पुलिस की थ्योरी- साबुन लगाकर सरिया काटकर भागे कैदी

शिमला।। शिमला में कंडा जेल से तीन कैदियों के भागने का मसला जेल की सुरक्षा पर कई सवाल खड़े करता है। पूरे प्रदेश के मीडिया में सवाल उठ रहे हैं कि क्या जेल में मौजूद संतरियं ने किसी ने भागते हुए नहीं देखा? आखिर कैदी कैसे ब्लेड से सरिया काटकर फरार हो गए? जिस बैरक में कथित तौर पर 28 कैदी थे, उन कैदियों को कुछ पता ही नहीं चला?

पुलिस की थ्योरी यकीन से परे
पुलिस का कहना है कि जिस वक्त ये विचाराधीन कैदी भागे, उस समय बाकी कैदी सो रहे थे। अमर उजाला अखबार के मुताबिक कुछ कैदियों को तो पेठा भी खिलाया गया था, मगर इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। क्या सरिया काटने पर जो आवाज आती है, वह किसी को सुनाई ही नहीं दी? पुलिस का कहना है कि सरिया काटने से पहले उसमें साबुन लगा दिया था। यह अजीब तर्क है। ऊपर से जेल में 13 गार्ड तैनात थे। जेल की दीवार 16 फुट ऊंची है, बावजूद उसके कंबल समेत कैदी निकल गए? पुलिस के मुताबिक कंबल को रस्सी के तौर पर इस्तेमाल किया गया।

सीसीटीवी तक नहीं जेल में
हैरानी की बात यह है कि इस जेल में सीसीटीवी कैमरे तक नहीं हैं। ऐसे में तमाम बातें बता रही हैं कि कहीं न कहीं पुलिस की लापरवाही बड़े स्तर पर हुई है। कुछ अख़बारों में तो मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।

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अप्रैल में खुली थी जेल की व्यवस्था की पोल
पुलिस का रवैया ऐसा रहता है कि आप कल्पना नहीं कर सकते। इसी जेल में संतरी रहे भानु पराशर ने अप्रैल में एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें दो कैदी फेसबुक इस्तेमाल करते नजर आ रहे थे(पूरी खबर पढ़ें)। इन कैदियों को अफसरों के कमरे में यह हरकत करते देखा गया था। जब वीडियो साफ दिखा रहा था कि कैदी फेसबुक ही इस्तेमाल कर रहे थे, जेल प्रशासन का कहना था कि उन्हें जेल प्रशासन की वेबसाइट को अपडेट करने के लिए काम दिया गया था।

प्रशासन के मुताबिक कैदियों के सुधार के लिए जेल में कई कार्यक्रम चलते हैं, और उसी के तहत अच्छे आचरण वाले पढ़े-लिखे कैदियों के लिए ऐसी व्यवस्था की जाती है। मगर जेल प्रशासन यह मानने के लिए तैयार नहीं था कि फेसबुक इस्तेमाल की जा रही थी। जबकि वीडियो में साफ दिख रहा था कि वे प्रोफाइल पिक्चर लगा रहे थे। उल्टा भानु पराशर नाम के संतरी को अनुशासनहीन बताकर सस्पेंड कर दिया गया था। यह कहा गया कि वह जहां भी जाता है, ऐसे ही सवाल खड़े करके बखेड़ा खड़ा करता है। शायद ईमानदार पुलिसकर्मियों का आवाज उठाना विभाग की नजर में अनुशासनहीनता है।

आज जब पुलिस विभाग ने आनन-फानन में कार्रवाई करके जेल से कैदियों के भागने पर कुछ पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया, मगर जब एक संतरी ने जेल के अधिकारियों के रवैये को और यहां के माहौल को एक्सपोज़ किया था, तब वे चुप थे। उसी वक्त कार्रवाई की गई होती तो आज ऐसे हालात न हो। और अब पुलिस की कैदियों के भागने को लेकर जो थ्योरी है, वह उसी तरह हज़म नहीं हो पा रही, जिस तरह से गुड़िया केस में जेल के अंदर नेपाली मूल के संदिग्ध सूरज की मौत को लेकर दी गई थ्योरी किसी के गले नहीं उतर रही थी।

