गुड़िया केस: नकाबपोश संदिग्ध को देखकर आपा खोते दिखे लोग

शिमला।। हिमाचल प्रदेश को कभी भी न भुलाया जा सकने वाला जख्म देने वाले कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस से जल्द ही पर्दा उठने जा रहा है। कल यानी सोमवार को सीबीआई ने एक संदिग्ध को कोटखाई में घुमाया। कम हाइट वाले इस शख्स के चेहरे पर सीबीआई ने नकाब डाला हुआ था। दिन भर उसे उन जगहों पर ले जाया गया, जिनसे गुड़िया केस के तार जुड़े हो सकते हैं। इस दौरान जुटी भीड़ यही चर्चा करती रही कि नकाब के पीछे आखिर कौन है।

पढ़ें- आरोपी को घटनास्थल लेकर आई सीबीआई

बता दें कि अभी तक को जानकारियां सार्वजनिक हुई हैं, उनके मुताबिक यह संदिग्ध मंडी जिले का है और उसकी उम्र लगभग 25 साल है। यह यहां पर लकड़ी चरानी के तौर पर काम करता था और केस सामने आने के बाद ही लापता था। जब घटनास्थल पर मौजूद साइंटिफिक सबूत पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपियों के सैंपलों से मैच नहीं हुए थे, तब सीबीआई ने अलग ऐंगल से सोचना शुरू किया था। इसके बाद ही इस संदिग्ध पर ध्यान गया था, जो घटना के बाद से लापता था।

सीबीआई ने इसे पकड़ा और जब साइंटिफिक सबूतों के आधार पर ऐसे संकेत मिले कि इस घटना में वह शामिल हो सकता है, तब उसने पूछताछ शुरू की। हिरासत में लेने के बाद सीबीआई ने पहले दिल्ली में पूछताछ की और फिर इसे शिमला ले आई। इसी कड़ी में सोमवार को वह दांदी के जंगल में ले गई।

कड़ी सुरक्षा
गुड़िया केस को लेकर पूरे प्रदेश में उबाल था और खासकर कोटखाई क्षेत्र में तो प्रदर्शन बेकाबू हो गए थे। जब लोगों को पता चला कि सीबीआई यहां किसी संदिग्ध को निशानदेही के लिए लाई है तो लोग बेकाबू हो गए। कुछ अपना आपा खोते नजर आए तो कुछ चाह रहे थे कि संदिग्ध के चेहरे से नकाब हटा दिया जाए।

मगर सीबीआई ने पहले ही भांप लिया था कि इस तरह के हालात पैदा हो सकते हैं। इसलिए पुलिस के 50 से ज्यादा हथियारबंद जवान तैनात थे। उन्हें लोगों को नियंत्रण में रखने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। बीच में तो ऐसी स्थिति भी आई कि सीबीआई के एक अधिकारी को जनता को समझाना पड़ा। बहुत से लोग सीबीआई के अधिकारियों से भी मिलना चाहते थे।

FILE PIC (Courtesy: IE)

कौन था शामिल?
इस दौरान संदिग्ध को नेपाली मजदूरों के डेरे में भी ले जाया गया, जहां उसकी पहचान कराई गई। अब 25 अप्रैल को सीबीआई इस मामले में हाई कोर्ट में पेश होगी और उम्मीद है कि उस दिन और भी जानकारियां सामने आएंगी। ये भी साफ होगा कि इस घटनाक्रम में पकड़े गए आरोपी के साथ और कौन शामिल था। वैसे अभी यह भी साफ नहीं हो पाया कि पकड़ा गया शख्स मुख्य आरोपी है या फिर वह गवाह है।

उम्मीद है कि 25 अप्रैल यानी कल यह पता चल पाएगा कि गुड़िया के साथ दुराचार वहीं हुआ था, जहां उसका शव मिला ता या कहीं और।

