जल संकट के पांच दिन बाद जागे IPH मिनिस्टर पहले कहां थे?

शिमला।। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पानी की कमी को लेकर जब हालात बेकाबू थे, उस समय आईपीएच मिनिस्टर महेंद्र सिंह ठाकुर का कोई मूवमेंट या मीडिया में कोई बयान तक देखने को नहीं मिला। मगर जब हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सख्ती बरती, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने खुद कमान संभालकर पानी की स्थिति बेहतर करने का प्लान बनाया, उसके बाद महेंद्र सिंह ठाकुर सार्वजनिक रूप से नजर आए हैं। उस समय, जब शिमला में पानी की स्थिति ठीक तो नहीं, मगर पहले से थोड़ी बेहतर होना शुरू हो गई है।

शिमला नगर निगम जब पानी का संकट सुलझाने में नाकाम रही थी तो सबकी निगाहें हिमाचल सरकार के आईपीएच विभाग की तरफ टिकी हुई थीं, मगर जानकारी मिली है कि वह पांच दिन तक शिमला में ही नहीं थे, वह कल यानी मंगलवार को राजधानी पहुंचे।

उम्मीद थी कि मंत्री पद संभालने के बाद ही टैंकों की सफाई सही से न होने को लेकर अधिकारियों को सस्पेंड कर देने वाले ‘तेज़-तर्रार’ आईपीएच मिनिस्टर यहां भी कमान संभालेंगे। मगर हालात बद से बदतर होते चले गए। आलम यह था कि हाई कोर्ट को जल संकट का संज्ञान लेना पड़ा और मुख्यमंत्री तक को खुद वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठकर प्लान बनाना पड़ा।

शिमला को तीन जोन में बांटकर बारी-बारी से पानी की आपूर्ति शुरू की गई है। मगर मंगलवार को कुछ इलाकों में पानी की स्थिति ठीक नहीं हुई तो लोगों ने सचिवालय के पास आकर नारेबाजी की। मंगलवार को ही आईपीएच मिनिस्टर कुसुंपटी, न्यू शिमला के सेक्टर चार, डीएवी स्कूल से लेकर बीसीएस तक पैदल घूमकर लोगों से पूछते रहे कि पानी है या नहीं।

खास बात यह है कि इन इलाकों में पानी की आपूर्ति कर दी गई थी और मंत्री की यह कवायद अपनी छवि बनाने की कोशिश ज्यादा प्रतीत हो रही थी। इसीलिए आज मंत्री गुम्मा चले गए हैं, जहां से शिमला के लिए पानी सप्लाई होता है।

अब, जब सारी योजना बन चुकी है, मंत्री ने कल सामने आते हुए कहा- ऐसे लोगों के कनेक्शन काटने के लिए कहा गया है जिन्हें स्टोरेज टैंक से पहले ही पाइपलाइन से पानी के कनेक्शन दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग खुद भी रोज नहा रहे हैं और कुत्तों को भी नहला रहे हैं जबकि आम जनता पानी को तरस रही है।

बहरहाल, शिमला में अभी भी कई इलाकों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। मगर मंत्री जी ने उन इलाकों का दौरा नहीं किया, जहां पानी नहीं पहुंचा था। सवाल ये भी उठ रहे हैं कि जब जल संकट चरम पर था, तब वह शिमला में क्यों नहीं थे और अब, जबकि पूरी योजनाएं बन चुकी हैं, तब आकर दौरा करने और अधिकारियों को निर्देश देने का क्या मतलब है।

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