पूरी दुनिया में फैली ‘बदबूदार जुराबों’ वाली हिमाचल की खबर

शिमला।। कुछ दिन पहले खबर आ रही थी कि हिमाचल पुलिस ने बिहार के एक युवक को हिरासत में ले लिया था, जिसने एचआरटीसी की बस में जुराबें उतार दी थी। जुराबों की बदबू से परेशान यात्रियों ने जब इस युवक को जूते पहनने या जुराबों को बाहर फेंकने को कहा था तो उसने इनकार कर दिया था।

बाद में बहस इतनी बढ़ी कि गाली-गलौच और धमकियों का सिलसिला शुरू हो गया। परेशान होकर ड्राइवर ने पुलिस स्टेशन के सामने बस रोक दी थी। पुलिस ने लोगों की शिकायत के आधार पर युवक को हिरासत में लेकर हुड़दंग मचाने का मामला दर्ज किया था।

Model Released (MR)

हालांकि बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले 27 साल के युवक प्रकाश कुमार का कहना है कि बिना वजह बाकी सवारियों ने उसे टारगेट किया। मगर इस पूरे मामले की खबर पहले हिमाचल प्रदेश के मीडिया में सुर्खियों में रही, फिर पूरे देश के मीडिया में इसे जगह मिली और अब यह भारत की सीमाओं से बाहर भी पहुंच गई है। कई इंटरनैशनल मीडिया संस्थानों ने अपनी वेबसाइट पर इस खबर को प्रकाशित किया है।

दरअसल यह मामला है ही अनोखा। शीर्षक दिया गया है- बदबूदार जुराबों के लिए पुलिस ने भारत में गिरफ्तार किया एक शख्स। हालांकि अंदर पूरा मामला विस्तार से लिखा गया है। पाकिस्तान, युनाइटेड किंगडम और अमरीका तक के अखबारों ने इसे जगह दी है। जीकेमेन, न्यूयॉर्क डेली, एआरवाई न्यूज़, ईवनिंग स्टैंडर्ड, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून (पाकिस्तान), बीबीसी और मेट्रो में यह प्रकाशित हुई है। इन खबरों को पढ़ने के लिए आप पिछली लाइन में दिए गए अख़बारों के नाम पर क्लिक कर सकते हैं। हालांकि सभी का कॉन्टेंट लगभग एक जैसा है।

जब 500 रुपये के 20 पुराने नोट लेकर बाज़ार पहुंचीं दादी अम्मा

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, धर्मशाला।। कांगड़ा जिले के जयसिंहपुर में एक बुजुर्ग महिला खरीददारी के लिए कपड़े की दुकान पर पहुंचीं। 78 साल की महिला ने कपड़े लिए और जब पैसे देने के लिए बटुआ निकाला तो अंदर से 500 के पुराने नोट निकले, जो नोटबंदी के तहत पिछले साल बंद हो चुके हैं। दुकानदार ने बताया कि अम्मा, ये तो बंद हो गए अब।

बूढ़ी दादी मां उदास हुईं। उन्होंने ये पैसे बचाकर रखे थे और उन्हें पता ही नहीं चला कि नोट बंद हो गए हैं। उन्होंने पाई-पाई जोड़कर यह रकम इकट्ठा की थी। उन्होंने कहा कि मुझे लगा कि ये 10-10 के नोट हैं, बाद में गौर में से देखा तो पता चला कि 500 के हैं।

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पिछले शुक्रवार की इस घटना का एक वीडियो भी है। इस वीडियो में देखें तो बुजुर्ग दादी अम्मा को उम्मीद है कि एक दिन इन नोटों की भी कुछ कीमत होगी। वह कहती हैं, जो पुराने सिक्के बंद हो गए थे, लोग उन्हें भी तो खरीदते हैं तो इसी तरह इनकी भी कीमत होगी।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

अपने मोबाइल रिकॉर्डिंग से फंसे SIT में शामिल पुलिसकर्मी?

