गुड़िया केस में सही राह पर सीबीआई, कोर्ट ने थपथपाई पीठ

शिमला।। कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस की जांच कर रही सीबीआई ने बुधवार को हाई कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट पर हाई कोर्ट ने संतोष जताया है। गौरतलब है कि अब तक हर बार फाइल की गई स्टेटस रिपोर्ट पर कोर्ट नाराज ही रहा था। मगर इस बार फाइल की गई 70 पन्नों की रिपोर्ट के हाई कोर्ट संतुष्ट नजर आया।

 

तीन भागों में बांटी गई इस रिपोर्ट को लेकर कोर्ट ने कहा कि जनता की भावनाओं को देखते हुए इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। मगर सीबीआई ने गुजारिश की कि फिलहाल इसे सार्वजनिक न किया जाए। सीबीआई ने कहा कि वह मामले को सुलझाने के लिए सही ट्रैक पर है।

 

इसके बाद अदालत ने सीबीआई को 20 दिसंबर तक अंतिम स्टेटस रिपोर्ट फाइल करने की मोहलत दी है। मामले में सीबीआई अब तक 500 लोगों से पूछताछ कर चुकी है। करीब 200 लोगों के सैंपल भी लिए गए हैं। सीबीआई की टीम गुड़िया के पुराने स्कूल में भी गई थी।

देखें, सभी सीटों पर बीजेपी-कांग्रेस से कौन हैं आमने-सामने

इन हिमाचल डेस्क।। विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार तय कर दिए हैं। बीजेपी ने जहां सभी 68 सीटों पर उम्मीदवारों का नाम एकसाथ घोषित कर दिया था, कांग्रेस को बहुत माथापच्ची करनी पड़ी।

 

कांग्रेस ने पहली लिस्ट में 59 उमीदवारों के नाम जारी किए। उसके चार दिन बाद दूसरी लिस्ट आई जिसमें 8 नाम थे। आखिर में शिमला रूरल और मंडी सीटों का भी ऐलान हो गया।

 

इस तरह से अब तक सभी सीटों पर कांग्रेस और बीजेपी के उम्मीदवारों की लिस्ट आ गई है। देखें, कौन कहां से किसके सामने है:

 

