वो महिला बोली- अच्छा हुआ जो दरवाजा नहीं खोला, वरना आज बताती कि कौन हूं मैं

  • अजय सिंह

मेरा नाम अजय है। हिमाचल के ऊना जिले से हूं और इन दिनों MBBS कर रहा हूं। मैं अपनी कहानी शेयर करना चाहता हूं। बात उन दिनों की है, जब मैं +2 में था। AIPMT की तैयारी में पूरी-पूरी रात पढ़ा करता था। मैं हमेशा पूरी रात पढ़ता और सुबह 5 बजे मम्मी को उठाकर सो जाता था। एक बार मैं रात को पढ़ रहा था। रात के करीब 1 बजे होंगे। मुझे ऐसा लगा कि कोई मेरे कमरे के दरवाजे के बाहर खड़ा है। मेरा रूम घर के बाकी कमरों से अलग है। मुझे ऐसा अहसास हुआ कि मुझे कोई देख रहा है। मैंने सोचा कि ऐसे ही कुछ लगा होगा मुझे। फिर थोड़ी देर में मैंने सोचा कि कि बाहर घूम लूं, क्योंकि कमरे में गर्मी लग रही थी। मैंने दरवाजा खोला और 10 मिनट तक बाहर घूमा। फिर मैं कमरे में आ गया। दरवाजा थोड़ा खुला छोड़ दिया ताकि हवा आती रहे।

मैंने पढ़ना शुरू कर दिया। मगर थोड़ी देर बाद फिर मुझे लगा कि कोई मेरे स्टडी टेबल के पीछे खड़ा है। मेरे पूरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गई। तब मेरा शरीर पूरी तरह कांप गया जब मुझे लगा कि किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा। मैं इतना डर गया था कि कुछ पता नहीं चल रहा था कि क्या करूं। फिर भी मैं चुपचाप उठा और उस कमरे से तुरंत निकलकर भाई के पास जाकर सो गया। मुझे लगा कि शायद कोई मेरा वहम हो।

अगले दिन फिर 1 या 2 बजे ऐसा ही हुआ। मैंने घर में किसी को ये बात नहीं बताई थी। मगर अगले दिन मैंने अपने टेबल पर भगवान की फोटो रखी थी, फिर भी सेम हुआ। मैं किसी तरह 4 बजे तक जगा और फिर सोचा कि सो जाता हूं। मैंने सोने की कोशिश की, मगर नींद नहीं आ रही थी। 5 बज गए। मैंने कमरे से बाहर जाकर मम्मी को उठाया और चाय बनाने को कहा। इसके बाद मैं फिर अपने कमरे में आकर बेड पर लेट गया। इतने में कमरे के बाहर किसी महिला की आवाज सुनाई दी। मुझे लगा कि पड़ोस वाली आंटी है।

मुझे लगा कि वो दरवाज खटखटाकर कह रही है कि दरवाजा खोलो। मैं थक चुका था रात भर पढ़कर। मैंने मम्मी को आवाज लगाई कि देखो आंटी आवाज लगा रही है। मैंने दो-तीन बार मम्मी को लेटे-लेटे ही आवाज लगाई। दरवाजा इतनी जोर से पीट रही थी मानो तोड़ ही देगी। मैं बहुत डर गया कि ये क्या हो रहा है। मैं उठकर बैठा और उधर से मम्मी की आवाज सुनाई दी कि कोई आंटी आवाज नहीं लगा रही है। देखा कि वाकई कोई नहीं था।

मैं फिर सोने लगा। तभी ऐसा अहसास हुआ कि किसी ने मुझे पकड़ लिया है। ऐसा लगा कि किसी औरत ने मेरे कान में हल्के से कहा कि आज तेरी किस्मत अच्छी थी जो तूने दरवाजा नहीं खोला नहीं तो आज तेरे को बताती मैं कौन हूं।

प्रतीकात्मक तस्वीर

I don’t know what was that, मगर यह मेरा एक्सपीरियंस है। अभी भी कई बार सोचता हूं तो डर लगता है।

अजय ने इतना ही मेसेज भेजा था। मगर हमने उनसे सवाल पूछा- उसके बाद क्या हुआ था। जब आपको कान में किसी ने कुछ कहा, आधी नीदं में थे? और घरवालों को बताया तो क्या कहा उनने? फिर दोबारा ऐसी घटना हुई या नहीं? आप वहीं पढ़ाई करते थे उस रूम में या नहीं?