शिमला।। सीबीआई ने गुड़िया मामले के संदिग्ध सूरज की जेल में हुई मौत के मामले में जो चार्जशीट दाखिल की है, उससे हिमाचल प्रदेश पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस चार्जशीट के मुताबिक सूरज की मौत राजू से मारपीट के कारण नहीं, बल्कि एसआईटी के टॉर्चर से हुई है। यह बात अलग है कि अभी तक एसआईटी के गिरफ्तार किए गए सदस्यों ने अपना गुनाह नहीं कबूला है और अब अदालत को तय करना है कि वे दोषी हैं या नहीं। मगर अब तक सीबीआई की जांच कुछ अहम बातों की तरफ इशारा करती है।

‘मोबाइल और कंप्यूटर से मिली रिकॉर्डिंग’
ख़बर है कि सीबीआई को जांच के दौरान एसआईटी के चीफ और आईजी जहूर जैदी के दफ्तर के कंप्यूटर से एक वीडियो रिकॉर्डिंग मिली, जिसका जिक्र चार्जशीट में भी है। इसमें एक संदिग्ध लोकजन उर्फ छोटू को घटनास्थल ले जाया जा रहा है जिसमें वह सही से चल नहीं पा रही। हिंदी अख़बार पंजाब केसरी ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इससे अंदाज़ा लगाया ज ासकता है कि उसके ऊफर गुनाह कबूलने के लिए कितना प्रेशर डाला गया होगा। उनके मोबाइल से भी एक क्लिप मिलने की बात कही गई है।

‘संतरी के बयान का डीजीपी से छिपाया गया’
सीबीआई को जांच मे पता चला कि जब सूरज की मौत हुई तो डीजीपी के आदेश के बाद एसआईटी चीफ जहूर जैदी कोटखाई पुलिस स्टेशन पहुंचे और उन्होंने फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट तैयार की। अखबार सूत्रों के हवाले से लिखता है कि संतरी दिनेश शर्मा के बयान लेने के दौरान उन्होंने अपने मोबाइल में भी रिकॉर्डिंग ली। मगर दिनेश के बयानों को डीजीपी तक नहीं पहुंचाया गया और ‘सोची समझी चाल के तहत’ राजू के खिलाफ मामला दर्ज होने दिया गया।

वॉइस रिकॉर्डिंग से भी मिली जांच में मदद
यही नहीं, एएसपी भजन नेगी ने एक मोबाइल रिकॉर्डिंग बनाई थी, जिसमें चारों संदिग्धों से पूछताछ की जा रही थी। चारों गुनाह न कबूलने की बात कह रहे थे। इसकी वॉइस रिकॉर्डिंग नेगी ने अपने फोन में बनाई थी। जब सीबीआई ने नेगी का फोन अपने कब्जे में लिया तब यह रिकॉर्डिंग मिली।

अब तक सीबीआई ने एसआईटी के सभी आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिसमें चीफ आईजी ज़हूर ज़ैदी, डीएसपी मनोज जोशी, एसएचओ राजेंद्र सिंह, एएसआई दीप चंद शर्मा, कांस्टेबल रंजीत सिंह, हेड कॉन्स्टेबल सूरत सिंह, मोहन लाल और रफीक अली शामिल हैं। नौवीं गिरफ्तारी शिमला के पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी की हुई थी।

अखबार के मुताबिक सूत्र कहते हैं कि एसआईटी से जुड़े कुछ अधिकारी संदिग्धों पर गुनाह कबूलने के लिए दबाव बना रहे थे। इसी कारण प्रताड़ना की वजह से सूरज की मौत हुई और एसआईटी ने नई कहानी गढ़ दी।