A. C. NO. Assembly Constituency Name BJP Congress
1 Churah हंस राज सुरेंदर भारद्वाज
2 Bharmour जिया लाल कपूर ठाकुर सिंह भरमौरी
3 Chamba पवन नैयर नीरज नैयर
4 Dalhousie डी.एस. ठाकुर आशा कुमारी
5 Bhattiyat बिक्रम सिंह जरयाल कुलदीप सिंह पठानिया
6 Nurpur राकेश पठानिया अजय महाजन
7 Indora रीता धीमान कमल किशोर
8 Fatehpur कृपाल परमार सुजान सिंह पठानिया
9 Jawali अर्जन सिंह ठाकुर चंद्र कुमार
10 Dehra रविंद्र सिंह विपल्व ठाकुर
11 Jaswan-Pragpur बिक्रम सिंह सुरेंद्र मनकोटिया
12 Jawalamukhi रमेश धवाला संजय रतन
13 Jaisinghpur रविंद्र धीमान यादविंद्र गोमा
14 Sullah विपिन सिंह परमार जगजीवन पाल
15 Nagrota अरुण कुमार कूका जी.एस. बाली
16 Kangra संजय चौधरी पवन काजल
17 Shahpur सरवीन चौधरी केवल सिंह पठानिया
18 Dharamshala किशन कपूर सुधीर शर्मा
19 Palampur इंदु गोस्वामी आशीष बुटेल
20 Baijnath मुल्ख राज प्रेमी किशोरी लाल
21 Lahaul and Spiti राम लाल मार्केंडेय रवि ठाकुर
22 Manali गोविंद सिंह ठाकुर हरि चन्द शर्मा
23 Kullu महेश्वर सिंह सुंदर सिंह ठाकुर
24 Banjar सुरेंद्र शौरी आदित्य विक्रम सिंह
25 Anni किशोरी लाल बंसी लाल
26 Karsog हीरा लाल मनसा राम
27 Sundernagar राकेश जम्वाल सोहन लाल ठाकुर
28 Nachan विनोद कुमार लाल सिंह कौशल
29 Seraj जय राम ठाकुर चेतराम ठाकुर
30 Darang जवाहर ठाकुर कौल सिंह ठाकुर
31 Joginder Nagar गुलाब सिंह ठाकुर जीवन लाल ठाकुर
32 Dharampur महेंद्र सिंह चंद्रशेखर
33 Mandi अनिल शर्मा चंपा ठाकुर
34 Balh इंद्र सिंह प्रकाश चौधरी
35 Sarkaghat कर्नल इंद्र  सिंह पवन ठाकुर
36 Bhoranj कमलेश कुमारी सुरेश कुमार
37 Sujanpur प्रेम कुमार धूमल राजिंदर राणा
38 Hamirpur नरिंदर ठाकुर कुलदीप पठानिया
39 Barsar बलदेव शर्माl इंद्र दत लखनपाल
40 Nadaun विजय अग्निहोत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू
41 Chintpurni बलबीर सिंह चौधरी कुलदीप कुमार
42 Gagret राजेश ठाकुर राकेश कालिया
43 Haroli राम कुमार शर्मा मुकेश अग्निहोत्री
44 Una सतपाल सिंह सत्ती सतपाल सिंह रायजादा
45 Kutlehar विरेंद्र कंवर विवेक शर्मा
46 Jhanduta जे.आर. कटवाल डॉ. बीरू राम किशोर
47 Ghumarwin राजिंदर गर्ग राजेश धर्माणी
48 Bilaspur सुभाष ठाकुर बंबर ठाकुर
49 Sri Naina Deviji रणधीर शर्मा राम लाल ठाकुर
50 Arki रत्न सिंह पाल वीरभद्र सिंह
51 Nalagarh कृष्ण लाल ठाकुर लखविंदर राणा
52 Doon सरदार परमीजीत सिंह (पम्मी) राम कुमार
53 Solan राजेश कश्यप कर्नल धनी राम शांडिल
54 Kasauli राजीव सैजल विनोद सुल्तानपुरी
55 Pachhad सुरेश कुमार गंगू राम मुसाफिर
56 Nahan राजीव बिंदल अजय सोलंकी
57 Sri Renukaji बलबीर चौहान विनय कुमार
58 Paonta Sahib सुख राम चौधरी किरनेश जंग
59 Shillai बदलेव सिंह तोमर हर्षवर्धन चौहान
60 Chopal बलबीर सिंह वर्मा सुभाष मंगलेट
61 Theog राकेश वर्मा दीपक राठौर
62 Kasumpti विजय ज्योति सेन अनिरुद्ध सिंह
63 Shimla सुरेश भारद्वाज हरभजन सिंह भज्जी
64 Shimla Rural प्रमोद शर्मा विक्रमादित्य सिंह
65 Jubbal-Kotkhai नरेंद्र बरागटा रोहित ठाकुर
66 Rampur प्रेम सिंह नंद लाल
67 Rohru शशि बाला मोहन लाल बरागटा
68 Kinnaur तेजवंत नेगी जगत सिंह नेगी

 

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कांग्रेस ने राठौर, वीरभद्र ने खाची को बताया ठियोग से कैंडिडेट

शिमला।। (अपडेट: खबर छपने के बाद से सीएम के पेज पर यह पोस्ट नज़र नहीं आ रही। शायद डिलीट कर दी गई है) गुड़िया प्रकरण के दौरान कथित संदिग्धों की तस्वीरें अपलोड करने को लेकर चर्चा में रहे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के फेसबुक पेज ने संभवतः फिर एक बड़ी ग़लती की है। कांग्रेस की तरफ से जारी लिस्ट में जहां ठियोग से कांग्रेस ने दीपक राठौर को टिकट दिया है, वहीं सीएम के पेज ने वहां से विजयपाल खाची को उम्मीदवार बताते हुए बधाई दे दी है।

 

देखें, मुख्यमंत्री मंत्री के पेज पर क्या पोस्ट हुआ है-

मुख्यमंत्री के पेज पर डाली गई पोस्टI

वहीं कांग्रेस ने जो लिस्ट जारी की है, उसमें दीपक राठौर का नाम है।

प्रेस रिलीज

अब दो बातें हो सकती हैं। या तो सीएम साहब के फेसबुक चलाने वालों के पास गलत जानकारी है या फिर कांग्रेस ने गलत नामों वाली लिस्ट जारी कर दी है। या एक बार फिर ठियोग से टिकट बदलने की तैयारी है?

