मंडी।। हिमाचल प्रदेश में एक पोस्ट वायरल हो गई है जिसमें एक महिला ने अपने ऊपर हुए अत्याचारों का दर्द बयां किया है। मंडी जिले के सुंदरनगर के तहत आने वाले एक गांव की महिला ने बताया है कि उसके ससुराल वाले किस तरह उसे प्रताड़ित कर रहे हैं। आंखों में आंसू, जख्मों के निशान, सूजा हुआ चेहरा, टांकों के निशान…. तस्वीरों में यही सब है।
महिला ने पोस्ट में लिखा है कि उसके पति, सास-ससुर ने उसकी हालत खराब कर दी है। अब मुझे घर से निकाल रहे हैं। मेरे मम्मी-पापा को भी इन लोगों ने दुखी कर रखा है। समझ नहीं आया क्या करें, क्या न।
लेकिन इससे भी गंभीर बात है पुलिस पर लगे कार्रवाई न करने के आरोप। हिमाचल पुलिस जो पहले से ही ढीले रवैये के लिए आलोचनाओं में घिरी है, प्रदेश में कई जगहों में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं कि वह कार्रवाई करना तो दूर, शिकायत दर्ज करने के बजाय समझौता करने पर उतारू रहती है। ऐसे में इस घटना को लेकर भी उसपर सवाल उठने लगे हैं।
क्या कहती है पुलिस?
पुलिस का कहना है कि 19 फरवरी को ही घरेलू हिंसा का मामला दर्ज हुआ है और कार्रवाई की जा रही है। जबकि महिला का दावा है कि पुलिस उसकी मदद नहीं कर रही है और ‘बिक जाती है।’ महिला ने यह पोस्ट 26 फरवरी की रात को डाली है। संभव है कि पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद ससुराल वालों ने उसे घर से निकालने की कोशिश की होगी, तब विवशता में उसने यह पोस्ट डाली।
15 हज़ार से ज्यादा लोग इस पोस्ट को शेयर कर चुके हैं और असंख्य टिप्पणियां आई हैं। हर कोई तस्वीरों में हालत देखकर द्रवित है और गुस्से में है।
राजेश वर्मा।। किसानों द्वारा आत्महत्या करना आत्महत्या नहीं, हत्या है और इनका उन लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए जो देश के बैंकों में घोटाले करके चंपत हो जाते हैं। ऐसे लोगों पर भी, जो जनता की गाढ़ी कमाई को लूटकर अपना घर भरते हैं और बाद में दिवालियापन का खेल खेलकर एक और घोटाला कर देते हैं।
यहां एक नीरव मोदी नहीं यहां हर गांव हर शहर में बहुत से नीरव मोदी हैं जो बैंकों से सांठगांठ कर लाखों का ऋण लेकर उस रकम को कहीं और एडजस्ट कर देते हैं और बाद में दिवालियेपन का खेल खेलकर बच जाते हैं। यह खेल कोई पिछले कुछेक वर्षों से नहीं बल्कि आजादी के बाद से लगातार खेला जा रहा है।
कर्ज के दर्द से एक किसान और गरीब ही आत्महत्या करता है। माल्या और नीरव जैसे हजारों लाखों लोग है हमारे आपके आसपास भी जो कर्ज लेकर जिंदगी की तमाम सुख-सुविधाएं भोगते हैं परंतु किसान व गरीब पहले भी मरा होता है कर्ज लेकर फिर मर जाता है। बैंकों में गरीब के कर्ज को लेकर तो बड़ी बड़ी फोटो टांग दी जाती है लेकिन जो मिलीभगत से कर्ज को अपना हक समझ कर लूट करते हैं उनकी कभी भी फोटो नहीं देखी जाती।
लूटने वाले व सबसे ज्यादा फायदा उठाने वाले चोरों से बैंक के कर्मचारी भी बड़ी तमीज व अदब से पेश आते हैं वहीं गरीब या मध्यवर्गीय जमात को घंटों लाईन में खड़े रहकर भी अपना पैसा नहीं मिल पाता। नीरव मोदी ने या माल्या ने अकेले खरबों रुपए डकार लिए लेकिन देश को लूटने में यह दो तो मात्र उदाहरण है, हर बैंक में ऐसे बहुत से लुटेरे है जो मिलीभगत से लाखों का कर्ज लेकर आज तक सजा से बाहर हैं।
एक किसान ही है जो चंद हजार रुपए का कर्ज लेकर न चुकाने पर इस दुनिया से ही रुख़सत हो जाता है। अब समय आ गया है किसानों द्वारा आत्महत्या करने का ऐसे लुटेरों पर हत्या का मुकद्दमा दर्ज कर फांसी की सजा दी जाए जो लाखों करोड़ों का ऋण डकार कर रफ्फूचक्कर हो जाते हैं।
मेरे पास आंकड़े नहीं लेकिन दावा है इस बात का की बैंकों के NPA, डूबे कर्ज का जिम्मेदार किसान, गरीब या मध्यवर्ग नहीं इसके पीछे खुद बैंकों के भ्रष्ट कर्मचारी या वह व्यापारी या वह भ्रष्टाचारी राजनीतिज्ञ वर्ग है जो व्यवसाय के नाम पर कर्ज तो ले लेता है लेकिन उस कर्ज से वह कोई और ही खेल खेलता है।