हरियाणा पुलिस ने डेरा सच्चा सौदा के पालमपुर डेरे पर दी दबिश

पालमपुर।। साध्वियों से रेप के मामले में जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के पालमपुर के चचियां वाले डेरे में हरियाणा पुलिस ने एक बार फिर दबिश दी है। पुलिस आदित्य इंसां की तलाश कर रही है जो इस मामले में फरार चल रहा है। पुलिस ने डेरा कर्मचारियों से पूछताछ की। खबर है पुलिस को यहां से खाली हाथ लौटना पड़ा है। गौरतलब है कि आदित्य पर दंगे भड़काने का आरोप लगा है।

 

पालमपुर में डेरा सच्चा सौदा का डेरा चाय के बागानों के बीच 175 कनाल में फैला है और इस जमीन की कीमत ही 9 करोड़ है। सबसे खास बात यह है कि इस संपत्ति को 2007 में कांगड़ा के तत्कालीन डीसी भरत खेड़ा ने अवैध घोषित कर दिया था। दरअसल इस जमीन को खरीदने में हिमाचल प्रदेश भू अधिग्रहण अधिनियम 1968 की धारा 118 के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया था।

 

दरअसल हिमाचल प्रदेश में बाहरी लोग जमीन नहीं खरीद सकते। मगर आरोप है कि रेवेन्यू विभाग के कर्मचारियों से सांठगांठ करके इस ज़मीन को खरीद लिया गया था। वैसे यह डेरा राम रहीम का पसंदीदा रहा है। चर्चा है कि सिरसा के बाद किसी और डेरे में राम रहीम ने वक्त बिताया है तो वह यही है। पिछले दिनों बाबा ने जो फिल्में बनाईं, उनकी शूटिंग ज्यादातर पालमपुर के आसपास हुई। उस दौरान भई काफी समय राम रहीम यहां ठहरे थे।

हिमाचल: डेरा सच्चा सौदा नगरी में पुल‍िस तैनात

फिर वापस आते हैं डेरे की जमीन को लेकर हो रहे विवाद पर। तो इस डेरे की जमीन के सौदे को जब 2007 में डीसी ने अवैध बताया, डेरे वालों ने डिविज़नल कमिश्नर के पास अपील की मगर उन्होंने भी डीसी के फैसले को बरकरार रखा गया था। इसके बाद रिव्यू के लिए रेवेन्यू सेक्रेटरी के पास डेरे वालों ने अपील की। मामला चल रहा है। चूंकि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बाबा की सारी संपत्तियां अटैच करने का आदेश दिया है, यह डेरा भी अटैच हो सकता है।

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नीचे देखें बाबा के आश्रम की तस्वीरें। चूंकि अभी वहां पुलिस का पहरा है, इसलिए 2011 की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। अब वहां शायद और डिवेलपमेंट हो गया हो।:
Heaven

Dera Sacha Sauda, Chachian

Kiwi Fruit's Garden at Dera Sacha Sauda,Chachian

Way to heaven

Green Green

Fish Shaped Lake View

Heaven

Great View of Ashram

बच्चियों से पर्स उठवाने वाली अध्यापिकाओं ने दी अजीब सफाई

बिलासपुर।। एक तो पहले ही सरकारी स्कूलों की ख़राब हालत का दोष अध्यापकों के सिर मढ़ दिया जाता है, ऊपर से कुछ अध्यापकों की हरकतों की वजह से पूरी शिक्षक बिरादरी बदनाम हो जाती है। ऐसी ही एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसमें दो महिलाएं पीछे चल रही थीं और आगे एक बच्ची दो लेडीज़ पर्स उठाकर चल रही थी।

सोशल मीडिया पर तस्वीर वायरल हुई कि ये महिलाएं टीचर हैं और उन्हें अपने बैग छात्रा से उठवाए हैं। छानबीन में पता चला कि दोनों महिलाएं बिलासपुर जिले के एक स्कूल में टीचर हैं। जब शिक्षा विभाग ने इन्हें नोटिस भेजा और पूछा कि बच्चों से पर्स क्यों उठवाया तो अजीब जवाब मिला।