कांग्रेस की दूसरी लिस्ट जारी, ठियोग का टिकट बदला

शिमला।। कांग्रेस ने पहली लिस्ट में 59 उमीदवारों के नाम जारी किए थे। बाकी की 9 सीटों को लेकर गतिरोध बना हुआ था मगर अब दूसरी लिस्ट भी जारी कर दी गई है। इसमें खास बात यह है कि ठियोग से अब विद्या स्टोक्स चुनाव नहीं लड़ेंगी।

पहली लिस्ट के बाद जो 9 सीटें बची थीं, उनमें से 2 पर पेंच फंसा हुआ था। मगर अब साफ हो चुका है कि मंडी से चम्पा ठाकुर कांग्रेस उम्मीदवार होंगी जो द्रंग से लड़ रहे ठाकुर कौल सिंह की बेटी हैं। वहीं शिमला ग्रामीण से वीरभद्र के बेटे विक्रमादित्य कांग्रेस के टिकट पर नामांकन दर्ज करेंगे। हालांकि दूसरी लिस्ट में इन दोनों सीटों का ज़िक्र नहीं है। खास बात यह है कि विद्या स्टोक्स की तबीयत खराब होने के कारण ठियोग का टिकट भी बदल दिया गया है।

 

दूसरी लिस्ट इस तरह से है-

शाहपुर- केवल सिंह पठानिया

पालमपुर- आशीष बुटेल

मनाली- हरि चन्द शर्मा

कुल्लू- सुरेंदर सिंह ठाकुर

कुटलेहड़- विवेक शर्मा

नालागढ़- लखविंदर राणा

ठियोग- दीपक राठौर

 

प्रेस रिलीज

पूरी लिस्ट देखने या सभी सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस से कौन आमने-सामने है, जानने के लिए यहां क्लिक करें।

अपने कहे मुताबिक शिमला रूरल से दावेदारी क्यों नहीं छोड़ी विक्रमादित्य ने?

आई.एस. ठाकुर।। खबर पढ़ी कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जी ने कहा है कि सुखराम की ‘याद्दाश्त गुम हो गई है’ और उन्हें पता नहीं चल रहा कि वे क्या बोल रहे हैं (पढ़ें)। यह पढ़कर हैरानी सी हुई क्योंकि पिछले दिनों कई मंचों पर मुख्यमंत्री वीरभद्र बोलते-बोलते अटके हैं और भूल चुके हैं कि आगे क्या बोलना है। कई बार तो वह यही भूल गए कि धूमल से पहले बीजेपी का मुख्यमंत्री कौन था और कई बार यही भूल गए कि वे कितनी बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इसके वीडियो भी उपलब्ध हैं, जिनमें वे पीछे मौजूद लोगों से मदद लेते दिखे हैं।

 

रही बात बोलने का पता न चलने की, मुख्यमंत्री खुद ऐसे बयान दे चुके हैं जो उन्हें नहीं देने चाहिए थे। फिर वह गुड़िया केस में कोटखाई के लोगों पर की गई टिप्पणी हो, गद्दियों पर कथित टिप्पणी हो, होशियार सिंह मामले में टिप्पणी हो…. ऐसे कई मामलों में वह अंट-शंट बोल चुके हैं और मीडिया में इसके भी सबूत हैं। मगर कमजोर याद्दाश्त की बात आई तो बुजुर्ग मुख्यमंत्री पर ज्यादा कटाक्ष नहीं करना चाहिए। 83 साल की उम्र में और होगा भी क्या। चिंता तो उनके युवा बेटे विक्रमादित्य को लेकर है, जो कुछ ही दिन पुरानी बात भूल गए।

 

यह तो किसी से छिपा नहीं है कि भारत की राजनीति में परिवारवाद का आदर्श उदाहरण देखना हो तो आजकल शिमला का रुख करना चाहिए, जहां पिता (वीरभद्र सिंह) ने अपनी सीट अपने बेटे (विक्रमादित्य) को टिकट देने के लिए छोड़ दी। मगर अफसोस, टिकट है कि फाइनल होने में कई दिन का वक्त लग गया। अब खबर आ रही है कि हाईकमान से हरी झंडी मिल गई है। होना ही था, आखिरकार मुख्यमंत्री के बेटे जो ठहरे। मगर मैं विक्रमादित्य को याद दिलाना चाहता हूं उनका वह बयान, जिसमें उन्होंने कहा था- एक परिवार से एक ही व्यक्ति को टिकट मिलना चाहिए(पढ़ें)।