पुलिस से नाराज लोगों ने पूरे प्रदेश में प्रदर्शन किए थे।

क्या है गुड़िया केस?
पिछले साल चार जुलाई को एक छात्रा स्कूल से लौटते समय लापता हो गई थी। परिजनों को आशंका थी कि जंगल से आते हुए कहीं पर किसी जानवर की शिकार न हो गई थी। इसके बाद 6 जुलाई को कोटखाई के जंगल में उसका शव निर्वस्त्र हालत में मिला था।

पुलिस ने गैंगरेप और हत्या का मामला दर्ज किया था और छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। इनमें राजेंद्र सिंह उर्फ राजू, हलाइला गांव, सुभाष बिस्ट (42) गढ़वाल, सूरज सिंह (29) और लोकजन उर्फ छोटू (19) नेपाल और दीपक (38) पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार से थे।

बाद में इन संदिग्धों में से एक सूरज की कोटखाई थाने में 18 जुलाई की रात को कथित रूप से हत्या कर दी गई थी। पुलिस का कहना था कि राजू की सूरज से बहस हुई और उसके बाद राजू ने उसकी हत्या कर दी। मगर जब इसपर सवाल उठे और सीबीआई जांच शुरू हुई तो पुलिस वालों की थ्योरी प्रारंभिक जांच में बंद पाई गई। अब आईजी और एसपी समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हिरासत में मौत के मामले में न्यायिक हिरासत में बंद हैं।

गुड़िया केस: आरोपी को घटनास्थल लेकर आई सीबीआई

शिमला।। पूरे प्रदेश हो हिला देने वाले कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस में सीबीआई को बड़ी कामयाबी मिली है। सीबीआई ने इस सिलसिले में जिस आरोपी को हिरासत में लिया था, ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि उसने गुनाह कबूल कर लिया है। सीबीआई ने वैसे भी इतने साइंटिफिक सबूत जुटा लिए थे कि इस शख्स के पास गुनाह कबूलने के अलावा कोई चारा नहीं था। गौरतलब है कि सीबीआई ने दावा किया था वह 25 अप्रैल से पहले ही आरोपियों को पकड़ लेगी। 25 अप्रैल को हाई कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई होनी है।

‘इन हिमाचल’ को विश्वस्त सूत्रों से लगभग डेढ़ माह पहले ही जानकारी मिल गई थी कि आरोपी कौन है और सीबीआई किसे तलाश रही है, मगर इस संबंध में हमने कोई भी जानकारी प्रकाशित नहीं की। ऐसा इसलिए, क्योंकि आरोपी फरार चल रहा था और सीबीआई उसे ढूंढ रही थी। नाम या पहचान सार्वजनिक हो जाने पर वह और उसके साथी सचेत हो जाते और जांच एजेंसियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो जातीं।

बहरहाल, आरोपी को सीबीआई हलाइला के जंगल में ले गई है और घटनास्थल की निशानदेही करवाई जा रही है। आरोपी मंडी जिले का रहने वाला है और कोटखाई के जंगल में चरानी का काम करने वाले अपने रिश्तेदार के यहां आकर चरानी का ही काम कर रहा था। ऐसी भी जानकारी है कि आरोपी पहले से ही असमाजिक गतिविधियों में शामिल रहने के लिए बदनाम रहा है। घटना के बाद से ही यह गायब हो गया था।

बहरहाल, जंगल में भारी संख्या में पुलिसबल तैनात हैं। सीबीआई को मिली इस कामयाबी के साथ ही अब जेल में बंद हिमाचल प्रदेश के पुलिसकर्मियों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं, जो इस मामले में पहले संदिग्ध बताए गए नेपाली मूल के सूरज की हिरासत में मौत के मामले में बंद हैं। बता दें कि पुलिस ने इस मामले में नेपाली मूल के लोगों को आरोपी बनाया था।

पुलिस से नाराज लोगों ने पूरे प्रदेश में प्रदर्शन किए थे।

मगर स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर असंतोष जताया था और सीबीआई जांच की मांग की थी। बहरहाल, अभी अदालत में साफ होना है कि इस मामले में क्या सच है, क्या झूठ। यह भी सामने आना बाकी है कि इस वारदात को किस-किसने अंजाम दिया।