(स्वतंत्र लेखक और शिक्षक राजेश वर्मा बलद्वाड़ा, मंडी के रहने वाले हैं और उनसे 7018329898 पर संपर्क किया जा सकता है।)
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सोलन।। एसपी गौरव सिंह के बद्दी से तबादले के बाद बहुत से लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। एक शख्स ने तो खुद पर तेल छिड़ककर आत्महत्या की कोशिश की। बबलू पंडित नाम के एक शख्स ने आईपीएस गौरव के तबादले से नाराज होकर ख़ुद को आग लगाने की कोशिश की।
तबादले के ख़िलाफ प्रदर्शन के दौरान बबलू पंडित ने नगर परिषद बद्दी के बाहर खुद पर तेल छिड़क लिया और आग लगाने की कोशिश की। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने उसपर कंबल डाल दिया। इस कदम के लिए बबूल को गिरफ्तार कर लिया गया है।
प्रदर्शनों का दौर जारी है और गुस्साए लोग सरकार के खिलाफ भी नारेबाजी करते नजर आए। लोगों का कहना है कि गौरव सिंह नशा और खनन माफिया समेत अपराधियों पर लगाम कस रहे हैं, ऐसे में उनका तबादला नहीं किया जाना चाहिए। बता दें कि अभी तक जो चर्चा है, उसके मुताबिक मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में अव्यवस्था के कारण उनका ट्रांसफर किया गया है। मगर तरह-तरह की अटकलों का दौर जारी है।
सोलन।।एसपी बद्दी और सोलन के डीसी के तबादले की जो वजहें चर्चा में हैं, उनमें मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में हुई बदइंतजामी और सुरक्षा व्यवस्था में चूक शामिल है। दरसअल हेलिपैड पर भीड़ में हल्की भगदड़ तो हुई ही थी, बड़ी समस्या थी एक बाबा का मुख्यमंत्री की सभा में आकर मंच पर चढ़ जाना और मुख्यमंत्री तक पहुंचने की कोशिश करना। यही नहीं, मंच से उतारे जाने पर बाबा ने शंखनाद करना शुरू कर दिया था।
क्या हुआ था नालागढ़ में
नालागढ़ में कार्यक्रम में राज्यपाल और मुख्यमंत्री मौजूद थे। तभी एक भगवाधारी बाबा मंच पर चढ़ने लगे। सुरक्षा कर्मियों ने बाबा को रोकने की कोशिश तो वह भढ़क गए और शंख बजाने लगे। वह सीएम से मिलने की जिद कर रहे थे। सुरक्षाकर्मियों ने समझाने की कोशिश की मगर वे मानने को तैयार नहीं थे।
वह मंच के सामने जमीन पर ही बैठ गए। डीसी सोलन और एसपी बद्दी ने भी उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन यह जनाब कुछ सुनने को तैयार नहीं थे। वह शंख बजाते रहे। पुलिस वाले बेबस नजर आए।
सीएम के काफिले के साथ
बात इतनी सी नहीं थी, मुख्यमंत्री जहां भी जा रहे थे, वहां पर यह बाबा नजर आ रहे थे। निहला खेड़ा में भी वह शंखनाद कर रहे थे। यानी वह दिन भर सीएम के काफिले के साथ चलते रहे। वह सीएम से मिलने की जिद कर रहे थे। ऐसे में इसे सुरक्षा व्यवस्था में चूक माना जा रहा है।
कौन हैं यह बाबा
बाबा का नाम है तोता राम। और यह पहला मौका नहीं है जब उन्होंने ऐसी हरकत की है। पिछले साल दिसंबर में वह घोड़े की सवारी करते हुए विधानसभा परिसर पहुंच गए थे। तपोवन में भी वह नजर आए थे। और इस बार मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में उन्होंने शंख बजा दिया। बताया जा रहा है कि वह चाहते हैं कि मुख्यमंत्री उन्हें गायों की सेवा और रक्षा से संबंधित कोई जिम्मेदारी दें।
शिमला।। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नालागढ़ दौरे के कुछ ही घंटों के बाद एसपी बद्दी और सोलन के डीसी का तबादला हो गया है।हिमाचल प्रदेश में बीजेपी सरकार बनने के बाद जब पहली बार पुलिस अधिकारियों के बड़े स्तर पर तबादले हुए थे, तब एक खबर सुर्खियों में छाई थी कि आईपीएस गौरव सिंह को बद्दी का एसपी बनकर लौटाया गया है। लगभग सभी अखबारों ने इस खबर को प्रमुखता दी थी, क्योंकि इससे पहले की कांग्रेस सरकार ने उस समय एएसपी रहे गौरव सिंह का बद्दी से तबादला कर दिया था। यह तबादला इसलिए सुर्खियों में रहा था क्योंकि इससे कुछ ही दिन पहले कांग्रेस के विधायक की पत्नी के टिप्पर का चालान किया गया था। माफिया की नाक में दम कर देने वाले अधिकारी गौरव सिंह के तबादले ने उस समय खूब चर्चा बटोरी थी।