इन अध्यापिकाओं का कहना है कि जैसे ही स्कूल बंद हुआ, बच्चियां अचानक उनका सामान उठाकर चल दीं। और उन्होंने ये देखा तो बच्चियों को रुकने के लिए खहा मगर चुनाव प्रचार के लिए बज रहे लाउडस्पीकर की वजह से आवाज बच्चियों तक नहीं पहुंच सकीं।

जिला उपनिदेशक बिलासपुर के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में भेजा गया यह जवाब किसी को हज़म नहीं हो रहा। इससे असंतुष्ट जिला उपनिदेशक ने दोनों अध्यापिकाओं को नोटिस जारी करने का फैसला लिया है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मनमोहन शर्मा का कहना है कि उपनिदेशक को मामले की गहनता से जांच करते हुए कड़ी कार्रवाई करने को कहा है।

तस्वीर में साफ दिखता है कि महिला टीचर्स आराम से चल रही हैं। और अगर बच्चियां अपने आप बैग उठाकर चलने लगीं, इसका मतलब है कि वे पहले से ही उठाती रही होंगी, इसीलिए आदतन बैग उठाकर चलने लगीं। यानी बच्चों से रेग्युलर बैग उठाए जाते हैं।

मंडी के सांसद ने कहा- हिमाचल में भी बैन हो पद्मावती

मंडी।। मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद रामस्वरूप शर्मा ने पद्मावती फिल्म को हिमाचल में बैन करने की मांग की है। उनका कहना है कि कुछ राज्यों ने इस विवादित फिल्म को बैन कर दिया है और हिमाचल में भी यह बैन होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर भारतीय इतिहास को नष्ट करने की साजिश चल रही है।

रामस्वरूप शर्मा ने कहा, “तथाकथित इतिहासकारों ने सिकंदर को महान, अकबर को ग्रेट बताकर हमारे वीर योद्धा महाराणा प्रताप, शिवाजी, आचार्य चाणक्य, चंद्रगुप्त मौर्य, गुरु गोबिंद सिंह को इतिहास के पन्नों से गायब करके हाशिए पर धकेलने की कोशिश की है।’

मंडी के सांसद का कहना है कि रानी पद्मावती का रानी लक्ष्मीबाई की तरह ही गौरवशाली इतिहास रहा है और उनके ऊपर की जाने वाली छींटाकशी बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय इतिहास के साथ छेड़छाड़ की कोशिश करने वाले डायरेक्टर को माफ नहीं किया जाएगा।

नतीजे प्रभावित कर सकती है चुनाव आयोग की यह व्यवस्था

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 9 नवंबर को हुआ था और नतीजे करीब 40 दिन बाद 18 दिसंबर को आएंगे। वोटिंग और रिजल्ट में इतना गैप देने के पीछे चुनाव आयोग का तर्क था कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि हिमाचल के नतीजे गुजरात विधानसभा चुनाव पर असर न डाल सकें। यानी हिमाचल के नतीजों से गुजरात के मतदाता प्रभावित होकर अपनी राय बनाकर वोट न करें।

एक तरफ तो चुनाव आयोग निष्पक्षता के लिए इतना चिंतित दिखाई देता है, मगर इसकी लापरवाही कहें या न जाने क्या, हिमाचल में चुनाव के नतीजे पूरी तरह से प्रभावित हो सकते हैं। लोकतंत्र में एक-एक वोट अहम होता है और कई बार तो जीत-हार का फैसला बहुत कम वोटों से होता है। इस अंतर में पोस्टल बैलट अहम भूमिका निभाते हैं। हिमाचल प्रदेश में लगभग 50 हजार कर्मचारियों की इलेक्शन ड्यूटी लगी थी। इन्हें 18 दिसंबर से पहले अपना वोट डाक से भेजने की छूट है या फिर काउंटिंग से पहले तक वे अपना वोट कास्ट कर सकते हैं।

