देखें, देहरादून की सिंगर का ये वीडियो जीत रहा हिमाचल का दिल

इन हिमाचल डेस्क।। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की रहने वाली सिंगर प्रियंका मेहर ने एक पहाड़ी मैशअप तैयार किया है। इसमें हिमाचली, कुमाऊंनी और हिंदी गानों का मिश्रण है। मंगलवार शाम को पोस्ट किए गए इस वीडियो को अब तक हजारों लोग देख चुके हैं। इसे उत्तराखंड और हिमाचल के सोशल मीडिया सर्कल में तेजी से शेयर किया जा रहा है।

हिमाचली गीत ‘चंबा कितनी क दूर’, कुमाऊंनी गाने ‘हाय तेरे रुमाला’ और हिंदी गीत ‘सैंया’ को प्रियंका ने खूबसूरती से गाया है।

प्रियंका मेहर

खास बात यह है कि इसके वीडियो में भी प्रियंका नजर आ रही हैं जो हरे-भरे पहाड़ों में झूमते हुए गाती हुई नजर आ रही हैं। पीछे पहाड़ों से उठ रही धुंध के बीच मुस्कुराहट से गातीं प्रियंका ने कमाल का समां बांधा है।

बहरहाल, गाने का वीडियो देखें:

आपको यह गाना कैसा लगा, नीचे कॉमेंट करके बता सकते हैं।

खली के इवेंट के लिए सरकार नहीं दे रही पैसा: गोविंद ठाकुर

शिमला।। युवा सेवाएं और खेल मंत्री गोविंद ठाकुर ने बयान जारी करके जानकारी दी है कि दलीप सिंह उर्फ द ग्रेट खली के मंडी और सोलन में होने वाले इवेंट के लिए सरकार किसी तरह की आर्थिक मदद नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले पर राजनीति की जा रही है और पुराने दस्तावेजों के आधार पर जनता को गुमराह किया जा रहा है।

खेल मंत्री ने कहा कि खली ने रेसलिंग के आयोजन के लिए सरकार से संपर्क किया था और खली के निवेदन पर विचार किया गया था क्योंकि हिमाचल के इस बेटे ने पूरी दुनिया में अपने नाम का डंका बजाया है। मंत्री ने कहा कि विभागों से चर्चा के बाद सामने आया कि मान्यता प्राप्त खेल न होने के कारण सरकार इस आयोदन की मदद नहीं कर सकती। ऐसे में इस खेल का आयोजन खली की अपनी कंपनी करवा रही है और सरकार इवेंट के आयोजन के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक मदद की व्यवस्था करेगी।

गौरतलब है कि मीडिया में इस तरह की चर्चा थी कि खली के इवेंट्स के लिए चार करोड़ तक का खर्च आ रहा है जिसमें से तीन करोड़ की व्यवस्था हिमाचल सरकार कर रही है। हाल ही में खली द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो को लेकर भी सवाल उठे थे, जिसके बाद अब खेल मंत्री ने बयान जारी करके मामले पर सरकार का पक्ष रखा है।

हादसे के बाद दर्द से कराहता रहा युवक, वीडियो बनाते रहे लोग

बिलासपुर।। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में रानीकोटला में हुए एक सड़क हादसे में एक युवक जख्मी हो गया। इस दौरान वह मदद की गुहार लगाता रहा, मगर लोग मदद करने के बजाय वीडियो बनाने में व्यस्त रहे। अब जानकारी सामने आई है कि युवक की मौत खून ज्यादा बह जाने के कारण हुई है। (कवर इमेज प्रतीकात्मक है)

यह बाइकसवार युवक गुरुवार को रानीकोटला में ट्रक की चपेटमें आ गया था और उसकी दोनों टांगें कुचल गई थीं। सभी लोग पुलिस के आने का इंतजार करते रहे और वीडियो बनाते रहे।

अगर युवक को सही समय पर अस्पताल पहुंचा दिया गया होता तो उसकी जान संभवत: बचाई जा सकती थी। बाद में आत्मदेव नाम के शख्स, जो कि बीडीसी सदस्य भी हैं, ने अपनी गाड़ी में युवक को अस्पताल पहुंचाया, मगर अफसोस उसकी जान बचाई नहीं जा सककी।