इस पर अजय ने बताया- मैं नींद में नहीं था, बस थोड़ी देर आंखें बंद की थीं। मम्मी जी को मैंने पूरा कुछ बताया। फिर मम्मी जी ने कहा कि मैं रात को न पढ़ा करूं। मैंने 4-5 दिन तक रात को नहीं पढ़ा। मैंने 4-5 दिन रात को पढ़ाई नहीं की। जब सब नॉर्मल हुआ तो मैंने फिर से डेली की तरह पढ़ना शुरू कर दिया। कुछ दिनों बाद मम्मी जी को भी ऐसा ही हुआ, जो मेरे साथ हुआ था। पर मम्मी जी ने मुझे नहीं बताया। मेरे पापा ड्यूटी पर होते हैं, इसलिए मम्मी ने सोचा कि किसी को ये बात न बताएं। पर कुछ दिन बात ये सब कुछ ज्यादा हो गया।

एक बार मम्मी जी बेड पर सो रहे थे और उन्हें ऐसा लगा कि किसी ने उन्हें धक्का देकर बेड से गिरा दिया। फिर कुछ दिन बाद लग कि कोई मेरा गला दबा रहा है। फिर उस रात मैं उठा और ऐसा लग कि कोई रूम से बाहर जा रह है। दिखा कुछ नहीं मगर। फिर ये सब मैंने दादा जी को बताया। उन्होंने किसी पर्सन को बुलाया घर, जिसने थोड़ी पूजा सी की। फिर उसके बाद नॉर्मल सा हो गया। फिर लास्ट टाइम मुझे ड्रीम में एक औरत दिखी जो रो रही थी। मुझे ऐसा लग कि मैं उससे वाकई पूछ रहा हूं कि क्या हुआ। वो बोली कि तुमने मुझे अपने घर से निकाल दिया। मैंने उससे पूछा कि हम आपको जानते भी नहीं फिर घर से कैसे निकाला। फिर उसने कहा कि तुम अभी छोटे हो, तुम्हें कुछ नहीं पता।

प्रतीकात्मक तस्वीर

बस इतना हुआ था।

इन हिमाचल: आपका नाम डाल दें स्टोरी में हम?

अजय: As you wish sir. मगर मैं नहीं चाहता कि यह हाइलाइट हो। मेरा प्रफेशन भी इसकी इजाजत नहीं देता।

इन हिमाचल: अब आप मेडिकल स्टूडेंट हो, क्या आपने कभी मनोवैज्ञानिक ऐंगल से सोचने की कोशिश की कि क्या वजह हो सकती है इसकी? सी सीनियर से डिस्कशन किया साइंटिफिकली?

अजय: हां, मैं थर्ड इयर में हूं। मैंने सीनियर्स से बात की थी । उनके पास कोई जवाब नहीं है। अगर यह किसी तरह की मेंटल प्रॉब्लम होती तो मुझे ही होती। और मेरा इलाज भी हो रहा होता अस्पताल में। मगर मैं आत्माओं में यकीन करता हूं।

अजय: यह मेरा नाम मत डालना आप।

इन हिमाचल: ओके। (इसीलिए हमने नाम बदल दिया है)

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(हमें यह कहानी फेसबुक पर पेज पर भेजी गई। हमने लेखक से कुछ बातें भी कीं, जिन्हें देवनागरी में बदलकर लिखा है। लेखक का नाम बदल दिया गया है)

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