यानी एक महीने से ज्यादा वक्त तो वो वोट भेज सकते हैं। वैसे तो ज्यादातर कर्मचारी ड्यूटी के लिए रवाना होने से पहले या आते ही अपना वोट डाल देते हैं, मगर सभी ऐसा नहीं करते। और इन वोटों को प्रभावित करने की भरपूर कोशिशें हो रही हैं। प्रभाव जमाने के लिए राजनीतिक दल कभी मंथन बैठकें कर रहे हैं तो कभी मंत्रीपदों पर चर्चा जैसे शिगूफे छोड़कर यह माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है कि हम सत्ता में आ रहे हैं। कर्मचारियों को लुभाने वाले बयान भी दिए जा रहे हैं।

ऐसे में क्या यह मतदाताओं, जिन्हें पोस्टल बैलट से वोट भेजना है, को प्रभावित करने की कोशिश नहीं है? क्यों इतना लंबा समय दिया गया? और राजनेता और पार्टियां क्यों आचार संहिता का पालन नहीं कर रहीं? जिन सीटों पर चंद वोटों से फैसला होगा, वहां क्या ये पोस्टल बैलट नतीजों को प्रभावित नहीं करेंगे? सवाल अहम है, मगर इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा। जरूरी है कि तय सीमा के अंदर ही कर्मचारियों को पोस्टल बैलट भेजने को कहा जाए और तब तक राजनीतिक दलों पर नकेल कसी जाए।

54 दिनों से लापता वनरक्षक को नहीं ढूंढ पा रही मंडी पुलिस

मंडी।। मंडी ज़िले से एक वनरक्षक पिछले करीब दो महीनों से लापता है, मगर उसका कोई पता नहीं चल पा रहा। घर वाले परेशान हैं और नाउम्मीद से हुए जा रहे हैं। सोचिए, उस परिवार पर क्या बीत रही होगी जिसका अपना हंसी-खुशी एक कार्यक्रम में जाता है और फिर लापता हो जाता है। परिजन थानों के चक्कर काटकर थक जाते हैं, मगर पता ही नहीं चलता कि वह चला कहां गया। 54 दिन से उन्हें यह तक नहीं मालूम कि वह ज़िंदा भी है या नहीं। ये हालात तब हैं जब कुछ ही महीने पहले मंडी के ही करसोग से वनरक्षक होशियार सिंह भी लापता हुआ था और फिर कुछ दिनों बाद उसका शव पेड़ से उल्टा लटका मिला था। इससे पहले पुलिस दावा कर चुकी थी कि उसने जंगल का चप्पा-चप्पा छान मारा है।

धार्मिक यात्रा (जातर) में गए थे कमरूनाग
घटना मंडी के बल्ह की है, जहां रहने वाले वनरक्षक मोहन लाल, जिनकी उम्र 57 साल है मंडी के बड़ा देव कमरूनाग की जातर में शामिल होने गए थे। वापस में वह कुछ दोस्तों के साथ आ रहे थे। कथित तौर पर कुछ दूरी बाद दोस्तों ने देखा कि वह उनके बीच नहीं हैं। इससे उन्होंने सोचा कि वे शॉर्ट कट से अपने घर चले गए होंगे। अगली सुबह उन्हें पता चला कि मोहन तो घर पहुंचे ही नहीं हैं।

जंगल में ढूंढने पर भी हाथ नहीं लगा कोई सुराग
इसके बाद पुलिस, एसडीआरएफ, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, देवता कमेटी और कई स्थानीय लोगों ने किसी हादसे या दुर्घटना या साजिश की आशंका से मोहन लाल को कमरूघाटी में ढूंढने की कोशिश की, मगर कामयाबी नहीं मिली। अक्तूबर के पहले हफ्ते तक तो मीडिया में भी खबरें आती रहीं कि जैसे कि मोहन लाल के मोबाइल की आखिरी लोकेशन घीडी टावर से मिली थी और बाद में फोन स्विच ऑफ है। यह भी पता लगाने की कोशिश की गई कि आखिरी बात उनकी बात किससे हुई। मगर आज तक उनका पता नहीं चल पाया और फिर इलेक्शन आ गए तो मीडिया में भी मोहन लाल का जिक्र होना बंद हो गया। वरना जिस जिले में कुछ दिन पहले ही मोहन लाल जैसा केस हुआ हो, वहां पर एक और वनरक्षक का गायब हो जाना कोई छोटी बात नहीं थी।