जिस समय बीजेपी सत्ता में आई, उस समय गौरव सिंह लाहौल-स्पीति के एसपी थे और वहां भी उन्होंने अपना काम से नाम बटोरा था। बीजेपी ने जब उन्हें एसपी बद्दी बनाया तो इसे बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर इस तरह से दिखाया कि बीजेपी सरकार ईमानदार अधिकारियों को मौका देती है और उन्हें वापस बद्दी ले आया गया है, जहां से कांग्रेस ने उन्हें हटाया था। मगर लगभग एक महीने के बाद ही उन्हें एसपी बद्दी से हटाकर 5th IRB (महिला) बस्सी में कमांडेंट के तौर पर ट्रांसफर कर दिया गया है।
आगरा में जन्मे गौरव जब पिछली बार बद्दी में तैनात थे, उन्होंने सात महीनों में अवैध खनन के 177 मामले पकड़े थे और लगभग 26 लाख रुपये का जुर्माना वसूला था। इसी तरह से उन्होंने शराब के अवैध कारोबार के 75 और ड्रग्स के 13 मामले पकड़े थे। उन्होंने अन्य मामलों को सुलझाने में भी कामयाबी पाई थी।
क्या बताई जा रही है वजह? दरअसल बद्दी के एसपी गौरव सिंह के साथ-साथ सोलन के डीसी का भी तबादला कर दिया गया है और वजह बताई जा रही है कि संभवत: सीएम के कार्यक्रम के दौरान व्यवस्था सुचारू न होने के कारण यह कार्रवाई हुई है। मुख्यमंत्री गुरुवार को नालागढ़ में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेने आए थे। नए हेलीपैड पर हेलिकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान भीड़ में हलचल हो गई थी। बाद में एक जनसभा में बाबा घुस आया जो शंखनाद करने लगा था।
एक महीने में एसपी गौरव की कार्रवाइयां बद्दी में बतौर एएसपी गौरव सिंह ने नशा और खनन माफिया की नाक में दम कर दिया था। इस बार उनका कार्यकाल कुछ ही दिन का रहा, मगर इसमें भी वह अपने काम का असर दिखाने में कामयाब रहे। लोगों में चर्चा ये भी है कि कहीं उनकी सख्ती के कारण ही उन्हें निशाना तो नहीं बनाया गया है। बहरहाल, उनके एक महीने के नेतृत्व में बद्दी पुलिस के कुछ मुख्य कामों पर नजर डालें-
– दो उद्योगों पर वीज़ा नियमों के उल्लंघन का केस
विदेशियों को टूरिस्ट वीजा पर बुलाकर उद्योगों में काम करवाने के मामले में सोलन जिले के बद्दी स्थित दो उद्योगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
– 2.50 करोड़ उधारी शराब मामले में गिरफ्तारी बहुचर्चित ढाई करोड़ की उधारी शराब मामले में पुलिस की ट्रेनिंग कर रहे नालागढ़ निवासी एक व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। चंडीगढ़ के एक संस्थान के तीन लोग पहले ही इस मामले में गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इसी ग्रुप का यह सदस्य आजकल पुलिस ट्रेनिंग कर रहा है। एक्स सर्विसमैन कोटे से इसे पुलिस की नौकरी मिली है तथा तीसरी आईआरबीएन पंडोह मंडी में ट्रेनिंग कर रहा है। उधारी शराब मामले में पुलिस अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
– खनन माफिया की जेब पर चोट फरवरी के पहले पखवाड़े में पुलिस ने थाना रामशहर, नालागढ़ व बद्दी में अवैध खनन के खिलाफ मुहिम जारी रखते हुए चार चालान कर 75 हजार रूपये का जुर्माना लगाया।
– बद्दी के वर्धमान में 1.6 किलो गांजा पकड़ा पुलिस की एसआईयू टीम ने एचसी पवन व सीटी सुरेश की अगुआई में बद्दी के वर्धमान स्थित झुगी झोपड़ी 1 किलो 669 ग्राम गांजा पकड़ा।
– कार-ट्रक में नशे की तस्करी का पर्दाफाश एसपी बद्दी गौरव सिंह की टीम द्वारा चलाए अभियान के तहत हेरोइन व भुक्की के 2 और नए मामलों का पर्दाफाश किया गया। पुलिस ने एन.डी.पी.एस. के तहत मामले दर्ज कर 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
– वन्य प्राणी के अंगों और खालों की तस्करी का पर्दाफाश जिला पुलिस बद्दी ने वन्य प्राणियों की खाल और उनके अंगों को बेचने के गोरखधंधे में संलिप्त दो सगे भाईयों को गिरफ्तार किया
सख्त मिज़ाज़ अधिकारी