 

जब मीडिया में ये खबर छाई कि विक्रमादित्य एक परिवार से एक टिकट की हिमायत कर रहे हैं, तब कांग्रेस के ही मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने व्यंग्य किया था- क्या विक्रमादित्य ने अपने पापा से पूछकर यह बयान दिया है(पढ़ें)। इसके बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र ने कहा था कि कांग्रेस में एक परिवार एक टिकट जैसी कोई पॉलिसी नहीं है। मगर दोबारा विक्रमादित्य, जिन्हें कुछ लोग ‘टीका’ कहते हैं, तो ‘टीका’ ने टिप्पणी की कि मैं अभी भी अपनी बात पर कायम हूं।

 

उस वक्त लगा होगा कि कोई तो आया जो राजनीति में बदलाव की बात करता है। मगर ‘टीका’ की टिप्पणी की पोल तब खुल गई, जब वीरभद्र अर्की से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। राजनीति में जुबान का बड़ा महत्व होता है। उम्मीद थी कि विक्रमादित्य अपनी जुबान का मान रखेंगे और कहेंगे, मैं अपनी बात पर कायम हूूं और चूंकि मेरे पापा को टिकट मिल गया, मैं शिमला रूरल से अपना दावा छोड़ता हूं।

 

मगर ऐसा हुआ क्या? वैसे चुनाव से पहले युवाओं को ज्यादा से ज्यादा टिकट देने का ऐलान भी इन्हीं जनाब ने किया था। उस वक्त ऐसा लग रहा था जैसे टिकट आवंटन खुद ही करेंगे। मगर कहीं पर 90 साल के बुजुर्ग चुनाव में उतर रहे हैं, कहीं 83 तो कहीं पर 80 साल के। अब कांग्रेस के लिए युवाओं की परिभाषा 75 साल पार हो तो अलग बात है। क्योंकि अधिकरत सीटों पर बुजुर्ग नेताओं को टिकट दिए गए हैं।

 

शायद विक्रमादित्य अपनी दोनों बातें भूल गए हैं। वन फैमिली, वन टिकट भी गायब हो गया और युवाओं को टिकट भी नहीं मिल रहे। प्लीज़, यह घिटा-पिटा डायलॉग न मारना कि पार्टी का फैसला है। हम जैसे लोगों तो विक्रमादित्य ने बहुत निराश किया है, जिन्हें लगता था कि वह शायद बाकी नेताओं से अलग हैं। ऐसे में लगता है कि मुख्यमंत्री जी को सुखराम के बजाय विक्रमादित्य की याद्दाश्त की और ‘क्या बोलना है क्या नहीं’ की चिंता करनी चाहिए। क्योंकि अभी वह युवा हैं और उनके सामने लंबा भविष्य पड़ा है।

(लेखक मूलत: हिमाचल प्रदेश के हैं और पिछले कुछ वर्षों से आयरलैंड में रह रहे हैं। उनसे kalamkasipahi @ gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

DISCLAIMER: ये लेखक के निजी विचार हैं।

तो क्या बीजेपी तय कर चुकी है अपना सीएम, बस घोषणा नहीं की?

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में बीजेपी अभी भले ही बिना सीएम कैंडिडेट घोषित किए चुनावी रण में उतरी है, मगर पार्टी हाईकमान यह तय कर चुका है कि सरकार बन जाने की स्थिति में सीएम कौन होगा। बीजेपी बस एक रणनीति के तहत अभी इसका ऐलान नहीं कर रही। ये संकेत किसी और ने नहीं, बल्कि बीजेपी के ही एक बड़े नेता ने दिए हैं।

 

ये कयास तो बहुत पहले से लगाए जा रहे थे कि अन्य राज्यों की ही तरह हिमाचल प्रदेश में भी भारतीय जनता पार्टी बिना किसी चेहरे के चुनाव लड़ेगी। फर्क इतना है कि अन्य राज्यों में जहां उसने पीएम मोदी के नाम पर चुनाव लड़ा था, हिमाचल में उसका फोकस पीएम के नाम पर चनाव लड़ने का नहीं बल्कि लोकल लेवल के मुद्दों पर रहेगा।

