पास को लेकर HRTC ड्राइवर और ट्रक वाले के बीच तीखी बहस

शिमला।। सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है जिसे किसी ट्रक ड्राइवर ने बनाया है। वीडियो में ड्राइवर के पॉइंट ऑफ व्यू से दिखता है कि उसके दरवाजे के बाहर एचआरटीसी की ड्राइवरों वाली वर्दी में एक शख्स खड़ा है और उसके साथ कुछ लोग भी हैं। ट्रक के ठीक सामने सड़क के बीचोबीच एक बस भी खड़ी है।

वीडियो बना रहा शख्स कहता है कि मेरे ट्रक में चार हजार ईंटें लदी हैं और मैं बैक नहीं कर सकता मगर एचआरटीसी का ड्राइवर मुझे बैक करवाने के लिए दबाव डाल रहा है और खुद पीछे नहीं हट रहा। ये वीडियो बनना शुरू होते ही नीचे खड़े ड्राइवर और अन्य लोग मुस्कुराने लगे जबकि वीडियो बनाने वाले ट्रक ड्राइवर की आवाज में घबराहट साफ देखी जा सकती थी।

बाद में सवारियां भी ट्रक ड्राइवर से पीछे हटने की गुजारिश करती नजर आई। इस दौरान ट्रक ड्राइवर ने कहा कि मेरे दरवाजे के बाहर खड़े ट्रक ड्राइवर ने मुझसे कहा है कि नीचे उतर, तुझे बताता हूं। काफी देर तक कहासुनी होती रही। ट्रक ड्राइवर ने बस का नंबर भी बताया और कहा कि ये ड्राइवर कभी बस पीछे नहीं करता। नीचे ‘बीइंग हिमाचली’ पेज पर शेयर किया गया वीडियो देखें।

बाद में ट्रक ड्राइवर ने कहा कि पीछे जगह नहीं है। फिर दोनों में कुछ बहस हुई, शब्दों का आदान-प्रदान हुआ और ट्रक ड्राइवर बोला- मैं करूंगा ही नहीं, मेरे साथ बदतमीजी कर रहा है ये बंदा। इसके बाद वीडियो खत्म। आगे क्या हुआ, मामला कैसे सुलझा, पता नहीं।

गलत कौन?
वीडियो देखकर किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता क्योंकि हमें नहीं पता कि वीडियो बनना शुरू होने से पहले क्या हुआ था। ऐसा लग रहा है कि ट्रक और बस दोनों समतल सड़क पर खड़े है इसलिए यह भी नहीं कहा जा सकता कि कौन चढ़ाई में था और कौन उतराई में या पास दिए जाने लायक जगह किसके ज्यादा करीब थी।

हो सकता है कि एचआरटीसी ड्राइवर झगड़ालू हो मगर प्रश्न यह भी है कि ट्रक ड्राइवर का यह तर्क वाजिब नहीं है कि वह इसलिए पीछे नहीं हट सकता कि उसके ट्रक में 4000 ईंटें हैं। अगर वह इस स्थिति में गाड़ी रिवर्स नहीं कर पा रहा तो इसका मतलब है कि उसका ट्रक तमाम नियमों को दरनिकार करके ओवरलोडेड है। हर वाहन की क्षमता होती है और नियम कहते हैं कि उसमें उसकी क्षमता के अनुरूप ही वजन डाला जा सकता है।

अगर कोई अपनी गाड़ी में उसकी क्षमता के हिसाब से ईंटें डाले तो उसकी गाड़ी में कभी कोई दिक्कत नहीं आएगी, वह आसानी से चढ़ाई-उतराई में चल सकेगी और रिवर्स भी की जा सकेगी। लेकिन अगर ट्रक ड्राइवर कहता है कि उसका ट्रक उसमें पड़े लोड के कारण बैक नहीं हो रहा तो साफ है कि वह नियमों का उल्लंघन करके न सिर्फ अपनी जान खतरे में डाल रहा है बल्कि सड़क पर चलकर अन्य लोगों की जान भी खतरे में डाल रहा है। क्योंकि इस हिसाब से तो उसकी गाड़ी किसी मोड़ पर पलट भी सकती है और हो सकता है कि गहरी उतराई में ब्रेक न ले। इतना लोड डालना ही क्यों कि पहाड़ी रास्तों पर गाड़ी बैक न हो सके?