गौरव सिंह कांगड़ा और बद्दी के अलावा शिमला में भी एएसपी के तौर पर सेवाएं दे चुके हैं। अभी वह हिमाचल में सबसे कम उम्र के एसपी बने थे और बद्दी से पहले लाहौल-स्पीति की जिम्मेदारी उनके ऊपर थी। वह सख्त कार्रवाई करने के लिए जाने जाते हैं और पुलिस व होमगार्ड के 26 जवानों पर कार्रवाई कर चुके हैं। इन्होंने सेना के अफसर से रिश्वत लेने पर लाहौल-स्पीति में 18 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया था। नई सरकार बनने के बाद बद्दी की जनता और जनप्रतिनिधि इन्हें यहां लाए जाने की मांग कर रहे थे।
इन हिमाचल डेस्क।। ‘प्रधानमंत्री मोदी बोले- 2022 तक सबके सिर पर होगी छत।’ अगर कोई अखबार इस तरह का शीर्षक लगाए तो उसपर यकीन किया जा सकता है क्योंकि यह समाचार है। इसलिए क्योंकि अखबारों का काम होता है खबरें देना और अगर बड़े-बड़े अक्षरों में वह इस तरह से कुछ लिखे तो विश्वास करना लाजिमी है क्योंकि मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और वह ऐसा कर सकते हैं। मगर आपको किसी अखबार में यह लिखा मिले- शिवजी बोले- इस पाठ से अब कलयुग में निश्चित ही होगी सभी कामनाओं की पूर्ति। तो इसका क्या मतलब है, जरा नीचे देखें, आज हिमाचल प्रदेश में पंजाब केसरी ने क्या छापा है-
क्या भगवान शिव कलियुग में अवतरित हुए और इस तथाकथित बाबा को बयान दिया कि फ्लां पाठ से सभी दुखों से मुक्ति मिलेगी? क्या बाबा के पास इस बात के सुबूत हैं या फिर यह अखबार इस घटना की रिपोर्टिंग कर रहा था? पेज नंबर 3 पर बॉटम में छपी यह खबर दरअसल विज्ञापन है, जिसे खबर की शक्ल में पेश किया गया है। इसमें कहीं पर भी यह नहीं लिखा कि यह विज्ञापन है। पहले भी ऐसे ऐड छपे हैं-
जिन लोगों को समझ आ गया कि यह विज्ञापन है, वे सोचें कि आपके आसपास के भोले भाले लोग, खासकर कम पढ़े लिखे और मजबूर लोग समझ पाएँगे कि यह विज्ञापन है। मगर अखबार ने कहीं पर भी यह स्पष्ट नहीं किया कि यह विज्ञापन है। मगर यह इकलौता अखबार नहीं है, हिमाचल के कई अखबार ऐसे विज्ञापन छाप चुके हैं। बाबा की बात बाद में करेंगे, पहले अखबारों की कर लें। देखें, हिमाचल में एक अखबार ने 2014 में क्या विज्ञापन दिया था और वह भी पहले पन्ने पर। खबर की शक्ल में।
अगर इस तरह का विज्ञापन छापना हो तो बड़े अक्षरों में स्पष्ट लिखें कि यह विज्ञापन है, समाचार नहीं। वरना आपके ऊपर भी भ्रामक जानकारी देने और अंधविश्वास फैलाने संबंधित कानूनों के आधार पर कोई कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
हिमाचल के लगभग हर छोटे-बड़े अखबार कई बाबाओं, कई संगठनों आदि के विज्ञापनों को समाचारों की तरह पेश कर रहे हैं। रही ऋषि कुमार स्वामी की बात, उन्होंने इस तरह के विज्ञापनों के माध्यम से ही हिमाचल में पैठ बनाई है। अचानक इस तरह के विज्ञापन हिमाचल में आने लगे और रातो-रात दुख निवारण समागम होने लगे और फिर माउथ पब्लिसिटी होने लगी।
आप इन विज्ञापनों पर नजर डालें, इनमें हर छोटी-मोटी बात को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है। अगर कोई भी शख्स, संगठन आदि राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री को चिट्ठी भेजता है तो उसकी पावती आती है। उसमें शुभकामनाओं वाला संदेश दिया गया होता है। मगर देखिए, प्रधानमंत्री मोदी की ऐसी ही चिट्ठी की पावती को उनकी तस्वीर के साथ विज्ञापन में इस्तेमाल किया गया है मानो उन्होंने एक दिन पहले तारीफ की हो और यह समाचार हो। इसीलिए इन्हें शीर्षक में सांकेतिक रूप से ‘भ्रम ऋषि’ कहा गया है यानी जो भ्रम फैला रहे हैं। इन विज्ञापनों के लिए इनके ऊपर कार्रवाई हो सकती है क्योंकि ये भ्रामक हैं।
इसी तरह से विदेशी संस्थाओं के निजी कार्यक्रमों और छोटे-मोटे कार्यक्रमों में सम्मानित किए जाने को बड़ी उपलब्धि की तरह दिखाया गया है, मानो बाबा बहुत बड़े तोप हों। ऊपर से लोगों को आकर्षित करने के लिए लोगों के कुछ दावे शेयर किए गए हैं, जिनमें कहा गया है कि बीज मंत्रों के जाप से ब्लड कैंसर तक क्योर हुआ है। अब समाज में इतने दुख हैं, जब कहीं से सहारा न मिले तो आदमी मजबूरी में ऐसे विज्ञापनों से भ्रमित हो ही जाता है।