इस घटना के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर भी उपलब्ध हैं, मगर हम उन्हें यहां प्रकाशित करना उचित नहीं समझते। मगर यह तो है कि इस घटना ने दिखा दिया है कि इंसान किस तरह से संवेदनहीन होते जा रहे हैं।

अनुराग के साथ विक्रमादित्य के फोटोग्राफ पर भड़के नीरज भारती

शिमला।। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खास माने जाने वाले ज्वाली के पूर्व विधायक और कांग्रेस सरकार में सीपीएस रहे नीरज भारती ने शिमला रूरल से कांग्रेस के विधायक विक्रमादित्य की एक तस्वीर को लेकर तीखी टिप्पणियां की हैं। इस तस्वीर में वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य हमीरपुर से बीजेपी के सांसद अनुराग ठाकुर के साथ खड़े मुस्कुराते नजर आ रहे हैं।

इस तस्वीर को लेकर नीरज भारती ने नाराजगी जताई है और अपने राजनीतिक संरक्षक वीरभद्र के बेटे को खरी-खोटी सुनाई है। उनकी इस पोस्ट के स्क्रीनशॉट भी सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं और उन्हें अच्छा खासा समर्थन मिलता नजर आ रहा है।

क्या लिखा है पोस्ट में
नीरज भारती ने तस्वीर शेयर करने के साथ लिखा है-

“हिमाचल भाजपा के जिस धूमिल परिवार की राजनीति ही हिमाचल कांग्रेस के शेर आदरणीय राजा वीरभद्र सिंह जी और उनके परिवारजनों के खिलाफ निजी तौर पर गालियां दे कर, जहर उगल कर और झूठे मुकदमे बना कर चमकी है आज उन्हीं राजा वीरभद्र सिंह जी के सुपुत्र और कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह और कांग्रेस के ज्वालाजी से पूर्व विधायक संजय रत्न जी धूमिल पुत्र अनुराग ठाकुर के साथ फोटो सेशन करवा रहे हैं, हद है।”

Image: FB/Neeraj Bharti

पूर्व विधायक ने आगे लिखा है, “राजनीतिक परिवार से तो मैं भी हूं पर अगर मेरे बाप को कोई सार्वजनिक मंच से निजी तौर पर गालियां निकाले या निजी तौर पर जहर उगले या राजनीतिक द्वेष को निजी रूप दे तो मैं उसके साथ फोटो खिंचवाना तो दूर ऐसे शक्स पर थूकूं भी ना पर आज इस तस्वीर को देख कर काफी हैरानी भी हुई और भावनाएं भी आहत हुई।”

“ये सच है कि राजनीति में कोई दुश्मन नहीं और ना ही कोई दोस्त पर अब वो जमाना भी नहीं है कि लोगों को बेवकूफ बना कर अपनी राजनीति चमकाई जाए देखा जाए तो मेरी या मेरे जैसे अन्य कांग्रेस के कार्यकर्ताओं या नेताओं की भी धूमल परिवार या किसी अन्य भाजपाई से कोई निजी दुश्मनी नहीं है हमने कौन सा इनके साथ अपनी जमीनों का बंटवारा करना है या धूमल परिवार ने या किसी अन्य भाजपाई ने हमारा कोई निजी नुकसान किया है अगर हम इनके साथ लड़ते हैं तो वो सिर्फ और सिर्फ अपनी कांग्रेस पार्टी और अपने नेता के लिए, क्यों की ये कुछ भाजपाई हमारे नेता को राजनीति के साथ साथ उनकी छवि को निजी तौर पर भी नुकसान पहुंचाते है वरना हमारी किसी भाजपाई से कोई निजी लड़ाई नहीं है। पर आज इस तस्वीर को देख कर सच में बहुत दुख हुआ, क्या सोच रहे होंगे वो कार्यकर्ता जो दिन रात राजा वीरभद्र सिंह जी के परिवार के लिए दिल- जान से इन भाजपाइयों से लड़ाई लड़ रहे हैं अब वो किस मुंह से इस धूमिल परिवार के खिलाफ आवाज उठाएंगे.”


