होशियार मामले की सीबीआई जांच क्यों नहीं चाहती थी सरकार?

मंडी।। वन रक्षक होशियार सिंह की संदिग्ध हालात में मौत पर सीबीआई के एफआईआर दर्ज करने के बाद एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ रहा है। जिस दौरान वनरक्षक होशियार सिंह का शव संदिग्ध हालात में पाया गया था, पुलिस बार-बार जांच टीम या जांच अधिकारी बदल रही थी। मामले को हत्या से आत्महत्या में तब्दील करने को लेकर भी जनता अंसतुष्ट थी और सीबीआई जांच की मांग कर रही थी। मगर सरकार ने ऐसा नहीं किया और स्टेट सीआईडी पर ही भरोसा जताया। बाद में हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया और राज्य पुलिस की जांच से असंतुष्ट होने के बाद सीबीआई को मामला सौंप दिया। अब इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि सरकार क्यों सीबीआई जांच नहीं चाहती थी।

 

दरअसल कोर्ट में गृह सचिव की ओर से दिए गए 170 पन्नों के ऐफिडेविट से पता चला है कि कैबिनेट नहीं चाहती थी केस सीबीआई के हवाले किया जाए। इसे लेकर जागरण की रिपोर्ट कहती है- ‘होशियार हत्या मामले में सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शपथपत्र में खुलासा हुआ है कि कैबिनेट नहीं चाहती थी कि मामले की सीबीआई जांच हो। प्रदेश सरकार को सर्वोच्च जांच एजेंसी के बजाय स्टेट सीआईडी पर ज्यादा भरोसा रहा, लेकिन सरकार की नीयत और जांच एजेंसी भी सवालों के घेरे में आ गई है।’

 

पुलिस की जांच पर पहले से उठे थे सवाल
डीजीपी ने कोर्ट में सौंपे 168 पन्नों के शपथपत्र में कहा था कि होशियार मामले की जांच पूरी हो चुकी है और जल्द ही ट्रायल कोर्ट में अंतिम जांच रिपोर्ट पेश की जाएगी। उन्होंने ही सीआइडी की एसआइटी गठित की थी, जबकि सरकार ने इससे पहले पुलिस की एसआइटी गठित की थी।

 

23 जून को मंडी के तत्कालीन एसपी प्रेम ठाकुर ने कोर्ट में शपथपत्र दायर किया था। इसमें कहा है कि होशियार पांच जून से लापता था। पुलिस ने सर्च पार्टी गठित की। इसमें कुथेड़ पंचायत के प्रधान, उपप्रधान जीतराम शामिल थे। सात जून को सुबह 10 बजकर 36 मिनट पर रेंज अधिकारी तेज राम शर्मा, वनरक्षक अंकित कुमार ने करसोग थाने में रिपोर्ट की। पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

 

वन विभाग ने ‘ह्यू एंड क्राई’ नोटिस जारी किया। नौ जून को गडरिये ने वन अधिकारी को सूचना दी कि गरजब के जंगल में एक व्यक्ति देवदार के पेड़ से उलटा लटका है। इसके आधार पर होशियार सिंह के चाचा परस राम भी पुलिस के साथ मौके पर गए। पुलिस ने मौके पर कपड़े और बैग बरामद किया, लेकिन वहां बैग की तलाशी नहीं की।

 

घटनास्थल पर हालातों को देखकर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया। फॉरेंसिक टीम भी मंडी से मौके पर बुलाई। अगले दिन बैग की तलाशी की। इसमें हैमर इन्सेक्टीसाइड (जहर) और सुसाइड डायरी बरामद हुई। इसमें घनश्याम दास, हेतराम, अनिल कुमार , लोभ सिंह, तेज सिंह के नाम लिखे थे। पुलिस ने एक दिन बाद ही धारा बदल दी। दफा 302 का मामला 306 यानी आत्महत्या के लिए विवश करने में तबदील कर दिया।

 

इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। पहले दिन ही बैग की तलाशी ली होती तो फिर इसकी नौबत न आती। अब यही लापरवाही सीबीआई जांच में भारी पड़ सकती है।

 

इस बीच सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। जल्द ही जांच टीम घटनास्थल का दौरा करेगी। गिरफ्तार आरोपियों, पुलिस, सीआइडी के अधिकारियों से भी पूछताछ होगी। पुलिस ने आत्महत्या को लेकर घनश्याम, हेतराम, अनिल कुमार, लोभ सिंह, तेज सिंह, गिरधारी लाल को गिरफ्तार किया था।

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