हिमाचल: शादी में कोरोना नियम तोड़ने पर एफआईआर, आयोजक गिरफ्तार

कुल्लू।। हिमाचल प्रदेश पुलिस ने ओल्ड मनाली में एक शादी में कोरोना नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की है। न सिर्फ एफआईआर हुई बल्कि आयोजक की गिरफ्तारी भी हुई। यह पुलिस की ओर से प्रदेश में शादी के दौरान लापरवाही बरतने पर कार्रवाई का पहला मामला है।

बताया जा रहा है कि कार्रवाई करने से पहले भी पुलिस समारोह में पहुंची थी। इस दौरान सामाजिक दूरी का ख्याल रखा जा रहा था। आयोजक ने खाना बनाने और परोसने बनाने वालों के भी कोविड टेस्ट करवाए थे, जिसके लिए पुलिस ने उन्हें सराहा भी। लेकिन जैसे ही पुलिस समारोह स्थल से गई, लोगों ने कोरोना से बचाव के लिए लागू नियमों को तोड़ना शुरू कर दिया।

पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने कहा है कि सूत्रों से सूचना मिली कि पुलिस के जाते ही लोगों ने नियमों को दरकिनार किया और आयोजक ने भी उन्हें नहीं रोका। एसपी ने कहा, ” पुलिस ने ओल्ड मनाली में शादी में कोरोना को हल्के में लेने और लोगों की जान जोखिम में डालने वाले आयोजक को गिरफ्तार किया है। आयोजक के खिलाफ आईपीसी की धारा 188, 269 और 51 एनडीएम एक्ट में कार्रवाई अमल में लाई गई है।”

जब पढ़ाई ऑनलाइन हो सकती है तो विधानसभा का सत्र क्यों नहीं?

आई.एस. ठाकुर।। हिमाचल प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है कि इस बार विधानसभा का शीतकालीन सत्र नहीं होगा। कारण- कोरोना संकट। जो सरकार कोरोना संकट के बीच जगह-जगह गैरजरूरी शिलान्यास और रैलियां कर सकती है, उसे जनहित के लिए होने वाले विधानसभा सत्र को करवाने में दिक्कत हो रही है।

विधानसभा सत्रों को भले ही कुछ नेताओं ने वॉकआउट करके अपनी फोटो अगले दिन के अखबार में छपवाने का तरीका बना लिया है मगर इसके इतर इस दौरान कई महत्वपूर्ण काम होते हैं। यह सरकार के लिए नए नियम-कानून बनाने और संशोधन करने का ही मौका नहीं होता बल्कि इससे विपक्ष को भी उन बातों और मुद्दों को उठाने का मौका मिलता है, जिन्हें सरकार नजरअंदाज़ कर रही होती है। इसके अलावा विधायक भी अपने इलाके की समस्याएं उठाते हैं।

हिमाचल विधानसभा (File Photo)

मगर इस बार विधानसभा सत्र न होने का मतलब है- कई महीनों का काम प्रभावित होना और महत्वपूर्ण विषयों का छूट जाना। ऐसा तब हो रहा है जब पूरी दुनिया में सारा काम ऑनलाइन हो रहा है। स्कूलों की पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है, सरकारी और कॉर्पोरेट मीटिंग्स ऑनलाइन हो रही हैं और यहां तक कि अदालतों तक में ऑनलाइन सुनवाई हो रही है। फिर भी, हिमाचल प्रदेश सरकार यह इंतजाम नहीं कर पाई कि मात्र 68 विधायकों वाली विधानसभा की कार्यवाही डिजिटली चलाई जा सके।

साल 2014 में जब वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री थे, तब हिमाचल प्रदेश विधानसभा को ‘देश की पहली डिजिटल विधानसभा’ घोषित कर दिया गया था। इसके तहत पूरा काम पेपरलेस होना था। यहां तक कि विधायकों को लैपटॉप दिए गए थे और विधेयकों आदि पर वोटिंग जैसे कामों के लिए टचस्क्रीन के इस्तेमाल का ऑप्शन दिया गया था। तबसे छह साल बीत चुके हैं मगर आज उससे आगे कुछ प्रगति नहीं हुई? अगर पिछली सरकार ने दिखावा किया था तो मौजूदा सरकार ने 2017 के बाद क्या किया?