इन जनाब ने ऐसे विज्ञापन में तो यहां तक दावा किया था कि बिल क्लिंटन बीज मंत्रों के जाप से राष्ट्रपति बने हैं। लखनऊ के छात्रों ने ऐसे ही दावों पर शिकायत की थी और कानूनी नोटिस भेजा था कुछ साल पहले कि आप अपने दावों के सबूत दें (खबर पढ़ें), मगर उसका जवाब नहीं आया था। इन्हीं ने कहा था कि बाबा ने अपनी वेबसाइट पर www.cosmicgrace.org पर अविश्वसनीय दावे किए हैं (पढ़ें)।
वैसे बाबा और उनके बेटे पर कई आरोप लग चुके हैं और एक शख्स ने तो टीवी कार्यक्रम पर उनके बीज मंत्रों को लेकर सवाल उठाया था। अखबारों में विज्ञापनों कहा जाता है कि बीज मंत्रों से ‘अदभुत कृपा’ होगी मगर इस कार्यक्रम में बाबा कहते दिखे- मैंने ऐसा कब बोला? कृपा हो भी सकती है, नहीं भी। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रों से मरीजों का इलाज नहीं करता।
बहरहाल, बाबा के विज्ञापनों में जिन लोगों के अनुभव होते हैं, उनमें दिखाया जाता है कि बीज मंत्रों से पढ़ाई में कमाल हो गया, टेस्ट निकल गया या नौकरी लग गई या रोग ठीक हो गया। यही कॉमन समस्याएं आज समाज में हैं और विज्ञापनों के माध्यम से भुनाया जाने लगा।
इसके साथ ही कृपा लेने के विशेष पैकेज की भी व्यवस्था है और साथ ही बीज मंत्रों के लिए पत्रिका लगवाने से लेकर पूजन सामग्री, जल आदि को खरीदवाने की व्यवस्था अलग है। साथ ही हिमाचल के मंत्री और राजनेता भी सावधान रहे, अगर किसी इन तथाकथित ऋषि के किसी समागम में आपको न्योता मिले तो मंच से कहा जाएगा कि फ्लां नेता जी गुरु जी को सम्मानित करेंगे। आप सम्मानित करके माला पहनाएंगे और फिर अगली बार आपकी वही तस्वीर विज्ञापन में हो सकती है- फ्लां नेता ने किया गुरु का सम्मान।
धर्म और धार्मिक चीजों का प्रचार-प्रसार करना अलग बात है, मगर इनकी आड़ में लोगों के दुखों का व्यापार करना ग़लत। और इस काम में अखबार भी साथ देने लग जाएं तो किससे उम्मीद की जाए? बाबाओं का तो आजकल काम ही हो गया है, मीडिया को कम से कम सम्मान के साथ अपना फर्ज निभाना चाहिए। विज्ञापन जरूरी हैं, मगर पत्रकारिता भी।
कांगड़ा।। साइकल पर देश घूमने निकले तेजेश्वर मादीकारा ने अपने साथ मारपीट का जो आरोप लगाया था, उसकी पोस्ट वायरल होने के बाद अब पुलिस की तरफ से बयान आया है। एसपी कांगड़ा ने फेसबुक पर मेसेज पोस्ट किया है, जिसमें कहा गया है कि पुलिस ने तेजेश्वर से संपर्क किया है और ‘उन्हें अहसास हुआ है कि उन्हें पीटने वाले लोग पुलिसकर्मी नहीं थे। उन्होंने अपनी पोस्ट सोशल मीडिया पर सुधार दी है और वह शिकायत दर्ज नहीं करवाना चाहते।’
एसपी कांगड़ा की पोस्ट में लिखा है, “जिला पुलिस ने इस घटना में शामिल रहे लोगों को ढूंढने के लिए अपने स्तर पर संज्ञान लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस लोगों को बेहतर सेवाएं देने के लिए तत्पर है। पर्यटकों को किसी भी तरह की सहायता चाहिए हो तो पुलिस तुरंत मुहैया करवाएगी।”
कौन हैं तेजेश्वर 23 साल के तेजेश्वर आंध्रप्रदेश के करनूल से हैं और साइकल पर अपने डॉगी के साथ भारत यात्रा पर निकले हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि चार लोगों ने, जो खुद को पुलिसकर्मी बता रहे थे, उनके साथ धर्मकोट में मारपीट की थी। उन्होंने इस सिलसिले में एक पोस्ट भी डाली थी, जो तेजी से शेयर हो रही थी। उनकी पूरी आपबीती पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
लेकिन इस बीच सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस शख्स की चार-पांच लोगों द्वारा दो बार घातक रूप से पिटाई की गई हो, जिसने फेसबुक पर पोस्ट डालकर मामला उठाया हो, अब वह क्यों शिकायत दर्ज नहीं करवाना चाहता और क्यों उसने पहले पुलिसवालों का नाम लिया और अब उसे लगने लगा कि वे पुलिसवाले नहीं थे। क्या उसपर किसी तरह का प्रेशर है?