वीरभद्र सरकार में नेताओं के रिश्तेदार और बाबा बनाए गए थे स्टेट गेस्ट

शिमला।। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित महेंद्र सिंह धोनी इन दिनों एक विज्ञापन की शूटिंग के सिलसिले में शिमला आए हैं। इस दौरान हिमाचल प्रदेश सरकार ने उन्हें स्टेट गेस्ट का दर्जा देते हुए उनकी सुरक्षा और पायलट (आगे चलने वाला विशेष वाहन) की सुविधा देने का फैसला किया है। इसे लेकर कांग्रेस ने  सरकार पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।

यह भी तथ्य है कि महेंद्र सिंह धोनी वीआईपी हैं और उन्हें झारखंड में वाई सिक्यॉरिटी मिली हुई है। वह जहां कहीं भी जाते हैं, वहां पर उनकी सुरक्षा का इंतजाम किया जाना जरूरी होता है। हिमाचल सरकार का कहना है कि ऐसे में वह प्रदेश में किसी भी कारण से आएं, उन्हें सुरक्षा देनी ही पड़ती। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में कही पर भी यह नहीं लिखा गया है कि धोनी को और कोई सुविधा मिलेगी या उनके ठहरने और खाने-पीने का इंतजाम किय जाएगा।

इस मामले पर कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है, “जो नियम हैं उनके अनुसार धोनी को स्टेट गेस्ट का दर्जा नहीं दिया जा सकता था और सरकार ने नियमों के विपरीत ऐसा किया है। सुक्खू ने कहा कि एमएस धोनी ने देश का नाम रोशन किया है, यह सही है लेकिन यदि सरकार को इस तरह नियमों के विपरीत जाकर स्टेट गेस्ट का दर्जा देना है तो फिर सरकार स्टेट गेस्ट नियमों में बदलाव करे और नियम लागू करे।”

‘धर्मगुरुओं को भी दी थी सुविधा’
भले ही सुक्खू इस मामले में हमलावर हो रहे हैं मगर जब कुछ महीने पहले तक जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, उस समय भी कई लोगों को नियमों के खिलाफ जाकर स्टेट गेस्ट बनाया गया था। आरटीआई के तहत साल 2014 से 2016 तक के पीरियड में स्टेट गेस्ट की जानकारी मांगे जाने पर पता चला था कि कई नेताओं, उनके परिजनों, अभिनेता और धर्मगुरुओं तक सरकार ने यह सुविधा दी थी।

‘कपिल सिब्बल के परिजन भी स्टेट गेस्ट’
इस संबंध में इनाडू की रिपोर्ट के मुताबिक वीरभद्र सरकार ने कांग्रेस के नेताओं ही नहीं बल्कि उनके परिजनों तक गलत तरीके से स्टेट गेस्ट बना दिया था। इसमें लिखा गया है, “पात्र न होने के बावजूद उन्हें स्टेट गेस्ट का दर्जा दिया गया। और तो और धर्मगुरुओं को भी स्टेट गेस्ट बनाया गया। इनमें राजा रामपाल, प्रीति जिंटा, जी.संजीवा रेड्डी, के.राजू, गिरिजा व्यास, महेंद्र जोशी आदि का नाम शामिल है। नियमों के खिलाफ जाकर कपिल सिब्बल के परिवार के सदस्यों तक को स्टेट गेस्ट का दर्जा दिया गया।”

