तीसरे वर्ष में प्रवेश करने पर ‘In Himachal’ के संपादकीय रुझान की घोषणा

नमस्कार, 
In Himachal अपनी स्थापना के तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इतने कम समय में In Himachal हिमाचल प्रदेश का सबसे लोकप्रिय ‘New Media’ या ‘डिजिटल मीडिया’ प्लैटफॉर्म बन चुका है। हम इसके लिए अपने पाठकों का आभार व्यक्त करते हैं। हमें खुशी है कि हम हिमाचल प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों के लोगों को भी पसंद हैं और वे अक्सर हमारे पोर्टल और फेसबुक पेज पर आते हैं। एक बार फिर धन्यवाद। जैसा कि आप जानते हैं, ‘इन हिमाचल’ मैगजीन आधारित पोर्टल है और इसीलिए हम क्वॉन्टिटी के बजाय क्वॉलिटी पर ध्यान देते हैं। हम ध्यान रखते हैं कि अगर एक आर्टिकल, न्यूज या फीचर भी शेयर किया जाए तो वह आपके काम का होना चाहिए। तीसरे वर्ष में प्रवेश करने के अवसर पर हमने सोचा कि पाठकों के प्रति जवाबदेह रहने और पारदर्शिता बनाए रखने की पहल के तौर पर क्यों न पाठकों से उन सवालों और आरोपों पर बात कर लें, जो अक्सर हमारे पास आते हैं। जानें, क्या है हमारी नीति:

‘In Himachal’ सरकार के पीछे क्यों पड़ा होता है?
अक्सर लोग सवाल उठाते हैं कि ‘इन हिमाचल’ क्यों प्रदेश सरकार के पीछे पड़ा रहता है। सवाल जायज है, क्योंकि हम हिमाचल प्रदेश से संबंधित पोर्टल चल रहा हैं और ज्यादातर खबरें और लेख हिमाचल से संबंधित होते हैं। इसलिए अक्सर हमारी खबरें सरकार की नीतियों की आलोचनाओं पर आधारित होती हैं और लेखों में सरकार के गलत फैसलों की आलोचना के साथ सुझाव दिए जाते हैं। तो क्या “इन हिमाचल” कांग्रेस विरोधी है? इस सवाल का जवाब है- नहीं। इन हिमाचल राजनीतिक रूप से तटस्थ है और खबरें लिखते वक्त किसी तरह के झूठ का सहारा नहीं लिया जाता। ऐसा करना हमारे लिए इसलिए भी जरूरी है क्योंकि जब आप सरकारों की आलोचना करते हैं, सरकारों से टकराते हैं, आपका तथ्यात्मक रूप से सही होना जरूरी है वरना सरकार कई तरह का दबाव डालकर आपको कुचल सकती है। इस तरह की स्थिति पैदा न हो, इसलिए हम हमेशा तथ्यों को क्रॉस चेक करने के बाद ही पब्लिश करते हैं। साथ ही अगर किसी अन्य स्रोत से जानकारी जुटाई गई तो उस स्रोत का जिक्र भी करते है। उदाहरण के लिए कई अहम जानकारियां हमें प्रदेश के और राष्ट्रीय अखबारों आदि से मिलती है। उस सूचना को अपने पोर्टल पर इस्तेमाल करते वक्त हम क्रेडिट देते हैं। हम जिक्र करते हैं कि सूचना का स्रोत कौन का समाचार पत्र या पोर्टल है। यह बहुत जिम्मेदारी भरा कदम है क्योंकि सूचना के लिए हम नहीं, बल्कि वही स्रोत उत्तरदायी है। साथ ही उस स्रोत को श्रेय देना जरूरी है कि क्योंकि पब्लिक डोमेन में आई सूचनाओं के पीछे उस स्रोत की मेहनत लगी होती है।