cm said, it is the time of technology

हर साल किसी न किसी राज्य से नेताओं या अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल हिमाचल प्रदेश की विधानसभा का कामकाज देखने आते हैं कि यहां कैसे सब काम डिजिटली और ऑनलाइन हो रहा है। अब उन्हें बुलाना बंद कर देना चाहिए क्योंकि हिमाचल प्रदेश विधानसभा नाम के लिए ही डिजिटल है। ठीक हाथी के दांतों की तरह। जो व्यवस्था या तकनीक जरूरत के समय काम न आए, उसका फायदा ही क्या है?

ऐसा नहीं है कि इंतज़ाम नहीं किए जा सकते थे। कोरोना संकट को शुरू हुए कई महीने हो चुके हैं। एक साल होने को है। सबको पता था कि जह तक वैक्सीन नहीं मिल जाती या फिर महामारी खत्म नहीं हो जाती, तब तक सभी कामकाज सावधानी से करने होंगे। सबको पता था कि इस बीच विधानसभा का सत्र भी होंगे। तो क्या इसके लिए पहले से तैयारी नहीं की जा सकती थी? विधायकों को लैपटॉप, महंगे स्मार्टफोन और कम्यूनिकेशन पर होने वाला खर्च किस बात के लिए दिया जाता है? उनकी ट्रेनिंग पर इतना खर्च क्यों किया जाता है?

कितना अच्छा होता अगर हिमाचल प्रदेश विधानसभा कोरोनाकाल में ऑनलाइन सत्र आयोजित करने वाली विधानसभा बन जाती। लेकिन हर बार की तरह सरकार इसे लेकर भी उदासीन बनी रही। ऐसा लगता है कि सरकार को आग लगने पर कुआं खोदने की आदत हो गई है। सारे काम आखिरी लम्हे पर करने हैं। यह दिखाता है कि नेताओं और लाखों की सैलरी लेने वाले नौकरशाहों की सोच कैसी है।

(लेखक लंबे समय से हिमाचल प्रदेश के विषयों पर लिख रहे हैं। उनसे kalamkasipahi@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

पतंजलि और डाबर समेत कई ब्रैंड के शहद में हो रही है मिलावट: CSE

ई दिल्ली।। भारत के बड़े ब्रैंड्स पर अपने शहद में मिलावट करने का आरोप लगा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरन्मेंट (CSE) के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि पतंजलि, डाबर और झंडू जैसे ब्रैंड मिलावटी शहद बेच रहे हैं। इनमें चीन में तैयार मॉडिफाइड शुगर भी पाई गई है।

हालांकि, इन आरोपों को कंपनियों ने गलत बताया है। पतंजलि, डाबर और झंडू का कहना है कि वे शहद में मिलावट नहीं करते और भारत के खाद्य नियामक FSSAI की शर्तों का पालन करते हैं।

क्या कहता है CSE
सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण के मुताबिक, उन्होंने इस मामले की पड़ताल तब की जब उत्तर भारत के उत्पादकों ने बीच यह शिकायत उभरी कि शहद की बिक्री में उछाल के बावजूद उन्हें मुनाफा कम हो रहा है। बुधवार को जारी बयान में उन्होंने कहा, “भारत में बिक रहे लगभग सही ब्रैंड्स में शुगर सिरप डाला गया है। कोरोना के काल में यह खतरनाक है क्योंकि वे शहद की बजाय ज्यादा शुगर ले रहे हैं।”