यही नहीं हिमाचल प्रदेश के अखबारों में समाचार की शक्ल में फर्जी विज्ञापनों के जरिए चमत्कारों का दावा करने वाले तथाकथित धर्मगुरु कुमार स्वामी को दो बार सरकारी मेहमान बनाया गया था। निरंकारी मिशन के स्व. गुरु बाबा हरदेव भी 10 दिन तक स्टेट गेस्ट बनाए गए थे। तीन दिन के लिए प्रीति जिंटा स्टेट गेस्ट रही थीं।

‘60% अपात्र स्टेट गेस्ट वीरभद्र सरकार में’
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पात्रता न रखने वाले 60% लोगों को स्टेट गेस्ट का दर्जा वीरभद्र सरकार के समय मिला था। यह दावा पीपल फॉर रेस्पान्सिव गवर्नेंस नाम की सोसाइटी द्वारा डाली गई आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर किया गया है। बता दें कि किसे स्टेट गेस्ट बनाया जा सकता है किसे नहीं, इसके लिए ‘स्टेट गेस्ट नियम 1990’ को आधार बनाया जाता है।

क्या कहते हैं नियम
हिमाचल प्रदेश में इस संबंध में बने नियम कहते हैं कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट के जज, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और राज्यपाल स्टेट गेस्ट बनने के पात्र हैं। फिर केंद्रीय आयोगों और बोर्डों के प्रेजिडेंट स्टेट गेस्ट हो सकते हैं। फिर तीसरी कैटिगरी में आधिकारिक यात्रा यानी सरकारी विभागों से जुड़े किसी काम के सिलसिले में आए वीवीआईपी और वीआईपी सरकारी मेहमान बनाए जा सकते हैं।

हिमाचल के गांवों में चल रही है गुग्गा जाहरवीर छतरी यात्रा

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रक्षाबंधन से लेकर जन्माष्टमी के दिन तक गुग्गा जाहरवीर के मंडलीदार गुग्गा जाहरवीर के संकेत छतरी साथ गाँव में घर-घर जाकर लोगों के सुखी जीवन की कामना करते हैं। इस दौरान लोग श्रद्धा से उनकी छतरी पर डोरियाँ, चूड़ियाँ, श्रृंगार का सामान, कपड़े की कतरने आदि बाँध कर मंगल की कामना करते हैं। आजकल यह यात्रा चल रही है जो जन्माष्टमी तक जारी रहेगी।

गोगाजी का जन्म राजस्थान के ददरेवा (चुरू) चौहान वंश के शासक जैबर (जेवरसिंह) की पत्नी बाछल के गर्भ से गुरु गोरखनाथ के वरदान से भादो सुदी नवमी को हुआ था। चौहान वंश में राजा पृथ्वीराज चौहान के बाद गोगाजी गुरुभक्त, वीर योद्धा ओ‍र प्रतापी राजा थे।

गोगाजी की माँ बाछल देवी निःसंतान थी। संतान प्राप्ति के सभी यत्न करने के बाद भी संतान सुख नहीं मिला। गुरू गोरखनाथ ‘गोगामेडी’ के टीले पर तपस्या कर रहे थे। बाछल देवी उनकी शरण मे गईं तथा गुरू गोरखनाथ ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया और एक गुगल नामक फल प्रसाद के रूप में दिया। प्रसाद खाकर बाछल देवी गर्भवती हो गई और तदुपरांत गोगाजी का जन्म हुआ। गुगल फल के नाम से इनका नाम गुग्गामल पड़ा।

गुरू गोरखनाथ के आशिर्वाद से राजा गुग्गामल महा-वीर, नागों को वश में करने वाले तथा सिद्धों के शिरोमणि हुए। उनके मन्त्र के जाप से वासुकी जैसे महानाग के विष का प्रभाव भी शांत हो गया था। कहते हैं इनकी कथा सुनने से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है. साथ ही सर्पभय से भी मुक्ति मिलती है।

पंजाब और हरियाणा समेत हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में इस पर्व को बहुत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। गुग्गा नवमी की ऐसी मान्यता है पूजा स्थल की मिट्टी को घर पर रखने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है। (साभार: jogindernagar.com)