आखिर में नीरज भारती ने लिखा है, “कृपया चापलूस किस्म के नेता या लोग इस फोटो पर अपनी कोई सफाई देने की कोशिश ना करें, जो दिखता है वही बिकता है।”

ट्रैफिक रोककर जबरन पानी पिलाने से कौन सा पुण्य मिलेगा?

क्या है पाप, पुण्य क्या है? (मुक्तकंठ कश्यप ‘प्रेत’ की फेसबुक टाइमलाइन से साभार)

प्रेतावस्था को प्राप्त हुए अरसा बीत गया। अनूप जलोटा को सुनता रहा, ‘चदरिया झीनी रे झीनी’ फिर कुमार गंधर्व की लत लग गई। फिर जयपुर वाले अफ़ज़ल हुसैन साहब के साहबज़ादों अर्थात हुसैन बंधुओं को सुना। गाइये गणपति जगवंदन…. पता नहीं कितना पुण्य मिला, कितना नहीं।

धर्मभीरु कभी नहीं रहा। जो मन को ठीक लगा, किया। कई बार नुसरत साहब का तुम एक गोरखधंधा हो को सुनते हुए ट्रांस में जाकर भगवान से बहस भी की। बहस इसलिये हो सकी क्योंकि भगवान है। जो हो ही नहीं, उससे बहस कौन करे।

ज़र्रे ज़र्रे में मुझे नूर नज़र आया है…..
अरे! मैने शाम ढलने के बाद पत्ता तक नहीं तोड़ा। पत्तों में भी जान होती है।
प्रेत को इस बात पर गर्व है कि मेरा धर्म जीवन शैली है।
लेकिन भाई एक बात बताओ यार। निर्जला एकादशी हो या कुछ और, यह क्या ट्रेफिक को रोक कर बैठ जाते हो?
कटे हुए मख्खियों वाले तरबूज के टुकड़े जबरदस्ती खिलाते हो। पुण्य के नाम पर इतना करते हो, यह भी सोचा कि तँग सड़क पर आपकी छबील यातायात में अराजकता फैलाती है? रामायण का पाठ करोगे तो लाउड स्पीकर इतनी जोर से चिंघाड़ेगा कि राम भी नहीं सुनना चाहेंगे। अब ये खिलाने पिलाने का काम, यातायात को रोकने का काम क्यों? स्वर्ग में सीट चाहिए?

प्रेत की सलाह है, ये काम करो, सीट पक्की:

1, जितने शादी या धार्मिक त्योहार हैं, उनमें डीजे बजाना बन्द करो। लाउड स्पीकर बन्द करो। कई बार माइक ऐसा लगाते हो जो बीच में अज़ान देने लगता है।

2, निर्जला एकादशी पर इतने निर्लज्ज न बनो कि पानी को गंवाओ। जानते हो, जबरदस्ती पानी पिलाने के वक्त, या तरबूज और खरबूजे या खट्टे आम का टुकड़ा खिलाते वक्त जो अहंकार तुम्हारे चेहरे पर होता है, उससे बहुत बदसूरत लगते हो तुम।

3, नाबालिग को गाड़ी चलाने को न दो। यह भी बचेगा और दूसरे भी। कहीं गाड़ी ठोक देगा तो कई ठुकेंगे।

4, जितनी गाय हैं, इनको पानी पिलाओ, धूप में गश खा जाते हैं ये हमारे स्वार्थ के सताए हुए प्राणी। इंसान कर लेंगे इंतज़ाम पानी का। ये हमारे ही ठुकराए प्राणी बेघरबार हैं, इन्हें पिलाओ क्यों नहीं पिलाते पानी? पता है न बाल्टियों में पशुओं को पानी पिलाने में अपना पानी निकल जायेगा!!! वह बड़ा पुण्य है भाई, अगर पुण्य ह्यी करना है तो। यह अहंकार प्रदर्शन बन्द करो यार।

5, भांग और घोटा से बचो, न तुम शिव हो न हो सकते हो। शिव और शव में बहुत अंतर है यार।

(लेखक साहित्य और समाज से जुड़े विषयों पर तीखी टिप्पणियों के लिए सोशल मीडिया पर चर्चित हैं)

