्रग पेडलर्स के संपर्क में पाया गया है। गांधी ने कहा कि संजय भूरिया नामक गैंग में डीजीपी के निजी स्टाफ का कर्मचारी संलिप्त पाया गया है।

उन्होंने ये भी कहा कि पुलिस महानिदेशक ने सीआईडी में रहते हुए एक जूनियर अधिकारी पर दबाव बनाकर एक रिपोर्ट तैयार करवाई थी और कोर्ट को गुमराह करवाया था। गांधी ने कहा कि जब पुलिस महानिदेशक का कार्यालय का इस प्रकार के व्यक्तियों के साथ संचालित हो रहा तो पुलिस अधीक्षक का धर्म व कर्म बनता है कि न्याय व प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए ऐसे कार्यालय की विश्वसनीयता के बारे में जनता को भी सचेत करें और इस तरह की महत्वपूर्ण जांच को भी इस तरह के व्यक्ति से बचाए।

पूर्व डीजीपी पर भी आरोप
शिमला एसएसपी ने कहा कि जब शिमला के मिडल बाजार में हिमाचली रसोई में गैस लीक होने से ब्लास्ट हुआ था, उसमें एनएसजी (शायद वह एनआईए कहना चाह रहे थे) को बुलाया गया। एसएसपी का आरोप है कि सबूतों से छेड़छाड़ की गई और कहा गया कि इसमें आरडीएक्स था। उन्होंने तत्कालीन डीजीपी (संजय कुंडू) पर आरोप लगाया कि उन्होंने तब सरकार को मेरे खिलाफ चिट्ठी लिखी थी कि ये एसपी शिमला की लापरवाही है। हालांकि जांच में साफ हुआ कि धमाका आरडीएक्स से नहीं, गैस से हुआ था। गांधी ने कहा कि इससे सवाल उठता है कैसे बड़े पुलिस अधिकारी एनएसजी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

जब उनसे एक पत्रकार ने पूछा कि कहीं आप डीजीपी कहीं वह जनता में बन रहे माहौल को देखते हुए ये सब आरोप तो नहीं लगा रहे हैं। तो उन्होंने कहा कि उनके पास हर बात के सबूत हैं। उन्होंने ये भी कहा कि इन सभी बातों पर उन्होंने सरकार को चिट्ठियां लिखी हैं और सब रिकॉर्ड में है। गांधी ने कहा कि उन्होंने पुलिस भर्ती में अनियमितता पर आपत्ति जताई थी और बाद में इस मामले में धांधली भी निकली थी। इस बात से हेडक्वॉर्टर के अधिकारी उनसे चिढ़े हुए हैं।

एसएसपी संजीव गांधी ने धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दर्ज किया है। एसपी ने यह केस 21 मई को हाईकोर्ट की कार्यवाही के वीडियो क्लिप को वायरल करने पर दायर किया है। गांधी का कहना है कि इसे उनके छवि खराब करने के इरादे से वायरल किया गया।

CBSE Results 2025: कहां चेक कर सकते हैं Class 10 and Class 12 results

शिमला।। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (CBSE) आज दसवीं और बारहवीं के रिजल्ट जारी करने वाला है। कुछ ही देर में अकैडमिक इयर 2025 के रिजल्ट जारी हो सकते हैं। रिजल्ट चेक करने के लिए स्टूडेंट्स और उनके अभिभावक नीचे दिए लिंक्स पर जा सकते हैं।

  1. cbseresults.nic.in
  2. cbse.gov.in
  3. results.cbse.nic.in
  4. results.digilocker.gov.in
  5. UMANG app डाउनलोड करके।

CBSE Results 2025 चेक करने के लिए ऊपर दिए गए लिंक ऑफिशल साइट्स के हैं।

हिमाचल प्रदेश में बसों का किराया बढ़ाने की टाइमिंग पर उठते सवाल

इन हिमाचल डेस्क।। सुख की सरकार ने हिमाचल की जनता पर ऐसे वक्त वक्त महंगे किराये का बम फोड़ा, जब पाकिस्तान से संघर्ष चल रहा था और सबकी निगाह सीमा पर थी। क्या यह कोशिश थी सवालों से बचने की? मगर सवाल खत्म नहीं हुए।

हमने तब इसलिए सवाल नहीं उठाया क्योंकि हमें लगा वक्त सही नहीं हैं। लेकिन क्या सरकार के पास जवाब है कि जब चंद रोज़ पहले बसों का न्यूनतम किराया बढ़ाया था, तभी सामान्य किराया क्यों नहीं बढ़ाया गया? तब क्यों प्रचारित किया गया कि न्यूनतम किराया ही बढ़ाया जाएगा।