जानें, क्या है खुदाई के दौरान मूर्ति से लिपटे नाग की हकीकत

शिमला।। सोशल मीडिया के दौर में बहुत से लोग फेसबुक और वॉट्सऐप पर कहीं से भी आने वाले कॉन्टेंट को सच मान लेते हैं और आंख मूंदकर आगे बढ़ा देते हैं। इसी तरह से झूठ, अफवाहों और साजिशों का प्रसार होता है। अब सोशल मीडिया पर कुछ पेज यह प्रचारित कर रहे हैं कि हिमाचल में फोर लेन के काम के दौरान एक मूर्ति मिली है, जिससे काफी देक तक एक नाग चिपका रहा।

विभिन्न पेजों से शेयर किए गए इस कॉन्टेंट को बहुत से लोग सच मानकर शेयर कर चुके हैं। मगर हकीकत है कि हिमाचल प्रदेश में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।

मामला दरअसल महाराष्ट्र के बीड जिले का है। परली अम्बाजोगाई रोड पर कन्हेरवाड़ी के पास यह मूर्ति मिली है। यहां खुदाई की जा रही ताकि मिट्टी को सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया जाए। खुदाई के दौरान वहां पर एक नाग नजर आया, जो संभवत: बिल नष्ट हो जाने के कारण बदहवास था। नीचे वीडियो में देखा जा सकता है कि जेसीबी के पंजे से नाग डरा हुआ है। उसे भगाने की कोशिश की जा रही है।

फिर किसी ने शायद यहीं पर खुदाई में निकली एक मूर्ति को नाग के आगे डाल दिया, जो संभवत: शरारतपूर्ण था। बेचारा जीव छिपने के लिए मूर्ति का सहारा लेने लगा और आखिरकार उस मूर्ति से लिपट गया। आपने देखा होगा कि डरे हुए सांप अक्सर किसी न किसी चीज से लिपट जाया करते हैं। बहरहाल, ये सांप काफी देर तक यूं ही लिपटा रहा।

मगर अब तक लोगों को मसाला मिल चुका था कि फ्लां जगह खुदाई में मूर्ति निकली है और नाग चिपककर बैठा है। बहुत सी सुनी सुनाई कहानियों से यह किस्सा भी मैच कर रहा था। तो चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। कुछ ने तस्वीरें खींची और सोशल मीडिया पर डाल दीं। पूरे भारत में खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। हर कोई इसे अपने यहां की घटना बताने लगा। उत्तर प्रदेश के लोगों ने इसे यूपी के ही किसी इलाके की घटना बताया तो मध्य प्रदेश के किसी व्यक्ति ने अपने यहां की। हिमाचल के कुछ पेज भी अफवाहें फैलाने में शामिल हो गए।

हकीकत यह है कि जिस जगह पर मूर्ति मिली है, वहां पहले भी पुरातात्विक चीजें मिलती रही हैं। चर्चा है कि ये 11वीं शताब्दी की कोई प्रतिमा हो सकती है। कुछ इसे दंड के कारण कुबेर की प्रतिमा बता रहे हैं तो कुछ इसे सूर्य की प्रतिमा बता रहे हैं। गदा देखकर कुछ ने हनुमान की प्रतिमा भी बता दिया। मगर अभी पुरातत्व विभाग की ओर से जानकारी नहीं मिली है कि यह कब की मूर्ति है।

इससे पहले कि पुरातत्व विभाग कार्बन डेटिंग आदि से मूर्ति के सही समय का पता चलता, आस्था के नाम पर पूजा-पाठ की दुकान इस जगह पर खुल गई और दूर-दूर से लोग आने लगे। देखें:

बहरहाल, हिमाचल प्रदेश के लोग निश्चिंत रहें, आपके प्रदेश में यह मूर्ति नहीं मिली है। अफवाहों पर ध्यान न दें।