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

…जब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने गाया पहाड़ी गाना

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वह कोटखाई में मंच से पहाड़ी गाना गाते हुए नजर आ रहे हैं। जैसे ही सीएम ने गाने के शुरुआती बोल गाए, जनता ने सीटियों और तालियों से शोर मचाकर उत्साह बढ़ाया।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री जिस सिराज क्षेत्र से आते हैं, वह सांस्कृतिक रूप से काफी समृद्ध इलाका है और वहां पर हिमाचल की अनछुई पुरातन संस्कृति और परंपराओं की झलक आज भी देखने को मिल जाती है। बहरहाल, आप तीन सेकंड का वीडियो नीचे देखें-

इस वीडियो में मुख्यमंत्री झूमते हुए, हाथ लहराते हुए पारंपरिक लोकगीत गा रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनों कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने सीएम को नाटी डालने वाला नेता कहा था। हालांकि अग्निहोत्री के इस बयान की बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस के भी कुछ नेताओं ने  यह कहते हुए आलोचना की थी कि नाटी डालना गलत नहीं है और यह हिमाचल की संस्कृति का हिस्सा है।

इससे पहले पिछली सरकार में वन मंत्री रहे ठाकुर सिंह भरमौरी भी मंच से गाना गाने और नाचने के लिए चर्चित रहे हैं।

हिमाचल के मुख्य सचिव विनीत चौधरी पर उठे गंभीर सवाल

इन हिमाचल डेस्क।। हिमाचल प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी विनीत चौधरी एक बार फिर नए विवाद में फंसते नजर आ रहे हैं। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक विनीत चौधरी को संदिग्ध रिकॉर्ड के कारण मोदी सरकार ने सचिव नहीं बनाया था, जबकि हिमाचल प्रदेश में उन्हें नौकरशाही का मुखिया बना दिया गया है।

चैनल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कैबिनेट सचिव ने पांच बार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन बार विनीत चौधरी को केंद्र में सचिव या इसके समकक्ष पदों के लायक नहीं समझा था। मगर 30 दिसंबर 1982 बैच के हिमाचल काडर के आईएएस चौधरी को जनहित के नाम पर राज्य का चीफ सचिव बनाया गया था।

रिपोर्ट में दस्तावेजों के आधार पर दावा किया गया है केंद्र सरकार मे उन्हें सचिव बनाने की अर्जी को प्रधानमंत्री स्तर पर खारिज किया गया था। दावा है कि ‘जून 2015 से लेकर नवंबर 2017 के बीच कई बार चौधरी के नाम पर विचार हुआ मगर एक्सपर्ट पैनल, विनीत की छवि और विजिलेंस स्टेटस के आधार पर उनकी अर्जी खारिज कर दी गई।

रिपोर्ट के मुताबिक इस संबंध में विनीत चौधरी ने CAT में अपील की, मगर उन्हें सचिव नहीं बनाया गया। चैनल से बात करते हुए आरटीआई कार्यकर्ता हरिंदर ढींगरा ने कहा कि राज्य के मुख्य सचिव और केंद्र के सचिव बराबर होते हैं। ऐसे में जब विनीत को केंद्र में सचिव नहीं बनाया गया तो उन्हें राज्य का मुख्य सचिव कैसे बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “जब उनके ऊपर एम्स में आरोप हैं, सीबीआई जांच कर रही हैं, 6000 करोड़ के घोटालों में आरोपी हैं, पिछली सरकार के दौर में इनपर पेनल्टी लगाने की सिफारिश भी हुई थी।”

गौरतलब है कि विनीत चौधरी काफी विवादित अधिकारी रहे हैं। एम्स में कथित अनियमितता के एक मामले में संदिग्ध आचरण के आरोपों को लेकर वह चर्चा में रहे थे। उस समय इसी मामले के संबंध में तत्कालीन बीजेपी महासचिव और आज के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को भी आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी पार्टियों ने यह कहते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने करीबी होने के कारण विनीत चौधरी का बचाव करने की कोशिश की थी।