क्या है In Himachal का वैचारिक रुझान?
अब रही बात वैचारिक रुझान की, हम Pro Himachal और Pro People हैं। हमारी प्राथमिकता हिमाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश वासियों के हितों की रक्षा करना, उनके मुद्दे उठाना और उनके बीच जागरूकता लाना है। हमारा मानना है कि प्रदेश की दशा और दिशा को राजनीति तय करती है और खासकर सत्ता की इसमें अहम भूमिका होती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमारा फोकस सरकार की नीतियों और अन्य कदमों पर रहता है। चूंकि प्रदेश में अभी कांग्रेस की सरकार है और उसके मुखिया वीरभद्र सिंह हैं, इसलिए स्वाभाविक तौर पर सरकार पर उठाने जाने वाले प्रश्न कांग्रेस सरकार और उसके मुखिया पर उठेंगे। इसमें हम किसी तरह की शर्म या झिझक नहीं समझते क्योंकि हमारे प्रश्नों के पीछे लॉजिक, तर्क और तथ्य होते हैं। हम कोई राजनीतिक पार्टी नहीं कि नफे-नुकसान के हिसाब से बयान दे या खबरें छापे। कांग्रेस की जगह अगर कोई और सरकार होती या भविष्य में किसी और पार्टी की सरकार बनती है तब भी ‘इन हिमाचल’ अपने सिद्धांतों पर कायम रहेगा और उस सरकार की आलोचना भी करेगा और उसे सुझाव भी देगा। हम सिर्फ आलोचना करने या लेग पुलिंग में यकीन नहीं रखते, बल्कि समस्याओं को सुलझाने के लिए प्रयास करने में विश्वास करते हैं। इसी दिशा में हम अब तक विभिन्न विषयों पर न जाने कितने ही लेखकों के आर्टिकल ला चुके हैं और आगे भी लाते रहेंगे। साथ ही आप असंख्य ऐसी खबरें और आर्टिकल पाएंगे जिनमें विपक्ष यानी बीजेपी के गलत कदमों की भी आलोचना हुई है।

हिमाचल प्रदेश के अखबारों पर आप रोज पढ़ते होंगे कि कि बीजेपी ने किया वॉकआउट। मगर “In Himachal” पहला ऐसा मास मीडिया है जिसने बीजेपी की इस रणनीति की धज्जियां उड़ाई और सवाल उठाए कि जनता की समस्याओं को उठाने के बजाय मीडिया के सामने वॉकआउट करके फोटो खिंचवाने का क्या लॉजिक है। हमने ही सवाल उठाए कि क्यों बीजेपी और कांग्रेस की राजनीति नूरा कुश्ती बन गई है। सबको लगता है कि अगली बारी हमारी सरकार ही तो आनी है, इसलिए विपक्ष में रहकर निष्क्रिय से हो जाते हैं। यह सिलसिला आज से नहीं, बल्कि पिछले कई सालों से चल रहा है। ‘इन हिमाचल’ पर न सिर्फ मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर लगे आरोपों पर तथ्यों पर आधारित आर्टिकल प्रकाशित हुए बल्कि एचपीसीए प्रकरण पर अनुराग ठाकुर वगैरह को लेकर भी विस्तृत रिपोर्ट्स पेश कीं। अनुपात में बीजेपी से जुड़ी खबरें कम हो सकती हैं क्योंकि स्वाभाविक है कि सत्ता में कांग्रेस है, इसलिए उसकी खबरें ज्यादा होंगी। बाकी यह तो पाठकों की प्रकृति ही है कि जब कोई उनकी विचारधारा के खिलाफ लिखता है तो उसे वह गलत लगने लगता है। उसकी विचारधारा के अनुरूप लिखा जाए तो उसे सब बढ़िया लगता है। इसलिए बीजेपी और कांग्रेस समर्थक वक्त-वक्त पर हमारे ऊपर आरोप लगाते रहे हैं और पूछते हैं- कितने पैसे मिले हैं? एक पोस्ट पर कोई पूछता है कि बीजेपी से कितने पैसे मिले तो अगली पोस्ट पर कोई पूछता है कांग्रेस के हाथों कितने में बिके।  हमें इन कॉमेंट्स से यह अहसास होता है कि हम सही दिशा में जा रहे हैं। साथ ही कुछ लोग, जो नए-नए हमसे जुड़ते हैं और सिर्फ फेसबुक पेज पर हमें फॉलो करते हैं, उन्हें नहीं पता कि भूतकाल में हम किन-किन विषयों पर लिख चुके हैं और किस-किस पर लिख चुके हैं। इसलिए बेहतर होगा कि किसी को हमारे दावों पर संदेह तो वह वेबसाइट पर आए और सर्च बार में उस टॉपिक को सर्च करे, जिसे लेकर उसे संदेह हो।