 

19 वर्षीय गर्भवती से कथित बलात्कार, मामला दर्ज, आरोपी फरार

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, नाहन।। नाहन के नौहराधार विकास खंड में आने वाले एक गांव में एक गर्भवती महिला के साथ कथित रूप से बलात्कार का मामला सामने आया है। 19 वर्षीय महिला के साथ ऐसी हरकत के आरोप पंचायत के सचिव पर लगे हैं, जो फरार हो गया है।

क्या है घटना
जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह 11 बजे के करीब यह घटना हुई। ऐसा कहा जा रहा है कि आरोपी पंचायत सचिव ने बीपीएल सूची में नाम डालने के बदले महिला को शारीरिक संबंध बनाने को कहा। जब महिला ने इनकार किया तो जबरन पास के ही जंगल में ले जाकर दुराचार किया।

इस बीच लकड़ियां इकट्ठा करने गया महिला का पति घर लौटा तो उसे जंगल की तरफ से चीखें सुनाई दीं। वह उस तरफ गया तो कथित तौर पर आरोपी वहां से भार रहा था। हालांकि सच क्या है, जांच के बाद ही सामने आ पाएगा।

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इस मामले में पुलिस ने बुधवार को धारा 376 के तहत मामला दर्ज किया है। नौहराधार चौकी के प्रभारी मोहन सिंह ने मामला दर्ज होने की पुष्टि की है।

इस बीच आरोपी घटना के बाद से फरार है और पुलिस को उम्मीद है कि जल्द उसकी गिरफ्तापी हो जाएगी। बताया जा रहा है कि आरोपी पर पहले भी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

निजी बसों को नियमों के खिलाफ दिए जा रहे रूट: बाली

शिमला।। पूर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा है कि निजी बसों को नियमों को ताक पर रखकर रूट दिए जा रहे हैं, जिससे एचआरटीसी को घाटा हुआ है। फेसबुक पर डाली पोस्ट के जरिए उन्होंने यह भी कहा है कि बार-बार एक ही परिवार या फर्म को रूट परमिट जारी करने के बजाय नीलामी करवाई जानी चाहिए, ताकि बेरोज़गारों को भी मौका मिल सके।

पूर्व परिवहन मंत्री ने आरोप लगाया है कि कुछ निजी बस ऑपरेटरों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया गया है और मौजूदा परिवहन मंत्री सिर्फ बयान दे रहे हैं कि कार्रवाई की जाएगी। बाली ने अपने पेज पर लिखा है, “मीडिया से ऐसी भी जानकारी मिली है कि कुछ निजी बसों को ऐसे परमिट दिए गए हैं, जहां उन्हें लाभ हो रहा है और एचआरटीसी को घाटा। ये रूट उन्हें पॉलिसी के खिलाफ जाकर दिए गए हैं। अगर ऐसा है तो इसमें कहीं न कहीं प्रशासनिक स्तर पर घालमेल की बू आ रही है।”

यही नहीं, उन्होंने मौजूदा परिवहन मंत्री पर कुछ न करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से ठोस कदम उठाने की  मांग की है। वह लिखते हैं, “परिवहन मंत्री बार-बार कह रहे हैं कि कोई भी गलत काम नहीं होने दिया जाएगा और कार्रवाई होगी। इससे पहले कि देर हो जाए, प्रदेश के मुख्यमंत्री को इसका संज्ञान लेकर कदम उठाने चाहिए। मुख्यमंत्री की मंशा पर कोई संदेह नहीं है, मगर सिस्टम खराब होता है तो यह किसी भी सूरत में प्रदेश के लिए ठीक नहीं है। नुकसान प्रदेश का ही होगा।”

बाली ने निजी बस परमिट नए लोगों को दिए जाने की वकालत भी की है। उन्होंने लिखा है, “निजी बसों के परमिट बार-बार कुछ ही परिवारों को दिए जाते हैं। जैसे डीज़ल के वाहनों को चलाने की एक सीमा होती है, उसके खत्म होने के बाद रूट परमिट रद्द करके नए सिरे से नीलामी होनी चाहिए, ताकि बेरोज़गारों को भी अवसर मिल सकें और सरकार को राजस्व भी मिले। बार-बार एक ही परिवार या एक ही फर्म को परमिट क्यों दिए जाते रहें?”