HRTC यूनियन के विवादित नेता पर महिला ने चप्पल से किया हमला

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, हमीरपुर।। अक्सर विवादों में रहने वाले एचआरटीसी कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष शंकर सिंह ठाकुर पर हमीरपुर में एक महिला ने हमला किया है। कर्मचारी यूनियन की बैठक में भाग लेने आए ठाकुर को दो महिलाओं ने हार पहनाने की कोशिश की मगर बीच में ही एक महिला ने चप्पल से हमला कर दिया।

मौके पर हालात तनावूर्ण हो गए थे। पुलिस ने हालात को शांत करवाया। ऐसी जानकारी सामने आई है कि हमला करने वाली महिला एचआरटीसी में प्रशिक्षु कंडक्टर के पद पर तैनात है।

क्या हो सकता है लिंक
बीते दिन हिमाचल पथ परिवहन निगम कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ पुलिस थाना हमीरपुर में शिकायत करने वाले निगम के मंडलीय प्रबंधक का हमीरपुर से तबादला कर दिया गया था।

शंकर सिंह के खिलाफ हमीरपुर थाना में धारा 506 के तहत केस दर्ज है। 30 मई को एचआरटीसी के फ्लाइंग स्क्वायड ने ऊना में नाका लगाया था। इस दौरान एचआरटीसी हमीरपुर डिपो की बस हमीरपुर से चंडीगढ़ के लिए रवाना हुई थी। जांच में पाया गया था कि हमीरपुर डिपो के चालक ने वर्दी नहीं पहनी है। इस पर चालक से जवाबतलब किया गया था।

एमबीएम न्यूज नेटवर्क का फेसबुक पेज लाइक करें

मामले की सूचना कर्मचारी यूनियन के प्रधान के पास पहुंची तो यूनियन के प्रधान ने मंडलीय प्रबंधक को फोन कर अभद्र भाषा का प्रयोग किया था और कथित तौर पर धमकाया भी था। मामले का ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। ऐसे में चर्चा है कि दोनों घटनाओं के बीच लिंक हो सकता है।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

HRTC ने लोगों की जान बचाने वाले अनुबंध चालक को नौकरी से निकाला

शिमला।। हाल ही में एक वीडियो सामने आया था जिसमें सरकारी बस का ड्राइवर बता रहा था कि कैसे ब्रेक फेल होने के कारण उसे बस सड़क किनारे खड़ी करनी पड़ी है। परेशान ड्राइवर ने बताया था कि विभाग में किस तरह से लापरवाही बरती जाती है और इस कारण हादसा हो सकता है।

चालक से बात करने वाले शख्स ने इस कैजुअल बातचीत का वीडियो बना लिया था जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। मगर अब अनजाने में एचआरटीसी की पोल खोलने वाले इस ड्राइवर को डिसमिस कर दिया गया है।

विभाग का कहना है कि ड्राइवर विपिन ने मौके पर बस छोड़ दी थी और भाग गया था। जबकि ड्राइवर विपिन का जो वीडियो सामने आया था, उससे स्पष्ट हो रहा था कि तकनीकी खराबी (कथित तौर पर ब्रेक फेल) आने के कारण बस खड़ी की गई थी।

वीडियो देखें, जिससे पता चलता है कि भोलेपन में विपिन कैमरे वाले शख्स से मन की बात कह रहा है (वीडियो ‘समाचार फर्स्ट’ से साभार)

यहां तक उक्त बस में बैठी सवारियों ने साफ कहा था कि उनके सामने का घटनाक्रम है और बस में ब्रेक नहीं लग रहे थे। (वीडियो ‘समाचार फर्स्ट’ से साभार)

यह ड्राइवर अनुबंध पर है और दावा किया जा रहा है कि उसका अनुबंध निरस्त कर दिया है। ईनाडू इंडिया के मुताबिक एचआरटीसी के डीएम अवतार ने कहा है कि उक्त ड्राइवर बस छोड़कर ठियोग से भाग गया था और इस कारण एचआरटीसी प्रबंधन ने उसे बाहर का रास्ता दिखाने के लिए नोटिस जारी किया है।

बहरहाल, इस रवैये से इससे पता चलता है कि एचआरटीसी किस तरह से काम कर रही है। साथ ही यह दुखद घटना है कि वीडियो बनाने वाले का दोष ज्यादा है, जिसने बिना पूछे वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया और एक शक्स की नौकरी खतरे में डाल दी।