धमकियां देने या गालियां देने से समस्याएं नहीं सुलझती
अगर हम अस्पतालों की खस्ताहाली का जिक्र करते हैं तो वह जनता से जुड़ा मुद्दा है। सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं को समझना चाहिए कि बीमारी और हादसे पार्टी देखकर नहीं आते। कल को आपको ही अस्पताल में जाना पड़ सकता है। इसलिए हमें कोसने के बजाय बेहतर होगा कि आप अपनी सत्ताधारी पार्टी के नेताओं से बात करें और समस्या को ठीक करने में जुटें। हमें धमकियां देने या गालियां देने से समस्या हल तो होगी नहीं। बेहतर होगा कि अपनी कमियां दूर की जाएं। अगर ‘इन हिमाचल’ प्रश्न उठा रहा है कि राजनेताओं को इलेक्शन आते ही क्यों होश आता है कि फ्लां विभाग में इतने पद खाली हैं और इलेक्शन के करीब आने पर ही भर्तियां क्यों निकाली जाती हैं तो आपको भी सोचना चाहिए। विचार करना चाहिए कि क्यों इलेक्शन आते ही सोए हुए नेता लोक लुभावन वादे करते हैं। सोचना चाहिए कि कॉन्ट्रैक्ट पीरियड घटाने या आउटसोर्स्ड कर्मचारियों पर पॉलिसी बनाने का विचार पहले क्यों नहीं आया। देखने को मिलता है कि हिमाचल प्रदेश के राजनेता आपको आपके हक से वंचित रखते हैं, उसके लिए तरसाते हैं और फिर आपको देने के बाद ऐसे क्रेडिट लेते हैं मानो अपनी जेब से कुछ दिया हो। ‘इन हिमाचल’ ऐसी खराब राजनीति के खिलाफ आवाज उठाता रहेगा।

‘In Himachal’ किसी से विज्ञापन तक नहीं लेता
‘इन हिमाचल’ का सरकार की आलोचना वाला कॉन्टेंट प्रदेशवासियों को इसलिए भी अटपटा लग सकता है क्योंकि उन्हें हिमाचल के ज्यादातर अखबारों और टीवी चैनल्स पर सरकार के खिलाफ, खासकर सीधे मुख्यमंत्री के खिलाफ लिखा कुछ नहीं मिलता। यह अभी की बात नहीं, बीजेपी की सरकार होती है तब भी होता है। प्रदेश कुछ अखबार इस मामले में अच्छा काम कर रहे हैं मगर युवा पीढ़ी अखबार कहां पढ़ती है? बाकी मीडिया हाउसेज शायद आर्थिक विवशता के चलते गलत नीतियों की आलोचना नहीं कर पाते। हिमाचल प्रदेश कम आबादी वाला राज्य है और यहां व्यापारिक दृष्टि से कोई ऐसा स्रोत नहीं है अखबारों के लिए, जो विज्ञापनों से अखबारों को आत्मनिर्भर बना सके। अखबारों और टीवी चैनलों के सेटअप बड़े होते हैं और इनमें बहुत से कर्मचारी काम करते हैं। उनकी सैलरी के अलावा अन्य खर्चों को विज्ञापन के बिना निकाल पाना मुश्किल है। इसलिए अखबार आदि सरकारी विज्ञापनों पर निर्भर हो जाते हैं। यह उनकी विवशता है कि वे चाहकर भी सरकार के खिलाफ खुलकर कुछ नहीं लिख पाते। इसीलिए लगता होगा कि हिमाचल में सब अच्छा है। मगर “इन हिमाचल” के साथ ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। ‘इन हिमाचल’ का न सरकार से कोई लिंक है न किसी कॉर्पोरेट घराने से। विज्ञापनों के लिए इन हिमाचल ‘डिजिटल ऐड्स’ इस्तेमाल करता है जिनका सीधे किसी से कोई संबंध नहीं। हमारी पूरी टीम इसे व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि हिमाचल के उत्थान के लिए चलाती है। इसलिए हमारा खर्च भी कम है और उसकी पूर्ति के लिए किसी थर्ड पार्टी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। यही आर्थिक स्वतंत्रता हमें वैचारिक रूप से भी स्वतंत्र बनाती है। हमारी किसी के प्रति कोई प्रतिबद्धता नहीं है, सिवाय अपने प्रदेश के, जिसे हम सबसे आगे देखना चाहते हैं।