आरोप लगाने वाले पर्यटक पर सवाल
वैसे जिस समय उससे मारपीट हो रही थी, उसने पुलिस को फोन करने की कोशिश की या बाद में क्या उसने पुलिस से संपर्क किया था? घटनाक्रम में समय खुद उसकी स्थिति कैसी थी, कहीं वह पर्यटक किसी नशे में तो नहीं था? ऐसा क्या हुआ कि वह इनकार किए जाने, गाली दिए जाने के बाद भी शराब पी रहे लोगों से मदद मांगता रहा? ऐसे कई सवाल अनसुलझे छूट गए हैं। इनका उसने अपनी पोस्ट में भी जिक्र नहीं किया है।
यहां मामला सिर्फ तेजेश्वर का नहीं है। अगर उनके साथ कुछ गलत हुआ है तो उन्हें शिकायत दर्ज करवानी चाहिए, वरना इस तरह के मामले आगे और हो सकते हैं। शुकर है कि यह तो पिटाई ही हुई, कहीं उनकी कोई हत्या कर देता तो? हालांकि अब उनकी कहानी की छूटी हुई कड़ियों को लेकर भी सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे हैं।
धर्मशाला।। अपनी डॉगी जोंटी के साथ साइकल पर भारत यात्रा पर निकले 23 साल के साइकलिस्ट तेजेश्वर मादीकारा ने अपने साथ धर्मशाला में बदसलूकी का आरोप आया है। तेजेश्वर ने फेसबुक पर पोस्ट डाली है, जिसमें उन्होंने जो दावा किया है, अगर वह सच है तो वाकई रूह कंपा देने वाला है।
हालांकि अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि घटना पर क्या प्रगति हुई है और हमलावर कौन थे, जो खुद को पुलिस वाले बता रहे थे। मगर उनकी यह पोस्ट तेजी से शेयर हो रही है।
पुलिस ने दी ये जानकारी अब इस मामले पर पुलिस ने जानकारी दी है कि तेजेश्वर से संपर्क किया गया है और उन्होंने इस सिलसिले में शिकायत दर्ज न करवाने की इच्छा जताई है। साथ ही तेजेश्वर ने अपनी पोस्ट में सुधार कर दिया है और उन्हें अहसास हुआ है कि मारपीट करने वाले लोग पुलिसकर्मी नहीं थे। पुलिस ने यह भी कहा है कि हालांकि उसने खुद संज्ञान लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के बयान को विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
क्या लिखा था तेजेश्वर ने उन्होंने लिखा है कि 19 फरवरी को धर्मशाला के धर्मकोट में उन्होंने एक खाने की दुकान वाले से गुजारिश की कि कहीं साइकल पार्क करवा दें। उनका दावा है कि विपासना मेडिटेशन सेंटर के पास उन्होंने साइकल पार्क की और डिनर करने अपने डॉगी के साछ चले गए। जब लौटे तो कॉलोनी का गेट बंद हो चुका था। कुछ दूर उन्हें टैक्सी स्टैंड के पास शराब पीते चार लोग मिले जो खुद को सिविल ड्रेस में मौजूद पुलिसकर्मी बता रहे थे। उन्होंने मदद मांगी कि मेरी साइकल निकालने में मदद कीजिए क्योंकि मेरा सारा सामान (टेंट आदि) उसी के साथ है। तो इन लोगों ने कथित तौर पर न सिर्फ इनकार किया बल्कि नाराज़ होकर गालियां निकालीं। बाद में पिटाई की और उनके डॉगी को भी पीटा। लात घूंसो से बचकर वह भागे और सड़क पर जाकर मदद मांगी।
पिटाई के बाद दोस्तों द्वारा बनाए गए वीडियो का स्क्रीग्रैब
आगे वह बताते हैं- “सड़क पर एक कैब थी जिसमें एक भिक्षु था और पीछे एक स्कूटर। मैंने उनसे मदद मांगी। स्कूल वाले आदमी ने कहा कि मुझे वहां ले चलो जहां वो लोग हैं। मगर पता नहीं क्यों वहां पहुंचते ही वह भी उन कथित पुलिसवालों से मिल गया और मुझे पीटने लगा। इस बार लकड़ी के टुकड़े से मुझे और जोर से पीटा गया। हेलमेट की वजह से मैं बच गया। डॉगी की भी पिटाई हुई और दो मंजिल की ऊंचाई से फेंका गया। मुझे लगा बुरा सपना देख रहा हूं मगर यह हकीकत थी।”
“कुछ देर बाद कैब ड्राइवर ने हिम्मत दिखाई और उनसे कहा कि अब छोड़ दो। उसने मुझे भागने का इशारा किया औऱ मैं जंग में भाग गया और कुछ देर रुका। मेरे दोस्त आए और मुझे जख्मी हालत में देखकर हैरान रह गए। उन्होंने मेरी मदद की।”
वह लिखते हैं- “मुझे लगता है कि मुझे बाहरी होने की सजा मिली है। हालांकि उन्होंने लिखा है कि मुझे उबरने में समय लगेगा, लेकिन राज्यों की यात्रा जारी रखूंगा।”
कौन हैं तेजेश्वर तेजेश्वर जब जयपुर गए थे तो उनके बारे में ‘भास्कर’ ने लिखा था- मैकेनिकल इंजीनियरिंग छोड़ देश के अलग-अलग रंगों को कैमरे में कैप्चर करने के लिए 23 साल के तेजेश्वर साइकिल से भारत यात्रा पर निकले। साइकिल से 14 राज्यों का सफर करना किसी चुनौती से कम नहीं पर अपने पैशन के लिए उन्होंने पथरीली राह व अन्य बाधाओं की परवाह किए बिना अपने सफर को एक सही मंजिल देना तय किया। उनके इस सुहाने सफर में उनके डॉग ‘जोंटी’ ने भी साझेदारी निभाई और साइकिल से अब तक 11 हजार किलोमीटर का सफर पूरा कर चुके हैं।
