परिवहन मंत्री के जिले में सड़कों पर उतरे बस संकट से परेशान स्कूली बच्चे

प्रदर्शन करते बच्चे (Image: MBM News Network)

एमबीएम न्यूज, कुल्लू।। बंजार बस हादसे के बाद प्रशासन द्वारा ओवरलोडिंग को लेकर बरती जा रही सख्ती से हिमाचल प्रदेश की परिवहन व्यवस्था की पोल खुल गई है। परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर के गृह जिले कुल्लू में बड़ी संख्या में लोगों और स्कूली छात्र-छात्राओं को बस सेवा नहीं मिल पा रही है।

बसों में सीट न मिलने के कारण स्टूडेंट्स को कई किलोमीटर सा सफर या तो पैदल तय करना पड़ रहा है तो कई स्थानों पर बच्चों ने स्कूल जाना ही बंद कर दिया है। कुल्लू जिले में पैदा हुई इस स्थिति को लेकर जिला मुख्यालय में कई सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन किया, रैली निकाली और नारेबाजी की।

स्कूल जाने से पहले प्रदर्शन
प्रदर्शन में शामिल हुए स्टूडेंट्स ने बस सेवा उपलब्ध करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि शाम को छुट्टी होने के बाद घर पहुंचना उनके लिए परेशानी का सबब बन गया है। ऐसे में उन्होंने मंगलवार को स्कूल जाने से पहले ढालपुर में एक विशाल रैली निकाली।

क्यों हुए मजबूर
छात्रों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि स्कूली बच्चों के लिए स्कूल तक जाने के लिए बच्चों का इंतजाम करें ताकि स्कूली बच्चे निश्चित होकर स्कूल जा सके। इस दौरान लगवैली, खराहल घाटी भुंतर, मणिकर्ण, सेंस बंजार और आनी जैसे ग्रामीण क्षेत्रों से स्कूली छात्र-छात्राएं पैदल स्कूल तक पहुंचे। जबकि छात्र-छात्राओं के लिए निजी और सरकारी बसें नहीं रोकी गई, जिसको लेकर स्कूली छात्रों में रोष बना हुआ है।

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जिम्मेदार कौन
सरकारी स्कूलों के बच्चे सरकारी बसों में फ्री यात्रा कर सकते हैं। सरकारी बसें कहीं भी जा रही हों, वे वर्दी वाले बच्चों को देखकर उन्हें बिठा लेती थीं और स्कूल तक या फिर स्कूल से उनके घर के पास उतार देती थीं। मगर ओवरलोडिंग को लेकर बरती जा रही सख्ती के कारण बसों में बच्चों को जगह नहीं मिल रही। निजी बसों में किराया देकर वे जा सकते हैं मगर उनकी प्राथमिकता है कि लॉन्ग रूट की सवारी को ही सीट दें। नतीजा यह है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे पैदल हो गए हैं।

अब प्रशासन द्वारा बरती जा रही सख्ती से पता चलता है कि पहले इस ओर वह आंख मूंदकर बैठा हुआ था। इतने लोगों का बस विहीन हो जाने का मतलब है कि ये लोग ओवरलोडेड बसों में यात्रा करने के लिए मजबूर थे। बेहतर होता कि इस ओर सरकार पहले ही ध्यान देती और अतिरिक्त बसों की व्यवस्था करती। ओवरलोडिंग कोई नई समस्या नहीं है और पिछली सरकारें भी इस विषय पर आंख मूंदकर बैठी रही थीं।

अब कुल्लू हादसे के बाद हरकत में आए प्रसासन का सख्ती बरतना सही है लेकिन इसके साथ वैकल्पिक व्यवस्था किया जाना जरूरी है ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो। यह बताना जरूरी है कि अंदरूनी इलाकों में बच्चियों को स्कूल तक लाने में कई सालों का समय लगा है। अगर उन्हें परिवहन का उचित इंतजाम न होने के कारण घर बैठना पड़े तो यह पूरे देश के लिए शर्म की बात होगी।

(एमबीएम न्यूज नेटवर्क के इनपुट्स सहित)

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