हिमाचल की चारों लोकसभा सीटों पर कांग्रेस में इन नामों पर हो सकती है चर्चा

विक्रमादित्य सिंह (दाएं) अपने पिता वीरभद्र सिंह के साथ (File Photo)

इन हिमाचल डेस्क।। जो कांग्रेस पहले हौसला खोती हुई नजर आ रही थी, उसे गुजरात विधानसभा में बेहतर प्रदर्शन और राजस्थान उपचुनावों में मिली जीत से एक नई शक्ति का संचार होता नजर आ रहा है। राहुल गांधी भी पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद ज्यादा सक्रिय नजर आने लगे है। राहुल गाँधी कांग्रेस को अब अपने फॉर्मूले चलाना चाहते है जिससे वर्ग नाराज है तो एक वर्ग खुश भी है। नाराज वर्ग में अधिकतर उम्रदराज नेता हैं जिन्हे राहुल गांधी अब ज्यादा तवज्जो देने के मूड में नहीं लग रहे हैं। पिछले दिनों उपेक्षा से नाराज इन नेताओं से सोनिया के सामने भी अपने दर्द का इजहार किया पर सोनिया ने दो टूक कह दिया की राहुल ही अब कांग्रेस के सर्वमान्य नेता हैं और मेरे भी।

राहुल गांधी ने भी 2019 चुनावों के लिए अपनी टीम को काम पर लगा दिया है। अभी से लोकसभा के लिए काबिल जिताऊ कैंडिटेडस की लिस्ट राज्य इकाईयों को आलाकमान को भेजने को कह दिया गया है। चर्चा है कि हिमाचल से भी प्राथमिक रूप से विचार के लिए हर सीट से नाम भेजे जा चुके हैं। इन नामों पर टीम राहुल फिर थर्ड पार्टी से फील्ड फीडबैक लेगी कि किसके जीतने की कितनी संभावना है। यही प्रक्रिया लगभग हर राज्य में अमल में लाई जा रही है।

हिमाचल में क्या हैं हालात
हिमाचल प्रदेश की बात करें तो फिलहाल प्रदेश की 4 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस कहीं नहीं है। और जिस तरह से बीजेपी अभी अभी सत्ता में आई है उस तरह से आगे भी कांग्रेस की राहें जमीन पर इतनी आसान नहीं हैं। टिकट आबंटन में भी सब कुछ वीरभद्र सिंह के हाथ में रहे यह होता हुआ इस बार नहीं दिख रहा है। सुक्खू पर राहुल का विश्वास उसी समय समझ आ गया था जब लाख कोशिश के बाद भी वीरभद्र सिंह सुक्खू को अध्यक्ष पद से नहीं हटवा पाए थे।

मंडी लोकसभा सीट
हिमाचल में उम्मीदवारों पर विचार के लिए कांग्रेस द्वारा प्रथम चरण में जिन नामों को आलाकमान को भेजे जाने की चर्चा है, उनमें अनुभव और राहुल गांधी फॉर्मूले का पूरा हिसाब रखा गया है। प्रदेश की सबसे बड़ी लोकसभा सीट की बात की जाए, मंडी में कांग्रेस की हालात इस बार दयनीय है। विधानसभा चुनावों में कुल्लू में मात्र एक सीट पर कांग्रेस सत्ता में है तो रामपुर से दूसरी संजीवनी मिली है। बाकी सीटों पर भाजपा विधायक सत्ता में हैं। वहीँ जोगिन्दर नगर से भी निर्दलीय प्रकाश राणा ने बीजेपी को समर्थन दे दिया है।

कांग्रेस ने इसी किलेबंदी को देखते हुए संभावितों में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। वीरभद्र सिंह विपरीत परिस्थितियों में भी इस सीट से जीतते आए हैं। परन्तु उम्र तकाजे और दिनों दिन कोर्ट मामलों में फंसे रहने के कारण उनके नाम पर संशय ही है। इसी कड़ी वरिष्ठता को देखते हुए पूर्व मंत्रीं कौल सिंह का नाम भी आगे आ सकता है। राजनीति से संन्यास लेकर अंतिम विधानसभा चुनाव बात कहने वाले कौल सिंह अभी भी हटते हुए नहीं दिख रहे हैं। एक खेमा उन्हें आज भी प्रतियोगिता में रखना चाहता है, शायद इसीलिए उनके नाम पर विचार हो सकता है। वहीँ राहुल गांधी के फॉर्मूले को तवज्जो देते हुए पूर्व मंत्री राज कृष्ण गौड़ के बेटे भुवनेश्वर गौड़ का नाम भी इस सूची में बताया जा रहा है, जो जिला कुल्लू से सबंध रखते हैं।