मोदी को आगे क्यों नहीं किया जा रहा?
ऐसा इसलिए भी है क्योंकि हिमाचल प्रदेश में चुनाव अन्य राज्यों के चुनाव से अलग होते हैं। 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद से ही जब पूरे देश में भ्रष्टाचार को लेकर एक कांग्रेस विरोधी लहर पैदा हो गई थी, उस वक्त कई राज्यों में कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ रहा था। मगर 2012 में वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में हिमाचल में कांग्रेस को सरकार बनाने में कामयाबी मिली थी। वह भी तब, जब वीरभद्र को करप्शन के आरोपों केे चलते केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटना पड़ा था।

नया चेहरा देना चाहती है बीजेपी
ऐसे में बीजेपी जानती है कि यहां पर लोकल समीकरण हावी रहते हैं, इसलिए पीएम मोदी के नाम पर चुनाव लड़ना घाटे का सौदा साबित हो सकता है और खासकर नोटबंदी और जीएसटी को लेकर पनपी नाराजगी के बाद। बीजेपी यह संदेश भी देना चाहती थी कि हम नया नेतृत्व देंगे, मगर यह भी नहीं चाहती थी कि पुराना नेतृत्व नाराज होकर पार्टी को नुकसान पहुंचाए। इसलिए पार्टी ने बीच का रास्ता अपनाते हुए किसी को भी सीएम कैंडिडेट नहीं बनाया। यानी वह बिना कहे जताना चाहती है कि उसके मन में क्या है, मगर सब स्पष्ट भी नहीं करना चाहती।

यह है राजनीतिक पंडितों की राय
राजनीतिक पंडित मानते हैं कि अगर बीजेपी को पुराना ही नेतृत्व देना होता तो वह पहले ही घोषणा कर देती। मगर वह जानती है कि प्रदेश में इस बार जनता नया चेहरा देखना चाहती है, इसलिए ऐसा रिस्क नहीं उठाना चाहती, जिससे सीधा फायदा कांग्रेस को मिले। हालांकि एक अनुमान यह भी है कि अगर बिना सीएम कैंडिडेट घोषित किए बीजेपी का प्रचार अभियान पेस नहीं पकड़ता है तो वह हालात का आकलन करके चेहरे का ऐलान कर सकती है।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा का बयान
पार्टी ने तय कर लिया है कि चुनाव जीतने पर मुख्यमंत्री कौन होगा। और यह माना जा सकता है कि मुख्यमंत्री का पद इस बार नए चेहरे को ही मिलेगा। दरअसल एक खबर के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा कहा है कि बीजेपी में सीएम पद को लेकर कोई विवाद नहीं है। यह बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में तय हो गया है। कब क्या घोषणा करनी है, यह एक रणनीति का हिस्सा है।

ऐसे में संकेत स्पष्ट हैं कि बीजेपी नया चेहरा देने की तैयारी में हैं। मगर वह नया चेहरा कौन होगा, इसे लेकर कयासों का दौर नतीजे आने तक जारी रहेगा।

जब अर्की से कांग्रेस ने ‘सोनिया के कुक के बेटे’ को दिया था टिकट

सोलन।। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अब अर्की से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। जब मीडिया उनसे सवाल पूछ रहा है कि क्या आपने सेफ होने की वजह से ठियोग के बजाय अर्की चुना, तो इसके जवाब में वह बोलते हैं- अर्की से तो कांग्रेस दो बार से हारती आ रही है, फिर यह सीट सेफ कैसे हुई।

यह सच है कि दो बार से यह सीट कांग्रेस हार रही है। मगर पहले ऐसा नहीं था। हार का यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब कांग्रेस ने यहां के दिग्गज कांग्रेसी नेता धर्मपाल ठाकुर का टिकट काटकर उस शख्स को उम्मीदवार बना दिया, जिसका ज़मीन पर उस वक़्त कोई आधार नहीं था। मीडिया में सुर्खियां थीं- कांग्रेस ने सोनिया के कुक के बेटे को दिया टिकट। दरअसल जिन्हें कांग्रेस ने टिकट दिया था, उनके परिवार की दो पीढियां नेहरू-गांधी परिवार के लिए काम चुकी थीं।