आजादी के 71 साल रौशन हुए हिमाचल के ये गांव, बगैर सरकारी सहयोग के

राजेश वर्मा।। किसी कार्य को करने के लिए कोई इंसान भले ही योग्यता व क्षमता में कितना भी परिपूर्ण क्यों न हो लेकिन यदि उसमें उस कार्य को पूरा करने को लेकर संकल्प या प्रतिबद्धता नहीं है तो उसकी योग्यता व क्षमता का होना न होने के बराबर है। ऐसा ही एक वाक्य अभी-अभी प्रदेश में घटित हुआ जब एक व्यक्ति व उसकी टीम ने वह कर दिखाया जो शायद आज तक वह जनप्रतिनिधि भी नहीं कर पाए जिनको इस कार्य के लिए निर्वाचित किया गया था।
जिला कुल्लू के सैंज व बंजार में स्थित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में बसे तीन गांव शाकटी, मरोड़ और शुगाड़ आजादी के 71 वर्षों के बाद भी सड़क व बिजली की सुविधा से अभी तक वंचित हैं। एक तरफ हम कहते हैं हम विद्युत उत्पादक प्रदेश हैं हमारे संसाधन देश को भी रोशन करते हैं लेकिन हम तो खुद रोशनी से वंचित हैं फिर यह कैसा उजाला है?
नेशनल पार्क  का नियम है कि उसमें कोई मानवीय रिहाइश नहीं हो  सकती है यही कारण था कि नैशनल पार्क में बसे इन तीन गांवों को और इन तीनों गांव की जमीन को सेचुंरी क्षेत्र में  बदल कर  इन्हें सैंज वाइल्ड लाइफ सेंचुरी का नाम भी दे दिया गया। इन तीनों गांव में सबसे नजदीक शुगाड़ गांव को  सड़क सुविधा  लगभग पांच घंटे पैदल चलकर निहारनी  नामक स्थान से मिलती है। अंतिम गांव मरोड़ में पहुंचने के लिए लगभग 9 घंटे का पैदल रास्ता तय करना पड़ता है।
सैंज नदी जिसे स्थानीय लोग पार्वती नदी  भी कहते हैं के किनारे   बसे यह तीनों गांव प्रकृतिक सौंदर्य से ओतप्रोत है और इससे आगे के इलाके जिसमे परकची, रक्ति सर जैसे क्षेत्र हैं जो अप्रितम सौंदर्य के साथ साथ बहुमूल्य जड़ी बूटियों के लिए प्रसिद्ध हैं। जड़ी बूटियों को एकत्रित करना यंहा के लोगों का मुख्य व्यवसाय है।परंतु अवैज्ञानिक तरीके से निकाली जा  रही  इन जड़ी बूटियों से वह दिन भी दूर नही जब इन  जोतों में केवल घास ही बचेगा।   स्थानीय देवता श्री आदि ब्रह्म व ध्रुव ऋषि यहां के बाशिंदों के लिए सर्वोपरि हैं इन देवताओं का आदेश ही इनके लिए सबकुछ है व इनके लिए यही कानून भी है। स्थानीय नाग देवताओं के प्रति भी इनकी गहरी आस्था है।  खुशी की बात है कि शराब  इन गांवों में  पूरी तरह निषेध है।
गाड़ा पारली पंचायत के एक वार्ड साकटी , मरोड़ व शुगाड की कुल जनसंख्या मात्र 200-250 के आसपास है और इसमें से  भी 100-120 के लगभग मतदाता हैं। यही वजह है कि शायद सरकार का ध्यान यंहा पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर गया ही नही । प्रश्नचिह्न है हमारी सरकारों पर की क्या विकास का पैमाना संख्या बल होना चाहिए। माना यहां मतदाता कम संख्या में है तो भी क्या इन लोगों को आधारभूत सुविधाओं से महरूम रखा जाना चाहिए? लोकतांत्रिक न्याय की दृष्टि से इन सुविधाओं की पहुंच 1 व्यक्ति के लिए भी उतनी ही जरूरी है जितनी 1 हजार व्यक्तियों के लिए है।