मनोरंजक कॉन्टेंट को लेकर यह है In Himachal की पॉलिसी
राजनीति से हटें तो बात करते हैं उस कॉन्टेंट की, जो आपको मनोरंजन देता है। हम अक्सर हिमाचली गाने आदि शेयर करते हैं। आप हमारे द्वारा शेयर किए गए कॉन्टेंट को इसलिए देखते हैं क्योंकि आपको यकीन होता है कि हम जो शेयर करते हैं, अच्छा शेयर करते हैं। आपका यही विश्वास हमें क्वॉलिटी पर कंट्रोल रखने के लिए प्रेरित देता है। हिमाचल प्रदेश टैलंट से भरा है। रोज बहुत से कलाकार हमें अपने या अपने परिचितों के गाने भेजते हैं। हमारे लिए संभव नहीं कि सबको पब्लिश करें। हम दरअसल लोगों को प्रमोट करने के लिए या गानों को प्रमोट करने के लिए कुछ अपने पेज पर शेयर नहीं करते। जो चीज़ हमें पसंद आती है, हमें लगता है कि जनता को भी पसंद आएगी। उसी को शेयर किया जाता है। 80 फीसदी बार हम सही होते हैं और 20 पर्सेंट मौकों पर हम गलत भी होते हैं। मगर ऐक्युरेसी ज्यादा होने की वजह से हम कठिन फैसले लेते हैं। हम किसी का कॉन्टेंट शेयर नहीं करते तो वह गुस्सा भी होता है और नाराज भी। कुछ लोग पैसे भी ऑफर करते हैं मगर उन्हें समझना चाहिए कि मामला यहां पैसों का है ही नहीं। साथ ही हमारे इनकार का मतलब यह नहीं हो सकता कि उनकी बनाई कृति में कोई गलती है। बस, यह समझें कि हम उसे उचित नहीं समझते। इसलिए कृपया आप अन्य पोर्टल्स की मदद ले सकते हैं, हमने कोई नाराजगी न रखें। अगर हमें कुछ अच्छा लगेगा तो हम बिना आपके कहे ही उसे खुद पब्लिश कर देंगे। हम ऐसा कई बार कर चुके हैं।

आखिर में…
हम पूरी तरह धर्म निरपेक्ष हैं और प्रगतिवादी हैं। अगर हमारे पाठकों को धर्मनिरपेक्षता यानी सेक्युलरिज़म से दिक्कत हो तो हम कुछ नहीं कर सकते क्योंकि हम धर्म, जाति, वर्ग, रंग, क्षेत्र आदि के आधार पर पक्षपात और भेदभाव नहीं करते। और हम हमेशा ही तरह ही बेबाक रहेंगे, क्योंकि हम निजी लाभ के लिए काम नहीं करते। अगर किसी को ‘In Himachal’ के स्टैंड से आपत्ति हो तो वह तुरंत हमें अनफॉलो कर सकता है, हमें कोई आपत्ति नहीं होगी। बाकी हम आलोचनाओं का स्वागत करते हैं, जहां गलत होंगे वहां गलती मानेंगे और सुधार की कोशिश करेंगे। हम ऐसा करते भी आए हैं। आप पाठकों का प्यार और विश्वास ही हमें ईमानदार बनाए रखता है। क्योंकि हम जानते हैं कि जहां हमने कुछ गलत किया, हमारे ऊपर से भरोसा उठ जाएगा। और जो मास मीडिया भरोसा खो दे, उसका महत्व शून्य हो जाता है। पोर्टल पर महीने में लाखों व्यूज़ और फेसबुक पेज पर 1 लाख से ज्यादा लाइक्स से हमारे ऊपर जिम्मेदारी बनती है कि आपका भरोसा बनाए रखें। ‘इन हिमाचल’ एक आंदोलन है हिमाचल प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ बनाने का और जनता के सहयोग से यह आगे भी जारी रहेगा।

शुभकामनाओं सहित।
टीम इन हिमाचल
[email protected]

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