आंध्रप्रदेश के करनूल से निकले तेजेश्वर न कोई रिकॉर्ड बनाने निकले हैं, न कोई मैसेज दे रहे हैं। वे सिर्फ खुद के लिए पूरा देश घूमना चाहते हैं। उनका पैशन फोटोग्राफी है। वे एक कैमरे में पूरे देश को बसाने के लिए निकले हैं। मैकेनिकल इंजीनियरिंग के फाइनल ईयर को छोड़कर तेजेश्वर ने जब अचानक साइकिल से देश घूमने का फैसला लिया तो पूरा परिवार हैरान रह गया। लोन लेकर उन्होंने कैमरा खरीदा।
तेजेश्वर जहां भी गए, वहां के अखबारों ने उन्हें खूब तवज्जो दी है। मकैनिकल इंजिनियरिंग छोड़ अपने कैमरे से देश के रंगों को कैद करने के लिए घूम रहे
इन हिमाचल डेस्क।। जो कांग्रेस पहले हौसला खोती हुई नजर आ रही थी, उसे गुजरात विधानसभा में बेहतर प्रदर्शन और राजस्थान उपचुनावों में मिली जीत से एक नई शक्ति का संचार होता नजर आ रहा है। राहुल गांधी भी पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद ज्यादा सक्रिय नजर आने लगे है। राहुल गाँधी कांग्रेस को अब अपने फॉर्मूले चलाना चाहते है जिससे वर्ग नाराज है तो एक वर्ग खुश भी है। नाराज वर्ग में अधिकतर उम्रदराज नेता हैं जिन्हे राहुल गांधी अब ज्यादा तवज्जो देने के मूड में नहीं लग रहे हैं। पिछले दिनों उपेक्षा से नाराज इन नेताओं से सोनिया के सामने भी अपने दर्द का इजहार किया पर सोनिया ने दो टूक कह दिया की राहुल ही अब कांग्रेस के सर्वमान्य नेता हैं और मेरे भी।
राहुल गांधी ने भी 2019 चुनावों के लिए अपनी टीम को काम पर लगा दिया है। अभी से लोकसभा के लिए काबिल जिताऊ कैंडिटेडस की लिस्ट राज्य इकाईयों को आलाकमान को भेजने को कह दिया गया है। चर्चा है कि हिमाचल से भी प्राथमिक रूप से विचार के लिए हर सीट से नाम भेजे जा चुके हैं। इन नामों पर टीम राहुल फिर थर्ड पार्टी से फील्ड फीडबैक लेगी कि किसके जीतने की कितनी संभावना है। यही प्रक्रिया लगभग हर राज्य में अमल में लाई जा रही है।
हिमाचल में क्या हैं हालात
हिमाचल प्रदेश की बात करें तो फिलहाल प्रदेश की 4 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस कहीं नहीं है। और जिस तरह से बीजेपी अभी अभी सत्ता में आई है उस तरह से आगे भी कांग्रेस की राहें जमीन पर इतनी आसान नहीं हैं। टिकट आबंटन में भी सब कुछ वीरभद्र सिंह के हाथ में रहे यह होता हुआ इस बार नहीं दिख रहा है। सुक्खू पर राहुल का विश्वास उसी समय समझ आ गया था जब लाख कोशिश के बाद भी वीरभद्र सिंह सुक्खू को अध्यक्ष पद से नहीं हटवा पाए थे।
मंडी लोकसभा सीट
हिमाचल में उम्मीदवारों पर विचार के लिए कांग्रेस द्वारा प्रथम चरण में जिन नामों को आलाकमान को भेजे जाने की चर्चा है, उनमें अनुभव और राहुल गांधी फॉर्मूले का पूरा हिसाब रखा गया है। प्रदेश की सबसे बड़ी लोकसभा सीट की बात की जाए, मंडी में कांग्रेस की हालात इस बार दयनीय है। विधानसभा चुनावों में कुल्लू में मात्र एक सीट पर कांग्रेस सत्ता में है तो रामपुर से दूसरी संजीवनी मिली है। बाकी सीटों पर भाजपा विधायक सत्ता में हैं। वहीँ जोगिन्दर नगर से भी निर्दलीय प्रकाश राणा ने बीजेपी को समर्थन दे दिया है।
कांग्रेस ने इसी किलेबंदी को देखते हुए संभावितों में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। वीरभद्र सिंह विपरीत परिस्थितियों में भी इस सीट से जीतते आए हैं। परन्तु उम्र तकाजे और दिनों दिन कोर्ट मामलों में फंसे रहने के कारण उनके नाम पर संशय ही है। इसी कड़ी वरिष्ठता को देखते हुए पूर्व मंत्रीं कौल सिंह का नाम भी आगे आ सकता है। राजनीति से संन्यास लेकर अंतिम विधानसभा चुनाव बात कहने वाले कौल सिंह अभी भी हटते हुए नहीं दिख रहे हैं। एक खेमा उन्हें आज भी प्रतियोगिता में रखना चाहता है, शायद इसीलिए उनके नाम पर विचार हो सकता है। वहीँ राहुल गांधी के फॉर्मूले को तवज्जो देते हुए पूर्व मंत्री राज कृष्ण गौड़ के बेटे भुवनेश्वर गौड़ का नाम भी इस सूची में बताया जा रहा है, जो जिला कुल्लू से सबंध रखते हैं।
कांगड़ा लोकसभा सीट
