सरकार खुद नहीं मानती कि ‘मंडी’ पहले ‘मांडव नगर’ था

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के हवाले से राज्य के मीडिया में खबरें छप रही हैं कि सरकार शहर का नाम मांडव, मांडव्य नगरी, या मांडव नगर रखने जा रही है। अलग-अलग अखबारों ने प्रस्तावित नाम को अलग-अलग ढंग से रखा है। कुछ ने तो इतिहास छाप दिया कि मांडव्य ऋषि के नाम पर इसका नाम रखा जाएगा और यहां से इसका इतिहास जुड़ा हुआ है। मगर हकीकत यह है कि हिमाचल प्रदेश सरकार आधिकारिक तौर पर खुद मानती है कि इस शहर का नाम पहले मांडव नगर था या नहीं, इसकी कोई जानकारी नहीं है।

जी हां, हिमाचल प्रदेश सरकार आधिकारिक तौर पर मानती है कि “साल 765 ईस्वी में सुकेत के गठन से पहले प्रारंभिक इतिहास के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। यह क्षेत्र राना और ठाकुर के नियंत्रण में था।”

ये जानकारी हिमाचल सरकार की मंडी जिले के के लिए बनाई गई आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई है। इसमें इतिहास के बारे में आगे लिखा गया है, “साहित्य के शुरुआती उल्लेख में एकमात्र स्थान रिवालसर है और यह स्कंद पुराण में तीर्थ यात्रा का पवित्र स्थान माना जाता है। महाभारत के एक नायक करण ने एक छोटे से गांव करणपुर की स्थापना की थी। गम्मा में एक मंदिर उस इलाके की ओर इशारा करता है जहां पांडवों को जलाने का विफल प्रयास किया गया था। इसके अलावा, पूर्वी राज्य के अस्तित्व का उल्लेख नहीं है शास्त्रीय साहित्य में।”

यानी पहले मांडव नगर इसका नाम था, इसके कोई सबूत नहीं हैं। हां, ऐतिहासिक साक्ष्यों की बात की जाए तो बौद्ध धर्म से लिंक जरूर जुड़ते हैं इस क्षेत्र के। हिमाचल सरकार के अनुसाकर, “तिब्बती परंपरा के अनुसार, पदम् संभव (750-800 ई।), महान बौद्ध भिक्षु , जिसे तिब्बत के राजा त्सोंग-डी-टीसन द्वारा बुद्ध धर्म के प्रचार के लिए बुलाया गया था, वह समय रिवालसर दौर का प्रतिनिधित्व करता है। इस आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है कि मंडी इस समय बौद्ध शिक्षा का एक महान स्थान रहा होगा।”

बता दें कि मंडी क्षेत्र को तिब्बती साहित्य में ज़ाहोर (सहोर) कहा जाता है। यही ऐतिहासिक साक्ष्य हैं। मगर चूंकि यह नाम बौद्ध धर्म से जुड़ा है, हिंदू धर्म से नहीं, संभवत: इसीलिए इस नाम को रखने की बात नहीं की जा रही, आधुनिक दंतकथाओं के आधार पर मांडव्य ऋषि से नाम जोड़कर मांडव नगर रखने की बात की जा रही है। चूंकि चुनाव नजदीक हैं, इसलिए इस कदम का उन लोगों पर प्रभाव पड़ सकता है जो इस तरह के तुष्टीकरण वाले कदमों से खुश हो जाया करते हैं।

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