शायद इसी सोच ने एक ऐसे शख्स व उसके साथियों  को पिछले कुछेक वर्षों से परेशान कर रखा था। जिला मंडी से संबंधित एक युवा चेहरा प्रवीण शर्मा व उनके दोस्तों जो पिछले दस वर्षों से एक गैर सरकारी संस्था “सेंटर फॉर सस्टैनेबल ” चला रहे हैं ने इस गांव के लिए वह कर दिखाया जो शायद यहां के लोगों ने आजदिन तक सपने में भी नहीं सोचा होगा। भले ही प्रवीण शर्मा भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी हो लेकिन इन्होनें अपने काम से साबित कर दिया की राजनीति करनी है तो जननीति के लिए करो मात्र राजनीति करने के लिए राजनीति न करो।
इन्होनें  एनजीओ “सेंटर फार संस्टेनेबल डेवलपमेंट” के बैनर तले इस गांव में भी वो उजाला फैला दिया जो आजदिन तक व्यवस्था के लिए भी असंभव था। 2013 में जब इन को पता चला की यहाँ एक बल्ब की रौशनी तक नसीब नहीं तब प्रवीण शर्मा ने अपने एक भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक मित्र भास्कर डीके जो खुद लोगों के सामजिक उत्थान और पर्यावरणीय संवेदनाओं से भी जुड़े हैं से मिलकर इन्होनें इस क्षेत्र के बाशिंदों के लिए बिजली पहुंचाने का प्रण लिया। शुरूआत में प्रवीण शर्मा,  डीके भास्कर जितेंद्र वर्मा  व प्रेम सिंह ठाकुर  ने मिलकर यहां के गांव का दौरा किया तो इन्होंने महसूस किया की अंधियारे गांवों के लिए फौरी राहत के लिए कुछ न कुछ जरूर होना चाहिए। इन सबने मिलकर कुछे एक  सोलर टार्च  व सोलर बैटरी का प्रबंध तो कर दिया परन्तु उन्हें लगा कि यह कुछ हद तक जरूरतों को तो पूरा कर रहा है लेकिन गांव वालों की इस समस्या का स्थाई समाधान नही बन सकता।
इसके बाद इस टीम ने अपने उस सपने को साकार करने की तरफ काम करना शुरू कर दिया जिस सपने को इन गांववासियों ने भी नहीं देखा होगा।
इन गांवों को पर्याप्त विद्युत उपलब्ध करवाने के लिए इस टीम ने विभिन्न स्तरों व माध्यमों से बात की लेकिन सफलता शायद अभी कुछ और मेहनत चाहती थी। इसी कड़ी में भास्कर डीके  के प्रयासों से  “टिमकेन” नामक कंपनी इन गावों में सोलर बिजली उपलब्ध करवाने के लिए राजी हो गई। बस फिर क्या था एनजीओ की टीम ने गांव में विस्तृत सर्वे करना शुरू कर दिया घरों, मंदिरों, आंगनबाड़ी केंद्र व विद्यालय आदि की एक रिपोर्ट तैयार की। एनजीओ सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवेलपमेंट के लिए खुशी की बात यह थी की इस प्रोजेक्ट का पूरा खर्च टिमकेन उठाने के लिए राजी हो गई थी।
अब था इस सपने को पूरी तरह साकार करने के लिए योजना को धरातल पर उतारना। इसके लिए इस टीम ने सौर ऊर्जा से संबंधित उपकरण बनाने वाली विश्व विख्यात कंपनी “गोल जीरो” के उपकरण लगाने का निर्णय लिया भारत में अभी तक यह कंपनी अपना कार्य तक नहीं करती बावजूद इसके इन्होनें इन उपकरणों को अमेरिका से ही आयात किया व इसके लिए टीम के सदस्यों भास्कर डीके व एक अन्य भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक रवि सिन्हा ने इस टीम की मदद की। रवि सिन्हा और भास्कर डी के ने अपनी कम्पनी चॉइस सोलर को पूरी तरह से इसी कार्य मे झोंक दिया। इसी मुहिम में आखिर 1 जून को सोलर जेनेरेटर व टार्च आदि सैंज में पहुंच गए। असली संघर्ष तो गांवों तक लगभग 20 टन वजनी इन उपकरणों को पहुंचाने को लेकर था लेकिन कहते हैं “जहां चाह वहां राह” और इस तरह खच्चरों व घोड़ों के माध्यम से यह सामान अपने गंतव्य पर आखिर पहुंच ही गया।
