पिता बीमारी से लाचार, मां बेबस; ‘भूखे सो रहे थे बच्चे’

इन हिमाचल डेस्क।। क्या हमारा समाज इतना संवेदनहीन हो गया है कि किसी मजबूर परिवार के बच्चे तीन दिन तक भूखे रहें और हमें फर्क ही न पड़े? क्या हिमाचल में हम इतने उदासीन हो गए हैं कि मजबूर लोगों की मदद करने के बजाय आंखें मूंदे बैठे रहें? यह प्रश्न उठ रहा है कि कांगड़ा जिले के एक परिवार की हालत सामने आने के बाद।

 

कांगड़ा के संजय शर्मा ने ज्वाली के इस परिवार की हालत बयां करती एक फेसबुक पोस्ट डाली है। इस पोस्ट के मुताबिक परिवार का मुखिया दो बार हार्ट अटैक को सर्वाइव कर गया, मगर अब कुछ करने की स्थिति में नहीं है। पत्नी उसकी देखभाल करे या मेहनत-मजदूरी करे? इस उहापोह में परिवार की आमदी ठप हो गई है और बच्चों को खाना तक नसीब नहीं हो रहा।

 

‘बीमारी की हालत में मजदूरी करने चले गए’
संजय के मुताबिक मूल राज, गांव सिरमाणी, डाकघर नडोली, तहसील ज्वाली कांगड़ा दो बार हार्ट अटैक की वजह से काफी समय से बिस्तर पर पड़े हैं। वह मेहनत मजदूरी करके घर चलाया करते थे, मगर अब वह ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। मजबूरन दो बच्चों और पत्नी के भूखों मरने की नौबत आ गई है। परिवार की हालत देख वह चुपके से कहीं मजदूरी करने चले गए, जहां उनकी हालत और खराब हो गई।


‘बच्चों ने तीन दिन से कुछ नहीं खाया’
मूलराज की पत्नी सीमा ने उन्हें बताया कि बच्चों ने तीन दिन से कुछ खाया नहीं है। संजय बताते हैं कि परिवार को पंचायत अंत्योदय में डाला है, मगर इससे भी कुछ खास मदद नहीं मिल रही। सरकार को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

 

‘कई हिस्सों में बांटकर खा रहे दवाई’
गरीबी के हालात ये हैं कि डॉक्टर ने मूल राज को जो दवाइयां खाने के लिए कही हैं, उन्हें खरीदने का पैसा भी उनके पास नहीं। मजबूरी में वह एक गोली को कई हिस्सों में बांटकर खा रहे हैं ताकि वह ज्यादा दिन तक चल सके। शायद उन्हें अहसास नहीं है कि दवाई इस तरह से खाएंगे तो उसका कुछ असर नहीं होगा।

 

पोस्ट के आखिर में बैंक खाते की जानकारी दी गई है। मगर पाठकों से अनुरोध है कि पैसे ट्रांसफर करने से पहले एक बार चेक कर लें कि इसकी जानकारी सही है या नहीं। यह काम अपनी ज़िम्मेदारी पर करें। पोस्ट पर जाने के लिए यहां क्लिक करें।

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