भारत में बिक रहे कई ब्रैंड बेसिक टेस्ट ही क्लियर नहीं कर पाए। सीएई के मुताबिक, एपिस हिमालय ही शुद्धता के बुनियादी टेस्ट पार कर पाया। वहीं, बाद में जब इन्हीं ब्रैंड्स का NMR टेस्ट किया गया तो तीन ही ब्रैंड पास हुए। 13 ब्रैंड्स के एनएमआर टेस्ट जर्मनी में किए गए थे। इनमें सफोला, मार्कफेडसोहना और नेचर्स नेक्टर ही सभी टेस्ट पास कर पाए।

एनएमआर टेस्ट का पूरा नाम न्यूक्लिर मैग्नेटिक रेजोनेंस (Nuclear Magnetic Resonance) टेस्ट होता है। यह मिलावट का पता लगाने की सबसे विश्वसनीय तकनीक है। भारत से बाहर निर्यात किए जाने वाले शहद के लिए एमएनआर टेस्ट करना अनिवार्य है।

कोरोना और नए एडिमशन के समय आईजीएमसी और नेरचौक मेडिकल कॉलेज की वेबसाइट ठप

शिमला।। एक ओर जहां कोरोना काल के बीच आईजीएमसी और नेरचौक मेडिकल जैसे संस्थान कोविड के मरीजों की देखभाल में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी ओर इनकी वेबसाइट्स ठप हो गई हैं। ध्यान दें, ऐसा तब हो रहा है जब इन मेडिकल कॉलेजों में नए ऐडमिशन भी होने हैं।

गुरुवार सुबह 9 बजे, खबर लिखे जाने तक आईजीएसमी शिमला की वेबसाइट igmcshimla.edu.in/ खुल नहीं रही। वहीं, नेरचौक मेडिकल कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट slbsgmcm.in/ पर जाने पर तो अकाउंट सस्पेंड दिखा रहा है। यानी इतने बड़े संस्थान को यह चिंता भी नहीं कि वेबसाइट की होस्टिंग को कब रिन्यू करवाना है।

इसके अलावा, टांडा मेडकिल कॉलेज की वेबसाइट को लोड होने में भी सामान्य से कहीं अधिक समय लग रहा है। यह दिखाता है कि सरकारी संस्थान इस डिजिटल दौर में भी कितनी ढिलाई बरत रहे हैं। सबसे ज्यादा असुविधा यहां नए बैच में दाखिला लेने वाले छात्रों और अभिभावकों को हो रही है जो वेबसाइट के माध्यम से जरूरी सूचनाएं जुटाते हैं।

कोरोना रोकने में जुटे हैं मंत्री, बीजेपी विधायक और पदाधिकारी: जयराम ठाकुर

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि कोरोना संक्रमण के बीच प्रदेश सरकार के मंत्री, विधायक और पार्टी पदाधिकारी कोरोना संक्रमण की चेन को ब्रेक करने में लगे हैं। उन्होंने पार्टी नेताओं से इस दौरान कोरोना संक्रमित लोगों से बात करने एवं उनको मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी जुटाने के लिए आगे आने को कहा।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने यह आरोप भी लगाया कि कांग्रेस नेता सरकार के खिलाफ झूठा प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने पार्टी नेता एवं कार्यकर्ताओं से कांग्रेस के इस झूठे प्रचार को बेनकाब करने के लिए आगे आने का आह्वान किया है।

सीएम ने मंत्रिमंडल बैठक के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप एवं पार्टी नेताओं के साथ वर्चुअल बैठक के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश कोरोना संक्रमण के बीच मानसून सत्र को आयोजित करने वाला देश का पहला राज्य है। इसके विपरीत जहां कुछ राज्यों में मानसून सत्र हुआ ही नहीं, वहीं कई जगह इसे 1 या 2 दिन में समाप्त कर दिया गया।

प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शीतकालीन सत्र को धर्मशाला में आयोजित करने के लिए भी तैयार थी लेकिन सर्द मौसम में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए इसे रद्द करने का निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस समय सरकार का पहला काम प्रत्येक व्यक्ति के बहुमूल्य जीवन को बचाना है।