गुग्गा ‘वीर’ हैं या ‘पीर?’
एक पाठक ने की टिप्पणी के बाद यह सवाल उठा कि गुग्गा वीर हैं या पीर। चूंकि गुग्गा को हिंदू और मुस्लिम दोनों में सम्मान मिलता है, इसलिए यह भ्रम होना लाजिमी है। दरअसल जानकारों का मानना है कि वीर और पीर मे कोई अंतर नहीं है। जिस शक्ति को हिंदू वीर के रूप में पूजते हैं, मुस्लिम उसे पीर के नाम से मानते हैं।

हिंदू धर्म के लोग गूगा (गुग्गा) को चौहान या वीर के नाम से पूजते हैं जबकि मुस्लिम गूगा जाहर पीर के नाम पर। ऐसी भी मान्यता है कि एक ग्वाले ने डंडा मारा था गूगा के शरीर का जो भाग धरती में धंस गया उसे हिंदुओं ने लखदाता के रूप में माना और जो बाहर रह गया वह मुस्लिमों के लिए जाहर पीर बन गया।

आज हालात बदल गए हों मगर एक दौर था जब पीरों की दरगाहों में हिंदू खासी संख्या मे जाते थे और उसी तरह वीरों, योगियों और सिद्ध महात्माओं के दरबार में मुस्लिम आते थे। मगर आज लोग हिंदू और मुस्लिम के चक्कर में ऐसे पड़ गए हैं कि इस साझी संस्कृति को विकृत करने पर तुले हुए हैं।

तेज रफ्तार से ‘पृथ्वी की दिशा’ में बढ़ रहा है विशाल उल्कापिंड

एक बड़ा उल्कापिंड 32 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की दिशा में बढ़ रहा है। हालांकि वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि यह हमारे ग्रह के करीब से निकल जाएगा।

‘द सन’ के मुताबिक 2016 NH 23 नाम के इस उल्कापिंड का विस्तार 230 से 525 फुट के बीच है। यानी देखा जाए तो गीज़ा के पिरामड के बराबर जो कि 451 फुट ऊंचा है।

नासा ने इसे संभावित रूप से खतरनाक उल्कापिंडों की श्रेणी में रखा है क्योंकि यह धरती के करीब से गुजर रहा है। अमरीकी स्पेस एजेंसी का कहना है कि 29 अगस्त यानी बुधवार को यह धरती के पास से होकर निकल जाएगा।

Credit: NASA/JPL-CALTECHCredit: NASA/JPL-CALTECH

क्या इससे कोई खतरा है
‘द सन’ के मुताबिक यह 0.03377 ऐस्ट्रोनॉमिकल यूनिट्स के अंदर से गुजरेगा यानी धरती से 48 लाख करोड़ दूर से गुजरेगा।  अगर आपको लगता है कि यह दूरी बहुत ज्यादा है तो बता दें कि सूरज पृथ्वी से लगभग 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। इस तरह से ये सूरज के मुकाबले हमारे करीब से गुजरेगा।

Credit: PACredit: PA

वॉशिंगटन स्थित नासा मुख्यालय में प्लैनेटरी डिफेंस ऑफिसर लिंडली जॉनसन ने कहा कि धरती को इस उल्कापिंड से कोई खतरा नहीं है।

क्या है महेंद्र सिंह धोनी को स्टेट गेस्ट बनाए जाने का पूरा सच

शिमला।। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी इन दिनों हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक विज्ञापन की शूटिग के लिए आए हुए हैं। इस बीच राज्य सरकार ने उन्हें स्टेट गेस्ट यानी सरकारी मेहमान बनाया है। इसे लेकर कुछ समाचार पत्रों आदि में समाचार प्रकाशित हुआ कि ‘निजी विज्ञापन की शूटिंग करने आए धोनी को सरकार ने स्टेट गेस्ट का दर्जा दे दिया और उनके रहने से लेकर खाने-पीने का खर्च भी सरकार उठाएगी।’