बाली ने यह भी लिखा है कि खुद वह इस दिशा में काम नहीं कर पाए मगर मौजूदा सरकार को ऑक्शन की व्यवस्था करके बेरोज़गारों को मौका देना चाहिए और अपने राजस्व के मौके भी बढ़ाने चाहिए। उन्होंने लिखा है कि अगर सरकार प्रदेश के हितों से खिलवाड़ करने वाले काम जारी रखती है तो वह ‘दो-दो हाथ करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।’

चंडीगढ़ में हिमाचल की भी हिस्सेदारी, लेंगे अपना हक: जयराम

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि चंडीगढ़ में हिमाचल प्रदेश की भी हिस्सेदारी है और उसके हिसाब से हिमाचल का हक लिया जाएगा। चंडीगढ़ में मीट द प्रेस कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1966 के तहत हिमाचल प्रदेश की चंडीगढ़ में 7.19 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। ऐसे में इसी अनुपात में चंडीगढ़ प्रसासन में अधिकारियों और कर्चारियों को डेप्युटेशन पर नियुक्त किए जाने का मामला उठाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले की सरकारों ने इस विषय में गंभीरता नहीं दिखाई थी, मगर उनकी सरकार प्रदेश का जो हक बनता है, उसे लेने की दिशा में लगातार प्रयास करेगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड यानी बीबीएमबी के प्रॉजेक्टों में राज्य का जो हिस्सा बनता है, उसे पंजाब और हरियाणा से रिकवर करने के लिए कानूनी रास्ते से प्रयास किए जा रहे हैं।

जयराम ठाकुर ने कहा कि इस बात को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री से बात हो चुकी है और जल्दी ही पंजाब के मुख्यमंत्री के सामने भी इस मुद्दे को उठाकर हिमाचल प्रदेश का हक मांगा जाएगा।

जेपी नड्डा के सामने आपस में उलझ गए हिमाचल के दो मंत्री

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश सरकार के दो मंत्री कांगड़ा एयरपोर्ट आपस में उस समय उलझ पड़े, जब वे एक कार्यक्रम के लिए हिमाचल आए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को रिसीव करने पहुंचे थे। ये मंत्री हैं- शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी और खाद्य आपूर्ति मंत्री किशन कपूर।

बताया जा रहा है कि दोनों मंत्रियों के बीच तबादलों को लेकर विवाद शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि किशन कपूर इस बात से नाराज थे कि उनके इलाके में कथित तौर पर सरवीण चौधरी ने हस्तक्षेप किया है। वहीं सरवीण चौधरी ने कहा कि उन्होंने धर्मशाला में किसी का तबादला नहीं करवाया है।

ऐसी खबर है कि दोनों मंत्रियों के बीच इसी बात को लेकर बहस हुई और फिर केंद्रीय मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें समझाया, तब जाकर मामला शांत हुआ। इस दौरान नगरोटा बगवां के विधायक अरुण मेहरा और बीजेपी कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।

इसके बाद किशन कपूर धर्मशाला चला गए और सरवीण चौधी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ अपने विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए चली गईं। मगर दिन भर यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा में रहा।

फिर पलटी जयराम सरकार, शीर्ष नौकरशाहों के चहेतों को पुनर्नियुक्ति

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर यह चर्चा छिड़ गई है कि सरकार जयराम ठाकुर चला रहे हैं या नौकरशाह। दरअसल मुख्य सचिव विनीत चौधरी के निजी सचिव की और मुख्यमंत्री की प्रधान सचिव मनीषा नंदा के ड्राइवर की रिटायरमेंट के बाद दोबारा नियुक्ति होने जा ही है। बता दें कि ये दोनों 30 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं। ये नियुक्तियां जयराम ठाकुर के उस नारे के विपरीत हैं, जो उन्होंने पद संभालते ही दिया था।