सीएम ने उम्मीद जताई कि देश और प्रदेश शीघ्र इस महामारी से मुक्त होगा, लेकिन इसके लिए आम आदमी को सरकार की तरफ से जारी हिदायतों का पालन करना जरूरी है। उन्होंने पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं से वर्चुअल बैठक करके आपस में संवाद कायम रखने और लोगों की सेवा में जुटे रहने का आग्रह किया।

कांग्रेस को मुंहतोड़ जवाब दें भाजपा के कार्यकर्ता: सीएम

कांग्रेस को मुंहतोड़ जवाब दें भाजपा के कार्यकर्ता: सीएम

शिमला।। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे कांग्रेस के झूठे दुष्प्रचार का मुंहतोड़ जवाब दें।

सीएम ने कहा कि कोरोना संकट के चलते शीत सत्र को रद्द कर जनता में भी एक संदेश दिया गया है, मगर कांग्रेसी इस बारे में गलत बातें कर रहे हैं।

प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों का पालन न करने और अनलॉक के दौरान लोगों की ओर से बरती गई लापरवाही के कारण कोविड के मामलों में वृद्धि हुई है। विवाह समारोह में लोगों की लापरवाही के कारण कोविड के मामले तेजी से बढ़े हैं।

सीएम ने बताया कि अब सरकार ने विवाह, जन्मदिन, मुंडन आदि जैसे सभी सामाजिक कार्यक्रमों के लिए स्थानीय उपमंडलाधिकारी की अनुमति लेने का नियम बनाया है।

कोरोना से ठीक हो चुके लोग कोविड वॉर्ड में दें सेवाएं: स्वास्थ्य मंत्री

शिमला।। हिमाचल के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सैजल ने कोरोना से ठीक हो चुके लोगों से अपील की है कि वे ‘स्वेच्छा से अस्पताल के आइसोलेशन कोविड वार्ड में सेवाएं दें।’ हेल्थ मिनिस्टर ने कहा कि कोरोना को मात दे चुके लोगों को कोविड वार्ड में आकर कोरोना मरीजों के मरीजों का हौसला बढ़ाना चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सैजल ने ये बातें मीडिया से बातचीत के दौरान थ कही जब वह सोमवार को आईजीएमसी अस्पताल शिमला के दौरे पर थे। उन्होंने कोरोना को मात दे चुके मरीजों से स्वेच्छा से अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में सेवाएं देने की अपील की। मंत्री ने कहा कि ‘इन मरीजों के ठीक होने के बाद इनमें एंटीबॉडी तैयार हो गई है।’

हेल्थ मिनिस्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘इन लोगों से यहां किसी भी तरह का तकनीकी कार्य नहीं करवाया जाएगा। ये लोग केवल यहां दाखिल मरीजों का हौसला बढ़ाएंगे और उनसे बातचीत कर अपना अनुभव साझा करेंगे।’

लोगों को यह सुझाव थोड़ा अटपटा लग रहा है। अमूमन, कोरोना से उबरने वाले लोगों से स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से कहा जा रहा है कि कोरोना से नेगेटिव हो जाने के बाद वे पूरा ध्यान रिकवरी पर दें और बीमारी से स्वास्थ्य को पहुंचे नुकसान की भरपाई भी करें।

साथ ही, हर व्यक्ति के शरीर में बनी एंटीबॉडी (प्रतिरोधक क्षमता वाले प्रतिजीवी) का स्तर अलग होता है। यही वजह है कि कई लोग एक बार संक्रमित होने के बाद दोबारा संक्रमित हो जा रहे हैं। इसलिए, उन्हें फिर से कोविड संक्रमितों के बीच भेजना उनकी जान को खतरे में डालने के बराबर होगा। अब तक के शोध कहते हैं कि ऐंटीबॉडीज पांच महीनों तक प्रभावी रह सकती हैं मगर फिर भी इससे पहले भी कई लोग दोबारा कोरोना से संक्रमित हुए हैं। इसे रीइन्फेक्शन कहा जाता है। रीइनफेक्शन तब हुआ माना जाता है जब कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित होने के बाद जब नेगेटिव हो जाए, उसके 90 दिनों के बाद फिर पॉजिटिव पाया जाए।