ये सवाल भी उठाए गए कि धोनी जब निजी प्रॉजेक्ट के सिलसिले में आए हैं तो उन्हें सरकारी मेहमान बनाने की क्या जरूरत। मगर हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से जारी अधिसूचना को पढ़ें तो उसमें लिखा गया है कि ‘प्रसिद्ध क्रिकेट महेंद्र सिंह धोनी का पायलट एस्कॉर्ट और सिक्यॉरिटी के लिए स्टेट गेस्ट घोषित किया गया है।’

 

सरकार की ओर से जारी अधिसूचना

कहां ठहरे हैं धोनी
धोनी को 27 से 31 अगस्त तक यह दर्जा दिया गया है। इसमें इसका कोई जिक्र नहीं है कि सरकार ही उनके रहने और खाने-पीने का खर्च भी उठाएगी। बता दें कि बेटी और पत्नी के साथ आए धोनी सरकारी होटल में नहीं बल्कि एक निजी होटल ‘वाइल्डफ्लावर हॉल’ में ठहरे हुए हैं। जानकारी मिली है कि यहां उनके रहने का खर्च ऐड शूट करवा रही एजेंसी उठा रही है।

क्या कहती है सरकार
इस मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने कहा कि कुछ मीडिया आउटलेट्स भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “महेंद्र सिंह धोनी देश के सबसे लोकप्रिय लोगों में से हैं। वे किसी भी मकसद से कहीं भी जाएं, उनकी सुरक्षा वहां के प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। वह हिमाचल प्रदेश आए हैं तो उनकी सुरक्षा में किसी तरह की चूक न हो, इसके लिए उन्हें स्टेट गेस्ट का दर्जा देते हुए एस्कॉर्ट और सिक्यॉरिटी दी गई है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह निजी प्रॉजेक्ट के सिलसिले में यहां आएं या किसी और काम से।”

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी इस मामले को लेकर कह चुके हैं कि अगर चर्चित और लोकप्रिय हस्तियां हिमाचल आती हैं और यहां शूटिंग करती हैं तो इससे टूरिज़म का विकास होता है। हिंदी अखबार दैनिक जागरण के मुताबिक ऐड शूट कर रही कंपनी का कहना है कि जयराम ठाकुर की हां के बाद ही धोनी शिमला आए हैं।

कंपनी के मालिक विशाल बहल ने अखबार से कहा, “हमने सीएम को दिक्कत बताई कि शिमला में शूटिंग में कितनी परेशानी होती है। इस पर मुख्यमंत्री का कहना था कि शूटिंग से प्रदेश में पर्यटन का विकास होगा। जब बड़े अभिनेता और कलाकार हिमाचल आएंगे तो पर्यटन पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। ऐसे में सरकार शूटिंग के माध्यम से पर्यटन विकसित होता है और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।”

यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज की होगी मैजिस्टीरियल जांच

शिमला।। यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के हिंसक हो जाने के बाद हुए लाठीचार्ज को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मैजिस्टीरियल जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लाठीचार्ज के मामले में जांच और सदन में बहस के लिए तैयार है मगर विपक्ष बेवजह इस बात को मुद्दा न बनाए।

इससे पहले कांग्रेस विधायकों ने अपने कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज का विरोध करते हुए सदन में हंगामा किया और फिर वॉकआउठ कर गए। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने बाहर आकर मीडिया से कहा कि सरकार बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है।
हा।

बाद में मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग तोड़कर उसकपर चढ़ने की कोशिश की थी तब पुलिस ने वॉटर कैनन और हल्के बल प्रयोग का सहारा लिया था।

विपक्ष के वॉकआउट के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस भूल गई है कि कैसे बीजेपी पर विधानसभा के बाहर लाठीचार्ज किया था, मगर हमारी सरकार फिर भी इस घटना पर सदन में चर्चा और मजिस्ट्रिलय जांच करवाएगी।

मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी ने कुल्लू के डीसी यूनुस खान को बांधी राखी

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, कुल्लू।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की धर्मपत्नी डॉक्टर साधना ठाकुर ने कुल्लू के डीसी यूनुस खान की कलाई पर राखी बांधी।

इससे न सिर्फ हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है बल्कि सरकार और प्रशासन के बीच अच्छे संबंधों का संदेश भी गया है। क्योंकि लोकतंत्र में व्यवस्था की गाड़ी सरकार के साथ-साथ नौकरशाही के पहियों पर ही आगे बढ़ती है।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की पत्नी डॉ. साधना ठाकुर मूलत: कर्नाटक की हैं मगर दशकों पहले उनका परिवार राजस्थान के जयपुर में बस गया था।

रविवार को मुख्यमंत्री अपनी पत्नी के साथ मनाली पहुंचे थे, जहां उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियों का विसर्जन किया। इसी दौरान सीएम की पत्नी ने कुल्लू के डीसी की कलाई पर राखी बांध रक्षाबंधन मनाया।

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आईएएस अधिकारी यूनुस ख़ान कुशल प्रशासनिक अधिकारी हैं और अपनी कार्यशैली के कारण लोकप्रिय भी हैं। उनकी पत्नी अंजुम आरा हिमाचल कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं। दोनों ने एक साल पहले पंजाब के एक शहीद फौजी की बेटी को गोद लिया है।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क की खबर है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित की गई है)

14 साल की दलित बच्ची से पांच दिन तक गैंगरेप

एमबीएम न्यूज नेटवर्क, नाहन।। सिरमौर के नाहन में 14 साल की बच्ची को किडनैप करके कई बार रेप किए जाने की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि 16 अगस्त के बाद से कई लोगों ने इस बच्ची के साथ बलात्कार किया। ददाहू और नाहन के होटलों में यह सब होने की बात कही जा रही है। ऐसे में यह आशंका भी जताई जा रही है कि बच्ची को देह व्यापार में धकेलने की कोशिश भी की जा रही होगी।

बच्ची एक गरीब दलित परिवार से संबंध रखती है। पुलिस ने बुधवार रात को आईपीसी की धारा 376 के साथ-साथ पॉक्सो के तहत मामला दर्ज किया है और पांच युवकों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने तुरंत इस कार्रवाई को अंजाम दिया क्योंकि इसे आशंका थी कि आरोपी अंडरग्राउंड हो सकते हैं। पुलिस ने बच्ची का मेडिकल करवा लिया है।

‘कई दिनों तक कई लोगों ने किया गैंगरेप’
अभी तक जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक बच्ची संगड़ाह में मेला देखने आई थी। यहां उसे महिपुर का रहने वाला एक युवक मिला जो उसे अपने साथ ददाहू ले गया। यहां पर एक होटल में बच्ची के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया गया। बाद में एक यह युवक उसे अन्य लड़के के पास ले गया जो उसे अपने मामा के यहां ले गया।

उसने परिवार को बताया कि यह लड़की उसके दोस्त की बहन है। यहां पर दोनों युवक रात को लड़की के साथ ही सोए। 17 अगस्त को लड़की को ददाहू ले जाकर नाहन भेज दिया गया। यहां एक अन् ययुवक मिला जिसने लड़की से होटल में कथित तौर पर रेप किया। फिर 18 अगस्त को लड़की ददाहू चली गई। यहां से फिर उसे जलाल पुल लाया गया और पुल के नीचे भी उसके साथ बलात्कार किया गया।

20 अगस्त को नाहन में फिर से उसका बलात्कार किया गया और काला अंब ले जाया गया। 21 रात को बच्ची से गाड़ी में रेप किया गया। इस दौरान उसके माता-पिता उसकी तलाश में दर-दर की ठोकरें खा रहे थे। 22 अगस्त को यह बच्ची  कालाअंब मार्ग पर अपने पिता को मिली और इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।