कांगड़ा लोकसभा सीट
सबसे ज्यादा आबादी वाली कांगड़ा लोकसभा में भी कांग्रेस अच्छी स्थिति में नहीं है। यहाँ की 17 सीटों में कांग्रेस मात्र 3 सीट निकाल पायी है। कांग्रेस के कई दिग्गजों को हार करना पड़ा है। यहाँ से चर्चा के लिए गए नामों में पूर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली का नाम सबसे ऊपर भेजे जाने की चर्चा है। चम्बा से आशा कुमारी का नाम शामिल बताया जा रहा है। हालाँकि कोर्ट मामलों में उलझने के कारण आशाकुमारी के नाम पर क्या फैसला आता है, यह अभी नहीं कहा जा सकता दूसरा, वह चार विधानसभा सीटों वाले चम्बा ज़िले से आती हैं जबकि कांगड़ा में यह आंकड़ा 13 का है।

यंहा भी टीम राहुल निर्देशों अनुसार जो युवा नाम आगे भेजे जाने की चर्चा है, वह नूरपुर क्षेत्र से सबंध रखने वाले मनोज पठानिया का है। पठानिया टीम राहुल में अरसे से जुड़े हैं साथ ही अभी मध्य प्रदेश का प्रभार ऑब्ज़र्वर के रूप में देख रहे हैं। राजपूत वोट देखते हुए इस नाम को आगे किए जाने के कयास हैं।

शिमला लोकसभा सीट
शिमला सीट कभी कांग्रेस की परम्परागत सीट रहा करती थी परन्तु दो बार से बीजेपी यहां लगातार जीत रही है। रिजर्व सीट होने के कारण दोनों पार्टियों के ज्यादा ऑप्शन नहीं हैं, परन्तु जो भी नाम भेजे जाने की चर्चा है, उनमें कसौली से विनोद सुल्तानपुरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। हालाँकि विनोद लगातार दो चुनाव हार चुके हैं लेकिन मार्जन बहुत ही नजदीकी रहा है। पहला चुनाव 24 वोट और दूसरा चुनाव मात्र 200 वोटों हारे हैं। उन्हें राहुल गांधी के गुड बुक्स में माना जाता है।

इसके अलावा शिमला सीट से अन्य नामों में एक बार फिर पूर्व मंत्री गंगू राम मुसाफिर का नाम सिरमौर से आगे किए जाने की चर्चा है। वहीं सीमित विकल्पों के चलते एक बार फिर सोलन से विधायक धनीराम शांडिल्य को भी लिस्ट में रखे जाने की खबर है।

हमीरपुर लोकसभा सीट
हमीरपुर सीट का किला कांग्रेस अर्से से नहीं भेद पाई है परन्तु इस बार के विधानसभा चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के साथ साथ भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती, दिग्गज नेता रविंदर सिंह रवि की हार से कांग्रेस की कुछ उम्मीदें बढ़ीं हैं। इस सीट से कांग्रेस ने अरसे बाद नीति में बदलाव करते हुए बिलासपुर की तरफ रुख किया है और ऐसी चर्चा है कि राहुल टीम के क्लोज़ माने जाने वाले राजेश धर्माणी का नाम प्राथमिक संभावितों के लिए भेजा है। हालंकि धर्माणी विधानसभा चुनाव बड़े मार्जन से हारे हैं मगर प्रदेशाध्यक्ष से क्लोज़ होने और बिलासपुर से होने का उन्हें फायदा मिला सकता है।

इसी कड़ी में दिग्गज नेता मुकेश अग्निहोत्री का नाम भी चर्चा के लिए आगे किए जाने की खबर है, जो लगातार ऊना जिला की हरोली सीट से जीतते हुए आ रहे हैं और वर्तमान में विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता हैं। तीसरे नाम पर एक बार फिर राजिंदर राणा की चर्चा है, जिन्होंने हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के सिटिंग उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल को हराकर चर्चा बटोरी है।

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