जैसे ही नई सरकार का गठन हुआ था और जयराम छाकुर मुख्यमंत्री बने थे, उन्होंने ऐलान किया कि यह सरकार पिछली सरकारों की तरह नहीं चलेगी और ‘टायर्ड और रिटायर्ड’ लोगों को न तो सेवा विस्तार दिया जाएगा न ही उनकी कहीं और पुनर्नियुक्ति होगी। मगर उस समय सरकार ने कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों को फिर से नियुक्ति दी थी। और अब दोबारा यही काम हुआ है। यानी सबकुछ पिछली वीरभद्र सिंह सरकार के साथ चल रहा है।

क्या हुआ इस बार
मुख्य सचिव विनीत चौधरी के निजी सचिव 30 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं। अब उन्हें सरकार हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन में अजस्ट कर रही है। उन्हें को-टर्मिनस आधार पर नियुक्ति दी जा रही है। यानी जब तक चीफ सेक्रेटरी विनीत चौधरी सरकारी सेवा में रहेंगे, उनके निजी सचिव भी नौकरी करते रहेंगे। बता दें कि विनीत चौधरी ही पावर कॉर्पोरेशन के मुखिया हैं।

मुख्यमंत्री की प्रधान सचिव मनीषा नंदा के ड्राइवर को भी रिटायर होने के बाद हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में एडजस्ट किया जा रहा है। ध्यान देने की बात यह है कि मनीषा नंदा खुद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चेयरपर्सन हैं।

बता दें कि इन नियुक्तियों के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से इजाजत नहीं ली गई क्योंकि इसकी जरूरत नहीं होती। मगर इस तरह से अधिकारियों द्वारा अपने चहेतों को फिर से कहीं और नौकरी देना सवाल खड़े कर रहा है। भले ही यह कहा जा रहा है कि दोनों को अपने पदों पर रिटेन करने के बजाय कहीं और नियुक्त किया जा रहा है, मगर सरकारी सेवा में ही तो नियुक्ति दी जा रही है।

सवाल उठाए जा रहे हैं कि एक तरफ मुख्यमंत्री दावा करते हैं कि उनकी सरकार सख्ती से घोषणापत्र को नीतिगत पत्र बनाएगी और अपने हर वादे पर खरी उतरेगी, वहीं रिटायर्ड लोगों की पुनर्नियुक्तियां हो रही हैं। साफ है कि या तो मुख्यमंत्री एक बार फिर अपने बयान से पलट गए हैं या फिर अफसरशाही के लिए उनकी बातों का कोई मोल नहीं है।

 

शिमला में 11 साल की बच्ची से रेप की कोशिश, आरोपी गिरफ्तार

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, शिमला।। जिस समय पूरा देश कठुआ और उन्नाव की घटनाओं पर आक्रोशित है, देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं, उसी समय हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक बच्ची से छेड़छाड़ और रेप की कोशिश का मामला सामने आया है। यह दिखाता है कि समाज पर न तो प्रदर्शनों का असर हो रहा है, न ही कानून का कोई डर बचा है।

छोटा शिमला में 11 साल की बच्ची के साथ छेड़छाड़ और रेप की कोशिश कर रहे एक शख्स को पकड़ा गया है। आरोपी इस बच्ची के पड़ोस में ही रहता है। उसने अपने कमरे में बच्ची को बुलाया और वहीं पर उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा। बच्ची ने शोर मचाया तो परिजन और आसपास के लोग इकट्ठे हो गए।

लोगों ने आरोपी को पुलिस को हवाले कर दिया है। संदिग्ध शादीशुदा है और उसकी उम्र 35 साल है। वह बिहार का रहने वाला है और यहां मजदूरी का काम करता है।