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क्या कहती है पुलिस
सिरमौर के पुलिस अधीक्षक रोहित मालपानी ने मामला दर्ज होने की पुष्टि करते हुए कहा कि जांच की जा रही है और बिना देर करते हुए आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया था। उन्होंने कहा कि इन पांच के अलावा अगर किसी और की संलिप्तता इस मामले में पाई जाती है तो और गिरफ्तारियां भी होंगी।

(यह एमबीएम न्यूज नेटवर्क का सामाचार है और सिंडिकेशन के तहत प्रकाशित किया गया है।)

मामूली विवाद पर पुलिस ने युवक को मुर्गा बनाया, बीमार पिता को पीटा

बिलासपुर।। बिलासपुर पुलिस पर एक बीमार शख्स को पीटने और उनके बेटे को मुर्गा बनाने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने यह कदम इसिलए उठाया क्योंकि इस युवक की घास काटने को लेकर किसी के साथ बहस हो गई थी।

घटना घुमारवीं के सुहणानी इलाके की है। पुलिस यहां पर पहुंची और कहासुनी के आरोपी युवक को उसके आंगन में ही मुर्गा बनाया गया। बाद में इस युवक के पिता की बेरहमी से पिटाई करने का भी आरोप है जो कि गंभीर रूप से बीमार हैं।

इसके बाद घटनास्थल पर गांव के लोगों की भीड़ जुट गई। इसी दौरान किसी ने घटना का वीडियो बना लिया। बाद में पुलिस दोनों को छोड़कर चली गई। पुलिस वाला वीडियो को रुकवाता हुआ भी दिख रहा है।

पीड़ित पिता-पुत्र ने एसपी बिलासपुर से इस मामले की शिकायत की है। सुरेश कुमार नाम के युवक का कहना है कि उसकी 18 अगस्त को किसी के साथ कहासुनी हुई थी और मामला पुलिस के पास पहुंच गया था।

उनका कहना है कि एएसआई, और दो पुलिसकर्मी जिनमें एक महिला पुलिसकर्मी थी, उसके घर पहुंची और मारपीट की। युवक का कहना है कि जब उनके पिता ने इसका विरोध किया तो पुलिसवालों ने उन्हे भी पीट दिया।

बिलासपुर के एसपी अशोक कुमार ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और जो कोई भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सरकार ने मुकेश अग्निहोत्री को दी नेता प्रतिपक्ष की मान्यता

शिमला।। कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री को सरकार ने बतौर नेता प्रतिपक्ष मान्यता दे दी है। अब मुकेश अग्निहोत्री नेता प्रतिपक्ष को सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाओं को हासिल करने के हकदार होंगे। बता दें कि नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट रैंक के बराबर दर्जा मिलता है।

इस बार चुनाव के नतीजे आने के बाद सरकार ने यह कहते हुए नेता प्रतिपक्ष पद देने से इनकार कर दिया था कि कांग्रेस इसके लायक सीटें नहीं ला पाई है। उस समय कहा जा रहा था कि यह सरकार की इच्छा पर निर्भर करेगा कि नेता प्रतिपक्ष का पद दिया जाना है या नहीं।

गौरतलब है कि इसी कारण केंद्र में भी किसी को नेता प्रतिपक्ष का पद नहीं मिला है क्योंकि सदन में कांग्रेस या कोई भी विपक्षी पार्टी इसके लायक सीटें नहीं ला पाई थी। इसी तरह से हिमाचल में 21 सीटें लाने वाली कांग्रेस को भी नेता प्रतिपक्ष का पद नहीं मिल पाया था।

जब यह मामला उठा था, इन हिमाचल ने इस पर विस्तार से नियमों की पड़ताल की थी। क्या कहते हैं इस संबंध में नियम, नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें-

नेता प्रतिपक्ष पद को लेकर बिना वजह बवाल कर रही बीजेपी