सोनिया के कुक थे राम प्रकाश के पिता
बात है 2007 विधानसभा चुनाव की। कांग्रेस ने अर्की से प्रकाश चंद कराड़ को टिकट दिया, जिनकी उम्र उस वक़्त 37 साल थी। उनके पिता पदम राम पहले इंदिरा गांधी के कुक रहे, फिर राजीव के और फिर सोनिया गांधी के। वह विदेश मंत्रालय में काम करते थे मगर 70 के दशक में नेहरू-गांधी परिवार के यहां कुक नियुक्त हुए। 2002 में ही वह रिटायर हो गए थे मगर 10 जनपथ से उनके अच्छे रिश्ते रहे। उन्होंने डीएनए को बताया था कि उनके पिता भी नेहरू जी के यहां खाने-पीने की चीजें सप्लाई किया करते थे। कांग्रेस ने उन्हें यह यह टिकट तीन बार MLA और विधानसभा उपाध्यक्ष रहे धर्मपाल ठाकुर की जगह दिया था, जिन्होंने पंचायत स्तर से राजनीति की शुरुआत की थी।

निर्दलीय लड़े थे धर्मपाल ठाकुर
टिकट कटने से धर्मपाल ठाकुर को झटका लगा था। उन्होंने इसे अन्याय करार दिया था। अर्की ब्लॉक के कांग्रेस, एनएसयूआई, सेवा दल और महिला कांग्रेस आदि के कई पदाधिकारियों ने कराड़ को टिकट देने से नाराज़ होकर अपना इस्तीफा भेज दिया था। धर्मपाल ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया और कहा- कराड़ ज़मानत भी नहीं बचा पाएंगे।

कांग्रेस उम्मीदवार तीसरे नम्बर पर रहा
चुनाव के नतीजे आये तो बीजेपी के गोविंद राम जीत गए और निर्दलीय लड़े धर्मपाल ठाकुर दूसरे नम्बर पर रहे। कांग्रेस के उम्मीदवार प्रकाश चन्द कराड़ तीसरे नम्बर पर रहे और दस हज़ार वोट भी नहीं ले पाए। मगर कांग्रेस के वोट कटने का नतीजा ये रहा कि बीजेपी जीत गई। बीजेपी को 21168 वोट मिले, धर्मपाल को 14481 और कांग्रेस को सिर्फ 7569.

ऐतिहासिक शहर है अर्की

आखिर में पार्टी से निकाल दिए गए थे धर्मपाल
धर्मपाल ठाकुर ने 1978 में राजनीतिक जीवन शुरू किया था। सबसे पहले अर्की के युवा कांग्रेस प्रधान बने थे। 1990 से लेकर 2007 तक लगातार अर्की का बतौर विधायक प्रतिनिधित्व किया, मगर 2007 में उनका टिकट काट दिया गया। ताउम्र पार्टी के लिए काम करने वाले धर्मपाल ठाकुर को निर्दलीय लड़ने की वजह से कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर निकाल दिया था। कहते हैं यह सदमा उन्हें बहुत गहरा लगा था। चुनाव के अगले साल 2008 नवंबर में हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया।

इस तरह से इस सीट से धर्मपाल जैसे दिग्गज कांग्रेस नेता के जाने के बाद एक वैक्यूम सा बन गया, जिससे बीजेपी को सीधा फायदा हुआ। 2007 के बाद 2012 में भी बीजेपी की जीत हुई। मगर अब वीरभद्र फिर से धर्मपाल वाला करिश्मा दोहराना चाहते हैं और यहां से जीतकर विधानसभा पहुंचना चाहते हैं।

90 की उम्र में संन्यास के बाद वापसी कर सकती हैं विद्या स्टोक्स

शिमला।। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने बुधवार शाम को 68 में से 59 सीटों पर टिकटों का ऐलान कर दिया। जिन नौ सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा नहीं हुई, उनमें शिमला की ठियोग सीट भी शामिल है। पहले तो मुख्यमंत्री वीरभद्र ने खुद यहां से लड़ने का ऐलान किया था मगर अब वह यहां के बजाय अर्की से लड़ने जा रहे हैं। ठियोग से मौजूदा विधायक विद्या स्टोक्स हैं, जिन्होंने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। उनकी उम्र अभी 89 साल है और दिसंबर में वह 90 साल की हो जाएंगी। मगर अब जानकारी मिल रही है कि वह संन्यास से वापसी की घोषणा करते हुए फिर से ठियोग से चुनाव लड़ेंगी।