और फिर किराया बढ़ाना ही था तो ऐसी कौन सी आफत आन पड़ी थी जो चंद दिनों का इंतजार नहीं हुआ? ऐसी बेकरारी क्या थी कि जब सीमाओं पर तनाव था और हो सकता था कि छुट्टी पर आए फौजी भाइयों को आनन-फानन में ड्यूटी जॉइन करनी पड़ती या उन्हें कैंट इलाकों से अपने परिजनों को सुरक्षा के लिए घर भेजना पड़ता, तभी यह कदम उठाया गया।

फिर कुछ कहते हैं कि “हमारी छवि खराब की जा रही है” और कुछ लिखते हैं “साज़िशों का दौर” चला हुआ है। हकीकत ये है कि वाकई “झूठ के पैर नहीं होते” और जनता जानती है कि कोई एक नहीं, बल्कि एक पूरा ग्रुप है जो सच छिपाने और झूठ बोलने की आदत से मजबूर है। आपकी छवि कोई और नहीं, आप खुद खराब कर रहे हैं।

कौन थे खाकीशाह, बिलासपुर में जिनके नाम पर बनी ‘मज़ार’ पर हो रहा है हंगामा

बिलासपुर।। हाल के दिनों में बिलासपुर में एक मज़ार को नुक़सान पहुंचाने का मामला सामने आया। प्रशासन ने इसकी मरम्मत करवा दी है, लेकिन सवाल बरक़रार है कि आखिर ये मज़ार कहां से आई। बिलासपुर के कुलदीप चंदेल ने इस मामले में फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर यह बताने की कोशिश की है जहां ये मज़ार बनी है, उसके नीचे पहले एक दरगाह हुआ करती थी।

उनका यह भी कहना है कि मूल दरगाह भाखड़ा बांध बनने पर पानी और गाद के नीचे दब गई थी। इसके बाद एक परिवार अपने घर पर उनके नाम का दिया जलाया करता था। और जब इतने ऊंचे मंदिर ही गोबिंद सागर झील में जमा गाद में डूब गए हैं तो मूल मजार तो कुछ ही फुट ऊंची थी। उन्होंने सवाल उठाया है कि गाद की मिट्टी पर किसने मजार बना दी है।

बहरहाल, बिलासपुर में यहां किसकी दरगाह थी, जानने के लिए पढ़ें उनका आलेख-

गोबिंद सागर झील में डूबे पुराने बिलासपुर शहर की जिस खाकीशाह मजार को लेकर इन दिनों हंगामा खड़ा हुआ है। उस बारे कुछ पंक्तियां पाठकों के ध्यानार्थ ……

कौन था खाकीशाह?

क्यों बनी उसकी मजार?
कौन थे उसके पुजारी?
कैसा था वह स्थान?
वर्तमान में कहां होती खाकीशाह की पूजा ?

इतिहास के आइने में, सामाजिक परिपेक्ष्य में

गोबिंद सागर झील में डूबे ऐतिहासिक नगर बिलासपुर के गोहर बाजार में खाकीशाह की मजार थी। यह चारदीवारी से घिरा एक खूबसूरत स्थान था। मजार के पास बेरी का बहुत बड़ा पेड़ था। जब उसमें बेर लगते तो बच्चों समेत बड़े लोग भी उन मीठे बेरों का आनंद लेते थे। उस मुस्लिम फकीर की पूजा मुसलमानों से अधिक हिंदू किया करते थे। हर वीरवार को खाकीशाह की मजार पर जाकर चूरमा चढ़ाते और अपने परिवार की खुशहाली सुख शांति की फरियाद करते थे।

आखिर कौन था खाकीशाह ?वास्तव में खाकीशाह दक्षिण एशिया के एक छोटे से देश बलख बुखारा का बादशाह था। वह एक बहुत ही गुस्से बाज शासक था। उसके पलंग की मखमली चादर को उसकी एक दासी रोजाना झाड़ती थी। एक दिन उस दासी के मन में आया कि वह बादशाह की इस पलंग पर सो कर देखे, कितना मजा आएगा! बहुत अच्छी मखमली चादर है।

दासी जैसे ही बिस्तर पर लेटी वैसे ही बादशाह दरवाजे से भीतर प्रविष्ट हुआ। अपने पलंग पर दासी को सोए देख उसकी भृकुटी तन गई। उसका गुस्सा सातवें आसमान पर था। उसने तुरंत उस दासी को फांसी का हुक्म सुना दिया।

फांसी का हुक्म सुन कर दासी बहुत अधिक रोने लगी लेकिन फिर उसे हंसी आ गई, जैसे उस पर कोई उन्माद छा गया हो। राजा ने उसे चुप करवाया और उसके रोने और हंसने का कारण पूछा। दासी बोली …….बादशाह सलामत, मैं तो इस बिस्तर पर पल भर को सोई तभी मुझे फांसी का हुक्म सुनाया गया लेकिन जो व्यक्ति इस पर प्रतिदिन सोता है उसकी क्या हालत होगी, यह जानकर ही मुझे पहले रोना आया और फिर हंसी आई।

