हिमाचल से किया वह वादा, जिसे नरेंद्र मोदी पूरा नहीं कर पाए

इन हिमाचल डेस्क।। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस समय 2014 लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार कर रहे थे, उन्होंने हिमाचल प्रदेश में की गई रैलियों में केंद्र सरकार को कई बातों के लिए कोसा था और हिमाचल की अनदेखी करने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि मां-बेटे की सरकार (केंद्र की यूपीए सरकार) और पति-पत्नी की सरकार (हिमाचल में वीरभद्र सिंह की सरकार) के कारण हिमाचल पिछड़ गया है।

उस समय नरेंद्र मोदी ने कई उदाहरण दिए थे कि कैसे वह हिमाचल को लेकर क्या सोचते हैं और अगर भारतीय जनता पार्टी को मौका दिया गया तो वह क्या-क्या कर दिखाएंगे। वैसे तो इस तरह के वादों में से अधिकतर वादे वह चार साल पूरे हो जाने के बाद भी पूरे नहीं कर पाए हैं, मगर एक प्रमुख वादा आए दिन चर्चा में आता रहता है। वह है हिमाचल प्रदेश में हादसों को टालने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रेल नेटवर्क को बढ़ावा देना।

17 फरवरी 2014 को सुजानपुर में प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने कहा था- “भाइयो-बहनो, दुनिया के हर देश में पहाड़ों में टूरिजम को विकसित करने के लिए उन देशों ने इस बात को प्राथमिकता दी है कि रेल कनेक्टिविटी बनाई जाए। टूरिजम को डेवलेप करना है औक पहाड़ी इलाके में डेवेलप करना है तो सारी दुनिया ने इस मॉडल को स्वीकार किया है।

एक हम ही अकेले ऐसे हैं जो इस प्रकार का मजबूत नेटवर्क नहीं बनाते, उसके कारण उत्तराखंड जैसे हादसे होते हैं। उसी कारण आए दिन हमारे हिमाचल में बसें गिर जाना, 25-30 लोगों का मर जाना आए दिन होता है। हिमाचल सरकार का ज्यादातर काम तो इसी में चला जाता है। इतना छोटा सा राज्य, मगर इसका ज्यादातर समय मरने वालों की सेवा में चला जाता है, यह मैंने खुद अपनी आंखों से देखा है।

क्या भाइयो-बहनों, एक अच्छा रेल नेटवर्क हिमाचल को मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए? उसके लिए प्रयास होने चाहिए कि नहीं होने चाहिए? उसको प्रायोरिटी देनी चाहिए कि नहीं देनी चाहिए?”

भाषण नीचे देखें:

बहरहाल, हिमाचल प्रदेश में रेल नेटवर्क की हकीकत यह है कि अभी तक बिलासपुर-मनाली-लेह लाइन के सर्वे ही हुए हैं। अप्रैल 2017 में सरकार ने कहा था कि फाइनल लोकेशन सर्वे (एफएसएल) 2020 तक पूरा होगा। चार साल बीत जाने के बावजूद मंडी और कांगड़ा के सांसद पठानकोर-जोगिंदर नगर रेलवे ट्रैक को ब्रॉडगेज करने के दावे करते रहे हैं मगर इस दिशा में असल में क्या हुआ है, कोई साफ नहीं बता पा रहा।

यानी रेलवे का वादा सिर्फ वादा ही साबित हुआ है। बिलासपुर-मनाली-लेह लाइन सामरिक महत्व की रेल लाइन होगी, मगर उसके लिए भी कछुआ चाल से काम हो रहा है। फिर नरेंद्र मोदी ने प्रचार के दौरान पर्यटन को विकसित करने के लिए और हादसों से लोगों को बचाने के लिए जिस नेटवर्क का वादा किया था, वह अधूरा है। नेटवर्क यानी आपस में कई जगहों को जोड़ने वाली लाइनें। प्रदेश के अंदर नेटवर्क स्थापित करने दिशा में कोई भी सर्वे नहीं हुआ है, यहां तक कि इसकी तो कोई बात ही नहीं कर रहा।

अभी तो प्रदेश के कुछ हिस्सों को बाकी देश के नेटवर्क से जोड़ने की बात की जा रही है। चलिए, अगर रेलवे नेटवर्क बनाना आसान नहीं है तो हिमाचल के लिए सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए ही अच्छा खासा बजट आना चाहिए और तीव्र गति से काम होना चाहिए। लोकतंत्र में सरकारें जब पांच साल के लिए चुनी जाती हैं तो उन्हें बेशक लंबी योजना बनानी चाहिए मगर पांच साल के अंदर ही काम करके दिखाना होता है या काम की शुरुआत ही करनी होगी। मगर अफसोस, करोड़ों रुपये के प्रॉजेक्ट्स का एलान भले ही हिमाचल के लिए केंद्र से हुआ हो, जमीन पर हालात बेहतर नहीं दिखते।

प्रधानमंत्री ने और भी वादे हिमाचल प्रदेश की चार लोकसभा सीटों पर प्रचार के दौरान किए थे, जो अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं। चुनाव के दौरान हर एक वादे का रिऐलिटी चेक करके बताया जाएगा कि ‘हिमाचल के लोगों का मुझपर बड़ा उपकार है है’ कहने वाले नरेंद्र मोदी इस उपकार को चुका पाए हैं या नहीं।

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