 

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जब अपनी सीट शिमला रूरल अपने बेटे विक्रमादित्य के लिए छोड़ी थी, तभी से वह अपने लिए सुरक्षित सीट ढूंढ रहे थे। पहले से ही कयास लगाए जा रहे थे कि वह अर्की का रुख कर सकते हैं। मगर बीच में जब कांग्रेस की सीनियर नेता विद्या स्टोक्स ने कहा कि वह इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगी, तब वीरभद्र ने कांग्रेस के परंपरागत वोटरों वाली इस सीट पर नजरें टिकाईं। उन्होंने न सिर्फ यहां से लड़ने का ऐलान किया, बल्कि विद्या स्टोक्स ने उन्हें यहां आकर न्योता भी दिया था। मगर जानकारों का कहना है कि बीजेपी की तरफ से भी मजबूत कैंडिडेट होने के साथ-साथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नाराजगी और सीपीएम उम्मीदवार के जनाधार वाले तथ्यों को ध्यान में रखते हुए वह भांप गए कि यहां से लड़कर जीतना टेढ़ी खीर है। ऐसे में उन्होंने अर्की से लड़ने का फैसला कर लिया।

ठियोग कांग्रेस में ये हैं हालात
मगर अब ठियोग से कौन लड़ेगा? कांग्रेस नहीं चाहती कि इस बार सीटों को यूं ही गंवाया जाए। ऐसे में किसी भी तरह की विपरीत स्थिति से बचने के लिए कांग्रेस पुराने और दिग्गज नेताओं को ही टिकट देना चाहती है। ऐसे में सूत्रों से जानकारी मिली है कि पार्टी यहां से विद्या स्टोक्स को ही उतारना चाहती है। इस वक्त यहां राजेेन्द्र वर्मा, कुलदीप राठौर और दीपक राठौर कांग्रेस के टिकट के दावेदार हैं। मगर स्टोक्स कैंप इन तीनों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। वे प्रकाश ठाकुर का नाम सुझा रहे हैं, मगर वह भी मजबूत स्थिति में नहीं हैं और उन्होंने टिकट के लिए आवेदन भी नहीं किया है। इस स्थिति में विद्या स्टोक्स फिर से यहां से चुनाव लड़ सकती हैं।

विद्या स्टोक्स

ठियोग का पॉलिटिकल ड्रामा
अगर विद्या स्टोक्स चुनावी समर में उतरती हैं तो इस बार हिमाचल की राजनीति का यह सबसे रोचक घटनाक्रम होगा। वह यूं कि सबसे पहले तो मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि वह ठियोग से लड़ सकते हैं। फिर कुछ समय बाद विद्या स्टोक्स ने कहा कि परिवार को समय देने के लिए वह इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगी। फिर वीरभद्र ठियोग गए और बोले कि मैं यहां से चुनाव लड़ूंगा। जब चुनाव लड़ने का ऐलान हो गया, उसके बाद जाकर स्टोक्स ने वीरभद्र को ठियोग से लड़ने का न्योता दिया। यानी ऐलान पहले, निमंत्रण बाद में। फिर मुख्यमंत्री ने ठियोग छोड़कर अर्की से लड़ने का ऐलान कर दिया और ठियोग से टिकट का ऐलान नहीं हुआ। अगर विद्या स्टोक्स यहां से चुनावी मैदान में उतरती हैं तो लगभग 90 साल की उम्र में संन्यास लेने के बाद उनका लौटना भी इस घटनाक्रम में एक रोचक कड़ी साबित होगा।

हिमाचल कांग्रेस ने जारी की उम्मीदवारों की पहली लिस्ट

नई दिल्ली।। बीजेपी के बाद अब कांग्रेस ने भी हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपनी लिस्ट जारी कर दी है। बीजेपी ने जहां सभी 68 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं, कांग्रेस ने अभी 59 उम्मीदवारों के नाम ही जारी किए हैं। यानी 9 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। इनमें शिमला रूरल भी है, जहां से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अपने बेटे विक्रमादित्य  सिंह को टिकट दिलाना चाहते हैं।

जिन सीटों पर अभी कैंडिडेट फाइनल नहीं हुए हैं, वे हैं- शाहपुर, पालमपुर, मनाली, कुल्लू, मंडी, कुटलेहड़, नालागढ़, ठियोग, शिमला ग्रामीण।

