मंडी: देवता के नाम पर बुजुर्ग महिला को ‘डायन’ बताकर पीटा

मंडी।। मंडी के सरकाघाट में शर्मनाक घटना सामने आई है। कुछ लोगों ने एक बुजुर्ग महिला को डायन बताकर पीटा, मुंह काला किया, जूतों की माला पहनाई और घर को जलाने की कोशिश की। ये कहते हुए कि इस महिला ने गांव के लोगों पर कोई ‘देवता’ लगा दिया है जिससे नुकसान हो रहा है।

सरकाघाट: 22 साल की ‘पुजारिन’ को और देवताओं की पूजा नहीं थी बर्दाश्त

पत्रकार शशिभूषण पुरोहित ने दर्दनाक घटनाक्रम का वीडियो शेयर किया है और गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि सरकाघाट के समाहल गांव की महिला को जलील किया गया। महिला को लेकर कहा गया कि इस महिला ने कुछ लोगों पर देवता लगाया है यानी जादू-टोना किया है जिससे गांव में अनिष्ट हो रहा है।

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शशिभूषण बताते हैं कि महिला के घर को जलाने की कोशिश की गई, घर का सामान फेंक दिया। महिला का मुंह काला करके जूते की माला पहनाई गई और सरेआम घसीटा गया। दुख की बात है कि बच्चे भी इस घटनाक्रम में शामिल थे। शशिभूषण ने लिखा है कि इनके परिजन जब शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचे तो दूसरे पक्ष ने शिकायत पत्र छोड़ दिया।

सरकाघाट से संबंध रखने वाले कांग्रेस नेता यदोपति ठाकुर ने बताया है कि डीएसपी सरकाघाट चंद्रपाल शर्मा ने जानकारी दी है कि यह मामला कुछ दिन पहले का है। डीएसपी के मुताबिक महिला के साथ दुर्व्यवहार करने वाले लोगों को सरकाघाट थाने में नामजद किया गया है और साथ ही एक टीम को हमीरपुर भेजा गया है, जहां यह महिला इन दिनों अपनी बेटी के यहां रह रही हैं।

पत्रकार शशिभूषण लिखते हैं, “मैं इन बुजुर्ग महिला को व्यक्तिगत तौर पर जानता हूँ। इनके स्वर्गीय पति फौज से सेवानिवृत्त हुए थे। भूतपूर्व सैनिक की यह पत्नी महज 25 वर्ष की उम्र में ही विधवा हो गईं थीं, जिसके बाद उन्होंने बेटियों को पढ़ा लिखाकर काबिल बनाया। बेटियों की शादी हो गई है, बेटा नहीं है तो घर में अकेली रहती हैं। वह धार्मिक प्रवृत्ति की हैं और इन्होंने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा। अगर प्रशासन और कानून कहीं है तो इन लोगों पर तुरंत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

बता दें कि ये मामला बहुत गंभीर है। यह न सिर्फ मारपीट और महिला से दुर्व्यवहार की सामान्य घटना बल्कि यह केस प्रिवेंशन ऑफ़ विच (डायन) प्रैक्टिसेज एक्ट 1999 के तहत आता है और किसी भी महिला पर जादू-टोने का आरोप लगाना और उसके साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार करने का दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा होती है।

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देवता के नाम पर पाखंड
हैरानी की बात ये है कि इस दौरान एक देवता की पालकी भी दिख रही है। बता दें कि हिमाचल में कई जगहों पर प्राचीन देवताओं के नाम पर नए-नए मंदिर खुल गए हैं जिनके चेले खुद पर चमत्कारी रूप से देवता आने का दावा करते हैं। इन्होंने देवताओं की पालकियां बनाई हैं और समाज में अंधविश्वास का प्रचार कर रहे हैं।

ये लोग मानसिक रोगी हैं, ठीक शिमला के बलग वाले बच्चों की तरह जो खुद को देवता का अवतार बता रहे थे। मगर ये लोग गांव के लोगों की समस्याओं के लिए भूत-प्रेत को जिम्मेदार बताते हैं और ये भी कहते हैं कि किसी रिश्तेदार ने जादू किया है। इस कारण परिवार टूट रहे हैं, गांवों का माहौल खराब हो रहा है जबकि सरकारें कुछ कर नहीं रहीं। उल्टा इन फर्जी देवताओं को नजराना देकर मेलों में बुलाया जाता है सरकारी खर्च पर।

इस वीडियो में जितने भी लोग दिख रहे हैं, उनकी पहचान करके पुलिस को संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करनी चाहिए।

नीचे दिए लिंक पर पढ़ें, आजकल जगह-जगह पैदा हुए देवता और उनके चेलों के दिमाग में क्या लोचा होता है-

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