ज्वालामुखी में प्राकृतिक ईंधन ढूंढने में जुटी ONGC की टीम

कांगड़ा।। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की ज्वालामुखी का मंदिर पूरी दुनिया में हिंदुओं के बीच प्रसिद्ध है, जहां पर अपने आप जलती ज्योति लोगों को हैरान कर देती है। मान्यता है कि मां ज्वाला जी सभी की मुरादें पूरी करती हैं और सुख समृद्धि देती हैं। मगर वह मुराद अब तक पूरी नहीं हो पाई कि जिस प्राकृतिक ईंधन से ये ज्योतियां अनवरत जलती हैं, वही प्राकृतिक ईंधन देश के ऊर्जा संकट को दूर करने और हिमाचल प्रदेश के विकास में रफ्तार देने में इस्तेमाल हो।

दरअसल पहले दो बार वैज्ञानिक यहां पर जांच कर चुके हैं कि ईंधन का स्रोत ढूंढा जाए। माना जाता है कि यहां प्राकृतिक गैस बड़ी मात्रा में मौजूद है, मगर वह कहां है, यह पता नहीं चल पा रहा। साल 1962 से लेकर आज तक यहां दो बार अड्डा जमाकर इस स्रोत को ढूंढने की कोशिश की गई थी, मगर कामयाबी नहीं मिल पाई। अब तीसरी बार कोशिश की जा रही है और ओएनजीसी ने डेरा जमाया है

मशीनों के ज़रिए पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि तेल या गैस के भंडार आखिरकार है कहां। दरअसल प्राकृतिक गैस अक्सर वहीं होती है, जहां पर खनिज तेल होता है। ऐसी कई थियरीज़ भी दी जा चुकी हैं कि जब एक अलग भूखंड (इंडियन प्लेट) आकर एशिया (यूरेज़ियन प्लेट ) से टकराया और हिमालय का निर्माण हुआ, उस दौरान वनस्पति आदि बड़ी संख्या में दब गई जो भारी दबाव के कारण कालांतर में खनिज ईंधन में तब्दील हो गई है। उसी को ढूंढने की कोशिश की जा रही है।

जानकार मानते हैं कि ऊर्जा स्रोत का सही पता तभी चल सकता है जब मंदिर से ही जांच शुरू की जाए या इसके आसपास से तलाश की जाए, मगर धार्मिक आस्था से मामला जुड़े होने के कारण इस दिशा में अब तक कोई भी कदम उठाने से बचा जाता रहा है। दरअसल ज्वालामुखी मंदिर बहुत प्राचीन समय से लोगों की आस्था का केंद्र है।

अगर ज्वालामुखी में कोई प्राकृतिक भंडार मिल जाता है तो भारत की निर्भरता खाड़ी देशों पर खत्म हो जाएगी और देश का ऊर्जा संकट तो कम होगा ही, वह निर्यात से अपनी इकॉनमी भी बूस्ट कर सकता है।

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