बादशाह का माथा ठनका। उसका विवेक जागृत हो गया था। उसने उसी समय राजपाट त्याग कर दिया और घूमता घूमता निकल पड़ा। वह फकीर बन गया था। इस बारे इतिहास में एक दोहा आता है-

भला होया जे दास्सी मारी,  होया हुकम प्यारे दा।
खाकीशाह फकीर होया,  बादशाह बलख बुखारे दा।।

फकीर बनने के बाद खाकी शाह घूमता घामता सतलुज नदी के किनारे एक घने जंगल में पहुंच गया। यहां समीप रंगनाथ का मंदिर और नदी किनारे मुरली मनोहर का मंदिर था। घने जंगल में हिंसक जानवर विचरते थे लेकिन खाकीशाह को वह स्थान पसंद आया। उसने जंगल में धूना लगा दिया।

एक दिन धूने से धुआं निकल रहा था तो समीप के भरतपुर व्यासपुर गांव के लोगों को आश्चर्य हुआ। वे वहां पर पहुंचे जहां धुआं निकल रहा था। उन्होंने देखा कि यहां एक फकीर धूना लगाए बैठा है। लोगों ने कहा ….महाराज यहां बियाबान घना जंगल है। यहां तो दिन में ही हिंसक पशु विचरते दहाड़ते रहते हैं। आप चलकर समीप के गांव में अपना डेरा लगाएं।

फकीर ने इनकार कर दिया। उसने कहा कि आने वाले समय में यह स्थान चहल-पहल वाला होगा।

फकीर के बात उस समय सच्च साबित हुई जब वहां पर कहलूर रियासत के एक महा प्रतापी राजा दीपचंद (1653-1657 ई. ) ने सुन्हानी से अपनी राजधानी बदल कर इस स्थान को बदली। राजधानी का नाम बिलासपुर रखा और धौलरा नाम के स्थान पर अपने महल बनाए।नीचे की तरफ बाजार व शहर बसाया।

दीपचंद के साथ चार साधु संत हर समय रहते थे। वे उसके मार्गदर्शक भी थे। सलाहकार भी थे। इनमें से एक खाकीशाह भी था। यह वही फकीर था जिसने ग्रामीणों को कहा था कि आने वाले समय में यहां पर रौनक होगी।

जब खाकीशाह दुनिया को छोड़ गया तो उस स्थान पर एक मजार बनाई गई। यह बहुत रमणीक स्थान था। जहां पर कवि सम्मेलन और महफिलें होती थीं। लोग बैठ कर आराम से गपशप लगाया करते थे। शबीर कुरेशी का परिवार इसका पुजारी था। हर वीरवार को वहां पर मीठा चूरमा चढ़ता और मीठी खिल्लों इलायचीदाने का प्रसाद बांटा जाता। यह हिंदू मुस्लिम एकता का मुंह बोलता स्थान था।

जब पुराना शहर झील में डूब गया तो शबीर कुरेशी के पिताजी वजीर दीन अपने घर के आंगन में खाकीशाह की याद में चिराग जलाया करते थे। बाद में शबीर कुरेशी हर वीरवार को पूजा स्थल पर चिराग जलाते। वीरवार का व्रत रखते।

May be an image of temple and text that says "दरगाह बाबा ख्ाकिशाह"

कुरेशी वास्तव में हमारे मित्र और वरिष्ठ पत्रकार थे। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस,  टाइम्स ऑफ इंडिया, नवभारत टाइम्स आदि अखबारों में बतौर संवाददाता काम किया। आकाशवाणी व दूरदर्शन के लिए जीवन भर काम करते रहे। हिमदिशा नाम से अपनी अखबार निकालते रहे।

पिछले कुछ सालों से झील में डूबे शहर की गाद के ऊपर कुछ लोगों ने एक मजार बनाकर वहां पर अपनी गतिविधियां शुरू कर रखी हैं। मजार को हरे रंग में रंग दिया। चादर चढ़ा दी। झंडे लगा दिए। असली मजार तो लुप्त हो गई है। उसके ऊपर 30, 40 फूट गाद चढ़ गई है।

बड़े-बड़े मंदिर झील की गाद में लुप्त हो गए तो वह तो एक छोटी सी मजार थी। जिसकी ऊंचाई एक डेढ़ फुट थी। जमीन से लगभग अढ़ाई तीन फुट ऊंचा स्थान बनाया गया था। समझ नहीं आता कि जब खाकीशाह की पूजा पिछले लगभग साठ सालों से शबीर कुरेशी जी के घर के आंगन में हो रही है तो फिर यह नया विवाद खड़ा करने का क्या औचित्य है?

इस प्रश्न के साथ यहीं विराम।

(कुलदीप चंदेल के फेसबुक पोस्ट से साभार)