सबसे ज्यादा आबादी वाली कांगड़ा लोकसभा में भी कांग्रेस अच्छी स्थिति में नहीं है। यहाँ की 17 सीटों में कांग्रेस मात्र 3 सीट निकाल पायी है। कांग्रेस के कई दिग्गजों को हार करना पड़ा है। यहाँ से चर्चा के लिए गए नामों में पूर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली का नाम सबसे ऊपर भेजे जाने की चर्चा है। चम्बा से आशा कुमारी का नाम शामिल बताया जा रहा है। हालाँकि कोर्ट मामलों में उलझने के कारण आशाकुमारी के नाम पर क्या फैसला आता है, यह अभी नहीं कहा जा सकता दूसरा, वह चार विधानसभा सीटों वाले चम्बा ज़िले से आती हैं जबकि कांगड़ा में यह आंकड़ा 13 का है।
यंहा भी टीम राहुल निर्देशों अनुसार जो युवा नाम आगे भेजे जाने की चर्चा है, वह नूरपुर क्षेत्र से सबंध रखने वाले मनोज पठानिया का है। पठानिया टीम राहुल में अरसे से जुड़े हैं साथ ही अभी मध्य प्रदेश का प्रभार ऑब्ज़र्वर के रूप में देख रहे हैं। राजपूत वोट देखते हुए इस नाम को आगे किए जाने के कयास हैं।
शिमला लोकसभा सीट
शिमला सीट कभी कांग्रेस की परम्परागत सीट रहा करती थी परन्तु दो बार से बीजेपी यहां लगातार जीत रही है। रिजर्व सीट होने के कारण दोनों पार्टियों के ज्यादा ऑप्शन नहीं हैं, परन्तु जो भी नाम भेजे जाने की चर्चा है, उनमें कसौली से विनोद सुल्तानपुरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। हालाँकि विनोद लगातार दो चुनाव हार चुके हैं लेकिन मार्जन बहुत ही नजदीकी रहा है। पहला चुनाव 24 वोट और दूसरा चुनाव मात्र 200 वोटों हारे हैं। उन्हें राहुल गांधी के गुड बुक्स में माना जाता है।
इसके अलावा शिमला सीट से अन्य नामों में एक बार फिर पूर्व मंत्री गंगू राम मुसाफिर का नाम सिरमौर से आगे किए जाने की चर्चा है। वहीं सीमित विकल्पों के चलते एक बार फिर सोलन से विधायक धनीराम शांडिल्य को भी लिस्ट में रखे जाने की खबर है।
हमीरपुर लोकसभा सीट हमीरपुर सीट का किला कांग्रेस अर्से से नहीं भेद पाई है परन्तु इस बार के विधानसभा चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के साथ साथ भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती, दिग्गज नेता रविंदर सिंह रवि की हार से कांग्रेस की कुछ उम्मीदें बढ़ीं हैं। इस सीट से कांग्रेस ने अरसे बाद नीति में बदलाव करते हुए बिलासपुर की तरफ रुख किया है और ऐसी चर्चा है कि राहुल टीम के क्लोज़ माने जाने वाले राजेश धर्माणी का नाम प्राथमिक संभावितों के लिए भेजा है। हालंकि धर्माणी विधानसभा चुनाव बड़े मार्जन से हारे हैं मगर प्रदेशाध्यक्ष से क्लोज़ होने और बिलासपुर से होने का उन्हें फायदा मिला सकता है।
इसी कड़ी में दिग्गज नेता मुकेश अग्निहोत्री का नाम भी चर्चा के लिए आगे किए जाने की खबर है, जो लगातार ऊना जिला की हरोली सीट से जीतते हुए आ रहे हैं और वर्तमान में विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता हैं। तीसरे नाम पर एक बार फिर राजिंदर राणा की चर्चा है, जिन्होंने हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के सिटिंग उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल को हराकर चर्चा बटोरी है।
कांगड़ा।। अभी नई सरकार को बने कुछ ही दिन हुए हैं और इससे पहले पांच साल तक प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। वीरभद्र सिंह इस सरकार के मुखिया थे और इस बार उन्होंने सोलन के अर्की से चुनाव लड़ा था और अब वहां से जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। लेकिन उन्होंने खुद ही स्वीकार कर लिया है कि उनकी सरकार के समय अस्पतालों की क्या हालत थी। दरअसल उन्होंने नए स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात के दौरान कहा- मेरे इलाके का ध्यान रखा जाए, अर्की अस्पताल में डॉक्टर हैं न स्टाफ।
पंजाब केसरी अखबार ने खबर छापी है कि पूर्व मंत्री जीएस बाली की बेटी के विवाह समारोह में पहुंचे छह बार के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान वीरभद्र ने कहा कि उनके हल्के का ध्यान रखा जाए, अर्की अस्पताल में न डॉक्टर हैं और न स्टाफ़।
लेकिन सवाल उठता है कि कुछ दिन पहले तक प्रदेश में वीरभद्र सिंह की सरकार थी। ऐसे में यह बताकर कि अर्की अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ नहीं है, वह विपिन परमार से शिकायत कर रहे थे या अपनी विफलता का सुबूत दे रहे थे?
बहरहाल, वीरभद्र सिंह की इस मांग पर स्वास्थ्य मंत्री ने जवाब दिया कि वह इस मामले को अवश्य देखेंगे। उन्होंने कहा कि आपके काम कौन नहीं करेगा, आपका मार्गदर्शन तो हर किसी को चाहिए।