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छोटा शिमला पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धाराओं 376, 342, 506, 511 और पॉस्को ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

लेख: ‘मौनेंद्र मोदी’ से 100 गुना बेहतर थे ‘मौनमोहन सिंह’

आईएस ठाकुर।। कठुआ और उन्नाव गैंगरेप मामलों को लेकर देश उबल रहा है, हर कोई इन घटनाओं के विचलित है, समाज और सरकारों के रवैये पर सवाल खड़े हो रहे हैं, मगर जिस समय देश के सबसे बड़े नेता को जनता के साथ खड़े होना चाहिए, उस समय न जाने वह मौन व्रत लिए कहां गायब है।

प्रधानमंत्री मौनेंद्र मोदी…. क्या हुआ? आपको बुरा लग रहा कि प्रधानमंत्री को नरेद्र मोदी को मौनेंद्र मोदी कहा जा रहा है? बुला लग रहा है तो लगता रहे, मगर उनके लिए यही व्यंग्यात्मक नाम सही है। 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए जब प्रचार चल रहा था, तब नरेंद्र मोदी जगह-जगह भाषण देते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का मजाक उड़ाते हुए उन्हें ‘मौनमोहन सिंह’ कहते थे।

मोदी उन्हें मौनमोहन इसलिए कहते क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह वक्त-बेवक्त गप्पें हांकना, जुमले बनाना, कहानियां सुनाना पसंद नहीं करते थे। जब कभी वह भाषण देते थे, टु द पॉइंट बात करते थे। वे जलेबियां नहीं बनाते थे। यही नहीं, देख की हर बड़ी घटना पर उनकी प्रतिक्रिया आती थी और देश का सुप्रीम लीडर होने के नाते एक आश्वासन भी देते थे कि इस घटना में सरकार क्या करने जा रही है।

मगर जो नरेंद्र मोदी मनमोहन को मौनमोहन करते थे, आज खुद असल में मौनेंद्र यानी मौन+इंद्र यानी चुप्पी के राजा बन गए हैं। देश में एक से एक ऐसी घटनाएं हुईं, जिनमें बीजेपी या इससे संबंधित विचारधाराओं से जुड़े लोग घटिया से घटिया अपराधों में शामिल रहे। उस समय पूरा देश देख रहा था प्रधानमंत्री की तरफ, इस उम्मीद में कि वह कुछ बोलेंगे। मगर वह नहीं बोले।

वैसे तो वह हर छोटे-बड़े मौके पर बोलते हैं। मन की बात पर बोलते हैं, ट्विटर पर ट्वीट्स की झड़ी लगा देते हैं। मगर सांप्रदायिक हिंसा, विचारकों की हत्या, बीजेपी नेताओं की बदजुबानी, कार्यकर्ताओं के हुड़दंग, बीजेपी सरकारों की अक्षमताओं और लोगों द्वारा बलात्कार जैसी घटनाओं को जस्टिफाई किए जाने की कोशिशों पर कुछ नहीं बोलते।

चुनाव से पहले तो बड़ी-बड़ी बातें की जाती थीं कि मैं चौकीदार बनूंगा, ऐसा होगा वैसा होगा। जो-जो दावे मौनेंद्र जी ने किए, सब उसका उल्टा ही हुआ। काले धन को लेकर नोटबंदी की मगर वह सरकार के ही आंकड़ों के मुताबिक बेअसर रही। विदेश से काला धन नहीं आया, तेल के दाम आसमान छू रहे हैं, पाकिस्तान आए दिन भारतीय जवानों को निशाना बनाता रहता है, मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया की क्या स्थिति है, परमात्मा ही जाने।

