गुड़िया केस: नकाबपोश संदिग्ध को देखकर आपा खोते दिखे लोग

क्राइम सीन रीक्रिएट किया गया। (File Photo)

शिमला।। हिमाचल प्रदेश को कभी भी न भुलाया जा सकने वाला जख्म देने वाले कोटखाई रेप ऐंड मर्डर केस से जल्द ही पर्दा उठने जा रहा है। कल यानी सोमवार को सीबीआई ने एक संदिग्ध को कोटखाई में घुमाया। कम हाइट वाले इस शख्स के चेहरे पर सीबीआई ने नकाब डाला हुआ था। दिन भर उसे उन जगहों पर ले जाया गया, जिनसे गुड़िया केस के तार जुड़े हो सकते हैं। इस दौरान जुटी भीड़ यही चर्चा करती रही कि नकाब के पीछे आखिर कौन है।

पढ़ें- आरोपी को घटनास्थल लेकर आई सीबीआई

बता दें कि अभी तक को जानकारियां सार्वजनिक हुई हैं, उनके मुताबिक यह संदिग्ध मंडी जिले का है और उसकी उम्र लगभग 25 साल है। यह यहां पर लकड़ी चरानी के तौर पर काम करता था और केस सामने आने के बाद ही लापता था। जब घटनास्थल पर मौजूद साइंटिफिक सबूत पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपियों के सैंपलों से मैच नहीं हुए थे, तब सीबीआई ने अलग ऐंगल से सोचना शुरू किया था। इसके बाद ही इस संदिग्ध पर ध्यान गया था, जो घटना के बाद से लापता था।

सीबीआई ने इसे पकड़ा और जब साइंटिफिक सबूतों के आधार पर ऐसे संकेत मिले कि इस घटना में वह शामिल हो सकता है, तब उसने पूछताछ शुरू की। हिरासत में लेने के बाद सीबीआई ने पहले दिल्ली में पूछताछ की और फिर इसे शिमला ले आई। इसी कड़ी में सोमवार को वह दांदी के जंगल में ले गई।

कड़ी सुरक्षा
गुड़िया केस को लेकर पूरे प्रदेश में उबाल था और खासकर कोटखाई क्षेत्र में तो प्रदर्शन बेकाबू हो गए थे। जब लोगों को पता चला कि सीबीआई यहां किसी संदिग्ध को निशानदेही के लिए लाई है तो लोग बेकाबू हो गए। कुछ अपना आपा खोते नजर आए तो कुछ चाह रहे थे कि संदिग्ध के चेहरे से नकाब हटा दिया जाए।

मगर सीबीआई ने पहले ही भांप लिया था कि इस तरह के हालात पैदा हो सकते हैं। इसलिए पुलिस के 50 से ज्यादा हथियारबंद जवान तैनात थे। उन्हें लोगों को नियंत्रण में रखने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। बीच में तो ऐसी स्थिति भी आई कि सीबीआई के एक अधिकारी को जनता को समझाना पड़ा। बहुत से लोग सीबीआई के अधिकारियों से भी मिलना चाहते थे।

FILE PIC (Courtesy: IE)

कौन था शामिल?
इस दौरान संदिग्ध को नेपाली मजदूरों के डेरे में भी ले जाया गया, जहां उसकी पहचान कराई गई। अब 25 अप्रैल को सीबीआई इस मामले में हाई कोर्ट में पेश होगी और उम्मीद है कि उस दिन और भी जानकारियां सामने आएंगी। ये भी साफ होगा कि इस घटनाक्रम में पकड़े गए आरोपी के साथ और कौन शामिल था। वैसे अभी यह भी साफ नहीं हो पाया कि पकड़ा गया शख्स मुख्य आरोपी है या फिर वह गवाह है।

उम्मीद है कि 25 अप्रैल यानी कल यह पता चल पाएगा कि गुड़िया के साथ दुराचार वहीं हुआ था, जहां उसका शव मिला ता या कहीं और।

पुलिस से नाराज लोगों ने पूरे प्रदेश में प्रदर्शन किए थे।

क्या है गुड़िया केस?
पिछले साल चार जुलाई को एक छात्रा स्कूल से लौटते समय लापता हो गई थी। परिजनों को आशंका थी कि जंगल से आते हुए कहीं पर किसी जानवर की शिकार न हो गई थी। इसके बाद 6 जुलाई को कोटखाई के जंगल में उसका शव निर्वस्त्र हालत में मिला था।

पुलिस ने गैंगरेप और हत्या का मामला दर्ज किया था और छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। इनमें राजेंद्र सिंह उर्फ राजू, हलाइला गांव, सुभाष बिस्ट (42) गढ़वाल, सूरज सिंह (29) और लोकजन उर्फ छोटू (19) नेपाल और दीपक (38) पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार से थे।

बाद में इन संदिग्धों में से एक सूरज की कोटखाई थाने में 18 जुलाई की रात को कथित रूप से हत्या कर दी गई थी। पुलिस का कहना था कि राजू की सूरज से बहस हुई और उसके बाद राजू ने उसकी हत्या कर दी। मगर जब इसपर सवाल उठे और सीबीआई जांच शुरू हुई तो पुलिस वालों की थ्योरी प्रारंभिक जांच में बंद पाई गई। अब आईजी और एसपी समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हिरासत में मौत के मामले में न्यायिक हिरासत में बंद हैं।

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