15 दिनों तक चले इस अभियान में आखिरकार विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र, मंदिरों व सभी घरों में एक एक  पावर जनरेटर उपलब्ध करवाने में यह टीम सफल हुई । 400 वाट के इस सोलर जेनरेटर से लगभग  8 बल्ब, एलईडी टीवी व मोबाइल रिचार्ज करने संबधी  सभी सुविधाये उपलब्ध है। इन सोलर पावर जनरेटर को  एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से ले जा सकते हैं यह पावर जेनरेटर 220 वाट विद्युत का उत्पादन करने की क्षमता भी रखता है। इसके साथ ही सामाजिक आयोजनों जैसे शादी समारोह व धार्मिक आयोजनों के लिए 1250 वाट  का एक बड़ा पावर जेनरेट भी इस टीम ने गांव में स्थापित किया।
चंद लोगों ने मिलकर एक ऐसे काम को अंजाम दे दिया जिसके बारे में आज दिन तक चुने हुए जनप्रतिनिधि  व सरकारें भी सोच नहीं पाई जबकि करना कराना तो दूर की बात थी। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी खुद इस देश में सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं लेकिन यह समझ से परे है कि उनके सांसद व विधायक अपने संसदीय क्षेत्रों में इस और कुछ करना तो दूर सोच तक नहीं पाए लेकिन प्रवीण शर्मा ने अपने साथियों से मिलकर उन सैंकड़ों लोगों के अंधेरे सपनों में उजाला कर दिया जिनके लिए बल्ब की रौशनी शायद एक अलग ही दुनिया की चीज थी। इन गांवों के लोगों ने शायद ही कभी सोचा होगा की उनके बच्चे भी रात के अंधेरे को पाटकर पढ़कर पाएंगे व वह भी इस डिजिटल इंडिया का हिस्सा बन पाएंगे। हैरानी इस बात की भी है की प्रदेश में जल का दोहन कर विद्युत उत्पादन किया जा रहा है वह भी प्रादेशिक खपत तक ही सीमित नहीं बल्कि बाहरी राज्यों तक यह विद्युत आपूर्ति की जा रही है।
सैंज वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के यह गांव ऐसी जगह पार्वती नदी के किनारे स्थित हैं जहां और नहीं तो कम से कम इस गांव के बाशिंदों के लिए तो इस नदी के जल से विद्युत पैदा की ही जा सकती है लेकिन बिना सोच व इच्छा शक्ति के यह कदापि संभव नहीं। एक बात तो तय है यदि हम और हमारा युवा चाहे तो वह किसी भी असंभव दिखने वाले काम को संभव बना सकता है और इसके लिए जरूरी नहीं की आपको किसी राजनीतिक दल से जुड़ना पड़े या सक्रिय राजनीति का हिस्सा ही बनना पड़े।
– 15 दिनों तक चले इस अभियान में टीम के सभी सदस्य इन्ही गांवों में रहे और लगभग सभी घरों में अपने हाथों से सौर ऊर्जा के इन उपकरणों को लगाया।
– इसी के साथ गांव के 50 वर्ष से ऊपर के सभी बुजुर्गों, पुहालों, खच्चर वालों के लिए सोलर टोर्च भी उपलब्ध करवायी।
– इस अभियान के दौरान भास्कर डी के का साढ़े छह वर्षीय  बेटा श्रीकर भास्कर भी अमेरिका से आया था और जितेंद्र वर्मा का 8 वर्षीय  बेटा अरनव  वर्मा  भी लगातार साथ रहे। और अपने साथ अपने स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा इकट्ठा किये गए समान जिसमे किताबे, पेंटिंग का सामान और अन्य खिलोने वंहा के स्थानीय बच्चों में वितरित किये। भगौलिक कठिनाईयों के बावजूद इन दोनों  बच्चों की कर्तव्यनिष्ठा देखने लायक थी।
(लेखक हिमाचल प्रदेश जुड़े विषयों पर लिखते रहते हैं)