हिमाचल में काबू से बाहर हुआ कोरोना, लड़खड़ाए सरकारी इंतजाम

शिमला।। कोरोना के मामले लगातार बढ़ने से हिमाचल में हालात बेकाबू हो गए हैं। कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी के कारण अब प्रदेश के अस्पतालों में बिस्तर कम पड़ने लगे हैं। इस कारण मरीजों को होम आइसोलेट किया जा रहा है। स्थिति गंभीर होने पर ही उन्हें अस्पताल को सूचित करने के लिए कहा जा रहा है। इसके बाद एंबुलेंस से इन्हें अस्पताल लाया जाएगा। कोरोना सेंटरों में भी हालत खराब है, कई जगह मरीज एक कम्बल के सहारे ठिठुर रहे हैं।

शिमला, टांडा, नेरचौक और अन्य मेडिकल कॉलेजों में बढ़ते जा रहे मामलों के कारण प्रदेश सरकार के हाथ भी खड़े होने लगे हैं। अब राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि सूबे के अस्पतालों में कोविड मरीजों के लिए अब स्पेशल वार्ड नहीं मिलेगा, चाहे किसी भी पार्टी का नेता ही क्यों न हो। सभी कोरोना मरीजों को 2 से 4 बिस्तर वाले वार्ड में भर्ती होना होगा। इनके लिए शौचालय भी कॉमन रहेंगे।

अब तक जिला शिमला में मौत का आंकड़ा 150 से पार हो गया है।
कांगड़ा में भी मौत का आंकड़ा 100 पार कर चुका है। प्रदेश के तीन जिलों शिमला, कुल्लू और मंडी में कोरोना ने कहर बरपाया है। शिमला जिले में सबसे ज्यादा एक्टिव मामले 2000 से पार हैं। दूसरे नंबर पर जिला मंडी है। यहां आंकड़ा 1500 पार हो गया है। अब सरकार ने शादियों और अन्य समारोहों में मेहमानों की संख्या 50 कर दी है।

शादियों में लापरवाही से बढ़े केस, अब 50 लोग ही हो पाएंगे शामिल: सीएम

शादियों में लापरवाही से बढ़े केस, अब 50 लोग ही हो पाएंगे शामिल: सीएम

शिमला।। कोरोना महामारी पर नियंत्रण करने के लिए शिमला, मंडी, कुल्लू और कांगड़ा में रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू लगेगा। पहले नाइट कर्फ्यू का समय 8 से सुबह 6 बजे तक था।

सीएम जयराम ठाकुर ने कहा है कि विवाह आदि समारोहों में लोगों की लापरवाही से कोरोना के मामले बढ़े हैं, इसलिए ऐसे समारोहों में अब लोगों की संख्या 200 या 100 नहीं, बल्कि 50 रहेगी।

अब सभी राजनीतिक समारोह वर्चुअली होंगे, जिनमें उपस्थिति नियमानुसार होगी। सीएम ने कहा कि कोरोना मरीजों के अधिक मामलों वाले स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। स्वास्थ्य संस्थानों में शीघ्र परीक्षण और कोरोना मरीजों की ट्रेसिंग सुविधा के लिए पैरा मेडिकल स्टाफ उपलब्ध करवाएंगे।

आसिफ बसरा धर्मशाला में मृत पाए गए, खुदकुशी की आशंका

धर्मशाला।। बॉलीवुड अभिनेता आसिफ बसरा धर्मशाला के मैक्लोडगंज में मृत पाए गए हैं। ऐसी खबरें आ रही हैं कि उन्होंने कथित तौर लर खुदकुशी की है। पुलिस अभी मामले की तफ्तीश कर रही है।

बताया जा रहा है कि पिछले कुछ सालों से वह यहीं रहते थे।

हिमाचली फ़िल्म सांझ में भी कर चुके हैं काम।