इससे बढ़िया तो मौनमोहन सिंह ही थे। कम से कम उनके कार्यकाल में देश तरक्की की राह पर तो था। बातें करना आसान है, मौन रहकर काम करना मुश्किल। आज कठुआ रेप केस में आठ साल की बच्ची का रेप होता है और स्थानीय लोग उसे जस्टिफाई करते हैं कि मुस्लिम बच्ची थी और उसके समुदाय को सबक सिखाने के लिए ऐसा किया गया। यही नहीं, तिरंगे के साथ आरोपियों के समर्थन में रैलियां निकाली जाती हैं। समाज का यह पतन हो गया है।

प्रधानमंत्री सिर्फ चुना गया प्रतिनिधि नहीं होता, वह नेता होता है। वह लोगों का नेतृत्व करता है। वह परिवार के मुखिया की तरह होता है। उसके पद का अपना प्रभाव होता है। अगर प्रधानमंत्री कहे कि शर्मनाक घटना है और इसे धर्म के नाम पर जस्टिफाई नहीं करना चाहिए, तो इसका अपना प्रभाव होगा। जो लोग मोदी को अपना सबकुछ मानते हैं, उनमें से कुछ पर तो असर होगा।

 

मगर नहीं, प्रधानमंत्री जी किसी को सही राह पर लाने में फायदा नहीं देखते शायद। वह तो चाहते हैं कि लोग ऐसे ही धर्म के नाम पर ध्रुवीकृत रहें। अगर उन्होंने ढंग की टिप्पणी कर दी और आसिफा के बलात्कार को जस्टिफाई करने वालों की आलोचना कर दी, तो उन्हें शायद डर है कि मुझे ही लोग कहीं प्रो-मुस्लिम न समझ लें। और इसका सीधा नुकसान 2019 में होगा।

यूपी के उन्नाव में एक महिला का गैंगरेप होता है और आरोप विधायक पर लगता है। पुलिस मामला दर्ज नहीं करती, पीड़िता को कोर्ट जाना पड़ता है और वहां से एफआईआर के आदेश जारी होते हैं, इस बीच विधायक के गुंडे कथित तौर पर पीड़िता के पिता की पिटाई करते हैं। उल्टा पीड़िता के पिता को जेल में बंद कर दिया जाता है और उनकी मौत हो जाती है।

न तो हिंदुत्व के झंडाबरदार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार इस पर कुछ करती है और न ही मौनेंद्र मोदी इसपर कुछ बोलते हैं। बेटी बचाओ नाम का नारा बाकी नारों की तरह सिर्फ दिखावे के लिए दिया था क्या?

वैसे 2019 में दोबारा आना क्यों चाहते हैं मौनेंद्र मोदी जी? इन पांच सालों में ऐसा क्या किया आपने जो आपको दोबारा लाया जाए? कोई एक उपलब्धि बता दें अपने कार्यकाल की, जिससे पूरा देश सहमत हो कि भई हां, यह काम तो हुआ है। यह कहेंगे कि भ्रष्टाचार नहीं हुआ?

भ्रष्टाचार का मतलब आर्थिक गड़बड़ी करना ही नहीं होता। भ्रष्ट आचरण को भ्रष्टाचार कहते हैं और हकीकत किसी से छिपी नहीं है कि पूरे देश में केंद्र से राज्यों तक कितनी ही योजनाओं में यह खेल चल रहा है, कितने ही नेताओं का आचरण भ्रष्ट है। जिस टूजी के नाम पर भ्रष्टाचार का हौव्वा खड़ा करके यूपीए सरकार पर आरोप लगाए थे, वही मामला कोर्ट में फुस्स साबित हुआ और पता चला कि यह घोटाला ही नहीं हुआ था, सिर्फ अनुमानित नुकसान था।

बातें बड़ी-बड़ी, काम रत्ती भर नहीं। अगर यही सब होना था तो मौनमोहन सिंह का कार्यकाल ही भला था। कम से कम देश में शांति, प्रेम और भाईचारा तो था।

(लेखक इन हिमाचल के लिए लंबे समय से लिख रहे हैं, उनसे kalamkasipahi @ gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है)

(ये लेखक के निजी विचार हैं)