पुलिस की जांच से परिवार संतुष्ट नहीं
मोहन लाल का परिवार पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं है। बेटे घनश्याम का कहना है कि प्रशासन पिता को ढूंढने में नाकाम रहा है। उनका कहना है, “कमरूनाग से वापसी पर जो लोग मेरे पिता के साथ थे, अगर उनसे पुलिस सख्ती ये पूछताछ करेगी तो वे लोग कुछ बता सकते हैं। उनके साथ आए चार-पांच लोगों के व्यवहार से शक हो रहा है कि कहीं मेरे पिता के साथ कुछ अनहोनी तो नहीं हुई हो।’

घनश्याम अपने पिता के साथ चल रहे लोगों पर सवाल उठाते हैं कि जब सभी साथ-साथ चल रहे थे तो कैसे केवल एक ही आदमी रास्ता भटक सकता है। साथ ही इन लोगों ने सड़क पर पहुंचने पर भी सभी को क्यों नहीं बताया कि एक आदमी गायब है। घनश्याम ने शक जाहिर किया है कि कहीं उनके पिता की हत्या न कर दी गई हो।

अब भी खाली हाथ है पुलिस
समाचार फर्स्ट पोर्टल के मुताबिक उन्होंने इस मामले में पुलिस का रुख जानना चाहा, मगर आलम यह था कि सुंदरनगर कॉलोनी थाने में फोन किसी ने नहीं उठाया। इसके बाद मंडी के एसपी ऑफिस संपर्क किया गया, जहां से पता चला कि अभी तक मोहन लाल का कोई सुराग नहीं मिल पाया है और बाकी जानकारी पुलिस स्टेशऩ से मिलेगी। थाना प्रभारी का मोबाइल नंबर भी लिया गया मगर वह बंद चल रहा है।

क्या यह केस पहेली बनकर रह जाएगा?
चुनाव से पहले तो जनता से जुड़े हर मुद्दे को राजनीतिक दल लपक ले रहे थे और उसपर खूब रैलियां और विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। मगर अब लगभग दो महीनों से एक वनरक्षक गायब है, मगर राजनीतिक दल न तो रैली न निकाल रहे हैं और न ही सामाजिक संगठन आगे आ रहे हैं। मीडिया में भी यह खबर दब सी गई है। अगर किसी जंगली जानवर ने भी उन्हें दबोचा होता तो क्या ग्रुप में चल रहे लोगों को पता नहीं चलता? सवाल कई हैं मगर जवाब कोई नहीं। एक जीता जागता इंसान गायब हो जाता है और कुछ पता ही नहीं चलता है?

23 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजे गए डीडब्ल्यू नेगी

शिमला।। शिमला के कोटखाई के चर्चित रेप ऐंड मर्डर केस में हिरासत में एक संदिग्ध की मौत के सिलसिले में सस्पेंड शिमला के पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी को 3 दिन की न्यायिक हिरासत पर भेजा गया है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी शिमला रणजीत सिंह के कोर्ट ने उन्हें जूडिशल कस्टडी पर भेजा।

नेगी 23 नवंबर तक हिरासत में रहेंगे रहेंगे। गुरुवार को उन्हें इस मामले में गिरफ्तार आईजी समेत अन्य पुलिसवालों के साथ दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा। सीबीआई रिमांड पूरा होने के बाद डीडब्ल्यू नेगी को मंगलवार को दोपहर के बाद कोर्ट में पेश किया गया। वह गुरुवार को गिरफ्तार होने से लेकर अब तक सीबीआई के रिमांड पर चल रहे थे।

 

सीबीआई ने नेगी को लॉकअप में हुई नेपाली मूल के संदिग्ध सूरज सिंह की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया है। उनके ऊपर सूरज की हत्या के मामले में एक अन्य आरोपी राजू के खिलाफ फर्जी मामला दर्ज करवाने का आरोप है। वह तीन दिनों तक कंडा जेल में रहेंगे।