जानें, बाकी की 59 में किस सीट से कौन होगा कांग्रेस का प्रत्याशी:

1 Churah- Surinder Bhardwaj
2 Bharmour- Thakur singh Bharmouri
3 Chamba-  Neeraj Nayyar
4 Dalhousie-  Smt. Asha Kumari
5 Bhattiyat- Kuldip Singh Pathania
6 Nurpur- Ajay Mahajan
7 Indora- Kamal Kishore
8 Fatehpur- Sujan Singh Pathania
9 Jawali Chander Kumar
10 Dehra- Ms. Viplov Thakur

11 Jaswan­Pragpur- Surinder Mankotia
12 Jawalamukhi- Sanjay Rattan
13 Jaisinghpur- Yadvinder Goma
14 Sullah- Jagjivan Pal
15 Nagrota- G.S Bali
16 Kangra-  Pawan Kajal17
17 Dharamshala- Sudhir Sharma
18 Baijnath- Kishori Lal
19 Lahaul & Spiti-  Ravi Thakur
20 Banjar- Aditya Vikram Singh

21 Anni- Bansi Lal
22 Karsog- ­ SC Mansa Ram
23 Sundernagar- Sohan Lal Thakur
24 Nachan- Lal Singh Kaushal
25 Seraj-  Chet Ram Thakur
26 Darang- Kaul Singh Thakur
27 Jogindernagar- Jiwan Lal Thakur
28 Dharampur- Chander Shekhar
29 Balh- Prakash Chaudhary
30 Sarkaghat- Pawan Thakur

31 Bhoranj-  Suresh Kumar
32 Sujanpur- Rajinder Rana
33 Hamirpur- Kuldeep Pathania
34 Barsar- Inder Dutt Lakhanpal
35 Nadaun- Sukhvider Singh Sukhhu
36 Chintpurni- Kuldip Kumar
37 Gagret- Rakesh Kalia
38 Haroli- Mukesh Agnihotri
39 Una- Sat Pal Raizada
40 Jhanduta- Dr. Biru Ram Kishore

41 Ghumarwin- Rajesh Dharamani
42 Bilaspur- Bumbar Thakur
43 Sri Naina Deviji- Ram Lal Thakur
44 Arki- Virbhadra Singh
45 Doon- Ram Kumar
46 Solan- Col. Dhani Ram Shandil
47 Kasauli- Vinod Sultanpuri
48 Pachhad- Gangu Ram Musafir
49 Nahan- Ajay Solanki
50 Sri Renukaji- Vinay Kumar

51 Paonta Sahib- Kirnesh Jung
52 Shillai- Harshwardhan Chauhan
53 Chopal- Subhash Manglate
54 Kasumpti- Anirudh Singh
55 Shimla- Harbhajan Singh Bhajji
56 Jubbal ­ Kotkhai- Rohit Thakur
57 Rampur- Nand Lal
58 Rohru- Mohan Lal Brakta
59 Kinnaur- Jagat Singh Negi

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बीजेपी की लिस्ट जारी: जानें, कौन कहां से प्रत्याशी

नई दिल्ली।। सस्पेंस खत्म हो गया है और बीजेपी के उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी गई है। इस लिस्ट में सभी 68 सीटों का नाम है। खास बात ये है इस लिस्ट में कुछ नाम मीडिया में पहले आए नामों से अलग हैं। उदाहरण के लिए धर्मशाला से किशन कपूर को टिकट दिया गया है, जबकि पहले उन्होंने टिकट न मिलने की आशंका जताते हुए कहा था कि वह हर हाल में लड़ेंगे। उनके कार्यकर्ताओं ने शक्ति प्रदर्शन भी किया था।

कुछ पार्टी नेताओं ने पहले ही नॉमिनेशन फाइल करना और टिकट मिलने का जश्न मनाना शुरू कर दिया था तो कुछ नाखुशी ज़ाहिर कर रहे थे। ये हाल तब थे जब आधिकारिक रूप से टिकटों का ऐलान नहीं हुआ था। दरअसल जिनके नाम फाइनल हो गए थे, उन्हें निजी तौर पर पार्टी ने जानकारी दे दी थी।

जानें, बीजेपी ने कहाँ से किसे उम्मीदवार बनाया गया है-